ट्रेन की चपेट में आने से अज्ञात किशोरी की मौत

ट्रेन की चपेट में आने से अज्ञात किशोरी की मौत

ट्रेन की चपेट में आने से अज्ञात किशोरी की मौत
ट्रेन की चपेट में आने से अज्ञात किशोरी की मौत

रफीगंज (बिहार), 29 अगस्त 2025:

पंडित दीनदयाल उपाध्याय-गया रेलखंड पर स्थित रफीगंज रेलवे स्टेशन के पास एक दुखद और हृदयविदारक घटना सामने आई है। पोल संख्या 506/7 और 506/9 के बीच एक 16 वर्षीय किशोरी की ट्रेन की चपेट में आने से मौके पर ही मौत हो गई। यह हादसा उस समय हुआ जब वह रेलवे ट्रैक पार कर रही थी। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर अफरातफरी मच गई। रफीगंज रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और स्थानीय पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए डेहरी ऑन सोन भेज दिया गया।

मृतका की नहीं हो सकी पहचान, पहनावे के आधार पर तलाश जारी

पुलिस के अनुसार मृत किशोरी की उम्र लगभग 16 वर्ष आंकी जा रही है। हालांकि, उसकी पहचान अभी तक नहीं हो सकी है। किशोरी ने सफेद और नीले रंग का टॉप और काले रंग की लेगिंग्स पहन रखी थी। RPF के एएसआई अविनाश कुमार और आरक्षी अनिल यादव ने घटनास्थल पर पहुंच कर शव की जांच की और प्रारंभिक कानूनी प्रक्रिया पूरी की। पहचान न हो पाने के कारण पुलिस आस-पास के गांवों और रफीगंज क्षेत्र के थानों में गुमशुदगी की शिकायतों से जानकारी जुटा रही है। साथ ही, लोगों से अपील की गई है कि यदि कोई भी व्यक्ति इस किशोरी को पहचानता हो तो वह तुरंत पुलिस से संपर्क करे।

रेलवे ओवरब्रिज बना मौत का कारण, पैदल यात्रियों के लिए कोई इंतजाम नहीं

स्थानीय ग्रामीणों ने इस हादसे के पीछे रेलवे ओवरब्रिज की खामियों को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि जब से रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण हुआ है, तब से पैदल यात्रियों के लिए कोई सीढ़ी या फुटपाथ की व्यवस्था नहीं की गई है। इसके चलते स्थानीय लोग रेलवे ट्रैक पार करने को मजबूर हैं, जो आए दिन दुर्घटनाओं को न्योता दे रहा है। रफीगंज रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की अच्छी-खासी आवाजाही होती है, लेकिन बुनियादी संरचना की कमी ने आम लोगों की जान को जोखिम में डाल दिया है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि रेलवे ने फुट ओवर ब्रिज पर पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित और सुलभ रास्ता बनाया होता, तो ऐसी घटनाएं रोकी जा सकती थीं। रेलवे ट्रैक के दोनों ओर के गांवों और बस्तियों के लोग रोजाना ट्रैक पार करते हैं, क्योंकि वैकल्पिक मार्ग नहीं होने के कारण ट्रैक ही उनके लिए एकमात्र रास्ता बन गया है।

ट्रेन की चपेट में आने से अज्ञात किशोरी की मौत
ट्रेन की चपेट में आने से अज्ञात किशोरी की मौत

स्थानीय प्रशासन और रेलवे की लापरवाही पर उठे सवाल

यह हादसा रफीगंज क्षेत्र में रेलवे प्रशासन की लापरवाही को उजागर करता है। स्थानीय लोग बार-बार इस मुद्दे को उठाते आ रहे हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। रेलवे ने केवल ओवरब्रिज बनाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली, लेकिन पैदल यात्रियों के लिए सीढ़ी, रैंप या अंडरपास की कोई व्यवस्था नहीं की। इसके चलते लोगों को जान जोखिम में डालकर रेल पटरी पार करनी पड़ती है।

स्थानीय समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों ने इस घटना को लेकर गहरा शोक व्यक्त किया है और रेलवे प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द पैदल यात्रियों के लिए वैकल्पिक रास्ते बनाए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

रेलवे ट्रैक पर सुरक्षा के नाम पर केवल खानापूर्ति

रेलवे ट्रैक पर लोगों की सुरक्षा के लिए रेलवे द्वारा बनाए गए नियम केवल कागजों तक ही सीमित हैं। रफीगंज जैसे छोटे स्टेशनों पर जहां बड़ी संख्या में पैदल यात्री ट्रैक पार करते हैं, वहां सुरक्षा उपाय न के बराबर हैं। न कोई गार्ड, न ही चेतावनी बोर्ड और न ही ट्रैक पर निगरानी। ट्रेनों की तेज गति और यात्री की लाचारी मिलकर हर कुछ हफ्तों में किसी न किसी की जान ले लेते हैं। लेकिन इसके बावजूद रेलवे और स्थानीय प्रशासन की आंखें नहीं खुलतीं।

इस प्रकार की घटनाओं के बाद भी जब तक उच्च अधिकारियों पर दबाव नहीं बनाया जाता या मीडिया में जोरदार कवरेज नहीं होती, तब तक कोई भी ठोस पहल सामने नहीं आती। यह स्थिति देश के रेलवे नेटवर्क की चिंताजनक सच्चाई को दर्शाती है।

किशोरी की मौत से ग्रामीणों में शोक की लहर

घटना के बाद रफीगंज और आसपास के इलाकों में शोक की लहर फैल गई है। विशेष रूप से महिलाएं और किशोरियां इस घटना से काफी आहत हैं। लोगों ने इस बात पर भी चिंता जताई कि यदि पीड़िता की पहचान नहीं हो पाई तो उसका अंतिम संस्कार कौन करेगा? क्या वह परिवार से बिछड़ी हुई थी? क्या वह कहीं से भागकर आई थी? इस तरह के अनगिनत सवाल लोगों के मन में उठ रहे हैं।

स्थानीय प्रशासन और पुलिस की जिम्मेदारी बनती है कि वे इस मामले की हर संभव तरीके से जांच करें और यदि किसी परिवार की बेटी लापता है तो उन्हें इस खबर की जानकारी दी जाए।

मीडिया और सामाजिक संगठनों की जिम्मेदारी

इस तरह की घटनाओं को केवल एक छोटी खबर समझ कर छोड़ देना समस्या को और बढ़ाता है। मीडिया और सामाजिक संगठनों को चाहिए कि वे इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएं और रेलवे व प्रशासन को कठघरे में खड़ा करें। एक किशोरी की जान गई है, और इसके पीछे लापरवाह व्यवस्थाएं जिम्मेदार हैं। यदि इस बार भी जिम्मेदारों को नहीं झकझोरा गया, तो अगली मौत किसी और की बेटी की हो सकती है।


निष्कर्ष

रफीगंज रेलवे स्टेशन पर हुई इस दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना ने एक बार फिर रेलवे संरचनाओं की असफलता और प्रशासनिक लापरवाही को उजागर कर दिया है। किशोरी की मौत एक चेतावनी है कि अब और देरी नहीं की जा सकती। रेलवे को चाहिए कि वह जनसंख्या की वास्तविक जरूरतों को समझे और ट्रैक पार करने वाले पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित विकल्प प्रदान करे। वहीं, प्रशासन को भी स्थानीय लोगों की मांगों पर ध्यान देना चाहिए और जरूरत पड़ने पर राज्य सरकार से मदद लेकर उचित कदम उठाना चाहिए।

जब तक रेलवे ट्रैक पर मानवीय दृष्टिकोण से सोचकर व्यवस्थाएं नहीं की जाएंगी, तब तक ऐसे हादसे रुकने की उम्मीद नहीं की जा सकती। अब समय आ गया है कि इस दिशा में ठोस और समयबद्ध कार्रवाई की जाए, ताकि रफीगंज जैसी त्रासदी दोबारा न हो।

डॉक्टर की लापरवाही से खतरे में मरीज की जान, सर्जरी के बाद छाती में रह गई गाइड वायर

डॉक्टर की लापरवाही से खतरे में मरीज की जान, सर्जरी के बाद छाती में रह गई गाइड वायर

डॉक्टर की लापरवाही से खतरे में मरीज की जान, सर्जरी के बाद छाती में रह गई गाइड वायर
डॉक्टर की लापरवाही से खतरे में मरीज की जान, सर्जरी के बाद छाती में रह गई गाइड वायर

तिरुवनंतपुरम ।

तिरुवनंतपुरम के जनरल हॉस्पिटल से एक बड़ा चौंकाने वाला और डॉक्टरों की लापरवाही का मामला सामने आया है। इसके ‘तार’ केरल की सुमैया से जुड़े हैं, जिसकी जिंदगी उस वक्त बदल गई जब सर्जरी के बाद उसकी छाती में एक गाइड वायर यानी एक पतली सी धातु की तार छोड़ दी गई। ये वायर दवाई देने के लिए सेंट्रल लाइन के साथ शरीर में डाली गई थी, लेकिन बाद में उसे हटाया नहीं गया। ये मामला तब सामने आया जब सोशल मीडिया पर एक ऑडियो क्लिप वायरल हुई, जिसमें डॉक्टर खुद इस गलती को स्वीकार करते सुनाई दिए। डॉक्टर ने सुमैया के रिश्तेदार से बातचीत में कहा, “जो हुआ, वो सच में एक गलती थी।”
डॉक्टर ने बताया कि यह गड़बड़ी एक्स-रे के बाद ही पता चली, और उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग दवा देने के लिए ट्यूब डाल रहे थे, असली जिम्मेदार वही हैं। हालांकि, सुमैया के परिवार का आरोप है कि डॉक्टर को पहले से पता था कि गाइड वायर शरीर के अंदर रह गया है, लेकिन उन्होंने ये बात जानबूझकर छिपाई।
केरल के कट्टक्कड़ा की रहने वाली सुमैया मलयिनकीझू ने 22 मार्च 2023 को तिरुवनंतपुरम जनरल हॉस्पिटल में थायरॉइड की सर्जरी करवाई थी। सर्जरी के बाद जब नसें ढूंढना मुश्किल हो गया, तब डॉक्टरों ने दवाई और खून चढ़ाने के लिए एक सेंट्रल लाइन डाली। इस प्रक्रिया में गाइड वायर का इस्तेमाल किया गया, लेकिन वह अंदर ही छूट गया।

डॉक्टर की लापरवाही से खतरे में मरीज की जान, सर्जरी के बाद छाती में रह गई गाइड वायर
डॉक्टर की लापरवाही से खतरे में मरीज की जान, सर्जरी के बाद छाती में रह गई गाइड वायर

बाद में जब सुमैया की तबीयत बिगड़ने लगी तो उसे श्री चित्रा इंस्टीट्यूट ले जाया गया। वहां की जांच में साफ हुआ कि उसकी छाती में जो चीज फंसी है, वह वही गाइड वायर है। अब वह वायर खून की नसों से चिपक चुकी है और डॉक्टरों ने कह दिया है कि अब उसे ऑपरेशन के जरिए निकालना संभव नहीं है, जिसके चलते अब सुमैया को इस गलती के परिणामों के साथ जीना पड़ रहा है।
सुमैया की तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही है, और उसने इस लापरवाही के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग से गुहार लगाई है और अपनी शिकायत लेकर विपक्ष के नेता से भी मिली है। उसका कहना है कि उसे इस घटना से काफी शारीरिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है, इसलिए उसे न्याय और बेहतर इलाज मिलना चाहिए।
जैसे-जैसे मामला मीडिया में सामने आया, जिला चिकित्सा अधिकारी (डीएमओ) ने अस्पताल प्रशासन से इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मामले की जांच की जा रही है।
साल 2017 में भी कुछ ऐसा ही मामला सामने आया था, जब कोझिकोड मेडिकल कॉलेज में हर्षीना नाम की एक महिला के पेट में ऑपरेशन के बाद कैंची छूट गई थी। हर्षीना को कई साल तक पेट दर्द होता रहा, लेकिन कोई वजह नहीं समझ आ रही थी। जब जांच हुई, तब पता चला कि पेट में कैंची रह गई है, जिसे बाद में ऑपरेशन करके निकाला गया।

न्यू अशोक नगर में एनकाउंटर, हैरी बॉक्सर गैंग के दो बदमाश गिरफ्तार

न्यू अशोक नगर में एनकाउंटर, हैरी बॉक्सर गैंग के दो बदमाश गिरफ्तार

न्यू अशोक नगर में एनकाउंटर, हैरी बॉक्सर गैंग के दो बदमाश गिरफ्तार
न्यू अशोक नगर में एनकाउंटर, हैरी बॉक्सर गैंग के दो बदमाश गिरफ्तार

नई दिल्ली ।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने न्यू अशोक नगर में देर रात एक एनकाउंटर के बाद लॉरेंस बिश्नोई गैंग के दो कुख्यात बदमाशों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार बदमाशों की पहचान कार्तिक जाखड़ और कविश के रूप में हुई है, जो अमेरिका में रहने वाले गैंगस्टर हैरी बॉक्सर के लिए काम करते हैं। हैरी बॉक्सर के खिलाफ हत्या, डकैती और फिरौती जैसे आधा दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं।

पुलिस को सूचना मिली थी कि कार्तिक और कविश न्यू अशोक नगर इलाके में मौजूद हैं। इस जानकारी के आधार पर स्पेशल सेल ने इलाके में जाल बिछाया। रात के समय जब पुलिस ने दोनों बदमाशों को रोकने की कोशिश की, तो उन्होंने पुलिस पर गोलीबारी शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने आत्मरक्षा में फायरिंग की, जिसमें कार्तिक जाखड़ के पैर में गोली लगी। इसके बाद पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया। घायल बदमाश को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है। पुलिस के अनुसार, इस ऑपरेशन में कोई पुलिसकर्मी घायल नहीं हुआ।

न्यू अशोक नगर में एनकाउंटर, हैरी बॉक्सर गैंग के दो बदमाश गिरफ्तार
न्यू अशोक नगर में एनकाउंटर, हैरी बॉक्सर गैंग के दो बदमाश गिरफ्तार

सूत्रों के मुताबिक, कार्तिक और कविश लॉरेंस बिश्नोई गैंग के सक्रिय सदस्य हैं और कई आपराधिक वारदातों में शामिल रहे हैं। ये दोनों हैरी बॉक्सर के इशारे पर दिल्ली और आसपास के इलाकों में आपराधिक गतिविधियां चलाते थे। स्पेशल सेल अब इनसे पूछताछ कर रही है ताकि गैंग के अन्य सदस्यों और उनकी योजनाओं का पता लगाया जा सके। पुलिस ने मौके से हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किया है।

यह एनकाउंटर दिल्ली पुलिस की अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का हिस्सा है। हाल के महीनों में स्पेशल सेल ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग के कई सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जो दिल्ली और पड़ोसी राज्यों में आपराधिक गतिविधियों में लिप्त थे। इस कार्रवाई से क्षेत्र में अपराध पर लगाम लगने की उम्मीद है।

नोएडा: सेक्टर 113 में पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़, एक घायल, दूसरा गिरफ्तार

नोएडा: सेक्टर 113 में पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़, एक घायल, दूसरा गिरफ्तार

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नोएडा: सेक्टर 113 में पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़, एक घायल, दूसरा गिरफ्तार

नोएडा ।

नोएडा के थाना सेक्टर 113 क्षेत्र में गुरुवार तड़के पुलिस मुठभेड़ में एक बदमाश के पैर में गोली लगी, जबकि उसके साथी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। बदमाशों से एक तमंचा, एक मोटरसाइकिल और 25 हजार रुपये नकद बरामद किए गए। दोनों पर मंदिर के दानपात्र से चोरी सहित कई अन्य अपराधों में शामिल होने का आरोप है। यह जानकारी नोएडा के एडीसीपी सुमित शुक्ला ने दी।

पुलिस के अनुसार, घायल बदमाश का नाम कन्हैया (पिता बदवी पासवान) है, जो मूल रूप से बिहार का निवासी है और वर्तमान में गाजियाबाद के इंदिरापुरम में रहता है। उसके साथी रोहित का निवास उत्तर प्रदेश के सीतापुर में है। कन्हैया ने हाल ही में थाना सेक्टर 113 क्षेत्र के एक मंदिर में दानपात्र से चोरी की थी। इस चोरी में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल और चोरी का पैसा पुलिस ने बरामद कर लिया। पूछताछ में पता चला कि कन्हैया ने गाजियाबाद के इंदिरापुरम में भी एक मंदिर में चोरी की घटना को अंजाम दिया था। इसके अलावा, दोनों बदमाशों ने मिलकर एक दुकान में भी चोरी की थी, जिसका पैसा भी उनके पास से बरामद हुआ।

नोएडा: सेक्टर 113 में पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़, एक घायल, दूसरा गिरफ्तार
नोएडा: सेक्टर 113 में पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़, एक घायल, दूसरा गिरफ्तार

मुठभेड़ के दौरान घायल कन्हैया को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। एडीसीपी सुमित शुक्ला ने बताया कि बदमाशों से पूछताछ जारी है, ताकि उनके अन्य अपराधों और संभावित साथियों का पता लगाया जा सके। पुलिस का कहना है कि दोनों बदमाश शातिर अपराधी हैं और इनके खिलाफ पहले भी कई मामले दर्ज हैं। इस मुठभेड़ से क्षेत्र में अपराध पर नियंत्रण के लिए पुलिस की सक्रियता और सतर्कता का पता चलता है।

वहीं, पुलिस ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत पुलिस को दें, ताकि अपराध को रोका जा सके। इस घटना के बाद क्षेत्र में पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है।

विजय नगर कॉलोनी के मुद्दों पर होगी चर्चा, विकास समिति की बैठक 31 अगस्त को

विजय नगर कॉलोनी के मुद्दों पर होगी चर्चा, विकास समिति की बैठक 31 अगस्त को

विजय नगर कॉलोनी के मुद्दों पर होगी चर्चा, विकास समिति की बैठक 31 अगस्त को
विजय नगर कॉलोनी के मुद्दों पर होगी चर्चा, विकास समिति की बैठक 31 अगस्त को

विजय नगर कॉलोनी विकास समिति की बैठक: विकास की नई दिशा में सामूहिक प्रयास

भरतपुर जिले की एक प्रमुख और उभरती हुई आवासीय कॉलोनी विजय नगर के निवासियों के लिए 31 अगस्त का दिन बेहद महत्वपूर्ण साबित होने जा रहा है, जब कॉलोनी के विकास और मौजूदा समस्याओं के समाधान को लेकर विजय नगर कॉलोनी विकास समिति एक विशेष बैठक आयोजित करने जा रही है। यह बैठक रविवार को दोपहर 12 बजे विश्वप्रिय शास्त्री पार्क में होगी, जिसकी अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष वीरीसिंह कुंतल स्वयं करेंगे। इस बैठक में कॉलोनी के आम नागरिकों के साथ-साथ समिति के सभी सदस्य भाग लेंगे और स्थानीय समस्याओं को खुलकर साझा करेंगे। बैठक का उद्देश्य केवल चर्चा करना नहीं है, बल्कि सामूहिक रूप से समाधान खोजने और उन्हें लागू करने के लिए ठोस निर्णय लेना है।

विजय नगर कॉलोनी भरतपुर शहर का एक तेजी से विकसित होता क्षेत्र है, लेकिन यहां बुनियादी सुविधाओं की कमी और प्रशासनिक उपेक्षा के चलते कई गंभीर समस्याएं बनी हुई हैं। इन समस्याओं से निपटने के लिए स्थानीय नागरिकों ने स्वयं पहल करते हुए विकास समिति का गठन किया है, जो लगातार जन-संवेदनशील मुद्दों को उठाने का प्रयास कर रही है। आगामी बैठक में जिन मुद्दों पर विशेष रूप से चर्चा की जाएगी, वे न केवल कॉलोनी की आधारभूत संरचना से संबंधित हैं, बल्कि नागरिकों के जीवनस्तर को बेहतर बनाने की दिशा में भी निर्णायक सिद्ध हो सकते हैं।

बैठक का पहला और प्रमुख एजेंडा सारस चौराहे से भरतपुर शहर की ओर जाने वाले बंद रास्ते को फिर से खुलवाने की मांग है। यह मार्ग पहले कॉलोनी के लोगों के लिए एक मुख्य संपर्क मार्ग था, लेकिन किसी कारणवश यह अवरुद्ध हो गया, जिससे न केवल आवागमन में असुविधा हो रही है, बल्कि पूरे क्षेत्र की यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इस मुद्दे पर समिति एलिवेटेड रोड या फ्लाईओवर के निर्माण की भी मांग उठाएगी, जिससे भविष्य में ट्रैफिक जाम जैसी समस्याओं से बचा जा सके और नागरिकों को सुगम और सुरक्षित आवागमन मिल सके।

दूसरा बड़ा मुद्दा है – कॉलोनी की सभी गलियों में उचित नाली और सीवरेज व्यवस्था का निर्माण। वर्तमान में कई गली-मोहल्लों में जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं है, जिससे बारिश के दिनों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है और संक्रमण जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। समिति का मानना है कि यह एक बुनियादी आवश्यकता है और इसके लिए नगर निगम या भरतपुर विकास प्राधिकरण से समन्वय बनाकर कार्य कराया जाना अत्यंत आवश्यक है। यदि कॉलोनी के प्रत्येक घर तक सीवरेज लाइन पहुंचेगी, तो स्वच्छता और स्वास्थ्य दोनों क्षेत्रों में बड़ा सुधार देखा जा सकेगा।

एक अन्य महत्वपूर्ण बिंदु है – कॉलोनी के भू-आवंटन से संबंधित नियमन पट्टों की प्रक्रिया। समिति का यह स्पष्ट मत है कि जब तक भू-आवंटन वैध नहीं होगा, तब तक सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ नागरिकों तक पहुंच पाना कठिन है। इसलिए भरतपुर विकास प्राधिकरण से यह मांग की जाएगी कि कॉलोनी को नियमानुसार पट्टे जारी किए जाएं, ताकि रहवासियों को कानूनी अधिकार और सुरक्षा मिल सके। यह केवल एक औपचारिकता नहीं बल्कि नागरिकों के आत्मविश्वास और भविष्य की स्थिरता से जुड़ा मुद्दा है।

विजय नगर कॉलोनी के मुद्दों पर होगी चर्चा, विकास समिति की बैठक 31 अगस्त को
विजय नगर कॉलोनी के मुद्दों पर होगी चर्चा, विकास समिति की बैठक 31 अगस्त को

बैठक में यह प्रस्ताव भी रखा जाएगा कि कॉलोनी की प्रत्येक गली पर उचित गली नंबर के बोर्ड लगाए जाएं। इससे न केवल कॉलोनी की पहचान में मदद मिलेगी, बल्कि डाक सेवा, इमरजेंसी सेवाओं और सरकारी दस्तावेजों में भी स्पष्टता आएगी। आज भी कई क्षेत्रों में गली नंबरों के अभाव में नागरिकों को दस्तावेजी प्रक्रियाओं में कठिनाई का सामना करना पड़ता है, इसलिए यह एक छोटी लेकिन प्रभावशाली पहल हो सकती है।

गली नंबर 10 और 11 की समस्या पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जहाँ स्थित कई प्लॉटों और मकानों का नियमन अब तक नहीं हो पाया है। इससे संबंधित नागरिकों को संपत्ति खरीद-फरोख्त, बैंक लोन, बिजली-पानी कनेक्शन जैसी सेवाओं में दिक्कत होती है। समिति इन दोनों गलियों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल कराने की योजना बना रही है, ताकि वहां के नागरिक भी मुख्यधारा की सुविधाओं से जुड़ सकें।

यह बैठक न केवल समस्याओं के समाधान का एक मंच होगी, बल्कि नागरिकों को सहभागी शासन और सामूहिक निर्णय प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर भी देगी। समिति के अध्यक्ष वीरीसिंह कुंतल ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाएंगे और बैठक में हर नागरिक की राय को महत्व दिया जाएगा। इस प्रक्रिया से लोगों में लोकतांत्रिक भागीदारी की भावना भी विकसित होगी, जो किसी भी क्षेत्र के विकास के लिए आवश्यक है।

विजय नगर कॉलोनी विकास समिति की यह पहल उस समय और भी प्रासंगिक हो जाती है जब अधिकांश शहरी क्षेत्रों में नागरिक केवल प्रशासन की ओर देखने के आदी हो गए हैं। समिति द्वारा किया जा रहा यह प्रयास इस बात का प्रतीक है कि जब नागरिक स्वयं अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझते हैं, तो वे न केवल समस्याओं की पहचान कर सकते हैं, बल्कि उनके समाधान की दिशा में भी प्रभावी कदम उठा सकते हैं। बैठक का उद्देश्य केवल शिकायतें दर्ज करना नहीं, बल्कि योजनाबद्ध और सामूहिक रूप से समाधान की दिशा में आगे बढ़ना है।

उम्मीद की जा रही है कि इस बैठक के बाद संबंधित प्रशासनिक विभागों तक इन सभी मुद्दों की गूंज पहुंचेगी और आवश्यक कार्यवाही शुरू की जाएगी। साथ ही, कॉलोनी में एकजुटता और पारस्परिक सहयोग की भावना और मजबूत होगी। आने वाले समय में समिति द्वारा लिए गए निर्णयों को लागू करने के लिए नागरिकों का सक्रिय सहयोग आवश्यक होगा, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि विजय नगर केवल नाम से ही नहीं, बल्कि वास्तविक रूप से एक “विकसित नगर” बन सके।

इस प्रकार 31 अगस्त को होने वाली यह बैठक केवल एक औपचारिक सभा नहीं, बल्कि एक परिवर्तन की शुरुआत है – जहां नागरिक अपने क्षेत्र के भविष्य को स्वयं संवारने के लिए एकजुट हो रहे हैं। यह भरतपुर की अन्य कॉलोनियों और मोहल्लों के लिए भी एक प्रेरणा का कार्य कर सकती है, जहां विकास की राह में केवल सरकार ही नहीं, नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी निर्णायक होती है।

संभल हिंसा : न्यायिक आयोग ने सीएम योगी को सौंपी गोपनीय रिपोर्ट, सपा ने उठाए सवाल

संभल हिंसा : न्यायिक आयोग ने सीएम योगी को सौंपी गोपनीय रिपोर्ट, सपा ने उठाए सवाल

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लखनऊ । 

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद में सर्वे के दौरान हुई हिंसा की रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी गई। हिंसा की जांच के लिए गठित की गई न्यायिक आयोग ने गुरुवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री से मुलाकात कर यह रिपोर्ट प्रस्तुत की।

यूपी सरकार ने न्यायिक आयोग का गठन इलाहाबाद हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस देवेंद्र कुमार अरोड़ा की अध्यक्षता में किया था। इसमें रिटायर्ड आईएएस अधिकारी अमित मोहन और रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी अरविंद कुमार जैन भी शामिल थे।

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने संभल हिंसा की जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “संभल हिंसा को लेकर एक गोपनीय रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी गई है। मैं पूछना चाहता हूं कि इस रिपोर्ट को मीडिया में साझा क्यों नहीं किया गया? हालांकि, मैं समझता हूं कि भाजपा सरकार इस तरह की गोपनीय रिपोर्ट के जरिए मुख्य मुद्दों से ध्यान हटाना चाहती है। भाजपा का कोई भी हथकंडा अब पीडीए के सामने चलने वाला नहीं है।”

संभल हिंसा : न्यायिक आयोग ने सीएम योगी को सौंपी गोपनीय रिपोर्ट, सपा ने उठाए सवाल
संभल हिंसा : न्यायिक आयोग ने सीएम योगी को सौंपी गोपनीय रिपोर्ट, सपा ने उठाए सवाल

संभल हिंसा पर मौलाना साजिद रशीदी ने कहा, “संभल हिंसा पर सीएम योगी ने एक कमेटी का गठन किया था, जिन्होंने एक रिपोर्ट सौंपी और बताया कि पहले संभल में 45 प्रतिशत हिंदू थे, लेकिन अब 15 प्रतिशत हिंदू रह गए हैं। इन लोगों ने बार-बार होने वाले दंगों के कारण पलायन किया है। मैं इस रिपोर्ट को पक्षपातपूर्ण मानता हूं।”

उन्होंने कहा, “संभल में मंदिर को लेकर विवाद हुआ और कहा गया कि मंदिर की दीवारों को ढक दिया गया, मगर ऐसा नहीं था। खुद मंदिर के पुजारी ने बताया था कि हम पर किसी ने वहां से जाने का दबाव नहीं बनाया था और अपने काम की वजह से ही शिफ्ट होना पड़ा है। ऐसी बातें सामने आने के बावजूद गोपनीय रिपोर्ट पेश करना, मुझे लगता है कि इस वजह से संभल में फिर दंगे भड़केंगे और इससे जनता का काफी नुकसान होगा।”

ज्ञात हो कि संभल की शाही जामा मस्जिद का सर्वे 24 नवंबर, 2024 को हुआ था। इस दौरान हजारों की संख्या में इकट्ठा हुए लोगों ने पुलिस पर पथराव-फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई। भीड़ ने गाड़ियों को फूंक दिया था। इस मामले में कई उपद्रवियों को जेल भेजा जा चुका है।

SI भर्ती परीक्षा 2021 रद्द राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

SI भर्ती परीक्षा 2021 रद्द राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

SI भर्ती परीक्षा 2021 रद्द राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
SI भर्ती परीक्षा 2021 रद्द राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

राजस्थान हाईकोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय: SI भर्ती परीक्षा 2021 रद्द

जयपुर, राजस्थान: राजस्थान हाईकोर्ट ने सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा 2021 को रद्द करने का ऐतिहासिक और दूरगामी असर डालने वाला निर्णय सुनाया है। यह फैसला न्यायमूर्ति समीर जैन की खंडपीठ द्वारा सुनाया गया, जिन्होंने 14 अगस्त को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था और अब 28 अगस्त को यह फैसला सार्वजनिक किया गया। इस निर्णय ने न केवल राज्य में भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि यह भी स्पष्ट किया है कि न्यायपालिका अब भर्ती में किसी भी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।

यह मामला लगभग एक साल पहले उस समय सामने आया जब 13 अगस्त 2024 को कई याचिकाकर्ताओं ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर कर SI भर्ती परीक्षा 2021 को रद्द करने की मांग की। याचिकाओं में यह आरोप लगाया गया था कि परीक्षा प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं, पेपर लीक, सॉल्वर गैंग और तकनीकी खामियों के चलते निष्पक्षता प्रभावित हुई है। आरोप यह भी थे कि कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ मिला, जिससे मेधावी और योग्य उम्मीदवारों का हक मारा गया।

राज्य सरकार ने अपने पक्ष में यह दलील दी कि परीक्षा के इतने आगे बढ़ जाने के बाद, और चयन सूची जारी हो जाने के बाद अब इसे रद्द करना न तो व्यावहारिक है और न ही न्यायसंगत। सरकार ने यह भी कहा कि यदि कुछ गड़बड़ियां हुई भी हों, तो उनपर जांच के बाद व्यक्तिगत स्तर पर कार्रवाई की जा सकती है, न कि पूरी परीक्षा को रद्द करना उचित होगा। इसके अलावा, जो अभ्यर्थी परीक्षा में सफल हुए थे और चयन सूची में आए थे, उन्होंने भी परीक्षा रद्द करने का पुरजोर विरोध किया। उनका तर्क था कि पूरी मेहनत से परीक्षा पास करने के बाद अब चयन रद्द किया जाना उनके साथ अन्याय होगा।

लेकिन, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को दरकिनार करते हुए यह स्पष्ट किया कि जब तक परीक्षा की मूल प्रक्रिया ही संदेह के घेरे में हो, तब तक उसमें हुए चयन को न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि भर्ती की निष्पक्षता और पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण है, और यदि उस पर प्रश्नचिह्न लग जाए, तो पूरी प्रक्रिया को नए सिरे से शुरू करना ही न्यायोचित कदम होगा। अदालत ने यह भी कहा कि “कुछ की गलती का खामियाजा सभी को भुगतना पड़े”, यह तर्क भले ही कठोर लगे, परंतु कानून की दृष्टि से आवश्यक है कि प्रक्रिया संदेह से परे हो।

यह फैसला राजस्थान सरकार के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। अब सरकार को पूरे मामले की समीक्षा करनी होगी और भविष्य के लिए नई भर्ती प्रक्रिया का खाका तैयार करना होगा। साथ ही, जिन अभ्यर्थियों का चयन हो चुका था, उन्हें भी अब दोबारा परीक्षा की तैयारी करनी पड़ सकती है। वहीं, जिन उम्मीदवारों ने पहले अवसर पर चयन से वंचित रहने के बावजूद न्याय के लिए लड़ाई लड़ी, उनके लिए यह फैसला उम्मीद की किरण बनकर सामने आया है।

SI भर्ती परीक्षा 2021 रद्द राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
SI भर्ती परीक्षा 2021 रद्द राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

इस फैसले के दूरगामी प्रभाव भी देखने को मिल सकते हैं। एक ओर जहां यह भर्ती परीक्षाओं की शुचिता को बनाए रखने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा, वहीं दूसरी ओर यह सभी सरकारी एजेंसियों और भर्ती बोर्ड्स के लिए यह चेतावनी भी है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार को अदालतें गंभीरता से लेंगी। कोर्ट का यह सख्त रुख भविष्य में अन्य विवादास्पद परीक्षाओं के मामलों को प्रभावित कर सकता है।

साथ ही, इस निर्णय ने यह भी दर्शाया कि अभ्यर्थियों द्वारा दायर की गई याचिकाएं केवल व्यक्तिगत हितों की पूर्ति नहीं थीं, बल्कि एक व्यापक व्यवस्था में सुधार की मांग थीं। कोर्ट ने उन युवाओं की आवाज को सुना, जो न्याय के लिए कानूनी मार्ग अपनाकर सिस्टम की खामियों को उजागर कर रहे थे। इस पूरी प्रक्रिया ने यह साबित कर दिया कि न्यायपालिका में विश्वास और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करके भी बदलाव लाया जा सकता है।

अब सवाल उठता है कि आगे की प्रक्रिया क्या होगी? सरकार को चाहिए कि वह इस निर्णय को सम्मानपूर्वक स्वीकार करते हुए जल्द से जल्द एक पारदर्शी और निष्पक्ष पुनः भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ करे। साथ ही, इस बार यह सुनिश्चित किया जाए कि परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी एवं प्रशासनिक स्तर पर ऐसी कोई कमी न रह जाए, जिससे भविष्य में पुनः विवाद उत्पन्न हों। इसके लिए एक स्वतंत्र एजेंसी के माध्यम से परीक्षा आयोजित करने पर भी विचार किया जा सकता है।

राजस्थान जैसे बड़े राज्य में जहां बेरोजगारी एक गंभीर मुद्दा है, वहां SI जैसी पदों की भर्ती युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर होती है। इसलिए, इन अवसरों को पारदर्शिता, निष्पक्षता और मेरिट के आधार पर प्रदान करना न केवल उम्मीदवारों के लिए आवश्यक है, बल्कि समाज की कानून व्यवस्था और पुलिस व्यवस्था की गुणवत्ता के लिए भी आवश्यक है।

अंततः यह निर्णय न केवल एक परीक्षा को रद्द करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक संदेश है कि व्यवस्था में यदि गड़बड़ियां हैं, तो उन्हें न्यायिक हस्तक्षेप से सुधारा जा सकता है। यह युवाओं के लिए भी एक प्रेरणा है कि वे अपने अधिकारों के लिए संवैधानिक तरीकों से लड़ सकते हैं और जीत भी सकते हैं।

राजस्थान हाईकोर्ट का यह ऐतिहासिक फैसला राज्य में भर्ती प्रक्रियाओं के लिए एक नई दिशा तय करेगा और प्रशासन को भी चेतावनी देगा कि अब समय आ गया है कि हर प्रक्रिया को पारदर्शी, जवाबदेह और भरोसेमंद बनाया जाए। न्याय के इस विजय के साथ यह उम्मीद की जा सकती है कि आने वाले समय में भर्ती परीक्षाएं अधिक निष्पक्ष होंगी और योग्य उम्मीदवारों को उनका हक समय पर और सही तरीके से मिलेगा।

एनसीआर में एक हफ्ते तक रहेगा बारिश का असर, पश्चिमी विक्षोभ बना कारण

एनसीआर में एक हफ्ते तक रहेगा बारिश का असर, पश्चिमी विक्षोभ बना कारण

एनसीआर में एक हफ्ते तक रहेगा बारिश का असर, पश्चिमी विक्षोभ बना कारण
एनसीआर में एक हफ्ते तक रहेगा बारिश का असर, पश्चिमी विक्षोभ बना कारण

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में इन दिनों मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है, जिससे लोगों को जहां एक ओर गर्मी से राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर जलभराव, ट्रैफिक जाम और असुविधाओं का सामना भी करना पड़ रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, आगामी एक सप्ताह यानी 28 अगस्त से 2 सितंबर तक दिल्ली-एनसीआर में लगातार बारिश और गरज-चमक का सिलसिला जारी रह सकता है। इस अनवरत बारिश के पीछे न केवल सक्रिय मानसूनी हवाएं जिम्मेदार हैं, बल्कि इस बार मौसम में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) का भी महत्वपूर्ण योगदान है, जिसने वर्षा को अधिक व्यापक और तीव्र बना दिया है।

मानसून और पश्चिमी विक्षोभ का मिलन

भारतीय उपमहाद्वीप में वर्षा सामान्यतः दक्षिण-पश्चिम मानसून के कारण होती है, जो अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नम हवाओं को लेकर आता है। यह हवाएं जब उत्तर भारत के मैदानों से टकराती हैं, तो वर्षा का कारण बनती हैं। लेकिन इस बार मानसून की सक्रियता के साथ-साथ पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय हो गया है, जो सामान्यत: सर्दियों में हिमालय क्षेत्र में बर्फबारी और बारिश के लिए जिम्मेदार होता है।

वर्तमान परिदृश्य में पश्चिमी विक्षोभ के कारण वातावरण में अस्थिरता बढ़ गई है। नमी से भरे बादलों के साथ जब यह टकराते हैं, तो “थंडरस्टॉर्म विद रेन” (गरज के साथ बारिश) की स्थिति बन जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यही कारण है कि दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों में इस बार बारिश का पैटर्न सामान्य मानसून से थोड़ा अलग नजर आ रहा है।

मौसम का पूर्वानुमान: तापमान और उमस

आईएमडी के मुताबिक, अगले कुछ दिनों तक अधिकतम तापमान 31 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा। हालांकि तापमान में गिरावट होगी, लेकिन ह्यूमिडिटी (आर्द्रता) का स्तर 95 से 99 प्रतिशत तक पहुंच सकता है, जिससे उमस बनी रहेगी। यह स्थिति खासकर उन लोगों के लिए असुविधाजनक हो सकती है, जो बाहर यात्रा करते हैं या लंबे समय तक खुले वातावरण में काम करते हैं।

बिना चेतावनी के बदलता मौसम

दिल्ली-एनसीआर में इन दिनों मौसम के उतार-चढ़ाव की एक खास बात यह है कि बिना किसी औपचारिक चेतावनी के भी अचानक बारिश, तेज हवा, गरज और बिजली गिरने की घटनाएं हो रही हैं। मौसम विभाग ने अभी तक कोई “ऑरेंज” या “रेड अलर्ट” जारी नहीं किया है, लेकिन स्थानीय स्तर पर परिवर्तनशील मौसम ने जनजीवन को प्रभावित किया है।

यह बदलाव न केवल लोगों की दिनचर्या पर असर डाल रहा है, बल्कि सड़क यातायात, सार्वजनिक परिवहन, स्कूल, कार्यालय और बाजार व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। कई बार सुबह साफ आसमान होता है, लेकिन दोपहर या शाम को अचानक तेज बारिश शुरू हो जाती है, जिससे आम जनता के लिए तैयार रहना मुश्किल हो जाता है।

बारिश के फायदे और परेशानियां

बारिश से तापमान में गिरावट आई है, जिससे लोगों को गर्मी और लू से राहत मिली है। खासकर पिछले कुछ सप्ताहों से जो उमसभरी गर्मी लोगों को परेशान कर रही थी, उसमें अब काफी हद तक कमी आई है। घरों में कूलर और एसी की आवश्यकता कम हुई है और पर्यावरण में एक ताजगी महसूस की जा रही है।

लेकिन दूसरी ओर, लगातार बारिश के कारण जलभराव की समस्या ने फिर से लोगों को परेशान किया है। एनसीआर के कई इलाकों में जैसे नोएडा सेक्टर 62, गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन, गुरुग्राम के सुभाष चौक और दिल्ली के आईटीओ, लक्ष्मी नगर, कीर्ति नगर आदि जगहों पर सड़कें पानी में डूबी हुई नजर आईं। इससे ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रही और लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में घंटों लग गए।

एनसीआर में एक हफ्ते तक रहेगा बारिश का असर, पश्चिमी विक्षोभ बना कारण
एनसीआर में एक हफ्ते तक रहेगा बारिश का असर, पश्चिमी विक्षोभ बना कारण

सरकारी प्रयास और चेतावनियां

स्थानीय प्रशासन की ओर से नगर निगमों और जल निकासी विभागों को अलर्ट किया गया है, ताकि बारिश के कारण होने वाले जलभराव और सीवर ओवरफ्लो की समस्या से निपटा जा सके। पंपों की तैनाती, मैनहोल की सफाई और यातायात नियंत्रण जैसी व्यवस्थाएं की जा रही हैं, लेकिन तीव्र और लगातार बारिश इन प्रयासों को भी चुनौती दे रही है।

आईएमडी और राज्य सरकार ने आम नागरिकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और बीमार व्यक्तियों को अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने की अपील की गई है। जिन इलाकों में जलभराव अधिक है, वहां से गुजरते समय सतर्कता रखने और बिजली के खंभों व खुले तारों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है।

मानसून की चाल पर विशेषज्ञों की राय

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह बारिश मॉनसून के अंतिम चरण की ओर इशारा कर रही है, लेकिन यह चरण काफी सक्रिय और तीव्र हो सकता है। सितंबर के पहले सप्ताह तक उत्तर भारत में मानसून की गतिविधियां जारी रहेंगी। इसके बाद धीरे-धीरे यह दक्षिण की ओर सिमटना शुरू करेगा और अक्टूबर तक समाप्ति की ओर बढ़ेगा।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण अब मौसम के पैटर्न में स्पष्ट परिवर्तन दिखाई देने लगे हैं। बारिश की तीव्रता, स्थानिकता और समयसीमा में पहले की तुलना में भिन्नता देखी जा रही है। यही कारण है कि एक ही क्षेत्र में कहीं तेज बारिश होती है और कहीं सूखा रहता है।

आम नागरिकों के लिए सुझाव

इस तरह की बारिश के दौरान आम जनता के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं:

  • छाता या रेनकोट साथ रखें।
  • जलभराव वाले रास्तों से बचें, क्योंकि इनमें गड्ढे या खुले मैनहोल हो सकते हैं।
  • वाहन सावधानी से चलाएं और सड़क पर फिसलन से बचने के लिए धीमी गति रखें।
  • बिजली गिरने की संभावना के दौरान खुले मैदान या पेड़ के नीचे खड़े न हों।
  • बच्चों को बाहर खेलने से रोकें और घर के अंदर सुरक्षित स्थानों पर रखें।

निष्कर्ष

एनसीआर में मौसम का यह बदलता मिजाज एक ओर जहां लोगों को गर्मी से राहत दे रहा है, वहीं दूसरी ओर यह बारिश नई चुनौतियां भी लेकर आ रही है। मानसूनी हवाओं और पश्चिमी विक्षोभ की संयुक्त सक्रियता ने बारिश को न केवल व्यापक बल्कि अप्रत्याशित भी बना दिया है। इस स्थिति में प्रशासन और नागरिकों — दोनों को सजग रहना जरूरी है। मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए आम लोगों को अलर्ट रहने, पूर्व योजना बनाने और अत्यधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। आने वाले दिनों में यदि यही स्थिति बनी रही, तो यह वर्षा क्षेत्र में जल स्तर बढ़ाने और पर्यावरण के लिए लाभकारी तो होगी, लेकिन शहरी व्यवस्था की परीक्षा भी लेगी। मौसम विभाग की सलाह का पालन करना और प्रशासनिक निर्देशों के अनुरूप कार्य करना सभी की सुरक्षा और सुविधा के लिए अनिवार्य है।

भीलवाड़ा में डीजीजीआई की बड़ी छापेमारी, 10 करोड़ से अधिक की जीएसटी चोरी का खुलासा

भीलवाड़ा में डीजीजीआई की बड़ी छापेमारी, 10 करोड़ से अधिक की जीएसटी चोरी का खुलासा

भीलवाड़ा में डीजीजीआई की बड़ी छापेमारी, 10 करोड़ से अधिक की जीएसटी चोरी का खुलासा
भीलवाड़ा में डीजीजीआई की बड़ी छापेमारी, 10 करोड़ से अधिक की जीएसटी चोरी का खुलासा

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में 28 अगस्त को जीएसटी चोरी और फर्जी बिलिंग के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ, जब महानिदेशालय जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) की जयपुर जोनल यूनिट ने बड़े पैमाने पर छापेमारी अभियान चलाया। इस व्यापक कार्रवाई ने न केवल भीलवाड़ा के व्यापारिक समुदाय को हिला दिया, बल्कि पूरे राज्य में जीएसटी अनुपालन को लेकर एक सख्त और निर्णायक संदेश भी दिया है। जयपुर से आई विशेष जांच टीमों ने शहर में फैले 10 से अधिक प्रोसेस हाउस और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर एक साथ कार्रवाई कर एक संगठित टैक्स चोरी तंत्र का खुलासा किया। इस छापेमारी के दौरान अधिकारियों को बड़ी संख्या में महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड्स और इलेक्ट्रॉनिक डेटा मिले हैं, जिनकी जांच फिलहाल जारी है।

सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई मुख्य रूप से निखिल डाड के ठिकानों पर केंद्रित रही, जो पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष लक्ष्मीनारायण डाड के पुत्र हैं। इसके अलावा, माहेश्वरी केमिकल्स से जुड़े अनुज सोमानी के प्रतिष्ठानों पर भी तलाशी अभियान चलाया गया। प्रारंभिक जांच में 10 करोड़ रुपये से अधिक की जीएसटी चोरी सामने आई है, लेकिन अधिकारियों ने संकेत दिया है कि यह आंकड़ा जांच पूरी होने तक कहीं अधिक हो सकता है। दरअसल, फर्जी बिलिंग, इनवॉइसिंग और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के माध्यम से किए गए इस वित्तीय धोखाधड़ी का दायरा व्यापक प्रतीत हो रहा है, और इसकी जड़ें शहर के बाहर अन्य जिलों या राज्यों तक भी फैली हो सकती हैं।

डीजीजीआई की यह छापेमारी राजस्थान में अब तक की सबसे बड़ी टैक्स चोरी के मामलों में से एक मानी जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई काफी समय से जारी खुफिया निगरानी और विश्लेषण का परिणाम है। पिछले कुछ महीनों में भीलवाड़ा में कुछ व्यापारिक इकाइयों द्वारा जीएसटी रिटर्न दाखिल करने में असमानता, फर्जी आईटीसी क्लेम और बेहिसाब लेन-देन को लेकर एजेंसियों को संदेह था। खुफिया सूचनाओं की पुष्टि के बाद ही यह कार्रवाई की गई, जिसमें तकनीकी विश्लेषण और डेटा ट्रैकिंग का उपयोग किया गया।

विशेष बात यह है कि इस छापेमारी के दौरान आधुनिक डिजिटल फॉरेंसिक टूल्स की मदद ली गई, जिससे कंप्यूटर, मोबाइल, टैबलेट, सर्वर और क्लाउड स्टोरेज में संग्रहीत डेटा को तुरंत एक्सेस कर उसका विश्लेषण किया जा सका। इसमें कुछ ऐसे इनवॉइस और रिकॉर्ड्स भी मिले, जिनका न तो कोई भौतिक व्यापारिक आधार था और न ही वस्तुओं या सेवाओं का कोई वास्तविक आदान-प्रदान। इस तरह की “पेपर ट्रांजेक्शन” से जीएसटी क्रेडिट का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपये की चोरी की जा रही थी, जो स्पष्ट रूप से कर नियमों का उल्लंघन है।

यह पूरा प्रकरण दर्शाता है कि किस प्रकार कुछ व्यापारी समूह सुनियोजित तरीके से कर चोरी का तंत्र विकसित करते हैं। फर्जी फर्मों के नाम पर जीएसटी रजिस्ट्रेशन, बिना माल आपूर्ति के बिल जारी करना, आईटीसी का गलत क्लेम करना, और फिर उन पैसों को अन्य वैध लेन-देन में मिलाकर ब्लैक मनी को सफेद बनाना — यह सब एक जटिल आर्थिक अपराध का हिस्सा है। निखिल डाड और अनुज सोमानी जैसे स्थानीय रूप से प्रभावशाली नामों का इसमें शामिल होना यह भी बताता है कि जीएसटी चोरी केवल छोटे स्तर पर नहीं, बल्कि उच्च स्तर के नेटवर्क और राजनीतिक संरक्षण की संभावनाओं से भी जुड़ी हो सकती है।

भीलवाड़ा में डीजीजीआई की बड़ी छापेमारी, 10 करोड़ से अधिक की जीएसटी चोरी का खुलासा
भीलवाड़ा में डीजीजीआई की बड़ी छापेमारी, 10 करोड़ से अधिक की जीएसटी चोरी का खुलासा

छापेमारी के बाद शहर में तनाव का माहौल है, खासकर व्यापारिक समुदाय के बीच। बहुत से व्यापारी, जिनके संपर्क इन फर्मों या व्यक्तियों से रहे होंगे, अब जांच एजेंसियों के रडार पर आ सकते हैं। वहीं, कर विभाग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ऐसे मामलों में कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। विभागीय अधिकारियों ने मीडिया को बताया कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता। फर्मों की बैंक डिटेल्स, GST रिटर्न्स, ई-वे बिल, स्टॉक रजिस्टर, और अन्य कारोबारी दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है ताकि यह पता चल सके कि फर्जी बिलिंग की जड़ें कितनी गहरी हैं और किन-किन संस्थाओं को लाभ पहुंचाया गया है।

यह कार्रवाई राज्य सरकार और केंद्र सरकार के उस साझा दृष्टिकोण का भी हिस्सा है, जिसके तहत पूरे देश में जीएसटी अनुपालन को सख्ती से लागू करने और टैक्स चोरी को खत्म करने के लिए निरंतर अभियान चलाए जा रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में जीएसटी प्रणाली में आईटी आधारित ट्रैकिंग और एनालिटिक्स को शामिल किया गया है, जिससे अब बड़ी मात्रा में डेटा का विश्लेषण करके संदिग्ध गतिविधियों की पहचान संभव हो गई है। इसी तकनीकी ताकत का इस्तेमाल इस छापेमारी में किया गया, जिससे यह कार्रवाई इतनी सफल हो सकी।

DGGI ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी ऐसी सघन कार्रवाई की जाएगी, विशेषकर उन क्षेत्रों में जो कर चोरी के लिए कुख्यात हैं या जहां से लगातार इनपुट टैक्स क्रेडिट घोटालों की शिकायतें मिलती रही हैं। भीलवाड़ा, जो वस्त्र उद्योग के लिए जाना जाता है, वहां यह घटना काफी गंभीर मानी जा रही है, क्योंकि इससे व्यापारिक ईमानदारी और कर अनुपालन की छवि को ठेस पहुंची है। हालांकि, ऐसी कार्रवाइयों से यह उम्मीद भी जगी है कि सरकार टैक्स चोरी करने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपना रही है और ईमानदार करदाताओं को एक सुरक्षित और प्रतिस्पर्धी माहौल देने के लिए प्रतिबद्ध है।

छापेमारी के बाद जिन प्रतिष्ठानों की जांच हुई, उनमें से कई ने अब तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन जांच एजेंसियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दोषी पाए जाने वालों पर न केवल भारी जुर्माना लगाया जाएगा, बल्कि आवश्यकतानुसार गिरफ्तारी और आपराधिक मुकदमे भी दर्ज किए जाएंगे। यह कार्रवाई न केवल एक कर चोरी के मामले की जांच है, बल्कि यह एक उदाहरण स्थापित करने का प्रयास है कि सरकार किसी भी कीमत पर टैक्स चोरी बर्दाश्त नहीं करेगी।

अंततः, भीलवाड़ा की इस घटना ने यह प्रमाणित कर दिया है कि आधुनिक टेक्नोलॉजी और खुफिया तंत्र की मदद से अब कोई भी कर चोरी की योजना ज्यादा दिनों तक छिपाई नहीं जा सकती। जीएसटी जैसे एकीकृत कर प्रणाली की सफलता इसी में है कि इसका लाभ तभी मिलेगा जब सभी व्यापारी और उद्यमी ईमानदारी से इसका पालन करें। इस कार्रवाई ने यह भी दर्शाया है कि सरकार अब सजग है, और कोई भी कानून से ऊपर नहीं है — चाहे उसका सामाजिक, आर्थिक या राजनीतिक प्रभाव कितना ही बड़ा क्यों न हो। जांच के पूर्ण परिणाम आने तक और भी चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं, लेकिन यह निश्चित है कि यह कार्रवाई राजस्थान के जीएसटी इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगी।

जम्मू-कश्मीर के उरी में दो आतंकवादी मारे गए, घुसपैठ की कोशिश नाकाम

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जम्मू-कश्मीर में आतंकी घुसपैठ की कोशिशें और सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई

जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले के गुरेज सेक्टर में 28 अगस्त को नियंत्रण रेखा (LoC) पर आतंकियों की एक और घुसपैठ की कोशिश को भारतीय सेना ने नाकाम कर दिया। गुरेज सेक्टर के नौशहरा नार्द इलाके में हुई इस घटना में सेना ने दो आतंकियों को ढेर कर दिया। सेना द्वारा इलाके में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि और कोई आतंकी छिपा न हो या भाग न गया हो। इस तरह की घटनाएं दर्शाती हैं कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी संगठन लगातार जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ की कोशिशें कर रहे हैं, लेकिन भारतीय सेना की मुस्तैदी के कारण वे अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पा रहे हैं।

घुसपैठ की यह कोशिश कोई पहली नहीं थी। इससे कुछ ही दिन पहले, 25 अगस्त को बारामूला जिले के उरी सेक्टर में भी आतंकियों ने घुसपैठ का प्रयास किया था। उरी के तोरणा इलाके में आतंकियों की संदिग्ध गतिविधि देखकर नियंत्रण रेखा पर तैनात सैनिकों ने त्वरित कार्रवाई की। दोनों ओर से हुई गोलीबारी के बाद इलाके में व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया। सुरक्षा बलों का मकसद स्पष्ट था—किसी भी कीमत पर आतंकियों को भारतीय सीमा में घुसने नहीं देना। इस अभियान की सफलता ने यह साबित किया कि भारतीय सेना LoC पर किसी भी तरह की हरकत को नजरअंदाज नहीं करती और तत्काल जवाब देने की क्षमता रखती है।

इसके अलावा, 13 अगस्त को भी उरी सेक्टर में LoC के पास एक अन्य मुठभेड़ में एक भारतीय जवान शहीद हो गया था। इस घटना में आतंकवादी भारतीय क्षेत्र में घुसने की कोशिश कर रहे थे, जिसे सेना ने रोक दिया। इस मुठभेड़ से यह स्पष्ट होता है कि घुसपैठ की कोशिशें लगातार बनी हुई हैं और आतंकी संगठन भारत की सीमा में अशांति फैलाने के प्रयासों में लगे हुए हैं। हालांकि, भारतीय सेना और सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई के चलते इन मंसूबों को बार-बार विफल कर दिया जा रहा है।

घटनाओं की यह श्रृंखला इस बात का संकेत है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियां एक बार फिर तेज हो रही हैं, लेकिन इस बार सुरक्षा बलों की रणनीति और प्रतिक्रिया कहीं अधिक संगठित और प्रभावशाली है। केवल घुसपैठ रोकने तक ही कार्रवाई सीमित नहीं है, बल्कि अब पूरे आतंकी तंत्र को नष्ट करने की रणनीति अपनाई गई है। सेना और सुरक्षाबल आतंकियों के साथ-साथ उनके स्थानीय सहयोगियों (Over Ground Workers – OGWs) और समर्थकों को भी निशाना बना रहे हैं। यह व्यापक दृष्टिकोण केवल तत्काल खतरे से निपटने तक सीमित नहीं, बल्कि आतंकवाद की जड़ों को खत्म करने का प्रयास है।

इस अभियान को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का पूरा समर्थन प्राप्त है। वे लगातार सुरक्षा स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं और अधिकारियों को निर्देश दे रहे हैं कि आतंकी नेटवर्क को हर स्तर पर ध्वस्त किया जाए। उनका जोर इस बात पर है कि आतंकियों के पीछे मौजूद आर्थिक और सामाजिक तंत्र को तोड़ा जाए, जिससे आतंकवाद को पनपने का कोई आधार न मिल सके। उनके निर्देश पर सुरक्षा एजेंसियां हवाला नेटवर्क, ड्रग्स तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों पर भी पैनी नजर रखे हुए हैं, क्योंकि इन्हीं रास्तों से आतंकियों को वित्तीय सहायता मिलती है।

जम्मू-कश्मीर के उरी में दो आतंकवादी मारे गए, घुसपैठ की कोशिश नाकाम
जम्मू-कश्मीर के उरी में दो आतंकवादी मारे गए, घुसपैठ की कोशिश नाकाम

खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा बलों ने बीते कुछ महीनों में कई हवाला रैकेट और ड्रग्स की तस्करी से जुड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इन नेटवर्क के तार सीधे सीमा पार बैठे आतंकी सरगनाओं से जुड़े हुए पाए गए। इसका मतलब यह है कि न केवल हथियार, बल्कि पैसा और नशा भी आतंकवाद के लिए एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल हो रहा है। इसलिए अब सुरक्षा एजेंसियां इन अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए खास रणनीति के तहत काम कर रही हैं। सीमावर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है और संदेहास्पद गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है।

इस तरह के समन्वित प्रयासों का उद्देश्य स्पष्ट है—केवल आतंकियों को मार गिराना नहीं, बल्कि उस व्यवस्था को खत्म करना जो उन्हें ताकत देती है। सुरक्षा बलों का यह दृष्टिकोण पहले की अपेक्षा कहीं अधिक व्यापक और रणनीतिक है। अब आतंकी घटनाओं के बाद केवल जवाबी कार्रवाई नहीं होती, बल्कि पहले से खुफिया जानकारी के आधार पर प्री-एम्पटिव स्ट्राइक यानी पूर्व-कार्रवाई भी की जा रही है। स्थानीय युवाओं को आतंकवाद की राह पर जाने से रोकने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। शिक्षा, रोजगार और पुनर्वास के कार्यक्रमों को सक्रिय किया गया है ताकि युवाओं को सकारात्मक दिशा में मोड़ा जा सके।

कुल मिलाकर, जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा हालात भले चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन अब सुरक्षा एजेंसियां और सरकार मिलकर न केवल आतंकवाद से निपटने में जुटी हैं, बल्कि उसके मूल स्रोतों को भी खत्म करने की दिशा में काम कर रही हैं। आए दिन होने वाली घुसपैठ की कोशिशें बताती हैं कि खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है, लेकिन सेना और सुरक्षाबलों की तत्परता और संगठित रणनीति इस बात का संकेत देती है कि आतंकवाद को जड़ से मिटाने की कोशिशों में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। इस दिशा में राजनीतिक नेतृत्व, प्रशासन और सुरक्षा बलों के बीच तालमेल भी मजबूत हुआ है, जिससे आतंकियों और उनके समर्थकों को कहीं भी सुरक्षित पनाह नहीं मिल पा रही।

जम्मू-कश्मीर की जनता भी अब धीरे-धीरे समझने लगी है कि शांति और विकास के लिए आतंकवाद का खत्म होना जरूरी है। स्थानीय समुदायों में जागरूकता बढ़ रही है, और वे सुरक्षा बलों के प्रयासों को सहयोग भी दे रहे हैं। यह एक सकारात्मक संकेत है जो बताता है कि सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की रणनीति न केवल सामरिक दृष्टिकोण से सही है, बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी प्रभावी सिद्ध हो रही है। यदि इसी तरह निरंतरता बनी रही, तो आने वाले वर्षों में जम्मू-कश्मीर एक बार फिर स्थायी शांति और विकास की राह पर अग्रसर हो सकेगा।