राजस्थान पुलिस का बड़ा एक्शन, रोहित गोदारा गैंग का शार्प शूटर और 27 मुकदमों का आरोपी गिरफ्तार
जयपुर। राजस्थान पुलिस ने संगठित अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) के जरिए अहम सफलता हासिल की है। जयपुर में की गई इस कार्रवाई के तहत सुजानगढ़ के चर्चित जेडीजे ज्वैलर्स फायरिंग कांड के मुख्य आरोपी कृष्ण सिंह को तीन साल बाद गिरफ्तार कर लिया गया है।
पुलिस के अनुसार, कृष्ण सिंह कुख्यात रोहित गोदारा और वीरेन्द्र चारण गिरोह का सक्रिय सदस्य रहा है। वह रंगदारी वसूली के लिए फायरिंग और हत्या जैसे गंभीर मामलों में लंबे समय से वांछित था और लगातार फरार चल रहा था। इस कार्रवाई में पुलिस ने एक और बड़े अपराधी लक्ष्मण सिंह को भी दबोचा है, जो 27 मुकदमों में शामिल आदतन अपराधी बताया जा रहा है।
राजस्थान पुलिस का बड़ा एक्शन, रोहित गोदारा गैंग का शार्प शूटर और 27 मुकदमों का आरोपी गिरफ्तार
वैशाली नगर और मकराना क्षेत्र की पुलिस के लिए वह लंबे समय से सिरदर्द बना हुआ था। एजीटीएफ की इस कार्रवाई को संगठित अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है। पुलिस अब दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ कर गिरोह के नेटवर्क और अन्य आपराधिक वारदातों के बारे में जानकारी जुटाने में लगी हुई है। इस पूरे अभियान का नेतृत्व अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक दिनेश एमएन के निर्देशन में किया गया। टीम प्रभारी प्लाटून कमांडेंट सोहन सिंह सहित पुलिस दल के अन्य सदस्यों ने भी इस ऑपरेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राजस्थान पुलिस ने इस कार्रवाई के जरिए साफ संदेश दिया है कि अपराधी चाहे कहीं भी छिपे हों, कानून के हाथ उनसे ज्यादा दूर नहीं हैं।
दिल्ली पुलिस ने 35 साल पुराने मर्डर केस का फरार दोषी दबोचा
नई दिल्ली । दिल्ली में अपराध शाखा की ईआर-II टीम ने एक लंबे समय से फरार चल रहे दोषी को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपी का नाम सुशील कुमार उर्फ गुड्डू बताया गया है, जो दिल्ली का रहने वाला है। यह मामला काफी पुराना है और 1989 में थाना कृष्णा नगर में दर्ज हत्या केस से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि 6-7 अक्टूबर 1989 की रात रामलीला कार्यक्रम के दौरान ज्ञान पार्क इलाके में एक झगड़ा हुआ था। इसी दौरान आरोपी ने विवेक नाम के व्यक्ति की गर्दन पर चाकू से वार किया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। इस घटना के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया था। शुरुआत में आरोपी को 1993 में जमानत मिल गई थी, लेकिन बाद में अदालत ने 11 अक्टूबर 2000 को उसे दोषी करार देते हुए उम्रकैद और जुर्माने की सजा सुनाई। बाद में दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2017 में उसकी अपील खारिज कर दी और सजा बरकरार रखी गई। इसके बावजूद आरोपी ने कोर्ट के आदेश के बाद आत्मसमर्पण नहीं किया और फरार हो गया। सालों तक यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया क्योंकि आरोपी का कोई ठोस पता या फोटो तक उपलब्ध नहीं था। ईआर-II
दिल्ली पुलिस ने 35 साल पुराने मर्डर केस का फरार दोषी दबोचा
क्राइम ब्रांच की टीम को जब वरिष्ठ अधिकारियों ने फरार दोषियों की सूची सौंपी, तब इस केस को गंभीरता से दोबारा खोला गया। टीम में एएसआई सतेंद्र, हेड कांस्टेबल प्रिंस, मोहित और राजीव शामिल थे, जिनका नेतृत्व इंस्पेक्टर सुनील कुंडु कर रहे थे और पूरी निगरानी एसीपी नरेंद्र सिंह के पास थी। टीम ने पुराने रिकॉर्ड खंगाले, कोर्ट की अपील से जुड़े डिजिटल दस्तावेजों का विश्लेषण किया और धीरे-धीरे कुछ अहम सुराग जुटाए। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी अब शाहदरा के वेस्ट ज्योति नगर इलाके में एक किराए के मकान में रह रहा था। पुख्ता जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने छापा मारकर उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे संबंधित अदालत में पेश किया गया और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई। अधिकारियों के अनुसार, यह केस इसलिए भी चुनौतीपूर्ण था क्योंकि घटना को 35 साल से ज्यादा हो चुके थे और समय के साथ सभी पुराने रिकॉर्ड लगभग खत्म हो चुके थे। इसके बावजूद टीम ने लगातार मेहनत और तकनीकी मदद से आरोपी तक पहुंच बनाई और उसे पकड़ने में कामयाबी हासिल की।
केरल: गर्मी बढ़ने से केरल में सांप के काटने की बढ़ी घटनाएं
तिरुवनंतपुरम । केरल में तेजी से बढ़ते तापमान की वजह से सांप के काटने की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पूरे राज्य में सांप के काटने की घटनाएं बढ़ने लगती हैं। पहले इन घटनाओं को कभी-कभार होने वाला ग्रामीण खतरा माना जाता था। लेकिन हाल के दिनों में ऐसी घटनाओं से चिंता बढ़ गई है। जिलों, उम्र के अलग-अलग समूहों और यहां तक कि लोग कथित तौर पर घरों में भी सुरक्षित नहीं हैं। एक ही दिन में, 23 लोगों को सांप के काटने पर एम्बुलेंस की मदद लेनी पड़ी। अलाप्पुझा से कोझिकोड तक, और मलप्पुरम से तिरुवनंतपुरम तक सांप के काटने की घटनाएं हर जगह एक जैसा ही हैं। सांप अपने बिलों से निकलकर इंसानी बस्तियों में घुस रहे हैं। विशेषज्ञ और स्थानीय जानकार इसके पीछे बढ़ते तापमान को मुख्य वजह बता रहे हैं। जमीन के बढ़ते तापमान के कारण सांप ठंडी जगहों की तलाश में अपने बिलों से बाहर निकलने पर मजबूर हो रहे हैं।
केरल: गर्मी बढ़ने से केरल में सांप के काटने की बढ़ी घटनाएं
कायमकुलम में, सांप के काटने से घायल हुए पांच लोगों में दो छोटे बच्चे भी शामिल थे। कोझिकोड में, एक युवक को तब पता चला कि उसे सांप ने काट लिया है, जब उसने अपने बिस्तर पर एक सांप को देखा। एक और रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना में, एक परिवार को अपने घर के अलग-अलग कमरों में कई जहरीले सांप छिपे हुए मिले। जिनमें से एक सांप उस बिस्तर पर था, जहां कुछ ही देर पहले बच्चे सो रहे थे। ऐसी कोई इक्का-दुक्का घटनाएं नहीं हैं, बल्कि बदलते हुए पारिस्थितिक संतुलन के संकेत हैं। सांप के काटने की बढ़ती घटनाओं की वजह से अस्पतालों ने इस स्थिति पर तुरंत प्रतिक्रिया दी है, और सांप के जहर का असर खत्म करने वाले सीरम (एंटी-वेनम) की उपलब्धता के साथ-साथ मरीजों का समय पर इलाज भी सुनिश्चित किया। तत्काल इलाज मिल जाने की वजह से ज्यादातर मरीजों की हालत स्थिर बताई जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम में बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार किया, हाईकोर्ट जाने को कहा
गुरुग्राम । गुरुग्राम में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। याचिकाकर्ताओं ने बुलडोजर एक्शन पर तुरंत रोक लगाने की मांग की थी, लेकिन सीजेआई ने इसे ठुकरा दिया। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति इससे प्रभावित है तो उसे पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का रुख करना चाहिए। यह मामला गुरुग्राम में चल रही अतिक्रमण विरोधी मुहिम से जुड़ा है। हाल के दिनों में प्रशासन ने डीएलएफ फेज-1, गोल्फ कोर्स रोड, साउथ सिटी और अन्य पॉश इलाकों में अवैध निर्माणों पर सख्त कार्रवाई शुरू की थी। रैंप, गार्ड रूम, बाउंड्री वॉल और सड़कों पर बने अवैध अतिक्रमण हटाए जा रहे थे। यह कार्रवाई पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद तेज हुई थी, जिसमें स्टिल्ट प्लस चार मंजिला निर्माण नीति पर रोक लगाई गई थी। याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि बिना नोटिस दिए वैध निर्माणों को भी तोड़ा जा रहा है, जो गलत है। उन्होंने तत्काल प्रभाव से बुलडोजर कार्रवाई रोकने की गुहार लगाई, लेकिन, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने इस पर सहमति नहीं जताई।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम में बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार किया, हाईकोर्ट जाने को कहा
उन्होंने कहा, “वहां कई सारे अवैध निर्माण हैं। अगर हाईकोर्ट अपनी संवैधानिक भूमिका निभा रहा है तो हम उसमें बाधा क्यों बनें?” सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को सलाह दी कि वे अपना पक्ष पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के सामने रखें। इससे पहले कि कोई गलत निर्माण बच जाए या निर्दोष लोगों को नुकसान पहुंचे, हाईकोर्ट स्तर पर ही मामला सुलझाया जाए। लंबे समय से पॉश कॉलोनियों में भी सड़कों, पार्कों और सार्वजनिक जगहों पर अतिक्रमण की शिकायतें आ रही थीं। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई शहर की ट्रैफिक समस्या कम करने और सही प्लानिंग लागू करने के लिए जरूरी है।
झारखंड: हजारीबाग में सड़क किनारे खड़े हाइवा से टकराई कार, मां-बेटे की मौत
हजारीबाग । झारखंड के हजारीबाग में सोमवार को कार और हाइवा की टक्कर में मां-बेटे की मौत हो गई, जबकि परिवार के दो अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए। परिवार एक शादी समारोह से घर वापस लौट रहा था। पुलिस ने मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है और घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह यह घटना हजारीबाग जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र में हुई। कार सड़क किनारे खड़े हाइवा में पीछे से आकर टकराई थी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें सवार लोग अंदर ही फंस गए। नकारी के अनुसार, महावीर प्रसाद का परिवार पटना में एक वैवाहिक कार्यक्रम में शामिल होकर वापस लौट रहा था। इसी दौरान मुफस्सिल थाना क्षेत्र में उनकी कार सड़क किनारे खड़े एक हाइवा के पिछले हिस्से में जा घुसी। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसे के बाद तेज धमाके की आवाज दूर तक सुनाई दी। सूचना मिलते ही मुफस्सिल थाना प्रभारी रौशन कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। स्थानीय ग्रामीणों की मदद से काफी मशक्कत के बाद कार के मलबे को काटकर घायलों और शवों को बाहर निकाला जा सका।
झारखंड: हजारीबाग में सड़क किनारे खड़े हाइवा से टकराई कार, मां-बेटे की मौत
सभी हताहतों को तत्काल शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल (एसबीएमसीएच) ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मां-बेटे को मृत घोषित किया। मृतकों की पहचान मां विद्या देवी और उनके पुत्र चंदन कुमार के रूप में की गई। वहीं, चंदन के पिता महावीर प्रसाद और उनकी पत्नी अंकिता देवी की गंभीर हालत को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए रिम्स रांची रेफर कर दिया गया है। परिजनों का कहना है कि दोनों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। मुफस्सिल थाना पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को जब्त कर लिया है। थाना प्रभारी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में हादसे का कारण ड्राइवर को नींद आना या तेज रफ्तार होना प्रतीत हो रहा है। फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है।
गोल गांव पातल की ढाणी में पिंजरे में कैद हुआ पैंथर, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस
राजस्थान के दौसा जिले के लालसोट उपखंड क्षेत्र से एक राहत भरी खबर सामने आई है, जहां वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक पैंथर का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया। यह घटना उपखंड के गोल गांव स्थित पातल की ढाणी की है, जहां पिछले कुछ दिनों से एक पैंथर की मौजूदगी ने ग्रामीणों के बीच भय का माहौल बना दिया था। शुक्रवार तड़के करीब 4:30 बजे वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे में पैंथर के फंसने के बाद पूरे इलाके ने राहत की सांस ली।
घटना की पृष्ठभूमि दो दिन पहले शुरू हुई, जब इसी पैंथर ने एक गाय के बछड़े पर हमला कर दिया था। इस हमले के बाद गांव और आसपास के इलाकों में दहशत फैल गई थी। ग्रामीणों ने अपने पशुओं को सुरक्षित रखने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतनी शुरू कर दी थी और रात के समय बाहर निकलने से भी परहेज करने लगे थे। बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर भी लोगों में चिंता बढ़ गई थी।
जैसे ही इस घटना की सूचना वन विभाग को मिली, अधिकारियों ने तुरंत मौके का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पैंथर की मौजूदगी की पुष्टि हुई, जिसके बाद उसे पकड़ने के लिए एक रणनीति तैयार की गई। वन विभाग की टीम ने इलाके में एक मजबूत पिंजरा लगाया और उसमें कुत्ते के मांस को चारे के रूप में रखा, ताकि पैंथर को आकर्षित किया जा सके।
वन्यजीवों के व्यवहार को ध्यान में रखते हुए यह तरीका अक्सर कारगर साबित होता है, और इस मामले में भी यही हुआ। शुक्रवार तड़के करीब 4:30 बजे पैंथर भोजन के लालच में पिंजरे में घुस गया और दरवाजा बंद होते ही वह उसमें कैद हो गया। इस सफल प्रयास के बाद तुरंत वन विभाग की टीम को सूचना दी गई।
सूचना मिलते ही रेंजर रामकिशन के नेतृत्व में वन विभाग की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। टीम ने पूरी सावधानी और सुरक्षा उपायों के साथ पैंथर को अपने कब्जे में लिया। इस दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि न तो पैंथर को कोई नुकसान पहुंचे और न ही आसपास के लोगों की सुरक्षा पर कोई खतरा हो।
पैंथर को सुरक्षित रूप से पिंजरे सहित राजकीय वाहन में रखा गया और उसे दौसा ले जाया गया। वहां पशु चिकित्सकों द्वारा उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह पूरी तरह स्वस्थ है और उसे किसी प्रकार की चोट या बीमारी नहीं है। जांच के बाद वन विभाग के अधिकारियों ने निर्णय लिया कि पैंथर को उसके प्राकृतिक आवास में ही छोड़ा जाएगा।
गोल गांव पातल की ढाणी में पिंजरे में कैद हुआ पैंथर, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस
जिला प्रशासन के निर्देशों के अनुसार, पैंथर को बाद में एक सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया। यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि वह अपने प्राकृतिक वातावरण में लौट सके और मानव बस्तियों से दूर रहकर अपना जीवन व्यतीत कर सके। वन विभाग का यह प्रयास न केवल वन्यजीव संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में भी सहायक है।
पैंथर के पकड़े जाने के बाद पातल की ढाणी और आसपास के गांवों में लोगों ने राहत की सांस ली। पिछले दो दिनों से जो भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ था, वह अब काफी हद तक खत्म हो गया है। ग्रामीणों ने वन विभाग की त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की सराहना की और कहा कि समय पर कदम उठाने से किसी बड़ी घटना को टाला जा सका।
इस घटना ने एक बार फिर यह दिखाया है कि मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है। जैसे-जैसे मानव बस्तियां जंगलों के करीब आती जा रही हैं, वैसे-वैसे इस तरह की घटनाएं बढ़ने की संभावना भी बढ़ रही है। ऐसे में वन विभाग की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
वन विभाग ने इस घटना के बाद ग्रामीणों से अपील की है कि यदि उन्हें किसी भी प्रकार का वन्यजीव दिखाई दे, तो वे तुरंत इसकी सूचना विभाग को दें। साथ ही, उन्होंने यह भी सलाह दी है कि लोग खुद से किसी वन्यजीव को पकड़ने या उसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश न करें, क्योंकि यह न केवल खतरनाक हो सकता है, बल्कि कानूनन अपराध भी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए जागरूकता और सतर्कता दोनों जरूरी हैं। ग्रामीणों को वन्यजीवों के व्यवहार के बारे में जानकारी होना चाहिए, ताकि वे समय रहते उचित कदम उठा सकें। इसके अलावा, वन विभाग को भी नियमित रूप से ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी करनी चाहिए, जहां वन्यजीवों की आवाजाही अधिक होती है।
इस पूरे अभियान की सफलता का श्रेय वन विभाग की टीम की तत्परता, योजना और समन्वय को जाता है। रेंजर रामकिशन और उनकी टीम ने जिस कुशलता से इस ऑपरेशन को अंजाम दिया, वह प्रशंसनीय है। उन्होंने यह साबित किया कि सही रणनीति और समय पर कार्रवाई से किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है।
अंततः, यह घटना न केवल एक सफल रेस्क्यू ऑपरेशन की कहानी है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि यदि प्रशासन, वन विभाग और स्थानीय लोग मिलकर काम करें, तो मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखा जा सकता है। पातल की ढाणी के ग्रामीणों के लिए यह अनुभव भले ही डरावना रहा हो, लेकिन इसका सुखद अंत सभी के लिए राहत लेकर आया है।
झारखंड में मालवाहक वाहन की चपेट में आने से मां-बेटे समेत तीन की मौत
लोहरदगा । झारखंड के लोहरदगा जिले में नेशनल हाईवे-39 (कुड़ू-रांची मुख्य पथ) पर शुक्रवार को एक सड़क हादसे में मां-पुत्र समेत तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। घटना कुड़ू थाना क्षेत्र के ढुलुवाखुंटा के समीप की है, जहां शराब लदे एक मालवाहक वाहन और स्कूटी के बीच आमने-सामने की जोरदार भिड़ंत हो गई। हादसे के बाद हाईवे पर घंटों आवागमन बाधित रहा और ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। कुड़ू थाना क्षेत्र के रोन्हैया कोलसिमरी गांव निवासी विषुण भगताइन अपने पुत्र किशोर भगत और भतीजा निरंजन उरांव के साथ स्कूटी पर सवार होकर मांडर अस्पताल जा रही थीं, जहां उनके पति इलाजरत हैं। इसी दौरान रांची से पलामू जा रहे शराब लदे मालवाहक वाहन ने स्कूटी को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि किशोर भगत और निरंजन उरांव की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि विषुण भगताइन ने लोहरदगा सदर अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते में दम तोड़ दिया। हादसे के बाद मालवाहक वाहन बीच सड़क पर ही पलट गया, जिससे उसमें लदी शराब की बोतलें सड़क पर बिखर गईं। घटना के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई और कुछ लोग शराब लूटने का प्रयास करने लगे। मौके पर पहुंचे कुड़ू थाना प्रभारी अजीत कुमार ने स्थिति को संभाला और शराब लूटने की कोशिश कर रहे लोगों को खदेड़ कर भगाया।
झारखंड में मालवाहक वाहन की चपेट में आने से मां-बेटे समेत तीन की मौत
हादसे से आक्रोशित ग्रामीणों ने मुआवजे की मांग को लेकर हाईवे जाम कर दिया। हालांकि, सीओ संतोष उरांव और थाना प्रभारी अजीत कुमार ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को समझाया और करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद जाम हटवाया। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को तत्काल सहायता के रूप में अंतिम संस्कार के लिए कुछ नकद राशि और दो क्विंटल चावल उपलब्ध कराया है। इस दुर्घटना में मालवाहक वाहन में सवार तीन लोग भी घायल हुए हैं, जिनकी पहचान रांची के कांके निवासी विनत मुंडा, विकास मिंज और टिंकू राम के रूप में हुई है। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रूप से घायल विनत मुंडा और विकास मिंज को बेहतर इलाज के लिए रिम्स, रांची रेफर किया गया है।
आतंकियों से निपटने, उनके कैंप नष्ट करने के अभ्यास के साथ पूरा हुआ ‘डस्टलिक’
नई दिल्ली । भारत और उज्बेकिस्तान के बीच आयोजित संयुक्त युद्धाभ्यास ‘डस्टलिक’ शुक्रवार को संपन्न हो गया। यह युद्धाभ्यास दोनों देशों की सेनाओं द्वारा उज्बेकिस्तान में किया जा रहा था। यहां जवानों ने बेहद तेज गोलीबारी को अंजाम दिया और गोलीबारी का त्वरित जवाब भी दिया। रॉकेट से हमले करने का युद्धाभ्यास किया गया। युद्ध क्षेत्र में मानव रहित यंत्रों व ड्रोन का उपयोग, घायल सैनिकों को सुरक्षित निकालने अभ्यास भी इस मिशन का हिस्सा रहा। युद्धाभ्यास के दौरान दुश्मन के ठिकानों की टोही और निगरानी व आतंकी कैंप में घुसकर कार्रवाई करने का अभ्यास भी किया गया। युद्धाभ्यास में पर्वतारोहण, रस्सी के सहारे उतरना, स्नाइपर कार्रवाई भी शामिल रही। भारतीय सेना का कहना है कि यह संयुक्त अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के बीच सामरिक तालमेल और सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रहा। अभ्यास के दौरान सैनिकों ने अवैध सशस्त्र समूहों को निष्क्रिय करने से जुड़े विभिन्न ऑपरेशनों का अभ्यास किया। इससे वास्तविक परिस्थितियों में संयुक्त कार्रवाई की तैयारियों को और बेहतर बनाया जा सकेगा। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आतंकवाद-रोधी अभियानों में दोनों देशों के अनुभवों और श्रेष्ठ तरीकों का आदान-प्रदान करना था। युद्धाभ्यास में आधुनिक युद्धक रणनीतियों, समन्वित कार्रवाई और विभिन्न परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया की क्षमता पर विशेष ध्यान दिया गया।
आतंकियों से निपटने, उनके कैंप नष्ट करने के अभ्यास के साथ पूरा हुआ ‘डस्टलिक’
सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार युद्धाभ्यास ‘डस्टलिक’ ने न केवल भारत और उज्बेकिस्तान के बीच सैन्य सहयोग को और सुदृढ़ किया, बल्कि दोनों सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी यानी एक साथ मिलकर प्रभावी ढंग से काम करने की क्षमता को भी बेहतर बनाया। इससे भविष्य में किसी भी संयुक्त मिशन या ऑपरेशन को अधिक कुशलता से अंजाम देने में मदद मिलेगी। समापन समारोह के दौरान दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों ने अभ्यास की सफलता पर संतोष व्यक्त किया और इसे द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को और गहरा करने की दिशा में अहम बताया। डस्टलिक का यह सातवां संस्करण है। यह युद्धाभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी तालमेल, सामरिक दक्षता और संयुक्त अभियान क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सेना के मुताबिक इस सैन्य अभ्यास का मुख्य उद्देश्य अर्ध-पहाड़ी क्षेत्रों में संयुक्त अभियानों की क्षमता को बढ़ाना रहा। इसके अंतर्गत दोनों देशों की सेनाओं ने दुश्मन के खिलाफ संयुक्त योजना निर्माण किया। सामरिक अभ्यास किए गए। वहीं विशेष सैन्य हथियारों के उपयोग और अवैध सशस्त्र समूहों के विरुद्ध अभियान चलाने की रणनीतियों पर फोकस किया गया। युद्ध कौशलों के अलावा भारत और उज्बेकिस्तान की सेनाओं ने आतंकवादी कार्रवाई का जवाब देने, छापेमारी, खोज और आतंकवादी ठिकाने नष्ट करने के सैन्य अभियान किए।
गाजीपुर रेप मामले को सपा नेता डिंपल यादव ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण, प्रशासन के बर्ताव पर उठाए सवाल
मैनपुरी । उत्तर प्रदेश में गाजीपुर दुष्कर्म मामले को लेकर समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि एक पिछड़ी जाति की लड़की के साथ दुष्कर्म हुआ और गंभीर परिस्थितियों में उसकी मृत्यु हो गई, जो समाज और व्यवस्था दोनों के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रतिनिधिमंडल पीड़िता के परिवार से मिलने गया तो प्रशासन का रवैया असंवेदनशील था। सपा नेता डिंपल यादव ने मीडिया से बातचीत के दौरान आरोप लगाया कि जब एक प्रतिनिधिमंडल पीड़िता के परिवार से मिलने गया, तब प्रशासन और अधिकारियों का रवैया अत्यंत असंवेदनशील था। उनके अनुसार इस तरह का व्यवहार देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी लगातार यह मुद्दा उठाती रही है कि भारतीय जनता पार्टी संविधान और लोकतंत्र को कमजोर करने की दिशा में काम कर रही है। महिला आरक्षण और जनगणना के मुद्दे पर भी डिंपल यादव ने अपनी बात स्पष्ट रूप से रखी। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल 2023 संसद में पारित हुआ था और इस पर किसी तरह का भ्रम या गलत जानकारी फैलाना उचित नहीं है।
गाजीपुर रेप मामले को सपा नेता डिंपल यादव ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण, प्रशासन के बर्ताव पर उठाए सवाल
उन्होंने कहा कि सरकार को जनगणना का कार्य जल्द से जल्द पूरा करना चाहिए। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के बयान का हवाला देते हुए कहा कि यदि जनगणना कराई जानी है, तो उसे जातिगत आधार पर भी कराया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने परिसीमन की प्रक्रिया पूरी करने और महिलाओं को आरक्षण देने की मांग दोहराई। उनका मानना है कि नई सीटों के निर्माण के बाद ही प्रभावी रूप से आरक्षण लागू किया जा सकता है, हालांकि उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि सरकार वास्तव में महिलाओं के हितों को लेकर गंभीर है, तो मौजूदा सीटों पर ही आरक्षण लागू किया जा सकता है। डिंपल यादव ने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण का मुद्दा भाजपा के लिए केवल एक मुखौटा है और सरकार परिसीमन से बचने के लिए जनगणना कराने में रुचि नहीं दिखा रही है।
ट्रेनों में ‘मौत’ बांट रहे नकली साधु, झारखंड में नशीला लड्डू खाने से महिला की मौत, गिरोह का पर्दाफाश
धनबाद । झारखंड के कोडरमा-धनबाद रेलखंड पर नकली साधुओं के एक गिरोह द्वारा दिए गए नशीले प्रसाद को खाने से उत्तर प्रदेश के मांडा की रहने वाली एक महिला यात्री की मौत हो गई। महिला अस्पताल में चार दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ी, लेकिन अंततः उसे बचाया नहीं जा सका। इस सनसनीखेज वारदात के बाद रेल पुलिस ने घेराबंदी कर वाराणसी के रहने वाले सात नकली साधुओं को गिरफ्तार किया है। झारखंड के रेल डीजी अनिल पलटा को लगातार मिल रहे इनपुट्स के बाद जीआरपी और आरपीएफ की एक संयुक्त टीम गठित की गई थी। पुलिस ने विभिन्न रेलवे स्टेशनों के दर्जनों सीसीटीवी कैमरों को खंगाला, जिसमें संदिग्धों की संदिग्ध गतिविधियां कैद हुई थीं। पकड़े गए सातों आरोपियों ने स्वीकार किया है कि वे वाराणसी और आसपास के इलाकों के रहने वाले हैं। वे अलग-अलग टुकड़ियों में बंटकर विभिन्न राज्यों की ट्रेनों, विशेषकर स्लीपर और जनरल बोगियों में यात्रियों को अपना निशाना बनाते थे। इस गिरोह के सदस्य साधु का भेष धारण कर खुद को किसी प्रतिष्ठित मठ से जुड़ा बताते हैं। ट्रेन में सफर के दौरान वे यात्रियों से मेल-जोल बढ़ाकर उनका विश्वास जीतते हैं और फिर ‘विशेष प्रसाद’ के नाम पर नशीला लड्डू थमा देते हैं।
ट्रेनों में ‘मौत’ बांट रहे नकली साधु, झारखंड में नशीला लड्डू खाने से महिला की मौत, गिरोह का पर्दाफाश
मांडा की रहने वाली के साथ भी यही हुआ। लड्डू खाते ही वह अचेत हो गई, जिसके बाद लुटेरे उसकी नकदी और चांदी के गहने लेकर चंपत हो गए। पुलिस पूछताछ में यह उजागर हुआ कि यह एक संगठित सिंडिकेट है, जो साधु के भेष का इस्तेमाल केवल अपराध को छिपाने के लिए ‘कवर’ के तौर पर करता था। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने यात्रियों को अपना शिकार बनाया है और इनके द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली नशीली दवाओं का स्रोत क्या है। रेल प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि यात्रा के दौरान किसी भी अपरिचित व्यक्ति, चाहे वह किसी भी भेष में हो, उसके द्वारा दिए गए प्रसाद या किसी भी खाद्य सामग्री को कतई स्वीकार न करें। धर्म और आस्था की आड़ में किसी अजनबी पर भरोसा करना जानलेवा साबित हो सकता है।