
भारत विकास परिषद की लालसोट शाखा द्वारा आयोजित होने जा रहा
यह रक्तदान एवं स्वास्थ्य जांच शिविर न केवल सेवा का कार्य है, बल्कि एक ऐसा जन-जागरण अभियान है जो समाज के हर व्यक्ति को जीवन बचाने की प्रेरणा देता है। 2 सितंबर को पुलिस थाने के सामने स्थित संस्कृत पाठशाला में प्रस्तावित यह शिविर, परिषद के उन प्रयासों का प्रतीक है जो वह समाज की भलाई और मानव सेवा के लिए निरंतर करती आ रही है। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य ‘रक्तदान महादान’ के संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाना है, ताकि आपातकालीन परिस्थितियों में, जैसे दुर्घटना, ऑपरेशन या गंभीर बीमारियों के समय रक्त की कमी से किसी भी व्यक्ति की जान न जाए। परिषद इस बात को भलीभांति समझती है कि जीवन बचाने के लिए रक्तदान से सरल और प्रभावशाली कोई और कार्य नहीं हो सकता।
परिषद के अध्यक्ष श्री अमित बड़ाया ने इस आयोजन के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि रक्तदान एक महापुण्य कार्य है और इसकी जितनी आवश्यकता आज के समय में है, शायद पहले कभी नहीं रही। उनका यह भी मानना है कि युवाओं, सामाजिक संगठनों और प्रत्येक जागरूक नागरिक को इस कार्य में अपनी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने अपील की कि अधिक से अधिक लोग आगे आएं और रक्तदान करें, जिससे किसी जरूरतमंद को समय पर जीवनरक्षक रक्त मिल सके। अध्यक्ष का यह भाव समाज में सेवा भावना को प्रोत्साहित करता है और जनमानस को सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करता है।
शाखा के सेवा गतिविधि संयोजक लोकेंद्र जैन ने बताया कि इस रक्तदान शिविर के साथ-साथ एक सामान्य स्वास्थ्य जांच शिविर भी आयोजित किया जाएगा। यह पहल दर्शाती है कि परिषद केवल रक्तदान तक ही सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि नागरिकों के समग्र स्वास्थ्य के लिए भी चिंतित है। इस शिविर में ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और हीमोग्लोबिन जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य जांचें की जाएंगी, जो व्यक्ति के संपूर्ण स्वास्थ्य का एक आधारभूत मूल्यांकन प्रस्तुत करेंगी। इससे न केवल रक्तदाताओं को, बल्कि उपस्थित नागरिकों को भी अपने स्वास्थ्य की स्थिति की जानकारी मिल सकेगी। यह कार्यक्रम निवारक स्वास्थ्य सेवा की दिशा में एक सराहनीय पहल है।
बैठक में शिविर की तैयारियों को लेकर गहन विचार-विमर्श किया गया। इसमें पंजीकरण की प्रक्रिया, शिविर स्थल की व्यवस्थाएं, मेडिकल टीम की उपलब्धता और रक्त संग्रहण की प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दिया गया। यह योजना दर्शाती है कि परिषद ने इस आयोजन को अत्यंत गंभीरता से लिया है और उसे यह भलीभांति समझ है कि एक सफल आयोजन के लिए सुसंगठित व्यवस्थाएं और समर्पित टीम आवश्यक होती है। बैठक में शामिल सभी सदस्यों ने समन्वयपूर्वक काम करते हुए यह संकल्प लिया कि शिविर के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और हर कार्य समयबद्ध तरीके से सम्पन्न हो।
इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रांतीय प्रकल्प प्रभारी विष्णु अग्रवाल सहित नीरज शर्मा, धर्मेंद्र अग्रवाल, प्रमोद अग्रवाल, अवधेश गुप्ता, प्रहलाद रड़बा, आशीष सेठी, हंसराज गोयल, धर्मचंद अग्रवाल, दीपक अग्रवाल, किशन खंडेलवाल, राजेश सोनी और अन्य गणमान्य सदस्य उपस्थित थे। इन सभी का एक साथ आना इस बात का प्रतीक है कि समाज सेवा के कार्यों में जब सामूहिक प्रयास होते हैं, तो उसके परिणाम भी प्रभावशाली और दूरगामी होते हैं। इन सभी सदस्यों ने अपने विचार साझा किए और इस पुनीत कार्य को सफल बनाने के लिए एकजुटता और समर्पण के साथ काम करने का संकल्प दोहराया।

भारत विकास परिषद का यह आयोजन वास्तव में उन सामाजिक मूल्यों को जीवंत करता है, जिनमें सेवा, सहयोग और सद्भाव प्रमुख हैं। यह शिविर केवल रक्त एकत्रित करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने और सेवा की भावना को प्रोत्साहित करने का एक सशक्त मंच है। इस तरह के आयोजन समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं और लोगों को यह अहसास कराते हैं कि एक छोटा सा कार्य, जैसे रक्तदान, किसी के जीवन में कितनी बड़ी राहत बन सकता है।
भारत जैसे विशाल देश में जहां हर दिन हजारों लोग रक्त की कमी के कारण जीवन से संघर्ष कर रहे होते हैं, ऐसे शिविर उनके लिए आशा की एक किरण हैं। लालसोट शाखा द्वारा आयोजित यह शिविर केवल एक दिन का आयोजन नहीं है, बल्कि यह एक सोच है – एक विचारधारा है – जो समाज को अपनी ज़िम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करती है। इस प्रकार की पहल हमें एक बेहतर, स्वस्थ और जागरूक समाज की ओर अग्रसर करती है।
इस शिविर की सफलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि समाज के कितने लोग इसमें अपनी भागीदारी निभाते हैं। परिषद ने जो अपील की है, वह हर नागरिक के दिल से जुड़ने योग्य है। यह केवल एक सामाजिक संगठन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है कि वह जब-जब ऐसे आयोजनों की जानकारी पाए, तो उसमें अवश्य भाग ले। रक्तदान करने से न केवल किसी की जान बचाई जा सकती है, बल्कि इससे स्वयं रक्तदाता को भी स्वास्थ्य लाभ होता है। यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध है कि नियमित रूप से रक्तदान करने से शरीर में नया रक्त बनने की प्रक्रिया सक्रिय रहती है और रक्तसंचार बेहतर होता है।
भारत विकास परिषद की यह पहल निश्चित ही एक सराहनीय कदम है और इसे जितना अधिक प्रचार और समर्थन मिलेगा, उतना ही अधिक इसका सामाजिक प्रभाव पड़ेगा। ऐसे आयोजनों से युवाओं में सेवा का भाव उत्पन्न होता है, वृद्धों को सम्मान मिलता है और समाज में एकजुटता की भावना मजबूत होती है। रक्तदान जैसे कार्यों के माध्यम से सामाजिक समरसता और सहयोग की भावना को सुदृढ़ किया जा सकता है। परिषद ने यह संदेश दिया है कि अगर हम सब मिलकर कार्य करें, तो कोई भी सेवा असंभव नहीं है।
आने वाले समय में अगर ऐसे शिविर लगातार आयोजित होते रहें, तो निश्चित ही समाज में रक्त की कमी जैसी समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। साथ ही, स्वास्थ्य जांच जैसे छोटे प्रयास लोगों को उनके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करते हैं, जिससे वे समय रहते उपचार ले सकें और स्वस्थ जीवन जी सकें। यह शिविर केवल रक्तदान और जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक नई सामाजिक चेतना का प्रारंभ है।
अंत में, यह कहा जा सकता है कि 2 सितंबर को होने वाला यह शिविर न केवल एक आयोजन है, बल्कि समाज सेवा की एक गूंज है, जो हर व्यक्ति को अपनी भागीदारी निभाने का आह्वान करता है। भारत विकास परिषद, लालसोट शाखा का यह प्रयास आने वाले समय में एक मिसाल बनेगा और अन्य संगठनों को भी प्रेरित करेगा कि वे भी ऐसे जनोपयोगी कार्यों में आगे आएं। जब सेवा और समर्पण का संगम होता है, तभी एक स्वस्थ और मजबूत समाज का निर्माण संभव होता है। यही इस शिविर का मूल उद्देश्य है – सेवा, सहयोग और समर्पण के साथ जन-जन को जोड़ना और जीवन को बचाना।



















