
बयाना में पूर्व सैनिकों की जनसुनवाई: समस्याओं का समाधान और सुविधाओं की मांगों के साथ नई पहल
राजस्थान के बयाना कस्बे में आज का दिन पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और शहीदों की विधवाओं के लिए विशेष महत्व का रहा। यहां पंचायत समिति परिसर में सैनिक संघ द्वारा एक जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य इन वीरों और उनके परिवारों की समस्याओं को सुनना और उनका समाधान करना था। इस जनसुनवाई में न केवल सैनिकों की व्यक्तिगत और पारिवारिक समस्याओं पर चर्चा हुई, बल्कि कई महत्वपूर्ण मांगों और सुझावों को भी संबंधित अधिकारियों के समक्ष रखा गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सैनिक संघ के अध्यक्ष बलराम कांवर ने की, जबकि इसमें जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल अनिल कुमार चौहान और सूबेदार ज्ञान सिंह भी विशेष रूप से मौजूद रहे। इनके अलावा कार्यक्रम में सैनिक संघ के उपाध्यक्ष प्रेम सिंह, कैप्टन मानसिंह कसाना, सूबेदार राजवीर सिंह, सूबेदार रमन सिंह और कई अन्य पूर्व सैनिकों एवं उनके परिजनों की भागीदारी रही। जनसुनवाई में आए लोगों ने बढ़-चढ़कर अपनी समस्याएं साझा कीं और अधिकारियों ने गंभीरता से उन पर विचार कर त्वरित समाधान का आश्वासन दिया।
सैनिक संघ के अध्यक्ष बलराम कांवर ने जानकारी दी कि इस जनसुनवाई में पेंशन, मेडिकल कार्ड, सेवा पहचान पत्र (आई-कार्ड) और अन्य व्यक्तिगत समस्याओं को लेकर कुल दर्जनों आवेदन आए, जिनमें से अधिकांश का मौके पर ही समाधान कर दिया गया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में राज्य सरकार ने पूर्व सैनिकों के लिए मुफ्त में मेडिकल कार्ड बनाने की सुविधा शुरू की है, जबकि पहले इसके लिए शुल्क लिया जाता था। यह सुविधा निश्चित रूप से पूर्व सैनिकों के लिए राहत का काम करेगी।
पूर्व सैनिकों ने इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण सामुदायिक मुद्दे भी उठाए, जिनमें सबसे प्रमुख था – अपने क्षेत्र में मोबाइल कैंटीन सुविधा की शुरुआत। पूर्व सैनिकों ने बताया कि उनके लिए निर्धारित सेना की कैंटीनें अक्सर दूर होती हैं, जिससे वृद्ध सैनिकों और उनके परिजनों को भारी कठिनाई होती है। इसलिए उन्होंने मांग की कि क्षेत्र में एक चलती-फिरती (मोबाइल) कैंटीन वैन की सुविधा दी जाए, जो नियत तिथियों पर गांव-गांव जाकर सामग्री उपलब्ध करा सके।
दूसरी बड़ी मांग शहीद स्मारक के निर्माण की थी। पूर्व सैनिकों और शहीदों के परिजनों ने कहा कि क्षेत्र के कई वीर जवानों ने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है, लेकिन अब तक उनके सम्मान में कोई स्मारक नहीं बनाया गया है। ऐसे में उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि एक उचित भूमि का आवंटन कर शहीद स्मारक का निर्माण कराया जाए, जिससे आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा मिल सके और शहीदों का गौरव सदा अमर रहे।
तीसरा मुद्दा हथियारों के रजिस्ट्रेशन से जुड़ा रहा। कई पूर्व सैनिकों ने बताया कि उन्हें अपने वैध हथियारों के रजिस्ट्रेशन और नवीनीकरण में प्रशासनिक जटिलताओं का सामना करना पड़ता है। प्रक्रियाएं लंबी और तकनीकी रूप से जटिल हैं, जिससे बुजुर्ग सैनिकों को परेशानी होती है। उन्होंने मांग की कि सैनिकों के लिए अलग से सरल और तेज प्रक्रिया निर्धारित की जाए, ताकि वे अपने अधिकारों का आसानी से उपयोग कर सकें।

इसके अलावा एक और जरूरी मांग सैनिक विश्राम गृह (सैनिक रेस्ट हाउस) की स्थापना को लेकर की गई। पूर्व सैनिकों ने कहा कि जब वे अपने गांवों से बाहर कहीं आते हैं, तो उन्हें ठहरने के लिए उपयुक्त व्यवस्था नहीं मिलती। उन्होंने मांग की कि एक सैनिक विश्राम गृह का निर्माण किया जाए, जिसमें वे और उनके परिजन रियायती दरों पर ठहर सकें। यह विश्राम गृह न केवल ठहरने की सुविधा देगा, बल्कि पूर्व सैनिकों के सामाजिक मेल-जोल और बैठकों के लिए भी उपयोगी साबित होगा।
जनसुनवाई के दौरान जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल अनिल कुमार चौहान ने सभी मांगों को गंभीरता से सुनते हुए भरोसा दिलाया कि वे इन्हें संबंधित उच्चाधिकारियों और प्रशासन तक पहुंचाएंगे। उन्होंने पूर्व सैनिकों को आश्वस्त किया कि सरकार पूर्व सैनिकों और शहीदों के परिवारों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और लगातार नई योजनाएं शुरू कर रही है। उन्होंने मोबाइल कैंटीन, स्मारक निर्माण और रेस्ट हाउस जैसी मांगों को वाजिब और समयानुकूल बताया तथा कहा कि इन पर शीघ्र कार्यवाही की जाएगी।
कर्नल चौहान ने यह भी बताया कि पूर्व सैनिकों के बच्चों को शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य सुविधाओं में प्राथमिकता दी जा रही है और राज्य सरकार इसके लिए कई योजनाएं चला रही है। उन्होंने उपस्थित सभी पूर्व सैनिकों से आग्रह किया कि वे नई योजनाओं और अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और जरूरतमंद सैनिक साथियों को भी जानकारी साझा करें। उन्होंने यह भी बताया कि अब पूर्व सैनिकों की शिकायतें ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भी दर्ज की जा सकती हैं, जिससे प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी और त्वरित हो गई है।
जनसुनवाई का समापन करते हुए सैनिक संघ के अध्यक्ष बलराम कांवर ने सभी अधिकारियों और पूर्व सैनिकों का आभार व्यक्त किया और कहा कि इस तरह के आयोजन समय-समय पर होते रहने चाहिए ताकि सरकार और सैनिक समुदाय के बीच सीधा संवाद स्थापित हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि सैनिक केवल युद्ध के मैदान में ही नहीं, बल्कि समाज के हर क्षेत्र में देश सेवा करते हैं और उनके अनुभवों का लाभ समाज को मिलना चाहिए।
निष्कर्ष रूप में देखा जाए तो यह जनसुनवाई न केवल पूर्व सैनिकों की समस्याओं के समाधान का एक मंच बनी, बल्कि इससे कई ऐसी मूलभूत जरूरतें सामने आईं, जिन पर ध्यान देना जरूरी है। चाहे वह मोबाइल कैंटीन की सुविधा हो, शहीद स्मारक का निर्माण, हथियारों की आसान रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया हो या फिर विश्राम गृह की मांग – ये सभी पहल सामाजिक रूप से आवश्यक हैं और सैनिकों के प्रति सम्मान प्रकट करने का एक सशक्त माध्यम भी हैं। बयाना में हुआ यह आयोजन एक सकारात्मक और प्रेरक उदाहरण है, जिसे अन्य जिलों में भी दोहराने की आवश्यकता है, ताकि देश की रक्षा में योगदान देने वाले इन वीरों को समाज में सम्मान और सुविधा दोनों मिल सके।



















