
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में इन दिनों मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है, जिससे लोगों को जहां एक ओर गर्मी से राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर जलभराव, ट्रैफिक जाम और असुविधाओं का सामना भी करना पड़ रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, आगामी एक सप्ताह यानी 28 अगस्त से 2 सितंबर तक दिल्ली-एनसीआर में लगातार बारिश और गरज-चमक का सिलसिला जारी रह सकता है। इस अनवरत बारिश के पीछे न केवल सक्रिय मानसूनी हवाएं जिम्मेदार हैं, बल्कि इस बार मौसम में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) का भी महत्वपूर्ण योगदान है, जिसने वर्षा को अधिक व्यापक और तीव्र बना दिया है।
मानसून और पश्चिमी विक्षोभ का मिलन
भारतीय उपमहाद्वीप में वर्षा सामान्यतः दक्षिण-पश्चिम मानसून के कारण होती है, जो अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नम हवाओं को लेकर आता है। यह हवाएं जब उत्तर भारत के मैदानों से टकराती हैं, तो वर्षा का कारण बनती हैं। लेकिन इस बार मानसून की सक्रियता के साथ-साथ पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय हो गया है, जो सामान्यत: सर्दियों में हिमालय क्षेत्र में बर्फबारी और बारिश के लिए जिम्मेदार होता है।
वर्तमान परिदृश्य में पश्चिमी विक्षोभ के कारण वातावरण में अस्थिरता बढ़ गई है। नमी से भरे बादलों के साथ जब यह टकराते हैं, तो “थंडरस्टॉर्म विद रेन” (गरज के साथ बारिश) की स्थिति बन जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यही कारण है कि दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों में इस बार बारिश का पैटर्न सामान्य मानसून से थोड़ा अलग नजर आ रहा है।
मौसम का पूर्वानुमान: तापमान और उमस
आईएमडी के मुताबिक, अगले कुछ दिनों तक अधिकतम तापमान 31 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा। हालांकि तापमान में गिरावट होगी, लेकिन ह्यूमिडिटी (आर्द्रता) का स्तर 95 से 99 प्रतिशत तक पहुंच सकता है, जिससे उमस बनी रहेगी। यह स्थिति खासकर उन लोगों के लिए असुविधाजनक हो सकती है, जो बाहर यात्रा करते हैं या लंबे समय तक खुले वातावरण में काम करते हैं।
बिना चेतावनी के बदलता मौसम
दिल्ली-एनसीआर में इन दिनों मौसम के उतार-चढ़ाव की एक खास बात यह है कि बिना किसी औपचारिक चेतावनी के भी अचानक बारिश, तेज हवा, गरज और बिजली गिरने की घटनाएं हो रही हैं। मौसम विभाग ने अभी तक कोई “ऑरेंज” या “रेड अलर्ट” जारी नहीं किया है, लेकिन स्थानीय स्तर पर परिवर्तनशील मौसम ने जनजीवन को प्रभावित किया है।
यह बदलाव न केवल लोगों की दिनचर्या पर असर डाल रहा है, बल्कि सड़क यातायात, सार्वजनिक परिवहन, स्कूल, कार्यालय और बाजार व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। कई बार सुबह साफ आसमान होता है, लेकिन दोपहर या शाम को अचानक तेज बारिश शुरू हो जाती है, जिससे आम जनता के लिए तैयार रहना मुश्किल हो जाता है।
बारिश के फायदे और परेशानियां
बारिश से तापमान में गिरावट आई है, जिससे लोगों को गर्मी और लू से राहत मिली है। खासकर पिछले कुछ सप्ताहों से जो उमसभरी गर्मी लोगों को परेशान कर रही थी, उसमें अब काफी हद तक कमी आई है। घरों में कूलर और एसी की आवश्यकता कम हुई है और पर्यावरण में एक ताजगी महसूस की जा रही है।
लेकिन दूसरी ओर, लगातार बारिश के कारण जलभराव की समस्या ने फिर से लोगों को परेशान किया है। एनसीआर के कई इलाकों में जैसे नोएडा सेक्टर 62, गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन, गुरुग्राम के सुभाष चौक और दिल्ली के आईटीओ, लक्ष्मी नगर, कीर्ति नगर आदि जगहों पर सड़कें पानी में डूबी हुई नजर आईं। इससे ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रही और लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में घंटों लग गए।

सरकारी प्रयास और चेतावनियां
स्थानीय प्रशासन की ओर से नगर निगमों और जल निकासी विभागों को अलर्ट किया गया है, ताकि बारिश के कारण होने वाले जलभराव और सीवर ओवरफ्लो की समस्या से निपटा जा सके। पंपों की तैनाती, मैनहोल की सफाई और यातायात नियंत्रण जैसी व्यवस्थाएं की जा रही हैं, लेकिन तीव्र और लगातार बारिश इन प्रयासों को भी चुनौती दे रही है।
आईएमडी और राज्य सरकार ने आम नागरिकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और बीमार व्यक्तियों को अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने की अपील की गई है। जिन इलाकों में जलभराव अधिक है, वहां से गुजरते समय सतर्कता रखने और बिजली के खंभों व खुले तारों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है।
मानसून की चाल पर विशेषज्ञों की राय
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह बारिश मॉनसून के अंतिम चरण की ओर इशारा कर रही है, लेकिन यह चरण काफी सक्रिय और तीव्र हो सकता है। सितंबर के पहले सप्ताह तक उत्तर भारत में मानसून की गतिविधियां जारी रहेंगी। इसके बाद धीरे-धीरे यह दक्षिण की ओर सिमटना शुरू करेगा और अक्टूबर तक समाप्ति की ओर बढ़ेगा।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण अब मौसम के पैटर्न में स्पष्ट परिवर्तन दिखाई देने लगे हैं। बारिश की तीव्रता, स्थानिकता और समयसीमा में पहले की तुलना में भिन्नता देखी जा रही है। यही कारण है कि एक ही क्षेत्र में कहीं तेज बारिश होती है और कहीं सूखा रहता है।
आम नागरिकों के लिए सुझाव
इस तरह की बारिश के दौरान आम जनता के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं:
- छाता या रेनकोट साथ रखें।
- जलभराव वाले रास्तों से बचें, क्योंकि इनमें गड्ढे या खुले मैनहोल हो सकते हैं।
- वाहन सावधानी से चलाएं और सड़क पर फिसलन से बचने के लिए धीमी गति रखें।
- बिजली गिरने की संभावना के दौरान खुले मैदान या पेड़ के नीचे खड़े न हों।
- बच्चों को बाहर खेलने से रोकें और घर के अंदर सुरक्षित स्थानों पर रखें।
निष्कर्ष
एनसीआर में मौसम का यह बदलता मिजाज एक ओर जहां लोगों को गर्मी से राहत दे रहा है, वहीं दूसरी ओर यह बारिश नई चुनौतियां भी लेकर आ रही है। मानसूनी हवाओं और पश्चिमी विक्षोभ की संयुक्त सक्रियता ने बारिश को न केवल व्यापक बल्कि अप्रत्याशित भी बना दिया है। इस स्थिति में प्रशासन और नागरिकों — दोनों को सजग रहना जरूरी है। मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए आम लोगों को अलर्ट रहने, पूर्व योजना बनाने और अत्यधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। आने वाले दिनों में यदि यही स्थिति बनी रही, तो यह वर्षा क्षेत्र में जल स्तर बढ़ाने और पर्यावरण के लिए लाभकारी तो होगी, लेकिन शहरी व्यवस्था की परीक्षा भी लेगी। मौसम विभाग की सलाह का पालन करना और प्रशासनिक निर्देशों के अनुरूप कार्य करना सभी की सुरक्षा और सुविधा के लिए अनिवार्य है।

