आठवीं फेल ने यूट्यूब को बनाया 'गुरु', गाजियाबाद में फैक्ट्री खोलकर बनाने लगा नकली दवाएं

आठवीं फेल ने यूट्यूब को बनाया ‘गुरु’, गाजियाबाद में फैक्ट्री खोलकर बनाने लगा नकली दवाएं

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आठवीं फेल ने यूट्यूब को बनाया 'गुरु', गाजियाबाद में फैक्ट्री खोलकर बनाने लगा नकली दवाएं
आठवीं फेल ने यूट्यूब को बनाया ‘गुरु’, गाजियाबाद में फैक्ट्री खोलकर बनाने लगा नकली दवाएं

गाजियाबाद:

  • दिल्ली पुलिस की स्पेशल क्राइम ब्रांच ने रविवार को गाजियाबाद के लोनी स्थित मीरपुर इलाके में नकली मेडिकेटेड क्रीम बनाने की फैक्ट्री पर छापा मारकर करीब ढाई करोड़ रुपये की नकली बेटनोवेट-सी, क्लोप-जी और अन्य मेडिकेटेड स्क्रीन क्रीम बरामद की थीं। मौके से मशीनों समेत भारी मात्रा में पैकिंग सामग्री, तैयार-अधबना माल और रॉ मैटीरियल भी जब्त किया गया था। इस कार्रवाई में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनसे पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।
  • पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार दोनों आरोपी पढ़े-लिखे नहीं हैं, बल्कि आठवीं फेल हैं। इसके बावजूद उन्होंने यूट्यूब को अपना ‘गुरु’ बनाकर नकली दवाइयां और मेडिकेटेड क्रीम तैयार करना सीख लिया। मुख्य आरोपी गौरव भगत ने पूछताछ में बताया कि वह पहले एक दवा कंपनी की दवाइयां सप्लाई करता था। इसी दौरान उसे नकली दवाई बनाने का आइडिया मिला। उसने सबसे पहले इंटरनेट पर वीडियो देखकर बेटनोवेट-सी और क्लोप-जी जैसी क्रीम बनाने का तरीका सीखा। इसके बाद उसने अपने साथी के साथ मिलकर छह साल पहले इस योजना पर काम शुरू किया।
आठवीं फेल ने यूट्यूब को बनाया 'गुरु', गाजियाबाद में फैक्ट्री खोलकर बनाने लगा नकली दवाएं
आठवीं फेल ने यूट्यूब को बनाया ‘गुरु’, गाजियाबाद में फैक्ट्री खोलकर बनाने लगा नकली दवाएं

उन्होंने आनंद पर्वत इलाके से ये क्रीम तैयार करने के लिए

  • मशीनें खरीदीं और फैक्ट्री शुरू कर दी। नकली क्रीम बनाने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल ये अलग-अलग राज्यों से मंगाते थे। भगत ने पुलिस को बताया कि शुरुआत में उन्होंने पहले कुछ ही लोगों को कम मात्रा में मार्केट में सप्लाई दी, लेकिन कुछ ही समय में इसकी डिमांड बढ़ती चली गईं।
  • आज यूपी और दिल्ली के अलावा कई राज्यों में उनकी इन नकली मेडिकेटेड क्रीम की सप्लाई है। बीते तीन माह से ये यहां लोनी के मीरपुर में इस फैक्ट्री को चला रहे थे।जांच में यह भी सामने आया कि एक ट्यूब बनाने में महज डेढ़ से दो रुपये लागत आती थी। इन्हें होलसेल में 15 रुपये तक बेचा जाता था, जबकि बाजार में यही क्रीम 70 से 100 रुपये तक में बिकती थी। इसी अंतर से आरोपी मोटा मुनाफा कमा रहे थे और लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे थे।
  • स्पेशल क्राइम ब्रांच अधिकारियों का कहना है कि इस अवैध धंधे से दोनों आरोपियों ने करोड़ों की संपत्ति जुटाई है। अब उन संपत्तियों की जांच की जा रही है। जरूरत पड़ने पर आरोपियों की चल-अचल संपत्तियों को अटैच किया जाएगा। पुलिस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में लगातार पूछताछ कर रही है।

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