पंजाब : फरीदकोट पुलिस की बड़ी कामयाबी, 12.1 किलो हेरोइन बरामद, दो तस्कर गिरफ्तार

पंजाब : फरीदकोट पुलिस की बड़ी कामयाबी, 12.1 किलो हेरोइन बरामद, दो तस्कर गिरफ्तार

पंजाब : फरीदकोट पुलिस की बड़ी कामयाबी, 12.1 किलो हेरोइन बरामद, दो तस्कर गिरफ्तार
पंजाब : फरीदकोट पुलिस की बड़ी कामयाबी, 12.1 किलो हेरोइन बरामद, दो तस्कर गिरफ्तार

फरीदकोट। 

पंजाब पुलिस ने सीमा पार से आने वाले मादक पदार्थों और आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ एक जोरदार कार्रवाई को अंजाम दिया है।
फरीदकोट जिले की सदर थाना पुलिस ने दो ड्रग तस्करों को गिरफ्तार कर 12.1 किलोग्राम हेरोइन बरामद की है। यह बरामदगी एक सुनियोजित अभियान का नतीजा है, जो दो हफ्ते से ज्यादा चला।

पंजाब पुलिस ने यह जानकारी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दी।

प्रारंभिक पूछताछ में पता चला कि गिरफ्तार आरोपी पाकिस्तान स्थित तस्करों के संपर्क में थे। यह खुलासा एक बड़े अंतरराष्ट्रीय तस्करी सिंडिकेट की ओर इशारा करता है।

पंजाब पुलिस के मुताबिक, अवैध खेप थाना सदर फरीदकोट के अधीन आने वाले झारीवाला गांव से बरामद की गई। पुलिस को गुप्त सूत्रों से जानकारी मिली थी कि सीमा पार से हेरोइन की तस्करी हो रही है। इसके आधार पर विशेष टीम ने नाकेबंदी की और संदिग्धों को पकड़ा।

पंजाब : फरीदकोट पुलिस की बड़ी कामयाबी, 12.1 किलो हेरोइन बरामद, दो तस्कर गिरफ्तार
पंजाब : फरीदकोट पुलिस की बड़ी कामयाबी, 12.1 किलो हेरोइन बरामद, दो तस्कर गिरफ्तार

आरोपी हेरोइन को छिपाकर ले जा रहे थे। लेकिन, सघन तलाशी में यह बरामद हो गई। पुलिस ने बताया कि यह हेरोइन पाकिस्तान से सीमा पार करके लाई गई थी, संभवतः ड्रोन या अन्य गुप्त तरीकों से। गिरफ्तार तस्करों के पास से बरामद मोबाइल फोन और अन्य सामान भी जब्त किए गए।

थाना सदर फरीदकोट में एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि जांच में नेटवर्क के कनेक्शन का पता लगाया जा रहा है। पूरे गिरोह का पर्दाफाश करने के लिए पूछताछ जारी है। अगर जरूरी हुआ तो आरोपी रिमांड पर लिए जाएंगे।

यह कार्रवाई पंजाब को नशा मुक्त बनाने के मुख्यमंत्री भगवंत मान के अभियान ‘युद्ध नशा विरुद्ध’ का हिस्सा है। इस अभियान के तहत मार्च 2025 से अब तक 17,957 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं, 27,796 तस्कर गिरफ्तार हुए और 1,129 किलोग्राम हेरोइन समेत अन्य नशीले पदार्थ बरामद किए गए हैं।

दिल्ली पुलिस ने संगठित अवैध जुए के अड्डों पर की कार्रवाई, 17 गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने संगठित अवैध जुए के अड्डों पर की कार्रवाई, 17 गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने संगठित अवैध जुए के अड्डों पर की कार्रवाई, 17 गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस ने संगठित अवैध जुए के अड्डों पर की कार्रवाई, 17 गिरफ्तार

नई दिल्ली 

दिल्ली आउटर जिला पुलिस ने अवैध गतिविधियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए अलग-अलग इलाकों में चल रहे जुए के अड्डों पर छापेमारी की और कुल 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया। सभी मामलों में दिल्ली पब्लिक गैंबलिंग एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
डीसीपी आउटर डिस्ट्रिक्ट के निर्देश पर पूरे जिले की पुलिस को सतर्क और सक्रिय रहने के लिए विशेष रूप से संवेदनशील इलाकों में गश्त और निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए थे। इसी के तहत पुलिस टीमों ने रविवार को कई इलाकों में कार्रवाई की और संगठित अपराध की कड़ी नाकेबंदी की। सबसे पहले पश्चिम विहार वेस्ट थाना की टीम ने नेहरू मार्केट, ज्वालापुरी के पास बाघ वाला पार्क में छापा मारा।

दरअसल, हेड कांस्टेबल सुजन और सुरेश को गश्त के दौरान गुप्त सूचना मिली थी कि पार्क में कुछ लोग अवैध जुआ खेल रहे हैं। पुलिस के पहुंचते ही आरोपी भागने लगे, लेकिन पुलिसकर्मियों ने दो लोगों को पकड़ लिया। तलाशी के दौरान हजारों रुपए नकद और जुए का सामान बरामद किया गया। इस मामले में एफआईआर संख्या 378/2025 दर्ज की गई।

नांगलोई थाना की पुलिस ने भी दो चरणों में कार्रवाई की। पहले ऑपरेशन में स्वर्ण पार्क इंडस्ट्रियल एरिया से दो आरोपियों को पकड़ा गया और मौके से नकदी और जुए की सामग्री बरामद हुई। दूसरा ऑपरेशन सुल्तानपुरी रोड फ्लाईओवर के नीचे चल रहे जुए के अड्डे पर किया गया, जहां से दो और लोगों को गिरफ्तार किया गया। इन दोनों मामलों में एफआईआर संख्या 348/2025 और 347/2025 दर्ज की गई।

दिल्ली पुलिस ने संगठित अवैध जुए के अड्डों पर की कार्रवाई, 17 गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस ने संगठित अवैध जुए के अड्डों पर की कार्रवाई, 17 गिरफ्तार

वहीं, मंगोलपुरी थाना की पुलिस ने तीन अलग-अलग जगहों पर छापेमारी की। एल-ब्लॉक और डी-ब्लॉक वाल्मीकि पार्क से दो-दो आरोपियों को पकड़ा गया, जबकि जी-ब्लॉक से सात लोगों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। इन जगहों से भी नकदी और जुए से जुड़े कागजात व सामग्री बरामद हुई। इन मामलों में एफआईआर संख्या 677/2025, 676/2025 और 670/2025 दर्ज की गई।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रितिक (24), हरि सिंह (52), पुष्पिंदर (32), विक्की (38), अमरजीत (26), शंभू (44), हरि चंद (42), रमन सिंह (25), एक अन्य (29), सलमान खान (30), रोहन सोनी (19), हसीन अहमद (47), दिनेश चंद्र (38), आकाश (25), अतीक अहमद (45), दिनेश (33) और अरमान (19) के रूप में हुई है। सभी दिल्ली के अलग-अलग इलाकों के रहने वाले हैं।

पुलिस ने बताया कि छापेमारी के दौरान हजारों रुपए की नकदी और बड़ी मात्रा में जुए से संबंधित सामग्री जब्त की गई है। सभी मामलों की आगे जांच जारी है ताकि इस अवैध नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी पहचान कर उन्हें कानून के शिकंजे में लाया जा सके।

आउटर डिस्ट्रिक्ट पुलिस का कहना है कि जिले में संगठित अपराध और अवैध गतिविधियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। गश्त और निगरानी लगातार जारी रहेगी ताकि नागरिक सुरक्षित माहौल में जीवनयापन कर सकें।

दिल्ली: शाहदरा पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त कार्रवाई, अवैध शराब जब्त, तीन आरोपी गिरफ्तार

दिल्ली: शाहदरा पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त कार्रवाई, अवैध शराब जब्त, तीन आरोपी गिरफ्तार

दिल्ली: शाहदरा पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त कार्रवाई, अवैध शराब जब्त, तीन आरोपी गिरफ्तार
दिल्ली: शाहदरा पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त कार्रवाई, अवैध शराब जब्त, तीन आरोपी गिरफ्तार

नई दिल्ली ।

शाहदरा जिला पुलिस की एएसबी सेल ने आबकारी विभाग के साथ मिलकर अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 5840 क्वार्टर अवैध देसी शराब और एक कार को जब्त करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह पूरी कार्रवाई आगामी त्यौहारी सीजन में कानून व्यवस्था को सुचारू रखने और संगठित अपराधों की रोकथाम के उद्देश्य से की गई।
दरअसल, 6-7 सितंबर की रात शाहदरा एएसबी सेल को सूचना मिली थी कि आनंद विहार इलाके के सूरजमल विहार अथॉरिटी के पास अवैध शराब की खेप लाई जा रही है। सूचना के बाद एसआई अजय तोमर, शाहदरा एएसबी सेल के इंचार्ज के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई। इस कार्रवाई की देखरेख एसीपी ऑपरेशन मोहिंदर सिंह ने की, जबकि शाहदरा डीसीपी ने इसकी निगरानी की। टीम में एएसआई राजकुमार, हेड कांस्टेबल सचिन, नवदीप, कुमार दिव्य वत्स, रोहित, सोनू, मनीष और कांस्टेबल सौरव शामिल थे।
इसी दौरान आबकारी विभाग की टीम भी वाहन को ट्रैक कर रही थी। आबकारी इंस्पेक्टर इंदरपाल, हेड कांस्टेबल अमृत और महिला हेड कांस्टेबल नीलम मौके पर पहुंचे और संयुक्त प्रयासों से पुलिस ने आरोपी कमल (26), निवासी जेलोर वाला बाग, अशोक विहार, दिल्ली को पकड़ लिया। उसके कब्जे से भारी मात्रा में अवैध शराब और वाहन बरामद किया गया। इस संबंध में आनंद विहार थाने में एफआईआर संख्या 407/25 दर्ज की गई है।
पूछताछ में कमल ने कबूल किया कि वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले का रहने वाला है और पेशे से ड्राइवर है। बेरोजगारी के चलते वह करीब 2-3 महीने पहले वजीरपुर में जॉनी और किशन उर्फ सुदामा से मिला था। उन्होंने उसे 20 हजार मासिक वेतन पर अवैध शराब सप्लाई करने का काम दिया। जॉनी हरियाणा से शराब लाता था और कमल व किशन उर्फ सुदामा के जरिए दिल्ली में सप्लाई कराता था।

दिल्ली: शाहदरा पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त कार्रवाई, अवैध शराब जब्त, तीन आरोपी गिरफ्तार
दिल्ली: शाहदरा पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त कार्रवाई, अवैध शराब जब्त, तीन आरोपी गिरफ्तार


पुलिस ने आगे की जांच में किशन कुमार उर्फ सुदामा (24), निवासी बुराड़ी और मूल निवासी मुंगेर, बिहार को भी गिरफ्तार किया। दोनों आरोपियों ने बताया कि 6 सितम्बर को जॉनी ने 122 कार्टन शराब कुंडली में भेजी थी, जिसे टाटा ऐस में डालकर दिल्ली लाया गया। इस खेप में से 6 कार्टन राजीव उर्फ़ मोनू को शक्ति नगर की गुड़ मंडी में पहुंचाई गई थी। इसके आधार पर पुलिस ने राजीव उर्फ मोनू (38), निवासी शक्ति नगर, दिल्ली को भी गिरफ्तार किया। उसके पास से 40 क्वार्टर ‘रेस 7 – फॉर सेल इन हरियाणा ओनली’ शराब बरामद हुई।
छापेमारी के दौरान कुल 5,000 क्वार्टर (100 पेटी) देशी शराब ‘संतरा’, 440 क्वार्टर (8 पेटी) ‘रेस-7’, 400 क्वार्टर (8 पेटी) ‘नाइट ब्लू’ और सप्लाई के लिए उपयोग की जाने वाली कार बरामद की गई।
आरोपी कमल 10वीं तक पढ़ा है और लेबर का काम करता था, लेकिन आसान पैसे कमाने के लालच में शराब तस्करी में शामिल हो गया। उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। वहीं, किशन कुमार उर्फ सुदामा पहले भी दो बार आबकारी अधिनियम के तहत पकड़ा जा चुका है। राजीव उर्फ मोनू के खिलाफ पहले से तीन केस दर्ज हैं।
पुलिस ने बताया कि इस मामले का मास्टरमाइंड जॉनी फिलहाल फरार है। हरियाणा के सोनीपत जिले के असावरपुर स्थित उसके घर पर छापा मारा गया, लेकिन वह वहां नहीं मिला। उसकी तलाश और बाकी खेप की बरामदगी के प्रयास जारी हैं। शाहदरा पुलिस ने कहा कि त्योहारों से पहले अवैध शराब और संगठित अपराधों के खिलाफ यह अभियान लगातार जारी रहेगा ताकि कानून व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा बनी रहे।

सलमान लाला मौत मामला : पुलिस का खुलासा, मरने के बाद बनाए गए नए सोशल मीडिया अकाउंट

सलमान लाला मौत मामला : पुलिस का खुलासा, मरने के बाद बनाए गए नए सोशल मीडिया अकाउंट

सलमान लाला मौत मामला : पुलिस का खुलासा, मरने के बाद बनाए गए नए सोशल मीडिया अकाउंट
सलमान लाला मौत मामला : पुलिस का खुलासा, मरने के बाद बनाए गए नए सोशल मीडिया अकाउंट

इंदौर ।

इंदौर के कुख्यात अपराधी सलमान लाला की मौत के बाद मामला उलझता जा रहा है। पुलिस जांच में सामने आया है कि लाला की मौत के बाद उसके मोबाइल फोन को हैक कर साइबर एक्सपर्ट की मदद से नए सोशल मीडिया अकाउंट बनाए गए। इन अकाउंट्स से न केवल वीडियो और पोस्ट वायरल किए गए, बल्कि पुलिस को बदनाम करने की साजिश भी रची गई। इस नेटवर्क में फिल्म एक्टर एजाज खान का नाम भी सामने आया है।
पुलिस ने इन सभी अकाउंट्स पर कड़ी निगरानी शुरू कर दी है और साइबर एक्सपर्ट्स सहित वीडियो वायरल करने वालों की पहचान की जा रही है। साइबर और क्राइम ब्रांच के अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया का कहना है कि सलमान लाला के कुछ अकाउंट उनके मूल अकाउंट के बाद बनाए गए थे, और कुछ अकाउंट को हैक करके रील्स चलाने के लिए इस्तेमाल किया गया था। लगभग 20 ऐसे अकाउंट की पहचान की गई है, साथ ही लगभग 70 और अकाउंट हैं जो इन रील्स को बढ़ावा दे रहे हैं। पुलिस कमिश्नर विन्डोर सी. संतुस कुमार सैन्चर द्वारा जारी आदेश के अनुसार, धारा 163 बीएनएस के तहत पहले ही प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जा चुकी है।

सलमान लाला मौत मामला : पुलिस का खुलासा, मरने के बाद बनाए गए नए सोशल मीडिया अकाउंट
सलमान लाला मौत मामला : पुलिस का खुलासा, मरने के बाद बनाए गए नए सोशल मीडिया अकाउंट


गौरतलब है कि 31 अगस्त को इंदौर का गैंगस्टर सलमान लाला सीहोर में पुलिस से भागते समय तालाब में डूबने से मारा गया था। पुलिस का दावा है कि वह खुद तालाब में कूदा और डूब गया, जबकि परिजनों का आरोप है कि उसकी मौत कस्टडी में हुई है। परिवार का कहना है कि सलमान एक बेहतरीन तैराक था, ऐसे में तालाब में डूबने का दावा संदेहास्पद है। यही कारण है कि इस पूरे मामले ने सोशल मीडिया पर विवाद और अफवाहों को जन्म दिया।
पुलिस जांच में सामने आया कि लाला की मौत के बाद अचानक सोशल मीडिया पर बनाए गए इन फर्जी अकाउंट्स से माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई। इनमें से कई अकाउंट से भड़काऊ रील्स, पोस्ट और पुलिस विरोधी टिप्पणियां वायरल हुईं। गुना जिले में ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के जुलूस के दौरान सलमान लाला के पोस्टर तक लगाए गए, जिन पर “मिस यू सलमान लाला” जैसे नारे लिखे थे। इससे स्थानीय स्तर पर तनाव फैल गया और एक युवक पर हमला और लूट जैसी घटनाएं भी हुईं।
फिलहाल पुलिस और साइबर सेल इस पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है। प्रशासन का कहना है कि पुलिस को बदनाम करने और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की इस साजिश में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

मुंबई: बहन के प्रेमी को भाई ने डंडे से पीटकर की हत्या, पुलिस के सामने सरेंडर

मुंबई: बहन के प्रेमी को भाई ने डंडे से पीटकर की हत्या, पुलिस के सामने सरेंडर

मुंबई: बहन के प्रेमी को भाई ने डंडे से पीटकर की हत्या, पुलिस के सामने सरेंडर
मुंबई: बहन के प्रेमी को भाई ने डंडे से पीटकर की हत्या, पुलिस के सामने सरेंडर

मुंबई ।

मुंबई के मालवणी इलाके से एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जहां 21 वर्षीय युवक ने अपनी बहन के प्रेमी की डंडे से पीट-पीटकर हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी ने खुद मालवणी पुलिस स्टेशन पहुंचकर अपराध कबूल किया और पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया।
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे 11 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।

पुलिस के मुताबिक मृतक का नाम नितिन सोलंकी (40) है, जो एक अस्पताल में केयरटेकर का काम करता था। सोलंकी के आरोपी की बहन के साथ संबंध थे। सोलंकी पर आरोप है कि हाल ही में उसने कथित तौर पर आरोपी की मां और बहन के चरित्र को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की थी।

मुंबई: बहन के प्रेमी को भाई ने डंडे से पीटकर की हत्या, पुलिस के सामने सरेंडर
मुंबई: बहन के प्रेमी को भाई ने डंडे से पीटकर की हत्या, पुलिस के सामने सरेंडर

शनिवार रात करीब 10:30 बजे आरोपी आशीष शेट्टी (21) जोगेश्वरी में नितिन सोलंकी से मिला। दोनों ने साथ बैठकर शराब पी। इसके बाद, अगली सुबह आशीष उसे मालवणी ले आया और कृष्णा आश्रम, कोलीवाड़ा, रामेश्वर गली के पास कमरा नंबर 1 में लेकर गया। वहां गुस्से में आकर उसने लकड़ी के डंडे से सोलंकी पर बेरहमी से हमला कर दिया। हमले के दौरान सोलंकी गंभीर रूप से घायल हो गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

सूचना मिलने के बाद मालवणी पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और सोलंकी को कांदिवली के शताब्दी अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल की गई लकड़ी जब्त कर ली है। शव को पोस्टमार्टम के बाद परिवार को सौंप दिया गया।

मालवणी पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी आशीष शेट्टी ने खुद थाने पहुंचकर कबूल किया कि उसने नितिन सोलंकी की हत्या की है। इस मामले में आशीष शेट्टी के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच की जा रही है।

ड्रग माफिया पर दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 30 लाख से अधिक की अवैध संपत्ति जब्त

ड्रग माफिया पर दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 30 लाख से अधिक की अवैध संपत्ति जब्त

ड्रग माफिया पर दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 30 लाख से अधिक की अवैध संपत्ति जब्त
ड्रग माफिया पर दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 30 लाख से अधिक की अवैध संपत्ति जब्त

नई दिल्ली ।

दिल्ली पुलिस के नॉर्थ-वेस्ट जिले की ऑपरेशन सेल ने नशा मुक्ति भारत अभियान के तहत एक बड़ी कार्रवाई की है। सेल ने कुख्यात ड्रग तस्कर विजय कुमार की 30 लाख रुपए से अधिक की अवैध संपत्ति को फ्रीज कर दिया है। विजय कुमार को भरत नगर थाना क्षेत्र का बैड कैरेक्टर घोषित किया जा चुका है।
यह अभियान उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के मार्गदर्शन और पुलिस आयुक्त सतीश गोलचा के नेतृत्व में दिल्ली पुलिस द्वारा नशे के खिलाफ चलाया जा रहा है। नशे पर नकेल कसने के लिए, दिल्ली पुलिस के उत्तर-पश्चिम जिले द्वारा विभिन्न अभियान चलाए जा रहे हैं। समाज से नशे की बुराई को जड़ से मिटाने के लिए, सभी संबंधित अधिकारियों को नशा-अपराधियों के विरुद्ध कड़ी एवं प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
15 फरवरी 2025 को ऑपरेशन सेल/नॉर्थ-वेस्ट की टीम ने विजय कुमार के बेटे नितिन बद्धवान (22) को जेजे कॉलोनी, वजीरपुर से गिरफ्तार किया। उसके घर से 365 ग्राम हेरोइन और 1,88,200 रुपए नकद बरामद किए गए। इस मामले में भरत नगर थाने में एनडीपीएस एक्ट की धारा 21/25 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। पूछताछ में नितिन ने खुलासा किया कि वह अपने पिता विजय कुमार के इशारे पर काम करता था। इसके बाद पुलिस ने 20 मई 2025 को विजय कुमार को भी गिरफ्तार कर लिया।

ड्रग माफिया पर दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 30 लाख से अधिक की अवैध संपत्ति जब्त
ड्रग माफिया पर दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 30 लाख से अधिक की अवैध संपत्ति जब्त


इंस्पेक्टर मदन मोहन (इंचार्ज, एंटी-नारकोटिक्स सेल) की अगुवाई में एसआई रवि सैनी और एसआई आकाशदीप की टीम ने जांच आगे बढ़ाई। पुलिस को वित्तीय लेन-देन की गहरी जानकारी हाथ लगी। इसमें विजय कुमार की तीन दोपहिया वाहन और एक संपत्ति सामने आई, जिनकी कुल कीमत 30 लाख रुपए से अधिक आंकी गई। जांच में पाया गया कि ये संपत्तियां ड्रग तस्करी से अर्जित पैसों से खरीदी गई हैं। इसके बाद एनडीपीएस एक्ट 1985 की धारा 68-एफ(1) के तहत संपत्तियों को ज़ब्त करने का आदेश दिया गया। आदेश को वित्त मंत्रालय, राजस्व विभाग के सक्षम प्राधिकारी को भेजा गया, जिन्होंने जांच के बाद विजय कुमार की संपत्तियों को फ्रीज कर दिया।
सक्षम प्राधिकारी ने आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया कि बिना अनुमति के इन संपत्तियों की बिक्री या खरीद नहीं हो सकेगी। आदेश की कॉपी जिला राजस्व अधिकारी, एसडीएम और परिवहन विभाग को भी भेजी गई है।
आरोपी विजय कुमार पिछले 7 सालों से ड्रग्स के धंधे में सक्रिय है। उस पर 11 संगीन मामले दर्ज हैं, जिनमें 5 एनडीपीएस एक्ट से जुड़े हैं। वहीं, नितिन बद्धवान 8वीं तक पढ़ा है और पिछले 3 साल से ड्रग्स की सप्लाई कर रहा है।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई का मकसद ड्रग तस्करी के नेटवर्क को जड़ से तोड़ना और उनकी आर्थिक कमर तोड़ना है। अवैध संपत्तियों की ज़ब्ती से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि अपराधियों को अपने गैर-कानूनी काम से कोई फायदा न मिले। पुलिस लगातार ऐसे अपराधियों पर निगरानी रख रही है, जो समाज में नशे का जहर घोल रहे हैं और अंतरराज्यीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ड्रग्स का नेटवर्क चला रहे हैं।

दिल्ली: गश्त के दौरान संदिग्ध आदिल गिरफ्तार, देसी पिस्टल बरामद

दिल्ली: गश्त के दौरान संदिग्ध आदिल गिरफ्तार, देसी पिस्टल बरामद

दिल्ली: गश्त के दौरान संदिग्ध आदिल गिरफ्तार, देसी पिस्टल बरामद
दिल्ली: गश्त के दौरान संदिग्ध आदिल गिरफ्तार, देसी पिस्टल बरामद

नई दिल्ली ।

पूर्वी दिल्ली के शकरपुर थाना क्षेत्र में गश्त के दौरान पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की। पुलिस टीम ने एक संदिग्ध युवक को दबोचकर उसके पास से एक देसी पिस्टल बरामद की है।
आरोपी की पहचान आदिल (23), निवासी गीता कॉलोनी, दिल्ली के रूप में हुई है। उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार, रविवार सुबह करीब 4 बजे शकरपुर थाने के हेड कांस्टेबल राहुल त्यागी और कांस्टेबल अमृत लाल गश्त पर थे। इसी दौरान लक्ष्मी नगर मेट्रो स्टेशन के पास उन्हें स्कूटी पर दो युवक संदिग्ध हालत में घूमते दिखे। पुलिस ने जब उन्हें रुकने का इशारा किया तो दोनों भागने लगे। सतर्क पुलिसकर्मियों ने पीछा कर एक युवक को दबोच लिया। तलाशी लेने पर उसके पास से एक देसी पिस्टल बरामद हुआ।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान आदिल के रूप में हुई, जो गीता कॉलोनी के अराम पार्क का रहने वाला है। पूछताछ में आदिल ने बताया कि उसने यह हथियार दिल्ली के शाहरुख नामक व्यक्ति से खरीदा था।

दिल्ली: गश्त के दौरान संदिग्ध आदिल गिरफ्तार, देसी पिस्टल बरामद
दिल्ली: गश्त के दौरान संदिग्ध आदिल गिरफ्तार, देसी पिस्टल बरामद

पुलिस ने आदिल को रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू कर दी है और हथियार सप्लाई करने वाले शाहरुख की तलाश जारी है। स्थानीय खुफिया तंत्र को भी सक्रिय कर दिया गया है ताकि सप्लाई चेन को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके।
आरोपी आदिल ने 9वीं कक्षा तक पढ़ाई की है। पढ़ाई छोड़ने के बाद वह एक चिकन शॉप पर काम करता था। आदिल का पहले से ही एक आपराधिक रिकॉर्ड है, जिसमें वह एक मामले में शामिल रहा है।
इस पूरे मामले की जांच एसआई विशाल को सौंपी गई है।
इससे पहले, दिल्ली पुलिस के नॉर्थ-वेस्ट जिले की ऑपरेशन सेल ने नशा मुक्ति भारत अभियान के तहत कार्रवाई करते हुए कुख्यात ड्रग तस्कर विजय कुमार की 30 लाख रुपए से अधिक की अवैध संपत्ति को फ्रीज कर दिया। विजय कुमार को भरत नगर थाना क्षेत्र का बैड कैरेक्टर घोषित किया जा चुका है।
आरोपी विजय कुमार पिछले 7 सालों से ड्रग्स के धंधे में सक्रिय है। उस पर 11 संगीन मामले दर्ज हैं, जिनमें 5 एनडीपीएस एक्ट से जुड़े हैं। वहीं, नितिन बद्धवान 8वीं तक पढ़ा है और पिछले 3 साल से ड्रग्स की सप्लाई कर रहा है।

मानव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, दिल्ली पुलिस ने 6 बच्चों को किया बरामद

मानव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, दिल्ली पुलिस ने 6 बच्चों को किया बरामद

मानव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, दिल्ली पुलिस ने 6 बच्चों को किया बरामद
मानव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, दिल्ली पुलिस ने 6 बच्चों को किया बरामद

नई दिल्ली ।

दिल्ली पुलिस ने मानव तस्करी गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए कुल 6 बच्चों को बरामद किया है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, ये गैंग दो से तीन महीने के नवजात शिशुओं को चोरी करके बेचने का काम करता था।
पुलिस उपायुक्त (दक्षिण पूर्वी) डॉ. हेमंत तिवारी ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि इस घटनाक्रम की शुरुआत 22 अगस्त को हुई, जब पुलिस को दिल्ली के एक बस स्टैंड से एक 6 माह के बच्चे के गायब होने की सूचना मिली थी।
अधिकारी के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद बस स्टैंड के सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई, जिसमें दो संदिग्ध बच्चे को ले जाते दिखे। हालांकि, बस स्टैंड से बाहर निकलने के बाद उनकी कोई सीसीटीवी फुटेज नहीं मिली। इसके बाद पुलिस ने डंप डेटा का विश्लेषण किया और संदिग्धों को चिह्नित कर उत्तर प्रदेश के फतेहाबाद के पिनहट गांव में छापेमारी की। वहां से मुख्य आरोपी वीरभान और उसके ससुर कालीचरण को गिरफ्तार किया। तलाशी के दौरान एक संदिग्ध फोन भी बरामद किया है।

मानव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, दिल्ली पुलिस ने 6 बच्चों को किया बरामद
मानव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, दिल्ली पुलिस ने 6 बच्चों को किया बरामद


पूछताछ में पता चला कि वीरभान और कालीचरण ने अपने रिश्तेदार रामबरन के कहने पर बच्चा चोरी किया था और उसे आगरा के केके नर्सिंग होम में सौंप दिया। इसके बाद पुलिस ने चतुराई दिखाते हुए नर्सिंग होम के डॉक्टर कमलेश को दबोच लिया। साथ ही, पुलिस ने सुंदर नामक एक अन्य अहम आरोपी को गिरफ्तार किया, जो इस रैकेट का मास्टरमाइंड था। सुंदर मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के रूप में काम करता था और झोलाछाप डॉक्टरों को दवाइयां सप्लाई करता था। वह गर्भवती महिलाओं को निशाना बनाता था और उनके बच्चों को गैरकानूनी तरीके से बेच देता था।
पुलिस उपायुक्त के अनुसार, पुलिस ने सुंदर की निशानदेही पर प्रीति और कृष्णा नाम की दो बहनों को पकड़ा है, जो अपने घर में ऐसी महिलाओं की डिलीवरी करवाती थीं। इनके पास से 48 घंटे में गायब हुआ बच्चा भी बरामद किया गया।
पूछताछ में पता चला कि इस गिरोह ने नैनीताल के एक दंपति को 11 महीने की एक बच्ची बेची थी, जिसे पुलिस ने रिकवर कर लिया। इसके अलावा, आगरा से दो और दो महीने के बच्चों को बरामद किया गया है।
पुलिस उपायुक्त (दक्षिण पूर्वी) डॉ. हेमंत तिवारी ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान कुल 6 बच्चों को बरामद किया है।

सदर अस्पताल में 15 लाख की लागत वाला विश्रामालय और प्रतिक्षालय उदघाटन से पहले ही जर्जर, लोग बैठने को मजबूर

सदर अस्पताल में 15 लाख की लागत वाला विश्रामालय और प्रतिक्षालय उदघाटन से पहले ही जर्जर, लोग बैठने को मजबूर

सदर अस्पताल में 15 लाख की लागत वाला विश्रामालय और प्रतिक्षालय उदघाटन से पहले ही जर्जर, लोग बैठने को मजबूर
सदर अस्पताल में 15 लाख की लागत वाला विश्रामालय और प्रतिक्षालय उदघाटन से पहले ही जर्जर, लोग बैठने को मजबूर

सदर अस्पताल परिसर में बना अत्याधुनिक यात्री विश्रामालय प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ा, मरीजों के परिजन परेशान

सहरसा जिले के सदर अस्पताल परिसर में मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत करीब 15 लाख रुपये की लागत से निर्मित अत्याधुनिक यात्री विश्रामालय एवं प्रतिक्षालय आम लोगों के लिए अब तक उपयोग में नहीं लाया गया है। इस विश्रामालय का निर्माण इस उद्देश्य से किया गया था कि अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों के परिजनों को एक उपयुक्त स्थान पर बैठने, विश्राम करने और कुछ समय के लिए सुकून पाने की सुविधा मिल सके। अस्पताल में इलाज के दौरान अक्सर परिजन पूरे दिन भर धूप, बारिश या सर्दी के बीच खुले आसमान के नीचे, दीवारों की छांव में या गलियारों में बैठने को मजबूर होते हैं। ऐसे में इस यात्री प्रतिक्षालय की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण थी, लेकिन विडंबना यह है कि निर्माण पूरा हो जाने के कई महीने बाद भी यह भवन तालाबंद पड़ा हुआ है, और इसका लाभ आज तक किसी को नहीं मिल पाया है।

स्थानीय नागरिकों के अनुसार, इस अत्याधुनिक यात्री विश्रामालय का निर्माण तो उच्च गुणवत्ता के साथ किया गया है और यह देखने में भी आकर्षक है। इसमें बेंच, रोशनी, पंखे और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही और उदासीन रवैये के चलते इसका उद्घाटन तक नहीं किया गया। न तो इसका संचालन किसी एजेंसी को सौंपा गया है, और न ही अस्पताल प्रशासन ने इसे आम जनता के लिए खोलने की जहमत उठाई है। फलस्वरूप, यह भवन बंद दरवाजों के भीतर जर्जरता की ओर बढ़ रहा है, जबकि बाहर मरीजों के परिजन बदहाल अवस्था में फर्श, सीढ़ियों या अस्पताल के कोनों में बैठने को मजबूर हैं।

अस्पताल आने वाले मरीजों के परिजनों का कहना है कि बारिश हो या गर्मी, उन्हें खुले में रहना पड़ता है। न तो पीने के पानी की व्यवस्था है, न ही बैठने की कोई उपयुक्त सुविधा। कई बार बुजुर्ग परिजन या महिलाएं कई घंटे तक इलाज की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करती रहती हैं, लेकिन बैठने के लिए कोई सुरक्षित व स्वच्छ स्थान नहीं होता। ऐसे में जब अस्पताल परिसर में ही विश्रामालय मौजूद हो, तो यह और भी अधिक खटकता है कि इसे चालू क्यों नहीं किया जा रहा है।

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे को कई बार उठाया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्यवाही होती नहीं दिखी है। उनके अनुसार, सरकार द्वारा जनहित में करोड़ों रुपये की योजनाएं चलाई जाती हैं, लेकिन नीतिगत सुस्ती और अधिकारियों की निष्क्रियता के चलते आम जनता इन योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाती है। मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना जैसी महत्वपूर्ण योजना के अंतर्गत निर्मित यह विश्रामालय इसका जीता-जागता उदाहरण है।

कुछ लोगों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते इसे शुरू नहीं किया गया तो यह भवन जल्द ही अतिक्रमण या असामाजिक तत्वों का अड्डा बन सकता है। पहले भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहाँ सरकारी योजनाओं के तहत बने भवन उपयोग में न आने के कारण बेकार हो गए, और बाद में उन्हें फिर से मरम्मत या नवनिर्माण के लिए अतिरिक्त बजट खर्च करना पड़ा। ऐसे में जब एक अच्छी गुणवत्ता वाला यात्री प्रतिक्षालय पहले से उपलब्ध है, तो उसे तत्काल चालू किया जाना न केवल प्रशासन की जिम्मेदारी है, बल्कि जनता के प्रति उसका उत्तरदायित्व भी है।

सदर अस्पताल में 15 लाख की लागत वाला विश्रामालय और प्रतिक्षालय उदघाटन से पहले ही जर्जर, लोग बैठने को मजबूर
सदर अस्पताल में 15 लाख की लागत वाला विश्रामालय और प्रतिक्षालय उदघाटन से पहले ही जर्जर, लोग बैठने को मजबूर

इस विषय में जब अस्पताल प्रशासन से जानकारी ली गई, तो कुछ अधिकारियों ने इस भवन को चालू न कर पाने के पीछे कागजी प्रक्रिया, एजेंसी निर्धारण और फंड आवंटन जैसी तमाम बहानेबाजी की। लेकिन जनता यह जानना चाहती है कि जब निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है, सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं और भवन उपयोग के लिए तैयार है, तो महीनों बीत जाने के बाद भी इस पर ताला क्यों लटका हुआ है? क्या प्रशासन को जनता की सुविधाओं से कोई सरोकार नहीं है?

इधर, स्थानीय लोगों में भी इस मुद्दे को लेकर गुस्सा बढ़ता जा रहा है। कई सामाजिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही इस यात्री विश्रामालय को आम जनता के लिए नहीं खोला गया तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उनका कहना है कि यह भवन जनता के पैसों से बना है और जनता को ही इसका इस्तेमाल करने का पूरा अधिकार है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक ऐसा भवन, जो जनहित में अत्यंत लाभकारी हो सकता है, वह प्रशासनिक अनदेखी के चलते केवल एक शो-पीस बनकर रह गया है

अंततः यह सवाल प्रशासन के लिए है कि जब एक जनहितैषी परियोजना पर सरकारी पैसा खर्च कर उसे पूर्ण किया गया है, तो फिर उसमें जनता को प्रवेश से क्यों वंचित रखा जा रहा है? क्या योजनाएं सिर्फ निर्माण तक सीमित रह गई हैं? क्या आम जनता की सुविधाएं अब सिर्फ सरकारी फाइलों तक ही सीमित रह जाएंगी?

इस प्रकार, सहरसा सदर अस्पताल परिसर में बंद पड़े इस अत्याधुनिक यात्री विश्रामालय की स्थिति न केवल प्रशासनिक व्यवस्था की कमजोरी को उजागर करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि जब तक शासन-प्रशासन की नीयत में सेवा का भाव नहीं होगा, तब तक विकास कार्य केवल कागजों पर ही दम तोड़ते रहेंगे। अब जरूरत है कि इस विश्रामालय को अविलंब चालू कर मरीजों के परिजनों को राहत पहुंचाई जाए और मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के उद्देश्य को सार्थक किया जाए।

भगोड़ों को भारत लाने की कवायद तेज, ब्रिटेन की टीम ने तिहाड़ जेल का किया निरीक्षण

भगोड़ों को भारत लाने की कवायद तेज, ब्रिटेन की टीम ने तिहाड़ जेल का किया निरीक्षण

भगोड़ों को भारत लाने की कवायद तेज, ब्रिटेन की टीम ने तिहाड़ जेल का किया निरीक्षण
भगोड़ों को भारत लाने की कवायद तेज, ब्रिटेन की टीम ने तिहाड़ जेल का किया निरीक्षण

नई दिल्ली ।

भारत सरकार ने आर्थिक अपराधियों और फरारों को वापस लाने की दिशा में एक और अहम कदम उठाया है। इसी कड़ी में हाल ही में ब्रिटेन की क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (सीपीएस) की एक टीम ने दिल्ली स्थित तिहाड़ जेल का दौरा किया।
तिहाड़ जेल के सूत्रों के मुताबिक, यह निरीक्षण विशेष रूप से विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे भगोड़ों को भारत लाने की कोशिशों को अमली जामा पहनाने के लिए किया गया। यह दौरा इसलिए किया गया ताकि ब्रिटेन की अदालतों में यह साबित किया जा सके कि भारत में प्रत्यर्पित किए जाने वाले आरोपियों को तिहाड़ जेल में सुरक्षित और बेहतर माहौल मिलेगा।

जानकारी के अनुसार, ब्रिटिश टीम तिहाड़ की हाई-सिक्योरिटी वार्ड तक गई और वहां मौजूद कैदियों से भी बातचीत की। इस दौरान जेल अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि प्रत्यर्पण के बाद अगर किसी हाई-प्रोफाइल आरोपी को यहां रखा जाता है तो उसके लिए जेल परिसर में एक विशेष एन्क्लेव भी तैयार किया जा सकता है, जहां उनकी सुरक्षा और सुविधाओं का खास ख्याल रखा जाएगा।

भगोड़ों को भारत लाने की कवायद तेज, ब्रिटेन की टीम ने तिहाड़ जेल का किया निरीक्षण
भगोड़ों को भारत लाने की कवायद तेज, ब्रिटेन की टीम ने तिहाड़ जेल का किया निरीक्षण

गौरतलब है कि हाल ही में ब्रिटेन की अदालतों ने तिहाड़ जेल की स्थिति को लेकर भारत की कई प्रत्यर्पण याचिकाएं खारिज कर दी थीं। अदालतों में यह तर्क दिया गया था कि भारत में प्रत्यर्पित किए जाने वाले आरोपियों के साथ जेल में दुर्व्यवहार या गैरकानूनी पूछताछ हो सकती है। इसी संदर्भ में यह दौरा आयोजित किया गया ताकि ब्रिटेन को भरोसा दिलाया जा सके कि तिहाड़ जेल में न तो किसी आरोपी के साथ मारपीट होगी और न ही गैरकानूनी पूछताछ की जाएगी।

बता दें कि इस समय भारत के कुल 178 प्रत्यर्पण अनुरोध विभिन्न देशों में लंबित हैं, जिनमें से करीब 20 मामले केवल ब्रिटेन में अटके हुए हैं। इन मामलों में विजय माल्या और नीरव मोदी के अलावा हथियार कारोबारी संजय भंडारी और कई खालिस्तानी नेताओं के नाम भी शामिल हैं।