लगातार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त, सुखना झील बनी मुसीबत
चंडीगढ़। शहर में रात से हो रही लगातार बारिश ने कहर बरपा दिया है, जिससे जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। मौसम विभाग ने बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है और अगले तीन दिनों तक ऐसे ही भारी बारिश का पूर्वानुमान है। प्रशासन की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं क्योंकि सुखना चो और घग्घर नदी के तटबंधों के टूटने का खतरा बढ़ गया है। शहर में जलभराव और यातायात पर असर जलभराव: पूरे शहर में सड़कों पर पानी भर गया है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई सड़कों पर गाड़ियां खराब हो गई हैं, और कुछ इलाकों के घरों में भी पानी घुस गया है। यातायात बाधित: बारिश के कारण सभी अंडरपास बंद कर दिए गए हैं। किशनगढ़, बापूधाम और इंडस्ट्रियल एरिया के सुखना चो पुल बंद होने से मध्य और दक्षिण मार्गों पर भयंकर जाम लग गया है।
लगातार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त, सुखना झील बनी मुसीबत
पेड़ गिरने की घटनाएं बारिश का कहर सिर्फ लोगों पर ही नहीं, बल्कि पेड़ों पर भी दिख रहा है। शहर में कई जगहों पर पेड़ गिरने की खबरें हैं। सेक्टर 9 गुरुद्वारे के पास एक बड़ा पेड़ गिर गया, हालांकि गनीमत रही कि कोई हताहत नहीं हुआ। इससे पहले मंगलवार को भी सेक्टर 9 के मध्य मार्ग पर एक बड़ा पेड़ गिरा था। सुखना झील से खतरा शहर की पहचान मानी जाने वाली सुखना झील अब ट्राइसिटी के लिए एक बड़ी मुसीबत बन गई है। सात बार फ्लड गेट खोलने के बाद भी झील का जलस्तर कम नहीं हो रहा है, क्योंकि शिवालिक की पहाड़ियों में हो रही भारी बारिश का पानी लगातार झील में आ रहा है। बुधवार को भी इसके दोनों फ्लड गेट फिर से खोलने पड़े।
भ्रष्ट अधिकारियों पर शिकंजा: विजिलेंस ने दो पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोर्ट में पेश किया चालान
हरियाणा में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के अंतर्गत राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB), पंचकूला ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए दो पुलिस अधिकारियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई पुलिस विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करने वाली है और सरकार की “भ्रष्टाचार मुक्त हरियाणा” नीति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
यह मामला अंबाला जिले से संबंधित है, जहां शिकायतकर्ता के खिलाफ 21 अगस्त 2023 से भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, अंबाला में एक शिकायत लंबित थी। इस शिकायत को बंद करवाने के एवज में तत्कालीन पुलिस निरीक्षक सोमेश कुमार और ईएचसी (एग्जीक्यूटिव हैड कांस्टेबल) अशोक कुमार ने शिकायतकर्ता से एक लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी। शिकायतकर्ता ने जब इस गैरकानूनी मांग को लेकर आपत्ति जताई और इसकी जानकारी संबंधित विभाग को दी, तो विजिलेंस टीम ने तत्काल हरकत में आते हुए एक सुनियोजित योजना के तहत दोनों पुलिसकर्मियों को रंगे हाथ पकड़ने की कार्रवाई की।
राज्य सतर्कता ब्यूरो, पंचकूला की टीम ने पूरी रणनीति बनाकर ACB कार्यालय, अंबाला में एक जाल बिछाया। योजना के अनुसार, जैसे ही शिकायतकर्ता ने पुलिस निरीक्षक सोमेश कुमार और ईएचसी अशोक कुमार को 1 लाख रुपये की नकद राशि सौंपी, विजिलेंस टीम ने तत्परता दिखाते हुए दोनों आरोपियों को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी न केवल तीव्र कार्रवाई का उदाहरण है, बल्कि इस बात का भी प्रमाण है कि अब कोई भी अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग कर आम जनता को मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित नहीं कर सकता।
गिरफ्तारी के बाद, आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। जांच के बाद, अब राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने अंबाला की माननीय न्यायालय में चालान पेश कर दिया है, जिससे आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।
सरकार का सख्त रुख और संदेश
इस कार्रवाई से साफ हो गया है कि हरियाणा सरकार और राज्य सतर्कता ब्यूरो भ्रष्टाचार के मामलों को किसी भी सूरत में नजरअंदाज नहीं करेंगे। यह केस दर्शाता है कि भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों के खिलाफ चाहे वे किसी भी विभाग से संबंधित हों, बिना किसी भेदभाव के कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई के जरिए आम जनता में यह संदेश भी गया है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा रिश्वत की मांग की जाती है, तो इसकी शिकायत करने पर उन्हें न्याय मिल सकता है।
राज्य सतर्कता ब्यूरो की यह सक्रियता न केवल पुलिस विभाग की कार्यशैली में सुधार लाने का काम करेगी, बल्कि अन्य सरकारी विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए भी एक चेतावनी होगी कि भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने पर उनके खिलाफ भी इसी प्रकार की कठोर कार्रवाई की जाएगी।
भ्रष्ट अधिकारियों पर शिकंजा: विजिलेंस ने दो पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोर्ट में पेश किया चालान
भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति
राज्य सरकार पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई गई है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कई बार यह दोहराया है कि जनता से रिश्वत मांगने, फाइल अटकाने या जबरन पैसे वसूलने जैसी प्रवृत्तियों को अब किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी दिशा में विजिलेंस ब्यूरो को और अधिक अधिकार और संसाधन दिए गए हैं, जिससे ऐसे मामलों पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
पुलिस विभाग की छवि पर असर
यह घटना निश्चित रूप से हरियाणा पुलिस की छवि पर एक प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है। जब कानून के रखवाले ही कानून तोड़ने लगें, तो आम जनता का व्यवस्था पर से विश्वास डगमगाने लगता है। हालांकि, यह भी सत्य है कि हर विभाग में कुछ अपवाद होते हैं और ऐसे ही अपवादों की पहचान कर उन्हें बाहर करना ही व्यवस्था की शुद्धता बनाए रखने का एकमात्र रास्ता है। विजिलेंस की इस कार्रवाई से यह संकेत भी गया है कि पुलिस विभाग भी खुद को स्वच्छ और पारदर्शी बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
आगे की कानूनी प्रक्रिया
अब जबकि चालान कोर्ट में दाखिल हो चुका है, मामले की सुनवाई शीघ्र शुरू होने की उम्मीद है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो दोनों पुलिसकर्मियों को कठोर दंड मिलना तय है, जिससे अन्य अधिकारियों के लिए एक उदाहरण स्थापित होगा। इससे पहले भी विजिलेंस ब्यूरो कई उच्चस्तरीय अधिकारियों को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर चुका है, जिससे यह साफ हो गया है कि भ्रष्टाचार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
जनता की भागीदारी भी जरूरी
भ्रष्टाचार से लड़ाई केवल सरकारी एजेंसियों तक सीमित नहीं रह सकती। आम नागरिकों को भी जागरूक होकर भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठानी होगी। विजिलेंस विभाग ने भी नागरिकों से अपील की है कि यदि उनसे कोई रिश्वत मांगता है, तो वे तुरंत शिकायत दर्ज कराएं। विभाग की वेबसाइट, हेल्पलाइन नंबर और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी शिकायतें की जा सकती हैं।
निष्कर्षतः, राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो पंचकूला की इस कार्रवाई ने एक बार फिर सिद्ध किया है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो और तंत्र सजग हो, तो भ्रष्टाचार जैसी गंभीर समस्या पर काबू पाया जा सकता है। आम जनता को अब यह भरोसा हो चला है कि यदि वे अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाते हैं, तो उन्हें न्याय जरूर मिलेगा। इस मामले में कोर्ट द्वारा जल्द सुनवाई कर दोषियों को कड़ी सजा देने की अपेक्षा है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया पर भी जनता का विश्वास और मजबूत हो सके।
फरीदाबाद में 3 पुलिसकर्मी रिश्वत लेते गिरफ्तार, विजिलेंस ने रंगे हाथों दबोचा
फरीदाबाद।
हरियाणा में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए, राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, फरीदाबाद ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। ब्यूरो ने एक शिकायतकर्ता से 25,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए ईएएसआई संजय कुमार को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इस मामले में सबूतों के आधार पर मुख्य सिपाही खालिद और मुख्य सिपाही फारूख को भी गिरफ्तार किया गया है। शिकायतकर्ता ने विजिलेंस को दी गई अपनी शिकायत में बताया कि फरीदाबाद के सीआईए स्टाफ, सेक्टर-65 से कुछ पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में उसकी कबाड़ की दुकान पर आए। उन्होंने उसके पिता को एक चोरी के मामले में पूछताछ के लिए अपने साथ चलने को कहा। जब शिकायतकर्ता अपने एक दोस्त के साथ सीआईए स्टाफ पहुंचा, तो उसे बाहर ही रोक दिया गया।
फरीदाबाद में 3 पुलिसकर्मी रिश्वत लेते गिरफ्तार, विजिलेंस ने रंगे हाथों दबोचा
इधर, ईएएसआई संजय कुमार, मुख्य सिपाही खालिद और मुख्य सिपाही फारूख ने शिकायतकर्ता के पिता को चोरी के आरोप में गिरफ्तार न करने के एवज में 1 लाख रुपये की रिश्वत मांगी। बार-बार अनुरोध करने पर, वे 25,000 रुपये लेने पर सहमत हो गए। ब्यूरो ने इस सूचना पर त्वरित कार्रवाई की और तीनों पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर लिया। उनके खिलाफ राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, फरीदाबाद में मामला दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई पुलिस विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए एक बड़ा कदम है।
दिल्ली: शाहदरा पुलिस ने कुख्यात ऑटो-लिफ्टर प्रदीप को दबोचा, तीन वाहन बरामद
नई दिल्ली।
दिल्ली के शाहदरा जिले की पुलिस ने कड़ी कार्रवाई करते हुए कुख्यात ऑटो-लिफ्टर प्रदीप को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने चोरी के तीन वाहन बरामद किए और कई पुराने मामले सुलझाए हैं। यह सफलता 28 अगस्त को दर्ज एक शिकायत के बाद मिली, जब नितिन कुमार ने अपनी मोटरसाइकिल की चोरी की रिपोर्ट शाहदरा थाने में दी थी। इसके आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।
पुलिस ने इंस्पेक्टर नीरज कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई, जिसमें एएसआई संजय, हेड कांस्टेबल निशांत, कांस्टेबल नितिन, कांस्टेबल शिवम दुबे और कांस्टेबल राखी शामिल थे।
टीम का पर्यवेक्षण इंस्पेक्टर कन्हैया लाल (एसएचओ शाहदरा) और एसीपी संजीव कुमार ने किया। टीम को शाहदरा क्षेत्र में वाहन चोरों पर नजर रखने और उन्हें पकड़ने का जिम्मा सौंपा गया। इसके लिए पुलिसकर्मियों को सादे कपड़ों में तैनात किया गया और गुप्त सूत्रों से जानकारी जुटाई गई।
दिल्ली: शाहदरा पुलिस ने कुख्यात ऑटो-लिफ्टर प्रदीप को दबोचा, तीन वाहन बरामद
टीम ने घटनास्थल और आसपास के दर्जनों सीसीटीवी फुटेज इकट्ठे किए और उनका विश्लेषण किया। फुटेज में एक संदिग्ध को मोटरसाइकिल चुराते देखा गया। 50 से अधिक सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद संदिग्ध की पहचान प्रदीप के रूप में हुई, जो पहले शकरपुर थाने में वाहन चोरी के मामले में पकड़ा जा चुका था।
टीम ने प्रदीप के घर (पूर्वी जवाहर नगर, बेहटा, लोनी, गाजियाबाद) पर नजर रखी। लगातार तलाशी के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
जांच में प्रदीप की निशानदेही पर एक चोरी की मोटरसाइकिल दनकौर, गौतम बुद्ध नगर से बरामद हुई, जो दिलशाद के पास थी। आगे की पूछताछ में प्रदीप ने बताया कि उसने अपने घर के पास नहर रोड, बेहटा, लोनी से दो और वाहन सौंपे।
पूछताछ में प्रदीप ने बताया कि वह गाजियाबाद का रहने वाला है और मेरठ का मूल निवासी है। नशे की लत और बेरोजगारी के कारण उसने वाहन चोरी शुरू की। पहले वह वेल्डिंग का काम करता था, लेकिन अब बेरोजगार है। उसकी गिरफ्तारी 30 अगस्त को हुई।
पुलिस ने प्रदीप के जरिए 7 पुराने मामले सुलझाए, जिनमें शाहदरा, सीलमपुर, जीटीबी एन्क्लेव और गीता कॉलोनी थानों की चोरी की घटनाएं शामिल हैं। प्रदीप पहले भी शकरपुर थाने में वाहन चोरी के मामले में पकड़ा जा चुका है। बरामद वाहन पुलिस के कब्जे में हैं और आगे की जांच जारी है।
दिल्ली में थल सैनिक शिविर शुरू, देशभर के 1546 एनसीसी कैडेट लेंगे ट्रेनिंग
नई दिल्ली ।
दिल्ली कैंट के करियप्पा परेड ग्राउंड में मंगलवार को 12 दिवसीय थल सैनिक शिविर की शुरुआत हुई। इस शिविर में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 17 एनसीसी निदेशालयों के 1546 कैडेट हिस्सा ले रहे हैं। थल सैनिक शिविर में शामिल होने वाले कैडेट में 867 लड़के और 679 लड़कियां शामिल हैं। उद्घाटन समारोह में अतिरिक्त महानिदेशक (ए) एयर वाइस मार्शल पीवीएस नारायण ने शिरकत की। यह शिविर एनसीसी के सेना विंग के कैडेटों के लिए आयोजित राष्ट्रीय स्तर का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम है। कैडेट विभिन्न प्रतियोगिताओं जैसे बाधा प्रशिक्षण, मानचित्र वाचन और अन्य संस्थागत प्रशिक्षण गतिविधियों में भाग लेंगे। इन गतिविधियों का उद्देश्य कैडेटों की शारीरिक सहनशक्ति, मानसिक तीक्ष्णता और टीम वर्क की भावना को मजबूत करना है। थल सैनिक शिविर के दौरान कैडेटों को सेना के प्रशिक्षण के प्रमुख पहलुओं से परिचित कराया जाएगा, जिससे उनमें अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रीय एकता की भावना विकसित होगी।
दिल्ली में थल सैनिक शिविर शुरू, देशभर के 1546 एनसीसी कैडेट लेंगे ट्रेनिंग
एयर वाइस मार्शल पीवीएस नारायण ने कहा कि एनसीसी युवाओं को रोमांच, अनुशासन और सम्मान से भरा जीवन जीने का अनूठा अवसर प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि यह संगठन कैडेटों में नेतृत्व और सौहार्द की भावना विकसित करता है, जो उन्हें जीवन की चुनौतियों का आत्मविश्वास से सामना करने के लिए तैयार करता है। यह शिविर न केवल प्रशिक्षण का मंच है, बल्कि चरित्र निर्माण और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने का भी एक अवसर है। इस शिविर को एक सकारात्मक दृष्टि के रूप में देखा जा रहा है। यह आयोजन कैडेटों को एक-दूसरे से सीखने और अपने कौशल को निखारने का मौका देगा। पंजाब इंटरनेशनल ब्यूरो (पीआईबी) दिल्ली के अनुसार, यह शिविर युवाओं में देशभक्ति और एकता की भावना को और मजबूत करेगा। इस तरह के आयोजन एनसीसी के मिशन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो युवाओं को सशक्त और जिम्मेदार नागरिक बनाने पर केंद्रित है।
स्कूली बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य : एक सामूहिक जिम्मेदारी
आज के दौर में स्कूली बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और उस पर ध्यान देना अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। बच्चे हमारे समाज और राष्ट्र का भविष्य हैं, और एक स्वस्थ भविष्य की नींव उनके शारीरिक और मानसिक कल्याण पर ही टिकी होती है। जिस प्रकार हम उनके शारीरिक स्वास्थ्य को लेकर सजग रहते हैं, उसी प्रकार उनके मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना भी अनिवार्य है। आधुनिक जीवनशैली और प्रतिस्पर्धा के इस युग में बच्चे छोटी उम्र से ही कई तरह के दबावों का सामना कर रहे हैं। आंकड़े इस स्थिति की गंभीरता को और स्पष्ट करते हैं। शोधों से यह पता चलता है कि हर 5 में से 1 बच्चे में कोई न कोई भावनात्मक, व्यवहारिक या मानसिक स्वास्थ्य विकार पाया जाता है। लगभग 10 में से 1 युवा किसी न किसी मानसिक स्वास्थ्य चुनौती से जूझ रहा है। यह एक गंभीर विषय है कि 10 से 15 वर्ष की आयु के कई बच्चे यह महसूस करते हैं कि उनके पास अपनी चिंताओं या उदासी को साझा करने के लिए कोई नहीं है, विशेषकर स्कूल के माहौल में। यह भी एक स्थापित तथ्य है कि लगभग 50% मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं 14 वर्ष की आयु तक और 75% समस्याएं 24 वर्ष की आयु तक विकसित हो जाती हैं। भारत में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निम्हांस) के एक अध्ययन में पाया गया है कि भारत में लगभग 23% स्कूली बच्चे मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त हैं। चिंता की बात यह है कि इनमें से अधिकांश बच्चों को समय पर उचित पहचान और इलाज नहीं मिल पाता, जो उनके भविष्य के लिए गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है। स्कूल जाने की उम्र, विशेष रूप से 6 से 14 वर्ष, बच्चों के विकास का एक निर्णायक चरण होता है। इस दौरान उनका शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, भावनात्मक, संज्ञानात्मक और शैक्षिक विकास तीव्र गति से होता है। विकास के ये सभी आयाम एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। यदि किसी एक आयाम में भी कोई बाधा आती है, तो उसका नकारात्मक प्रभाव अन्य सभी आयामों पर पड़ता है। इसे एक सरल उदाहरण से समझ सकते हैं। मान लीजिए, एक बच्चा शारीरिक रूप से कमजोर है। इस कमजोरी के कारण वह अपने हमउम्र बच्चों के साथ खेलकूद में भाग नहीं ले पाता या पिछड़ जाता है। बार-बार हारने या पीछे रह जाने के अनुभव से उसका आत्मविश्वास कम हो जाता है और वह धीरे-धीरे बच्चों के समूह से कटने लगता है। इस सामाजिक अलगाव के कारण उसका भाषा और संवाद कौशल ठीक से विकसित नहीं हो पाता, क्योंकि भाषा एक अर्जित गुण है जो सामाजिक संपर्क से ही निखरता है। लगातार नकारात्मक भावनाओं (जैसे उदासी, हीन भावना) से घिरे रहने के कारण उसका भावनात्मक विकास भी प्रभावित होता है। ऐसे बच्चे स्कूल में अक्सर अनुपस्थित रहते हैं और जब उपस्थित होते भी हैं, तो सीखने की प्रक्रिया में पूरी तरह से शामिल नहीं हो पाते। चूंकि शिक्षा का माध्यम भाषा है और उनका भाषा विकास पहले से ही कमजोर है, उन्हें पाठ को समझने में कठिनाई होती है, जिससे उनका शैक्षिक प्रदर्शन भी गिर जाता है। भविष्य में खराब शैक्षिक प्रदर्शन के कारण अच्छे करियर के अवसर कम हो जाते हैं, जिसका सीधा असर उनके आर्थिक और पारिवारिक जीवन पर पड़ता है। इस प्रकार, एक साधारण शारीरिक समस्या मानसिक और भावनात्मक चुनौतियों से जुड़कर बच्चे के संपूर्ण विकास को बाधित कर देती है। यह जानना महत्वपूर्ण है कि एक मानसिक रूप से स्वस्थ छात्र कैसा होता है। ऐसा बच्चा न केवल अकादमिक रूप से अच्छा प्रदर्शन करता है, बल्कि जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी संतुलित होता है। कुछ प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं: ·
स्कूली बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य : एक सामूहिक जिम्मेदारी
तार्किक और विवेकशील चिंतन: वह स्थितियों का सही आकलन कर पाता है और सोच-समझकर निर्णय लेता है। समस्या-समाधान की क्षमता: वह चुनौतियों से घबराता नहीं, बल्कि उनका समाधान खोजने का प्रयास करता है। सृजनात्मकता: उसमें नए विचारों को सोचने और उन्हें व्यक्त करने का कौशल होता है। सीखने की उत्सुकता: वह नई और उपयोगी अवधारणाओं को आसानी से सीखता है। समायोजन की क्षमता: वह नई और विषम परिस्थितियों में भी स्वयं को प्रभावी ढंग से ढाल लेता है। भावनात्मक संतुलन: वह सकारात्मक भावनाओं को बनाए रखता है और क्रोध, भय या ईर्ष्या जैसी नकारात्मक भावनाओं पर नियंत्रण रखना जानता है। छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य का उनके शैक्षिक विकास पर सीधा और गहरा प्रभाव पड़ता है। जब बच्चे नकारात्मक भावनाओं जैसे- भय, क्रोध, घृणा, आत्मविश्वास में कमी या असहायता से ग्रस्त होते हैं, तो उनकी संज्ञानात्मक क्षमताएं (सीखना, याद रखना, सोचना, तर्क करना) ठीक से काम नहीं कर पातीं। उदाहरण के लिए, परीक्षा का अत्यधिक भय याद की हुई चीजों को भी भुला सकता है। इसी तरह, क्रोध की स्थिति में बच्चा अपना नियंत्रण खो देता है और सीखने पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता। दूसरी ओर, शिक्षा की गुणवत्ता और स्कूल का वातावरण भी छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करते हैं। एक सकारात्मक, सहयोगी और सुरक्षित स्कूल का माहौल बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाता है, जबकि एक नकारात्मक या दमनकारी वातावरण उनमें तनाव और चिंता पैदा कर सकता है। शिक्षकों का व्यवहार, उनकी शिक्षण शैली, सहपाठियों के साथ संबंध और स्कूल का अनुशासन, यह सभी कारक मिलकर छात्र के मानसिक स्वास्थ्य को आकार देते हैं। विद्यालय बच्चों के जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में उसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके लिए निम्नलिखित प्रयास किए जाने चाहिए: सकारात्मक वातावरण: स्कूल का भौतिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक वातावरण सहयोगी और सौहार्दपूर्ण होना चाहिए, जहां हर बच्चा सुरक्षित और सम्मानित महसूस करे। छात्र-केंद्रित शिक्षण: शिक्षण योजना और विधियों का चुनाव छात्रों की रुचि, योग्यता, उम्र और परिपक्वता के अनुसार किया जाना चाहिए। संतुलित पाठ्यक्रम: पाठ्यक्रम ऐसा हो जो बच्चों पर अनावश्यक बोझ न डाले और उन्हें सीखने के लिए प्रेरित करे। मनोरंजन और सह-पाठयक्रम गतिविधियाँ: खेलकूद, संगीत, नृत्य, कला, एनसीसी, एनएसएस जैसी गतिविधियों का नियमित आयोजन किया जाना चाहिए ताकि बच्चों का सर्वांगीण विकास हो सके। शिक्षकों का आदर्श व्यवहार: शिक्षकों का व्यवहार छात्रों के प्रति सहयोगात्मक, सहानुभूतिपूर्ण और आदर्श होना चाहिए। उन्हें एक मार्गदर्शक की भूमिका निभानी चाहिए। समस्या-समाधान का कौशल सिखाना: शिक्षकों को छात्रों की हर समस्या को हल करने के बजाय, उन्हें समस्या को हल करने की प्रक्रिया सिखानी चाहिए ताकि वे आत्मनिर्भर बनें। आत्मविश्वास बढ़ाना: छात्रों को उनकी योग्यता के अनुसार चुनौतीपूर्ण कार्य देकर और उन्हें पूरा करने पर प्रोत्साहित करके उनका आत्मविश्वास बढ़ाना चाहिए। तार्किक अनुशासन: स्कूल का अनुशासन बहुत अधिक सख्त या बहुत अधिक लचीला नहीं होना चाहिए। यह तर्कसंगत और संतुलित हो। तुलना से बचें: हर बच्चा अद्वितीय है। शिक्षकों को छात्रों की एक-दूसरे से अनावश्यक तुलना करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे उनमें हीन भावना पैदा हो सकती है। परीक्षा का भय दूर करें: छात्रों को परीक्षा को एक अवसर के रूप में देखने के लिए प्रेरित करना चाहिए, न कि एक बाधा के रूप में। साल की शुरुआत से ही तैयारी करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य में माता-पिता की भूमिकाः परिवार बच्चे की पहली पाठशाला होता है, और माता-पिता उसके पहले शिक्षक। बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को आकार देने में उनकी भूमिका सबसे अहम होती है। घर का वातावरण, माता-पिता का आपसी संबंध और बच्चों के प्रति उनका व्यवहार, ये सभी चीजें बच्चे के कोमल मन पर गहरा प्रभाव डालती हैं। अभिभावकों को निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना चाहिए: गुणवत्तापूर्ण समय दें: बच्चों के साथ समय बिताएं, उनसे बात करें, उनकी सुनें और उनकी भावनाओं को समझने का प्रयास करें। अवास्तविक अपेक्षाएं न रखें: अपने बच्चों पर अपनी अधूरी इच्छाओं का बोझ न डालें। उनकी क्षमताओं को समझें और उसी के अनुसार उनसे अपेक्षा करें। तुलना न करें: अपने बच्चे की तुलना कभी भी दूसरे बच्चों से न करें। इससे उनका आत्मविश्वास कमजोर होता है। प्रोत्साहित करें: उनके अच्छे कार्यों और प्रयासों के लिए उनकी सराहना करें। इससे उन्हें बेहतर करने की प्रेरणा मिलती है। तार्किक अनुशासन: घर में एक अनुशासित लेकिन प्रेमपूर्ण माहौल बनाएं। नियम तार्किक होने चाहिए और बच्चों को उनके कारण पता होने चाहिए। डिजिटल उपकरणों का संतुलित उपयोग: इंटरनेट और स्मार्टफोन जैसी सुविधाएं आवश्यकतानुसार दें, लेकिन उनके उपयोग का समय निर्धारित करें और उनकी ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें। एक सामूहिक प्रयास की आवश्यकताः बच्चों का मन कोमल होता है और उनका मस्तिष्क विकास की अवस्था में होता है। उनके प्रति किया गया कोई भी कठोर या असंगत व्यवहार उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक चुनौती बन सकता है। बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य का संवर्धन किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि एक समेकित प्रयास की मांग करता है। इसमें माता-पिता, भाई-बहन, शिक्षक, स्कूल प्रशासन और पूरे समाज की महत्वपूर्ण भूमिका है। जब हर स्तर पर बच्चों को एक सकारात्मक, सुरक्षित और प्रेमपूर्ण वातावरण मिलेगा, तभी उनका मानसिक स्वास्थ्य उत्तम होगा। एक मानसिक रूप से स्वस्थ बच्चा ही अपनी पूरी क्षमता का उपयोग कर समाज और राष्ट्र के निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दे पाएगा। जैसा कि कहा गया है, “बच्चे ही राष्ट्र का भविष्य होते हैं,” इस भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए उनके मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल करना हमारा सर्वोच्च कर्तव्य है।
तकनीकी कार्य के कारण मंडोर व दिल्ली सराय रोहिल्ला ट्रेनें रद्द
जोधपुर से दिल्ली के बीच चलने वाली कई ट्रेनों पर असर, तकनीकी कार्य के चलते रद्द की गई सेवाएं
जोधपुर, उत्तर पश्चिम रेलवे द्वारा खलीलपुर और रेवाड़ी स्टेशनों के बीच तकनीकी कार्य किए जाने के चलते ट्रैफिक ब्लॉक की घोषणा की गई है। इस ब्लॉक का सीधा असर जोधपुर से दिल्ली के बीच संचालित कई सुपरफास्ट ट्रेनों पर पड़ा है, जिसके चलते यात्रीगणों को असुविधा से बचने के लिए पहले से तैयारी करने की सलाह दी गई है।
उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी ने जानकारी देते हुए बताया कि खलीलपुर और रेवाड़ी स्टेशनों के मध्य तकनीकी कार्य के कारण ट्रैफिक ब्लॉक रहेगा। इस कारणवश जोधपुर और दिल्ली के बीच चलने वाली कई महत्वपूर्ण ट्रेनें आंशिक या पूर्ण रूप से रद्द कर दी गई हैं।
रद्द की गई ट्रेनें:
रेलवे प्रशासन द्वारा जिन ट्रेनों को रद्द किया गया है, वे निम्नलिखित हैं:
1. मंडोर सुपरफास्ट एक्सप्रेस (22996/22995)
22996 जोधपुर-दिल्ली मंडोर सुपरफास्ट एक्सप्रेस: 2 सितंबर, मंगलवार को जोधपुर से रद्द रहेगी।
22995 दिल्ली-जोधपुर मंडोर सुपरफास्ट एक्सप्रेस: 3 सितंबर, बुधवार को दिल्ली से रद्द रहेगी।
यह ट्रेन जोधपुर से दिल्ली के बीच की एक प्रमुख सुपरफास्ट सेवा है, जो यात्रियों के लिए तेज और सुविधाजनक विकल्प रही है। इसके रद्द होने से खासकर कामकाजी वर्ग और व्यापारियों को परेशानी उठानी पड़ सकती है।
2. सराय रोहिल्ला सुपरफास्ट एक्सप्रेस (22481/22482)
22481 जोधपुर-दिल्ली सराय रोहिल्ला सुपरफास्ट एक्सप्रेस: 2 सितंबर को जोधपुर से रद्द रहेगी।
22482 दिल्ली सराय रोहिल्ला-जोधपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस: 3 सितंबर को दिल्ली सराय रोहिल्ला से रद्द रहेगी।
यह ट्रेन दिल्ली से सीधे जोधपुर पहुंचने वालों के लिए एक कुशल और समयबद्ध सेवा रही है, और इसके बंद रहने से यात्रियों को वैकल्पिक साधनों की तलाश करनी पड़ेगी।
3. सालासर सुपरफास्ट एक्सप्रेस (22421)
22421 दिल्ली सराय रोहिल्ला-जोधपुर सालासर सुपरफास्ट एक्सप्रेस: 3 सितंबर, बुधवार को पूरी तरह रद्द रहेगी।
यह ट्रेन धार्मिक यात्राओं के लिए खासा महत्व रखती है, क्योंकि सालासर बालाजी जैसे धार्मिक स्थल जाने वाले यात्रियों के लिए यह एक सुविधाजनक सेवा मानी जाती है।
आंशिक रूप से प्रभावित ट्रेन:
4. राजस्थान संपर्क क्रांति सुपरफास्ट एक्सप्रेस (22464)
22464 बीकानेर-दिल्ली सराय रोहिल्ला संपर्क क्रांति: 2 सितंबर को बीकानेर से तो चलेगी, लेकिन यह केवल रेवाड़ी स्टेशन तक ही जाएगी। रेवाड़ी से दिल्ली सराय रोहिल्ला तक का संचालन रद्द रहेगा।
इस ट्रेन के आंशिक रूप से रद्द होने से भी यात्रियों को यात्रा पूरी करने के लिए वैकल्पिक साधनों जैसे बस या टैक्सी का सहारा लेना पड़ सकता है।
तकनीकी कार्य के कारण मंडोर व दिल्ली सराय रोहिल्ला ट्रेनें रद्द
यात्रियों के लिए रेलवे की अपील
रेल मंडल प्रबंधक ने यात्रियों से अनुरोध किया है कि वे यात्रा से पूर्व संबंधित ट्रेन की स्थिति की रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट या रेलवे हेल्पलाइन नंबर 139 पर कॉल कर जानकारी प्राप्त कर लें। इसके अलावा रेलवे द्वारा रेलवे स्टेशनों और मीडिया के माध्यम से लगातार अपडेट जारी किए जा रहे हैं।
रेलवे प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि तकनीकी कार्य अनिवार्य हैं, जिससे भविष्य में बेहतर सुविधा और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित की जा सके। यह कार्य रेलवे पटरियों, सिग्नलिंग सिस्टम और सुरक्षा मानकों के उन्नयन हेतु किया जा रहा है, जिससे दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
यात्रियों की प्रतिक्रिया
ट्रेनों के रद्द होने की सूचना मिलते ही कई यात्रियों ने सोशल मीडिया और रेलवे हेल्पलाइन पर अपनी नाराजगी जताई। कुछ यात्रियों का कहना है कि उन्हें जरूरी कार्य से दिल्ली जाना था और इस अचानक बदलाव से उनकी योजनाएं प्रभावित हो गई हैं। वहीं कुछ यात्रियों ने समय रहते सूचना देने के लिए रेलवे प्रशासन का धन्यवाद भी किया, जिससे उन्हें वैकल्पिक प्रबंध करने में सुविधा हुई।
एक यात्री, रमेश चौधरी, जो मंडोर एक्सप्रेस से 2 सितंबर को दिल्ली जाने वाले थे, ने कहा, “मेरी मीटिंग पहले से तय थी, लेकिन अब मुझे हवाई यात्रा करनी पड़ेगी, जिससे खर्च भी बढ़ गया है।” वहीं, कविता शर्मा, जो सराय रोहिल्ला एक्सप्रेस से यात्रा करने वाली थीं, ने कहा, “ट्रेन कैंसिल होने की जानकारी रेलवे के SMS के माध्यम से मिल गई, इससे थोड़ी राहत मिली।”
वैकल्पिक सुझाव:
रेलवे प्रशासन ने यात्रियों को यह भी सुझाव दिया है कि वे अन्य मार्गों या ट्रेनों के माध्यम से अपनी यात्रा जारी रख सकते हैं। जैसे:
बीकानेर, अजमेर या जयपुर होते हुए दिल्ली जाना।
निकटवर्ती स्टेशनों से बस सेवाओं का उपयोग।
रेलवे द्वारा चलाई जा रही अन्य विशेष या नियमित ट्रेनों का चयन।
भविष्य की योजना:
रेलवे अधिकारियों ने यह भी बताया कि ट्रैफिक ब्लॉक के दौरान उन्नत सिग्नलिंग सिस्टम, पटरी मरम्मत और अन्य संरचनात्मक सुधार किए जाएंगे। यह कार्य लंबी दूरी की ट्रेनों की गति और समयबद्धता सुधारने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
रेलवे मंडल का उद्देश्य है कि इस तकनीकी कार्य के पूर्ण होते ही यात्रियों को अधिक सुरक्षित, तेज़ और आरामदायक यात्रा का अनुभव मिल सके।
निष्कर्ष:
जोधपुर से दिल्ली के बीच ट्रैफिक ब्लॉक के चलते प्रमुख ट्रेनों के रद्द होने से यात्रियों को थोड़ी असुविधा अवश्य होगी, लेकिन रेलवे प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि यह अस्थायी असुविधा, स्थायी सुविधा के लिए जरूरी है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा की योजना बनाते समय अपडेट की गई ट्रेन स्थिति की जानकारी अवश्य लें और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक परिवहन साधनों का उपयोग करें।
रेलवे द्वारा यात्रियों को बेहतर सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से किए जा रहे यह तकनीकी कार्य भविष्य में यात्रा अनुभव को और बेहतर बनाने की दिशा में एक सकारात्मक और दूरदर्शी कदम है।
नो हेलमेट, नो फ्यूल : गौतमबुद्ध नगर में एक माह का सड़क सुरक्षा अभियान शुरू
गौतमबुद्ध नगर ।
सड़क हादसों में लगातार हो रही जनहानि और लोगों में सुरक्षा के प्रति उदासीनता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सोमवार से पूरे प्रदेश में ‘नो हेलमेट, नो फ्यूल’ अभियान की शुरुआत की गई है। इस विशेष अभियान के तहत अब पेट्रोल पंपों पर बिना हेलमेट आने वाले किसी भी दोपहिया वाहन चालक या सवार को पेट्रोल, डीजल या सीएनजी उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। यह अभियान 1 सितंबर से 30 सितंबर तक पूरे प्रदेश में चलेगा। गौतमबुद्ध नगर में इस अभियान को सफल बनाने के लिए जिलाधिकारी मेधा रूपम के निर्देश पर जिला सड़क सुरक्षा समिति (डीआरएससी) सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) डॉ. उदित नारायण पांडेय ने बताया कि पुलिस, जिला प्रशासन और परिवहन विभाग संयुक्त रूप से इस अभियान की सघन निगरानी करेंगे। इसके साथ ही पेट्रोल पंपों पर व्यवस्था बनाए रखने और नियमों के अनुपालन की जिम्मेदारी खाद्य एवं रसद विभाग को सौंपी गई है।
नो हेलमेट, नो फ्यूल : गौतमबुद्ध नगर में एक माह का सड़क सुरक्षा अभियान शुरू
अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य किसी को दंडित करना नहीं है, बल्कि आमजन को जागरूक करना और सड़क सुरक्षा को जीवनशैली का हिस्सा बनाना है। हेलमेट पहनने की आदत विकसित करने से न केवल सवार की जान सुरक्षित रहेगी, बल्कि दुर्घटनाओं में गंभीर चोट और मृत्यु दर को भी कम किया जा सकेगा। प्रशासन का कहना है कि इस अभियान के दौरान व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाएगा। सोशल मीडिया, पोस्टर, बैनर और जागरूकता रैलियों के माध्यम से लोगों को संदेश दिया जाएगा कि बिना हेलमेट ईंधन नहीं मिलेगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सड़क सुरक्षा सबकी जिम्मेदारी है और इसमें जनता का सहयोग सबसे महत्वपूर्ण है। जिलाधिकारी मेधा रूपम ने कहा कि सड़क पर हर एक व्यक्ति की जिंदगी अमूल्य है। हेलमेट को बोझ या झंझट समझने के बजाय इसे सुरक्षा कवच मानना चाहिए। उन्होंने आमजन से अपील की कि वे अभियान को नियम मानकर अपनाएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
टीकमगढ़ में कृषि औजार की आड़ में बन रहे थे हथियार, 5 गिरफ्तार
भोपाल ।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की पुलिस ने टीकमगढ़ जिले में हथियार बनाने वाली फैक्ट्री का खुलासा किया है। यह हथियार कृषि उपकरण बनाने वाली फैक्ट्री की आड़ में बनाए जाते थे। पकड़ा गया परिवार तीन पीढ़ियों से यही काम करता आ रहा है। भोपाल के पुलिस कमिश्नर हरि नारायण चारी मिश्रा ने संवाददाताओं से बात करते हुए सोमवार को बताया कि पुलिस की अपराध शाखा ने पिछले दिनों एक व्यक्ति को पिस्टल के साथ पकड़ा था। बरामद पिस्टल काफी उच्च श्रेणी की थी। पुलिस ने जब उससे पूछताछ की तो पता चला कि उसने यह पिस्टल टीकमगढ़ से खरीदी थी। इस सूचना के आधार पर अपराध शाखा सक्रिय हुई। पुलिस कमिश्नर ने आगे बताया कि अपराध शाखा की टीम ने मिली सूचना के आधार पर टीकमगढ़ में उस स्थान पर दबिश दी तो वहां बड़ी तादाद में हथियार बनाने की सामग्री मिली। इस पूरे मामले में अब तक पांच लोगों की गिरफ्तारी हुई है।
टीकमगढ़ में कृषि औजार की आड़ में बन रहे थे हथियार, 5 गिरफ्तार
चार लोग एक ही परिवार के हैं। इस दौरान पता चला कि जिस स्थान पर यह हथियार बनाए जाते हैं, वह कृषि उपकरण बनाने वाली फैक्ट्री है। जांच आगे बढ़ी तो एक और कृषि उपकरण बनाने वाली फैक्ट्री में भी इसी तरह के हथियार बनाने का खुलासा हुआ है। पुलिस कमिश्नर के अनुसार, कृषि उपकरण बनाने वाली फैक्ट्री की आड़ में हथियार बनाने का जो काम चल रहा था, उसमें जो पिस्टल बनाई जाती थी, वह उच्च कोटि की है। इन हथियारों की सीमावर्ती राज्य उत्तर प्रदेश के झांसी आदि स्थानों पर आपूर्ति की जाती थी। पुलिस इस काम में लगे लोगों की तलाश में जुटी है। इस पूरे मामले का खुलासा करने वाली टीम को 30 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया है। बताया गया है कि पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि कृषि उपकरण बनाने की आड़ में हथियार बनाने का काम करने वाले परिवार की तीन पीढ़ियों के दौरान किन लोगों ने किस तरह से काम किए हैं। कितने लोगों को और किस तरह के हथियार बेचे गए। आने वाले दिनों में बड़े खुलासे की संभावना जताई जा रही है।
पहले ही दिन हंगामा : विधानसभा में वोट चोरी बनाम गालीबाज की जंग
जयपुर।
राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र पहले ही दिन हंगामे की भेंट चढ़ गया। कांग्रेस विधायकों ने “वोट चोर, गद्दी छोड़” के नारे लगाए, तो भाजपा ने पलटवार में “गालीबाज राहुल गांधी” के नारे बुलंद किए। स्पीकर की बार-बार की समझाइश भी नाकाम रही और सदन का माहौल गरमाता चला गया। कांग्रेस ने चुनाव आयोग और सरकार पर वोट चोरी का आरोप लगाया, जबकि भाजपा ने राहुल गांधी की भाषा शैली को मुद्दा बनाया। हंगामे के बीच झालावाड़ हादसे पर श्रद्धांजलि को लेकर विपक्ष ने सरकार की संवेदनशीलता पर सवाल उठाए, वहीं खेजड़ी संरक्षण कानून और एसआई भर्ती जैसे मुद्दे भी गूंजते रहे।
कांग्रेस का ‘वोट चोरी’ नैरेटिव पहले ही दिन कांग्रेस विधायकों ने तख्तियां लहराईं और नारे लगाए – “वोट चोर, गद्दी छोड़”। यह नारा महज़ शोरगुल नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक रणनीति थी। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पहले से ही देशभर में ‘चुनाव चोरी’ का मुद्दा उठाती आ रही है। सचिन पायलट ने विधानसभा में इसी लाइन को आगे बढ़ाते हुए कहा कि “कुछ लोग बार-बार वोट चोरी कर सरकार बनाने की कोशिश कर रहे हैं, इसे कांग्रेस बर्दाश्त नहीं करेगी।” यह संदेश केवल राजस्थान की राजनीति तक सीमित नहीं है। कांग्रेस इसे राष्ट्रीय मुद्दा बनाकर लोकसभा और विधानसभा चुनावों में हुई हार का राजनीतिक स्पष्टीकरण गढ़ना चाहती है।
भाजपा की जवाबी रणनीति – ‘गालीबाज राहुल गांधी’ कांग्रेस की आक्रामकता का जवाब भाजपा विधायकों ने भी उतनी ही तेज़ी से दिया। सदन में नारे लगे – “गालीबाज राहुल गांधी”। सरकारी मुख्य सचेतक जागेश्वर गर्ग ने मीडिया के सामने यह लाइन और सख़्त की – “गालीबाज कांग्रेस है, इसका रिकॉर्ड है और वीडियो भी सबूत हैं।” यहां भाजपा की रणनीति साफ़ है – वह कांग्रेस की ओर से उठाए जा रहे चुनाव आयोग और वोट चोरी के सवाल को सीधे संबोधित नहीं कर रही, बल्कि राहुल गांधी की भाषा-शैली को ही मुद्दा बनाकर चर्चा को भावनात्मक और व्यक्तिगत स्तर पर मोड़ना चाहती है।
स्पीकर की नाराज़गी और सदन की गरिमा का सवाल स्पीकर वासुदेव देवनानी को बार-बार दोनों दलों को टोकना पड़ा। उनका कथन – “यहां बाजार या चौराहे जैसी हरकतें नहीं हो सकतीं” – विधानसभा की गिरती मर्यादा की ओर सीधा संकेत था। राजनीतिक विश्लेषण यह बताता है कि आज सदन का संचालन किसी भी स्पीकर के लिए आसान नहीं रह गया है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी लाइन पर इतने अड़े रहते हैं कि विधायी कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ जाती है।
विपक्ष की भावनात्मक अपील – झालावाड़ हादसा नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार पर हमला करते हुए पूछा कि झालावाड़ स्कूल हादसे में जान गंवाने वाले मासूम बच्चों को श्रद्धांजलि क्यों नहीं दी गई?यहाँ कांग्रेस ने सत्ता पक्ष को “संवेदनहीन” बताने की कोशिश की। बड़ी घटनाओं और राष्ट्रीय स्तर पर हुई मौतों पर श्रद्धांजलि दी गई, लेकिन स्थानीय त्रासदी की अनदेखी पर सवाल खड़ा करना विपक्ष की रणनीति में मानवीय कोण जोड़ता है।
पहले ही दिन हंगामा : विधानसभा में वोट चोरी बनाम गालीबाज की जंग
मुद्दों की विविधता – खेजड़ी संरक्षण से लेकर SI भर्ती तक हंगामे के बीच भी विधानसभा में दूसरे स्वर गूंजे। निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने खेजड़ी संरक्षण कानून की मांग उठाई और पोस्टर तक लहराए। गृह राज्य मंत्री ने SI भर्ती पर कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि दोषियों पर कार्रवाई होगी, निर्दोषों को परेशान नहीं किया जाएगा। ये दोनों बिंदु बताते हैं कि जबकि सत्ता और विपक्ष का बड़ा नैरेटिव “वोट चोरी बनाम गालीबाज” पर टिका रहा, वहीं स्थानीय और प्रशासनिक मुद्दों को उठाने की कोशिश भी हुई।
असली तस्वीर – राजनीतिक लाभ-हानि का खेल कांग्रेस की कोशिश : सत्र को पूरी तरह “वोट चोरी” और “चुनाव आयोग की पक्षधरता” जैसे मुद्दों पर केंद्रित करना। इससे वह भाजपा की जीत की वैधता पर लगातार सवाल उठाना चाहती है। भाजपा की रणनीति : राहुल गांधी की छवि को कमजोर करना और कांग्रेस को “गालीबाज” पार्टी साबित करना, ताकि असल आरोपों की चर्चा दब जाए। जनता के लिए संदेश : सदन में नारेबाज़ी और हंगामा आमजन के लिए यह संकेत है कि आने वाले दिनों में विकास और विधायी कामकाज से ज़्यादा जोर राजनीतिक बयानबाज़ी पर रहेगा। मानसून सत्र का पहला दिन यह तय कर गया है कि आने वाले दिनों में सदन में बहस कम और हंगामा ज़्यादा होगा।सत्ता और विपक्ष दोनों ने अपने-अपने पॉलिटिकल नैरेटिव फिक्स कर दिए हैं – कांग्रेस बार-बार “वोट चोरी” का मुद्दा उठाएगी।
भाजपा हर बार “गालीबाज राहुल गांधी” की लाइन दोहराएगी। बीच में चाहे खेजड़ी संरक्षण का सवाल हो, SI भर्ती का विवाद हो या झालावाड़ हादसे का दर्द, इन मुद्दों को कितना स्पेस मिलेगा, यह इस पर निर्भर करेगा कि दोनों बड़ी पार्टियां अपने शोर-शराबे से उन्हें कितना दबाती हैं या जगह देती हैं।