
उदयपुर: खेरवाड़ा में दर्दनाक सड़क हादसा, नाले में गिरी कार, तीन की मौत, दो बचे
राजस्थान के उदयपुर जिले से एक बेहद दुखद और दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। सोमवार देर रात खेरवाड़ा थाना क्षेत्र में एक कार हादसे का शिकार हो गई, जिसमें 5 लोग सवार थे। कार खेरवाड़ा से बायड़ी की ओर जा रही थी, जब अचानक वह अनियंत्रित होकर लकोड़ा गांव के पास एक उफनते नाले में जा गिरी। इस हादसे में तीन लोगों की जान चली गई, जबकि दो लोगों ने कार का शीशा तोड़कर किसी तरह अपनी जान बचा ली।
कैसे हुआ हादसा
यह हादसा सोमवार रात करीब 10:30 बजे हुआ। खेरवाड़ा से बायड़ी की ओर जा रही एक कार तेज बारिश के बीच अचानक अनियंत्रित हो गई और लकोड़ा गांव के पास एक गहरे नाले में जा समाई। नाले में उस वक्त पानी का बहाव बहुत तेज था। कार सीधे पानी के अंदर चली गई और उसमें सवार लोग फंस गए।
दो लोगों ने दिखाई हिम्मत, शीशा तोड़कर बचाई जान
कार में कुल 5 लोग सवार थे। जैसे ही कार पानी में गिरी, दो लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए तुरंत कार्रवाई की। उन्होंने कार का शीशा तोड़ा और किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहे। दोनों की किस्मत अच्छी थी कि वे तेज बहाव से खुद को बचा पाए और बाहर निकलकर गांववालों को सूचना दी। लेकिन बाकी तीन लोग कार के अंदर ही फंसे रह गए और तेज बहाव में डूब गए।
रातभर चला रेस्क्यू अभियान
हादसे की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस और नागरिक सुरक्षा विभाग की टीम मौके पर पहुंची। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उदयपुर से एसडीआरएफ (State Disaster Response Force) की टीम को भी बुलवाया गया। एसडीआरएफ की टीम रात करीब 12:30 बजे घटनास्थल पर पहुंची।
रेस्क्यू टीम ने लगभग एक घंटे की मशक्कत के बाद कार को पानी से बाहर निकाला। कार के भीतर दो युवकों के शव मिले, जिन्हें बाहर निकालकर तुरंत पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा गया। तीसरे युवक का शव हादसे के समय नहीं मिल पाया, जिसकी तलाश अगले दिन सुबह तक जारी रही।
बारिश बनी हादसे की बड़ी वजह
इस दर्दनाक हादसे की प्रमुख वजह लगातार हो रही भारी बारिश बताई जा रही है। उदयपुर और आसपास के इलाकों में पिछले तीन दिनों से लगातार मूसलधार बारिश हो रही है। नतीजतन, पहाड़ी इलाकों से बहकर आने वाले नदी-नाले उफान पर हैं। नालों में तेज बहाव के कारण सड़कें कई जगहों पर क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं और दृश्यता भी बहुत कम हो जाती है, जिससे हादसे की आशंका बढ़ जाती है।
खेरवाड़ा और बायड़ी के बीच की सड़क भी इसी बारिश से प्रभावित है। लकोड़ा गांव के पास जहां हादसा हुआ, वहां सड़क के किनारे कोई मजबूत सुरक्षा दीवार या संकेतक नहीं थे, जिससे चालक को खतरे का अंदाज़ा नहीं लग पाया और कार सीधे पानी में गिर गई।

प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे
जैसे ही हादसे की सूचना फैली, स्थानीय प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे। ऋषभदेव डिप्टी राजीव राहर और खेरवाड़ा एएसआई दिग्विजय सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर मौजूद रहे और पूरे रेस्क्यू अभियान की निगरानी करते रहे। साथ ही, स्थानीय लोगों को भी सतर्क किया गया और नाले के पास आवाजाही पर अस्थायी रोक लगा दी गई।
गांव में पसरा मातम का माहौल
लकोड़ा गांव और आसपास के इलाकों में इस हादसे के बाद शोक की लहर दौड़ गई है। जिन युवकों की मौत हुई, वे आसपास के ही गांवों के निवासी बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद उनके परिजन घटनास्थल पर पहुंचे तो माहौल बेहद गमगीन हो गया। हर किसी की आंखें नम थीं और किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि महज कुछ ही पलों में तीन जिंदगियां खत्म हो गईं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि लकोड़ा गांव के पास यह नाला बरसात में बेहद खतरनाक हो जाता है। पहले भी इस जगह पर छोटे-मोटे हादसे हो चुके हैं, लेकिन इस बार पानी का बहाव इतना तेज था कि पूरी कार बह गई और लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला।
बारिश के मौसम में सड़क सुरक्षा पर उठे सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर से बरसात के मौसम में सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कई ऐसे नाले और पुल हैं जो बरसात के मौसम में बेहद खतरनाक हो जाते हैं, लेकिन न तो इन जगहों पर कोई चेतावनी बोर्ड लगाए जाते हैं और न ही अस्थायी बैरियर। प्रशासन द्वारा समय रहते ऐसे संवेदनशील स्थानों की पहचान कर वहां सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
स्थानीय लोगों की प्रशासन से मांग
लकोड़ा और आसपास के ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि:
- हादसे वाली जगह पर मजबूत पुल या सुरंग बनाई जाए।
- बरसात के दिनों में ऐसे नालों के पास चेतावनी संकेत और पुलिस गश्त की व्यवस्था हो।
- स्कूल, कॉलेज और दफ्तर जाने वाले लोगों को समय-समय पर अलर्ट जारी किए जाएं।
- SDRF टीमों की संख्या और संसाधन बढ़ाए जाएं ताकि आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई हो सके।
निष्कर्ष
यह हादसा न सिर्फ तीन जिंदगियों को लील गया, बल्कि कई परिवारों को हमेशा के लिए ग़म दे गया। यह एक चेतावनी है कि हमें प्राकृतिक आपदाओं को हल्के में नहीं लेना चाहिए, खासकर बारिश के मौसम में जब नदी-नाले जानलेवा बन सकते हैं। प्रशासन, स्थानीय निकायों और नागरिकों को मिलकर काम करना होगा ताकि इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।
आप भी अगर बारिश में सफर कर रहे हैं, तो सतर्क रहें, अनजान रास्तों पर वाहन धीमा चलाएं, और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से बचें। आपकी सतर्कता ही आपकी और आपके प्रियजनों की जान बचा सकती है।

