पूर्व सैनिक संघ की जनसुनवाई में उठा सैनिक कैंटिन का मुद्दा

पूर्व सैनिक संघ की जनसुनवाई में उठा सैनिक कैंटिन का मुद्दा

बयाना में पूर्व सैनिकों की जनसुनवाई: समस्याओं का समाधान और सुविधाओं की मांगों के साथ नई पहल

राजस्थान के बयाना कस्बे में आज का दिन पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और शहीदों की विधवाओं के लिए विशेष महत्व का रहा। यहां पंचायत समिति परिसर में सैनिक संघ द्वारा एक जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य इन वीरों और उनके परिवारों की समस्याओं को सुनना और उनका समाधान करना था। इस जनसुनवाई में न केवल सैनिकों की व्यक्तिगत और पारिवारिक समस्याओं पर चर्चा हुई, बल्कि कई महत्वपूर्ण मांगों और सुझावों को भी संबंधित अधिकारियों के समक्ष रखा गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता सैनिक संघ के अध्यक्ष बलराम कांवर ने की, जबकि इसमें जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल अनिल कुमार चौहान और सूबेदार ज्ञान सिंह भी विशेष रूप से मौजूद रहे। इनके अलावा कार्यक्रम में सैनिक संघ के उपाध्यक्ष प्रेम सिंह, कैप्टन मानसिंह कसाना, सूबेदार राजवीर सिंह, सूबेदार रमन सिंह और कई अन्य पूर्व सैनिकों एवं उनके परिजनों की भागीदारी रही। जनसुनवाई में आए लोगों ने बढ़-चढ़कर अपनी समस्याएं साझा कीं और अधिकारियों ने गंभीरता से उन पर विचार कर त्वरित समाधान का आश्वासन दिया।

सैनिक संघ के अध्यक्ष बलराम कांवर ने जानकारी दी कि इस जनसुनवाई में पेंशन, मेडिकल कार्ड, सेवा पहचान पत्र (आई-कार्ड) और अन्य व्यक्तिगत समस्याओं को लेकर कुल दर्जनों आवेदन आए, जिनमें से अधिकांश का मौके पर ही समाधान कर दिया गया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में राज्य सरकार ने पूर्व सैनिकों के लिए मुफ्त में मेडिकल कार्ड बनाने की सुविधा शुरू की है, जबकि पहले इसके लिए शुल्क लिया जाता था। यह सुविधा निश्चित रूप से पूर्व सैनिकों के लिए राहत का काम करेगी।

पूर्व सैनिकों ने इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण सामुदायिक मुद्दे भी उठाए, जिनमें सबसे प्रमुख था – अपने क्षेत्र में मोबाइल कैंटीन सुविधा की शुरुआत। पूर्व सैनिकों ने बताया कि उनके लिए निर्धारित सेना की कैंटीनें अक्सर दूर होती हैं, जिससे वृद्ध सैनिकों और उनके परिजनों को भारी कठिनाई होती है। इसलिए उन्होंने मांग की कि क्षेत्र में एक चलती-फिरती (मोबाइल) कैंटीन वैन की सुविधा दी जाए, जो नियत तिथियों पर गांव-गांव जाकर सामग्री उपलब्ध करा सके।

दूसरी बड़ी मांग शहीद स्मारक के निर्माण की थी। पूर्व सैनिकों और शहीदों के परिजनों ने कहा कि क्षेत्र के कई वीर जवानों ने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है, लेकिन अब तक उनके सम्मान में कोई स्मारक नहीं बनाया गया है। ऐसे में उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि एक उचित भूमि का आवंटन कर शहीद स्मारक का निर्माण कराया जाए, जिससे आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा मिल सके और शहीदों का गौरव सदा अमर रहे।

तीसरा मुद्दा हथियारों के रजिस्ट्रेशन से जुड़ा रहा। कई पूर्व सैनिकों ने बताया कि उन्हें अपने वैध हथियारों के रजिस्ट्रेशन और नवीनीकरण में प्रशासनिक जटिलताओं का सामना करना पड़ता है। प्रक्रियाएं लंबी और तकनीकी रूप से जटिल हैं, जिससे बुजुर्ग सैनिकों को परेशानी होती है। उन्होंने मांग की कि सैनिकों के लिए अलग से सरल और तेज प्रक्रिया निर्धारित की जाए, ताकि वे अपने अधिकारों का आसानी से उपयोग कर सकें।

इसके अलावा एक और जरूरी मांग सैनिक विश्राम गृह (सैनिक रेस्ट हाउस) की स्थापना को लेकर की गई। पूर्व सैनिकों ने कहा कि जब वे अपने गांवों से बाहर कहीं आते हैं, तो उन्हें ठहरने के लिए उपयुक्त व्यवस्था नहीं मिलती। उन्होंने मांग की कि एक सैनिक विश्राम गृह का निर्माण किया जाए, जिसमें वे और उनके परिजन रियायती दरों पर ठहर सकें। यह विश्राम गृह न केवल ठहरने की सुविधा देगा, बल्कि पूर्व सैनिकों के सामाजिक मेल-जोल और बैठकों के लिए भी उपयोगी साबित होगा।

जनसुनवाई के दौरान जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल अनिल कुमार चौहान ने सभी मांगों को गंभीरता से सुनते हुए भरोसा दिलाया कि वे इन्हें संबंधित उच्चाधिकारियों और प्रशासन तक पहुंचाएंगे। उन्होंने पूर्व सैनिकों को आश्वस्त किया कि सरकार पूर्व सैनिकों और शहीदों के परिवारों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और लगातार नई योजनाएं शुरू कर रही है। उन्होंने मोबाइल कैंटीन, स्मारक निर्माण और रेस्ट हाउस जैसी मांगों को वाजिब और समयानुकूल बताया तथा कहा कि इन पर शीघ्र कार्यवाही की जाएगी।

कर्नल चौहान ने यह भी बताया कि पूर्व सैनिकों के बच्चों को शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य सुविधाओं में प्राथमिकता दी जा रही है और राज्य सरकार इसके लिए कई योजनाएं चला रही है। उन्होंने उपस्थित सभी पूर्व सैनिकों से आग्रह किया कि वे नई योजनाओं और अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और जरूरतमंद सैनिक साथियों को भी जानकारी साझा करें। उन्होंने यह भी बताया कि अब पूर्व सैनिकों की शिकायतें ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भी दर्ज की जा सकती हैं, जिससे प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी और त्वरित हो गई है।

जनसुनवाई का समापन करते हुए सैनिक संघ के अध्यक्ष बलराम कांवर ने सभी अधिकारियों और पूर्व सैनिकों का आभार व्यक्त किया और कहा कि इस तरह के आयोजन समय-समय पर होते रहने चाहिए ताकि सरकार और सैनिक समुदाय के बीच सीधा संवाद स्थापित हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि सैनिक केवल युद्ध के मैदान में ही नहीं, बल्कि समाज के हर क्षेत्र में देश सेवा करते हैं और उनके अनुभवों का लाभ समाज को मिलना चाहिए।

निष्कर्ष रूप में देखा जाए तो यह जनसुनवाई न केवल पूर्व सैनिकों की समस्याओं के समाधान का एक मंच बनी, बल्कि इससे कई ऐसी मूलभूत जरूरतें सामने आईं, जिन पर ध्यान देना जरूरी है। चाहे वह मोबाइल कैंटीन की सुविधा हो, शहीद स्मारक का निर्माण, हथियारों की आसान रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया हो या फिर विश्राम गृह की मांग – ये सभी पहल सामाजिक रूप से आवश्यक हैं और सैनिकों के प्रति सम्मान प्रकट करने का एक सशक्त माध्यम भी हैं। बयाना में हुआ यह आयोजन एक सकारात्मक और प्रेरक उदाहरण है, जिसे अन्य जिलों में भी दोहराने की आवश्यकता है, ताकि देश की रक्षा में योगदान देने वाले इन वीरों को समाज में सम्मान और सुविधा दोनों मिल सके।

स्टेट क्राइम ब्रांच को मिली बड़ी कामयाबी : MP के कुख्यात पारदी गिरोह के 6 सदस्य गिरफ्तार

स्टेट क्राइम ब्रांच को मिली बड़ी कामयाबी : MP के कुख्यात पारदी गिरोह के 6 सदस्य गिरफ्तार

• अजमेर और सवाई माधोपुर में चोरी की साजिश का पर्दाफाश, लाखों के गहने और नकदी बरामद जयपुर। 

महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा के निर्देशन में पुलिस मुख्यालय द्वारा प्रदेश में सक्रिय गैंगस्टर्स, आपराधिक गिरोह, हथियार और नशा तस्करों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के अंतर्गत स्टेट क्राइम ब्रांच की टीम को एक बड़ी सफलता हासिल हुई है। टीम की सूचना पर अजमेर जिले की बांदरसिंदरी थाना पुलिस की टीम ने मध्य प्रदेश के कुख्यात पारदी गिरोह के छह जनों को चोरी की साजिश रचते रंगे हाथ चोरी में प्रयुक्त औजार और कुछ दिन पहले सवाई माधोपुर के माउंट टाउन थाना क्षेत्र में एक सूने मकान से चुराये सोने चांदी के जेवरात और नगदी बरामद की है।
उप महानिरीक्षक पुलिस अपराध दीपक भार्गव के निर्देशानुसार अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सिद्धांत शर्मा और राजेश मलिक के सुपरविजन और पुलिस निरीक्षक राम सिंह नाथावत के नेतृत्व में एक टीम को चलाये जा रहे अभियान की सफलता के आसूचना संकलन कर धरपकड़ करने रवाना किया गया था।
आसूचना संकलन के दौरान सीआईडी क्राइम ब्रांच टीम के सदस्य हेड कांस्टेबल महेंद्र कुमार को सूचना मिली कि मध्य प्रदेश की पारदी गिरोह अजमेर क्षेत्र में चोरी और डकैती करने के लिए सक्रिय है। सूचना की पुष्टि के बाद थाना बांदरसिंदरी अजमेर को सचेत किया गया। इस सूचना के आधार पर थाना प्रभारी अमरचंद की टीम गुरुवार देर रात गुलाबपुरा की हाणी ग्राम बांदरसिंदरी पहुंची। एक खाली प्लॉट के अंदर कमरे में छह लोग चोरी की योजना बना रहे थे, जिसमें एक व्यक्ति घर के अंदर घुसकर सामान चुराने, और बाकी लोग मोटरसाइकिल पर तैयार रहने की बात कर रहे थे।
पारदी गिरोह के छह बदमाश की गिरफ्तारी


पुलिस ने तुरंत घेराबंदी कर छह बदमाशों शिवनारायण सोलकी पुत्र सत्यनारायण पारदी (23), जयनारायण सोलंकी पुत्र सत्यनारायण पारदी (21), सुरजन पारदी पुत्र चंदू (30), गिरिराज पारदी पुत्र मोहन (19), विजय पारदी पुत्र रामचरण (19) और जीतू पारदी पुत्र मदनगोमा (35) निवासी धरनावदा जिला गुना मध्यप्रदेश को गिरफ्तार किया।
सवाई माधोपुर चोरी की घटना का खुलासा
पुलिस ने इनसे चोरी और सेंधमारी में इस्तेमाल होने वाले औजार जैसे कि कटर, पेचकस, टॉर्च, लोहे की टॉमी, रिच पाने और चार मोटरसाइकिलें बरामद की गईं। इसके अलावा गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से कुछ के पास से चोरी के आभूषण और पुराने नोट भी मिले। उन्होंने बताया कि ये सामान तीन दिन पहले सवाई माधोपुर में एक घर से चोरी किए गए थे, जिसकी रिपोर्ट थाना मानटाउन में दर्ज है।
गिरफ्तार आरोपी गिरिराज, सुरजन, विजय और जीतू के विरुद्ध मध्य प्रदेश के थाना धरनावदा और राजस्थान के बारां एवं सीकर जिले में पूर्व में भी कई अपराधिक प्रकरण दर्ज है। सुरजन थाना शिवपुरी में दर्ज डकैती के एक मामले में वांछित चल रहा है।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ शर्मा और राजेश मलिक के सुपरविजन एवं इंस्पेक्टर राम सिंह नाथावत के नेतृत्व में की गई इस कार्रवाई में हेड कांस्टेबल महेंद्र कुमार की विशेष भूमिका रही, वही टीम में शामिल उप निरीक्षक प्रताप सिंह, हेड कांस्टेबल हेमंत शर्मा, कांस्टेबल मोहन लाल और कांस्टेबल ड्राइवर दिनेश चंद्र के साथ डीएसटी अजमेर प्रभारी एएसआई शंकर सिंह और एसएचओ बांदर सिंदरी अमर चन्द मय टीम का सराहनीय योगदान रहा।

हत्याकांड का पर्दाफाश, सरकारी शिक्षक सहित 6 गिरफ्तार

हत्याकांड का पर्दाफाश, सरकारी शिक्षक सहित 6 गिरफ्तार

उदयपुर: चार दिन में सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा, छह आरोपी गिरफ्तार, एक सरकारी शिक्षक भी शामिल

उदयपुर जिले में पुलिस ने एक सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा करते हुए महज चार दिनों के भीतर छह आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें एक सरकारी शिक्षक भी शामिल है। यह हत्या एक सुनियोजित साजिश के तहत की गई थी, जिसमें आरोपियों ने मिलकर निर्दयता की सारी हदें पार कर दीं। मृतक नवीन भगोरा की नृशंस हत्या ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी। इस घटना से जहां एक ओर गांव में दहशत का माहौल रहा, वहीं दूसरी ओर पुलिस की तत्परता और रणनीतिक जांच के चलते लोगों में सुरक्षा को लेकर विश्वास भी जगा।

यह जघन्य हत्या 12 अगस्त 2025 की रात को हुई, जब नवीन भगोरा अपने एक दोस्त के साथ गाड़ी से घर लौट रहा था। जैसे ही उनकी गाड़ी मालीफला पंचायत स्थित पुल के पास पहुंची, अचानक से 10 से 15 हथियारबंद बदमाशों ने गाड़ी को रोका और नवीन को जबरन बाहर खींच लिया। इसके बाद आरोपियों ने कुल्हाड़ियों, लोहे की रॉड और लाठियों से उस पर अंधाधुंध हमला कर दिया। इतनी बर्बरता से पिटाई की गई कि मौके पर ही नवीन की मौत हो गई। यह वारदात पूरी तरह से पूर्व नियोजित थी, और हमलावर नवीन की हर गतिविधि पर पहले से नजर रख रहे थे।

इस निर्मम हत्या की रिपोर्ट मृतक के भाई सोमेश्वर भगोरा द्वारा स्थानीय पाटिया थाने में दर्ज कराई गई। प्राथमिकी में उन्होंने बताया कि उनके भाई को जानबूझकर घेरकर मारा गया है और यह कोई अचानक हुआ अपराध नहीं है, बल्कि इसका संबंध किसी पुरानी रंजिश से है। पुलिस ने भी जांच के शुरुआती दौर में इसे एक सामान्य हत्या नहीं, बल्कि पूर्वनियोजित साजिश मानकर तहकीकात शुरू की।

जांच के दौरान यह सामने आया कि नवीन और सभी आरोपी एक ही गांव के निवासी थे और एक समय पर आपस में अच्छे दोस्त हुआ करते थे। हालांकि, बीते कुछ वर्षों में इनके बीच आपसी तनाव और मनमुटाव इतना बढ़ गया कि यह रंजिश एक घातक हिंसा में बदल गई। पुलिस को शुरुआती पूछताछ में पता चला कि आरोपियों ने नवीन से बदला लेने की ठान रखी थी और इसी उद्देश्य से वे लगातार उसकी गतिविधियों पर नजर रख रहे थे। जब उन्हें सही मौका मिला, तब उन्होंने नवीन को घात लगाकर मौत के घाट उतार दिया।

घटना की भयावहता और गंभीरता को देखते हुए उदयपुर के पुलिस अधीक्षक योगेश गोयल ने बिना देर किए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। इस टीम को अत्याधुनिक तकनीक, कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स, सीसीटीवी फुटेज और गुप्त सूचनाओं के आधार पर जांच का जिम्मा सौंपा गया। टीम ने अत्यंत सूझबूझ और तत्परता से काम करते हुए, वारदात के महज चार दिन के भीतर ही सभी छह आरोपियों को खडकाया के जंगलों से गिरफ्तार कर लिया। यह क्षेत्र अत्यधिक दुर्गम और पहाड़ी है, जहां छिपकर रहना आसान था, लेकिन पुलिस की रणनीतिक घेराबंदी और खुफिया जानकारी के चलते आरोपी ज्यादा दिन तक बच नहीं पाए।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान बालकृष्ण, शैलेश कुमार, ब्रजेश, लाल धर्मेंद्र कुमार, गणेशलाल और जहेश के रूप में की गई है। इनमें से जहेश पेशे से एक सरकारी शिक्षक है, जो कि समाज में एक आदर्श व्यक्तित्व माने जाने वाले वर्ग से आता है। ऐसे व्यक्ति का इस तरह के हत्याकांड में शामिल होना समाज के लिए भी एक चिंतन का विषय बन गया है। बाकी सभी आरोपी भी मालीफला उखेड़ी, थाना पाटिया क्षेत्र के ही निवासी हैं। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने हत्या की योजना को कबूल करते हुए बताया कि उन्होंने काफी समय से नवीन की गतिविधियों पर नजर रखी थी और उसकी हत्या करने के लिए कई बार प्रयास भी किया था, लेकिन सही समय न मिलने के कारण वे सफल नहीं हो पाए थे।

पुलिस अधीक्षक योगेश गोयल ने मीडिया से बातचीत में इस आपरेशन की सफलता को अपनी टीम की संवेदनशीलता, तेजी और पेशेवर दक्षता का परिणाम बताया। उन्होंने विशेष रूप से टीम के उन सदस्यों की सराहना की, जिन्होंने दुर्गम इलाके में लगातार डटे रहकर आरोपियों को गिरफ्तार किया। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों को कठोरतम सजा दिलाई जाएगी। इस हत्याकांड में लागातार तकनीकी निगरानी, मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग और मैनुअल खुफिया तंत्र का संयोजन बेहद निर्णायक साबित हुआ।

इस घटना ने क्षेत्र में कानून व्यवस्था को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है। लोगों का कहना है कि यदि गांव स्तर पर चल रहे विवादों को समय रहते न सुलझाया जाए, तो वे हिंसा का रूप ले सकते हैं। ग्रामीण समाज में व्यक्तिगत रंजिश, जातिगत संघर्ष और पुराने विवाद कई बार ऐसी घातक घटनाओं को जन्म देते हैं। वहीं, इस मामले में पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने लोगों में सुरक्षा की भावना को मजबूती दी है। लोगों ने पुलिस की इस कार्रवाई की खुले दिल से प्रशंसा की है और उम्मीद जताई है कि भविष्य में भी ऐसे अपराधियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

निष्कर्षतः, यह मामला न केवल एक व्यक्तिगत दुश्मनी की खतरनाक परिणति है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि अपराध करने वाले लोग अब समाज के किसी भी वर्ग से हो सकते हैं — चाहे वह शिक्षित वर्ग ही क्यों न हो। पुलिस की मुस्तैदी, आधुनिक जांच प्रणाली और सूझबूझ से यह सनसनीखेज मामला केवल चार दिनों में सुलझा लिया गया, जो कि राजस्थान पुलिस की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अब जरूरत है कि समाज और प्रशासन मिलकर ऐसे जमीनी विवादों का समाधान संवाद से निकालें, ताकि किसी को भी अपने जीवन से हाथ न धोना पड़े।

अपराधियों पर शिकंजा: विशेष अभियान में 40 गिरफ्तार, ₹50 लाख के साइबर फ्रॉड का खुलासा

अपराधियों पर शिकंजा: विशेष अभियान में 40 गिरफ्तार, ₹50 लाख के साइबर फ्रॉड का खुलासा

भिवाड़ी पुलिस का बड़ा ऑपरेशन: 40 अपराधी गिरफ्तार, ₹50 लाख के साइबर फ्रॉड का भंडाफोड़

राजस्थान के भिवाड़ी में अपराधियों के खिलाफ एक विशेष अभियान के तहत पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। जयपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक के आदेश और भिवाड़ी के पुलिस अधीक्षक प्रशांत किरण के निर्देशन में चलाए गए इस ऑपरेशन में कुल 40 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। यह अभियान क्षेत्र में बढ़ते अपराध और साइबर धोखाधड़ी जैसे मामलों को रोकने के उद्देश्य से चलाया गया था। इस ऑपरेशन में विशेष रूप से साइबर क्राइम पर फोकस किया गया, जिसमें पुलिस ने ₹50 लाख से अधिक की धोखाधड़ी के मामलों का पर्दाफाश किया। एसपी प्रशांत किरण के अनुसार, इस दौरान करीब दो दर्जन साइबर फ्रॉड मामलों को सुलझाया गया है और 9 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई आमजन को सुरक्षित और भयमुक्त माहौल देने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।


1. चौपानकी थाना: कानून के विभिन्न प्रावधानों में 8 गिरफ्तारियां

चौपानकी थाना क्षेत्र की पुलिस ने इस विशेष अभियान के तहत कुल 8 मुल्जिमों को गिरफ्तार किया। इनमें 5 अपराधियों को RBA Act के तहत पकड़ा गया, जबकि 1 आरोपी साइबर क्राइम से संबंधित था। इसके अलावा 2 अपराधियों को भारतीय न्याय संहिता की धारा 170 BNS के अंतर्गत गिरफ्तार किया गया। चौपानकी थाना द्वारा की गई यह कार्रवाई क्षेत्र में चल रहे पुराने और लंबित मामलों के समाधान के लिए निर्णायक सिद्ध हुई है। इन गिरफ्तारियों से यह स्पष्ट होता है कि पुलिस ने केवल वर्तमान में हो रहे अपराधों पर ही नहीं, बल्कि पुराने मामलों में भी सख्त रुख अपनाया है। चौपानकी थाना क्षेत्र की यह सफलता क्षेत्रवासियों में विश्वास बहाल करने वाली रही।


2. टपूकड़ा और तिजारा थाने की संयुक्त कार्रवाई: 15 अपराधी सलाखों के पीछे

टपूकड़ा थाना ने भी इस विशेष अभियान में अपनी प्रभावी भागीदारी दर्ज की है। यहां कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें से 4 आरोपी साइबर क्राइम के मामलों से जुड़े थे, जबकि 2 आरोपी तिजारा थाना क्षेत्र के वांछित अपराधी थे, जिन्हें टपूकड़ा पुलिस ने गिरफ्तार किया और संबंधित थाने को ट्रांजिट रिमांड पर सौंपा। इस समन्वित प्रयास ने पुलिस की क्षेत्रीय एकता और सूचनाओं के आदान-प्रदान की कार्यप्रणाली को सुदृढ़ किया है।

वहीं, तिजारा थाना की पुलिस ने कुल 9 आरोपियों को पकड़ने में सफलता प्राप्त की। इन गिरफ्तारियों में 3 आरोपी साइबर क्राइम, 4 अपराधी 170 BNS के तहत, और 2 आरोपी ट्रांजिट रिमांड पर शामिल हैं। यह कार्रवाई तिजारा क्षेत्र में चल रहे संगठित आपराधिक गतिविधियों पर गहरी चोट साबित हुई। पुलिस अब इन आरोपियों से पूछताछ कर अन्य संभावित लिंक और नेटवर्क की जानकारी निकालने में लगी हुई है। इन दोनों थानों की सक्रियता और रणनीतिक तालमेल से यह स्पष्ट होता है कि भिवाड़ी पुलिस आपराधिक जड़ों को पूरी तरह से खत्म करने के लिए कृतसंकल्प है।


3. शेखपुर अहीर और जेरोली थानों की सक्रियता: व्यापक स्तर पर अपराधियों की धरपकड़

शेखपुर अहीर थाना भी इस विशेष पुलिस ऑपरेशन में पीछे नहीं रहा। यहां की पुलिस टीम ने 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें 2 अपराधियों को 13 RPGO (Rajasthan Prevention of Gambling Ordinance) के तहत तथा 7 को 170 BNS के तहत पकड़ा गया। यह थाना लंबे समय से छोटे व स्थानीय अपराधों के नियंत्रण में सक्रिय रहा है, लेकिन इस बार की कार्रवाई ने इसे संगठित अपराधों से निपटने में भी सक्षम सिद्ध कर दिया है। शेखपुर अहीर पुलिस की कार्यशैली और तत्परता सराहनीय रही है, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा की भावना और अधिक सुदृढ़ हुई है।

वहीं जेरोली थाना की पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें 1 वांछित साइबर अपराधी शामिल था, जिसे पहले से पुलिस तलाश रही थी। बाकी 5 आरोपी 170 BNS के तहत पकड़े गए हैं। जेरोली क्षेत्र में यह बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है, क्योंकि यहां हाल के दिनों में साइबर अपराधों की शिकायतों में वृद्धि देखी गई थी। जेरोली पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने यह संकेत दे दिया है कि अब साइबर अपराधियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह नहीं बची है।


4. साइबर क्राइम पर विशेष फोकस: ₹50 लाख की धोखाधड़ी का भंडाफोड़

इस पूरे अभियान की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी रही है। भिवाड़ी पुलिस ने 9 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जिनके खिलाफ दर्ज शिकायतों में ₹50 लाख से अधिक की साइबर धोखाधड़ी शामिल थी। ये अपराधी आम नागरिकों को फर्जी कॉल, लिंक, ऑनलाइन ठगी, KYC अपडेट, बैंक फर्जीवाड़ा जैसे तरीकों से अपना शिकार बना रहे थे। इस तरह के अपराधों की पेचीदगियों और तकनीकी बारीकियों को समझते हुए पुलिस ने एक विशेष साइबर यूनिट के साथ मिलकर यह सफलता हासिल की।

एसपी प्रशांत किरण ने बताया कि साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस अब तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल फॉरेंसिक का उपयोग कर रही है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों के मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंक ट्रांजैक्शन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है, ताकि उनके नेटवर्क और साथी आरोपियों का भी पता लगाया जा सके। इसके अलावा आमजन को भी लगातार साइबर जागरूकता अभियान के तहत सतर्क किया जा रहा है ताकि वे किसी भी प्रकार की ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार न बनें।


निष्कर्ष: जनता में बढ़ा विश्वास, अपराधियों में खौफ

भिवाड़ी में चलाए गए इस विशेष पुलिस अभियान ने साबित कर दिया है कि यदि रणनीति और समन्वय के साथ कार्य किया जाए, तो संगठित अपराधों और साइबर क्राइम जैसी जटिल चुनौतियों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। 40 अपराधियों की गिरफ्तारी, ₹50 लाख से अधिक की धोखाधड़ी का पर्दाफाश, और हर थाना स्तर पर की गई सक्रिय कार्रवाई ने पुलिस की कार्यशैली को जनता के बीच और अधिक भरोसेमंद बना दिया है।

एसपी प्रशांत किरण ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान केवल एक शुरुआत है और आने वाले समय में इसे और भी तेज किया जाएगा। उनका उद्देश्य है कि भिवाड़ी को एक अपराधमुक्त और सुरक्षित जिला बनाया जाए, जहां आमजन निर्भय होकर जीवन यापन कर सकें। पुलिस की इस पहल से न केवल अपराधियों में भय का माहौल बना है, बल्कि आम जनता में सुरक्षा की भावना भी प्रबल हुई है।

भरतपुर में प्रीडीएलएड परीक्षा में धोखाधड़ी का खुलासा, डमी अभ्यर्थी गिरफ्तार

भरतपुर में प्रीडीएलएड परीक्षा में धोखाधड़ी का खुलासा, डमी अभ्यर्थी गिरफ्तार

भरतपुर: प्री-डीएलएड परीक्षा में डमी अभ्यर्थी पकड़ा गया, पुलिस ने किया गिरफ्तार

भरतपुर जिले में आयोजित प्री-डीएलएड (Pre-D.El.Ed) परीक्षा में बड़ी धांधली का खुलासा हुआ है, जहां पुलिस ने एक डमी अभ्यर्थी को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई जिले के पुलिस अधीक्षक दिगंत आनंद के निर्देशन में की गई, जिन्होंने परीक्षा की पारदर्शिता को प्रभावित करने वाले इस आपराधिक कृत्य को गंभीरता से लिया और तत्काल जांच के आदेश दिए। इस मामले में आरोपी अनिल कुमार को गिरफ्तार किया गया है, जो परीक्षा में पार्थ नामक अभ्यर्थी की जगह बैठा था। इस प्रकरण ने शिक्षा व्यवस्था में निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


1. घटना का विवरण: परीक्षा में हुई धोखाधड़ी

घटना 1 जून, 2025 की है, जब भरतपुर शहर के रंजीत नगर स्थित आदर्श विद्या मंदिर परीक्षा केंद्र पर प्री-डीएलएड परीक्षा का आयोजन हो रहा था। इसी दौरान परीक्षा केंद्र पर मौजूद निगरानी टीम को एक अभ्यर्थी की गतिविधियों पर संदेह हुआ। जब उसकी पहचान पत्रों की जांच की गई, तो यह स्पष्ट हो गया कि वह व्यक्ति मूल अभ्यर्थी नहीं था, बल्कि डमी (फर्जी) अभ्यर्थी बनकर परीक्षा दे रहा था।

इस पर तुरंत कार्रवाई करते हुए परीक्षा केंद्र प्रशासन ने पुलिस को सूचित किया। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम अनिल कुमार बताया, जो धौलपुर जिले के अतरौली गांव का निवासी है। वह पार्थ नामक अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देने आया था। इस गंभीर धोखाधड़ी की सूचना तुरंत उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई गई और इसे एक अपराध की श्रेणी में दर्ज करते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।


2. पुलिस कार्रवाई और प्रारंभिक जांच

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक दिगंत आनंद ने तत्काल प्रभाव से जांच शुरू करने के आदेश दिए। सबसे पहले इस मामले में धौलपुर के निहालगंज थाने में एक जीरो नंबर एफआईआर दर्ज की गई, जिसे बाद में कार्यक्षेत्र के अनुसार भरतपुर के कोतवाली थाने में स्थानांतरित कर दिया गया।

पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सतीश यादव के सुपरविजन में एक विशेष जांच टीम का गठन किया। इस टीम में थानाधिकारी विनोद कुमार, और कांस्टेबल विवेंद्र सिंह, जगदी सिंह और प्रकाश चंद को शामिल किया गया, जिन्होंने तकनीकी सहायता और कागजी साक्ष्य के माध्यम से तेजी से जांच को आगे बढ़ाया। पूछताछ के दौरान अनिल कुमार (26) ने स्वीकार किया कि उसने पार्थ की जगह पैसे लेकर परीक्षा दी थी। यह कबूलनामा जांच टीम के लिए एक महत्वपूर्ण सुराग साबित हुआ, जिससे पूरे गिरोह के तार जोड़ने की प्रक्रिया तेज की गई।


3. आरोपी की पहचान और गिरोह की संभावित भूमिका

गिरफ्तार हुआ आरोपी अनिल कुमार, शिक्षा से जुड़ा कोई पेशेवर नहीं है, बल्कि वह धौलपुर जिले के अतरौली गांव का रहने वाला है और इससे पहले भी कई बार परीक्षा में दूसरों की जगह बैठने की कोशिश कर चुका है। पुलिस को संदेह है कि यह कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित गिरोह सक्रिय है जो पैसों के बदले डमी कैंडिडेट्स को परीक्षा में बैठाने का काम करता है।

पुलिस अब इस मामले में मूल अभ्यर्थी पार्थ की तलाश कर रही है, जो संभवतः इस पूरे फर्जीवाड़े का सूत्रधार हो सकता है। यदि पार्थ और अनिल कुमार के बीच किसी तरह का लेन-देन हुआ है, तो यह पूरी तरह से एक संगठित आपराधिक गिरोह की तरफ इशारा करता है, जो शिक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार फैलाने में लिप्त है। इसके अलावा पुलिस यह भी जांच कर रही है कि परीक्षा केंद्र के किसी कर्मचारी की मिलीभगत तो नहीं थी, क्योंकि इस तरह की घटनाएं बिना अंदरूनी सहयोग के संभव नहीं होतीं।


4. शिक्षा प्रणाली पर सवाल और आगे की कार्रवाई

यह घटना केवल एक परीक्षा धोखाधड़ी नहीं, बल्कि शिक्षा प्रणाली की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। प्री-डीएलएड परीक्षा, जो कि शिक्षकों की ट्रेनिंग के लिए आयोजित की जाती है, उसमें इस तरह की गड़बड़ी आने वाले समय में शिक्षा के स्तर और गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। यदि कोई अभ्यर्थी खुद परीक्षा देने की क्षमता नहीं रखता और दूसरों के सहारे से शिक्षक बनने की कोशिश कर रहा है, तो यह बच्चों के भविष्य के साथ धोखा है।

भरतपुर पुलिस अब इस पूरे मामले को संदेह की दृष्टि से जाँचते हुए और भी संदिग्ध व्यक्तियों की तलाश कर रही है। साइबर फॉरेंसिक की मदद से पार्थ के मोबाइल नंबर, कॉल डिटेल, ट्रांजैक्शन हिस्ट्री और परीक्षा फॉर्म में किए गए किसी भी तरह के बदलाव की जांच की जा रही है। साथ ही अनिल कुमार के पुराने रिकार्ड्स की भी छानबीन की जा रही है ताकि यह पता चल सके कि वह पहले भी इस तरह की किसी गतिविधि में लिप्त रहा है या नहीं।

इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए अब जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को मिलकर काम करने की जरूरत है। बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, लाइव फोटो कैमरा, QR कोड आधारित पहचान पत्र और सीसीटीवी निगरानी जैसी व्यवस्थाओं को अनिवार्य करना समय की मांग बन गई है। प्रशासन और पुलिस की सजगता ने इस मामले को समय रहते पकड़ लिया, परंतु भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुरक्षित और तकनीकी रूप से सशक्त बनाना होगा।


निष्कर्ष:
भरतपुर में हुई यह घटना न केवल शैक्षणिक धोखाधड़ी का एक ज्वलंत उदाहरण है, बल्कि यह इस बात की चेतावनी भी है कि यदि शिक्षा प्रणाली में तकनीकी सुधार और सुरक्षा उपायों को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो इससे भविष्य में और भी गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। पुलिस की तत्परता और टीमवर्क की वजह से एक बड़ा फर्जीवाड़ा समय रहते पकड़ लिया गया, परंतु यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसे लोग दोबारा इस तरह की हरकत न कर सकें। इस दिशा में प्रशासन, शिक्षा विभाग और सुरक्षा एजेंसियों को मिलकर ठोस रणनीति बनानी होगी।

दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में बड़े जुआ रैकेट का भंडाफोड़, 12 गिरफ्तार, 15 लाख से अधिक बरामद

दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में बड़े जुआ रैकेट का भंडाफोड़, 12 गिरफ्तार, 15 लाख से अधिक बरामद

नई दिल्ली: वसंत विहार में पुलिस ने किया बड़े जुआ रैकेट का भंडाफोड़

नई दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम जिले में एक बार फिर पुलिस की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से एक संगठित अपराध का खुलासा हुआ है। इस बार पुलिस ने वसंत विहार इलाके में चल रहे एक बड़े जुआ रैकेट का पर्दाफाश करते हुए 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें से कई अभियुक्तों का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है, और इनमें मास्टरमाइंड हरीश उर्फ क्रांति भी शामिल है, जो इस पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था। यह कार्रवाई दक्षिण-पश्चिम जिले की पुलिस, विशेष रूप से थाना वसंत विहार और स्पेशल स्टाफ की संयुक्त टीम द्वारा एक सुनियोजित ऑपरेशन के तहत की गई।

यह ऑपरेशन 20 अगस्त 2025 को एक गुप्त सूचना के आधार पर अंजाम दिया गया, जिसमें वसंत विहार के कुसुमपुर पहाड़ी क्षेत्र स्थित मकान नंबर डी-40 को चिन्हित किया गया था। इसी स्थान पर लंबे समय से एक गोपनीय जुआ अड्डा चल रहा था। पुलिस उपायुक्त (दक्षिण-पश्चिम) अमित गोयल ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम जिले में संगठित अपराध, विशेषकर जुए के बड़े रैकेटों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके थे। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए इस अभियान को अंजाम दिया गया।

ऑपरेशन का नेतृत्व इंस्पेक्टर विजय बालियान ने किया, जबकि इसकी निगरानी सहायक पुलिस आयुक्त (संचालन) विजय पाल सिंह द्वारा की गई। जैसे ही पुलिस टीम ने जुआ अड्डे पर छापा मारा, मौके से 11 जुआरी रंगे हाथों पकड़े गए। इन सभी को जुए के दौरान खेलते हुए पकड़ा गया, और मौके से बड़ी मात्रा में नकदी एवं जुए से संबंधित सामग्री भी बरामद हुई। बाद में छापे के विस्तार में रैकेट के सरगना हरीश उर्फ क्रांति को भी गिरफ्तार कर लिया गया, जो इस अड्डे का संचालन करता था और इससे अर्जित रकम का प्रमुख लाभार्थी था।

गिरफ्तार किए गए 12 आरोपियों के नाम इस प्रकार हैं: योगेश (45), सचिन (50), इरफान (30), पन्ना लाल (60), चंदन (44), शाहिद खान (50), प्रकाश सिंह (25), सोनू (35), मुकेश (48), अंकित (37), याद मोहन (44) और हरीश उर्फ क्रांति (39)। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इन 12 में से छह आरोपियों पर पूर्व में भी आपराधिक मुकदमे दर्ज हो चुके हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह जुआ रैकेट केवल शौकिया जुआरियों का समूह नहीं, बल्कि एक संगठित आपराधिक नेटवर्क है।

मौके से जो सामान बरामद किया गया है, वह इस पूरे नेटवर्क की व्यापकता को दर्शाता है। ₹15,32,500 नकद राशि, 13 पैकेट प्रीमियम क्वालिटी के ताश के पत्ते, 10 पासे और एक चमड़े का विशेष डिब्बा बरामद किया गया, जिसका उपयोग जुए के आयोजन में होता था। इतनी भारी मात्रा में नकदी की बरामदगी यह स्पष्ट करती है कि यह जुआ केवल मामूली स्तर का नहीं था, बल्कि इसमें बड़ी रकम का दांव लगाया जा रहा था, जिसमें कई बार लाखों की हेराफेरी होती थी।

दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में बड़े जुआ रैकेट का भंडाफोड़, 12 गिरफ्तार, 15 लाख से अधिक बरामद
दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में बड़े जुआ रैकेट का भंडाफोड़, 12 गिरफ्तार, 15 लाख से अधिक बरामद

इस मामले में थाना वसंत विहार में एफआईआर नंबर 213/25 दर्ज की गई है। यह एफआईआर दिल्ली सार्वजनिक जुआ अधिनियम की धारा 3/4/5 के तहत दर्ज की गई है, जो गैरकानूनी रूप से जुए के आयोजन, उसमें भाग लेने और उससे अर्जित लाभों को दंडनीय अपराध घोषित करती है। पुलिस इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुँचने के लिए अभी गहन जांच और पूछताछ में लगी हुई है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान यह सामने आया कि इस रैकेट को बड़े ही सुनियोजित ढंग से चलाया जा रहा था और इसमें कई और लोग भी शामिल हो सकते हैं।

पुलिस को संदेह है कि इस रैकेट का संबंध अन्य जिलों या राज्यों में चल रहे जुए के नेटवर्क से भी हो सकता है। ऐसे मामलों में अपराधी आम तौर पर मोबाइल एप्स, डिजिटल पेमेंट गेटवे और गुप्त नेटवर्किंग के जरिए अपनी गतिविधियों को अंजाम देते हैं, ताकि कानून की नजरों से बचा जा सके। हालांकि इस केस में जुआ प्रत्यक्ष रूप से स्थल आधारित (फिजिकल) था, लेकिन पुलिस इसकी पड़ताल कर रही है कि क्या कहीं इसमें ऑनलाइन लिंक या फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन के माध्यम से बड़े स्तर पर काले धन की आवाजाही भी शामिल थी।

इस मामले ने एक बार फिर यह उजागर कर दिया है कि दिल्ली जैसे महानगरों में अवैध गतिविधियाँ किस तरह से आम नागरिकों के जीवन को प्रभावित कर सकती हैं। जुए जैसी सामाजिक बुराइयाँ न केवल आर्थिक नुकसान का कारण बनती हैं, बल्कि परिवारों को भी तोड़ने का कार्य करती हैं। दक्षिण-पश्चिम जिले की पुलिस ने यह साबित कर दिया है कि वे ऐसे मामलों में ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाते हुए हर संभव कदम उठाएंगे।

पुलिस उपायुक्त अमित गोयल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इस कार्रवाई के बाद अन्य संभावित अड्डों की निगरानी और सतर्कता और तेज कर दी गई है। उन्होंने आम नागरिकों से भी अपील की कि यदि उन्हें किसी प्रकार की ऐसी गतिविधियों की जानकारी हो तो वे निःसंकोच पुलिस को सूचना दें। गुप्त सूचनाओं को पूर्णतः सुरक्षित रखा जाएगा और संबंधित कार्रवाई तुरंत की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि यह सिर्फ एक शुरुआत है और आने वाले दिनों में ऐसे अन्य रैकेटों पर भी शिकंजा कसा जाएगा

इस केस के जरिए पुलिस यह संकेत देना चाहती है कि चाहे अपराध कितना भी संगठित क्यों न हो, यदि प्रशासन और खुफिया इकाइयाँ सतर्क रहें, तो उसे जड़ से खत्म किया जा सकता है। यह कार्रवाई एक कड़ा संदेश है उन लोगों के लिए जो ऐसे अवैध कार्यों में लिप्त हैं और सोचते हैं कि वे कानून की पकड़ से बाहर हैं।

निष्कर्ष के रूप में, वसंत विहार में हुआ यह खुलासा दिल्ली पुलिस की सतर्कता और अपराध पर नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस ऑपरेशन के माध्यम से न केवल एक सक्रिय जुआ अड्डे को खत्म किया गया, बल्कि यह भी सिद्ध किया गया कि कानून व्यवस्था को चुनौती देने वालों के लिए राजधानी में कोई जगह नहीं है। आने वाले दिनों में इस रैकेट से जुड़े अन्य चेहरों को बेनकाब करने की उम्मीद है, जिससे राजधानी को जुए जैसे सामाजिक अपराधों से मुक्त किया जा सकेगा।

बच्चों के भविष्य की सुरक्षा: डीग में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस अभियान की शुरुआत

बच्चों के भविष्य की सुरक्षा: डीग में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस अभियान की शुरुआत

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर डीग जिले में विशेष अभियान का शुभारंभ

डीग जिले में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के अवसर पर एक विशेष स्वास्थ्य अभियान की शुरुआत की गई है, जिसका उद्देश्य जिले के बच्चों और किशोरों को कृमि संक्रमण से बचाना है। शुक्रवार को इस अभियान का औपचारिक शुभारंभ जिला कलेक्टर उत्सव कौशल द्वारा लाला मनोहर लाल खंडेलवाल कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत फीता काटकर और विद्यालय की छात्राओं को कृमिनाशक दवा पिलाकर की गई। इस अभियान की अहमियत को रेखांकित करते हुए कलेक्टर ने कहा कि यह सिर्फ एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि भावी पीढ़ी के संपूर्ण विकास का आधार है।

इस अभियान का मूल उद्देश्य 1 से 19 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों और किशोर-किशोरियों को कृमि संक्रमण से बचाना है। कृमि संक्रमण, विशेष रूप से बच्चों में, एक आम लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जो उनके संपूर्ण विकास पर गहरा प्रभाव डालती है। संक्रमित बच्चे अक्सर खून की कमी (एनीमिया), कुपोषण, थकान, भूख न लगना, और ध्यान केंद्रित करने में असमर्थता जैसी समस्याओं से जूझते हैं। इसके अलावा, लंबे समय तक संक्रमण रहने से उनका शारीरिक और मानसिक विकास भी बाधित हो सकता है।

इस बार अभियान को अगस्त महीने की 22 और 29 तारीख को आयोजित किया जा रहा है, जिसमें सभी शैक्षणिक और बाल विकास संस्थानों को शामिल किया गया है। स्कूलों, मदरसों, आंगनवाड़ी केंद्रों और कॉलेजों में उपस्थित बच्चों को निशुल्क कृमिनाशक दवा दी जाएगी। इस प्रक्रिया को इस तरह से संचालित किया जा रहा है कि बच्चों को कोई परेशानी न हो और यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी बच्चा दवा से वंचित न रहे।

इस अभियान में स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख भूमिका है, जिसे महिला एवं बाल विकास विभाग और शिक्षा विभाग का भी सक्रिय सहयोग प्राप्त हो रहा है। तीनों विभागों के संयुक्त प्रयासों से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि अभियान हर गाँव, हर स्कूल और हर केंद्र तक पहुंचे। विभागों ने पहले से ही आंकलन कर लिया है कि जिले में कितने बच्चे इस अभियान के दायरे में आएंगे, और उनके अनुसार दवाओं की व्यवस्था भी की गई है।

जिला कलेक्टर ने इस अवसर पर उपस्थित सभी अधिकारियों, शिक्षकों, स्वास्थ्य कर्मियों और अभिभावकों से अपील की कि वे इस अभियान को सफल बनाने में अपना सक्रिय सहयोग दें। उन्होंने विशेष रूप से यह भी कहा कि किसी भी तरह की भ्रांति या अफवाहों से दूर रहकर, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इस कार्यक्रम का हिस्सा बनें। उन्होंने बताया कि दवा पूरी तरह से सुरक्षित है और इससे किसी भी तरह का गंभीर साइड इफेक्ट नहीं होता। बहुत कम मामलों में हल्की जी मिचलाने या पेट में हल्की गड़बड़ी की शिकायत हो सकती है, जो सामान्य है।

इसके अतिरिक्त, कलेक्टर उत्सव कौशल ने यह भी कहा कि कृमि संक्रमण को रोकने के लिए स्वच्छता और स्वच्छ जल का उपयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बच्चों को हाथ धोने की आदत डालने, खुले में शौच से बचने और स्वच्छ पेयजल पीने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विद्यालय के शिक्षकों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से कहा कि वे बच्चों को नियमित रूप से स्वच्छता के महत्व को समझाएं, जिससे संक्रमण के स्रोत को जड़ से समाप्त किया जा सके।

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की छात्राओं में भी उत्साह देखने को मिला। बच्चों ने कलेक्टर से बातचीत की और इस विषय पर जागरूकता से संबंधित प्रश्न पूछे। विद्यालय स्टाफ ने इस पहल की सराहना की और भरोसा दिलाया कि वे इसे पूरी निष्ठा से लागू करेंगे। कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य विभाग की एक टीम ने बच्चों को दवा देने के साथ-साथ उन्हें कृमि संक्रमण के लक्षण और सावधानियों के बारे में भी बताया। उन्हें यह भी सिखाया गया कि अगर किसी बच्चे को दवा लेने के बाद कोई तकलीफ हो तो क्या कदम उठाए जाएं।

यह अभियान केवल स्वास्थ्य सेवा का एक हिस्सा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों की दीर्घकालिक सेहत को सुरक्षित करने की दिशा में उठाया गया एक ठोस कदम है। भारत सरकार द्वारा पूरे देश में दो बार—फरवरी और अगस्त—में इस अभियान को चलाया जाता है, जिसमें करोड़ों बच्चों को लाभ मिलता है। डीग जिला प्रशासन इस अभियान को 100% लक्ष्य के साथ लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।

जिले के सभी विकास खंडों और ग्राम पंचायतों को इस कार्यक्रम की जानकारी पहले से भेज दी गई है। संबंधित विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे समय पर दवाएं पहुँचाएं, प्रशिक्षित स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करें और यह निगरानी रखें कि कोई बच्चा दवा से वंचित न रहे। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए जिला स्तर पर एक कंट्रोल रूम की भी स्थापना की गई है, जहाँ से अभियान की प्रगति पर नजर रखी जाएगी और किसी भी शिकायत का तत्काल समाधान किया जाएगा।

अभियान के सफल संचालन के लिए ज़मीनी स्तर पर काम कर रहे आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा सहयोगिनी, विद्यालय के शिक्षक और चिकित्सा कर्मी सबसे बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। ये सभी लोग अपनी जिम्मेदारी को सेवा के भाव से निभा रहे हैं, ताकि हर बच्चे तक यह सुरक्षा कवच पहुँच सके। जिला प्रशासन ने इन कार्यकर्ताओं के योगदान की सराहना की है और उन्हें अभियान के अंत तक निरंतर कार्य करने का आग्रह किया है।

निष्कर्ष रूप में, राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर डीग जिले में शुरू किया गया यह विशेष अभियान एक बड़ी पहल है, जो बच्चों के स्वास्थ्य और विकास को सुरक्षित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस अभियान की सफलता केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि सभी मिलकर साथ दें, तो निश्चित ही इस जिले को कृमि मुक्त बनाकर बच्चों को एक स्वस्थ और उज्जवल भविष्य प्रदान किया जा सकता है।

उपराष्ट्रपति चुनाव : BJP ने शिवसेना-UBT और NCP-शरद गुट से मांगा समर्थन, फडणवीस ने ठाकरे-पवार से की बातचीत

उपराष्ट्रपति चुनाव : BJP ने शिवसेना-UBT और NCP-शरद गुट से मांगा समर्थन, फडणवीस ने ठाकरे-पवार से की बातचीत

1. उपराष्ट्रपति चुनाव में बीजेपी ने मांगा समर्थन

मुंबई में आगामी उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियाँ तेज़ हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस बार एक खास रणनीति के तहत विपक्षी दलों से भी समर्थन की मांग की है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जानकारी दी कि उन्होंने राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टियों—शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (शरद पवार गुट)—से एनडीए के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन के लिए समर्थन मांगा है।

सीएम फडणवीस ने बताया कि उपराष्ट्रपति का चुनाव गैर-पक्षपातपूर्ण होता है, जहां किसी भी दल पर व्हीप लागू नहीं होता। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने उद्धव ठाकरे और शरद पवार से व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर समर्थन का अनुरोध किया। उन्होंने कहा, “सीपी राधाकृष्णन महाराष्ट्र के राज्यपाल भी हैं और मुंबई के मतदाता भी। इसलिए मैंने विपक्ष से इस चुनाव में गैर-पक्षपात के आधार पर समर्थन की अपील की है।”

2. उद्धव और पवार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री फडणवीस द्वारा किए गए इस प्रयास पर शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (शरद पवार गुट) की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग रहीं। उद्धव ठाकरे ने समर्थन को लेकर तत्काल कोई निर्णय नहीं लिया, बल्कि कहा कि वे इस विषय में अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से चर्चा करेंगे और उसके बाद ही कोई निर्णय लेंगे। इससे यह संकेत मिलता है कि शिवसेना-यूबीटी अभी इस मुद्दे पर अपने पत्ते खोलने को तैयार नहीं है और वह रणनीतिक दृष्टि से सोच-विचार कर रही है।

दूसरी ओर, एनसीपी नेता शरद पवार ने स्पष्ट रूप से कह दिया कि चूंकि विपक्ष ने अपना उम्मीदवार खड़ा किया है, इसलिए वे विपक्षी दलों के साथ रहेंगे। शरद पवार के इस बयान से यह स्पष्ट हो गया कि एनसीपी (शरद गुट) भाजपा के उम्मीदवार का समर्थन नहीं करेगी। इससे यह भी झलकता है कि विपक्ष अपनी एकता बनाए रखना चाहता है, विशेषकर राष्ट्रीय स्तर पर हो रहे चुनावों में।

3. पृथ्वीराज चव्हाण पर मतदाता सूची विवाद

इस राजनीतिक हलचल के बीच, एक अन्य बड़ा मुद्दा सामने आया—पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण से जुड़ा मतदाता सूची विवाद। देवेंद्र फडणवीस ने इस मामले में कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि विधायक अतुल भोसले ने पृथ्वीराज चव्हाण के निजी सहायक गजानन अवलकर और उनके परिवार से जुड़ी जानकारी साझा की है, जिससे यह संकेत मिलता है कि वे मतदाता सूची में दो जगहों पर पंजीकृत हैं।

सीएम फडणवीस ने तीखा हमला करते हुए कहा, “राहुल गांधी ने वोट चोरी का ठेका ले लिया है। अब साफ हो गया है कि असली वोट चोर कौन है।” इस बयान से राज्य की राजनीति में नया बवाल खड़ा हो गया है। यदि ये आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह कांग्रेस के लिए गंभीर संकट का कारण बन सकते हैं। हालांकि, कांग्रेस की ओर से इस पर तत्काल कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन संभावना है कि इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी और तेज़ होगी।

4. महिला आयोग के कार्यक्रम में हुई भागीदारी

राजनीतिक मामलों के अलावा, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सामाजिक मुद्दों पर भी सक्रिय भागीदारी दिखाई। हाल ही में वे राष्ट्रीय महिला आयोग के एक कार्यक्रम में शामिल हुए, जो महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग के सहयोग से आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य राज्य महिला आयोगों के साथ संवाद स्थापित करना और उनकी क्षमता निर्माण करना था।

इस बैठक की थीम थी—‘शक्ति संवाद: इंटरैक्टिव एंड कैपेसिटी बिल्डिंग मीटिंग विद स्टेट वूमन कमिशन्स’। इसमें महिला सशक्तिकरण, कानूनी जागरूकता, और महिला आयोगों की कार्यक्षमता को बढ़ाने पर गहन चर्चा की गई। इस अवसर पर विधान परिषद के सभापति राम शिंदे, विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर, राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा विजया रहाटकर, विधान परिषद की उपसभापति नीलम गोरे, और महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्षा रुपाली चाकणकर समेत कई प्रमुख हस्तियाँ उपस्थित थीं।

यह कार्यक्रम महिला सशक्तिकरण के दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण माना गया, जहां राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर महिला आयोगों के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए। मुख्यमंत्री फडणवीस ने महिलाओं की सुरक्षा और समान अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।


निष्कर्ष:
महाराष्ट्र में उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर भाजपा की ओर से किए गए प्रयास राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। विपक्ष से समर्थन मांगना भाजपा की एक नई रणनीति हो सकती है, जिससे उन्हें व्यापक जनसमर्थन मिले। वहीं, मतदाता सूची विवाद ने राजनीतिक गरमी को और बढ़ा दिया है। दूसरी ओर, महिला सशक्तिकरण जैसे सामाजिक मुद्दों पर सरकार की भागीदारी सकारात्मक संकेत देती है कि राजनीति केवल सत्ता की नहीं, बल्कि समाजसेवा की भी दिशा में आगे बढ़ रही है।

गागलहेड़ी पुलिस का भोकाल, एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रवेश शर्मा की कार्रवाई से बदमाश लंगड़ा

गागलहेड़ी पुलिस का भोकाल, एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रवेश शर्मा की कार्रवाई से बदमाश लंगड़ा

गागलहेड़ी पुलिस का भोकाल: एनकाउंटर स्पेशलिस्ट थाना प्रभारी प्रवेश शर्मा की जबरदस्त कार्यवाही – एक और बदमाश पहुंचा अस्पताल

सहारनपुर जिले के गागलहेड़ी थाना क्षेत्र में अपराधियों के लिए अब बच निकलना आसान नहीं रहा। अपराधियों के हौसले जहां पस्त नजर आ रहे हैं, वहीं आम जनता चैन की सांस ले रही है। इसका पूरा श्रेय जाता है गागलहेड़ी थाना प्रभारी प्रवेश शर्मा और उनकी पुलिस टीम को, जो दिन-रात अपराध नियंत्रण में जुटी है। एक बार फिर थाना प्रभारी की कुशल नेतृत्व क्षमता और त्वरित निर्णय ने एक बड़े अपराधी को धर दबोचने में अहम भूमिका निभाई।

संदिग्ध वाहन चेकिंग अभियान से शुरू हुई कार्यवाही

दिनांक XX अगस्त 2025 की देर रात गागलहेड़ी पुलिस द्वारा मय फोर्स ग्राम बलियाखेड़ी से ग्राम कोलकी की ओर जाने वाले रास्ते पर संदिग्ध व्यक्ति व वाहन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। क्षेत्र में बढ़ती आपराधिक गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए, पुलिस ने यह विशेष चेकिंग अभियान चलाने का निर्णय लिया था। इसी दौरान पुलिस टीम को ग्राम कोलकी की ओर से एक बिना नंबर प्लेट वाली मोटरसाइकिल आती दिखाई दी, जिस पर दो संदिग्ध व्यक्ति सवार थे।

पुलिस को देखकर भागने लगे बदमाश

जब पुलिस ने उन्हें टॉर्च की रोशनी दिखाकर रोकने का प्रयास किया, तो दोनों संदिग्ध ग्राम बलियाखेड़ी की ओर जाने वाले कच्चे रास्ते की तरफ मोटरसाइकिल मोड़कर भागने लगे। पुलिस टीम ने तुरंत स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए उनका पीछा किया। कुछ दूरी पर जाकर मोटरसाइकिल स्लिप होकर फिसल गई, और दोनों बदमाश ज़मीन पर गिर पड़े। यह देख पुलिस टीम तेजी से उनकी ओर बढ़ी।

बदमाशों ने की पुलिस पर फायरिंग

पुलिस को अपने नजदीक आता देख बदमाशों ने अचानक पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। ऐसे हालात में पुलिस ने बिना घबराए साहस और सतर्कता का परिचय दिया और आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की। इस दौरान पुलिस की गोली एक बदमाश के दाहिने पैर में लगी, जिससे वह वहीं घायल होकर गिर पड़ा, जबकि दूसरा बदमाश अंधेरे और कच्चे रास्तों का फायदा उठाकर फरार हो गया।

घायल बदमाश की पहचान और आपराधिक इतिहास

पुलिस द्वारा घायल बदमाश को मौके से गिरफ्तार कर इलाज हेतु अस्पताल भेजा गया। पूछताछ और दस्तावेज़ों की पुष्टि के बाद उसकी पहचान रमजान उर्फ रमजानी पुत्र अब्बास निवासी ग्राम हरोड़ा थाना गागलहेड़ी, सहारनपुर के रूप में हुई। रमजान इलाके का शातिर बदमाश है, जिस पर विभिन्न थानों में कई गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं। वह लंबे समय से फरार चल रहा था और पुलिस को उसकी तलाश थी।

थाना प्रभारी प्रवेश शर्मा की नेतृत्व क्षमता का असर

इस पूरी कार्यवाही में गागलहेड़ी के थाना प्रभारी प्रवेश शर्मा की त्वरित रणनीति और सूझबूझ साफ तौर पर दिखाई दी। उनके नेतृत्व में गागलहेड़ी पुलिस की कार्यशैली में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। लगातार हो रही ऐसी कार्रवाइयों के कारण अब बदमाशों में खौफ और जनता में पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ा है। प्रवेश शर्मा को क्षेत्र में “एनकाउंटर स्पेशलिस्ट” के नाम से जाना जाने लगा है, क्योंकि यह कोई पहला मामला नहीं है – उन्होंने इससे पहले भी कई बार बदमाशों को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचाया है।

पुलिस की तत्परता और जनता की सुरक्षा

गागलहेड़ी थाना क्षेत्र में पुलिस की सक्रियता ने अपराधियों की नींद हराम कर दी है। आए दिन हो रही चेकिंग, संदिग्ध व्यक्तियों पर कड़ी निगरानी, और ठोस कार्रवाई की वजह से अब लोग खुद को पहले से अधिक सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। थाना क्षेत्र में पिछले कुछ महीनों में लूट, चोरी, छिनैती जैसी घटनाओं में भारी कमी आई है।

बदमाशों के लिए खुली चेतावनी

इस मुठभेड़ के बाद पुलिस ने साफ संदेश दे दिया है कि जो भी व्यक्ति समाज में भय और आतंक फैलाने की कोशिश करेगा, उसके साथ सख्ती से निपटा जाएगा। पुलिस की ओर से यह भी बताया गया है कि फरार दूसरे बदमाश की तलाश जारी है, और बहुत जल्द उसे भी पकड़ लिया जाएगा।

सोशल मीडिया पर तारीफों के पुल

घटना की जानकारी जब सोशल मीडिया पर साझा की गई तो थाना गागलहेड़ी और विशेष रूप से थाना प्रभारी प्रवेश शर्मा की जमकर तारीफ हुई। लोगों ने उनकी कार्यशैली को सराहा और इस प्रकार की कार्रवाइयों को “जनहित में जरूरी” बताया। कई लोगों ने यह भी कहा कि अब क्षेत्र में पुलिस का “भोकाल” साफ नजर आने लगा है और अपराधियों में डर बैठ चुका है।


निष्कर्ष:
गागलहेड़ी थाना पुलिस की यह कार्यवाही न सिर्फ एक बड़ी सफलता मानी जा रही है, बल्कि यह आने वाले समय में अपराधियों के लिए एक चेतावनी भी है। जिस प्रकार से थाना प्रभारी प्रवेश शर्मा ने नेतृत्व करते हुए अपने कर्तव्य का पालन किया, वह निश्चित ही अन्य पुलिस अधिकारियों के लिए एक मिसाल है। इस तरह की कार्यवाहियों से साफ होता है कि गागलहेड़ी अब भयमुक्त होता जा रहा है और आम जनता को एक सुरक्षित वातावरण मिलने की उम्मीद है।

थाना कोतवाली में हैड कॉस्टेबल रोहित तेवतिया की विदाई पर भावपूर्ण समारोह आयोजित किया गया

थाना कोतवाली में हैड कॉस्टेबल रोहित तेवतिया की विदाई पर भावपूर्ण समारोह आयोजित किया गया

थाना कोतवाली में हैड कॉस्टेबल रोहित तेवतिया की विदाई पर भावपूर्ण समारोह आयोजित किया गया
थाना कोतवाली में हैड कॉस्टेबल रोहित तेवतिया की विदाई पर भावपूर्ण समारोह आयोजित किया गया

मुजफ्फरनगर, थाना कोतवाली में भावभीना विदाई समारोह, हेड कॉन्स्टेबल रोहित तेवतिया को दी गई सम्मानपूर्वक विदाई

मुजफ्फरनगर के थाना कोतवाली परिसर में उस समय एक भावनात्मक माहौल देखने को मिला जब हेड कॉन्स्टेबल रोहित तेवतिया के सहारनपुर स्थानांतरण के अवसर पर विदाई समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता थाना प्रभारी निरीक्षक उमेश रोरिया ने की, जिसमें वरिष्ठ उप निरीक्षक नरेंद्र सिंह सहित थाना स्टाफ के सभी अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे। समारोह में रोहित तेवतिया को उनके वर्षों के उत्कृष्ट सेवाभाव, कर्तव्यनिष्ठा और साहसिक कार्यों के लिए सम्मानित किया गया।

उल्लेखनीय है कि हेड कॉन्स्टेबल रोहित तेवतिया वर्ष 2015 से मुजफ्फरनगर जनपद में तैनात थे और इस दौरान उन्होंने अपराध नियंत्रण और अपराधियों के विरुद्ध चलाए गए अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपराध उन्मूलन के कई अभियानों में उनकी भागीदारी सराहनीय रही है। वे न केवल कुशल पुलिसकर्मी के रूप में पहचान बनाए हुए थे, बल्कि एक निडर योद्धा के रूप में भी जाने जाते हैं। उन्होंने कई बार मुठभेड़ के दौरान अपनी जान की परवाह किए बिना मोर्चा संभाला, जिसमें वे अपराधियों की गोली का शिकार होकर घायल भी हुए, लेकिन हर बार डटकर मुकाबला किया और अपने फर्ज को निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

विदाई समारोह के दौरान कोतवाली प्रभारी निरीक्षक उमेश रोरिया ने कहा कि रोहित तेवतिया जैसे समर्पित और साहसी पुलिसकर्मी का स्थान किसी भी विभाग के लिए गर्व की बात होती है। उन्होंने कहा कि तेवतिया ने अपराधियों के खिलाफ मोर्चा संभालते हुए कानून व्यवस्था को मजबूत करने में जो भूमिका निभाई, वह प्रेरणादायक है। उन्होंने आगे कहा कि सहारनपुर जनपद को भी एक कर्तव्यनिष्ठ, अनुशासित और वीर जवान की सेवाएं मिलने जा रही हैं, और यह वहां के लिए सौभाग्य की बात होगी।

थाना कोतवाली में हैड कॉस्टेबल रोहित तेवतिया की विदाई पर भावपूर्ण समारोह आयोजित किया गया
थाना कोतवाली में हैड कॉस्टेबल रोहित तेवतिया की विदाई पर भावपूर्ण समारोह आयोजित किया गया

वरिष्ठ उप निरीक्षक नरेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि रोहित तेवतिया ने हमेशा अपने कार्य के प्रति गंभीरता दिखाई और समय-समय पर पुलिस विभाग को गौरवांवित किया। वे एक बेहतरीन टीम मेंबर और भरोसेमंद सहयोगी थे, जिनकी कार्यशैली और निष्ठा सभी के लिए प्रेरणा स्रोत है। उन्होंने कहा कि भले ही स्थानांतरण एक प्रक्रिया है, लेकिन कुछ साथी अपनी छाप छोड़ जाते हैं, और रोहित तेवतिया उन्हीं में से एक हैं।

कार्यक्रम में शामिल पुलिस स्टाफ के अन्य सदस्यों ने भी अपने अनुभव साझा किए और बताया कि तेवतिया हमेशा सहयोगी, अनुशासित और समय के पाबंद रहे। उन्होंने न केवल अपराधियों को कानून का भय दिखाया बल्कि आम जनता में पुलिस के प्रति विश्वास भी कायम किया। वे आम नागरिकों के साथ संवाद स्थापित करने और उनकी समस्याओं के समाधान में भी सदैव अग्रसर रहे।

विदाई समारोह के अंत में रोहित तेवतिया ने सभी सहयोगियों और अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुजफ्फरनगर में बिताए गए ये दस वर्ष उनके जीवन के सबसे यादगार क्षणों में से हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें यहां एक परिवार जैसा माहौल मिला और जिस तरह से उन्हें सहयोग व सम्मान मिला, वह उनके लिए अविस्मरणीय रहेगा। उन्होंने अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि एक पुलिसकर्मी का जीवन चुनौतियों से भरा होता है, लेकिन जब आपके पास एक अच्छी टीम और सहयोगी अधिकारी हों, तो हर चुनौती आसान हो जाती है।

उन्होंने यह भी कहा कि वे सहारनपुर में भी इसी जज्बे और निष्ठा के साथ अपनी सेवाएं देंगे और वहां की जनता की सुरक्षा व कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।

समारोह के अंत में रोहित तेवतिया को थाना स्टाफ की ओर से स्मृति चिह्न और पुष्पगुच्छ भेंट कर भावभीनी विदाई दी गई। सभी की आंखों में उनके प्रति सम्मान और भावुकता साफ झलक रही थी। कार्यक्रम के दौरान थाना परिसर में एक आत्मीय और प्रेरणादायक वातावरण रहा, जिसने यह संदेश दिया कि जो अधिकारी ईमानदारी, साहस और समर्पण से कार्य करते हैं, उन्हें हमेशा याद रखा जाता है।

निष्कर्षतः, यह विदाई समारोह केवल एक स्थानांतरण की औपचारिकता नहीं थी, बल्कि एक जांबाज पुलिसकर्मी के प्रति पूरे विभाग की ओर से कृतज्ञता और सम्मान का प्रतीक थी। रोहित तेवतिया जैसे अधिकारी पुलिस विभाग की रीढ़ हैं, जो न केवल कानून व्यवस्था बनाए रखते हैं, बल्कि जनमानस में पुलिस की सकारात्मक छवि भी स्थापित करते हैं।