
रफीगंज (बिहार), 29 अगस्त 2025:
पंडित दीनदयाल उपाध्याय-गया रेलखंड पर स्थित रफीगंज रेलवे स्टेशन के पास एक दुखद और हृदयविदारक घटना सामने आई है। पोल संख्या 506/7 और 506/9 के बीच एक 16 वर्षीय किशोरी की ट्रेन की चपेट में आने से मौके पर ही मौत हो गई। यह हादसा उस समय हुआ जब वह रेलवे ट्रैक पार कर रही थी। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर अफरातफरी मच गई। रफीगंज रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और स्थानीय पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए डेहरी ऑन सोन भेज दिया गया।
मृतका की नहीं हो सकी पहचान, पहनावे के आधार पर तलाश जारी
पुलिस के अनुसार मृत किशोरी की उम्र लगभग 16 वर्ष आंकी जा रही है। हालांकि, उसकी पहचान अभी तक नहीं हो सकी है। किशोरी ने सफेद और नीले रंग का टॉप और काले रंग की लेगिंग्स पहन रखी थी। RPF के एएसआई अविनाश कुमार और आरक्षी अनिल यादव ने घटनास्थल पर पहुंच कर शव की जांच की और प्रारंभिक कानूनी प्रक्रिया पूरी की। पहचान न हो पाने के कारण पुलिस आस-पास के गांवों और रफीगंज क्षेत्र के थानों में गुमशुदगी की शिकायतों से जानकारी जुटा रही है। साथ ही, लोगों से अपील की गई है कि यदि कोई भी व्यक्ति इस किशोरी को पहचानता हो तो वह तुरंत पुलिस से संपर्क करे।
रेलवे ओवरब्रिज बना मौत का कारण, पैदल यात्रियों के लिए कोई इंतजाम नहीं
स्थानीय ग्रामीणों ने इस हादसे के पीछे रेलवे ओवरब्रिज की खामियों को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि जब से रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण हुआ है, तब से पैदल यात्रियों के लिए कोई सीढ़ी या फुटपाथ की व्यवस्था नहीं की गई है। इसके चलते स्थानीय लोग रेलवे ट्रैक पार करने को मजबूर हैं, जो आए दिन दुर्घटनाओं को न्योता दे रहा है। रफीगंज रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की अच्छी-खासी आवाजाही होती है, लेकिन बुनियादी संरचना की कमी ने आम लोगों की जान को जोखिम में डाल दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि रेलवे ने फुट ओवर ब्रिज पर पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित और सुलभ रास्ता बनाया होता, तो ऐसी घटनाएं रोकी जा सकती थीं। रेलवे ट्रैक के दोनों ओर के गांवों और बस्तियों के लोग रोजाना ट्रैक पार करते हैं, क्योंकि वैकल्पिक मार्ग नहीं होने के कारण ट्रैक ही उनके लिए एकमात्र रास्ता बन गया है।

स्थानीय प्रशासन और रेलवे की लापरवाही पर उठे सवाल
यह हादसा रफीगंज क्षेत्र में रेलवे प्रशासन की लापरवाही को उजागर करता है। स्थानीय लोग बार-बार इस मुद्दे को उठाते आ रहे हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। रेलवे ने केवल ओवरब्रिज बनाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली, लेकिन पैदल यात्रियों के लिए सीढ़ी, रैंप या अंडरपास की कोई व्यवस्था नहीं की। इसके चलते लोगों को जान जोखिम में डालकर रेल पटरी पार करनी पड़ती है।
स्थानीय समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों ने इस घटना को लेकर गहरा शोक व्यक्त किया है और रेलवे प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द पैदल यात्रियों के लिए वैकल्पिक रास्ते बनाए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
रेलवे ट्रैक पर सुरक्षा के नाम पर केवल खानापूर्ति
रेलवे ट्रैक पर लोगों की सुरक्षा के लिए रेलवे द्वारा बनाए गए नियम केवल कागजों तक ही सीमित हैं। रफीगंज जैसे छोटे स्टेशनों पर जहां बड़ी संख्या में पैदल यात्री ट्रैक पार करते हैं, वहां सुरक्षा उपाय न के बराबर हैं। न कोई गार्ड, न ही चेतावनी बोर्ड और न ही ट्रैक पर निगरानी। ट्रेनों की तेज गति और यात्री की लाचारी मिलकर हर कुछ हफ्तों में किसी न किसी की जान ले लेते हैं। लेकिन इसके बावजूद रेलवे और स्थानीय प्रशासन की आंखें नहीं खुलतीं।
इस प्रकार की घटनाओं के बाद भी जब तक उच्च अधिकारियों पर दबाव नहीं बनाया जाता या मीडिया में जोरदार कवरेज नहीं होती, तब तक कोई भी ठोस पहल सामने नहीं आती। यह स्थिति देश के रेलवे नेटवर्क की चिंताजनक सच्चाई को दर्शाती है।
किशोरी की मौत से ग्रामीणों में शोक की लहर
घटना के बाद रफीगंज और आसपास के इलाकों में शोक की लहर फैल गई है। विशेष रूप से महिलाएं और किशोरियां इस घटना से काफी आहत हैं। लोगों ने इस बात पर भी चिंता जताई कि यदि पीड़िता की पहचान नहीं हो पाई तो उसका अंतिम संस्कार कौन करेगा? क्या वह परिवार से बिछड़ी हुई थी? क्या वह कहीं से भागकर आई थी? इस तरह के अनगिनत सवाल लोगों के मन में उठ रहे हैं।
स्थानीय प्रशासन और पुलिस की जिम्मेदारी बनती है कि वे इस मामले की हर संभव तरीके से जांच करें और यदि किसी परिवार की बेटी लापता है तो उन्हें इस खबर की जानकारी दी जाए।
मीडिया और सामाजिक संगठनों की जिम्मेदारी
इस तरह की घटनाओं को केवल एक छोटी खबर समझ कर छोड़ देना समस्या को और बढ़ाता है। मीडिया और सामाजिक संगठनों को चाहिए कि वे इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएं और रेलवे व प्रशासन को कठघरे में खड़ा करें। एक किशोरी की जान गई है, और इसके पीछे लापरवाह व्यवस्थाएं जिम्मेदार हैं। यदि इस बार भी जिम्मेदारों को नहीं झकझोरा गया, तो अगली मौत किसी और की बेटी की हो सकती है।
निष्कर्ष
रफीगंज रेलवे स्टेशन पर हुई इस दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना ने एक बार फिर रेलवे संरचनाओं की असफलता और प्रशासनिक लापरवाही को उजागर कर दिया है। किशोरी की मौत एक चेतावनी है कि अब और देरी नहीं की जा सकती। रेलवे को चाहिए कि वह जनसंख्या की वास्तविक जरूरतों को समझे और ट्रैक पार करने वाले पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित विकल्प प्रदान करे। वहीं, प्रशासन को भी स्थानीय लोगों की मांगों पर ध्यान देना चाहिए और जरूरत पड़ने पर राज्य सरकार से मदद लेकर उचित कदम उठाना चाहिए।
जब तक रेलवे ट्रैक पर मानवीय दृष्टिकोण से सोचकर व्यवस्थाएं नहीं की जाएंगी, तब तक ऐसे हादसे रुकने की उम्मीद नहीं की जा सकती। अब समय आ गया है कि इस दिशा में ठोस और समयबद्ध कार्रवाई की जाए, ताकि रफीगंज जैसी त्रासदी दोबारा न हो।



















