गाजियाबाद: 50000 का इनामी बदमाश बलराम ठाकुर पुलिस एनकाउंटर में ढेर, पश्चिमी यूपी में आतंक का अंत
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में 50000 के
इनामी बदमाश बलराम ठाकुर के साथ पुलिस की मुठभेड़ हुई है. आमने-सामने की चली गोली में बदमाश बलराम ठाकुर पुलिस की गोली से ढेर हो गया है. वहीं उसके तीन साथी मौके से फरार हो गए हैं, जबकि इस मुठभेड़ पुलिस के तीन कांस्टेबल घायल हुए हैं और दो अधिकारियों की बुलेटप्रूफ जैकेट में बदमाशों की गोली लगी है.
बलराम ठाकुर का पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आतंक था,
वह व्यापारियों से रंगदारी वसूलता था. हाल फिलहाल में कुछ दिनों में उसने गाजियाबाद के दो व्यापारियों से रंगदारी मांगी थी. उसी को लेकर पुलिस उसकी तलाश कर रही थी, पुलिस को सूचना मिली की बलराम अपने साथियों के साथ ईस्टर्न पेरिफेरल के पास से गुजरेगा. गाजियाबाद के पुलिस कमिश्नर जे रविंद्र गौड़ के मुताबिक पुलिस बलराम ठाकुर को रोकने के लिए तैयार थी.
गाजियाबाद: 50000 का इनामी बदमाश बलराम ठाकुर पुलिस एनकाउंटर में ढेर, पश्चिमी यूपी में आतंक का अंत
बदमाश के तीन साथी मौके से हुए फरार
इसी दौरान बलराम ठाकुर जब अपने साथियों के साथ आता दिखाई दिया तो पुलिस ने उसे रोकने का इशारा किया. मगर बलराम ठाकुर ने पुलिस पर फायरिंग कर दी, इस फायरिंग में पुलिस के तीन जवान मनोज कुमार, विशाल राठी और वरुण वीर घायल हुए हैं. जबकि एडीसीपी क्राइम पीयूष सिंह और स्वाट टीम प्रभारी अनिल राजपूत की बुलेट प्रूफ जैकेट में गोली लगी है. आमने-सामने की इस मुठभेड़ में जहां 50000 का इनामी बलराम ठाकुर मारा गया है, वहीं उसके तीन साथी मौके से फरार हो गए हैं.
लखनऊ ट्रामा सेंटर में नर्सिंग ऑफिसर पर जानलेवा हमला, मेडिकल स्टूडेंट्स के खिलाफ गंभीर आरोप
लखनऊ, 21 सितंबर 2025 — उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर में शनिवार देर रात एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जहाँ मेडिकल स्टूडेंट्स द्वारा एक नर्सिंग ऑफिसर पर जानलेवा हमला किए जाने का आरोप लगा है। इस घटना ने पूरे चिकित्सा समुदाय को हिला कर रख दिया है और स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
शराब के नशे में थे मेडिकल स्टूडेंट्स
प्रत्यक्षदर्शियों और अस्पताल के स्टाफ के अनुसार, यह घटना शनिवार देर रात लगभग 11:30 बजे की है। ट्रामा सेंटर के ऑर्थो ओटी (ऑर्थोपेडिक ऑपरेशन थिएटर) में ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग ऑफिसर शुभम पर मेडिकल कॉलेज के जूनियर रेजिडेंट्स (JR-1 और JR-2) ने अचानक हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि हमले के वक्त आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर्स शराब के नशे में थे।
चश्मदीदों के मुताबिक, पहले नर्सिंग ऑफिसर शुभम के साथ गाली-गलौज की गई और जब उन्होंने इसका विरोध किया तो स्टूडेंट्स ने उन्हें पीटना शुरू कर दिया। शुभम को गंभीर चोटें आई हैं और तत्काल उन्हें मेडिकल सहायता दी गई।
पुरानी रंजिश बनी हमले की वजह
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि शुभम और आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर्स के बीच कुछ दिन पहले किसी मुद्दे को लेकर बहस हुई थी। यह बहस इतनी तीव्र थी कि माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया था। उसी का बदला लेने के इरादे से शनिवार रात को यह हमला किया गया।
सूत्रों के अनुसार, आरोपी रेजिडेंट्स ने शुभम को अकेला पाकर ऑर्थो ओटी में घुसकर उन्हें बुरी तरह पीटा। यह पूरी घटना ट्रामा सेंटर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाती है, क्योंकि इतनी संवेदनशील जगह पर इस तरह की हिंसात्मक घटना का होना बेहद चिंताजनक है।
नर्सिंग ऑफिसर ने दी लिखित शिकायत
हमले के तुरंत बाद घायल शुभम ने ट्रामा सेंटर चौकी पर लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में शुभम ने मेडिकल स्टूडेंट्स द्वारा मारपीट, गाली-गलौज, और जान से मारने की धमकी देने की बात कही है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस का कहना है कि CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं और मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अस्पताल प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है। घटना के कई घंटे बाद भी कोई वरिष्ठ अधिकारी मीडिया के सामने नहीं आया और न ही कोई आंतरिक जांच की घोषणा की गई।
स्वास्थ्य कर्मियों और नर्सिंग स्टाफ का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब जूनियर डॉक्टर्स ने इस तरह का व्यवहार किया हो। अक्सर नर्सिंग स्टाफ को बदसलूकी और दबाव का सामना करना पड़ता है, लेकिन इस बार मामला हाथापाई और जानलेवा हमले तक पहुँच गया।
लखनऊ ट्रामा सेंटर में नर्सिंग ऑफिसर पर जानलेवा हमला, मेडिकल स्टूडेंट्स के खिलाफ गंभीर आरोप
नर्सिंग यूनियन में आक्रोश, हड़ताल की चेतावनी
इस घटना के बाद नर्सिंग यूनियन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। यूनियन के अध्यक्ष ने बयान जारी कर कहा, “हम इस अमानवीय हमले की कड़ी निंदा करते हैं। मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा को लेकर हम लंबे समय से मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन हर बार इसे नजरअंदाज करता रहा है।”
यूनियन ने चेतावनी दी है कि अगर दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई और भविष्य में ऐसे मामलों से निपटने के लिए ठोस नीति नहीं बनाई गई, तो वे कार्य बहिष्कार पर जा सकते हैं। यूनियन ने यह भी मांग की है कि सभी अस्पतालों में कार्यरत कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और CCTV कैमरों की संख्या और निगरानी को बढ़ाया जाए।
चिकित्सा समुदाय में गुस्सा और चिंता
इस घटना ने मेडिकल कॉलेज के अन्य स्टाफ में भी गहरी नाराजगी और चिंता पैदा कर दी है। डॉक्टर, नर्स, तकनीशियन और अन्य कर्मचारियों का कहना है कि अगर अस्पताल में ही सुरक्षाकर्मी और प्रशासन हमारी रक्षा नहीं कर सकते, तो हम कैसे निर्भय होकर मरीजों की सेवा करेंगे?कई डॉक्टरों और वरिष्ठ नर्सों ने इस मुद्दे पर खुलकर कहा कि ट्रेनी डॉक्टर्स का व्यवहार पिछले कुछ सालों में काफी बदल गया है। कई बार वे खुद को ‘अधिकार संपन्न’ समझकर बाकी स्टाफ के साथ दुर्व्यवहार करते हैं। इस घटना ने चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता और अनुशासन पर भी सवाल खड़े किए हैं।
क्या कहते हैं कानून और नियम?
सरकारी अस्पतालों और मेडिकल संस्थानों में कार्यरत कर्मियों की सुरक्षा को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों के दिशा-निर्देश पहले से मौजूद हैं। ‘हॉस्पिटल प्रोटेक्शन एक्ट’ जैसे कानून कई राज्यों में लागू हैं, लेकिन इनका क्रियान्वयन कमजोर है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल संस्थानों को अपने आंतरिक अनुशासन तंत्र को मज़बूत करने की आवश्यकता है। साथ ही ऐसे मामलों में ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनानी चाहिए ताकि भविष्य में कोई ऐसी घटना दोबारा न हो।
समाज और सरकार की भूमिका
इस तरह की घटनाएँ केवल एक कर्मचारी या एक विभाग की समस्या नहीं होती, यह पूरे समाज की संवेदनशीलता, हमारी संस्थाओं की जवाबदेही और शासन की तत्परता की परीक्षा होती हैं। जब अस्पताल जैसी जगहों पर भी लोग सुरक्षित नहीं हैं, तो यह सरकार और प्रशासन के लिए गंभीर चेतावनी होनी चाहिए।
सरकार को चाहिए कि वह जल्द से जल्द एक स्वतंत्र जांच समिति गठित करे जो इस मामले की निष्पक्षता से जांच कर सके और दोषियों को सजा दिला सके।
निष्कर्ष:
लखनऊ के मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर में हुए इस हमले ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा को लेकर हमारे संस्थान और प्रशासन कितने लापरवाह हैं। जब नर्सिंग ऑफिसर जैसी अहम कड़ी पर ही हमला हो सकता है, तो सामान्य मरीजों और उनके तीमारदारों की सुरक्षा की कल्पना करना भी कठिन है।
अब आवश्यकता है कि प्रशासन, सरकार, और समाज तीनों इस मुद्दे को गंभीरता से लें और स्वास्थ्य संस्थानों को एक सुरक्षित, अनुशासित और सम्मानजनक कार्यस्थल बनाने के लिए मिलकर काम करें।
मुख्तार के छोटे बेटे उमर अंसारी की बढ़ी मुश्किलें, पुलिस ने खोली हिस्ट्रीशीट दो दिन पहले ही मिली थी जमानत
गाजीपुर जिले में अपराध और माफिया नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई करते हुए थाना मुहम्मदाबाद पुलिस ने मरहूम माफिया मुख्तार अंसारी के छोटे बेटे उमर अंसारी की हिस्ट्रीशीट खोल दी है। हाल ही में उमर अंसारी को लखनऊ आवास से फर्जी हस्ताक्षर मामले में गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में फरार चल रही मुख्तार अंसारी की पत्नी आफ्सा अंसारी के नाम से फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए थे। दो दिन पूर्व ही इलाहाबाद हाईकोर्ट से उसे जमानत मिली थी, लेकिन जेल से बाहर आने से पहले ही पुलिस ने उसकी हिस्ट्रीशीट खोलकर नया पेंच फंसा दिया है। यह कार्रवाई सीधे तौर पर गाजीपुर पुलिस की अपराधियों और माफिया नेटवर्क पर शिकंजा कसने की रणनीति से जुड़ी मानी जा रही है।
IS-191 गैंग का सक्रिय सदस्य
पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक, उमर अंसारी IS-191 गैंग का सक्रिय सदस्य है। आरोप है कि वह कूट रचित दस्तावेजों के जरिए धोखाधड़ी से सार्वजनिक जमीनों पर कब्जा करता है। इसके साथ ही चुनाव के दौरान भड़काऊ भाषण देने और दिलवाने में भी शामिल रहता है। गाजीपुर, मऊ और लखनऊ में उस पर कई गंभीर मुकदमे दर्ज हैं। इनमें धोखाधड़ी, जालसाजी, सरकारी संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम, चुनावी अपराध और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम जैसी धाराएं शामिल हैं। उसके खिलाफ गाजीपुर के मुहम्मदाबाद थाने से लेकर मऊ और लखनऊ की अदालतों में कई मुकदमे विचाराधीन हैं।
मुख्तार के छोटे बेटे उमर अंसारी की बढ़ी मुश्किलें, पुलिस ने खोली हिस्ट्रीशीट दो दिन पहले ही मिली थी जमानत
खुफिया एजेंसियां भी अलर्ट
पुलिस सूत्रों के अनुसार, उमर अंसारी पर सख्ती से निगरानी रखना बेहद जरूरी था। हिस्ट्रीशीट खुलने के बाद अब उसकी हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जाएगी। खुफिया एजेंसियां भी उसकी गतिविधियों को लेकर अलर्ट हो चुकी हैं। जानकारों का मानना है कि हाई प्रोफाइल मुख्तार परिवार की निगरानी और उस पर लगातार कानूनी दबाव बढ़ाना पुलिस-प्रशासन की रणनीति का हिस्सा है। फिलहाल उमर अंसारी के लिए यह स्थिति बेहद मुश्किल बन चुकी है क्योंकि जमानत मिलते ही हिस्ट्रीशीट खुलने से उसकी राह और भी कठिन हो गई है।
‘उमर अंसारी के ऊपर सात मुकदमे दर्ज’
इस कार्रवाई को लेकर गाज़ीपुर पुलिस अधीक्षक डॉ ईरज राजा ने कहा कि उमर अंसारी के ऊपर सात मुकदमे दर्ज हैं, जो गाजीपुर समेत कई जनपदों में दर्ज हैं।
वाराणसी में वकील-पुलिस विवाद पर बैठक खत्म, मामले की होगी मजिस्ट्रियल जांच, इन बिंदुओं पर बनी सहमति
वाराणसी। वकीलों और पुलिस के बीच विवाद और दोनों पक्षों की ओर से मुकदमा कायम कराने को लेकर जिच को देखते हुए सामंजस्य बनाने के लिए प्रशासन ने पहल की। इस बाबत पत्र जारी कर दोनों पक्षों के शीर्ष अधिकारियों व पदाधिकारियों को शाम चार बजे बैठक में बुलाया गया।
इस बाबत पत्र में दोनों पक्षों को विषय से भी अवगत कराते हुए पत्र में पूर्व में सीएम और संबंधित जनों को अवगत कराने की भी सूचना दी गई थी। वहीं वकील-पुलिस विवाद पर सेंट्रल व बनारस बार एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक बाद पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने भी पूरे बैठक के फैसले से अवगत कराया। के पत्र का अवलोकन करें।
पत्र में उल्लेख किया गया था कि विगत दिनों अधिवक्ता और पुलिस के बीच उत्पन्न विवाद के संबंध में विचार-विमर्श किया जाएगा। इस संदर्भ में आज, 21 सितंबर 2025 को अपराह्न 4:00 बजे सर्किट हाउस सभागार वाराणसी में एक सामंजस्य बैठक का आयोजन किया गया है। इस बैठक में अधिवक्ता और पुलिस प्रशासन के बीच संवाद स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।अधिवक्तागण के सभी संबंधित सदस्यों से अनुरोध किया गया है कि वे इस बैठक में उपस्थित होकर अपनी राय प्रस्तुत करें। इस संदर्भ में राज्य विधिज्ञ परिषद उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को भी बैठक में प्रतिभाग करने के लिए आमंत्रित किया गया है। इसके अलावा, पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट वाराणसी को भी पत्र भेजकर बैठक में शामिल होने का अनुरोध किया गया था।
वाराणसी में वकील-पुलिस विवाद पर बैठक खत्म, मामले की होगी मजिस्ट्रियल जांच, इन बिंदुओं पर बनी सहमति
जिला मजिस्ट्रेट वाराणसी से भी अपेक्षा की गई थी कि वे इस महत्वपूर्ण बैठक में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं। यह बैठक अधिवक्ता और पुलिस के बीच उत्पन्न तनाव को कम करने और आपसी समझ को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इस प्रकार की बैठकें न केवल विवादों को सुलझाने में सहायक होती हैं, बल्कि यह भी सुनिश्चित करती हैं कि कानून और व्यवस्था बनाए रखने में सभी पक्षों की भागीदारी हो। वाराणसी में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए सभी संबंधित पक्षों का सहयोग आवश्यक है।
इस पत्र के माध्यम से जिला प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि वे अधिवक्ताओं और पुलिस के बीच सामंजस्य स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह बैठक इस दिशा में एक सकारात्मक पहल है, जिससे वाराणसी में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा सकेगा। इस प्रकार, सभी अधिवक्ताओं और पुलिस अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे इस बैठक में सक्रिय रूप से भाग लें और अपने विचार साझा करें, ताकि एक बेहतर और सुरक्षित वातावरण का निर्माण किया जा सके।
शहीद मेजर अप्रांत रौनक सिंह देशभक्ति, साहस और बलिदान की अमर गाथा
वाराणसी/प्रतापगढ़/बारामूला, 21 सितंबर 2025 –
कश्मीर के बारामूला जिले में तैनात भारतीय सेना के बहादुर अधिकारी मेजर अप्रांत रौनक सिंह शुक्रवार को ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जनपद के निवासी मेजर रौनक की शहादत की खबर जैसे ही सामने आई, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। 34 वर्षीय मेजर अप्रांत सिंह की दो साल पहले ही शादी हुई थी, और वह एक शांत, साहसी तथा निष्ठावान सैनिक के रूप में जाने जाते थे।
सेना ने दी शस्त्र सलामी, देश ने किया नमन
शनिवार की शाम शहीद मेजर का पार्थिव शरीर वाराणसी लाया गया, जहाँ सेना के वरिष्ठ अधिकारियों, जवानों और आम जनमानस ने उन्हें अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित की। सेना की ओर से मेजर रौनक सिंह को गन सैल्यूट (शस्त्र सलामी) दी गई। उनके सम्मान में पूरा कैंट क्षेत्र गूंज उठा – “अमर रहे – मेजर रौनक सिंह” के नारों से।
पार्थिव शरीर को सैन्य वाहन के माध्यम से अत्यंत सम्मान के साथ ले जाया गया। सेना, पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों की उपस्थिति में उन्हें पूरे सैनिक सम्मान के साथ विदाई दी गई। रविवार को वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा, जिसमें हजारों की संख्या में आम नागरिकों, सेना के जवानों और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों के शामिल होने की संभावना है।
मेजर रौनक सिंह – वीरता और नेतृत्व का प्रतीक
मेजर अप्रांत रौनक सिंह की बहादुरी के किस्से उनके साथी अधिकारियों और जवानों की जुबान पर हैं। उन्होंने साल 2021 में कश्मीर के कुलगाम जिले में हुए एक महत्वपूर्ण आतंक विरोधी ऑपरेशन में दो बड़े आतंकवादियों को ढेर करने में मुख्य भूमिका निभाई थी। उस ऑपरेशन में उनकी रणनीतिक सूझबूझ और लीडरशिप के कारण सेना को बड़ी सफलता मिली थी।
उनकी इस वीरता के लिए वर्ष 2023 में उन्हें “सेना मेडल” (Gallantry) से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान उन गिने-चुने अधिकारियों को ही मिलता है, जो अत्यंत जोखिम वाले अभियानों में असाधारण साहस दिखाते हैं।
सेना की रिपोर्ट के अनुसार, बारामूला जिले के नियंत्रण रेखा (LoC) के पास संदिग्ध गतिविधियों की सूचना के बाद, मेजर रौनक सिंह अपने दल के साथ तलाशी अभियान में निकले थे। इसी दौरान आतंकियों की घात लगाकर की गई गोलीबारी में वे गंभीर रूप से घायल हो गए और वीरगति को प्राप्त हुए।
परिवार पर टूटा दुख का पहाड़
मेजर रौनक सिंह की शहादत की खबर जैसे ही उनके प्रतापगढ़ स्थित घर पहुँची, पूरे परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा। माता-पिता, पत्नी और छोटे भाई-बहनों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। दो साल पहले ही विवाह बंधन में बंधे मेजर रौनक के पीछे उनकी पत्नी श्वेता और वृद्ध माता-पिता हैं, जिनकी आँखों में बेटे के प्रति गर्व है लेकिन दिल में असीम पीड़ा भी।
पड़ोसियों और रिश्तेदारों के अनुसार, मेजर रौनक बचपन से ही राष्ट्रभक्ति की भावना से ओतप्रोत थे। उन्हें सेना में जाना और देश के लिए कुछ कर गुजरने की इच्छा शुरू से ही थी। पढ़ाई के दौरान वे बेहद मेधावी और अनुशासित छात्र रहे। उनके पिता ने बताया कि, “रौनक को जब पहली बार सेना में चयन की सूचना मिली थी, तो घर में उत्सव का माहौल था। आज वही बेटा तिरंगे में लिपटकर घर लौट रहा है। यह गर्व की बात है, लेकिन दिल बहुत भारी है।”
शहीद मेजर अप्रांत रौनक सिंह देशभक्ति, साहस और बलिदान की अमर गाथा
सेना की प्रतिबद्धता – परिवार को मिलेगा हर संभव सहयोग
भारतीय सेना ने मेजर रौनक सिंह की वीरगति पर गहरा दुख व्यक्त किया है और उनके परिवार के प्रति संवेदना जताई है। सेना ने बयान जारी कर कहा कि “मेजर रौनक सिंह जैसे वीर योद्धा हमारे लिए प्रेरणा हैं। उनकी शहादत को हम कभी नहीं भूल सकते। सेना उनके परिवार के कल्याण के लिए हरसंभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।”
सेना की ओर से शहीद के परिजनों को वित्तीय सहायता, पेंशन, बच्चों की शिक्षा और अन्य मूलभूत जरूरतों में सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा। सेना की वेलफेयर विंग ने पहले ही परिवार से संपर्क कर लिया है और उन्हें आश्वस्त किया है कि “रौनक अब अकेले आपके नहीं, पूरे देश के बेटे हैं।”
राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिनिधियों ने जताया दुख
शहीद मेजर रौनक सिंह की शहादत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डीएम प्रतापगढ़, तथा वाराणसी मंडल के आयुक्त सहित कई नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट कर लिखा, “मेजर रौनक सिंह की शहादत को शत-शत नमन। वह देश के लिए अमर बलिदानी बन गए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार उनके परिवार को हरसंभव मदद प्रदान करेगी।”
सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार की ओर से शहीद के परिवार को 50 लाख रुपये की सहायता, पत्नी को सरकारी नौकरी और उनके गांव में एक शहीद स्मारक बनाए जाने की योजना पर विचार किया जा रहा है।
गांव में पसरा सन्नाटा, लेकिन गर्व की भावना भी
प्रतापगढ़ जिले के जिस गांव से मेजर रौनक सिंह ताल्लुक रखते थे, वहाँ अत्यंत शोक और गर्व का मिला-जुला वातावरण देखा गया। गाँव की गलियों में सन्नाटा पसरा हुआ है, लेकिन हर चेहरे पर रौनक के बलिदान पर गर्व की झलक है। युवाओं ने मेजर रौनक को अपना आदर्श बताया और कहा कि वे भी देश सेवा के लिए तत्पर हैं। गांव के बुजुर्गों ने कहा कि “रौनक ने पूरे गांव का नाम रोशन किया है। हम सबको उन पर गर्व है। उनकी स्मृति को गांव में हमेशा जीवित रखा जाएगा।”
नमन उस अमर शहीद को
मेजर रौनक सिंह का बलिदान भारत माता के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा। उन्होंने न केवल अपनी जान की आहुति दी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति, साहस और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण भी दिया है। उनकी वीरता, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र के प्रति समर्पण भाव को युगों-युगों तक याद किया जाएगा।
भारत-पाकिस्तान मैच से पहले कुपवाड़ा में एलओसी पर ‘पाक’ की नापाक हरकत, मिला मुंहतोड़ जवाब
कुपवाड़ा:
रविवार यानि आज भारत और पाकिस्तान की क्रिकेट टीम एशिया कप में दूसरी बार भिड़ने वाली हैं। इस मैच से ठीक एक दिन पहले जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के नौगाम सेक्टर में पाकिस्तान की ओर से नापाक हरकत की गई। भारतीय और पाकिस्तानी सैनिकों के बीच छोटे हथियारों से गोलीबारी हुई। सूत्रों के अनुसार, गोलीबारी शाम लगभग 6:15 बजे शुरू हुई और लगभग एक घंटे तक रुक-रुक कर जारी रही, जिसके बाद बंदूकें शांत हो गईं। इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। सेना के सूत्रों ने बताया कि यह घटना युद्धविराम उल्लंघन से संबंधित नहीं है। सेना ने अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि नियंत्रण रेखा पर दोनों ओर से छोटे हथियारों से गोलीबारी हुई, जो संघर्ष विराम उल्लंघन नहीं है।
भारत-पाकिस्तान मैच से पहले कुपवाड़ा में एलओसी पर ‘पाक’ की नापाक हरकत, मिला मुंहतोड़ जवाब
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
विशेषज्ञों का मानना है कि एलओसी पर इस तरह की छोटी-मोटी झड़पें समय-समय पर होती रहती हैं, जिनका कारण अक्सर पैट्रोलिंग या गश्त के दौरान किसी गलतफहमी, सीमा मार्किंग के पास हुई हल्की-मोटे झड़प या स्थानीय तनाव हो सकता है। परंतु यह भी सच है कि हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ रहा है, जिसके चलते हर छोटी घटना को संवेदनशीलता के साथ देखा जा रहा है।
ऑपेशन सिंदूर के बाद पाक की नापाक साजिश
बता दें कि यह घटना मई में हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद सामने आई है। उस समय 7 मई को भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नामक कार्रवाई कर पाकिस्तान स्थित आतंकवादी ढांचे पर हमले किए थे। चार दिनों के सैन्य टकराव के बाद एक संघर्षविराम समझौता हुआ था। दोनों पक्षों के बीच 10 मई, 2025 को आखिरी बार युद्धविराम उल्लंघन दर्ज हुआ था। उस संचालित कार्रवाई के दौरान पाकिस्तान में कई हवाई ठिकाने और आतंकवाद संबंधित लॉन्च पैडों को उड़ादिया, जबकि भारत की तरफ से कोई नुकसान नहीं बताया गया।
पंजाब सरकार की SSF नें बचाईं 37000 जानें, सड़क दुर्घटनाओं में आयी 78 प्रतिशत तक की गिरावट
चंडीगढ़।
यह कहानी पंजाब की उन सड़कों की, जहाँ कभी डर और अनिश्चितता का राज था। हर रोज़ अख़बार की सुर्खियां किसी न किसी सड़क हादसे की दर्द भरी दास्तान सुनाती थीं। यहाँ की सड़कों पर बढ़ रही दुर्घटनाएं एक गहरी चिंता का विषय बन गई थीं। हर रोज़ औसतन 15 से 16 बेशकीमती जानें सड़क हादसों में चली जाती थीं। इन मौतों का आँकड़ा केवल एक संख्या नहीं, बल्कि कई परिवारों के सपनों का टूटना, एक माँ की सूनी गोद, और एक बच्चे के सिर से बाप का साया उठना था। इस दर्द को महसूस करते हुए, पंजाब की भगवंत मान सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया। उन्होंने सिर्फ़ घोषणाएं नहीं कीं, बल्कि ज़मीन पर काम करके दिखाया। इस दिशा में दो बड़े और महत्वपूर्ण हथियार चलाए गए: सड़क सुरक्षा फ़ोर्स (SSF) और ‘फरिश्ते’ स्कीम। ये दोनों योजनाएँ एक-दूसरे का हाथ थामकर पंजाब की सड़कों को सुरक्षित बनाने का संकल्प लिए हुए हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने इस समस्या को सिर्फ़ एक सरकारी प्रोजेक्ट की तरह नहीं देखा। उन्होंने इसे एक परिवार की तरह समझा। और इस समस्या से लड़ने के लिए दो ऐसे हथियार दिए, जो सिर्फ़ लोहे और काग़ज़ के नहीं, बल्कि विश्वास और इंसानियत के बने थे।मान सरकार ने पंजाब को देश का पहला ऐसा राज्य बना दिया है, जिसने सड़कों की सुरक्षा के लिए एक समर्पित फोर्स का गठन किया है। साल 2024 में मान सरकार द्वारा इसकी शुरुआत की गई थी। तब किसी ने नहीं सोचा था कि एक साल से भी कम समय में इतना बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। आज पंजाब के 4100 किलोमीटर लंबी सड़कों पर हर 30 किलोमीटर पर SSF की टीमें तैनात हैं | 116 टोयोटा हिलक्स और 28 इंटरसेप्टर स्कॉर्पियो जैसे कुल 144 हाईटेक वाहनों से लैस ये टीमें हादसे की खबर मिलते ही 5 से 7 मिनट के अंदर वहां पहुंच जाती हैं। 1477 जवानों की एक ऐसी टीम बनाई है जिसका मुख्य काम सड़क हादसों को रोकना। अगर कोई हादसा होता है, तो SSF की टीम का काम तुरंत मौके पर पहुंचकर घायलों को अस्पताल पहुंचाना है। इससे कई लोगों की जान बचाई जा चुकी है। यह फोर्स ट्रैफिक नियमों का पालन करवाती है और ट्रैफिक को सुचारू रूप से चलाने में मदद करती है। SSF सिर्फ सड़क सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नशे की तस्करी, चोरी और अन्य आपराधिक मामलों में भी पुलिस की मदद करती है। यह फोर्स पूरी तरह से टेक्नोलॉजी से जुड़ी हुई है, स्पीड गन, बॉडी कैमरा, ई-चालान सिस्टम, मोबाइल डेटा, AI तकनीक, सब कुछ इस्तेमाल हो रहा है ताकि पुलिसिंग स्मार्ट हो, तेज़ हो, और पारदर्शी हो। यही है ‘नई सोच वाला नया पंजाब’, जहां अब हर सरकारी सिस्टम जनता की सेवा में खड़ा है। सबसे ज़्यादा गर्व की बात तो ये है कि 2024 में SSF के तैनात इलाकों में स्कूल जाते हुए या लौटते किसी भी बच्चे की मौत सड़क हादसे में नहीं हुई। अब तक एसएसएफ की मदद से लगभग 37110 जिंदगियां बचाई गई | फरवरी-अक्टूबर 2024 में लगभग 768 लोगों की जान बचाई गई | फरवरी-अक्टूबर 2023 की तुलना में फरवरी-अक्टूबर 2024 में सड़क दुर्घटनाओं में करीब 45.55% गिरावट आई है | फरवरी -अप्रैल 2019 से लेकर फरवरी-अप्रैल 2022 तक के सड़क दुर्घटनाओं के आकंड़ो पर ध्यान दे तो उनके मुकाबले सड़क दुर्घटनाओं में 1 फ़रवरी से 30 अप्रैल 2024 तक 78% गिरावट आई थी , जो की 2024 का सबसे कम आंकड़ा है यह सब मान सरकार द्वारा स्थापित की गयी सड़क सुरक्षा फ़ोर्स का कमाल है |
पंजाब सरकार की SSF नें बचाईं 37000 जानें, सड़क दुर्घटनाओं में आयी 78 प्रतिशत तक की गिरावट
पंजाब सरकार द्वारा चलाई गयी SSF ने यहाँ सड़क हादसों को होने से रोका वहीं दूसरी तरफ पंजाब सरकार ने 2024 में “फरिश्ते” योजना शुरू की थी | सड़क पर सबसे दुखद बात यह होती थी की जब कोई घायल सड़क पर तड़पता था और लोग मदद करने से डरते थे। डर था पुलिस के चक्कर का, कानूनी उलझनों का। जिस कारण घायल अपनी जिंदगी से हार जाता था तो मान सरकार ने इस डर को ख़त्म करने के लिए एक दिल छू लेने वाली स्कीम शुरू की जिसे ‘फरिश्ते’ स्कीम का नाम दिया गया | इस योजना का मकसद सड़क दुर्घटना में घायल हुए लोगों की जान बचाना है। इस योजना के तहत, अगर किसी का सड़क दुर्घटना में एक्सीडेंट हो जाता है, तो उसे तुरंत अस्पताल में मुफ्त इलाज मिलेगा। पहले यह मुफ्त इलाज सिर्फ 48 घंटे के लिए था, लेकिन अब सरकार ने इसे बढ़ा दिया है। अब घायल व्यक्ति का पूरा इलाज, जब तक वह ठीक नहीं हो जाता, मुफ्त में होगा। जो भी इंसान किसी दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाता है, उसे सरकार ‘फरिश्ता’ कहती है। ऐसे ‘फरिश्तों’ को प्रोत्साहित करने के लिए, सरकार उन्हें 2,000 रुपये का नकद इनाम और एक प्रशंसा सर्टिफिकेट भी देती है। सबसे अच्छी बात यह है कि मदद करने वाले व्यक्ति से पुलिस या अस्पताल में कोई पूछताछ नहीं की जाएगी। इससे लोग डरेंगे नहीं और ज्यादा से ज्यादा लोग मदद के लिए आगे आएंगे। इस तरह SSF और ‘फरिश्ते’ स्कीम दोनों मिलकर एक complete सुरक्षा चक्र बनाते हैं। यह मान सरकार का हर पंजाबी के लिए दिया गया प्यार और विश्वास है। SSF हमें सुरक्षा का एहसास दिलाती है तो ‘फरिश्ते’ स्कीम हमें याद दिलाती है कि हम सब मिलकर इस समाज को बेहतर बना सकते हैं। पंजाब में अब सड़कों पर दौड़ती गाड़ियां सिर्फ़ मंज़िल तक नहीं जातीं, बल्कि सुरक्षा और इंसानियत के संदेश को भी साथ लेकर चलती हैं। यह कहानी है उस बदलाव की, जहाँ दिल से लिए गए फ़ैसलों ने हज़ारों घायल जिंदगियों को तुरंत फ़र्स्ट एड देकर अस्पताल तक पहुंचाया और उनको ही नहीं बल्कि उनके परिवारों को भी एक नई ज़िंदगी दी है। मान सरकार ने इस फोर्स में पंजाब की बेटियों को भी आगे किया है। 287 महिलाएं आज SSF का हिस्सा हैं, ये सिर्फ नौकरी नहीं, भरोसे की ड्यूटी भी निभा रही हैं। यह दिखाता है कि सरकार सिर्फ बातें नहीं करती,असली बदलाव करती है। यही असली सशक्तिकरण है, यही असली पंजाबियत है।
मान सरकार ने पंजाब में यह साबित कर दिया है कि सरकार सिर्फ नियम बनाने के लिए नहीं होती, बल्कि लोगों के जीवन की परवाह करने के लिए भी होती है। SSF और फरिश्ते स्कीम, पंजाब की सड़कों पर एक नई सुबह लेकर आए हैं। SSF दुर्घटनाओं को होने से पहले रोकती है और फरिश्ते स्कीम दुर्घटना के बाद ज़िंदगी को बचाती है। ये दोनों योजनाएँ मिलकर पंजाब को एक ऐसा राज्य बना रही हैं, जहाँ सड़कों पर मौत का डर नहीं, बल्कि सुरक्षा का एहसास होता है। यह सिर्फ़ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति है, जो लोगों को जागरूक कर रही है, उन्हें ज़िम्मेदारी सिखा रही है और इंसानियत के इस सफर में ‘फरिश्ता’ बनने के लिए प्रेरित कर रही है। पंजाब सरकार की यह पहल वाकई सराहनीय है | ये दोनों योजनाएँ सिर्फ़ सरकारी काम नहीं हैं। ये हमारी ज़िंदगी से जुड़ी भावनाएं हैं। एक तरफ़ SSF हमें ‘सुरक्षा’ देती है और दूसरी तरफ़ ‘फरिश्ते’ स्कीम हमें एक-दूसरे से ‘प्यार’ और ‘विश्वास’ का रिश्ता बनाना सिखाती है। मान सरकार ने पंजाब की सड़कों पर मौत का डर कम करके, ज़िंदगी को गले लगाना सिखाया है।
आंध्र प्रदेश शराब घोटाले में ईडी ने कई राज्यों में मारे छापे, नकदी समेत जरूरी दस्तावेज किए जब्त
हैदराबाद।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हैदराबाद जोनल ऑफिस ने आंध्र प्रदेश शराब घोटाले के संबंध में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के प्रावधानों के तहत छापेमारी की। यह छापेमारी कार्रवाई हैदराबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, तंजावुर, सूरत, रायपुर, दिल्ली एनसीआर और आंध्र प्रदेश में 20 स्थानों पर की गई है। फर्जी और बढ़ा-चढ़ाकर किए गए लेनदेन के माध्यम से रिश्वत के भुगतान में मदद करने वाली संस्थाओं एवं व्यक्तियों के परिसरों की तलाशी ली गई। ईडी ने सरकारी खजाने को 4000 करोड़ रुपए के नुकसान के लिए आईपीसी 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत आंध्र प्रदेश सीआईडी द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर जांच शुरू की। आंध्र प्रदेश सरकार ने इस साल 5 फरवरी को मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि अक्टूबर 2019 से मार्च 2024 तक की ‘नई शराब नीति’ में आरोपी व्यक्ति ‘ब्रांड किलिंग एंड न्यू ब्रांड प्रमोशन’ में लिप्त रहे, जिसमें उन लोकप्रिय शराब ब्रांडों (जैसे मैकडॉवेल्स, रॉयल स्टैग, इंपीरियल ब्लू आदि) को दरकिनार करना शामिल था। इन्होंने रिश्वत देने से इनकार कर दिया था और इसके बजाय डिस्टिलरी एवं आपूर्तिकर्ताओं से भारी भुगतान के बदले नए या नकली ब्रांडों को बढ़ावा दिया। खरीद प्रणाली को स्वचालित से मैन्युअल में स्थानांतरित कर दिया गया, जिससे ऑर्डर फॉर सप्लाई (ओएफएस) में हेरफेर की गुंजाइश बन गई।
एसआईटी ने आरोपपत्र और पूरक आरोपपत्र दायर किए हैं, जिनमें अन्य बातों के साथ-साथ स्वचालित प्रणाली को मैन्युअल अनुमोदन से बदलने, ब्रांड-वार इंडेंटिंग और आपूर्ति मात्रा में हेरफेर की अनुमति देने, चुनिंदा डिस्टिलरी और मार्केटिंग फर्मों का पक्ष लेने, आपूर्तिकर्ताओं को उनके चालान मूल्य का 15-20 प्रतिशत रिश्वत के रूप में भुगतान करने के लिए मजबूर करने, ऐसा न करने पर उनके ब्रांडों को दबा दिया गया या लिस्ट से हटा दिया गया, धन का प्रवाह करने और बढ़ी हुई ओएफएस मात्रा हासिल करने के लिए शेल डिस्टिलरीज का निर्माण करना, प्रमुख अधिकारियों की नियुक्ति जिन्होंने ब्रांड अनुमोदन में मदद की, पात्रता मानदंडों में हेरफेर किया और असहमत आपूर्तिकर्ताओं को दबाया।
आरोप पत्रों में यह भी आरोप लगाया गया है कि खरीद में हेराफेरी, फर्जी विक्रेता भुगतान, फर्जी कंपनियों के माध्यम से रिश्वत जुटाई गई और इनका इस्तेमाल चुनावी उद्देश्यों, व्यक्तिगत लाभ और विदेशों में धन हस्तांतरण के लिए किया गया।
आंध्र प्रदेश शराब घोटाले में ईडी ने कई राज्यों में मारे छापे, नकदी समेत जरूरी दस्तावेज किए जब्त
ईडी की जांच में पता चला है कि कुछ आरोपी व्यक्तियों ने जानबूझकर स्थापित ब्रांडों के लिए ऑर्डर देने से रोका, डिस्टिलरीज को देय वैध भुगतान रोके रखा और डिस्टिलरीज पर दबाव डाला एवं ओएफएस के बदले अवैध भुगतान व रिश्वत की मांग की। ईडी द्वारा की गई मनी ट्रेल जांच से पता चला है कि आंध्र प्रदेश राज्य पेय पदार्थ निगम लिमिटेड (एपीएसबीसीएल) द्वारा आपूर्तिकर्ताओं को दिए गए भुगतान का एक हिस्सा वस्तुओं या सेवाओं की आपूर्ति के बहाने विभिन्न संस्थाओं को हस्तांतरित किया गया था।
हालांकि, ये लेनदेन फर्जी पाए गए और इन निधियों के प्राप्तकर्ता या तो अस्तित्वहीन, फर्जी संस्थाएं या असंबंधित व्यक्ति व संस्थाएं थीं। कई मामलों में जहां संस्थाएं उनके व्यवसाय से संबंधित थीं, लेनदेन बढ़ा-चढ़ाकर बताए गए पाए गए। आपूर्तिकर्ताओं द्वारा सोना व नकदी प्राप्त करने के लिए जौहरियों को धनराशि भी हस्तांतरित की गई, जिसे आरोपी व्यक्तियों को रिश्वत के रूप में सौंप दिया गया। इस प्रकार व्यापारिक लेनदेन की आड़ में धन की हेराफेरी करने के लिए फर्जी व बढ़ा-चढ़ाकर किए गए लेनदेन का उपयोग किया गया, जिससे आरोपी व्यक्तियों को रिश्वत के रूप में अवैध धन का सृजन और संवहन सुगम हो गया।
तलाशी अभियान के दौरान, फर्जी व बढ़ा-चढ़ाकर किए गए लेनदेन से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री बरामद और जब्त की गई, जिससे अपराध की आय (पीओसी) का सृजन और संवहन हुआ। तलाशी के दौरान गैर-परिवहन वाहन विवरण वाले फर्जी चालान और परिवहन चालान भी जब्त किए गए। कुछ फरार आरोपियों की संलिप्तता और उनके दुबई में होने और पीओसी के हस्तांतरण के साक्ष्य वाली चैट भी जब्त की गईं। एक परिसर से 38 लाख रुपए की बेहिसाबी नकदी जब्त की गई। कई करोड़ रुपए मूल्य के पीओसी के विदेश प्रेषण को दर्शाने वाले बहीखाते भी जब्त किए गए।
ईडी ने बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व कर्मी को किया गिरफ्तार, ग्राहकों को 16.10 करोड़ रुपए का लगाया चूना
मुंबई।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), मुंबई ने धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के तहत अहमदाबाद जंक्शन रेलवे स्टेशन से बैंक ऑफ इंडिया के स्टाफ ऑफिसर (सस्पेंड) हितेश कुमार सिंगला को गिरफ्तार किया है। उन्हें विशेष न्यायालय, पीएमएलए, ग्रेटर बॉम्बे के समक्ष पेश किया गया, जहां से आरोपी को 7 दिनों के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिया गया है। सीबीआई और एसीबी मुंबई ने हितेश कुमार सिंगला और अन्य के खिलाफ आईपीसी की धारा 409, बीएनएस की धारा 316(5) और पीसी अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(ए) के तहत एफआईआर दर्ज की थी। इस एफआईआर के आधार पर ईडी ने जांच शुरू की।
ईडी की जांच से पता चला कि मई 2023 से जुलाई 2025 की अवधि के दौरान सिंगला ने दुर्भावना और आपराधिक इरादे से बिना अनुमति के सावधि जमा (टीडी), लोक भविष्य निधि (पीपीएफ), वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (एससीएसएस) खाते, बचत बैंक (एसबी) खाते और चालू खाते (सीए) को धोखाधड़ी से बंद कर दिया। प्राप्त राशि एसबीआई में उसके निजी बचत खाते में जमा कर दी गई।
जांच में यह भी पता चला कि आरोपियों ने पकड़े जाने से बचने के लिए 127 खाताधारकों, विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों, नाबालिगों, मृत ग्राहकों और निष्क्रिय खातों जैसे कमजोर ग्राहकों को निशाना बनाया। डायवर्ट की गई धनराशि को टुकड़ों में और गुप्त तरीके से स्थानांतरित किया गया था।
ईडी ने बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व कर्मी को किया गिरफ्तार, ग्राहकों को 16.10 करोड़ रुपए का लगाया चूना
इस धोखाधड़ी से सिंगला ने बैंक ऑफ इंडिया और उसके ग्राहकों को 16.10 करोड़ रुपए का चूना लगाया, जिससे बैंक को नुकसान हुआ, उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा और अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करके जनता का विश्वास कम हुआ।
धोखाधड़ी का पता चलने के बाद से हितेश कुमार सिंगला फरार था और बैंक ऑफ इंडिया को रिपोर्ट करने में विफल रहा। तकनीकी निगरानी द्वारा समर्थित विशिष्ट खुफिया जानकारी पर कार्रवाई करते हुए केंद्रीय जांच एजेंसी ने उज्जैन से वेरावल तक ट्रेन संख्या 19320 महामना एक्सप्रेस में यात्रा करते समय बार-बार सीटें और कोच बदलकर पता लगाने से बचने के उसके बार-बार प्रयासों के बावजूद अहमदाबाद जंक्शन पर उसे सफलतापूर्वक रोका और गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद उसके एक सहयोगी के परिसर में पीएमएलए की धारा 17 के तहत तलाशी ली गई।
वित्तीय धोखाधड़ी मामले में ईडी ने दिल्ली समेत कई राज्यों में मारी रेड, नकदी लेनदेन के दस्तावेज किए बरामद
रांची।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रांची जोनल ऑफिस ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, वैशाली (बिहार) और देहरादून स्थित कई परिसरों में रेड मारी। यह तलाशी अभियान मैक्सीजोन टच प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशकों, चंद्र भूषण सिंह और प्रियंका सिंह द्वारा बड़े पैमाने पर की गई वित्तीय धोखाधड़ी के संबंध में की गई। झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और कर्नाटक के पुलिस अधिकारियों ने कंपनी और उसके निदेशकों के खिलाफ जनता के साथ धोखाधड़ी करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की। इसके आधार पर ईडी ने जांच शुरू की।
ईडी की जांच से पता चला कि आरोपियों ने एक धोखाधड़ी वाली मल्टी-लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) योजना चलाई, जिसमें आम जनता को उच्च मासिक रिटर्न और आकर्षक रेफरल लाभों का वादा करके लुभाया गया। इस कार्यप्रणाली के माध्यम से उन्होंने कम से कम 21 बैंक खातों में 521 करोड़ रुपए से अधिक की अनधिकृत जमा राशि एकत्र की, जिससे भारी मात्रा में अपराध आय (पीओसी) अर्जित हुई।
वित्तीय धोखाधड़ी मामले में ईडी ने दिल्ली समेत कई राज्यों में मारी रेड, नकदी लेनदेन के दस्तावेज किए बरामद
यह भी पता चला कि आरोपी निदेशक, चंद्र भूषण सिंह और प्रियंका सिंह बाद में सरकारी धन लेकर फरार हो गए। पिछले तीन वर्षों से वे झारखंड, राजस्थान और असम पुलिस सहित कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचते रहे हैं। जांच से पता चलता है कि आरोपियों ने बेनामी लेनदेन के जरिए कई अचल संपत्तियां हासिल करके और जमा राशि को नकदी में बदलकर अवैध धन का शोधन किया। अपनी पहचान छिपाने और गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी ‘दीपक सिंह’ नाम से फर्जी पहचान पत्र का इस्तेमाल करते पाए गए और बार-बार अपना ठिकाना बदलते रहे।
तलाशी अभियान के दौरान ईडी ने बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सबूत बरामद किए और उन्हें जब्त किए। प्रमुख बरामदगी में फर्जी पहचान पत्र, महत्वपूर्ण वित्तीय लेनदेन और नकद लेनदेन का विवरण देने वाली हस्तलिखित नोट और डायरियां, सहयोगियों का विवरण, विभिन्न संस्थाओं की चेकबुक, लैपटॉप और मोबाइल फोन के रूप में डिजिटल साक्ष्य और बड़ी संख्या में अचल संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज एवं समझौते शामिल हैं। ऐसे सबूत भी मिले हैं जो दर्शाते हैं कि आरोपी इसी तरह की धोखाधड़ी वाली योजनाएं चलाते रहे थे।