
राजस्थान के दौसा ज़िले में गुरुवार तड़के एक दर्दनाक सड़क हादसे ने एक परिवार की खुशियाँ छीन लीं। जयपुर–आगरा नेशनल हाईवे-21 पर खेड़ली मोड़ के पास तेज़ रफ़्तार कार ने सामने से आ रही बाइक को इतनी ज़ोरदार टक्कर मारी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए। हादसे में बाइक सवार दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए, जिनमें से एक की इलाज के दौरान मौत हो गई। यह दुर्घटना न केवल मानवीय त्रासदी का प्रतीक है, बल्कि हमारे समाज में बढ़ती सड़क लापरवाही और रफ़्तार की होड़ का भयावह उदाहरण भी प्रस्तुत करती है।
हादसे की पूरी घटना
जानकारी के अनुसार, यह हादसा गुरुवार तड़के लगभग चार बजे हुआ। उस समय सड़क पर ट्रैफिक अपेक्षाकृत कम था, लेकिन हाईवे पर अक्सर की तरह कुछ वाहन तेज़ रफ़्तार में दौड़ रहे थे। कठूमर, ज़िला अलवर निवासी मोहन महावर (आयु लगभग 35 वर्ष) और उनके रिश्तेदार रामेश्वर महावर (आयु लगभग 32 वर्ष) किसी निजी काम से दौसा की ओर जा रहे थे। जैसे ही वे खेड़ली मोड़ के पास पहुँचे, सामने से आ रही एक कार ने अचानक संतुलन खो दिया और बाइक को सीधा टक्कर मार दी।
टक्कर इतनी ज़ोरदार थी कि बाइक के पुर्ज़े सड़क पर बिखर गए और दोनों सवार कई फीट दूर जा गिरे। राहगीरों ने जब यह दृश्य देखा तो उन्होंने तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। कुछ स्थानीय लोगों ने घायल मोहन और रामेश्वर को उठाने का प्रयास किया और उन्हें प्राथमिक उपचार देने की कोशिश की, लेकिन हालत गंभीर देख तुरंत जिला अस्पताल दौसा भेजा गया।
पुलिस और राहत कार्य
सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस घटनास्थल पर पहुँची। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहन और बाइक को सड़क किनारे हटवाया ताकि यातायात सुचारू रूप से चलता रहे। मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ कर हादसे का ब्यौरा जुटाया गया। पुलिस ने बताया कि कार चालक घटनास्थल से फरार हो गया था, लेकिन वाहन के अवशेषों और नंबर प्लेट के आधार पर उसकी पहचान की जा रही है।
जिला अस्पताल पहुँचने पर डॉक्टरों ने मोहन महावर को मृत घोषित कर दिया, जबकि रामेश्वर महावर को गंभीर हालत में भर्ती किया गया है। डॉक्टरों के अनुसार, रामेश्वर के सिर और पैरों में गंभीर चोटें आई हैं और उसकी स्थिति अभी भी नाज़ुक बनी हुई है। पुलिस ने मृतक के परिजनों को सूचित कर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवाया।
परिजनों में मातम
मोहन महावर की मौत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गाँव कठूमर पहुँची, पूरे गाँव में मातम छा गया। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। स्थानीय लोगों के अनुसार, मोहन मेहनती और सौम्य स्वभाव के व्यक्ति थे, जो अपने परिवार की जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाते थे। उनकी अचानक मौत ने परिवार पर दुखों का पहाड़ तोड़ दिया है।
रामेश्वर महावर, जो इस हादसे में गंभीर रूप से घायल हैं, उनके भी परिवारजन अस्पताल पहुँचे और उनके उपचार के लिए प्रशासन से सहायता की मांग की है।
सड़क सुरक्षा पर उठे सवाल
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और रफ़्तार पर नियंत्रण की आवश्यकता पर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। जयपुर–आगरा नेशनल हाईवे (NH-21) देश के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक है। इस मार्ग पर भारी वाहन, निजी कारें और दोपहिया वाहन निरंतर चलते रहते हैं। इसके बावजूद कई जगहों पर उचित स्पीड लिमिट का पालन नहीं किया जाता, और कुछ स्थानों पर रात्रि के समय रोशनी की व्यवस्था भी अपर्याप्त है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि खेड़ली मोड़ क्षेत्र में पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। मोड़ के पास संकेतक बोर्ड और रिफ्लेक्टर लगे हैं, लेकिन अधिकांश वाहन चालक तेज़ रफ़्तार में चलते हुए उन पर ध्यान नहीं देते। ट्रैफिक विभाग द्वारा समय-समय पर चालान और जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं, मगर परिणाम अपेक्षित नहीं दिखाई दे रहे हैं।

विशेषज्ञों की राय
ट्रैफिक विशेषज्ञों के अनुसार, सड़क हादसों के मुख्य कारणों में लापरवाही, तेज़ रफ़्तार, नशे की हालत में ड्राइविंग, और सड़क डिज़ाइन की खामियाँ शामिल हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के अनुसार, भारत में हर साल लाखों सड़क दुर्घटनाएँ होती हैं, जिनमें से बड़ी संख्या मानव त्रुटियों के कारण होती है। यदि वाहन चालक नियमों का पालन करें और प्रशासन सख्ती से मॉनिटरिंग करे, तो इस तरह की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
प्रशासन की कार्रवाई
सदर थाना पुलिस ने मृतक मोहन महावर के परिजनों की रिपोर्ट के आधार पर कार चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि हादसे की जांच जारी है। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि पता चल सके कि कार किस दिशा से आ रही थी और टक्कर कैसे हुई। वाहन के अवशेषों के आधार पर कार का रजिस्ट्रेशन नंबर पता लगाया गया है, और चालक की तलाश की जा रही है।
जनभावना और संदेश
इस हादसे ने न केवल एक परिवार की जिंदगी बदल दी, बल्कि समाज को फिर एक बार चेतावनी दी है कि सड़क पर रफ़्तार कभी जीत नहीं सकती। कुछ पल की लापरवाही ज़िंदगीभर का पछतावा बन सकती है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि NH-21 पर स्पीड मॉनिटरिंग कैमरे लगाए जाएँ, रात्रिकालीन पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए और दुर्घटनाग्रस्त स्थलों पर चेतावनी बोर्डों की संख्या बढ़ाई जाए।
मोहन महावर की असमय मौत ने सबको झकझोर दिया है। उनके अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में कहा कि अगर सड़क सुरक्षा के नियमों का कड़ाई से पालन होता, तो शायद आज मोहन ज़िंदा होते।
निष्कर्ष
दौसा का यह हादसा केवल एक समाचार नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा पर गंभीर चिंतन का विषय है। हर चालक, चाहे वह कार चलाए या बाइक, को यह समझना होगा कि सड़क पर जिम्मेदारी से वाहन चलाना ही जीवन की सुरक्षा का सबसे बड़ा उपाय है। प्रशासन, पुलिस और जनता — तीनों को मिलकर ही ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि भविष्य में किसी और मोहन महावर की जान रफ़्तार की भेंट न चढ़े।

















