भारत विकास परिषद 2 सितंबर को लगाएगी विशाल रक्तदान शिविर

भारत विकास परिषद 2 सितंबर को लगाएगी विशाल रक्तदान शिविर

भारत विकास परिषद 2 सितंबर को लगाएगी विशाल रक्तदान शिविर
भारत विकास परिषद 2 सितंबर को लगाएगी विशाल रक्तदान शिविर

भारत विकास परिषद की लालसोट शाखा द्वारा आयोजित होने जा रहा

यह रक्तदान एवं स्वास्थ्य जांच शिविर न केवल सेवा का कार्य है, बल्कि एक ऐसा जन-जागरण अभियान है जो समाज के हर व्यक्ति को जीवन बचाने की प्रेरणा देता है। 2 सितंबर को पुलिस थाने के सामने स्थित संस्कृत पाठशाला में प्रस्तावित यह शिविर, परिषद के उन प्रयासों का प्रतीक है जो वह समाज की भलाई और मानव सेवा के लिए निरंतर करती आ रही है। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य ‘रक्तदान महादान’ के संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाना है, ताकि आपातकालीन परिस्थितियों में, जैसे दुर्घटना, ऑपरेशन या गंभीर बीमारियों के समय रक्त की कमी से किसी भी व्यक्ति की जान न जाए। परिषद इस बात को भलीभांति समझती है कि जीवन बचाने के लिए रक्तदान से सरल और प्रभावशाली कोई और कार्य नहीं हो सकता।

परिषद के अध्यक्ष श्री अमित बड़ाया ने इस आयोजन के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि रक्तदान एक महापुण्य कार्य है और इसकी जितनी आवश्यकता आज के समय में है, शायद पहले कभी नहीं रही। उनका यह भी मानना है कि युवाओं, सामाजिक संगठनों और प्रत्येक जागरूक नागरिक को इस कार्य में अपनी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने अपील की कि अधिक से अधिक लोग आगे आएं और रक्तदान करें, जिससे किसी जरूरतमंद को समय पर जीवनरक्षक रक्त मिल सके। अध्यक्ष का यह भाव समाज में सेवा भावना को प्रोत्साहित करता है और जनमानस को सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करता है।

शाखा के सेवा गतिविधि संयोजक लोकेंद्र जैन ने बताया कि इस रक्तदान शिविर के साथ-साथ एक सामान्य स्वास्थ्य जांच शिविर भी आयोजित किया जाएगा। यह पहल दर्शाती है कि परिषद केवल रक्तदान तक ही सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि नागरिकों के समग्र स्वास्थ्य के लिए भी चिंतित है। इस शिविर में ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और हीमोग्लोबिन जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य जांचें की जाएंगी, जो व्यक्ति के संपूर्ण स्वास्थ्य का एक आधारभूत मूल्यांकन प्रस्तुत करेंगी। इससे न केवल रक्तदाताओं को, बल्कि उपस्थित नागरिकों को भी अपने स्वास्थ्य की स्थिति की जानकारी मिल सकेगी। यह कार्यक्रम निवारक स्वास्थ्य सेवा की दिशा में एक सराहनीय पहल है।

बैठक में शिविर की तैयारियों को लेकर गहन विचार-विमर्श किया गया। इसमें पंजीकरण की प्रक्रिया, शिविर स्थल की व्यवस्थाएं, मेडिकल टीम की उपलब्धता और रक्त संग्रहण की प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दिया गया। यह योजना दर्शाती है कि परिषद ने इस आयोजन को अत्यंत गंभीरता से लिया है और उसे यह भलीभांति समझ है कि एक सफल आयोजन के लिए सुसंगठित व्यवस्थाएं और समर्पित टीम आवश्यक होती है। बैठक में शामिल सभी सदस्यों ने समन्वयपूर्वक काम करते हुए यह संकल्प लिया कि शिविर के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और हर कार्य समयबद्ध तरीके से सम्पन्न हो।

इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रांतीय प्रकल्प प्रभारी विष्णु अग्रवाल सहित नीरज शर्मा, धर्मेंद्र अग्रवाल, प्रमोद अग्रवाल, अवधेश गुप्ता, प्रहलाद रड़बा, आशीष सेठी, हंसराज गोयल, धर्मचंद अग्रवाल, दीपक अग्रवाल, किशन खंडेलवाल, राजेश सोनी और अन्य गणमान्य सदस्य उपस्थित थे। इन सभी का एक साथ आना इस बात का प्रतीक है कि समाज सेवा के कार्यों में जब सामूहिक प्रयास होते हैं, तो उसके परिणाम भी प्रभावशाली और दूरगामी होते हैं। इन सभी सदस्यों ने अपने विचार साझा किए और इस पुनीत कार्य को सफल बनाने के लिए एकजुटता और समर्पण के साथ काम करने का संकल्प दोहराया।

भारत विकास परिषद 2 सितंबर को लगाएगी विशाल रक्तदान शिविर
भारत विकास परिषद 2 सितंबर को लगाएगी विशाल रक्तदान शिविर

भारत विकास परिषद का यह आयोजन वास्तव में उन सामाजिक मूल्यों को जीवंत करता है, जिनमें सेवा, सहयोग और सद्भाव प्रमुख हैं। यह शिविर केवल रक्त एकत्रित करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने और सेवा की भावना को प्रोत्साहित करने का एक सशक्त मंच है। इस तरह के आयोजन समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं और लोगों को यह अहसास कराते हैं कि एक छोटा सा कार्य, जैसे रक्तदान, किसी के जीवन में कितनी बड़ी राहत बन सकता है।

भारत जैसे विशाल देश में जहां हर दिन हजारों लोग रक्त की कमी के कारण जीवन से संघर्ष कर रहे होते हैं, ऐसे शिविर उनके लिए आशा की एक किरण हैं। लालसोट शाखा द्वारा आयोजित यह शिविर केवल एक दिन का आयोजन नहीं है, बल्कि यह एक सोच है – एक विचारधारा है – जो समाज को अपनी ज़िम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करती है। इस प्रकार की पहल हमें एक बेहतर, स्वस्थ और जागरूक समाज की ओर अग्रसर करती है।

इस शिविर की सफलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि समाज के कितने लोग इसमें अपनी भागीदारी निभाते हैं। परिषद ने जो अपील की है, वह हर नागरिक के दिल से जुड़ने योग्य है। यह केवल एक सामाजिक संगठन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है कि वह जब-जब ऐसे आयोजनों की जानकारी पाए, तो उसमें अवश्य भाग ले। रक्तदान करने से न केवल किसी की जान बचाई जा सकती है, बल्कि इससे स्वयं रक्तदाता को भी स्वास्थ्य लाभ होता है। यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध है कि नियमित रूप से रक्तदान करने से शरीर में नया रक्त बनने की प्रक्रिया सक्रिय रहती है और रक्तसंचार बेहतर होता है।

भारत विकास परिषद की यह पहल निश्चित ही एक सराहनीय कदम है और इसे जितना अधिक प्रचार और समर्थन मिलेगा, उतना ही अधिक इसका सामाजिक प्रभाव पड़ेगा। ऐसे आयोजनों से युवाओं में सेवा का भाव उत्पन्न होता है, वृद्धों को सम्मान मिलता है और समाज में एकजुटता की भावना मजबूत होती है। रक्तदान जैसे कार्यों के माध्यम से सामाजिक समरसता और सहयोग की भावना को सुदृढ़ किया जा सकता है। परिषद ने यह संदेश दिया है कि अगर हम सब मिलकर कार्य करें, तो कोई भी सेवा असंभव नहीं है।

आने वाले समय में अगर ऐसे शिविर लगातार आयोजित होते रहें, तो निश्चित ही समाज में रक्त की कमी जैसी समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। साथ ही, स्वास्थ्य जांच जैसे छोटे प्रयास लोगों को उनके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करते हैं, जिससे वे समय रहते उपचार ले सकें और स्वस्थ जीवन जी सकें। यह शिविर केवल रक्तदान और जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक नई सामाजिक चेतना का प्रारंभ है।

अंत में, यह कहा जा सकता है कि 2 सितंबर को होने वाला यह शिविर न केवल एक आयोजन है, बल्कि समाज सेवा की एक गूंज है, जो हर व्यक्ति को अपनी भागीदारी निभाने का आह्वान करता है। भारत विकास परिषद, लालसोट शाखा का यह प्रयास आने वाले समय में एक मिसाल बनेगा और अन्य संगठनों को भी प्रेरित करेगा कि वे भी ऐसे जनोपयोगी कार्यों में आगे आएं। जब सेवा और समर्पण का संगम होता है, तभी एक स्वस्थ और मजबूत समाज का निर्माण संभव होता है। यही इस शिविर का मूल उद्देश्य है – सेवा, सहयोग और समर्पण के साथ जन-जन को जोड़ना और जीवन को बचाना।

जम्मू : बाढ़ में 3500 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया

जम्मू : बाढ़ में 3500 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया

जम्मू ।

 जम्मू जिले में लगातार भारी बारिश के कारण बाढ़ और जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई, जिसके बाद जिला प्रशासन, जम्मू-कश्मीर पुलिस, भारतीय सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय स्वयंसेवकों ने मिलकर त्वरित बचाव अभियान चलाया। इस अभियान के तहत 3500 से अधिक लोगों को प्रभावित इलाकों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
प्रशासन का मुख्य ध्यान संवेदनशील क्षेत्रों से लोगों को निकालने, उन्हें अस्थायी आश्रय, भोजन, स्वच्छ पानी और चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करने के साथ-साथ बुनियादी ढांचे को बहाल करने पर है।

आरएस पुरा में 85 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। परगवाल के हमीरपुर कोना और गुजराल गांव से 347 निवासियों को अखनूर और जम्मू में स्थानांतरित किया गया। उत्तर जम्मू की नई बस्ती और लोअर मुठी से 160 लोगों को मुठी के कैलाश रिसॉर्ट्स में शरण दी गई, जहां लंगर की व्यवस्था की गई है। नगरोटा में 100 लोगों को कोंडोली मंदिर ले जाया गया, और मरम्मत दल राजमार्गों से मलबा हटाकर आपातकालीन सेवाओं के लिए मार्ग खोल रहे हैं।

जम्मू : बाढ़ में 3500 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया
जम्मू : बाढ़ में 3500 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया

सुचेतगढ़ के बदयाल कजियां और टिब्बा बैंस में मकान ढहने के बाद दो परिवारों के 15 सदस्यों को बचाया गया। जम्मू के इंद्र नगर और बल्लोल में 150 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया, कुछ को बृज नगर में स्थानांतरित किया गया। सित्तरियाला में 45 लोगों को निकालकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जौरियां में राहत शिविर स्थापित किया गया। सतवारी में 300 निवासियों को एचएसएस सतवारी में स्थानांतरित किया गया, जहां सामुदायिक रसोई के माध्यम से भोजन और पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।

खौर और परगवाल में इंद्री, मान चक, बकोरे, हमीरपुर कोना और गजराल से 500 से अधिक लोगों को बचाया गया। खौर में 48 लोगों को सरकारी हाई स्कूल गर्खल और 50 लोगों को सामुदायिक भवन गर्खल में रखा गया है। जिला प्रशासन ने यूथ हॉस्टल जम्मू सहित कई राहत शिविर स्थापित किए हैं। मुथी और सतवारी में सामुदायिक रसोई संचालित हो रही हैं, और सभी राहत स्थलों पर चिकित्सा दल तैनात हैं।

उपायुक्त डॉ. राकेश मिन्हास ने प्रभावित परिवारों की सुरक्षा और राहत सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने प्रशासन, पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना और स्वयंसेवकों के समन्वित प्रयासों की सराहना की, जिनके कारण कोई जनहानि नहीं हुई। स्थिति पर नजर रखी जा रही है और राहत कार्यों की प्रगति के साथ और जानकारी साझा की जाएगी।

1988 बैच IPS अनीश दयाल सिंह डिप्टी NSA बने, 30 साल IB में सेवा दी

1988 बैच IPS अनीश दयाल सिंह डिप्टी NSA बने, 30 साल IB में सेवा दी

केंद्र सरकार ने 24 अगस्त को रिटायर्ड IPS ऑफिसर अनीश दयाल सिंह को भारत का डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (Deputy NSA) नियुक्त किया है। वे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोवाल को रिपोर्ट करेंगे। अनीश 31 दिसंबर, 2024 को सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स यानी CRPF के डायरेक्टर जनरल के पद से रिटायर हुए थे। इससे पहले उन्होंने इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), NSG, ITBP, SSB और CRPF जैसे महत्वपूर्ण संगठनों का नेतृत्व किया है। अनीश की शुरुआती पढ़ाई-लिखाई इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में हुई। कॉलेज भी उन्होंने यहीं रहते हुए पूरा किया। उन्होंने बैचलर ऑफ आर्ट्स यानी BA में अपना ग्रेजुएशन किया है।

इसके बाद अनीश ने UPSC सिविल सर्विस की परीक्षा दी और उसमें क्वालिफाई हुए। वे 1988 बैच के IPS ऑफिसर बने और उन्हें मणिपुर कैडर मिला। IPS बनने के बाद उनकी ट्रेनिंग तेलंगाना (तब आंध्रप्रदेश) के हैदराबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल नेशनल पुलिस एकेडमी यानी (SVPNPA) में हुई। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद, अनीश 21 अगस्त, 1989 को IPS में औपचारिक रूप से शामिल हुए। उन्हें इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में काम करने का मौका मिला। उन्होंने लगभग 30 सालों तक IB में काम किया। इस दौरान जॉइंट डायरेक्टर और स्पेशल डायरेक्टर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए अपनी सेवाएं दी। वो काउंटर-टेररिज्म और इंटरनल सिक्योरिटी से जुड़े डिपार्टमेंट में शामिल थे। अनीश दयाल सिंह को साल 2004 और 2012 में विशिष्ट सेवा के लिए इंडियन पुलिस मेडल फॉर मेरिटोरियस सर्विस से सम्मानित किया गया था।

1988 बैच IPS अनीश दयाल सिंह डिप्टी NSA बने, 30 साल IB में सेवा दी
1988 बैच IPS अनीश दयाल सिंह डिप्टी NSA बने, 30 साल IB में सेवा दी

ITBP के DG रह चुके हैं

  • 2022 में, वे 4 सीनियर बैचमेट्स (अनीश दयाल सिंह, मनोज यादव, मनोज लाल, अमिताभ रंजन) के साथ IB चीफ पद के लिए सुपर्सीडेड हुए। इसके बाद तपन डेका को IB चीफ बनाया गया। 3 अक्टूबर, 2022 को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के डायरेक्टर जनरल बने। इसके साथ ही उन्हें सशस्त्र सीमा बल (SSB) के डायरेक्टर जनरल का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया।

CRPF के DG रहते हुए रिटायर्ड हुए

  • 29 नवंबर, 2023 के सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स यानी CRPF का एडिशनल चार्ज मिला। फिर 28 दिसंबर, 2023 को अनीश को CRPF का डायरेक्टर जनरल बनाया गया। 31 दिसंबर, 2024 तक उन्होंने DG के रूप में काम किया। फिर इसी पद से रिटायर्ड हुए।

CRPF के 130 बटालियनों का पुनर्गठन किया

  • CRPF में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 30 से अधिक फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेसेस (FOBs) स्थापित किए। 4 नई बटालियनों का गठन किया। साथ ही, कुल 130 बटालियनों का पुनर्गठन किया। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनावों और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में पहले विधानसभा चुनावों के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने में CRPF की भूमिका की भी देखरेख की।
सहारनपुर एसएसपी आशीष तिवारी के निर्देशन मेसंघन चेकिंग अभियान लगातार जारी

सहारनपुर एसएसपी आशीष तिवारी के निर्देशन मेसंघन चेकिंग अभियान लगातार जारी

सहारनपुर। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में जनपदीय पुलिस द्वारा बैंक तथा एटीएम के आसपास खड़े संदिग्ध व्यक्ति तथा वाहनों की लगातार संघन चैकिंग की जा रही है। पुलिस बैंकों के आसपास खडे संदिग्ध व्यक्तियों की चेकिंग कर रही है ताकि अपराधों व खासकर बाइक चोरी को रोका जा सके और बैंक व ए टीएम की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके इस अभियान के तहत बैंकों में सुरक्षा उपकरणों जैसे सीसीटीवी कैमरों और अलार्म सिस्टम की भी जांच की जाती है और संदिग्ध लोगों से पूछताछ की जाती है। तथा सुरक्षा-व्यवस्था सम्बन्धी उपकरण को चैक कर बैंक सुरक्षा कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं।

सहारनपुर जिले में कानून-व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाए रखने के लिए एसएसपी आशीष तिवारी ने 108 पुलिसकर्मियों का तबादला कर दिया है। ये सभी पुलिसकर्मी पिछले तीन वर्षों से अधिक समय से एक ही थाने में तैनात थे। फेरबदल की सूची में मुख्य आरक्षी, आरक्षी और महिला आरक्षी शामिल हैं। एसएसपी कार्यालय के अनुसार, यह स्थानांतरण पुलिस बल के बेहतर प्रबंधन, पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करने के लिए किया गया है।

सहारनपुर एसएसपी आशीष तिवारी के निर्देशन मेसंघन चेकिंग अभियान लगातार जारी
सहारनपुर एसएसपी आशीष तिवारी के निर्देशन मेसंघन चेकिंग अभियान लगातार जारी

अधिकारियों का मानना है कि एक ही स्थान पर अधिक समय तक रहने से कार्यक्षमता प्रभावित होती है। साथ ही स्थानीय प्रभाव भी बढ़ता है। यह कई बार विभागीय निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है।एसएसपी ने इस फेरबदल को नियमित प्रक्रिया बताया है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्षमता बढ़ाने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की दिशा में उठाया गया कदम है।

पुलिस विभाग के इस कदम से विभागीय कर्मचारियों में हलचल देखी जा रही है। वहीं आम जनता ने इस निर्णय को सकारात्मक बताया है। लोगों का कहना है कि नए पुलिसकर्मियों की तैनाती से कार्यप्रणाली में बदलाव आएगा। जिले में पहले भी समय-समय पर इस प्रकार के फेरबदल होते रहे हैं। लेकिन एक साथ 100 से अधिक पुलिसकर्मियों का तबादला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दौसा में 13 सितंबर को तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन

दौसा में 13 सितंबर को तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन

दौसा

आगामी 13 सितंबर 2025 को दूसरी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) की अगुवाई में दौसा में तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाना निश्चित है, जिसका उद्देश्य राजीनामा योग्य मामलों का आपसी समझौते पर आधारित निपटारा सुनिश्चित करना है। इसकी तैयारियों की समीक्षा और दिशा-निर्देश हेतु हाल ही में एक विस्तृत बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता जिला एवं सत्र न्यायाधीश और DLSA अध्यक्ष हुकम सिंह राजपुरोहित ने की।

मोहापौर संतोष अग्रवाल (DLSA सचिव) ने बताया कि बैठक में सभी न्यायिक अधिकारियों को आदेशित किया गया कि वे राजीनामा योग्य मामलों की पहचान करें और पक्षकारों के बीच प्री-काउंसलिंग एवं समझौता वार्ता आयोजित करवा कर निष्पादन सुनिश्चित करें। विशेष रूप से धारा 138 NI एक्ट (चेक बाउंस) एवं धन वसूली मामलों को प्रमुखता दी गई। बैठक में न्यायिक अधिकारियों—प्रेम राजेश, रेखा राठौड़, बृजेश कुमार, रविकांत सोनी, उमेश वीर, सीमा करोल, रविकांत मीना, अंकिता दायमा, कविता मीना, रचना बालोत, पुलकित शर्मा आदि—की उपस्थिति रही।


लोक अदालत: न्याय की तेज और सस्ती रास्ता

लोक अदालत एक ऐसा वैकल्पिक विवाद निपटान मंच है जहाँ अदालतों में लंबित या मुकदमेबाजी शुरू होने से पहले (pre-litigation) के मामलों को आपसी समझौते से हल किया जाता है। यह व्यवस्था Legal Services Authorities Act, 1987 के तहत राष्ट्रीय स्तर पर लागू की गई है। इससे प्राप्त लाभों में शामिल हैं:

  • न्याय प्रक्रिया में व्यय और समय की बचत, क्योंकि सुनवाई सामान्य न्यायालयों की अपेक्षा तेज और सरल होती है।
  • कोर्ट फीस वापस प्राप्त हो सकती है यदि मामला लोक अदालत में समझौते पर निपट जाता है।
  • फैसले अंतिम और बाध्यकारी होते हैं, जिन्हें सामान्य अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती ।

इन सुविधाओं के कारण लोक अदालत आम जनता में न्याय की पहुंच को सरल, किफायती और प्रभावी बनाती है।


दौसा में लोक अदालत का प्रसंग

दौसा में इस लोक अदालत आयोजन से पहले की गई तैयारियों का अभिप्रेत उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि अधिकांश राजीनामा योग्य मुकदमे, विशेषकर चेक बाउंस व मनी रिकवरी, समय रहते समाधानित हों। प्रारंभिक पहचान (pre-identification) और प्री-काउंसलिंग इस प्रक्रिया की रीढ़ है, ताकि मुद्दों के पक्षकार समझौते के लिए प्रेरित हो सकें। यह प्रक्रिया लोक अदालत में सुनवाई से पहले भी अपनाई जा रही है, जैसा कि अन्य जिलों में होता आया है।

उदाहरण स्वरूप, 2023 में दौसा में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में 13,467 प्रकरणों को समझौता वार्ता के लिए चिन्हित किया गया था, जिनमें लंबित और प्रिलिटिगेशन दोनों प्रकार के विवाद शामिल थे। इसी तरह, अन्य राज्यों जैसे गुजरात, पंजाब (पटियाला), बिहार (पूर्णिया) में भी 13 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत के आयोजन की तैयारियाँ चल रही हैं, जिनमें चेक बाउंस, मनी रिकवरी, MACT, श्रम विवाद और अन्य सिविल एवं क्रिमिनल कंपाउंडेबल मामलों को प्राथमिकता दी जा रही है

दौसा में 13 सितंबर को तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन
दौसा में 13 सितंबर को तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन

बैठक की भूमिका और रणनीतियाँ

दौसा की बैठक में निदर्शित मुख्य बिंदु थे:

  • राजीनामा योग्य मामलों की पहचान — प्राथमिकता के आधार पर ज़्यादा से ज़्यादा प्रकरणों को लोक अदालत में लाना।
  • प्री-काउंसलिंग — पक्षकारों के बीच वार्ता करवा कर आपसी समझौते की संभावनाएँ बढ़ाना।
  • स्थानीय न्यायिक अधिकारियों और DLSA का समन्वय — बैठक में उपस्थित प्रेम राजेश, रेखा राठौड़ सहित अन्य न्यायिक अधिकारी इस कार्य में अहम भूमिका निभाएंगे।
  • धारा 138 NI एक्ट और धन वसूली मामलों को विशेष महत्व — क्योंकि ये अक्सर राजीनामा योग्य और समझौते की संभावना रखने वाले प्रकरण होते हैं।

इन रणनीतियों से न केवल मामले सुचारू रूप से निपटेंगे, बल्कि न्याय का लाभ आम जनता तक पहुंचने में और तेजी आएगी।


उम्मीद और सकारात्मक प्रभाव

इस लोक अदालत आयोजन से संभवतः निम्नलिखित सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं:

  • अदालतों पर फैलता बोझ कम होगा, क्योंकि कई मामले समझौते से निपट जाएंगे।
  • न्याय उपलब्धता में वृद्धि — लोग समय और खर्च की बचत के साथ न्याय पा सकेंगे।
  • स्थानीय न्याय तंत्र में विश्वास बढ़ेगा, क्योंकि संवेदनशील और निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
  • निकटता और किफ़ायती व्यवस्था : लोक अदालत ज़्यादा करीब, तेज और कम शुल्क वाली व्यवस्था होती है।

निष्कर्ष

दौसा में तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन एक महत्वपूर्ण पहल है, जो न्याय तंत्र को सरल, न्यायसंगत और अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा राजीनामा योग्य मामलों की पहचान, प्री-काउंसलिंग, और लोक अदालत के benches की स्थापना की तैयारियों से यह स्पष्ट होता है कि प्रशासन न्याय के मार्ग को संक्षिप्त और प्रभावी बनाना चाहता है।

अगर आप चाहते हैं कि मैं इसे समाचार शैली, आधिकारिक नोट, या किसी विशेष भाषा या स्वर में फिर से तैयार करूं—कृपया बताएं, मैं तुरंत आपके अनुरोध के अनुसार संशोधन कर दूँ।

आज दिल्ली पहले जैसी नहीं रही सीएम रेखा गुप्ता ने ऐसा क्यों कहा

आज दिल्ली पहले जैसी नहीं रही सीएम रेखा गुप्ता ने ऐसा क्यों कहा

आज दिल्ली पहले जैसी नहीं रही सीएम रेखा गुप्ता ने ऐसा क्यों कहा
आज दिल्ली पहले जैसी नहीं रही सीएम रेखा गुप्ता ने ऐसा क्यों कहा

नई दिल्ली ।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को लोदी एस्टेट स्थित सरदार पटेल विद्यालय में इलेक्ट्रिक स्कूल बस सेवा की शुरुआत की। इस दौरान उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना और सांसद बांसुरी स्वराज भी मौजूद रहीं।
सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि सरदार पटेल विद्यालय ने इलेक्ट्रिक बस बेड़े में शामिल होकर प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में एक प्रेरणादायी उदाहरण पेश किया है। इस कदम से बच्चों की यात्रा और भी सुरक्षित व आधुनिक होगी। साथ ही दिल्ली को स्वच्छ वायु और हरित भविष्य की राह मिलेगी। उन्होंने विद्यालय की इस उपलब्धि पर प्रिंसिपल, मैनेजमेंट और टीचर्स की सराहना की।


रेखा गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आज पूरा देश हरित भारत, स्वच्छ भारत के संकल्प को आगे बढ़ा रहा है। हमारी सरकार शीघ्र ही सभी स्कूलों में हरित प्रतियोगिताएं शुरू करेगी, ताकि हर बच्चा प्रकृति, स्वच्छता और सतत विकास को अपने जीवन का हिस्सा बना सके। साथ ही स्कूलों को इलेक्ट्रिक बस सेवा अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि आज दिल्ली पहले जैसी नहीं रही, जहां सिर्फ गंदगी नजर आती थी। अब उपराज्यपाल और सरकार के प्रयासों से गंदगी की जगह पार्क और हरित क्षेत्र विकसित हो चुके हैं। इसी कड़ी में पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ हवा की दिशा में एक नई पहल शुरू हुई है। दिल्ली के सरदार पटेल स्कूल में बच्चों की आवाजाही के लिए इलेक्ट्रिक बसों की फ्लीट को जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस कदम को दिल्ली की हवा को स्वच्छ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।

आज दिल्ली पहले जैसी नहीं रही सीएम रेखा गुप्ता ने ऐसा क्यों कहा
आज दिल्ली पहले जैसी नहीं रही सीएम रेखा गुप्ता ने ऐसा क्यों कहा

रेखा गुप्ता ने कहा कि अगर दिल्ली के सभी स्कूलों में बच्चों के परिवहन के लिए इलेक्ट्रिक बसों का इस्तेमाल किया जाए तो शहर के प्रदूषण स्तर को कई गुना कम किया जा सकता है। उन्होंने सरदार पटेल स्कूल के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की पहल न केवल बच्चों को प्रकृति से जोड़ती है, बल्कि उन्हें बचपन से ही पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी सिखाती है। उन्होंने कि स्कूल ही बच्चों को अच्छे संस्कार और सही दिशा देते हैं। बच्चे अगर शुरू से ही यह समझेंगे कि सफाई, पर्यावरण संरक्षण और देश को स्वच्छ बनाए रखना ही असली देशभक्ति है तो वे कभी गलत दिशा में नहीं जाएंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार अब यह सुनिश्चित करेगी कि हर स्कूल में पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी प्रतियोगिताएं और अभियान चलाए जाएं। इससे बच्चों को साफ-सुथरे माहौल में जीने की प्रेरणा मिलेगी और वे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ पर्यावरण छोड़ पाएंगे। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि सरदार पटेल स्कूल की यह पहल मिसाल है और सरकार का प्रयास रहेगा कि आने वाले समय में हर स्कूल इलेक्ट्रिक बसों की फ्लीट से जुड़ सके। उन्होंने इसे दिल्ली के भविष्य और बच्चों की सेहत के लिए एक बेहतर कदम बताया।

जलझूलनी एकादशी पर डोल यात्रा के कारण मालपुरा में उपचुनाव की तारीख बदलने की मांग

जलझूलनी एकादशी पर डोल यात्रा के कारण मालपुरा में उपचुनाव की तारीख बदलने की मांग

जलझूलनी एकादशी पर डोल यात्रा के कारण मालपुरा में उपचुनाव की तारीख बदलने की मांग
जलझूलनी एकादशी पर डोल यात्रा के कारण मालपुरा में उपचुनाव की तारीख बदलने की मांग

परिचय

मालपुरा। सेवायत संघ द्वारा जिला कलेक्टर को दिए गए ज्ञापन के माध्यम से मालपुरा नगर पालिका की आगामी वार्ड पार्षदों के उपचुनाव की मतदान तिथि को बदलने की मांग की गई है। संघ के वरिष्ठ सदस्यों ने इस मांग के पीछे महत्वपूर्ण धार्मिक और सामाजिक कारण प्रस्तुत किए हैं।

मांग की पृष्ठभूमि

3 सितंबर 2025 को जलझूलनी एकादशी का महत्त्वपूर्ण त्योहार मनाया जाएगा, जिसका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यंत गहरा है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण की डोल यात्रा निकाली जाती है और पूरे नगर में उत्सव के स्वरूप में इसी कार्यक्रम को मनाया जाता है। इस कारण जिले में अवकाश घोषित किया जाता रहता है और अधिकांश लोग इस पावन अवसर का उत्सवभार और आध्यात्मिकता में सहभागी होते हैं।

सेवायत संघ के प्रतिनिधियों की भूमिका

ज्ञापन सौंपने के समय उपस्थित थे:

  • श्री चंद्रमोहन उपाध्याय
  • श्री ज्ञानेंद्र रावल
  • श्री अमरचंद मेंदवासिया
  • श्री आर. एल. दीपक
  • श्री चंद्रप्रकाश शर्मा
  • श्री दिनेश पांडे और अन्य गणमान्य सदस्य

इन प्रतिनिधियों ने एसडीएम अमित चौधरी को ज्ञापन सौंपते हुए जोर देकर कहा कि मतदान तिथि बदलाव से मतदान प्रतिशत में वृद्धि होगी, चुनावी प्रक्रिया में अधिक सहभागिता सुनिश्चित होगी और धार्मिक अनुष्ठानों व संवेदनशीलता के बीच तालमेल बनेगा।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया

एसडीएम अमित चौधरी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि यह मुद्दा शीघ्र शीर्ष अधिकारियों तक पहुँचाया जाएगा और उचित निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन धर्म और लोकतंत्र, दोनों के हितों को ध्यान में रखते हुए निष्पक्षता और संवेदनशीलता से निर्णय प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा।

धार्मिक-लोकराज्य संतुलन का महत्व

यह मांग केवल चुनाव तिथि परिवर्तन का अनुरोध नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक शासन और धर्मनिष्ठता के संतुलन का प्रतीक है। वोटिंग की सहूलियत से जुड़ा यह सवाल जनता की भागीदारी और व्यवस्था की संवेदनशीलता का भी विषय है।

संभावित प्रभाव और लाभ

  • उच्च मतदान सहभागिता: धार्मिक उत्सवों में आने वाले लोग मतदान के अभाव में अपनी नागरिक जिम्मेदारी को निभा न सकें, यह स्थिति टाली जा सकती है।
  • धार्मिक और लोकनीति का सामंजस्य: प्रशासनिक दृष्टिकोण से यह कदम सामाजिक समरसता को बढ़ावा दे सकता है।
  • सार्वजनिक विश्वास में वृद्धि: संवेदनशील निर्णयों के माध्यम से प्रशासन की परीक्षा पूरा होना और लोकशाही पर भरोसा बनना।

निष्कर्ष

इस प्रकार, मालपुरा सेवायत संघ की यह मांग लोकतंत्र और धर्मिक तटस्थता को संतुलित करने का महत्वपूर्ण प्रयास है। साँझा संवाद और संवेदनशील निर्णय लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करता है। जिला प्रशासन से अपेक्षा है कि वे इस मांग का उचित, समयबद्ध और सकारात्मक निर्णय निर्बाध रूप से ले।

पंजाब : शांतिभंग से पहले अमृतसर में हथियार तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़, एक गिरफ्तार

पंजाब : शांतिभंग से पहले अमृतसर में हथियार तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़, एक गिरफ्तार

पंजाब : शांतिभंग से पहले अमृतसर में हथियार तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़, एक गिरफ्तार
पंजाब : शांतिभंग से पहले अमृतसर में हथियार तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़, एक गिरफ्तार

अमृतसर ।

पंजाब पुलिस ने सीमा पार से हो रही हथियारों की तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस ने अवैध हथियारों के साथ एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान गुरु की वडाली, छेहरटा निवासी अमित सिंह के रूप में हुई। पुलिस ने उसके कब्जे से पांच ग्लॉक पिस्टल, चार मैगजीन और एक मोटरसाइकिल बरामद की है। यह जानकारी पंजाब पुलिस ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ अकाउंट पर शेयर की है।
पंजाब पुलिस के सोशल मीडिया पोस्ट के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी अमित सिंह और उसका साथी गुरप्रीत सिंह उर्फ गिन्नी पाकिस्तान के तस्करों के संपर्क में थे। ये तस्कर पंजाब में शांति भंग करने के लिए हथियारों की खेप भेज रहे थे। पुलिस की इस कार्रवाई से हथियार तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है और बड़ी वारदात टल गई है। पंजाब पुलिस के डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि यह गिरफ्तारी खुफिया जानकारी के आधार पर की गई है। उन्होंने कहा कि जांच अभी जारी है और जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी और हथियारों की बरामदगी की उम्मीद है। पुलिस ने इस मामले में आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है और तस्करी के पूरे नेटवर्क का पता लगाने के लिए गहन जांच की जा रही है।

पंजाब : शांतिभंग से पहले अमृतसर में हथियार तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़, एक गिरफ्तार
पंजाब : शांतिभंग से पहले अमृतसर में हथियार तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़, एक गिरफ्तार


पंजाब पुलिस आतंकवाद, अवैध हथियारों की तस्करी और गैंगस्टर्स के नेटवर्क को खत्म करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह कार्रवाई राज्य में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत पुलिस को दें, ताकि ऐसे अपराधों को और प्रभावी ढंग से रोका जा सके।
इससे पहले, सोमवार को पंजाब पुलिस ने आतंक और संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी दी थी। पंजाब पुलिस के डीजीपी ने बताया था कि बटाला पुलिस ने एक आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने बटाला के बलपुरा गांव से 4 हैंड ग्रेनेड, 2 किलो आरडीएक्स से बना आईईडी और कम्युनिकेशन उपकरण बरामद किए हैं। इसके अलावा, एक अन्य बड़ी सफलता में बरनाला पुलिस ने देविंदर बंबीहा गैंग के चार सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया था।

उदयपुर में बड़ा हादसा : अनियंत्रित कार नाले में गिरी, 5 में से 2 ने तोड़कर शीशा बचाई जान, 2 शव मिले, एक लापता

उदयपुर में बड़ा हादसा : अनियंत्रित कार नाले में गिरी, 5 में से 2 ने तोड़कर शीशा बचाई जान, 2 शव मिले, एक लापता

उदयपुर में बड़ा हादसा : अनियंत्रित कार नाले में गिरी, 5 में से 2 ने तोड़कर शीशा बचाई जान, 2 शव मिले, एक लापता
उदयपुर में बड़ा हादसा : अनियंत्रित कार नाले में गिरी, 5 में से 2 ने तोड़कर शीशा बचाई जान, 2 शव मिले, एक लापता

उदयपुर: खेरवाड़ा में दर्दनाक सड़क हादसा, नाले में गिरी कार, तीन की मौत, दो बचे

राजस्थान के उदयपुर जिले से एक बेहद दुखद और दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। सोमवार देर रात खेरवाड़ा थाना क्षेत्र में एक कार हादसे का शिकार हो गई, जिसमें 5 लोग सवार थे। कार खेरवाड़ा से बायड़ी की ओर जा रही थी, जब अचानक वह अनियंत्रित होकर लकोड़ा गांव के पास एक उफनते नाले में जा गिरी। इस हादसे में तीन लोगों की जान चली गई, जबकि दो लोगों ने कार का शीशा तोड़कर किसी तरह अपनी जान बचा ली।

कैसे हुआ हादसा

यह हादसा सोमवार रात करीब 10:30 बजे हुआ। खेरवाड़ा से बायड़ी की ओर जा रही एक कार तेज बारिश के बीच अचानक अनियंत्रित हो गई और लकोड़ा गांव के पास एक गहरे नाले में जा समाई। नाले में उस वक्त पानी का बहाव बहुत तेज था। कार सीधे पानी के अंदर चली गई और उसमें सवार लोग फंस गए।

दो लोगों ने दिखाई हिम्मत, शीशा तोड़कर बचाई जान

कार में कुल 5 लोग सवार थे। जैसे ही कार पानी में गिरी, दो लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए तुरंत कार्रवाई की। उन्होंने कार का शीशा तोड़ा और किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहे। दोनों की किस्मत अच्छी थी कि वे तेज बहाव से खुद को बचा पाए और बाहर निकलकर गांववालों को सूचना दी। लेकिन बाकी तीन लोग कार के अंदर ही फंसे रह गए और तेज बहाव में डूब गए।

रातभर चला रेस्क्यू अभियान

हादसे की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस और नागरिक सुरक्षा विभाग की टीम मौके पर पहुंची। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उदयपुर से एसडीआरएफ (State Disaster Response Force) की टीम को भी बुलवाया गया। एसडीआरएफ की टीम रात करीब 12:30 बजे घटनास्थल पर पहुंची।

रेस्क्यू टीम ने लगभग एक घंटे की मशक्कत के बाद कार को पानी से बाहर निकाला। कार के भीतर दो युवकों के शव मिले, जिन्हें बाहर निकालकर तुरंत पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा गया। तीसरे युवक का शव हादसे के समय नहीं मिल पाया, जिसकी तलाश अगले दिन सुबह तक जारी रही।

बारिश बनी हादसे की बड़ी वजह

इस दर्दनाक हादसे की प्रमुख वजह लगातार हो रही भारी बारिश बताई जा रही है। उदयपुर और आसपास के इलाकों में पिछले तीन दिनों से लगातार मूसलधार बारिश हो रही है। नतीजतन, पहाड़ी इलाकों से बहकर आने वाले नदी-नाले उफान पर हैं। नालों में तेज बहाव के कारण सड़कें कई जगहों पर क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं और दृश्यता भी बहुत कम हो जाती है, जिससे हादसे की आशंका बढ़ जाती है।

खेरवाड़ा और बायड़ी के बीच की सड़क भी इसी बारिश से प्रभावित है। लकोड़ा गांव के पास जहां हादसा हुआ, वहां सड़क के किनारे कोई मजबूत सुरक्षा दीवार या संकेतक नहीं थे, जिससे चालक को खतरे का अंदाज़ा नहीं लग पाया और कार सीधे पानी में गिर गई।

प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे

जैसे ही हादसे की सूचना फैली, स्थानीय प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे। ऋषभदेव डिप्टी राजीव राहर और खेरवाड़ा एएसआई दिग्विजय सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर मौजूद रहे और पूरे रेस्क्यू अभियान की निगरानी करते रहे। साथ ही, स्थानीय लोगों को भी सतर्क किया गया और नाले के पास आवाजाही पर अस्थायी रोक लगा दी गई।

गांव में पसरा मातम का माहौल

लकोड़ा गांव और आसपास के इलाकों में इस हादसे के बाद शोक की लहर दौड़ गई है। जिन युवकों की मौत हुई, वे आसपास के ही गांवों के निवासी बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद उनके परिजन घटनास्थल पर पहुंचे तो माहौल बेहद गमगीन हो गया। हर किसी की आंखें नम थीं और किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि महज कुछ ही पलों में तीन जिंदगियां खत्म हो गईं।

स्थानीय लोगों ने बताया कि लकोड़ा गांव के पास यह नाला बरसात में बेहद खतरनाक हो जाता है। पहले भी इस जगह पर छोटे-मोटे हादसे हो चुके हैं, लेकिन इस बार पानी का बहाव इतना तेज था कि पूरी कार बह गई और लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला।

बारिश के मौसम में सड़क सुरक्षा पर उठे सवाल

इस हादसे ने एक बार फिर से बरसात के मौसम में सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कई ऐसे नाले और पुल हैं जो बरसात के मौसम में बेहद खतरनाक हो जाते हैं, लेकिन न तो इन जगहों पर कोई चेतावनी बोर्ड लगाए जाते हैं और न ही अस्थायी बैरियर। प्रशासन द्वारा समय रहते ऐसे संवेदनशील स्थानों की पहचान कर वहां सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

स्थानीय लोगों की प्रशासन से मांग

लकोड़ा और आसपास के ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि:

  • हादसे वाली जगह पर मजबूत पुल या सुरंग बनाई जाए।
  • बरसात के दिनों में ऐसे नालों के पास चेतावनी संकेत और पुलिस गश्त की व्यवस्था हो।
  • स्कूल, कॉलेज और दफ्तर जाने वाले लोगों को समय-समय पर अलर्ट जारी किए जाएं।
  • SDRF टीमों की संख्या और संसाधन बढ़ाए जाएं ताकि आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई हो सके।

निष्कर्ष

यह हादसा न सिर्फ तीन जिंदगियों को लील गया, बल्कि कई परिवारों को हमेशा के लिए ग़म दे गया। यह एक चेतावनी है कि हमें प्राकृतिक आपदाओं को हल्के में नहीं लेना चाहिए, खासकर बारिश के मौसम में जब नदी-नाले जानलेवा बन सकते हैं। प्रशासन, स्थानीय निकायों और नागरिकों को मिलकर काम करना होगा ताकि इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।

आप भी अगर बारिश में सफर कर रहे हैं, तो सतर्क रहें, अनजान रास्तों पर वाहन धीमा चलाएं, और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से बचें। आपकी सतर्कता ही आपकी और आपके प्रियजनों की जान बचा सकती है।

दिल्ली पुलिस ने चार घोषित अपराधियों को किया गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने चार घोषित अपराधियों को किया गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने चार घोषित अपराधियों को किया गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस ने चार घोषित अपराधियों को किया गिरफ्तार

नई दिल्ली ।

दिल्ली पुलिस की कापसहेड़ा और आर.के. पुरम थाना टीमों ने दक्षिण पश्चिम जिले में चार घोषित अपराधियों (पीओएस) को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों को पकड़ने में खुफिया सूचनाओं का अहम रोल रहा।

गिरफ्तार किए गए अपराधियों की पहचान अंकित पाठक (28 वर्ष), अनिकेत कुमार (30 वर्ष), मूलचंद (45 वर्ष) और नरेंद्र कुमार (52 वर्ष) के रूप में हुई है। घोषित अपराधियों की गिरफ्तारी न्यायालयों के क्रमश, 25.02.2025, 25.05.2023, 03.05.2025 और 30.06.2023 के आदेशों के बाद व्यापक मैनुअल और तकनीकी निगरानी के साथ-साथ रणनीतिक छापेमारी के जरिए हुई।

पुलिस ने इन अपराधियों को पकड़ने के लिए विशेष टीमें गठित की थीं, जिन्होंने गुप्त मुखबिरों और तकनीकी जानकारी के आधार पर कार्रवाई की। पहला मामला थाना कापसहेड़ा में दर्ज एफआईआर संख्या 54/2018 से संबंधित है, जिसमें हेड कांस्टेबल पवन और दलजीत की टीम ने अंकित पाठक को गिरफ्तार किया। उसके खिलाफ धारा 209 बीएनएस के तहत एक अलग मामला भी दर्ज किया गया।

दिल्ली पुलिस ने चार घोषित अपराधियों को किया गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस ने चार घोषित अपराधियों को किया गिरफ्तार

दूसरा मामला एफआईआर संख्या 517/2020 से संबंधित है, जिसमें एचसी मोहिंदर सिंह, संजीव और योगेश की टीम ने अनिकेत कुमार को पकड़ा। तीसरा मामला एफआईआर संख्या 369/2021 से है, जिसमें एचसी श्रीपाल और कांस्टेबल अजय की टीम ने मूलचंद को गिरफ्तार किया।

चौथा मामला थाना आर.के. पुरम में दर्ज एफआईआर संख्या 317/2025 से संबंधित है। अगस्त 2025 के दूसरे सप्ताह में मिली सूचना के आधार पर, इंस्पेक्टर रविंदर कुमार त्यागी के नेतृत्व में हेड कांस्टेबल इंद्रपाल और संपत राम की टीम ने नरेंद्र कुमार को नोएडा के सेक्टर-63 से गिरफ्तार किया। उसके खिलाफ धारा 174ए आईपीसी के तहत एक अलग मामला दर्ज किया गया।

पुलिस उपायुक्त (दक्षिण पश्चिम जिला) अमित गोयल ने बताया कि इन गिरफ्तारियों के लिए टीमें गुप्त सूचनाओं और तकनीकी निगरानी पर काम कर रही थीं। अन्य फरार घोषित अपराधियों को पकड़ने के लिए भी जांच और छापेमारी जारी है।