
जयपुर। राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर पीठ ने लेखाधिकारी पद पर की गई विवादित पदोन्नतियों को लेकर दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित किया है। न्यायमूर्ति अशोक कुमार जैन ने राज्य सरकार की ओर से दी गई अंडरटेकिंग को रिकॉर्ड में लेते हुए निर्देश दिए हैं कि अंतिम निर्णय तक पदोन्नत अधिकारियों की स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 12 जनवरी 2026 को होगी। यह आदेश प्रेम प्रकाश आर्य सहित 10 वरिष्ठ कर्मचारियों द्वारा दायर रिट याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान पारित किया गया। याचिकाकर्ता वर्ष 1989 बैच के कर्मचारी हैं, जिनकी नियुक्ति वर्ष 1991 में कनिष्ठ लेखाकार पद पर हुई थी। इसके पश्चात वे वर्ष 2008-09 में लेखाकार/सहायक लेखाधिकारी-II तथा वर्ष 2014-15 में सहायक लेखाधिकारी-I के पद पर पदोन्नत हुए। याचिका में कहा गया है कि इसके बावजूद विभाग द्वारा 19 सितंबर 2025 को जारी आदेश के माध्यम से उनसे 4 से 5 वर्ष कनिष्ठ कर्मचारियों को लेखाधिकारी पद पर पदोन्नत कर दिया गया, जबकि याचिकाकर्ता संबंधित वरिष्ठता सूची में उनसे स्पष्ट रूप से ऊपर हैं। यह वरिष्ठता सूची लंबे समय से अप्रतिवादित एवं अंतिम रूप से लागू है।

वरिष्ठता सिद्धांतों के उल्लंघन का आरोप
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता तनवीर अहमद ने न्यायालय को बताया कि जब याचिकाकर्ता वर्ष 2008-09 में ही कैडर में पदोन्नत हो चुके थे, उस समय निजी प्रतिवादी कैडर में शामिल भी नहीं थे। इसके बावजूद वरिष्ठों की अनदेखी कर कनिष्ठों को पदोन्नति देना सेवा नियमों, विभागीय पदोन्नति नीति तथा संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है।
अधिवक्ता ने यह भी दलील दी कि यह मामला वित्तीय लाभ का नहीं, बल्कि सम्मान, पद और वैधानिक वरिष्ठता अधिकार से जुड़ा है। यदि कनिष्ठों की पदोन्नति बनी रहती है तो वरिष्ठ कर्मचारियों को उन्हीं के अधीन कार्य करना पड़ेगा, जो सेवा न्याय के मूल सिद्धांतों के विपरीत है।
अंतिम निर्णय तक कोई नई स्थिति नहीं बनेगी
मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायमूर्ति अशोक कुमार जैन ने अंतरिम स्तर पर स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय तक यथा-स्थिति बनी रहेगी और पदोन्नत अधिकारियों की स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। न्यायालय ने कहा कि प्रकरण की विस्तार से सुनवाई अगली तिथि पर की जाएगी।

