
उदयपुर | शहर की आस्था का प्रमुख केंद्र और ‘उदयपुर की वैष्णोदेवी’ के नाम से प्रसिद्ध नीमच माता मंदिर जल्द ही नए रूप में नजर आएगा। पर्यटन विभाग ने मंदिर के जीर्णोद्वार और विकास कार्यों के लिए 49.42 लाख रुपए का बजट स्वीकृत किया है। यह राशि विभाग ने पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग को ट्रांसफर कर दी है, जिसके बाद मंदिर परिसर में कार्य जल्द शुरू होने की संभावना है। कहां खर्च होगा बजट? पर्यटन विभाग के अतिरिक्त निदेशक (विकास) आनंद कुमार त्रिपाठी द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, स्वीकृत राशि का उपयोग निम्न कार्यों में किया जाएगा— मंदिर के जीर्णोद्धार: 5.23 लाख रुपए, मंदिर की दीवार मरम्मत: 1.29 लाख रुपए, एमएस ग्रिल निर्माण: 2.99 लाख रुपए, मुख्य प्रवेश द्वार से नए फ्लोर और पाथवे निर्माण: 21.13 लाख रुपए, सीढ़ियों का जीर्णोद्धार: 14.43 लाख रुपए, टॉयलेट निर्माण/मरम्मत: 2.05 लाख रुपए, सीमेंट कुर्सियों की मरम्मत: 1.10 लाख रुपए।
इन कार्यों के पूरा होने के बाद मंदिर मार्ग और परिसर दोनों ही अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और आकर्षक रूप में दिखाई देंगे।
पहाड़ी मार्ग की खराब स्थिति और हादसे बने वजह

नीमच माता मंदिर पहुंचने का मार्ग फतहसागर झील किनारे देवाली से होकर जाता है। पिछले कुछ वर्षों से पैदल मार्ग और पहाड़ी हिस्सों की हालत जर्जर हो रही थी।पिछले वर्ष पहाड़ी पर रेलिंग के पास फोटो खींचते समय दीवार गिरने से छह पर्यटक घायल हो गए थे।
इस दुर्घटना के बाद मंदिर सेवक मयंक कुमावत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत और उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी को ज्ञापन देकर मंदिर की वास्तविक स्थिति से अवगत कराया था। इसके बाद देवस्थान विभाग ने जीर्णोद्धार के लिए विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर बजट में शामिल करवाया।
आस्था का केंद्र, अब नए स्वरूप की ओर
नीमच माता मंदिर उदयपुरवासियों की आस्था का एक प्रमुख केंद्र रहा है। नवरात्रों से लेकर रोज़मर्रा के दिनों तक यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। परिसर और मार्ग के बेहतर होने से श्रद्धालुओं की आवाजाही और सुरक्षा दोनों में सुधार होगा।

