हल्द्वानी: खाई में पलटी स्कूल बस, 12 से ज्यादा बच्चे घायल, चालक पर लापरवाही का आरोप
हल्द्वानी ।
उत्तराखंड के हल्द्वानी के लालकुआं कोतवाली क्षेत्र के बरेली रोड पर जयपुर बीसा गांव में गुरुवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हो गया। निजी स्कूल की एक बस, जिसमें बच्चे सवार थे, दूसरी बस को साइड देने के चक्कर में अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खाई में पलट गई। हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख पुकार मच गई। इसके बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बस का शीशा तोड़कर सभी बच्चों को बाहर निकाला, जिसमें 12 से ज्यादा बच्चे घायल हो गए। घायलों को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। बस चालक और परिचालक को भी गंभीर चोटें आई हैं। हादसा मोटाहल्दू क्षेत्र के पदमपुर देवलिया गांव के पास हुआ, जहां बस रामपुर रोड से बच्चों को स्कूल ले जा रही थी। घटनास्थल स्कूल के नजदीक होने की वजह से स्थानीय लोगों ने निजी वाहनों से घायलों को हल्द्वानी के निजी अस्पताल पहुंचाया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दो स्कूल बसें चौराहे के पास साइड ले रही थीं। इस दौरान एक बस ज्यादा किनारे चली गई और खाई में पलट गई। हादसे की सूचना मिलते ही क्षेत्र के अभिभावक चिंता में पड़ गए और स्कूल पहुंचकर अपने बच्चों की कुशलक्षेम पूछने लगे।
हल्द्वानी: खाई में पलटी स्कूल बस, 12 से ज्यादा बच्चे घायल, चालक पर लापरवाही का आरोप
ग्राम प्रधान रमेश चंद्र जोशी ने हादसे के लिए बस चालकों की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने बताया कि बस में करीब 40 बच्चे सवार थे, जिनमें से 12 से ज्यादा घायल हुए। प्रधान ने कहा, “इस क्षेत्र के बस चालक अक्सर नशे की हालत में गाड़ी चलाते हैं। पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।” उन्होंने बताया कि हादसे वाली जगह पर नाला है, लेकिन शुक्र है कि नाले में पानी नहीं था, वरना कई बच्चों की जान जा सकती थी। वहीं, ग्राम प्रधान ने जिला प्रशासन पर भी निशाना साधा। उनका कहना है कि इतने बड़े हादसे के बाद भी प्रशासन मौके पर नहीं पहुंचा। स्थानीय लोगों ने ही घायलों को बचाकर अस्पताल भेजा। इस घटना से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है और लोगों ने स्कूलों में सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करने की मांग उठाई है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।
मध्य प्रदेश: वैष्णो देवी लैंडस्लाइड में मंदसौर के दो लोगों की मौत
भोपाल ।
जम्मू-कश्मीर में वैष्णो देवी मंदिर मार्ग पर हुए भूस्खलन में मध्य प्रदेश के मंदसौर के दो लोगों की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, मंदसौर जिले के भीलखेड़ी गांव के कुछ लोग वैष्णो देवी दर्शन के लिए गए थे। जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम ने भीलखेड़ी गांव का दौरा किया और परिवार के सदस्यों से मुलाकात की। इस दुखद भूस्खलन में मारे गए लोगों की पहचान फकीरचंद गुर्जर (50) और रतन बाई (65) के रूप में हुई है। इस घटना में इलाके के दो लोग घायल हुए हैं जिनकी पहचान सोहन बाई (47) और देवीलाल (45) के रूप में हुई है। इलाके से अभी भी लापता दो लोगों की पहचान परमानंद (29) और अर्जुन (25) के रूप में हुई है। वरिष्ठ भाजपा नेता जगदीश देवड़ा ने अपनी संवेदना व्यक्त की। देवड़ा ने बताया कि मंदसौर के भीलखेड़ी गांव के गुर्जर समुदाय के लोग 23 अगस्त को वैष्णो देवी दर्शन के लिए गए थे और उनमें से कुछ की मृत्यु हो गई है।
मध्य प्रदेश: वैष्णो देवी लैंडस्लाइड में मंदसौर के दो लोगों की मौत
देवड़ा ने बुधवार रात एक्स पर लिखा, “वैष्णोदेवी मंदिर मार्ग पर हुए भूस्खलन हादसे में हमारी मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र के ग्राम भीलखेड़ी के दर्शनार्थियों के हताहत होने की जानकारी प्राप्त हुई है। ग्राम भीलखेड़ी से गुर्जर समाज के तीर्थयात्री माता वैष्णोदेवी के दर्शनों हेतु ट्रेन से 23 अगस्त को रवाना हुए थे। इनमें यात्रियों की दु:खद मृत्यु का समाचार प्राप्त हुआ है। दो-तीन यात्री घायल हैं और एक दो अब भी लापता हैं। हादसा दु:खद है और परिवारजन पर वज्रपात की तरह गिरा है। मैं दिवंगतों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ एवं लापता यात्रियों के सकुशल मिलने की प्रार्थना माता वैष्णोदेवी से करता हूं। घटना को लेकर मेरी मंदसौर जिला कलेक्टर एवं जम्मू कश्मीर प्रशासन से चर्चा हुई है। हम हरसंभव मदद के लिए तत्पर हैं।” रिपोर्टों के अनुसार, मलबे से 35 शव बरामद किए गए हैं, जबकि करीब 23 तीर्थयात्री घायल हुए हैं। भारी बारिश के कारण कुछ तीर्थयात्रियों को भूस्खलन क्षेत्र में एक शेड के नीचे शरण लेनी पड़ी। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने घायलों का हाल-चाल लेने के लिए अस्पताल का दौरा किया। उपराज्यपाल ने एक्स पर लिखा, “मैंने भूस्खलन में घायल हुए श्रद्धालुओं से मुलाकात की। मैंने डॉक्टरों से सर्वोत्तम संभव उपचार सुनिश्चित करने का आग्रह किया।”
उदयपुर के प्राइवेट स्कूल में जिम ट्रेनर पर नाबालिग से दुष्कर्म का आरोप, आरोपी फरार
उदयपुर में मासूम बच्चियों और महिलाओं के प्रति हो रही दुष्कर्म की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं. ताजा मामला फतहपुरा का बताया जा रहा है, जहां पर एक जिम ट्रेनर ने एक नामी स्कूल में 13 साल की बच्ची के साथ हैवानियत की हदें पार कर दीं. इतना ही नहीं, जब उसका मन भर गया तो वह वहां से फरार हो गया.
मासूम छात्रा ने घर पहुंच कर अपने घरवालों को सारी आपबीती बताई. परिजन तुरंत बच्ची को लेकर के थाने पहुंचे और यहां पर आरोपी जिम ट्रेनर प्रदीप सिंह झाला के खिलाफ तहरीर पेश की. फिलहाल पुलिस ने तहरीर के आधार पर आरोपी जिम ट्रेनर प्रदीप सिंह झाला के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है. दुष्कर्म के बाद आरोपी प्रदीप सिंह झाला फरार है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है.
उदयपुर के प्राइवेट स्कूल में जिम ट्रेनर पर नाबालिग से दुष्कर्म का आरोप, आरोपी फरार
जानकारी के मुताबिक, फतहपुरा के एक नामी स्कूल में प्रदीप सिंह झाला जिम ट्रेनर है. प्रदीप यहां पर बच्चों की ट्रेनिंग देता है. बीते 25 अगस्त को स्कूल में छुट्टी घोषित की गई थी. जानकारी नहीं होने की वजह से छात्रा छुट्टी वाले दिन भी स्कूल पहुंच गई. उसे अकेला देखकर प्रदीप सिंह झाला की नीयत उस पर डोल गई और उसने उसे दबोच लिया. हैवान ने स्कूल परिसर में ही उसके साथ गलत काम किया.
डरी-सहमी छात्रा किसी तरह से जब घर पहुंची तो उसने अपने परिजनों को इसके बारे में बताया. गुस्साे परिजन तुरंत अंबामाता थाने पहुंचे और यहां पर स्कूल के जिम ट्रेनर प्रदीप सिंह झाला के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई.
थाना अधिकारी मुकेश सोनी ने जानकारी देते हुए बताया कि मामले में जिम ट्रेनर प्रदीप सिंह झाला की तलाश की जा रही है. बच्ची को छुट्टी की जानकारी नहीं थी, जिसके चलते वह स्कूल पहुंच गई थी. छुट्टी वाले दिन बच्ची को अकेला देखकर प्रदीप सिंह ने उसके साथ दुष्कर्म किया. आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है.
जम्मू-कश्मीर में माँ वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर हुए हादसे पर राज्यपाल की शोक संवेदना
जयपुर।
जम्मू-कश्मीर में माँ वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर भारी वर्षा के कारण हुए दुखद हादसे ने पूरे देश को शोक में डुबो दिया है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना को लेकर राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने हादसे में मारे गए श्रद्धालुओं की मृत्यु पर संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि यह एक अत्यंत पीड़ादायक क्षण है, जब धार्मिक आस्था और विश्वास के साथ यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं को प्रकृति के क्रोध का शिकार होना पड़ा। राज्यपाल ने ईश्वर से प्रार्थना की कि वे दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें और उनके शोक संतप्त परिवारों को यह अपार दुख सहन करने की शक्ति दें।
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने विशेष रूप से यह उल्लेख किया कि इस प्रकार की आपदाएँ न केवल भौतिक रूप से हानि पहुँचाती हैं, बल्कि लोगों की मानसिक और भावनात्मक स्थिति पर भी गहरा प्रभाव डालती हैं। उन्होंने हादसे में घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए राज्य और केंद्र सरकार से यह आग्रह किया कि सभी प्रभावित श्रद्धालुओं को हर संभव सहायता प्रदान की जाए।
यह हादसा माँ वैष्णो देवी यात्रा के उस पवित्र मार्ग पर हुआ है, जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु आस्था और श्रद्धा के साथ अपनी मन्नतें लेकर पहुंचते हैं। जब इस प्रकार का भीषण हादसा एक धार्मिक स्थल के मार्ग पर होता है, तो यह केवल एक भौगोलिक आपदा नहीं रह जाती, बल्कि यह संपूर्ण समाज की भावनाओं को झकझोर देती है। राज्यपाल ने कहा कि यह समय केवल संवेदना प्रकट करने का नहीं है, बल्कि इससे सीख लेकर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने का भी है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन, आपदा प्रबंधन टीमों और सुरक्षाबलों की तत्परता की सराहना की, जो रात-दिन राहत कार्यों में लगे हुए हैं।
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने आगे यह भी कहा कि इस प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए पूर्व तैयारियां और सतर्कता आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि धार्मिक स्थलों और यात्रा मार्गों पर पर्यावरणीय अध्ययन और आपदा प्रबंधन की सुदृढ़ व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं को टाला जा सके। उन्होंने यह भी आह्वान किया कि सभी नागरिक, विशेष रूप से वे जो तीर्थयात्रा पर जाते हैं, मौसम की चेतावनियों और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करें ताकि अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें।
इस हादसे ने जिन परिवारों से उनके प्रियजन छीन लिए हैं, उनके लिए यह समय अत्यंत कठिन है। राज्यपाल ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते, वे उन सभी परिवारों के साथ इस शोक की घड़ी में खड़े हैं और उन्हें यह भरोसा दिलाते हैं कि राज्य और राष्ट्र का हर संवेदनशील नागरिक उनके दुख में सहभागी है। उन्होंने कहा कि ईश्वर से यही प्रार्थना है कि दिवंगत आत्माओं को मोक्ष प्राप्त हो और उनका परिवार इस दुःख को सहने की शक्ति अर्जित कर सके।
जम्मू-कश्मीर में माँ वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर हुए हादसे पर राज्यपाल की शोक संवेदना
राज्यपाल ने यह भी आह्वान किया कि समाज के प्रत्येक नागरिक को इस त्रासदी से कुछ न कुछ सीख अवश्य लेनी चाहिए। चाहे वह पर्यावरणीय चेतना हो, प्रशासनिक व्यवस्था हो, या तीर्थयात्रियों की सुरक्षा—हर पक्ष को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। श्रद्धालुओं की सुरक्षा केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह सामूहिक उत्तरदायित्व है जिसमें स्थानीय लोग, सेवाभावी संस्थाएं और स्वयं यात्री भी शामिल हैं।
घायलों की बात करते हुए राज्यपाल ने कहा कि सरकार को चाहिए कि सभी घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए और उनके इलाज का पूरा खर्च सरकार वहन करे। उन्होंने यह भी कहा कि हादसे में जिन लोगों की जान गई है, उनके परिवारों को मुआवजा प्रदान किया जाए ताकि वे इस कठिन समय में आर्थिक रूप से थोड़ी राहत पा सकें। साथ ही जो लोग अब भी लापता हैं, उनकी तलाश के लिए बचाव कार्य में किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए।
राज्यपाल ने कहा कि धर्म और आस्था के इन केन्द्रों की पवित्रता और सुरक्षा बनाए रखना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। माँ वैष्णो देवी न केवल जम्मू-कश्मीर, बल्कि पूरे भारत की धार्मिक आस्था का प्रतीक हैं और वहाँ पर होने वाली किसी भी घटना का प्रभाव देश के करोड़ों श्रद्धालुओं पर पड़ता है। इसलिए यह ज़रूरी है कि वहाँ की अवस्थाओं को निरंतर बेहतर बनाया जाए।
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने हादसे की गंभीरता को समझते हुए यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में तीर्थयात्रा मार्गों पर मौसम आधारित चेतावनी प्रणाली को मजबूत किया जाए। साथ ही आपदा प्रबंधन टीमों को हाईटेक संसाधनों से लैस किया जाए ताकि किसी भी आपात स्थिति में वे शीघ्र प्रतिक्रिया दे सकें। उन्होंने यह भी कहा कि धर्मस्थलों के पास रहने वाले स्थानीय नागरिकों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाए जिससे वे स्वयं भी राहत कार्यों में प्रशासन की मदद कर सकें।
इस प्रकार राज्यपाल का वक्तव्य न केवल संवेदना प्रकट करने का माध्यम था, बल्कि एक दूरदर्शी दृष्टिकोण का भी प्रतीक था जिसमें वे भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए ठोस रणनीति की बात कर रहे थे। उन्होंने समाज से यह भी आग्रह किया कि हमें पीड़ितों के प्रति केवल संवेदनशील नहीं, बल्कि सक्रिय सहायक बनना होगा। चाहे वह आर्थिक सहायता हो, रक्तदान हो, या राहत सामग्री इकट्ठा करना—हर नागरिक को अपने स्तर से प्रयास करने चाहिए।
अंत में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि यह घटना हमारे लिए चेतावनी है कि प्राकृतिक आपदाएं कब और कैसे आ जाएं, इसका कोई ठिकाना नहीं। लेकिन हम यदि पहले से सचेत रहें, जागरूक रहें, और योजनाबद्ध रूप से काम करें, तो हम जान-माल की हानि को बहुत हद तक रोक सकते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि माँ वैष्णो देवी की कृपा से हम इस आपदा से उबरेंगे और भविष्य में अधिक सुरक्षित व व्यवस्थित तीर्थयात्रा सुनिश्चित करेंगे।
इस प्रकार राज्यपाल का यह शोक संदेश एक संवेदनशील, जिम्मेदार और प्रेरणादायक नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत करता है।
RERA कोर्ट का झटका : वकील की डायरी खोने से खारिज हुआ केस, अब मिला दूसरा मौका
जयपुर।
राजस्थान रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) की अदालत में एक अजीबोगरीब वाकया सामने आया है, जहाँ एक बिल्डर के खिलाफ चल रहा महत्वपूर्ण केस सिर्फ इसलिए खारिज हो गया क्योंकि शिकायतकर्ता का वकील अपनी डायरी ही घर भूल गया था। हालांकि, अब RERA ने शिकायतकर्ता को दूसरा मौका देते हुए उनके केसको फिर से बहाल कर दिया है, लेकिन इस घटना ने कोर्ट की कार्यवाही और वकीलों की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता जगराम सिंह मीणा ने मोजिका रियल एस्टेट एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ एक शिकायत दर्ज कराई थी । शिकायत संख्या RAJ-RERA-C-N-2023-6731 के तहत यह मामला चल रहा था। मामले की सुनवाई 24 अप्रैल, 2025 को हुई और उसी दिन इसे खारिज कर दिया गया। शिकायतकर्ता के वकील, रामस्वरूप मीणा, ने कोर्ट में एक बहाली याचिका (restoration application) दायर कर बताया कि 24 अप्रैल, 2025 को उनके घर पर एक रिश्तेदार बीमार था।
RERA कोर्ट का झटका : वकील की डायरी खोने से खारिज हुआ केस, अब मिला दूसरा मौका
इसी कारण उन्हें अपने पैतृक स्थान जाना पड़ा। जयपुर छोड़ते समय वे गलती से अपनी डायरी साथ ले जाना भूल गए। इस डायरी के अभाव में वे कोर्ट की कॉज लिस्ट (cause list) नहीं देख पाए और उनकी अनुपस्थिति में यह मामला खारिज हो गया। RERA के सदस्य सुधीर कुमार शर्मा ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता को एक और मौका दिया जाना उचित है। इसके बाद, बहाली याचिका को स्वीकार करते हुए केस को उसके मूल नंबर पर बहाल कर दिया गया। कोर्ट ने अब अगली सुनवाई के लिए 9 अक्टूबर, 2025 की तारीख तय की है। साथ ही, शिकायतकर्ता के वकील को निर्देश दिया गया है कि वे अगली सुनवाई से पहले शिकायत की एक प्रति प्रतिवादी को उपलब्ध कराएं। इस मामले में भले ही शिकायतकर्ता को दूसरा मौका मिल गया हो, लेकिन यह घटना दिखाती है कि एक छोटी सी गलती कैसे किसी की कानूनी लड़ाई को खतरे में डाल सकती है।
RAS 2023 इंटरव्यू : फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र वालों पर RPSC का शिकंजा, मेडिकल जांच से भागे अभ्यर्थी
अजमेर।
राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा आयोजित RAS भर्ती परीक्षा-2023 के इंटरव्यू में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्रों का मामला सामने आया है। ऐसे संदिग्ध मामलों को देखते हुए आयोग ने पहली बार दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए मेडिकल जांच अनिवार्य की, जिसके बाद कई अभ्यर्थी निर्धारित तिथि पर मेडिकल बोर्ड के सामने पेश नहीं हुए। आयोग के सचिव रामनिवास मेहता ने बताया कि मेडिकल जांच से दूरी बनाने वाले कुछ उम्मीदवारों ने अपनी श्रेणी को दिव्यांग से सामान्य या किसी अन्य श्रेणी में बदलने के लिए आवेदन किया है। यह भी सामने आया है कि इनमें से कई अभ्यर्थी पहले से ही तृतीय श्रेणी शिक्षक, पटवारी या अन्य सरकारी पदों पर कार्यरत हैं, जिनकी पिछली नियुक्तियाँ भी दिव्यांग कोटे से हुई थीं। आयोग का मानना है कि ऐसे अभ्यर्थी बार-बार आरक्षण का गलत फायदा उठा रहे हैं। आयोग ने संबंधित प्रशासनिक विभागों को भी इन कर्मचारियों की दिव्यांगता की दोबारा जांच कराने के लिए पत्र लिखा है। आयोग के अध्यक्ष उत्कल रंजन साहू ने कहा कि फर्जी प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। जो अभ्यर्थी मेडिकल जांच के लिए उपस्थित नहीं हुए हैं, उनकी RAS 2023 की उम्मीदवारी रद्द की जा सकती है और उन्हें भविष्य में सरकारी भर्तियों से भी वंचित किया जा सकता है।
RAS 2023 इंटरव्यू : फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र वालों पर RPSC का शिकंजा, मेडिकल जांच से भागे अभ्यर्थी
यह कदम पात्र दिव्यांग अभ्यर्थियों के अधिकारों की रक्षा करेगा और फर्जीवाड़े के जरिए सरकारी नौकरी में बैठे लोगों पर भी शिकंजा कसेगा। RAS 2023 भर्ती प्रक्रिया : एक नजर इंटरव्यू चरण: वर्तमान में RAS 2023 के 8वें चरण के इंटरव्यू चल रहे हैं, जो 18 सितंबर तक चलेंगे। कुल पद: 972 (राज्य सेवा 491, अधीनस्थ सेवा 481)। प्रारंभिक परीक्षा: 1 अक्टूबर 2023 को हुई, जिसमें 4,57,927 अभ्यर्थी शामिल हुए। मुख्य परीक्षा: 20 और 21 जुलाई 2024 को आयोजित हुई। साक्षात्कार के लिए चयनित: 2168 अभ्यर्थी। RAS 2024 मुख्य परीक्षा के परिणाम का इंतजार : RPSC द्वारा 17 और 18 जून 2025 को आयोजित RAS 2024 की मुख्य परीक्षा के परिणाम का भी बेसब्री से इंतजार है। इस भर्ती में कुल 1096 पद हैं।
झालावाड़ पुलिस की बड़ी कार्रवाई : सेना का जवान सहित सात तस्कर गिरफ्तार, लाखों का गांजा व एमडी जब्त
झालावाड़।
राजस्थान पुलिस ने नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाकर दो अलग-अलग मामलों में बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने भारी मात्रा में गांजा और सिंथेटिक ड्रग एमडीएमए जब्त करते हुए कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में एक भारतीय सेना का जवान भी शामिल है, जो तस्करी में सहयोग कर रहा था। पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के निर्देश पर चलाए जा रहे इस अभियान के तहत पुलिस थाना डग की टीम ने एक ट्रक को रोका, जो लोहे के सरियों से भरा था। तस्करों ने पुलिस को चकमा देने के लिए गांजे की खेप को सरियों के नीचे छिपा रखा था। तलाशी के दौरान पुलिस ने ट्रक से 103.600 किलोग्राम गांजा बरामद किया। ट्रक चालक जहीर खान (35) और उसके साथी विनोद शर्मा (28) निवासी झालरापाटन को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। इसी दौरान पुलिस ने गांजे की खेप को एस्कॉर्ट कर रही एक लग्जरी कार को रोका। कार में सवार पीरूलाल मालवीय (34) राजगढ़ मध्य प्रदेश हाल कोतवाली झालावाड़ और अनवर उर्फ अन्नू (29) निवासी झालरापाटन को भी गिरफ्तार किया गया। पीरूलाल मालवीय के पास से भारतीय सेना का आईडी कार्ड बरामद हुआ, जिसका इस्तेमाल वह पुलिस नाकाबंदी से बचने और साथियों को सतर्क करने के लिए करता था। पुलिस अब इस बड़े नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की तलाश कर रही है।
झालावाड़ पुलिस की बड़ी कार्रवाई : सेना का जवान सहित सात तस्कर गिरफ्तार, लाखों का गांजा व एमडी जब्त
झालावाड़ में सिंथेटिक ड्रग्स का सौदा, 3 आरोपी गिरफ्तार इसी तरह की एक अन्य कार्रवाई में, झालरापाटन पुलिस ने गश्त के दौरान एक बिना नंबर वाली फोर्ड इको स्पोर्ट कार से तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया। तलाशी में कार से 1.57 ग्राम सिंथेटिक ड्रग एमडीएमए बरामद हुआ। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान इमरान उर्फ आशु पाया (26), कालू उर्फ शेख शाहरुख (27) और अजहर (28) निवासी रामगंज मंडी कोटा के रूप में हुई है। प्रारंभिक पूछताछ में इन आरोपियों ने बताया कि वे परमानंद गुर्जर उर्फ पंडा से 100 ग्राम एमडीएमए खरीदने आए थे और इसके लिए उन्होंने 45,000 रुपये एडवांस दिए थे। पुलिस को देखते ही परमानंद गुर्जर मौके से फरार हो गया। पुलिस अब फरार आरोपी की तलाश कर रही है। इस सफल अभियान में जिला स्पेशल टीम और स्थानीय पुलिस टीमों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। पुलिस थाना डग की टीम का नेतृत्व वृत्ताधिकारी जयप्रकाश अटल और एसएचओ वासुदेव सिंह ने और झालरापाटन पुलिस टीम का नेतृत्व वृत्ताधिकारी हर्षराज सिंह खरेड़ा और एसएचओ हरलाल मीणा ने किया।
दिल्ली : सीबीआई ने हेड कांस्टेबल को एक लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया
नई दिल्ली ।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस के एक हेड कांस्टेबल को गिरफ्तार किया है। सीबीआई को हेड कांस्टेबल के रिश्वत लेने की जानकारी मिली थी। इसी क्रम में सीबीआई ने आरोपी पुलिसकर्मी को एक लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए पकड़ा।
सीबीआई ने 25 अगस्त को थाना अशोक विहार में तैनात दिल्ली पुलिस के आरोपी हेड कांस्टेबल और एक अन्य अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया। आरोप है कि एक सब-इंस्पेक्टर (एसआई) और आरोपी हेड कांस्टेबल ने शिकायतकर्ता से उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज न करने के लिए 3 लाख रुपए की मांग की थी। बातचीत के बाद, आरोपी हेड कांस्टेबल ने शिकायतकर्ता के खिलाफ लंबित शिकायत को बंद करने के लिए 2 लाख रुपए की रिश्वत लेने पर सहमति जताई।
दिल्ली : सीबीआई ने हेड कांस्टेबल को एक लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया
आरोपी हेड कांस्टेबल ने शिकायतकर्ता को 25 अगस्त को ही 1 लाख रुपए का आंशिक भुगतान करने का निर्देश दिया। सीबीआई ने जाल बिछाया और आरोपी हेड कांस्टेबल को एक लाख रुपए की रिश्वत मांगते और स्वीकार करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। शिकायतकर्ता से आंशिक भुगतान के रूप में एक लाख रुपए वसूले गए। फिलहाल, सीबीआई ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और मामले में आगे की जांच जारी है।
भ्रष्ट लोक सेवकों के विरुद्ध सीबीआई की सख्त कार्रवाई भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के प्रति उसकी दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है। सीबीआई ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि जिन नागरिकों को भ्रष्टाचार के मामले देखने को मिलते हैं या जिनसे सरकारी अधिकारियों की ओर से रिश्वत की मांग की जाती है, तो वे व्यक्ति शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा, सीबीआई ने नागरिकों के लिए 011-24367887 और मोबाइल नंबर 9650394847 भी साझा किए हैं, जहां वे अपनी शिकायत दे सकते हैं।
भीलवाड़ा जिले के सदर थाना पुलिस ने एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए इंजन चोरी के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई अपराध की रोकथाम और पीड़ित को न्याय दिलाने की दिशा में पुलिस द्वारा किए गए तेज़ और प्रभावी प्रयास का परिणाम है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान सुवाणा निवासी सांवरमल पुत्र जगन्नाथ जाट और किशन पुत्र विनोद लुहार के रूप में हुई है। पुलिस की यह कार्रवाई स्थानीय लोगों में सुरक्षा की भावना को मजबूत करने वाली है और अपराधियों में कानून का भय पैदा करने वाली मानी जा रही है।
थानाधिकारी कैलाश विश्नोई ने बताया कि 6 अगस्त को सिदड़ियास निवासी रमेश पुत्र कन्हैयालाल तेली ने सदर थाने में एक रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता रमेश ने बताया कि उसके मकान के बाहर दो पानी के इंजन रखे हुए थे, जो सुवाणा के पास प्रियदर्शनी कॉलोनी स्थित मकान में रखे गए थे। रमेश ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि जब वह अगली सुबह वहां पहुंचा, तो देखा कि दोनों इंजन गायब थे। उन्होंने अंदेशा जताया कि किसी अज्ञात व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा रात के अंधेरे में यह चोरी की गई है।
पुलिस ने शिकायत मिलने के तुरंत बाद संज्ञान लेते हुए बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 305 ए के तहत मामला दर्ज किया और घटना की जांच शुरू की। थानाधिकारी कैलाश विश्नोई के नेतृत्व में गठित टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आस-पास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। तकनीकी सहायता के साथ-साथ पारंपरिक पुलिसिंग के जरिए संदिग्धों की तलाश की गई। इसके अलावा मुखबिर तंत्र को भी सक्रिय किया गया, जिसके चलते कुछ ही समय में दो संदिग्धों के नाम पुलिस के सामने आए।
जांच के दौरान सामने आया कि सुवाणा निवासी सांवरमल और किशन कुछ दिनों से क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त थे और उनके बारे में पूर्व में भी छोटी-मोटी चोरी की घटनाओं में संलिप्तता की सूचनाएं मिली थीं। इन सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर सघन पूछताछ की। पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया और चोरी किए गए दोनों इंजन की जानकारी दी। पुलिस ने उनकी निशानदेही पर चोरी हुए इंजन भी बरामद कर लिए हैं।
इस मामले में कार्रवाई करने वाली पुलिस टीम में हेड कांस्टेबल जयप्रकाश, सुरत सिंह, महेन्द्र सिंह गुर्जर और विनोद कुमार शामिल थे। इन सभी अधिकारियों ने अपनी सजगता, समर्पण और सूझबूझ से इस मामले को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस टीम की त्वरित और प्रभावी कार्रवाई से यह साफ होता है कि कानून व्यवस्था को बनाए रखने और अपराध को जड़ से खत्म करने के लिए पुलिस तत्पर है।
भीलवाड़ा जिले में इंजन चोरी जैसी घटनाएं अक्सर किसानों और आम नागरिकों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बनती हैं। पानी के इंजन ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई और घरेलू कार्यों के लिए अत्यंत आवश्यक होते हैं। ऐसे में जब कोई इंजन चोरी हो जाता है, तो उसका सीधा असर पीड़ित के जीवन पर पड़ता है। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से न केवल रमेश को न्याय मिला है, बल्कि अन्य नागरिकों में भी यह विश्वास जगा है कि अगर वे कानून के सहारे जाएं, तो उन्हें न्याय अवश्य मिलेगा।
इंजन चोरी के आरोप में दो गिरफ्तार
इस घटना से एक और महत्वपूर्ण पहलू भी सामने आता है—अपराधियों द्वारा अपनाए जा रहे तरीके और पुलिस की अपराध से निपटने की रणनीति। जिस तरह से आरोपी रात के अंधेरे में चोरी कर गए, वह दर्शाता है कि अपराधी किस हद तक सोच-समझकर वारदात को अंजाम देने की योजना बनाते हैं। लेकिन वहीं, पुलिस की सूझबूझ और तेजी यह दर्शाती है कि अपराधियों के मंसूबों को नाकाम किया जा सकता है, बशर्ते कि पुलिस और जनता मिलकर काम करें।
इस मामले में पुलिस द्वारा जिस तत्परता और दक्षता के साथ काम किया गया, वह सराहनीय है। थानाधिकारी कैलाश विश्नोई और उनकी टीम की मेहनत से एक महत्वपूर्ण संदेश गया है कि अपराध चाहे कितना भी छोटा या बड़ा हो, कानून का शिकंजा हर अपराधी तक पहुंच सकता है। इसके साथ ही, इस मामले ने यह भी स्पष्ट किया है कि तकनीक और परंपरागत पुलिसिंग के समन्वय से जटिल से जटिल मामले भी सुलझाए जा सकते हैं।
भीलवाड़ा पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं इन आरोपियों का संबंध किसी संगठित गिरोह से तो नहीं है। कई बार देखा गया है कि ऐसे आरोपी एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा होते हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों में चोरी की घटनाओं को अंजाम देते हैं और बाद में चोरी की संपत्ति को बेचकर लाभ कमाते हैं। यदि इन आरोपियों से और जानकारी मिलती है, तो अन्य चोरी के मामलों का भी खुलासा हो सकता है। पुलिस इस दिशा में भी अपनी जांच को आगे बढ़ा रही है।
इस घटना के उजागर होने के बाद स्थानीय नागरिकों ने पुलिस की कार्रवाई की सराहना की है। सोशल मीडिया और स्थानीय समाचार माध्यमों में भी इस खबर को प्रमुखता से जगह दी गई है। लोगों ने उम्मीद जताई है कि पुलिस आगे भी इसी तरह से सजग रहेगी और अपराधियों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे पहुंचाएगी। साथ ही, आम जनता से भी यह अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
इस पूरे घटनाक्रम से यह भी स्पष्ट होता है कि समाज में कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस और नागरिकों के बीच एक मजबूत विश्वास और सहयोग की आवश्यकता है। यदि लोग सजग रहें और पुलिस को समय पर सही जानकारी दें, तो किसी भी प्रकार के अपराध को रोका जा सकता है। यह मामला पुलिस और समाज दोनों के लिए एक सकारात्मक उदाहरण बनकर सामने आया है।
अंततः यह कहा जा सकता है कि सदर थाना पुलिस ने इस मामले में जो तत्परता और संवेदनशीलता दिखाई है, वह प्रशंसनीय है। उनकी कार्रवाई न केवल पीड़ित रमेश के लिए राहत का कारण बनी, बल्कि समूचे क्षेत्र में एक सकारात्मक संदेश भी पहुंचा। ऐसे प्रयास न केवल अपराधियों में भय पैदा करते हैं, बल्कि आम नागरिकों में सुरक्षा और विश्वास का माहौल भी बनाते हैं। यह उम्मीद की जानी चाहिए कि भीलवाड़ा पुलिस आगे भी इसी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती रहेगी और समाज में कानून एवं व्यवस्था को बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाती रहेगी।
मुंबई एयरपोर्ट पर 1.02 करोड़ का सोना जब्त, मोम में छिपाकर की गई थी तस्करी
मुंबई, 25 अगस्त
मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कस्टम विभाग ने एक बार फिर सतर्कता और कड़ी निगरानी से तस्करी की एक बड़ी कोशिश को नाकाम करते हुए 24 कैरेट शुद्ध सोने की डस्ट की तस्करी का पर्दाफाश किया है। यह घटना 25 अगस्त को हुई जब ड्यूटी पर तैनात कस्टम अधिकारियों ने एक संदिग्ध यात्री को रोका और गहन जांच में उसके शरीर के अंदर छिपाकर लाए गए 1075 ग्राम सोने की डस्ट को जब्त किया। इस सोने की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग ₹1.02 करोड़ आंकी गई है।
यह मामला इसलिए और भी चौंकाने वाला है क्योंकि आरोपी ने अत्यंत जोखिम भरे तरीके से तस्करी को अंजाम देने की कोशिश की। उसने सोने की डस्ट को वैक्स (मोम) में भरकर चार छोटे टुकड़ों में छिपाया और उन टुकड़ों को अपने शरीर के अंगों में इस तरह छिपा लिया कि सामान्य जांच में उसका पकड़ना बेहद मुश्किल था। हालांकि, मुंबई कस्टम्स की सतर्क नजर और अनुभव ने उसे पकड़ने में सफलता पाई और एक बड़ा अपराध समय रहते सामने लाया जा सका।
पकड़े गए व्यक्ति की पहचान गुप्त रखी गई है क्योंकि मामला अभी जांच के अधीन है। यह यात्री सऊदी अरब के जेद्दाह से मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आया था। कस्टम अधिकारियों को उसकी गतिविधियों पर संदेह हुआ, जिसके बाद उसे पूछताछ और जांच के लिए अलग ले जाया गया। प्रारंभिक पूछताछ में वह सामान्य नजर आया, लेकिन जब मेडिकल एक्स-रे जांच की गई, तो अधिकारियों के सामने सच्चाई उजागर हो गई। उसके शरीर के अंदर चार वैक्स के पैकेट पाए गए, जिनमें शुद्ध सोने की डस्ट भरकर छिपाई गई थी।
यह तरीका जितना चतुराई भरा प्रतीत होता है, उतना ही खतरनाक भी है। शरीर के अंदर किसी भी प्रकार का रसायन, धातु या कठोर वस्तु छिपाना स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी गतिविधियां न केवल कानूनी रूप से गलत हैं, बल्कि जीवन के लिए भी घातक साबित हो सकती हैं। इस मामले में आरोपी ने तस्करी के लोभ में अपने जीवन को भी खतरे में डाला।
मुंबई कस्टम्स के अधिकारियों ने जब्त किए गए सोने की जांच की तो पाया कि वह 24 कैरेट की शुद्धता वाला था, जो कि सोने की सबसे उच्च गुणवत्ता मानी जाती है। इसका कुल वजन 1075 ग्राम निकला, जो कि किसी एक व्यक्ति द्वारा शरीर में छिपाकर लाना अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है। इससे यह संकेत मिलता है कि आरोपी इस तस्करी को अंजाम देने के लिए प्रशिक्षित हो सकता है या उसके पीछे कोई संगठित गिरोह काम कर रहा है।
मुंबई एयरपोर्ट पर 1.02 करोड़ का सोना जब्त, मोम में छिपाकर की गई थी तस्करी
मुंबई कस्टम्स विभाग ने आरोपी को सीमा शुल्क अधिनियम के तहत गिरफ्तार कर लिया है और उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ दी हैं, जिनके आधार पर यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि यह तस्करी किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय तस्करी रैकेट का हिस्सा हो सकती है। इस दिशा में कस्टम विभाग की एक विशेष जांच टीम काम कर रही है, जो आरोपी से पूछताछ कर इस तस्करी नेटवर्क की गहराई तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
सोने की तस्करी भारत में कोई नई बात नहीं है। भारत दुनिया के सबसे बड़े सोने के उपभोक्ता देशों में से एक है, और इसी वजह से यहां अवैध तरीके से सोना लाने की कोशिशें अक्सर होती रहती हैं। मुंबई एयरपोर्ट, जो देश के सबसे व्यस्त अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों में से एक है, पर आए दिन तस्करी के मामले सामने आते रहते हैं। लेकिन कस्टम विभाग की मुस्तैदी और आधुनिक तकनीक के सहारे इन पर कड़ी नजर रखी जाती है।
इस ताजा मामले में भी कस्टम विभाग की त्वरित कार्रवाई सराहनीय रही। उन्होंने न केवल तस्कर को समय रहते पकड़ लिया, बल्कि इस पूरे मामले को विधिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाते हुए एक सशक्त संदेश दिया है कि कानून से बचना आसान नहीं है। यह कार्रवाई भविष्य के तस्करों को एक चेतावनी के रूप में भी देखी जा रही है।
मुंबई कस्टम्स विभाग ने इस घटना के बाद एक सार्वजनिक अपील जारी की है, जिसमें नागरिकों से आग्रह किया गया है कि वे किसी भी तरह की अवैध गतिविधियों से दूर रहें और अगर कहीं कोई संदिग्ध गतिविधि नजर आए तो तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें। विभाग ने यह भी कहा है कि सीमा शुल्क अधिकारियों की सतर्कता और कड़ी निगरानी के चलते ही इस प्रकार के अपराध पकड़े जाते हैं, लेकिन इसमें आम जनता का सहयोग भी आवश्यक होता है।
कस्टम विभाग ने हवाई अड्डों पर सुरक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने का संकेत दिया है। इसके तहत यात्रियों की गहन जांच, एक्स-रे और मेडिकल जांच जैसे उपायों को और सख्त किया जा सकता है, ताकि शरीर के अंदर छिपाकर लाए जा रहे सामान की पहचान की जा सके। विभाग ने यह भी कहा है कि तस्करी के नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं और इन्हें रोकने के लिए हर संभव तकनीकी और मानव संसाधन का इस्तेमाल किया जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सोने की तस्करी को बढ़ावा देने वाले कारणों में से एक बड़ा कारण सोने पर लगाया गया आयात शुल्क है। इसकी वजह से कुछ लोग तस्करी को एक आसान विकल्प मानते हैं। लेकिन यह समझना जरूरी है कि तस्करी न केवल गैरकानूनी है, बल्कि इससे देश की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
इस तरह के मामलों में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह होता है कि पकड़े गए व्यक्ति के पीछे की कड़ियों को खोजा जाए। अकेले व्यक्ति से सोना छिपाकर लाना संभव नहीं होता, इसके लिए पूरा नेटवर्क काम करता है, जिसमें विदेशों में बैठे सप्लायर, भारत में रिसीवर और लोकल वितरक शामिल हो सकते हैं। इसीलिए कस्टम विभाग की जांच का दायरा केवल आरोपी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन सभी लोगों और संपर्कों को भी खंगाला जाएगा जो इस तस्करी के नेटवर्क में शामिल हो सकते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने फिर से यह साबित कर दिया है कि भले ही तस्करी के तरीके बदलते रहें, लेकिन अगर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क और सजग रहें तो ऐसे प्रयासों को रोका जा सकता है। कस्टम अधिकारियों की सतर्कता और संवेदनशीलता के कारण ही यह सोने की तस्करी नाकाम हुई और देश को एक बड़ा आर्थिक नुकसान होने से बचा लिया गया।
अंत में, यह कहना गलत नहीं होगा कि यह मामला देश की सीमा सुरक्षा और आर्थिक नीति से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे मामलों से यह संदेश भी जाना चाहिए कि किसी भी तस्करी या अवैध व्यापार की गतिविधियों में शामिल व्यक्ति को कानून के शिकंजे से नहीं बचाया जा सकता। मुंबई कस्टम्स की यह कार्रवाई समाज में एक नजीर बनकर सामने आई है और निश्चित ही इससे आने वाले समय में अवैध गतिविधियों पर कुछ हद तक लगाम लगेगी।
मुंबई कस्टम्स की इस कार्यवाही ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि चाहे तस्कर कितनी भी चालाकी से तस्करी का प्रयास करें, कानून और सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और तकनीकी दक्षता से बच पाना आसान नहीं है। यह कार्रवाई कानून, व्यवस्था और सुरक्षा की दिशा में एक मजबूत कदम है, जो देश के आर्थिक और सामाजिक हितों की रक्षा करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।