
हिसार, 5 सितंबर 2025
हरियाणा के हिसार जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक अहम कानूनी कार्यवाही में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (State Vigilance and Anti-Corruption Bureau) की जांच और कानूनी कार्रवाई के चलते शिक्षा विभाग में कार्यरत एक क्लर्क को रिश्वत लेने के मामले में दोषी ठहराते हुए अदालत ने 3 साल की सजा और ₹20,000 का जुर्माना सुनाया है।
यह फैसला हिसार की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायालय द्वारा सुनाया गया, जिससे यह संदेश गया है कि सरकारी महकमे में भ्रष्टाचार को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मामला कब और कैसे सामने आया?
यह पूरा मामला 1 अगस्त 2018 का है। एक शिकायतकर्ता ने हिसार के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय में चपरासी के पद पर डी.सी. रेट (डिप्टी कमिश्नर रेट) के तहत अस्थायी नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। लेकिन इस प्रक्रिया के दौरान उसे क्लर्क के पद पर कार्यरत संजय कुमार प्रकाश द्वारा रिश्वत देने का दबाव डाला गया।
शिकायतकर्ता के अनुसार, संजय कुमार ने उससे नौकरी लगाने के बदले ₹50,000 की रिश्वत की मांग की थी। बातचीत के दौरान संजय ने पहले ₹40,000 अग्रिम, और शेष ₹10,000 काम हो जाने के बाद देने की शर्त रखी थी।
सतर्कता ब्यूरो की योजना और गिरफ्तारी
शिकायत मिलते ही राज्य सतर्कता ब्यूरो हिसार ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। उन्होंने शिकायतकर्ता से पूरी जानकारी लेकर एक ट्रैप ऑपरेशन (पकड़ो और रंगे हाथों पकड़ो योजना) तैयार किया। सतर्कता टीम ने शिकायतकर्ता को विशेष रूप से चिन्हित किए गए नोटों के साथ आरोपी के पास भेजा।
जैसे ही संजय कुमार ने शिकायतकर्ता से ₹40,000 की रिश्वत की राशि स्वीकार की और ली, टीम ने मौके पर दबिश देकर आरोपी को रंगे हाथों पकड़ लिया। आरोपी के पास से सारे चिन्हित नोट भी बरामद किए गए, जिससे आरोप स्पष्ट रूप से सिद्ध हो गया।
न्यायिक प्रक्रिया और सजा
वर्ष 2018 से अब तक इस मामले की सुनवाई हिसार की अदालत में चल रही थी। अभियोजन पक्ष ने पुख्ता सबूतों, गवाहों और घटनाक्रम के आधार पर अदालत के समक्ष यह सिद्ध किया कि आरोपी संजय कुमार ने अपने सरकारी पद का दुरुपयोग करते हुए निजी लाभ के लिए रिश्वत ली।

अंततः, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने आरोपी को दोषी मानते हुए उसे 3 वर्ष का कठोर कारावास और ₹20,000 का जुर्माना भरने की सजा सुनाई। अदालत ने अपने निर्णय में यह भी कहा कि भ्रष्टाचार जैसे अपराध समाज के लिए कैंसर के समान हैं, और इन पर कठोर दंड आवश्यक है ताकि एक सशक्त, पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासनिक प्रणाली को सुनिश्चित किया जा सके।
न्यायिक टिप्पणी: “लोकसेवा नहीं, लाभ का केंद्र बना पद”
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट टिप्पणी की कि, “जिस सरकारी पद को समाज की सेवा के लिए सौंपा गया था, आरोपी ने उसे निजी लाभ का माध्यम बना लिया। यह जनता के भरोसे और लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ विश्वासघात है।”
परिवार और विभाग पर प्रभाव
संजय कुमार की सजा न केवल उसके व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित करेगी, बल्कि उसके परिवार पर भी इसका सीधा असर पड़ा है। एक स्थायी नौकरी, जिसकी बदौलत परिवार की आजीविका चल रही थी, अब खत्म हो चुकी है। साथ ही, शिक्षा विभाग में भी इस घटना को लेकर अधिकारियों के बीच चिंता की लहर है, क्योंकि यह विभाग की छवि को धूमिल करता है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
हिसार जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया दी है। अधिकारियों का कहना है कि विभाग भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रहा है। किसी भी कर्मचारी के भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी, चाहे उसका पद कोई भी हो।
राज्य सतर्कता ब्यूरो ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है और कहा है कि यह फैसला उन तमाम भ्रष्ट कर्मचारियों के लिए एक चेतावनी है जो अपने पद का दुरुपयोग करते हैं।
आम जनता के लिए संदेश
यह मामला उन तमाम आम नागरिकों के लिए भी एक उदाहरण बन गया है जो रिश्वत मांगने की घटनाओं से भय या संकोच के कारण चुप रहते हैं। अगर शिकायतकर्ता साहस न दिखाता और सतर्कता विभाग से संपर्क न करता, तो शायद यह मामला भी अन्य अनगिनत भ्रष्टाचार के मामलों की तरह दबा रह जाता।
यह सच्चाई है कि भ्रष्टाचार को समाप्त करने में केवल कानून या विभाग की जिम्मेदारी नहीं है — इसमें जनता की भूमिका सबसे अहम है। यदि नागरिक सजग और जागरूक रहें, तो किसी भी सरकारी विभाग में भ्रष्टाचार पनप नहीं सकता।



















