दिल्ली में अंतर्राज्यीय वाहन चोर गिरोह के तीन सदस्य गिरफ्तार, चोरी की तीन गाड़ियां बरामद
नई दिल्ली । पूर्वी दिल्ली में वाहन चोरी की बढ़ती घटनाओं के बीच एंटी ऑटो थेफ्ट स्क्वॉड (एएटीएस) और पूर्वी जिला पुलिस अंतर्राज्यीय गैंग बदमाशों को गिरफ्तार किया है। आरोपी मास्टर और डुप्लिकेट चाबियों की मदद से लग्जरी गाड़ियां चोरी कर लेते थे। पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपियों की निशानदेही पर करीब 55–60 लाख रुपए कीमत की तीन लग्ज़री गाड़ियां बरामद की गई हैं। साथ ही वाहन चोरी के पांच मामलों का खुलासा हुआ है। उन्होंने कहा कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मशरूर (56) निवासी सुल्तानपुर (यूपी), आसिफ (42) निवासी मेरठ (यूपी) और अकील (40), निवासी मुजफ्फरनगर (यूपी) के रूप में हुई है। तीनों आरोपी पहले भी कई आपराधिक मामलों में जेल जा चुके हैं। मशरूर पर 12, आसिफ पर 11 और अकील पर 10 आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस के अनुसार, ये सभी शातिर और एक्सपर्ट ऑटो-लिफ्टर हैं। पूर्वी जिला पुलिस के ऑपरेशन्स विंग को वाहन चोरी की वारदातों पर अंकुश लगाने के निर्देश दिए गए थे। इसके तहत एडिशनल डीसीपी/ऑपरेशंस संजय कुमार की निगरानी और इंस्पेक्टर पवन यादव के नेतृत्व में एएटीएस की विशेष टीम गठित की गई, जो लगातार कार्रवाई करते हुए अपराधियों को गिरफ्तार कर रही है।
दिल्ली में अंतर्राज्यीय वाहन चोर गिरोह के तीन सदस्य गिरफ्तार, चोरी की तीन गाड़ियां बरामद
पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी दिल्ली के विभिन्न इलाकों से महंगी गाड़ियां डुप्लिकेट चाबी से चोरी कर उन्हें मेरठ ले जाते थे, जहां नकली नंबर प्लेट लगाकर उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मणिपुर में बेच देते थे। वे वारदात के दौरान मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश से जारी फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल करते थे, जिससे पुलिस इनको पकड़ न पाए। पुलिस रिमांड के दौरान कौशांबी और सिद्धार्थ विहार, गाजियाबाद में छापेमारी कर पीएस हरि नगर से चोरी हुई किआ सेल्टोस और पीएस प्रीत विहार से चोरी हुई मारुति ब्रेजा बरामद की गई। इसके अलावा गुजरात-राजस्थान सीमा के पास सांचौर से एक महिंद्रा स्कॉर्पियो क्लासिक नकली नंबर प्लेट के साथ बरामद हुई। आरोपियों के कब्जे से तीन जोड़ी फर्जी नंबर प्लेट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए गए हैं। फिलहाल पुलिस मोबाइल फोन और अन्य उपकरणों का तकनीकी विश्लेषण कर गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।
दिल्ली : 72 घंटे के अंदर पुलिस ने हत्याकांड का खुलासा किया, दो आरोपी गिरफ्तार
नई दिल्ली । दिल्ली के रोहिणी में पेट्रोल पंप के पास 16 फरवरी को हुई घटना का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। रोहिणी जिले के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त राजीव रंजन ने मामले का खुलासा करते हुए बड़ी जानकारी दी है। बता दें कि बीते सोमवार को शाम 6:56 बजे बेगमपुर पुलिस स्टेशन को सेक्टर 23, रोहिणी में पेट्रोल पंप के पास जमीन पर सीने में चाकू के घावों से घायल एक व्यक्ति के बेहोश पड़े होने की सूचना मिली थी। जानकारी मिलते ही पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और घायल व्यक्ति को एसजीएम अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक की पहचान अमरनाथ यादव के रूप में हुई थी। जिसको चाकू मारकर मोबाइल फोन लूट लिया गया था। बेगमपुर पुलिस स्टेशन में बीएनएस की धारा 103(1) के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। बेगमपुर एसएचओ के नेतृत्व में एक टीम ने तीन दिन के अंदर ही दो आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की। जांच के दौरान, मोबाइल क्राइम टीम और एफएसएल रोहिणी टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया और साक्ष्य एकत्र किए।
दिल्ली : 72 घंटे के अंदर पुलिस ने हत्याकांड का खुलासा किया, दो आरोपी गिरफ्तार
जांच टीम ने इलाके के आसपास के रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं, निगरानी योजना के सदस्यों और कबाड़ इकट्ठा करने वालों से गहन पूछताछ की। तकनीकी निगरानी और मुखबिर के जानकारी के आधार पर, टीम को विश्वसनीय गुप्त सूचना मिली कि घटना स्थल के पास दो व्यक्तियों को एक ग्रे स्कूटी पर घूमते देखा गया था। संदिग्धों के बारे में बताया गया कि वे जीटीबी कॉलोनी (सरदार कॉलोनी), रोहिणी के पास रहने वाले नशाखोर थे और अक्सर उस इलाके में आते-जाते थे। सूचना के आधार पर संदिग्धों का पता लगाने के लिए निरंतर प्रयास किए गए। 19 फरवरी गुरुवार को, 29 वर्षीय रोहित नाम के एक संदिग्ध का पता लगाया गया और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ के दौरान, उसने खुलासा किया कि उसने अपने साथी दुर्गेश उर्फ दुर्गी के साथ मिलकर अपराध किया था। पुलिस ने दुर्गेश उर्फ दुर्गी को भी उसके ठिकाने से गिरफ्तार कर लिया। उनकी निशानदेही पर, मृतक का मोबाइल फोन, घायल चश्मदीद का मोबाइल फोन, वारदात में इस्तेमाल किया गया वाहन, चाकू और दोनों आरोपियों द्वारा अपराध के समय पहने गए खून से सने कपड़े बरामद कर लिए गए।
झारखंड: बच्चा चोरी की अफवाह में भीड़ का निशाना बन रहे निर्दोष, पांच दिन में 12 से ज्यादा घटनाएं
रांची । झारखंड में बच्चा चोरी की अफवाहों ने खतरनाक रूप ले लिया है। पिछले पांच दिनों में 12 से अधिक ऐसी घटनाएं हुई हैं, जहां बच्चा चोरी की अफवाह के कारण भीड़ ने निर्दोषों को निशाना बनाया। गुरुवार को रांची में महज शक के आधार पर तीन निर्दोष लोगों को भीड़ ने घेरकर पीट दिया। मामला एदलहातु का है, जहां दो महिलाओं और एक पुरुष पर बच्चा चोरी का आरोप लगाकर हमला किया गया। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से तीनों की जान बच सकी। प्रारंभिक जांच में किसी संगठित बच्चा चोरी गिरोह की पुष्टि नहीं हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दो महिलाएं और एक पुरुष ऑटो से एक बच्चे को लेकर जा रहे थे। बच्चा रो रहा था। इसी दौरान किसी ने बच्चा चोरी का शोर मचा दिया। अफवाह फैलते ही आसपास के लोग इकट्ठा हो गए और बिना तथ्य की पुष्टि किए ऑटो को रोककर तीनों को नीचे उतार लिया। देखते ही देखते भीड़ उग्र हो गई और मारपीट शुरू कर दी। सूचना मिलते ही बरियातू थाना प्रभारी मनोज कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने हस्तक्षेप कर तीनों को भीड़ से मुक्त कराया और थाने ले आई। अधिकारियों का कहना है कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ कि बच्चा चोरी का कोई प्रयास हुआ था या नहीं। संबंधित पक्षों से पूछताछ की जा रही है।
झारखंड: बच्चा चोरी की अफवाह में भीड़ का निशाना बन रहे निर्दोष, पांच दिन में 12 से ज्यादा घटनाएं
इसी तरह पिछले कुछ दिनों से राज्य के अलग-अलग जिलों में बच्चा चोर गिरोह के सक्रिय होने की अफवाहें सोशल मीडिया, विशेषकर व्हाट्सएप के जरिए तेजी से फैली हैं। धनबाद, चतरा, जमशेदपुर, जामताड़ा, गिरिडीह, रामगढ़, लातेहार और बोकारो में भी भीड़ की ओर से संदेह के आधार पर लोगों की पिटाई की घटनाएं सामने आईं। चतरा जिले के पिपरवार में तीन दिन पहले बच्चा चोरी के संदेह में एक व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। बाद में पता चला कि जिस व्यक्ति को भीड़ ने मार डाला, वह विक्षिप्त था। बुधवार को धनबाद के बाघमारा थाना क्षेत्र में बच्चा चोर की अफवाह में भीड़ ने दो महिलाओं पर हमला किया। बाद में पुलिस दोनों महिलाओं को भीड़ से बचाकर थाने तक सुरक्षित लेकर आई। 16 फरवरी को बोकारो में बच्चा चोर गैंग से जुड़े होने के आरोप में लोगों ने छह महिलाओं की पिटाई कर दी। बाद में पुलिस ने हस्तक्षेप कर उन्हें बचाया। झारखंड पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध सूचना की पुष्टि किए बिना कानून हाथ में न लें और तत्काल पुलिस को सूचित करें।
दिल्ली में फर्जी एनआईए आई-कार्ड के सहारे नौकरी का झांसा देने वाला गिरफ्तार
नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली में फर्जी पहचान पत्र के जरिए नौकरी दिलाने का झांसा देने वाले एक युवक को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। जानकारी के अनुसार, कोतवाली थाना पुलिस की गश्ती टीम ने बुधवार को लाल किला क्षेत्र के पीछे दिल्ली चलो पार्क के पास एक संदिग्ध वाहन से आरोपी को हिरासत में लिया। वाहन में उसके साथ एक नाबालिग भी मौजूद था, जिसे बाद में परिजनों के संपर्क में लाया गया। पुलिस के अनुसार, तलाशी के दौरान आरोपी के पास से राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) का एक कथित पहचान पत्र बरामद हुआ। प्रारंभिक जांच में यह आई-कार्ड फर्जी पाया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि एनआईए इस प्रकार का कोई पहचान पत्र जारी नहीं करती। जांच में सामने आया कि आरोपी इसी फर्जी पहचान के जरिए लोगों पर रौब जमाकर उन्हें सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देता था। प्राथमिक पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के एक नाबालिग को दिल्ली में नौकरी दिलाने का झांसा दिया था। परिवार की मजबूरी का फायदा उठाते हुए उसने उनसे अग्रिम राशि भी वसूल ली। दोनों 12 फरवरी को कश्मीर से दिल्ली पहुंचे थे और जामा मस्जिद इलाके के एक गेस्ट हाउस में ठहरे हुए थे।
दिल्ली में फर्जी एनआईए आई-कार्ड के सहारे नौकरी का झांसा देने वाला गिरफ्तार
सूत्रों के मुताबिक, आरोपी ने दिल्ली में अपने कुछ कथित संपर्कों के माध्यम से नौकरी की संभावनाएं तलाशने का दिखावा किया, लेकिन कोई ठोस व्यवस्था नहीं कर सका। इसी बीच उसकी गतिविधियां संदिग्ध लगने पर पुलिस ने निगरानी शुरू की। पूछताछ के दौरान उसके बयान और दस्तावेजों में विरोधाभास सामने आया, जिसके बाद फर्जी आई-कार्ड का मामला उजागर हुआ। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। संयुक्त पूछताछ विशेष प्रकोष्ठ, खुफिया एजेंसियों और अन्य संबंधित विभागों के साथ जारी है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपी ने अब तक कितने लोगों को इस तरह ठगा है। मामले में आगे की जांच जारी है।
दौसा में आपदा प्रबंधन का महाभ्यास : एनडीआरएफ ने परखा भूकंप से बचाव का रिस्पॉन्स टाइम, आईओसीएल पाइपलाइन लीकेज पर भी हुई मॉक ड्रिल
दौसा। जिले में भूकंप और पाइपलाइन लीकेज जैसी संभावित प्राकृतिक व तकनीकी आपदाओं से निपटने की तैयारियों को पुख्ता करने के उद्देश्य से बुधवार को दो महत्वपूर्ण मॉक ड्रिल (पूर्वाभ्यास) आयोजित किए गए। वडोदरा यूनिट की एनडीआरएफ टीम और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में हुए इन अभ्यासों के जरिए रेस्क्यू टीमों की दक्षता और विभिन्न विभागों के बीच आपसी समन्वय को परखा गया। दबे और छत पर फंसे लोगों का सफल रेस्क्यू कलक्ट्रेट परिसर में दोपहर 3 बजे भूकंप का अलर्ट जारी किया गया, जिसमें बहुमंजिला इमारत को भारी नुकसान होने की सूचना दी गई। सूचना मिलते ही एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, नागरिक सुरक्षा, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और अग्निशमन दल मौके पर पहुंचे। लाइव डेमो: मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए कटर और आधुनिक उपकरणों का प्रयोग किया गया, वहीं छत पर फंसे लोगों को ‘जिप लाइन’ के जरिए सुरक्षित नीचे उतारने का हैरतअंगेज अभ्यास किया गया। मेडिकल रिस्पॉन्स: मौके पर ही ‘मेडिकल एड पोस्ट’ बनाकर घायलों को प्राथमिक उपचार दिया गया और 5 गंभीर घायलों को एम्बुलेंस से जिला अस्पताल पहुंचाया गया। पाइपलाइन में आग लगने की स्थिति का अभ्यास नांगल राजावतान के रामथला गांव में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) द्वारा दूसरी मॉक ड्रिल आयोजित की गई। यहाँ भूमिगत पेट्रोलियम पाइपलाइन में लीकेज के बाद आग लगने का काल्पनिक दृश्य (सिनेरियो) तैयार किया गया।
दौसा में आपदा प्रबंधन का महाभ्यास : एनडीआरएफ ने परखा भूकंप से बचाव का रिस्पॉन्स टाइम, आईओसीएल पाइपलाइन लीकेज पर भी हुई मॉक ड्रिल
आईओसीएल की तकनीकी टीम, फायर ब्रिगेड और मेडिकल टीम ने आपसी तालमेल से आग पर काबू पाने और आपातकालीन स्थिति को नियंत्रित करने का सफल प्रदर्शन किया। कलेक्टर और एसपी ने की समीक्षा जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार और पुलिस अधीक्षक सागर राणा ने स्वयं मौके पर मौजूद रहकर पूरी कार्यवाही की निगरानी की। जिला कलेक्टर ने रेस्क्यू टीमों के ‘रिस्पॉन्स टाइम’ पर संतोष जताते हुए कहा कि सभी एजेंसियों ने बेहतरीन तालमेल दिखाया है। एनडीआरएफ के सहायक कमांडेंट प्रवीण कुमार ने बताया कि इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आपदा के समय जीवन और संपत्ति के नुकसान को न्यूनतम करना है। अधिकारियों की उपस्थिति इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हेमंत कलाल, एडीएम अरविंद शर्मा, एसडीएम संजू मीणा सहित नगर परिषद और नगर सुधार न्यास के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अंत में एक प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें आपदा प्रबंधन में उपयोग होने वाले अत्याधुनिक उपकरणों के बारे में जानकारी दी गई।
कोलकाता पुलिस ने ऑनलाइन धोखाधड़ी के आरोप में हरियाणा का युवक किया गिरफ्तार
कोलकाता । कोलकाता पुलिस ने ऑनलाइन ठगी के मामले में एक आरोपी को हरियाणा से गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार आरोपी ने ‘एम परिवहन’ नाम की एपीके फाइल के जरिए साइबर धोखाधड़ी को अंजाम दिया था। पुलिस सूत्रों ने बताया कि आरोपी की पहचान 29 वर्षीय दीपक कुमार के रूप में हुई है, जो झज्जर का रहने वाला है। उसे बुधवार को 5 लाख रुपए से अधिक की ठगी के मामले की जांच के बाद गिरफ्तार किया गया। इस मामले में शिकायत पिछले वर्ष 12 सितंबर को कोलकाता पुलिस के साइबर क्राइम थाने में दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता को एक संदेश भेजा गया था जिसमें बताया गया कि उसके वाहन के नाम पर ई-चालान जारी हुआ है। अधिक जानकारी के लिए एक लिंक भी भेजा गया। जैसे ही पीड़ित ने लिंक पर क्लिक किया, उसके खाते से 60 हजार रुपए निकल गए। जांच के दौरान पुलिस ने संदिग्ध एपीके फाइल के सर्वर और कई आईपी एड्रेस के आधार पर आरोपी का पता लगाया। इसी तकनीकी जांच से दीपक कुमार का नाम सामने आया। इसके बाद पुलिस ने उसे नोटिस भेजा और उसका मोबाइल फोन और सिम कार्ड जब्त कर लिया।
कोलकाता पुलिस ने ऑनलाइन धोखाधड़ी के आरोप में हरियाणा का युवक किया गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार, आरोपी पहले और चौथे नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। दूसरे और तीसरे नोटिस पर उसने समय मांगा। पूछताछ के दौरान उसके जवाब विरोधाभासी पाए गए, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शहर में हर दिन साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज हो रही हैं। इन बढ़ते मामलों से निपटने के लिए कोलकाता पुलिस ने हाल ही में सात नए विशेष प्रकोष्ठ बनाए हैं, जो साइबर अपराधों की जांच करेंगे। इसके अलावा, साइबर धोखाधड़ी से संबंधित शिकायतों के लिए एक नया हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है। कोलकाता और आसपास के इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है, ताकि विभिन्न तरीकों से होने वाले ऑनलाइन अपराधों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
मुंबई एयरपोर्ट पर 24 करोड़ के ड्रग्स और 2 करोड़ का सोना जब्त, तस्करी के आरोपी पकड़े
मुंबई । कस्टम विभाग ने मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बड़ी कार्रवाई की है। एक सप्ताह में नशीले पदार्थ और सोने की तस्करी के कई मामलों का खुलासा किया गया। एयरपोर्ट कमिश्नरेट, मुंबई कस्टम्स जोन-III के अधिकारियों ने 11 फरवरी 2026 से 17 फरवरी 2026 तक की ड्यूटी के दौरान तस्करी के कई मामले पकड़े। इस दौरान मुख्य रूप से हाइड्रोपोनिक वीड (एक प्रकार का नशीला पदार्थ) और अवैध सोना जब्त किया गया। स्पॉट चेक और एपीआईएस प्रोफाइलिंग के आधार पर कुल छह मामले दर्ज किए गए। इनमें से तीन मामलों में बैंकॉक से आने वाले तीन यात्रियों से 9.581 किलोग्राम संदिग्ध हाइड्रोपोनिक वीड बरामद हुआ। इसकी अनुमानित कीमत बाजार में लगभग 9.581 करोड़ रुपए है। इन यात्रियों को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट, 1985 के तहत गिरफ्तार कर लिया गया।
मुंबई एयरपोर्ट पर 24 करोड़ के ड्रग्स और 2 करोड़ का सोना जब्त, तस्करी के आरोपी पकड़े
इसी तरह, तीन अन्य मामलों में कुल 1336.62 ग्राम सोना जब्त किया गया, जिसकी कीमत करीब 1.85 करोड़ रुपए है। ये मामले भी प्रोफाइलिंग के आधार पर पकड़े गए, जिसमें यात्रियों से छिपाकर लाया गया सोना बरामद हुआ। खास खुफिया जानकारी के आधार पर तीन और मामले दर्ज किए गए। इनमें भी बैंकॉक से आए तीन यात्रियों से कुल 14.780 किलोग्राम संदिग्ध हाइड्रोपोनिक वीड बरामद हुआ। इसकी बाजार में अनुमानित कीमत लगभग 14.780 करोड़ बताई गई है। इन यात्रियों को भी एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया। हाल के महीनों में हाइड्रोपोनिक वीड ( यह सामान्य गांजे से ज्यादा ताकतवर होता है) की तस्करी में तेजी आई है, खासकर थाईलैंड से आने वाली उड़ानों में। अधिकारियों ने कहा कि ऐसे प्रयासों को नाकाम करने के लिए लगातार निगरानी बढ़ाई जा रही है। कस्टम विभाग ने यात्रियों से अपील की है कि वे कानून का पालन करें और कोई भी अवैध सामान न लाएं। तस्करी के मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
कोलकाता: पति-पत्नी से 3 करोड़ की ठगी करने वाला गिरफ्तार, मलेशिया कनेक्शन आया सामने
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक बड़े साइबर ठगी और सिम बॉक्स रैकेट का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। इस मामले में 3 करोड़ रुपए से अधिक की ठगी हुई थी, जिससे न केवल आम नागरिकों बल्कि व्यवसायिक जगत में भी सुरक्षा और डिजिटल लेन-देन को लेकर चिंता बढ़ गई है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान मोहम्मद अमजद (38) के रूप में हुई है। उसे सोमवार को सेंट्रल कोलकाता के एमहर्स्ट स्ट्रीट इलाके में छापेमारी के दौरान पकड़ लिया गया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी के पीछे की जानकारी अबीर शेख से पूछताछ के दौरान सामने आई, जिसे हाल ही में बिधाननगर पुलिस ने इसी तरह के सिम बॉक्स रैकेट में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
पुलिस ने बताया कि यह साइबर ठगी पिछले साल अक्टूबर में हुई थी। बेहाला के व्यवसायी बिधान घोष दस्तीदार को एक व्यक्ति ने कूरियर कंपनी का अधिकारी बनकर फोन किया और उन्हें बताया कि उनके नाम से भेजे गए एक पार्सल में प्रतिबंधित ड्रग्स पाए गए हैं। इस जानकारी के आधार पर पीड़ित को डराने और उन्हें मानसिक दबाव में लाने की योजना बनाई गई थी। इसके बाद ठगों ने मामला सीबीआई और ईडी को भेजे जाने की धमकी दी।
थोड़ी ही देर बाद एक अन्य व्यक्ति ने खुद को सीबीआई अधिकारी अमित कुमार बताकर बिधान घोष और उनकी पत्नी से वीडियो कॉल किया। वीडियो कॉल के दौरान दंपती को गिरफ्तारी की धमकी दी गई और कहा गया कि उन्हें लगातार अपने मोबाइल ऑन रखना होगा क्योंकि सीबीआई और अन्य एजेंसियां उन्हें सर्विलांस पर रख रही हैं। इस वीडियो कॉल के दौरान ठगों ने नकली सीबीआई, ईडी और आरबीआई के पहचान पत्र और दस्तावेज भी दिखाए, ताकि पीड़ित पूरी तरह भ्रमित और डर में रहे।
इस कॉल में बाद में दो और लोग शामिल हुए, जिन्होंने खुद को आईपीएस अधिकारी बताया और पति-पत्नी को गिरफ्तार करने की धमकी दी। इस पूरे सिलसिले में पीड़ित से कुल 3 करोड़ रुपए की ठगी की गई। पुलिस ने बताया कि इस प्रकार की साइबर ठगी में ठगों ने तकनीकी ज्ञान का भरपूर इस्तेमाल किया। यह मामला इस बात को भी उजागर करता है कि अपराधी आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग कर कैसे आम नागरिकों को अपने जाल में फंसा सकते हैं।
गिरफ्तारी से पहले पुलिस ने कई ठिकानों पर छापेमारी की और सिम बॉक्स रैकेट से जुड़े गैरकानूनी सामान जब्त किए। बरामद सामग्री में 12 सिम बॉक्स, एक लैपटॉप, नौ राउटर, वाई-फाई से जुड़े सीसीटीवी कैमरे, 17 मोबाइल फोन, 2,250 सिम कार्ड और अन्य तकनीकी उपकरण शामिल थे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सिम बॉक्स का इस्तेमाल अपराधियों ने विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय कॉल को स्थानीय कॉल की तरह दिखाने और साइबर ठगी को अंजाम देने के लिए किया था।
जांच में यह भी सामने आया कि ठगी के लिए आम मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं किया गया था, बल्कि ‘सिम बॉक्स’ नाम के खास उपकरणों का प्रयोग किया गया। यह डिवाइस एक साथ कई सिम कार्ड को इस्तेमाल कर इंटरनेट और कॉल रूटिंग तकनीक के माध्यम से कॉल को इस तरह बदल देता था कि उसे स्थानीय कॉल की तरह दिखाया जा सके। इससे न केवल कॉल रिकॉर्डिंग और ट्रैकिंग मुश्किल होती थी बल्कि बैंकिंग और वित्तीय लेन-देन की सुरक्षा भी प्रभावित होती थी।
कोलकाता: पति-पत्नी से 3 करोड़ की ठगी करने वाला गिरफ्तार, मलेशिया कनेक्शन आया सामने
प्रारंभिक पूछताछ में पता चला कि बांग्लादेश का नागरिक अबीर इस अवैध कॉल रूटिंग में सक्रिय रूप से शामिल था और ठगी के तकनीकी संचालन को नियंत्रित कर रहा था। इसके अलावा जांच में यह भी सामने आया कि इस गिरोह का मुख्य सरगना त्रिपुरा का रहने वाला बिप्लब हुसैन है, जो पूरे नेटवर्क की योजना और कार्यान्वयन को नियंत्रित करता था। उसके साथ चुंग वेई कियात नामक मलेशियाई नागरिक भी जुड़ा हुआ था, जो भारत में मेडिकल वीजा पर आया था। यह गिरोह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय था और इसमें विदेशी नागरिकों की भूमिका स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थी, जिससे यह मामला और जटिल हो गया।
पुलिस का कहना है कि यह गिरोह केवल ठगी तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके माध्यम से लोगों को डराने, ब्लैकमेल करने और साइबर माध्यमों से धन हड़पने की योजना बनाई जाती थी। गिरोह के पास तकनीकी उपकरण, नकली पहचान पत्र, सिम कार्ड, और राउटर सहित कई आधुनिक साधन मौजूद थे, जिनके जरिए वे बड़े पैमाने पर अपराध को अंजाम दे रहे थे। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए मोहम्मद अमजद और अन्य सहयोगी गिरोह के संचालन और तकनीकी प्रक्रियाओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दे रहे हैं।
जांच के अनुसार, गिरोह ने पीड़ितों को डराने और उन्हें नियंत्रित करने के लिए वीडियो कॉल और नकली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। इसके जरिए पीड़ित दंपती मानसिक दबाव में आ गए और ठगों द्वारा बताई गई शर्तों का पालन करने लगे। साइबर ठगी की इस घटना में तकनीक और डर का संयोजन स्पष्ट रूप से देखा गया, जिससे यह मामला अत्यंत गंभीर और व्यापक हो गया।
इस पूरे मामले से यह संकेत मिलता है कि साइबर अपराध और अंतरराष्ट्रीय कॉल रूटिंग तकनीक का दुरुपयोग किस हद तक बढ़ गया है। पुलिस ने बताया कि अब जांच का मुख्य फोकस गिरोह के अन्य सहयोगियों और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की पहचान करना है। इसके अलावा, सिम बॉक्स, राउटर और अन्य तकनीकी उपकरणों के प्रयोग और उनके नेटवर्क का विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
कोलकाता पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी और उनके सहयोगियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और उनसे पूछताछ के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की जानकारी हासिल की जाएगी। यह मामला तकनीकी अपराध, साइबर ठगी और अंतरराष्ट्रीय कॉल रूटिंग के जरिए किए जाने वाले अपराधों पर कानून और सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता का उदाहरण है।
इस ऑपरेशन में पुलिस की सतर्कता और रणनीतिक कार्रवाई स्पष्ट रूप से दिखाई दी। छापेमारी और गिरफ्तारियों के दौरान बरामद सामग्री, सिम बॉक्स और डिजिटल उपकरणों के विश्लेषण के आधार पर अब आगे की जांच तेज कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और तकनीकी विशेषज्ञता का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
अंततः, कोलकाता में सिम बॉक्स रैकेट और साइबर ठगी का यह खुलासा एक गंभीर चेतावनी है कि डिजिटल और अंतरराष्ट्रीय तकनीक का गलत इस्तेमाल किस प्रकार से बड़े पैमाने पर वित्तीय अपराध और ठगी को अंजाम दे सकता है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच जारी है और सभी दोषियों को कानून के तहत दंडित किया जाएगा। साथ ही, आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश की सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि इस तरह के अपराधों को रोकने में सहयोग मिल सके।
रोहित शेट्टी फायरिंग केस: 5 आरोपी मकोका कोर्ट में पेश, 23 फरवरी तक पुलिस हिरासत में
मुंबई। बॉलीवुड के मशहूर निर्देशक रोहित शेट्टी के जुहू स्थित घर के बाहर हुई फायरिंग मामले में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अपनी सतर्कता और रणनीतिक कार्रवाई से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन्हें महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (मकोका) कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने सभी पांचों आरोपियों को 23 फरवरी तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है, ताकि उनके खिलाफ विस्तृत पूछताछ और जांच की जा सके। पुलिस ने अदालत को बताया कि इस मामले में सोमवार को गिरफ्तार किए गए सात अन्य लोग, जिनमें कथित शूटर भी शामिल है, एक अलग गिरोह से जुड़े हैं। वहीं, शुरुआती दौर में गिरफ्तार किए गए पांच आरोपी पुणे से मुंबई तक वाहन और हथियार पहुंचाने वाले दूसरे गिरोह का हिस्सा थे। इस रणनीति का उद्देश्य दोनों गिरोहों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करना है ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि दोनों गिरोहों के बीच समन्वय किसके निर्देश पर हो रहा था और किसके फंडिंग के माध्यम से इस घटना को अंजाम दिया गया। यह जानकारी पुलिस के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे गिरोहों की संरचना, संचालन पद्धति और उनके संभावित आगे की योजनाओं का पता चलेगा।
जांच में यह सामने आया कि रोहित शेट्टी के जुहू स्थित आवास के बाहर पांच राउंड गोलियां चलाई गई थीं। यह घटना न केवल मुंबई बल्कि पूरे फिल्म उद्योग और आम जनता के बीच भय और सुरक्षा के प्रति चिंता का कारण बनी। मुंबई क्राइम ब्रांच की गहन जांच में पता चला कि वारदात में इस्तेमाल की गई गाड़ी पुणे से लाई गई थी। जांच के अनुसार, यह वाहन पुणे के एक व्यक्ति का था, जिसने इसे कुछ दिन पहले 30 हजार रुपये में आरोपी आदित्य गायकी को बेचा था। इसके बाद आदित्य गायकी और एक अन्य आरोपी, समर्थ पोमाजी, ने इस वाहन को मुंबई के जुहू इलाके में निर्धारित स्थान पर छोड़ दिया। पुलिस का मानना है कि वाहन की इस तरह की ढुलाई एक सुनियोजित योजना का हिस्सा थी, जिससे घटना को अंजाम देने वाले शूटर तक गाड़ी और हथियार आसानी से पहुंचे।
जांच में यह भी सामने आया कि फरार आरोपी शुभम लोनकर ने मुंबई में दहशत फैलाने की साजिश रची थी। पुलिस के अनुसार, उसने गिरफ्तार आरोपियों से स्पष्ट कहा था कि उसे मुंबई में “कुछ बड़ा” करना है। इस संदर्भ में यह बताया गया कि शुभम लोनकर ने आरोपियों के साथ संपर्क बनाए रखने के लिए एक ऐप का इस्तेमाल किया और एक आरोपी के खाते में 40 हजार रुपये भी ट्रांसफर किए। यह स्पष्ट संकेत है कि अपराधियों के बीच वित्तीय और संचालन संबंधी समन्वय डिजिटल माध्यमों के जरिए किया जा रहा था, जो आज के तकनीकी युग में अपराधियों द्वारा अपनाई जाने वाली रणनीतियों में से एक है।
पुलिस का कहना है कि वाहन खरीदकर मुंबई लाने वाले आरोपियों को शूटर की पहचान और उसकी भूमिका की जानकारी नहीं थी। उनका काम केवल वाहन और हथियार मुंबई तक सुरक्षित पहुंचाना था। इसके बाद शुभम लोनकर ने शूटर को गाड़ी लेने और फायरिंग की घटना को अंजाम देने के निर्देश दिए। यह मामला इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि कैसे अपराधी एक जटिल नेटवर्क के माध्यम से अपराध को अंजाम देते हैं, जिसमें विभिन्न स्तरों पर अलग-अलग जिम्मेदारियां तय होती हैं।
रोहित शेट्टी फायरिंग केस: 5 आरोपी मकोका कोर्ट में पेश, 23 फरवरी तक पुलिस हिरासत में
विस्तृत जांच में यह भी सामने आया है कि मुंबई लाने वाले गिरोह और शूटर के गिरोह के बीच संबंध केवल फायरिंग तक सीमित नहीं थे, बल्कि यह नेटवर्क भविष्य में और भी संभावित अपराधों को अंजाम देने के लिए समन्वयित कार्य करने की योजना बना रहा था। पुलिस का उद्देश्य अब इन दोनों गिरोहों के बीच सम्पूर्ण संपर्क और संचालन पद्धति का खुलासा करना है ताकि अपराधियों के व्यापक नेटवर्क को तहस-नहस किया जा सके।
इसके अलावा पुलिस ने बताया कि शुभम लोनकर ने फायरिंग के लिए रणनीति बनाई थी और डिजिटल माध्यमों के जरिए आरोपियों को निर्देश दिए। यह आधुनिक तकनीक का दुरुपयोग कर अपराधों की योजना बनाने का एक उदाहरण है। पुलिस के मुताबिक, मामले में उपयोग की गई गाड़ी और हथियार की पूरी श्रृंखला का ट्रैकिंग किया जा रहा है, जिससे यह पता चले कि गिरोह अन्य अपराधों में किस प्रकार शामिल था और क्या भविष्य में इसी तरह की घटनाओं की योजना बना रहे थे।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस उन सभी फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है जो इस फायरिंग और जुड़े गिरोह के संचालन में शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस पूरी साजिश का भंडाफोड़ करने में सक्षम होगी। इसके अलावा, यह भी ध्यान में रखा जा रहा है कि मामले में शामिल गिरोहों की वित्तीय और डिजिटल लेन-देन की जांच की जाए ताकि उनके सम्पूर्ण नेटवर्क की पहचान हो सके।
मुंबई पुलिस की यह कार्रवाई कानून और व्यवस्था बनाए रखने के प्रति उनकी तत्परता और सक्रियता को दर्शाती है। रोहित शेट्टी जैसे प्रमुख फिल्म निर्देशक के घर के बाहर हुई फायरिंग जैसी घटनाएं न केवल सुरक्षा की गंभीर चुनौती हैं बल्कि आम जनता के लिए भी चिंता का विषय बन जाती हैं। इस घटना से स्पष्ट होता है कि अपराधियों के गिरोह योजनाबद्ध तरीके से कार्य करते हैं और इनके खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस को तकनीकी और मानवीय खुफिया तंत्र का समन्वय करना पड़ता है।
मुंबई क्राइम ब्रांच के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल फायरिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़े और संगठित अपराध नेटवर्क का सक्रिय होना भी सामने आया है। गिरफ्तार आरोपियों और फरार आरोपियों से पूछताछ के बाद ही पूरे नेटवर्क और उनके संचालन की रणनीति का पता चलेगा। इस प्रक्रिया में पुलिस डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों का उपयोग कर रही है।
इस पूरे मामले में यह भी महत्वपूर्ण है कि पुलिस दोनों गिरोहों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ कर रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कौन किसे निर्देश दे रहा था, कौन फंडिंग कर रहा था और किसके आदेश पर अपराध को अंजाम दिया गया। इस रणनीति से पुलिस को यह समझने में मदद मिलेगी कि गिरोहों का नेतृत्व किसके हाथ में है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कौन से उपाय करने की जरूरत है।
साथ ही, इस मामले से यह भी संकेत मिलता है कि अपराधी डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करके कम जोखिम में अधिक प्रभावशाली अपराध करने की योजना बनाते हैं। इसलिए पुलिस ने डिजिटल निगरानी को भी पूरी तरह सक्रिय किया है, ताकि अपराधियों के सभी संपर्कों और संभावित अपराधों का पता लगाया जा सके।
अंततः, रोहित शेट्टी के जुहू स्थित घर के बाहर हुई फायरिंग के मामले में गिरफ्तार आरोपियों की गिरफ्तारी और उनसे पूछताछ, मुंबई पुलिस की सक्रियता और अपराध नेटवर्क के खिलाफ उनकी रणनीति का परिचायक है। पुलिस का उद्देश्य न केवल इस घटना का खुलासा करना है बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अपराधियों के संपूर्ण नेटवर्क को बेनकाब करना भी है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस पूरी तरह जुटी हुई है, ताकि किसी भी तरह की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
दिल्ली पुलिस ने 7.5 करोड़ रुपए की हेरोइन के साथ दंपति समेत तीन को किया गिरफ्तार
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) ने राजधानी और एनसीआर में सक्रिय एक बड़े ड्रग नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए मंगलवार रात भोपुरा बॉर्डर के पास 1.504 किलोग्राम स्मैक/हेरोइन बरामद की, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 7.5 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने पति-पत्नी समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, जो सुनियोजित तरीके से उत्तर प्रदेश से दिल्ली-एनसीआर में नशीले पदार्थों की सप्लाई कर रहे थे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मुखबिर से विशेष सूचना प्राप्त हुई थी कि आरिफ खान नामक व्यक्ति बरेली, उत्तर प्रदेश से भारी मात्रा में हेरोइन लाकर गाजियाबाद और दिल्ली के विभिन्न इलाकों में वितरित करता है। सूचना की पुष्टि के लिए पुलिस टीम ने भोपुरा बॉर्डर क्षेत्र में गुप्त रेकी की और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी। तकनीकी निगरानी और मानवीय खुफिया तंत्र को सक्रिय करते हुए इंस्पेक्टर विकास पन्नू के नेतृत्व और एसीपी/एएनटीएफ सतेंद्र मोहन के पर्यवेक्षण में एक विशेष टीम गठित की गई, जिसने रणनीतिक तरीके से जाल बिछाया। इसी दौरान गाजियाबाद की ओर से आती एक संदिग्ध वैगनआर टैक्सी को चिन्हित कर घेराबंदी के बाद रोका गया। कार की तलाशी लेने पर उसमें सवार आरिफ खान (36) और उसकी पत्नी शिखा अली (30) को हिरासत में लिया गया। प्रारंभिक पूछताछ के दौरान दोनों के पास से 303 ग्राम हेरोइन बरामद हुई, जबकि कार की पिछली सीट पर रखे बैग की जांच करने पर 1007 ग्राम अतिरिक्त हेरोइन मिली। इस प्रकार मौके पर ही कुल 1310 ग्राम हेरोइन जब्त की गई। पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे परिवार के साथ यात्रा का बहाना बनाकर रात के समय तस्करी करते थे ताकि पुलिस को उन पर संदेह न हो। दंपति ने स्वीकार किया कि वे पिछले कुछ समय से इस अवैध कारोबार में सक्रिय थे और सप्लाई चेन के माध्यम से नियमित रूप से ड्रग्स पहुंचाते थे। आगे की पूछताछ और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने हेरोइन के रिसीवर जुम्मन (32), निवासी जे.जे. कॉलोनी, भलस्वा डेयरी, दिल्ली को भी गिरफ्तार किया। उसकी निशानदेही पर 194 ग्राम हेरोइन और बरामद की गई, जिससे कुल बरामदगी 1504 ग्राम तक पहुंच गई। जांच में यह भी सामने आया कि आरिफ खान कोविड-19 महामारी के दौरान नौकरी छूटने के बाद आर्थिक तंगी से जूझ रहा था और बाद में टैक्सी चलाने लगा।
दिल्ली पुलिस ने 7.5 करोड़ रुपए की हेरोइन के साथ दंपति समेत तीन को किया गिरफ्तार
इसी दौरान उसका संपर्क बरेली के एक कथित किंगपिन से हुआ, जिसने उसे तस्करी के नेटवर्क से जोड़ दिया। आरिफ और उसकी पत्नी कथित रूप से कमीशन के आधार पर ड्रग्स की ढुलाई करते थे, जबकि जुम्मन स्थानीय स्तर पर पुड़िया बनाकर खुदरा सप्लाई करता था। पुलिस के अनुसार, यह नेटवर्क कई स्तरों पर काम कर रहा था, जिसमें सप्लायर, कैरियर और लोकल डिस्ट्रीब्यूटर शामिल थे। प्रारंभिक जांच से संकेत मिले हैं कि यह गिरोह दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न हिस्सों में युवाओं और नशे के आदी व्यक्तियों को हेरोइन की आपूर्ति कर रहा था। पुलिस अब इस सप्लाई चेन के अन्य सदस्यों की पहचान करने, वित्तीय लेन-देन का विश्लेषण करने और अन्य राज्यों में फैले संभावित नेटवर्क की जांच में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि इस ऑपरेशन से एक महत्वपूर्ण कड़ी टूट गई है, लेकिन नेटवर्क के पूर्ण उन्मूलन के लिए आगे की कार्रवाई जारी रहेगी। बरामद हेरोइन की गुणवत्ता और स्रोत की पुष्टि के लिए फॉरेंसिक जांच भी कराई जा रही है। क्राइम ब्रांच ने स्पष्ट किया है कि राजधानी में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ अभियान लगातार चलाया जा रहा है और खुफिया तंत्र को और मजबूत किया जा रहा है। पुलिस का मानना है कि इस गिरफ्तारी से न केवल एक बड़े ड्रग रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है, बल्कि इससे युवाओं को नशे के जाल में फंसाने वाली गतिविधियों पर भी अंकुश लगेगा। अधिकारियों ने यह भी कहा कि समाज में जागरूकता और सामुदायिक सहयोग के बिना इस समस्या पर पूर्ण नियंत्रण संभव नहीं है, इसलिए आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस को दें। इस कार्रवाई को दिल्ली-एनसीआर में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है, और पुलिस का दावा है कि जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।