दिशा पाटनी के घर दो दिन हुई थी फायरिंग अब शूटर नकुल और विजय की तलाश में जुटी पुलिस, दोनों की तस्वीर हुई जारी

दिशा पाटनी के घर दो दिन हुई थी फायरिंग अब शूटर नकुल और विजय की तलाश में जुटी पुलिस, दोनों की तस्वीर हुई जारी

दिशा पाटनी के घर दो दिन हुई थी फायरिंग अब शूटर नकुल और विजय की तलाश में जुटी पुलिस, दोनों की तस्वीर हुई जारी
दिशा पाटनी के घर दो दिन हुई थी फायरिंग अब शूटर नकुल और विजय की तलाश में जुटी पुलिस, दोनों की तस्वीर हुई जारी

दिशा पाटनी के बरेली वाले घर में फायरिंग की घटना में शामिल रहे कुल 4 बदमाशों में से दो का एनकाउंटर बुधवार को गाजियाबाद में हुआ। इस मामले में बाकी बचे दो बदमाश अभी भी फरार हैं और दोनों की तलाश जोर-शोर से जारी है। खबर है कि बरेली पुलिस ने इन फरार बदमाशों के ऊपर 1-1 लाख रुपये का इनाम भी रख दिया है।

दिशा पाटनी के घर हाल ही में 12 सितंबर तो तड़के सुबह हुई फायरिंग की घटना में शामिल अरुण और रविंद्र नामक बदमाशों को ढेर कर दिया गया है। दिल्ली पुलिस और उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स ने गाजियाबाद के ट्रॉनिका सिटी इलाके में दोनों शूटरों को मार गिराया है। दिशा के घर में हमला करने वाले दो और आरोपी शूटर नकुल और विजय तोमर अभी भी फरार हैं।

दिशा के घर पहली बार फायरिंग 11 सितंबर को हुई थी
  • ‘यूपी आजतक’ की रिपोर्ट के मुताबिक, 10 सितंबर की शाम 6 बजे चारों बदमाश बरेली पहुंचे थे। ये दो अलग-अलग होटलों में रुके (होटल प्रीत और होटल हिंद)। बताया जाता है कि पहली बार फायरिंग 11 सितंबर को हुई थी, लेकिन इसके बारे में पता नहीं चल सका। 11 सितंबर को फायरिंग के बाद शूटर रामपुर में रुके थे। इसके बाद 12 सितंबर को ताबड़तोड़ फायरिंग के बाद बरेली से रामपुर होते चारों शूटर फरार हो गए थे। यानी कहा जा रहा है कि दिशा पाटनी के घर पर दो बार 11 और 12 सितंबर के दिन फायरिंग हुई थी।
अगले दिन अरुण और रविंद्र ने फायरिंग की
  • बताया जा रहा है कि पहले दिन यानी 11 सितंबर की एक्ट्रेस के घर पर फायरिंग में बागपत के रहने वाले नकुल और विजय तोमर शामिल थे। जिन दो रविंद्र और अरुण का एनकाउंटर किया गया है वे तब बैकअप में थे। पहले दिन जब नकुल और विजय ने फायरिंग की तो जल्दबाजी में एक फायर कर आगे भाग निकले थे और लोगों को पता नहीं लग पाया। जब इस घटना ने तूल नहीं पकड़ा तो अगले दिन अरुण और रविंद्र ने फायरिंग की।
दिशा पाटनी के घर दो दिन हुई थी फायरिंग अब शूटर नकुल और विजय की तलाश में जुटी पुलिस, दोनों की तस्वीर हुई जारी
दिशा पाटनी के घर दो दिन हुई थी फायरिंग अब शूटर नकुल और विजय की तलाश में जुटी पुलिस, दोनों की तस्वीर हुई जारी
वे चारों शूटर दो बाइक से रामपुर पहुंचे
  • रिपोर्ट में बताया गया है कि इस घटना के बाद वे चारों शूटर दो बाइक से रामपुर पहुंचे। कहा जा रहा है कि नकुल और विजय तोमर सुपर स्प्लेंडर बाइक पर थे और वहीं जबकि एनकाउंटर में मारे गए रविंद्र और अरुण अपाचे बाइक पर थे।
दिल्ली पुलिस ने नकुल और विजय की तस्वीरें जारी की
  • बता दें कि दिल्ली पुलिस ने नकुल और विजय की तस्वीरें जारी की हैं। खबर है कि गोलीबारी की ये सनसनीखेज घटना गैंगस्टर गोल्डी बरार और उसके विदेशी सहयोगी रोहित गोदारा की रची साजिश का हिस्सा थी।
पेट्रोल पंप पर लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हुए थे
  • दिशा पटानी के घर गोलीबारी मामले में एक बड़ा खुलासा करते हुए, दिल्ली पुलिस ने नकुल और विजय नाम के दो फरार शूटरों की तस्वीरें जारी की हैं, दोनों ने हमले से पहले इलाके की टोह ली थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, दोनों 9 सितंबर (मंगलवार) को बरेली के एक पेट्रोल पंप पर लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हुए थे और उनकी तलाश जारी है। जाँच से पता चलता है कि 6 से 12 सितंबर के बीच, शूटर तीन-चार बार बरेली आए थे, आखिरी बार 11 सितंबर को टोह ली गई और उसके बाद 12 सितंबर को गोलीबारी हुई।
उमर अंसारी की रातोंरात क्यों बदली गई जेल? गुपचुप तरीके से कासगंज ट्रांसफर हुआ मुख्तार का छोटा बेटा

उमर अंसारी की रातोंरात क्यों बदली गई जेल? गुपचुप तरीके से कासगंज ट्रांसफर हुआ मुख्तार का छोटा बेटा

उमर अंसारी की रातोंरात क्यों बदली गई जेल? गुपचुप तरीके से कासगंज ट्रांसफर हुआ मुख्तार का छोटा बेटा
उमर अंसारी की रातोंरात क्यों बदली गई जेल? गुपचुप तरीके से कासगंज ट्रांसफर हुआ मुख्तार का छोटा बेटा
गाजीपुर
  • माफिया और मऊ सदर के पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी के छोटे बेटे उमर अंसारी को गाजीपुर जिला जेल से कासगंज जेल स्थानांतरित किया गया है। उमर पर फर्जी दस्तावेज बनाकर संपत्ति बचाने और कोर्ट को गुमराह करने का गंभीर आरोप है। अदालत ने उमर की जमानत याचिका खारिज कर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
  • पुलिस के अनुसार उमर को लखनऊ के दारुलशफा क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया था। उस पर अपने पिता की जब्त संपत्ति को बचाने के लिए अपनी मां अफशां अंसारी के हस्ताक्षर से बने फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करने का आरोप है। गाजीपुर पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद उमर को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल में दाखिल किया था।उमर को गाजीपुर जेल की बैरक नंबर 10 में रखा गया था। इसी बैरक में कभी उसके पिता मुख्तार अंसारी को लंबे समय तक बंद रखा गया था। पिछले दिनों उमर के बड़े पिता और मुख्तार अंसारी के बड़े भाई वर्तमान में गाजीपुर के सांसद अफजाल अंसारी को भी एक मुकदमे के दौरान बैरक नंबर 10 में ही निरुद्ध रखा गया था। अदालत में पेशी के दौरान सबूतों के आधार पर उमर की जमानत खारिज हुई थी।
उमर अंसारी की रातोंरात क्यों बदली गई जेल? गुपचुप तरीके से कासगंज ट्रांसफर हुआ मुख्तार का छोटा बेटा
उमर अंसारी की रातोंरात क्यों बदली गई जेल? गुपचुप तरीके से कासगंज ट्रांसफर हुआ मुख्तार का छोटा बेटा
  • प्रशासन के अनुसार सुरक्षा कारणों से उमर को गाजीपुर जेल में लंबे समय तक रखना संभव नहीं था। इसलिए उसे कासगंज जेल भेजा गया। मालूम हो कि उमर के बड़े भाई अब्बास अंसारी और पिता मुख्तार अंसारी भी पहले गाजीपुर जेल की बैरक नंबर 10 में रह चुके हैं। उमर का कासगंज जेल स्थानांतरण अंसारी परिवार के खिलाफ चल रही सख्त कार्रवाई का हिस्सा माना जा रहा है।
  • इस घटनाक्रम ने गाजीपुर और आसपास के क्षेत्रों में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। चर्चा है कि उमर की गिरफ्तारी और जेल स्थानांतरण से अंसारी परिवार के राजनीतिक भविष्य पर असर पड़ सकता है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कानून सबके लिए बराबर है। इस मामले की जांच पूरी गंभीरता से की जा रही है।
एक माँ थी उसका एक बेटा था माँ-बेटे बड़े गरीब थे

एक माँ थी उसका एक बेटा था माँ-बेटे बड़े गरीब थे

एक माँ थी उसका एक बेटा था माँ-बेटे बड़े गरीब थे
एक माँ थी उसका एक बेटा था माँ-बेटे बड़े गरीब थे
एक दिन माँ ने बेटे से कहा – बेटा !!
  • यहाँ से बहुत दूर तपोवन में एक दिगम्बर मुनि पधारे हैं वे बड़े सिद्ध पुरुष हैं और महाज्ञानी हैं।
  • तुम उनके पास जाओ और पूछो कि हमारे ये दु:ख के दिन और कब तक चलेंगे। इसका अंत कब होगा।
  • बेटा घर से चला। पुराने समय की बात है, यातायात की सुविधा नहीं थी। वह पद यात्रा पर था।
  • चलते-चलते सांझ हो गई। गाँव में किसी के घर रात्रि विश्राम करने रुक गया।
  • सम्पन्न परिवार था। सुबह उठकर वह आगे की यात्रा पर चलने लगा तो घर की सेठानी ने पूछा – बेटा कहाँ जाते हो ?
  • उसने अपनी यात्रा का कारण सेठानी को बताया। तो सेठानी ने कहा – बेटा एक बात मुनिराज से मेरी भी पूछ आना कि मेरी यह इकलौती बेटी है, वह बोलती नहीं है। गूंगी है। वह कब तक बोलेगी ? तथा इसका विवाह किससे होगा ?
  • उसने कहा – ठीक है और वह आगे बढ़ गया।
  • रास्ते में उसने एक और पड़ाव डाला। अबकी बार उसने एक संत की कुटिया में पड़ाव डाला था।
  • विश्राम के पश्चात्‌ जब वह चलने लगा तो उस संत ने भी पूछा – कहाँ जा रहे हो ? उसने संत श्री को भी अपनी यात्रा का कारण बताया।
  • संत ने कहा – बेटा! मेरी भी एक समस्या है, उसे भी पूछ लेना।
  • मेरी समस्या यह है कि मुझे साधना करते हुए 50 साल हो गये। मगर मुझे अभी तक संतत्व का स्वाद नहीं आया। मुझे कब संतत्व का स्वाद आयेगा, मेरा कल्याण कब होगा। बस इतना सा पूछ लेना।
  • युवक ने कहा – ठीक है। और संत को प्रणाम करके आगे चल पड़ा।
  • युवक ने एक पड़ाव और डाला। अबकी बार का पड़ाव एक किसान के खेत पर था।
  • रात में चर्चा के दौरान किसान ने उससे कहा मेरे खेत के बीच में एक विशाल वृक्ष है। मैं बहुत परिश्रम और मेहनत करता हूँ, लेकिन उस बड़े वृक्ष के आस-पास दूसरे वृक्ष पनपते नहीं हैं। पता नहीं क्या कारण है।
  • किसान ने युवक से कहा – मेरी भी इस समस्या का समाधान कर लेना। युवक ने स्वीकृति में सिर हिला दिया और सुबह आगे बढ़ गया।
  • अगले दिन वह मुनिराज के चरणों में पहुँच गया। मुनिराज के दर्शन किये। दर्शन कर उसने अपने जीवन को धन्य माना।
  • मुनिराज से प्रार्थना की कि प्रभु! मेरी कुछ समस्याएं हैं, जिनका मैं समाधान चाहता हूँ। आप आज्ञा दें तो श्री चरणों में निवेदन करूं।
  • मुनि ने कहा – ठीक है !! मगर एक बात का विशेष ख्याल रखना कि तीन प्रश्न से ज्यादा मत पूछना। मैं तुम्हारे किन्हीं भी तीन प्रश्नों का ही समाधान दूंगा। इससे ज्यादा का नहीं।
  • युवक तो बड़े धर्म-संकट में फंस गया। अब क्या करूं, प्रश्न तो चार हैं. तीन कैसे पूछूं। तीन प्रश्न दूसरों के हैं और एक प्रश्न मेरा खुद का है।
  • अब किसका प्रश्न छोड़ दूं। क्या लड़की का प्रश्न छोड़ दूं ? नहीं, यह तो ठीक नहीं है, यह उसकी जिन्दगी का सवाल है।
  • तो क्या महात्मा के प्रश्न को छोड़ दूं ? यह भी नहीं हो सकता। तो क्या किसान का प्रश्न छोड़ दूं ? नहीं, यह भी ठीक नहीं है। बेचारा खून-पसीना एक करता है, तब भी उसे कुछ भी नहीं मिलता है।
  • अंत में काफी उहापोह के बाद उसने तय किया कि वह खुद का प्रश्न नहीं पूछेगा।
एक माँ थी उसका एक बेटा था माँ-बेटे बड़े गरीब थे
एक माँ थी उसका एक बेटा था माँ-बेटे बड़े गरीब थे
उसने अपना प्रश्न छोड़ दिया
  • शेष तीनों प्रश्नों का समाधान लिया और वापिस अपने घर की ओर चल दिया।
  • रास्ते में सबसे पहले किसान से मुलाकात हुई। किसान से युवक ने कहा – मुनिराज ने कहा है…
  • कि तुम्हारे खेत में जो विशाल वृक्ष है, उसके नीचे चारों तरफ सोने के कलश दबे हुए हैं। इसी कारण से तुम्हारी मेहनत सफल नहीं होती है।
  • किसान ने वहाँ खोदा तो सचमुच सोने के कलश निकले।
  • किसान ने कहा – बेटा यह धन-सम्पदा तेरे कारण से निकली है। इसलिए इसका मालिक भी तू है। और किसान ने वह सारा धन उस युवक को दे दिया। युवक आगे बढ़ा।
  • अब संत के आश्रम आया। संत ने पूछा – मेरे प्रश्न का क्या समाधान बताया है। युवक ने कहा – स्वामी जी! माफ करना मुनिराज ने कहा है कि आपने अपनी जटाओं में कोई कीमती मणि छुपा रखी है। जब तक आप उस मणि का मोह नहीं छोड़ेंगे, तब तक आपका कल्याण नहीं होगा।
  • साधु ने कहा – बेटा तू ठीक ही कहता है, सच में मैंने एक मणि अपनी जटाओं में छिपा रखी है, और मुझे हर वक्त इसके खो जाने का, चोरी हो जाने का भय बना रहता है।
  • इसलिए मेरा ध्यान भजन-सुमिरण में भी नहीं लगता। ले अब इसे तू ही ले जा, और साधु ने वह मणि उस युवक को दे दी।
  • युवक दोनों चीजों को लेकर फिर आगे बढ़ा। अब वह सेठानी के घर पहुँचा।
  • सेठानी दौड़ी-दौड़ी आई और पूछा – बेटा ! बोल क्‍या कहा है मुनिराज ने।
  • युवक ने कहा कि माँ जी मुनिजी ने कहा है कि तुम्हारी बेटी जिसको देखकर ही बोल पड़ेगी, वही इसका पति होगा।
  • अभी सेठानी और युवक की बात चल ही रही थी कि वह लड़की अन्दर से बाहर आई और उस युवक को देखते ही एकदम से बोल पड़ी।
  • सेठानी ने कहा – बेटा आज से तू इसका पति हुआ। मुनिराज की वाणी सच हुई। और उसने अपनी बेटी का विवाह उस युवक से कर दिया।
  • अब वह युवक धन, मणि और कन्या को साथ लेकर अपने घर पहुँचा।
  • माँ ने पूछा – बेटा तू आ गया। क्या कहा है मुनिश्री ने। कब हमें इन दु:खों से मुक्ति मिलेगी।
  • बेटा ने कहा – माँ मुक्ति मिलेगी नहीं, मुक्ति मिल गई। मुनिराज के दर्शन कर मैं धन्य हो गया। उनके तो दर्शन मात्र से ही जीवन के दु:ख, पीड़ाएं और दर्द खो जाते हैं
  • माँ ने पूछा – तो क्या मुनिराज ने हमारी समस्याओं का समाधान कर दिया है।
  • बेटे ने कहा – हाँ माँ ! मैंने तो अपनी समस्‍या उनसे पूछी ही नहीं और समाधान भी हो गया।
  • माँ ने पूछा वो कैसे
  • बेटे ने कहा -माँ मैंने सबकी समस्या को अपनी समस्या समझा तो मेरी समस्या का समाधान स्वत: हो गया।
  • जब दूसरों की समस्या अपनी खुद की समस्या बनने लगती है तो फिर अपनी समस्या कोई समस्या ही नहीं रहती।
  • जो दूसरों के लिए सोचता है। ईश्वर स्वयं उसके लिए करतें है।
हिट एंड रन : कार की टक्कर से बुजुर्ग की मौत, आरोपी गिरफ्तार

हिट एंड रन : कार की टक्कर से बुजुर्ग की मौत, आरोपी गिरफ्तार

हिट एंड रन : कार की टक्कर से बुजुर्ग की मौत, आरोपी गिरफ्तार
हिट एंड रन : कार की टक्कर से बुजुर्ग की मौत, आरोपी गिरफ्तार

जोधपुर। शहर के चौपासनी हाउसिंग बोर्ड थाना इलाके में हिट एंड रन का मामला सामने आया है। 14 सितंबर की रात पीएफ ऑफिस के सामने तेज रफ्तार कार ने पैदल जा रहे बुजुर्ग चंद्रशेखर गौड़ (60) को टक्कर मार दी। हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए चंद्रशेखर को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान 15 सितंबर को उनकी मौत हो गई।
मृतक के छोटे भाई लक्ष्मी नारायण गौड़ ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। रिपोर्ट में बताया गया कि 14 सितंबर की रात करीब 9 बजे उनके बड़े भाई चंद्रशेखर खाना खाकर टहलने के लिए घर से निकले थे। देर रात तक घर नहीं लौटने पर परिजनों ने तलाश की। इस दौरान पता चला कि वे सड़क हादसे में घायल होकर एम्स हॉस्पिटल में भर्ती हैं। अगले दिन उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।

हिट एंड रन : कार की टक्कर से बुजुर्ग की मौत, आरोपी गिरफ्तार
हिट एंड रन : कार की टक्कर से बुजुर्ग की मौत, आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, जिसमें हादसा कैद हुआ। जांच में सामने आया कि कार चालक पंकज सिंह राठौड़ है, जिसने हादसे के बाद मौके से फरार हो गया था। चौपासनी हाउसिंग बोर्ड थाना पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। बाद में उसे मुचलके पर जमानत देकर रिहा कर दिया गया।

थानाधिकारी ने बताया कि घटना में शामिल कार को जब्त कर लिया गया है। आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के आधार पर केस को मजबूत बनाने की तैयारी की

दिल्ली क्राइम ब्रांच की बड़ी सफलता, गैंगरेप केस में फरार घोषित अपराधी गिरफ्तार

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दिल्ली क्राइम ब्रांच की बड़ी सफलता, गैंगरेप केस में फरार घोषित अपराधी गिरफ्तार
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नई दिल्ली ।

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (डब्ल्यूआर-2) ने संगीन अपराधों में फरार घोषित अपराधियों पर शिकंजा कसते हुए एक बड़ी सफलता हासिल की है। टीम ने तिमारपुर के रहने वाले भरत को गिरफ्तार किया है। गैंगरेप के मामले में वह प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर (पीओ) घोषित था।
आरोपी के खिलाफ साल 2017 में थाना सुल्तानपुरी में एफआईआर संख्या 471/2017 दर्ज की गई थी, जिसमें धारा 323/376D/506 आईपीसी और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत गंभीर आरोप लगाए गए थे।

डब्ल्यूआर-2 क्राइम ब्रांच की टीम लंबे समय से दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में फरार और संगीन मामलों में लिप्त अपराधियों की तलाश कर रही थी। हेड कांस्टेबल अजय को एक पुख्ता सूचना मिली कि फरार अपराधी भारत अपने साथियों से मिलने राजपुरा रोड, एपीएल गेट के पास आने वाला है। सूचना के आधार पर इंस्पेक्टर सतीश मलिक के नेतृत्व में एसीपी राजपाल दबस की निगरानी में एक टीम गठित की गई। इस टीम में हेड कांस्टेबल अजय, संदीप और संदीप कादयान शामिल थे। मौके पर जाल बिछाया गया और आरोपी को घेरकर दबोच लिया गया।

दिल्ली क्राइम ब्रांच की बड़ी सफलता, गैंगरेप केस में फरार घोषित अपराधी गिरफ्तार
दिल्ली क्राइम ब्रांच की बड़ी सफलता, गैंगरेप केस में फरार घोषित अपराधी गिरफ्तार

पूछताछ के दौरान आरोपी भरत ने बताया कि वह तिमारपुर का रहने वाला है। वर्ष 2017 में उसने अपने साथियों के साथ मिलकर एक नाबालिग लड़की का अपहरण कर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और शारीरिक हमला भी किया। मामले के दर्ज होने के बाद उसे गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में उसे जमानत मिल गई।

सुनवाई के दौरान सजा के डर से आरोपी अदालत में पेश नहीं हुआ और फरार हो गया। इसके बाद वर्ष 2023 में अदालत ने उसे प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर घोषित कर दिया।

जानकारी के अनुसार, आरोपी भरत के खिलाफ 4 आपराधिक मामले दर्ज हैं।

इससे पहले, दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की ईआर-2 टीम ने 9 सितंबर को डेबिट कार्ड स्वैपिंग फ्रॉड में शामिल एक फरार अपराधी को गिरफ्तार किया था। आरोपी की पहचान कादिर उर्फ कादिर पुत्र नूर मोहम्मद के रूप में हुई थी, जो गाजियाबाद का रहने वाला है। आरोपी 2017 से फरार चल रहा था और 10 अप्रैल 2019 को अदालत द्वारा प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर घोषित किया गया था।

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने स्टॉक मार्केट फ्रॉड रैकेट का किया भंडाफोड़, दो गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने स्टॉक मार्केट फ्रॉड रैकेट का किया भंडाफोड़, दो गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने स्टॉक मार्केट फ्रॉड रैकेट का किया भंडाफोड़, दो गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने स्टॉक मार्केट फ्रॉड रैकेट का किया भंडाफोड़, दो गिरफ्तार

नई दिल्ली ।

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने करोड़ों रुपए के स्टॉक मार्केट फ्रॉड रैकेट का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर निवेशकों से फर्जी आईपीओ फंडिंग और स्टॉक मार्केट योजनाओं के नाम पर लगभग 6 करोड़ रुपए की ठगी का आरोप है।
आरोपियों की पहचान कुलवंत सिंह और देवेन्द्र सिंह के रूप में हुई है। दोनों आरोपी संगठित साइबर फ्रॉड सिंडिकेट्स के लिए अकाउंट होल्डर के रूप में काम करते थे।

इंस्पेक्टर मंजीत कुमार के नेतृत्व और एसीपी रमेश लांबा के पर्यवेक्षण में गठित टीम ने तकनीकी जांच के आधार पर इन आरोपियों को दबोचा। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने अपने बैंक खातों का उपयोग करके ठगी के पैसों को अलग-अलग खातों में घुमाया और मनी लॉन्ड्रिंग को आसान बनाया।

इन खातों में अखिल भारतीय गरीब जन सेवा ट्रस्ट का चालू खाता भी शामिल था, जिसके जरिए अब तक 20 लाख रुपए ट्रांजैक्ट होने की पुष्टि हुई है। यह ट्रस्ट विधिवत पंजीकृत एनजीओ के रूप में रजिस्टर्ड किया गया था और उसका खाता साइबर अपराधियों द्वारा शोषित किया गया। इस खाते से जुड़ी 10 शिकायतें नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज हैं।

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने स्टॉक मार्केट फ्रॉड रैकेट का किया भंडाफोड़, दो गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने स्टॉक मार्केट फ्रॉड रैकेट का किया भंडाफोड़, दो गिरफ्तार

आरोपी सोशल मीडिया और व्हाट्सएप के जरिए लोगों से संपर्क करते थे। फिर उन्हें एक फर्जी ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड करने के लिए उकसाते थे। निवेशकों को ऑनलाइन ग्रुप्स में जोड़कर नकली मुनाफा दिखाया जाता था। जब लोग अपने पैसे निकालने की कोशिश करते, तो धोखेबाज बहाने बनाकर या धमकाकर भुगतान रोक देते। ठगी के पैसे को कई बैंक खातों में घुमाकर उसका असली स्रोत छुपाया जाता था। आरोपी कुलवंत और देवेंद्र ने अपने ट्रस्ट के बैंक खाते इसके लिए दिए, जिसके बदले उन्हें हर महीने 30,000 रुपये और हर ट्रांजैक्शन पर 5% कमीशन मिलता था।

जांच में पता चला कि शिकायतकर्ता से करीब 6 करोड़ रुपये की ठगी हुई। पुलिस ने 30 बैंक खातों का पता लगाया, जिनमें एक ट्रस्ट का खाता मुख्य था। आरोपी पेशेवर तरीके से अकाउंट प्रोवाइडर के रूप में काम करते थे। उन्होंने ट्रस्ट रजिस्टर करवाकर जानबूझकर चालू खाते खोले ताकि पैसे का असली स्रोत छुपाया जा सके। इसके लिए उन्होंने ठगों को चेकबुक, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग की पूरी जानकारी दे दी थी।

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल का कहना है कि इन आरोपियों की गिरफ्तारी से संगठित साइबर अपराधियों की एक अहम कड़ी टूट गई है। आरोपियों के बैंक खाते पूरे भारत में पीड़ितों से लूटे गए पैसों को घुमाने और ठगने का प्रमुख जरिया बने हुए थे। आगे की जांच जारी है और पुलिस इस नेटवर्क के मास्टरमाइंड्स तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

Trap Gang : फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट से बचके रहना रे बाबा! सीकर में रेनुका चौधरी की गिरफ्तारी के बाद खुला शेखावाटी के हनी ट्रैप गिरोह का राज Trap Gang : फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट से बचके रहना रे बाबा! सीकर में रेनुका चौधरी की गिरफ्तारी के बाद खुला शेखावाटी के हनी ट्रैप गिरोह का राज

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सीकर
  • एक बुजुर्ग दिल बहलाने के लिए सोशल मीडिया पर आया। जान पहचान के लोगों को अपनी फेसबुक फ्रेंड लिस्ट में जोड़ा। सबकुछ ठीक चल रहा था तभी उसके पास एक युवती की फेसबुक फ्रेंड रिक्वेस्ट मिली। बुजुर्ग कुछ समझता तब तक युवती ने उसे शीशे में उतार चुकी थी। लाखों रुपये की चपत खाने के बाद उसने पुलिस की शरण ली। अब राजस्थान के सीकर जिले की धोद थाना पुलिस ने इस हनी ट्रैप गैंग का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गैंग की मास्टर माइंड महिला और उसकी सहयोगी को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दोनों ने एक बुजुर्ग को जाल में फंसाकर उससे लाखों रुपये ठग लिए। फिलहाल पुलिस गैंग के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हुई है।
मास्टर माइंड रेनुका चौधरी और सहयोगी गिरफ्तार
  • धोद थानाधिकारी राकेश मीणा ने बताया कि गिरफ्तार महिलाओं में रेनूका चौधरी निवासी धुंधा और सुविधा देवी निवासी रामपुरा शामिल हैं। शुरुआती जांच में सामने आया कि रेनूका इस पूरे गिरोह की मास्टर माइंड है। उसके खिलाफ पहले से भी एक मामला कोर्ट में लंबित है। पुलिस मान रही है कि दोनों महिलाएं लंबे समय से ठगी का नेटवर्क चला रही थीं।
Trap Gang : फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट से बचके रहना रे बाबा! सीकर में रेनुका चौधरी की गिरफ्तारी के बाद खुला शेखावाटी के हनी ट्रैप गिरोह का राज Trap Gang : फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट से बचके रहना रे बाबा! सीकर में रेनुका चौधरी की गिरफ्तारी के बाद खुला शेखावाटी के हनी ट्रैप गिरोह का राज
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फेसबुक से दोस्ती और ब्लैकमेलिंग का खेल
  • इस पूरे मामले की शिकायत पीड़ित रामकरण ने दर्ज कराई थी। उसने पुलिस को बताया कि रेनूका ने पहले फेसबुक पर उससे दोस्ती की और फिर वीडियो कॉलिंग के जरिए बातचीत शुरू की। इसके बाद उसने रामकरण का वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। आरोप है कि रेनूका ने उसे पॉक्सो एक्ट में फंसाने की धमकी देकर लाखों रुपये हड़प लिए।
सोने के जेवर और 12.90 लाख रुपये की ठगी
  • रामकरण ने बताया कि गैंग के दबाव में आकर उसे अपनी एक सोने की अंगूठी, एक सोने की चेन और 25 हजार रुपये नकद देने पड़े। इसके अलावा आरोपितों ने स्टांप पर लिखवाकर 12.90 लाख रुपये अपने खाते में ट्रांसफर कराए। पुलिस के मुताबिक, आरोपितों ने योजनाबद्ध तरीके से इस पूरी वारदात को अंजाम दिया।
सीकर पुलिस को गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश
  • पुलिस ने बताया कि अभी गिरोह के बाकी सदस्यों की पहचान की जा रही है। गिरफ्तार महिलाओं से पूछताछ के बाद अन्य साथियों की जानकारी जुटाई जाएगी। पुलिस का मानना है कि यह गिरोह और भी लोगों को अपने जाल में फंसा चुका हो सकता है। मामले की गहन जांच जारी है।
सहारनपुर में सिलेंडर भरा रेहड़ा पलटा, बच्ची की मौत:सहारनपुर में जल निगम की लापरवाही, लोगों में भारी आक्रोश

सहारनपुर में सिलेंडर भरा रेहड़ा पलटा, बच्ची की मौत:सहारनपुर में जल निगम की लापरवाही, लोगों में भारी आक्रोश

सहारनपुर में सिलेंडर भरा रेहड़ा पलटा, बच्ची की मौत:सहारनपुर में जल निगम की लापरवाही, लोगों में भारी आक्रोश
सहारनपुर में सिलेंडर भरा रेहड़ा पलटा, बच्ची की मौत:सहारनपुर में जल निगम की लापरवाही, लोगों में भारी आक्रोश

सहारनपुर के गंगोह कस्बे में जल निगम की लापरवाही ने एक मासूम बच्ची की जान ले ली। बुधवार को सराय इलाही बख्श मोहल्ले में गैस सिलेंडर से लदा एक रेहड़ा सड़क पर जल निगम द्वारा खोदी गई खाई में पलट गया। इस दुर्घटना में सिलेंडर तीन वर्षीय बच्ची पर गिर गए, जिससे उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।

मृत बच्ची की पहचान
  • मृत बच्ची की पहचान खालिद की पुत्री हुरेन के रूप में हुई है। यह हृदय विदारक घटना मौलाना रशीदी गंगोही मदरसे के पास घटी। स्थानीय लोगों का कहना है कि जल निगम ने पूरे कस्बे की सड़कों को खोदकर अधूरा छोड़ दिया है।
  • इसके चलते क्षेत्र में जगह-जगह गड्ढे और असमतल रास्ते बन गए हैं, जिससे आम लोगों को रोजाना भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।इस घटना के बाद इलाके में भारी आक्रोश फैल गया।
  • लोगों ने जल निगम पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया और कहा कि यदि समय रहते सड़कों की मरम्मत कर दी जाती, तो यह हादसा टल सकता था।
सहारनपुर में सिलेंडर भरा रेहड़ा पलटा, बच्ची की मौत:सहारनपुर में जल निगम की लापरवाही, लोगों में भारी आक्रोश
सहारनपुर में सिलेंडर भरा रेहड़ा पलटा, बच्ची की मौत:सहारनपुर में जल निगम की लापरवाही, लोगों में भारी आक्रोश
राजनीतिक प्रतिक्रिया
  • रालोद नेता हाजी सलीम कुरैशी मौके पर पहुंचे और घटना के लिए नगर पालिका, जल निगम और गैस एजेंसी वेंडर को जिम्मेदार ठहराया।उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो जनता आंदोलन के लिए मजबूर होगी।
  • नगर पालिका चेयरपर्सन प्रतिनिधि नोमान मसूद ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया।उन्होंने आश्वासन दिया कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।साथ ही जल निगम अधिकारियों को तत्काल सड़कों की मरम्मत के निर्देश भी दिए।

स्थानीय जनता की मांग

इस दर्दनाक हादसे ने संबंधित विभागों की लापरवाही को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोग प्रशासन से कस्बे की सड़कों की जल्द मरम्मत कराने, अधूरी परियोजनाओं को समय से पूरा करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए कड़े कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।

बच्चों के लिए खुले मैदान कहा ज्यादातर माता पिता के पास अपने बच्चों के लिए

बच्चों के लिए खुले मैदान कहा ज्यादातर माता पिता के पास अपने बच्चों के लिए

बच्चों के लिए खुले मैदान कहा ज्यादातर माता पिता के पास अपने बच्चों के लिए
बच्चों के लिए खुले मैदान कहा ज्यादातर माता पिता के पास अपने बच्चों के लिए
तीन दशक पहले ना तो मोबाइल हुआ करते थे
  • बस होते थे तो बच्चों के लिए..! दोस्ती या खेलों की वास्तविक दुनिया से कटते,आखिर कब लगेगी इन सट्टेबाज गमों पर लगाम..? आज ज्यादातर माता पिता के पास अपने बच्चों के लिए समय नहीं है और ना ही वो खेलने के लिए मैदान,एक समय था जब बच्चा स्कूल के साथ-साथ खेल की दुनिया में भी अपना नाम कमाता था और इससे बच्चों की ग्रोथ भी बढ़ती थी लेकिन आज ना तो बच्चों के लिए मैदान बचे ही नहीं है।इसके लिए आज किस को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है यह भी किसी से छुपा नही है! अब बच्चे सिर्फ मोबाइल पर ही जिंदगी की जिस्तुजू में लगे हुए हैं।करीब तीन दशक पहले ना तो मोबाइल हुआ करते थे बस होते थे
  • तो बच्चों के लिए खुले मैदान क्रिकेट फुटबॉल खेलने वे अन्य खेल लेकिन वह आज गुम हो गए हैं और आज डिजिटल होती दुनिया में कोई बच्चा जब स्मार्टफोन या कंप्यूटर में मशगूल रहने लगता है, तो उसके अभिभावकों की प्रथम दृष्टया धारणा यही बनती है कि वह तकनीक के उपयोग को लेकर बहुत तीक्ष्ण बुद्धि वाला है। मुश्किल तब होती है, जब तकनीक में बच्चों या किशोरों की यही व्यस्तता उनके विवेक और व्यक्तित्व पर बेहद घातक असर डालती है और कई बार जानलेवा भी साबित होती है।हालहि में लखनऊ में एक बच्चे को आनलाइन गेम की लत लग गई और अपने पिता के खाते में जमा तेरह लाख रुपए हार गया।
बच्चों के लिए खुले मैदान कहा ज्यादातर माता पिता के पास अपने बच्चों के लिए
बच्चों के लिए खुले मैदान कहा ज्यादातर माता पिता के पास अपने बच्चों के लिए
जब पिता को पता चला तो डर की वजह से किशोर ने आत्महत्या कर ली।
  • यह इस तरह की कोई अकेली घटना नहीं है। ऐसे अनेक मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें आनलाइन गतिविधियों में लिप्त कई बच्चों की पहुंच अपने घर के पैसों तक हो जाती है और गेम में डिजाइन किए गए लालच के जाल में फंस कर वे अपने माता-पिता की मेहनत से कमाए गए पैसे बाजी में हार जाते हैं। तकनीकी कौशल हासिल करना और अपना ज्यादातर वक्त उसमें खो देना अलग-अलग बातें हैं। आज किशोरावस्था से गुजर रहे ऐसे बच्चों की संख्या बहुत बड़ी हो चुकी है, जो अपनी पढ़ाई-लिखाई से लेकर खेल और मनोरंजन तक के लिए पूरी तरह डिजिटल संसाधनों पर निर्भर होते जा रहे हैं और दोस्ती या खेलों की वास्तविक दुनिया से कटते जा रहे हैं। इसी क्रम में कोई बच्चा इंटरनेट पर कब किस अवांछित गतिविधियों में अपना वक्त जाया करने लगता है, अभिभावकों को अंदाजा भी नहीं हो पाता।
  • आनलाइन गतिविधियों का लती हो चुका बच्चा जब किसी जानलेवा जंजाल में फंस जाता है, तब जाकर अभिभावक चिंतित होते हैं। मगर तब तक कई बार देर हो चुकी होती है। सवाल है कि इस तरह के अंजाम तक आने से पहले जिस तरह की स्थितियां बनती हैं, अभिभावकों को उन पर गौर करना, बच्चों को वक्त देना, उन्हें असली दुनिया में वापस लाना जरूरी क्यों नहीं लगता? वहीं सरकार ने भी जुए की तरह खेले जाने वाले आनलाइन खेलों की दुनिया को लगभग खुला छोड़ रखा है। नतीजतन, समाज से लेकर सरकार तक की बहुस्तरीय लापरवाही के शिकार हमारे मासूम हो रहे हैं।
जौनपुर इंस्टाग्राम पर आपत्तिजनक रील पोस्ट करने वाला युवक गिरफ्तार, समाज में वैमनस्य फैलाने की आशंका जौनपुर इंस्टाग्राम पर आपत्तिजनक रील पोस्ट करने वाला युवक गिरफ्तार, समाज में वैमनस्य फैलाने की आशंका

जौनपुर इंस्टाग्राम पर आपत्तिजनक रील पोस्ट करने वाला युवक गिरफ्तार, समाज में वैमनस्य फैलाने की आशंका

जौनपुर इंस्टाग्राम पर आपत्तिजनक रील पोस्ट करने वाला युवक गिरफ्तार, समाज में वैमनस्य फैलाने की आशंका जौनपुर इंस्टाग्राम पर आपत्तिजनक रील पोस्ट करने वाला युवक गिरफ्तार, समाज में वैमनस्य फैलाने की आशंका
जौनपुर इंस्टाग्राम पर आपत्तिजनक रील पोस्ट करने वाला युवक गिरफ्तार, समाज में वैमनस्य फैलाने की आशंका

उत्तर प्रदेश के जौनपुर

जनपद में एक बार फिर सोशल मीडिया पर भड़काऊ और आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। यह मामला थाना सरायख्वाजा क्षेत्र का है, जहां इंस्टाग्राम पर जाति विशेष के विरुद्ध आपत्तिजनक रील पोस्ट करने के मामले में स्थानीय पुलिस ने आरोपी को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई का नेतृत्व प्रभारी निरीक्षक जयप्रकाश यादव ने किया। उनके निर्देशन में गठित पुलिस टीम ने खजुरा गांव निवासी आशीष गौतम को हिरासत में लेकर उसके खिलाफ विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, युवक ने इंस्टाग्राम जैसे लोकप्रिय सोशल मीडिया मंच का उपयोग करते हुए एक ऐसी रील पोस्ट की थी, जिसमें एक विशेष जाति के खिलाफ आपत्तिजनक और भड़काऊ भाषा का प्रयोग किया गया था। इस तरह की पोस्ट से समाज में जातीय वैमनस्य फैलने की पूरी संभावना थी। जैसे ही यह पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हुई, वैसे ही पुलिस प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए तत्परता से जांच शुरू की और रील के स्रोत का पता लगाया गया। जांच में यह बात सामने आई कि रील खजुरा निवासी आशीष गौतम के अकाउंट से पोस्ट की गई थी। इसके बाद पुलिस टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया।

प्रभारी निरीक्षक जयप्रकाश यादव ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि समाज में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए सोशल मीडिया पर की जाने वाली गतिविधियों पर सतर्क निगरानी रखी जा रही है। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर या अनजाने में भी किसी जाति, धर्म या समुदाय के खिलाफ भड़काऊ या अपमानजनक सामग्री पोस्ट करता है, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई सिर्फ एक व्यक्ति के विरुद्ध नहीं है, बल्कि यह एक संदेश है कि समाज में नफरत और असहिष्णुता फैलाने वाली गतिविधियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया की स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं है कि कोई भी व्यक्ति बिना किसी ज़िम्मेदारी के कुछ भी पोस्ट कर सकता है। सोशल मीडिया एक ऐसा माध्यम बन गया है, जिससे समाज में तेजी से सूचनाएं फैलती हैं। यदि इस मंच का दुरुपयोग किया गया, तो इसके दुष्परिणाम व्यापक हो सकते हैं। विशेषकर जातीय और धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाली पोस्ट समाज के ताने-बाने को नुकसान पहुंचाती हैं और इससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस प्रशासन सोशल मीडिया पर सक्रिय निगरानी बनाए हुए हैइस गिरफ्तारी अभियान में प्रभारी निरीक्षक जयप्रकाश यादव के साथ उपनिरीक्षक खलिकुज्जमा सिद्दीकी और उनकी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। टीम ने पूरी सतर्कता और दक्षता के साथ तकनीकी जांच करते हुए आरोपी का पता लगाया और उसे हिरासत में लिया। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से यह संदेश गया है कि समाज में किसी भी तरह की अशांति फैलाने वाले तत्वों को बख्शा नहीं जाएगा। खासतौर पर युवा वर्ग को सोशल मीडिया पर सतर्कता और जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करने की सलाह दी गई है।

जौनपुर इंस्टाग्राम पर आपत्तिजनक रील पोस्ट करने वाला युवक गिरफ्तार, समाज में वैमनस्य फैलाने की आशंका जौनपुर इंस्टाग्राम पर आपत्तिजनक रील पोस्ट करने वाला युवक गिरफ्तार, समाज में वैमनस्य फैलाने की आशंका
जौनपुर इंस्टाग्राम पर आपत्तिजनक रील पोस्ट करने वाला युवक गिरफ्तार, समाज में वैमनस्य फैलाने की आशंका

आरोपी आशीष गौतम के खिलाफ विधिक धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है और उससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या यह पोस्ट किसी बड़ी साजिश का हिस्सा थी, या फिर आरोपी ने यह कार्य अकेले ही किया। साथ ही, आरोपी के सोशल मीडिया अकाउंट्स की विस्तृत जांच की जा रही है ताकि यह जाना जा सके कि उसने पहले भी इस प्रकार की कोई सामग्री पोस्ट की है या नहीं। यदि जांच में ऐसे और भी पोस्ट सामने आते हैं, तो उसके खिलाफ अतिरिक्त धाराएं लगाई जा सकती हैं।

इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि सोशल मीडिया की ताकत कितनी बड़ी है और यदि इसका प्रयोग सकारात्मक रूप में न हो, तो इसके परिणाम कितने खतरनाक हो सकते हैं। समाज में बढ़ती डिजिटल पहुंच और मोबाइल इंटरनेट के विस्तार ने युवाओं को अभिव्यक्ति की आज़ादी तो दी है, लेकिन इसके साथ ही उन्हें जिम्मेदार नागरिक की भूमिका भी निभानी होगी। यह आवश्यक है कि सोशल मीडिया का उपयोग विचार और संवाद के स्वस्थ माध्यम के रूप में किया जाए, न कि नफरत और भड़काऊ सामग्री फैलाने के लिए।

प्रशासन द्वारा यह भी अपील की गई है कि यदि किसी व्यक्ति को सोशल मीडिया पर कोई आपत्तिजनक, भड़काऊ, या समाज को विभाजित करने वाली सामग्री दिखे, तो उसकी सूचना तत्काल स्थानीय पुलिस को दी जाए, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके। साथ ही, युवाओं को जागरूक करने के लिए विभिन्न माध्यमों से अभियान चलाने की भी योजना बनाई जा रही है, जिससे वे सोशल मीडिया के प्रयोग में संयम और समझदारी का परिचय दें।

अंततः यह घटना एक चेतावनी है, न केवल आरोपी के लिए, बल्कि उन सभी के लिए जो सोशल मीडिया को हल्के में लेते हुए किसी भी प्रकार की सामग्री पोस्ट कर देते हैं। पुलिस प्रशासन की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट हो गया है कि जाति, धर्म, या समुदाय के नाम पर समाज में विद्वेष फैलाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। कानून सभी के लिए समान है, और उसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोरतम कदम उठाए जाएंगे।

इस पूरे घटनाक्रम से यह संदेश गया है कि सोशल मीडिया पर गतिविधियों को लेकर शासन और प्रशासन सजग है और किसी भी स्तर पर समाज की शांति भंग करने की कोशिश करने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया जाएगा। जौनपुर पुलिस की तत्परता और कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाले किसी भी व्यक्ति को अब तुरंत जवाब मिलेगा।