उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला : घरेलू पाइप रिसाव से क्षति पर इंश्योरेंस कंपनी को देना होगा 3.86 लाख का मुआवजा

उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला : घरेलू पाइप रिसाव से क्षति पर इंश्योरेंस कंपनी को देना होगा 3.86 लाख का मुआवजा

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उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला : घरेलू पाइप रिसाव से क्षति पर इंश्योरेंस कंपनी को देना होगा 3.86 लाख का मुआवजा
उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला : घरेलू पाइप रिसाव से क्षति पर इंश्योरेंस कंपनी को देना होगा 3.86 लाख का मुआवजा

चंडीगढ़। बीमा दावों में ‘एक्सक्लूजन क्लॉज’ (अपवादों) की आड़ लेकर भुगतान से बचने वाली कंपनियों को चंडीगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कड़ा संदेश दिया है। आयोग ने लिबर्टी जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड को आदेश दिया है कि वह सेक्टर-14 निवासी धीरज खन्ना को उनके घर में आंतरिक पाइप रिसाव से हुए नुकसान के लिए 3,86,259 रुपये का भुगतान करे। इसके साथ ही आयोग ने मानसिक पीड़ा के लिए 20,000 रुपये और कानूनी खर्च के रूप में 15,000 रुपये देने का भी निर्देश दिया है। अपीलकर्ता धीरज खन्ना ने आदित्य बिड़ला हाउसिंग फाइनेंस से होम लोन लेते समय लिबर्टी जनरल इंश्योरेंस की ‘हाउस प्रोटेक्शन पॉलिसी’ ली थी। घर में शिफ्ट होने के कुछ समय बाद ही छिपी हुई प्लंबिंग पाइपों में रिसाव के कारण फर्श धंस गया और छत का पेंट व पीओपी उखड़ने लगा। सर्वेयर ने 4.15 लाख रुपये का नुकसान आंका, लेकिन बीमा कंपनी ने इसे ‘सीपेज’ (सीलन) बताते हुए दावा खारिज कर दिया। आयोग की कड़ी टिप्पणी: “सीपेज और रिसाव एक नहीं”
न्यायमूर्ति राज शेखर अत्री (अध्यक्ष) और श्री प्रीतिंदर सिंह (सदस्य) की पीठ ने जिला आयोग के पुराने फैसले को पलटते हुए कहा:
तकनीकी व्याख्या गलत: आंतरिक पाइप फटने या रिसाव को ‘सीलन’ बताकर दावा खारिज करना “अति-तकनीकी” और अनुचित है।
सबूत का बोझ कंपनी पर: यह साबित करना कंपनी का काम था कि नुकसान पॉलिसी के दायरे से बाहर है, जिसमें वह विफल रही।

उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला : घरेलू पाइप रिसाव से क्षति पर इंश्योरेंस कंपनी को देना होगा 3.86 लाख का मुआवजा
उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला : घरेलू पाइप रिसाव से क्षति पर इंश्योरेंस कंपनी को देना होगा 3.86 लाख का मुआवजा


दृश्य फटना जरूरी नहीं: पॉलिसी में यह कहीं नहीं लिखा कि पाइप का फटना बाहर से दिखना ही चाहिए। छिपी पाइपों का रिसाव भी कवरेज के दायरे में आता है।
चोरी का दावा हुआ खारिज
आयोग ने मुख्य दावे को मंजूर किया, लेकिन चोरी की एक अन्य घटना के दावे को खारिज कर दिया। आयोग ने पाया कि अपीलकर्ता ने पुलिस और बीमा कंपनी को घटना की सूचना देने में काफी देरी की थी, जिससे जांच प्रभावित हुई।
पॉलिसीधारकों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
सख्त व्याख्या: बीमा कंपनियां अपनी मर्जी से एक्सक्लूजन क्लॉज का दायरा नहीं बढ़ा सकतीं।
मनमानी कटौती पर रोक: आयोग ने सर्वेयर द्वारा की गई 30% की अतिरिक्त कटौती को ‘मनमाना’ बताते हुए रद्द कर दिया।
उपभोक्ता संरक्षण: यह आदेश उन लाखों लोगों के लिए नजीर है जिन्होंने होम लोन के साथ बंडल इंश्योरेंस लिया हुआ है।
लिबर्टी जनरल इंश्योरेंस को आदेश की प्रति मिलने के 30 दिनों के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया गया है। देरी की स्थिति में कंपनी को 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।

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