
हरियाणा में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के अंतर्गत राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB), पंचकूला ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए दो पुलिस अधिकारियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई पुलिस विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करने वाली है और सरकार की “भ्रष्टाचार मुक्त हरियाणा” नीति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
यह मामला अंबाला जिले से संबंधित है, जहां शिकायतकर्ता के खिलाफ 21 अगस्त 2023 से भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, अंबाला में एक शिकायत लंबित थी। इस शिकायत को बंद करवाने के एवज में तत्कालीन पुलिस निरीक्षक सोमेश कुमार और ईएचसी (एग्जीक्यूटिव हैड कांस्टेबल) अशोक कुमार ने शिकायतकर्ता से एक लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी। शिकायतकर्ता ने जब इस गैरकानूनी मांग को लेकर आपत्ति जताई और इसकी जानकारी संबंधित विभाग को दी, तो विजिलेंस टीम ने तत्काल हरकत में आते हुए एक सुनियोजित योजना के तहत दोनों पुलिसकर्मियों को रंगे हाथ पकड़ने की कार्रवाई की।
राज्य सतर्कता ब्यूरो, पंचकूला की टीम ने पूरी रणनीति बनाकर ACB कार्यालय, अंबाला में एक जाल बिछाया। योजना के अनुसार, जैसे ही शिकायतकर्ता ने पुलिस निरीक्षक सोमेश कुमार और ईएचसी अशोक कुमार को 1 लाख रुपये की नकद राशि सौंपी, विजिलेंस टीम ने तत्परता दिखाते हुए दोनों आरोपियों को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी न केवल तीव्र कार्रवाई का उदाहरण है, बल्कि इस बात का भी प्रमाण है कि अब कोई भी अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग कर आम जनता को मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित नहीं कर सकता।
गिरफ्तारी के बाद, आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। जांच के बाद, अब राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने अंबाला की माननीय न्यायालय में चालान पेश कर दिया है, जिससे आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।
सरकार का सख्त रुख और संदेश
इस कार्रवाई से साफ हो गया है कि हरियाणा सरकार और राज्य सतर्कता ब्यूरो भ्रष्टाचार के मामलों को किसी भी सूरत में नजरअंदाज नहीं करेंगे। यह केस दर्शाता है कि भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों के खिलाफ चाहे वे किसी भी विभाग से संबंधित हों, बिना किसी भेदभाव के कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई के जरिए आम जनता में यह संदेश भी गया है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा रिश्वत की मांग की जाती है, तो इसकी शिकायत करने पर उन्हें न्याय मिल सकता है।
राज्य सतर्कता ब्यूरो की यह सक्रियता न केवल पुलिस विभाग की कार्यशैली में सुधार लाने का काम करेगी, बल्कि अन्य सरकारी विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए भी एक चेतावनी होगी कि भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने पर उनके खिलाफ भी इसी प्रकार की कठोर कार्रवाई की जाएगी।

भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति
राज्य सरकार पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई गई है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कई बार यह दोहराया है कि जनता से रिश्वत मांगने, फाइल अटकाने या जबरन पैसे वसूलने जैसी प्रवृत्तियों को अब किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी दिशा में विजिलेंस ब्यूरो को और अधिक अधिकार और संसाधन दिए गए हैं, जिससे ऐसे मामलों पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
पुलिस विभाग की छवि पर असर
यह घटना निश्चित रूप से हरियाणा पुलिस की छवि पर एक प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है। जब कानून के रखवाले ही कानून तोड़ने लगें, तो आम जनता का व्यवस्था पर से विश्वास डगमगाने लगता है। हालांकि, यह भी सत्य है कि हर विभाग में कुछ अपवाद होते हैं और ऐसे ही अपवादों की पहचान कर उन्हें बाहर करना ही व्यवस्था की शुद्धता बनाए रखने का एकमात्र रास्ता है। विजिलेंस की इस कार्रवाई से यह संकेत भी गया है कि पुलिस विभाग भी खुद को स्वच्छ और पारदर्शी बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
आगे की कानूनी प्रक्रिया
अब जबकि चालान कोर्ट में दाखिल हो चुका है, मामले की सुनवाई शीघ्र शुरू होने की उम्मीद है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो दोनों पुलिसकर्मियों को कठोर दंड मिलना तय है, जिससे अन्य अधिकारियों के लिए एक उदाहरण स्थापित होगा। इससे पहले भी विजिलेंस ब्यूरो कई उच्चस्तरीय अधिकारियों को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर चुका है, जिससे यह साफ हो गया है कि भ्रष्टाचार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
जनता की भागीदारी भी जरूरी
भ्रष्टाचार से लड़ाई केवल सरकारी एजेंसियों तक सीमित नहीं रह सकती। आम नागरिकों को भी जागरूक होकर भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठानी होगी। विजिलेंस विभाग ने भी नागरिकों से अपील की है कि यदि उनसे कोई रिश्वत मांगता है, तो वे तुरंत शिकायत दर्ज कराएं। विभाग की वेबसाइट, हेल्पलाइन नंबर और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी शिकायतें की जा सकती हैं।
निष्कर्षतः, राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो पंचकूला की इस कार्रवाई ने एक बार फिर सिद्ध किया है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो और तंत्र सजग हो, तो भ्रष्टाचार जैसी गंभीर समस्या पर काबू पाया जा सकता है। आम जनता को अब यह भरोसा हो चला है कि यदि वे अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाते हैं, तो उन्हें न्याय जरूर मिलेगा। इस मामले में कोर्ट द्वारा जल्द सुनवाई कर दोषियों को कड़ी सजा देने की अपेक्षा है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया पर भी जनता का विश्वास और मजबूत हो सके।



















