दिल्ली: बुजुर्गों को निशाना बनाने वाले ‘लिफाफा गिरोह’ के तीन सदस्य गिरफ्तार
नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के हरि नगर थाना पुलिस ने बुजुर्ग नागरिकों के साथ लूटपाट के मामले में तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। यह सदस्य कुख्यात “लिफाफा गिरोह” के हैं। पुलिस जांच में पता चला कि यह गिरोह बुज़ुर्गों को लिफ्ट देने के बहाने अपनी कार में बिठाता था। उसके बाद उनके सोने के गहने व नकदी लूटकर कागज के लिफाफों में नकली गहने थमाकर फरार हो जाता था। पुलिस ने इनके पास से अपराध में इस्तेमाल की गई एक आई टेन कार, नकली नंबर प्लेट, कृत्रिम गहने और 22 कागज के लिफाफे बरामद किए हैं। इस गिरफ्तारी से चोरी के दो संगीन मामले सुलझाए गए हैं। पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस मामले में जानकारी तब हुई जब 18 जुलाई को एक पीड़ित ने शिकायत दर्ज कराई कि तीन लोगों ने उसे लिफ्ट देकर उसके सोने के झुमके और 4,000 रुपए छीन लिए।
दिल्ली: बुजुर्गों को निशाना बनाने वाले ‘लिफाफा गिरोह’ के तीन सदस्य गिरफ्तार
उसके कुछ दिनों के बाद फिर से उसी क्षेत्र में ऐसी घटनाओं को देखा गया, जिसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर एसएचओ हरि नगर, इंस्पेक्टर आशु गिरोत्रा के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने घटनास्थल के आसपास के सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज की जांच की और एएनपीआर तकनीक की मदद से कार की पहचान की, जिस पर फर्जी नंबर प्लेट लगी थी। लगातार खुफिया जानकारी विकसित करने के बाद, 11 अक्टूबर को टीम को गिरोह की गतिविधि के बारे में एक गुप्त सूचना मिली। सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए, टीम ने स्वर्ग आश्रम रोड के पास से संदिग्ध आई टेन कार से इन्हें गिरफ्तार किया। तीनों आरोपी दीपक (43), सागर (35) और रोशन (52) हैं। कार की तलाशी लेने पर वाहन की असली नंबर प्लेट, नकली गहने और लिफाफे बरामद हुए। पूछताछ में आरोपियों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया। जांच में पता चला कि ये सभी आदतन अपराधी हैं और इन पर पहले से ही हत्या और चोरी जैसे दर्जनों मामले दर्ज हैं। वे आसान पैसे कमाने और जल्दी अमीर बनने के लिए यह अपराध करते थे। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
दिल्ली में अवैध प्रवासियों पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, हिरासत में छह अफ्रीकी नागरिक
नई दिल्ली । दिल्ली के निहाल विहार इलाके में पुलिस ने अवैध रूप से रह रहे छह अफ्रीकी नागरिकों को हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई बाहरी जिला पुलिस के विशेष अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य अवैध प्रवास पर रोक लगाना और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है। 10 अक्टूबर को निहाल विहार पुलिस थाने की गश्ती टीम को चंदर विहार में अवैध प्रवासियों की मौजूदगी की सूचना मिली। हेड कांस्टेबल गजानंद, दलवीर, जगपाल, सरदार मल और कांस्टेबल महेंद्र की टीम ने तुरंत कार्रवाई की। मौके पर पहुंचने पर छह विदेशी नागरिकों ने भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। पूछताछ में इनकी पहचान फ्रैंक फॉचिंग (कैमरून), रोमियो लुसिएन (कैमरून), सैमुनेल (नाइजीरिया), माल्क फैराडे (नाइजीरिया), इवांस डांसो (घाना), और इनौसा (नाइजीरिया) के रूप में हुई। सत्यापन के दौरान पता चला कि इनके पास वैध वीजा या पासपोर्ट नहीं थे और ये सभी वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी दिल्ली में अवैध रूप से रह रहे थे।
दिल्ली में अवैध प्रवासियों पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, हिरासत में छह अफ्रीकी नागरिक
पुलिस ने विदेशी नागरिक अधिनियम, 1946 की धारा 14(सी) के तहत मकान मालिक के खिलाफ अवैध शरण देने का मामला दर्ज किया। इसके बाद विदेशी नागरिक क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय के सहयोग से निर्वासन प्रक्रिया शुरू की गई। वर्तमान में सभी छह व्यक्तियों को लामपुर, नरेला के हिरासत केंद्र में रखा गया है, जहां से उनकी निर्वासन प्रक्रिया पूरी होगी। बाहरी जिला पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा (आईपीएस) ने बताया कि दिल्ली में अवैध प्रवास के खिलाफ सख्त नीति अपनाई जा रही है। पुलिस नियमित गश्त, सत्यापन और खुफिया जानकारी के आधार पर ऐसे मामलों पर नजर रख रही है। यह अभियान स्थानीय लोगों की सुरक्षा और आव्रजन नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए चलाया जा रहा है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत दें। अवैध प्रवासियों की पहचान और कार्रवाई के लिए पुलिस का अभियान आगे भी जारी रहेगा।
नई दिल्ली । कांग्रेस नेता उदित राज ने सोमवार को कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे के उस बयान का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) की सोच को तालिबानी जैसा बताया था। इस पर समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में उदित राज ने कहा कि निश्चित तौर पर इस बात में किसी को भी कोई शक नहीं होना चाहिए कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और तालिबानी एक-दूसरे के पूरक हैं। दोनों में किसी भी प्रकार का अंतर नहीं है। उन्होंने कहा कि हम सभी लोगों ने देखा कि जब अफगानिस्तान के विदेश मंत्री भारत में आए, तो कैसे उनकी तालिबानी सोच उभरकर सामने आई। तालिबानी विदेश मंत्री के सामने किसी भी महिला पत्रकार को आगे आने की इजाजत नहीं दी गई। ऐसी स्थिति में आप लोग तालिबानी सोच का अंदाजा सहज ही लगा सकते हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी इसी तरह की विचारधारा से ग्रसित हैं। ऐसी स्थिति में इस सवाल का उठना लाजमी है कि क्या ऐसे संगठन को मौजूदा समय में किसी भी कीमत पर स्वीकार किया जा सकता है। ऐसे संगठन हमेशा से ही आधुनिकता के खिलाफ रहे हैं। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि तालिबानी राज में जिस तरह का अशोभनीय व्यवहार महिलाओं के साथ किया जाता है, ऐसी सोच और विचारधारा का आरएसएस ने समर्थन किया है। ऐसी स्थिति में आप लोग ऐसे लोगों से प्रगतिशील मानसिकता की उम्मीद नहीं कर सकते हैं। ऐसे लोग हमेशा से ही आधुनिकता के विरोधी रहे हैं।
तालिबान और आरएसएस एक-दूसरे के समान हैं : उदित राज
उन्होंने आरएसएस को एक महिला विरोधी पार्टी करार दिया और कहा कि आज तक इस संगठन में किसी महिला को सर्वोच्च कमान नहीं दी गई है। ऐसी स्थिति में आप लोग सहज ही अंदाजा लगा सकते हैं कि यह लोग किसी भी कीमत पर किसी महिला की प्रगति को स्वीकार नहीं कर सकते हैं। साथ ही, उन्होंने दक्षिण भारत को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में दक्षिण भारत के राज्यों में दो मुद्दों को लेकर चर्चा का बाजार गुलजार है। पहला तो हिंदी भाषा। दक्षिण के सूबों में हिंदी भाषा को लेकर विवाद का सिलसिला कई दफा देखने को मिल चुका है। इसके अलावा, दक्षिण भारत के लोगों की एक शिकायत है कि हमारे राज्य अत्याधिक कमाई करके केंद्र सरकार को देते है। लेकिन, इसके एवज में हमें क्या प्राप्त होता है। इस पर विचार करने की आवश्यकता है। दक्षिण भारत के सूबों का यह कहना है कि हम ही सबसे ज्यादा कमाई करके केंद्र को देते हैं। लेकिन, हमारी कमाई का एक बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों को उनके विकास के लिए आवंटित कर दिया जाता है। इसे लेकर भी दक्षिण के सूबों में लोगों के बीच में विरोध के स्वर देखने को मिलते हैं। उन्होंने आगे कहा, “जब केंद्र में भाजपा की सरकार आई है, तब उत्तर भारत और दक्षिण भारत के बीच में कई मुद्दों को लेकर विवाद देखने को मिला है। हमारे बीच में उत्तर और दक्षिण भारत के बीच में किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। इसका असर सीधे तौर पर देश के विकास पर पड़ेगा। दक्षिण भारत के सूबे विज्ञान और तकनीक के मामले में आगे बढ़े हैं। इस वजह से श्रमिकों की गरिमा भी बढ़ी।” उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के राज्यों में शिक्षा की स्थिति काफी बेहतर है। इस वजह से वहां की आर्थिक दशा भी बेहतर है। ऐसा वहां पर सामाजिक सुधार की वजह से हुआ है। सबसे पहले दक्षिण भारत में ही आरक्षण दिया गया है।
जहरीले ‘कोल्ड्रिफ सिरप’ बनाने वाली श्रीसन फार्मास्युटिकल्स का लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द
चेन्नई । मध्य प्रदेश में बच्चों की मौत से जुड़े विवाद “कोल्ड्रिफ कफ सिरप” मामले में तमिलनाडु सरकार ने निर्माता कंपनी मेसर्स श्रीसन फार्मास्युटिकल्स का मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द कर दिया है। इसके साथ ही कंपनी को पूरी तरह से बंद करने का आदेश जारी किया गया है। यह निर्णय कंपनी के सिरप में जानलेवा रसायन ‘डाइएथिलीन ग्लाइकॉल’ की 48.6 प्रतिशत जैसी घातक मात्रा पाए जाने के बाद लिया गया है। मामले की शुरुआत 1 अक्टूबर को हुई, जब मध्य प्रदेश के औषधि नियंत्रण विभाग ने तमिलनाडु के अपने समकक्ष को सूचित किया कि छिंदवाड़ा जिले में 4 सितंबर से हो रही बच्चों की मौतों का संबंध श्रीसन फार्मास्युटिकल्स द्वारा निर्मित ‘कोल्ड्रिफ सिरप’ से हो सकता है। सूचना मिलते ही तमिलनाडु औषधि नियंत्रण विभाग ने अभूतपूर्व तेजी दिखाते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी। इसके बाद 1 अक्टूबर को शाम 4:00 बजे सूचना मिलने के आधे घंटे के भीतर, एक वरिष्ठ औषधि निरीक्षक के नेतृत्व में एक टीम ने कंपनी परिसर का निरीक्षण शुरू कर दिया। इसके बाद जन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, पूरे तमिलनाडु में कोल्ड्रिफ सिरप की बिक्री पर तत्काल प्रतिबंध लगा दिया गया। प्रयोगशाला की रिपोर्ट ने 2 अक्टूबर को सभी आशंकाओं को सही साबित कर दिया। रिपोर्ट में कोल्ड्रिफ सिरप में 48.6 प्रतिशत की अत्यधिक विषैली और जानलेवा मात्रा में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल की उपस्थिति की पुष्टि हुई। उसके बाद घातक रसायन की पुष्टि होते ही 3 अक्टूबर को विभाग ने “उत्पादन रोकने का आदेश” जारी किया और कंपनी को तत्काल सील कर दिया। कंपनी को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया कि क्यों न उसका लाइसेंस रद्द कर दिया जाए।
जहरीले ‘कोल्ड्रिफ सिरप’ बनाने वाली श्रीसन फार्मास्युटिकल्स का लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द
जांच में यह भी पता चला कि यह जहरीला सिरप ओडिशा और पुडुचेरी में भी वितरित किया गया था। यह जानकारी तुरंत इन राज्यों के औषधि नियंत्रण अधिकारियों के साथ साझा की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए, कंपनी के फरार मालिक श्री रंगनाथन के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू की गई। तमिलनाडु पुलिस की मदद से मध्य प्रदेश की विशेष जांच दल ने 9 अक्टूबर की सुबह मालिक को चेन्नई के अशोक नगर से सफलतापूर्वक गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में कर्तव्य में लापरवाही बरतने का भी खुलासा हुआ है। पिछले वर्ष कंपनी का उचित निरीक्षण न करने के कारण कांचीपुरम के दो वरिष्ठ औषधि निरीक्षकों को निलंबित कर दिया गया है और उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इस घटना से सबक लेते हुए, राज्य स्वास्थ्य विभाग ने तमिलनाडु की सभी दवा निर्माण इकाइयों में व्यापक और औचक निरीक्षण करने के आदेश जारी किए हैं। वर्तमान में पूरे राज्य में बड़े पैमाने पर निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। राज्य स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि श्रीसन फार्मास्युटिकल कंपनी के विनिर्माण लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं और कंपनी को बंद कर दिया गया है। यह कार्रवाई उनके कफ सिरप, कोल्ड्रिफ में विषैले संदूषकों, विशेष रूप से डायथिलीन ग्लाइकॉल का पता चलने के बाद की गई है। इस बयान में कहा गया, “तमिलनाडु औषधि नियंत्रण विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए श्रीसन फार्मास्युटिकल कंपनी के कारखाने का निरीक्षण किया, राज्य भर में कोल्ड्रिफ सिरप की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया और नमूने विश्लेषण के लिए भेजे। विश्लेषण में 48.6 प्रतिशत डीआजी सांद्रता पाई गई, जिसके बाद विभाग ने उत्पादन बंद करने का आदेश जारी किया और कंपनी के लाइसेंस रद्द करने की कार्यवाही शुरू की।
जोधपुर क्राइम फाइल…संभाग के अपराध समाचार यहां पढ़िए
जोधपुर। पुलिस द्वारा साइबर ठगी की रोकथाम के लिए अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत म्यूल अकाउंट होल्डर को गिरफ्तार किया गया है। सूरसागर थाना पुलिस ने संदिग्ध खाते की सूचना के आधार पर आरोपी को पकड़ा है।सूरसागर थाना अधिकारी हरीश सोलंकी ने बताया कि साइबर अपराध में थाना क्षेत्र के बैंकों से प्राप्त लिस्ट म्यूल अकाउंट के नंबर और साइबर फ्रॉड की प्राप्त की गई राशि का विश्लेषण करने पर पता चला कि बबलू पुत्र ओमप्रकाश निवासी अंबेडकर नगर कालाबेरी के खाते में 25000 रुपये आने पर फ्रिज हुआ है।खाते के बारे में और जानकारी पता की गई तो मालूम चला कि 9,92,970 रुपए इस खाते में आए हैं और साइबर धोखाधड़ी की गई है। बबलू ने अपना खाता साइबर ठग को किराए पर दे रखा था जो कि उसे म्यूल अकाउंट के रूप में उपयोग कर रहे थे। पुलिस आरोपी पूछताछ कर इसमें शामिल अन्य आरोपियों के बारे में जानकारी जुटा रही है।नागौरी गेट थाने में दी रिपोर्ट में कामयखानी मस्जिद के पास हाल जनता कॉलोनी नागौरी गेट निवासी जुगलकिशोर पुत्र आसूलाल मिरासी ने पुलिस को बताया कि 3 फरवरी की सुबह के समय आरोपी प्रेम नगर बनाड़ निवासी अभिषेक व श्रवण तथा पीडब्ल्यूडी कॉलोनी निवासी तरूण ने एकराय होकर उसके दस्तावेजों का दुरूपयोग करके बैंक खाता खुलवाया और उसमे फर्जीवाड़ा करके खाते में रूपये जमा और निकासी की। आन लाईन ठगी करने के प्रकरणों में साईबर सेल से मिली सूचना पर उदयमंदिर पुलिस ने दो युवके के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। जबकि एक युवक ने दो युवकों के खिलाफ उसके नाम से खाता खुलवा कर पैसो का लेनदेन कर धोखाधड़ी करने का मुकदमा नागौरी गेट थाने में दर्ज कराया।उदयमंदिर थानाधिकारी सीताराम ने साईबर सेल से मिली सूचना पर आरोपी ओसिया के भीमसागर सामराऊ निवासी संजय पुत्र सागाराम नाई, और लोहावट के चन्द्र नगर निवासी कालूराम पुत्र बलवंताराम विश्नोई के खिलाफ साईबर ठगी के मुकदमे दर्ज कर जांच शुरू की। लाखों रुपये लेकर नकली सोना देकर ठगी करने का आरोप जोधपुर। एक व्यक्ति के साथ धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। पीडि़त की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने एक ज्वैलरी शॉप के कर्मचारी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है।सरदारपुरा थाना क्षेत्र में पीडि़त मूलतया झुन्झुनू जिले के नवलगढ थानान्तर्गत दानसिंह की ढाणी हाल गंगा माता की गली चोड़ा रास्ता माणक चौक निवासी सुनिल कुमार पुत्र ओमप्रकाश सैनी ने पुलिस को दी रिपोर्ट में आरोप लगाया कि 3 अक्टूबर को वह जोधपुर आया जहां पर रेलवे स्टेश्र के पास रूकमणी ज्वैलस मिले कर्मचारी महेन्द्र वगैरा से सोना खरीदने की बात कही। जिस पर आरोपी ने 500 ग्राम नकली सोने का बिस्कुट देकर ठगी की है। पीडि़त को यह बिस्कुट असली सोना बताकर दिया गया था, लेकिन बाद में जांच में वह नकली निकला। पुलिस ने 316(2) 318( 4) बीएनएस मे मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। गाड़ी में अगवा कर बलात्कार का आरोप, घटना के 26 माह बाद मुकदमा दर्ज जोधपुर। एक नाबालिग ने नामजद आरोपी के खिलाफ अपहरण कर बलात्कार करने का मुकदमा मंडोर थाने में दर्ज कराया।मंडोर थाने में दी रिपोर्ट में एक नाबालिग ने दी रिपोर्ट में बताया कि दो वर्ष पूर्व 1 अगस्त को आरोपी उसको एक गाड़ी में बिठाकर निम्बा निबडी क्षेत्र में लेकर गया जहां पर आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया। पुलिस ने आईपीसी और पोक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच की। आरोपी उसके बाद भी उसको डरा धमका कर यौन शोषण करता रहा। शादी का झांसा देकर यौन शोषण, दबाव बनाने पर कीटनाशक पिलाने का आरोप जोधपुर। एक व्यक्ति ने नामजद आरोपी के खिलाफ उसकी साली को शादी का झांसा देकर यौन शोषण करने और शादी के लिये दबाव बनाने पर कीटनाशक पिलाने का आरोप लगाते हुए कुड़ी भगतासनी थाने में मुकदमा दर्ज कराया।कुड़ी भगतासनी थाने में दी रिपोर्ट में एक व्यक्ति ने पुलिस को बताया कि गत माह 17 सितम्बर को उसकी साली की कीटनाशक का सेवन करने से मौत हो गई। इस मामले में जब परिजनों ने जांच पड़ताल की तो पता लगा की एक युवक उसको शादी करने का झांसा देकर प्रेमझाल में फंसा कर यौन शौषण करता रहा। शादी के लिये दबाव बनाने पर आरोपी ने आना कानी करनी शुरू कर दी।पुलिस को दी जानकारी में मृतका के जीजा ने बताया कि जब उसकी साली ने ज्यादा दबाव बनाया तो आरोपी ने उसको जान से मारने की नियत से कीटनाशक पिला दिया जिसके चलते उसकी बाद में मौत हो गई। आपतिजनक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल करने का आरोप जोधपुर। एक महिला ने नामजद आरोपी के खिलाफ उसके और रिश्तेदारों के आपतिजनक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल कर धमकाने का मुकदमा सूरसागर थआने में दर्ज कराया।सूरसागर थाने में दी रिपोर्ट में इन्द्रोका निवासी एक महिला ने बताया कि पालड़ी मांगलिया निवासी भगवानसिंह पुत्र हिन्दूसिंह राजपूत ने उसके और उसके परिजनों के आपत्तिजनक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल कर डरा धमका कर ब्लैकमेल कर रहा है।बोरानाड़ा थाने में दी रिपोर्ट में संतोष नगर निवासी एक महिला ने बताया कि आरोपियों ने गत माह 27 सितम्बर को उसके साथ रास्ता रोककर दुव्र्यवहार और गाली गलोच कर लज्जा भंग की। सैन्ट्रल जेल में औचक निरीक्षण में मिले मोबाईल फोन जोधपुर। सैन्ट्रल जेल में किये गये औचक निरीक्षण के दौरान मोबाईल फोन और निषिद सामग्री मिलने पर नामजद कैदियों के खिलाफ जल उपअधीक्षक ने मुकदमा दर्ज कराया।रातानाड़ा थाने में दी रिपोर्ट में केन्द्रीय कारागृह के उप अधीक्षक ने दी रिपोर्ट में बताया कि 10 अक्टूबर को सैन्ट्रल जेल में किये गये औचक निरीक्षण के दौरान बैरक नम्बर 4 में बंद दीपक उर्फ जयहिन्द पुत्र प्रमोद कुमार, राजूनाथ पुत्र केशनाथ, राजकुमार आचार्य पुत्र तेजराम, विशाल उर्फ करण पुत्र रामूराम के के कब्जे से मोबाईल और और अन्य निषेध सामग्री बरामद की।
जोधपुर क्राइम फाइल…संभाग के अपराध समाचार यहां पढ़िए
अवैध अफीम दूध के 13 साल पुराने मामले में आरोपी को 10 साल की कठोर सजा जोधपुर। एनडीपीएस न्यायालय जोधपुर के विशिष्ट न्यायाधीश मधुसूदन मिश्रा ने 13 साल पुराने अवैध मादक पदार्थ अफीम दूध के मामले में फैसला सुनाते हुए आरोपी को 10 वर्षों का कठोर कारावास और एक लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। राजस्थान सरकार की ओर से पैरवी हेतु नियुक्त गोविन्द जोशी विशिष्ट लोक अभियोजक एनडीपीएस जोधपुर ने बताया कि 20 जुलाई 2012 को पुलिस थाना ओसियां के तत्कालीन थानाधिकारी राजीव भादू ने ओसियां के पांचला गांव में दौराने नाकाबंदी रमेश पुत्र पांचाराम विश्नोई निवासी हेमनगर जोलियाली, जोधपुर से मोटरसाइकिल के बैग से 02 किलोग्राम अफीम का दूध बरामद कर आरोपी को गिरफ्तार किया तथा बाद अनुसंधान आरोपी के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट प्रस्तुत की।गोविन्द जोशी विशिष्ट लोक अभियोजक एनडीपीएस जोधपुर ने न्यायालय से वर्तमान में अवैध मादक पदार्थों के मामलों में उतरोतर वृद्धि होने, अवैध मादक पदार्थों के अपराध गंभीर किस्म की प्रकृति के अपराध होने और उसका समाज में प्रतिकूल प्रभाव पडऩे की वजह से आरोपी को कठोरतम सजा देने की मांग की जबकि आरोपी ने नरमी बरतने का आग्रह किया। विशिष्ट न्यायालय एनडीपीएस जोधपुर के विशिष्ट न्यायाधीश मधुसूदन मिश्रा ने शुक्रवार को अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत कुल 14 गवाह, 36 दस्तावेजी साक्ष्य और 6 आर्टिकल के आधार पर अभियुक्त रमेश पुत्र पांचाराम विश्नोई निवासी हेमनगर जोलियाली, जोधपुर को दोषी ठहराते हुए अवैध मादक पदार्थ रखने के आरोप में 10 वर्ष की कठोर सजा व एक लाख रुपए के जुर्माने की कठोर सजा सुनाई। धारदार चाकू से गला रेतकर हत्या के मामले में आरोपी को आजीवन कारावास जोधपुर। अपर जिला न्यायालय संख्या 5 जोधपुर के न्यायाधीश प्रमोद बंसल ने 7 साल पुराने राजेश सैन की हत्या के मामले में फैसला सुनाते हुए आरोपी को आजीवन कठोर कारावास और 41000 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। राजस्थान सरकार की ओर से पैरवी हेतु नियुक्त चंद्रप्रकाश ओझा अपर लोक अभियोजक संख्या 5 जोधपुर ने बताया कि 31 अगस्त 2018 को परिवादी दिनेश सैन ने अपने भाई राकेश सैन की हत्या का मुकदमा पुलिस थाना कड़वड़ में दर्ज करवाया। राकेश सैन की लाश मंडलनाथ रोड पर खेत में पड़ी मिली उसकी हत्या उसके ही दोस्त दईजर निवासी भारत ने 30 अगस्त 2018 की रात में अपने एक नाबालिग दोस्त के साथ मिलकर राकेश सैन से सोने की चैन, चांदी का कंदोरा, पायजेब और 14100 रुपए लूटकर 14.5 इंच फल के धारदार चाकू से गला रेतकर कर दी और शव को मंडलनाथ रोड पर खेत में फेंक दिया। मामले में कड़वड़ पुलिस थाना के तत्कालीन थानाधिकारी राजूराम बामणिया ने आरोपी को परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आदर पर गिरफ्तार किया तथा बाद अनुसंधान आरोपी के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट प्रस्तुत की। चंद्रप्रकाश ओझा अपर लोक अभियोजक ने न्यायालय से अपराधी का अपराध दुर्लभ से दुर्लभतम प्रकृति का होने की वजह से आरोपी को मृत्युदंड की सजा से दंडित करने की मांग की जबकि आरोपी ने नरमी बरतने का आग्रह किया। अपर जिला न्यायालय संख्या 5 जोधपुर के न्यायाधीश प्रमोद बंसल ने बुधवार को अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत कुल 31 गवाह, 139 दस्तावेजी साक्ष्य और 21 आर्टिकल के आधार पर अभियुक्त भारत पुत्र घेवर राम निवासी दईजर जोधपुर को राकेश सैन की हत्या एवं अवैध हथियार के आरोप में अलग अलग धाराओं में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की कठोर सजा एवं कुल 41000 रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। महिला के कपड़े पहन बनाया किडनैपिंग का प्लान, तीन आरोपी गिरफ्तार बाड़मेर। जिले की मंडली पुलिस ने एक सनसनीखेज फिरौती और अपहरण के मामले का खुलासा किया है। पुलिस ने महिला के भेष में पीड़ित को फंसाने और मारपीट कर 15 लाख रुपए की मांग करने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने पीड़ित से पहले 5 लाख रुपए वसूले और गलती स्वीकारने का वीडियो बनाकर धमकाने की कोशिश की थी।मंडली निवासी सुबान खान ने 4 अक्टूबर को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। 17 अगस्त को उसे सफी खान ने फोन कर खेती से जुड़ा सामान ले जाने के बहाने बुलाया। पीड़ित अपनी क्रेटा कार लेकर माडपुरा सर्किल से एक किलोमीटर पहले निर्धारित स्थान पर पहुंचा, तो सफी खान के साथ एक महिला मौजूद थी। गाड़ी में बैठाने के बाद पीछे से बोलेरो में गफूर खान, दाउद खान और इसाक खान आ गए। घटना के वक्त कार में कोई वास्तविक महिला मौजूद नहीं थी। हबीब खान ने महिला के कपड़े पहनकर ड्राइवर को भ्रमित किया और अपने साथी सफी खान के साथ साजिश रचकर वारदात को अंजाम दिया। सभी ने मिलकर प्लानिंग के तहत डरा-धमकाकर ड्राइवर सीट से नीचे उतारकर पीछे की सीट पर जबरदस्ती बैठाया। आवाज करने पर जान से मारने की धमकी दी।आरोपियों ने पीड़ित को क्रेटा कार से उतारकर जबरन पीछे बैठाया, मारपीट की और हमारी महिला के साथ क्यों बैठे कहकर धमकाया। फिर सुनसान इलाके में ले जाकर गलती स्वीकार करने का वीडियो रिकॉर्ड किया। बदले में 15 लाख रुपए की मांग की।डर के कारण पीड़ित ने कल्याणपुर में गणपतराम पटेल की दुकान से 5 लाख रुपए उधार लेकर दिए। बाद में ₹3,400 फोनपे से ट्रांसफर किए। आरोपी पीड़ित को रेवाड़ा गांव के पास छोड़कर भाग गए।12 सितंबर को आरोपी इसाक खान ने फिर फोन कर 10 लाख रुपए और मांगे और धमकी दी कि गलती का वीडियो सोशल मीडिया पर डाल देंगे। तब जाकर पीड़ित ने हिम्मत जुटाकर एफआईआर दर्ज कराई।जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी व परंपरागत कार्रवाई से तीन आरोपियों —सफी खान पुत्र लतीफ खान (खेत सिंह नगर, शेरगढ़ इसाक खान पुत्र हाजी खान (नयापुरा, पचपदरा) हबीब खान पुत्र गनी खान (नयापुरा, पचपदरा)को गिरफ्तार किया। उनके पास से ₹1.20 लाख नकद और एक मोबाइल बरामद किया गया। तीनों को कोर्ट में पेश करने के बाद न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया।मंडली थाना अधिकारी ने बताया कि किडनैपिंग में उपयोग में ली गई बोलेरो गाड़ी, फरार आरोपी गफूर खान और दाउद खान, तथा फिरौती की राशि से खरीदे गए पिकअप वाहन की तलाश की जा रही है। करंट से किसान की मौत, ग्रामीणों का हंगामा जैसलमेर। जिले के नहरी क्षेत्र के पीटीएम थाना इलाके में खेत में पानी लगाते समय एक युवक की करंट लगने से मौत हो गई। हादसे के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने आक्रोश जताते हुए जवाहिर हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी के बाहर धरना दिया और शव का पोस्टमॉर्टम करवाने से इनकार कर दिया।घटना पीटीएम थाना इलाके की 54 आरडी क्षेत्र की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, मूलसागर निवासी राजेश (25) पुत्र मखनाराम भील सुबह करीब 3 बजे अपने मुरबे (खेत) पर पानी लगा रहा था। इसी दौरान करंट की चपेट में आ गया। साथी किसानों ने उसे हॉस्पिटल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। शव को मॉर्च्युरी में रखवाया गया, लेकिन परिजन और ग्रामीण न्याय की मांग को लेकर वहीं धरने पर बैठ गए।धरने पर बैठे लोगों ने आरोप लगाया कि राजेश की मौत पास के खेत के मालिक की लापरवाही से हुई है। उन्होंने बताया कि पड़ोसी ने अपने खेत की तारबंदी में थ्री-फेज बिजली लाइन जोड़ रखी थी, जिससे करंट फैल गया और हादसा हो गया। ग्रामीणों ने दोषी पर सख्त कार्रवाई और मृतक परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है। भील समाज के लोगों ने भी गरीब परिवार को न्याय दिलाने की अपील की है। पीटीएमम् थानाप्रभारी नरेंद्र पंवार ने बताया – घटना PTM थाना इलाके की 54 आरडी क्षेत्र की है। मूलसागर निवासी राजेश (25) पुत्र मखनाराम भील अलसुबह करीब 3 बजे अपने मुरबे (खेत) पर पानी लगा रहा था। इसी दौरान करंट की चपेट में आ गया। सभी उसे लेकर हॉस्पिटल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। शव को जवाहिर हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी में रखवाया गया है।पीटीएम थानाधिकारी नरेंद्र पंवार मौके पर पहुंचे और लोगों से समझाइश की, लेकिन वे नहीं माने। पंवार ने बताया कि मामले में हमने रिपोर्ट दर्ज कर ली है। लोग मुआवजे और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बातचीत कर समाधान की कोशिश की जाएगी। थ्रेसर में फंसी चुन्नी, फंदा लगने से मौत पाली। पाली में थ्रेसर मशीन में मूंग की फसल साफ करते समय गलती से एक 17 साल की लड़की का दुपट्टा भी थ्रेशर मशीन में फंस गया। जिससे उसके गले में फंदा लग गया। हादसे में दम घुटने से लड़की की मौत हो गई।पाली जिले के जेतपुर थाने के एएसआई मंगल सिंह ने बताया कि घटना देवाण गांव में शुक्रवार को हुई। 17 साल की रिंकू पुत्री मपाराम मीणा खेत में थ्रेसर मशीन में मूंग की फसल साफ कर रही थी। इस दौरान फसल थ्रेसर मशीन में डालते समय उसका दुपट्टा अंदर चला गया। जिससे उसके गले में फंदा लग गया। यह देख परिजन मौके पर पहुंचे और मशीन बंद कर उसे इलाज के लिए पाली के बांगड़ हॉस्पिटल पहुंचे। जहां जांच के बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने पोस्टमॉर्टम की कार्रवाई पूरी कर शव परिजनों को सौंपने की कार्रवाई की।
आखिर कहां औऱ कैसे मिलेगा न्याय? IFS संजीव चतुर्वेदी के मामले 16वें जज ने भी स्वयं को अलग किया
नैनीताल। उत्तराखंड कैडर के IFS अधिकारी संजीव चतुर्वेदी के मामलों की सुनवाई से न्यायाधीशों के लगातार अलग होने की श्रृंखला में अब 16वें न्यायाधीश ने भी स्वयं को सुनवाई से अलग कर लिया है। उत्तराखंड हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश, जस्टिस आलोक वर्मा ने चतुर्वेदी द्वारा दायर अवमानना याचिका की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया है। यह याचिका केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) के सदस्यों और रजिस्ट्री के खिलाफ जानबूझकर नैनीताल उच्च न्यायालय के स्थगन आदेश की अवहेलना करने के आरोप में दायर की गई थी। सवाल यह है कि आखिर चतुर्वेदी को न्याय कहां और कैसे मिलेगा? यह मामला देश के न्यायिक इतिहास में रिकॉर्ड बन गया है, क्योंकि अब तक किसी एक व्यक्ति के मामलों से इतने अधिक न्यायाधीशों ने स्वयं को अलग नहीं किया था। सिर्फ 12 दिन पहले, नैनीताल उच्च न्यायालय के ही जस्टिस रवींद्र मैथानी ने भी चतुर्वेदी के एक मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग करते हुए आदेश दिया कि “इस प्रकरण को ऐसे अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए, जिसका मैं (रवींद्र मैथानी, न्यायाधीश) सदस्य न हूं।” गौरतलब है कि इन चारों न्यायाधीशों में से किसी ने भी अपने रिक्यूजल आदेश में कोई कारण नहीं बताया है। जस्टिस आलोक वर्मा का अचानक सुनवाई से अलग होना विशेष रूप से उल्लेखनीय है, क्योंकि वो 29 अगस्त तक मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंड पीठ में चतुर्वेदी के मामलों की सुनवाई कर रहे थे। उनके इस कदम ने न्यायिक और प्रशासनिक हलकों में जिज्ञासा और चर्चा को जन्म दिया है, क्योंकि इससे पहले भी कई न्यायाधीश बिना कारण बताए इस प्रकरण की सुनवाई से अलग हो चुके हैं। यह इस वर्ष संजीव चतुर्वेदी के मामले में छठा न्यायिक रिक्यूजल है। फरवरी 2025 में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) के दो सदस्य हरविंदर ओबेराय और बी. आनंद ने चतुर्वेदी के मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग किया था, जबकि अप्रैल 2025 में नैनीताल एसीजेएम नेहा कुशवाहा ने भी उनके मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया था। इनके अलावा, उत्तराखंड उच्च न्यायालय के दो न्यायाधीशों द्वारा भी चतुर्वेदी के मामलों की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया गया है। अब तक संजीव चतुर्वेदी के मामलों की सुनवाई से कुल 16 न्यायाधीश स्वयं को अलग कर चुके हैं जिनमें दो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस यू.यू. ललित, चार उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, दो निचली अदालतों के न्यायाधीश, तथा केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के आठ सदस्य शामिल हैं, जिनमें एक कैट के अध्यक्ष भी रहे हैं। इस वर्ष अप्रैल 2025 में, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नेहा कुशवाहा ने संजीव चतुर्वेदी द्वारा केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के न्यायाधीश मनीष गर्ग के खिलाफ दायर मानहानि मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया था। इसका कारण उन्होंने कैट के ही एक अन्य न्यायाधीश डी.एस. माहरा से अपने “पुराने पारिवारिक संबंधों” को बताया था। फरवरी 2025 में, कैट की एक खंड पीठ जिसमें हरविंदर ओबेराय और बी. आनंद शामिल थे, ने बिना किसी कारण का उल्लेख किए स्वयं को सुनवाई से अलग कर लिया था। इस क्रम में उन्होंने रजिस्ट्री को निर्देश दिया था कि भविष्य में चतुर्वेदी के मामले उनके समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध न किए जाएँ। यह पीठ उस समय चतुर्वेदी के वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट को तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा द्वारा खराब किये जाने संबंधित मामले कि सुनवाई कर रही थी जब संजीव चतुर्वेदी ने एम्स दिल्ली में मुख्या सतर्कता अधिकारी रहते हुए भ्रष्टाचार के कई मामलों को उजागर किया था। इससे पहले, वर्ष 2018 में, उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने आदेश दिया था कि तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा द्वारा संजीव चतुर्वेदी के वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट को खराब किये जाने सेे संबंधित मामला केवल कैट की नैनीताल बेंच में ही सुना जाएगा ना कि दिल्ली बेंच में जैसा कि केंद्र सरकार चाह रही थी। इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार के रवैये को प्रथम दृष्ट्या प्रतिशोधात्मक बताते हुए केंद्र सरकार पर ₹ 25,000 का जुर्माना भी लगाया था। इस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा और जुर्माने की राशि को बढ़ाकर ₹50,000 कर दिया था।
आखिर कहां औऱ कैसे मिलेगा न्याय? IFS संजीव चतुर्वेदी के मामले 16वें जज ने भी स्वयं को अलग किया
वर्ष 2021 में, उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने चतुर्वेदी के केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से संबंधित एक अन्य मामले में, जिसमें उन्होंने निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों की केंद्र सरकार में लेटरल एंट्री से जुड़ी अनियमितताओं को भी उजागर किया था, पर अपने पूर्व रुख को दोहराया। इस निर्णय को केंद्र सरकार ने पुनः सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। मार्च 2023 में, सर्वोच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने इस मामले को एक बड़ी पीठ के पास भेज दिया था । नवंबर 2013 में, सर्वोच्च न्यायालय के तत्कालीन न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई ने संजीव चतुर्वेदी द्वारा दायर एक मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया था। इस मामले में चतुर्वेदी ने हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और राज्य के अन्य वरिष्ठ राजनीतिज्ञों तथा नौकरशाहों की भ्रष्टाचार के विभिन्न मामलों में भूमिका की सीबीआई जांच की मांग की थी। साथ ही अपने ऊपर किए गए उत्पीड़न का भी उल्लेख किया था। बाद में, अगस्त 2016 में, सर्वोच्च न्यायालय केे ही एक अन्य न्यायाधीश यू.यू. ललित ने भी इस मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया था। अप्रैल 2018 में, शिमला की एक अदालत के न्यायाधीश ने स्वयं को उस मानहानि मामले की सुनवाई से अलग कर लिया था, जिसे उस समय के हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव विनीत चौधरी द्वारा संजीव चतुर्वेदी के खिलाफ दायर किया गया था। यह मानहानि मामला उस समय दायर किया गया था जब चतुर्वेदी ने सीवीओ, एम्स के रूप में अपनी जांच में पाए गए विनीत चौधरी के वित्तीय अनियमितताओं के मामलों की स्थिति रिपोर्ट हिमाचल प्रदेश सरकार को भेजी थी। मार्च 2019 में, केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट), दिल्ली के तत्कालीन अध्यक्ष, जस्टिस एल. नरसिंहान रेड्डी ने संजीव चतुर्वेदी के विभिन्न स्थानांतरण याचिकाओं से संबंधित मामलों की सुनवाई से कुछ ‘दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं’ का हवाला देते हुए स्वयं को अलग कर लिया था। फरवरी 2021 में, केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण, दिल्ली के एक अन्य न्यायाधीश, आर.एन. सिंह ने भी संजीव चतुर्वेदी की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से संबंधित मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया था। नवंबर 2023 में, केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के एक खंड पीठ, जिसमें मनीष गर्ग और छबीलेंद्र रौल शामिल थे, ने संजीव चतुर्वेदी के उस मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया था, जो मंत्रिमंडल की नियुक्ति संबंधी समिति से संयुक्त सचिव स्तर पर चतुर्वेदी के इम्पैनलमेंट से संबंधित दस्तावेजों की मांग से जुड़ा था। इस वर्ष जनवरी में, एक अन्य केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) के न्यायाधीश, जस्टिस राजीव जोशी ने भी चतुर्वेदी के केंद्र सरकार में लोकपाल में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया था।
पंजाब : मोगा पुलिस ने ड्रग तस्करी मॉड्यूल का किया भंडाफोड़, 5 किलो हेरोइन बरामद
मोगा । पंजाब की मोगा पुलिस ने एक खुफिया जानकारी के आधार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए ड्रग तस्करी के एक अंतरराष्ट्रीय मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। पंजाब पुलिस ने यह जानकारी अपने सोशल मीडिया एक्स हैंडल पर दी है। इस ऑपरेशन में पुलिस ने तीन तस्करों को गिरफ्तार किया और उनके कब्जे से 5 किलोग्राम हेरोइन बरामद की। यह कार्रवाई पंजाब में नशे के खिलाफ चल रही मुहिम में एक महत्वपूर्ण कदम है। पुलिस के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में पता चला है कि गिरफ्तार किए गए तस्कर विदेशी ड्रग तस्करों के साथ सीधे संपर्क में थे। यह एक मजबूत सीमा पार नेटवर्क का संकेत देता है, जो नशे की तस्करी को अंजाम दे रहा था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, तस्करों का यह नेटवर्क संगठित तरीके से काम कर रहा था और इसके तार कई देशों से जुड़े हो सकते हैं। वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए मोगा के सदर पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
पंजाब : मोगा पुलिस ने ड्रग तस्करी मॉड्यूल का किया भंडाफोड़, 5 किलो हेरोइन बरामद
पुलिस अब इस नेटवर्क के पूरे गठजोड़ को उजागर करने के लिए गहन जांच कर रही है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस मॉड्यूल के पीछे और कौन-कौन शामिल है और इसका नेटवर्क कितना व्यापक है। पंजाब पुलिस ने ड्रग तस्करी के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति को दोहराया है। पंजाब पुलिस ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, “हम ड्रग सिंडिकेट को पूरी तरह खत्म करने और पंजाब को नशामुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” इस कार्रवाई को पंजाब पुलिस की नशे के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। मोगा पुलिस और पंजाब पुलिस की इस सक्रियता से नशा तस्करों में दहशत का माहौल है। आम जनता ने भी इस कार्रवाई की सराहना की है और पुलिस से नशे के इस जाल को पूरी तरह खत्म करने की मांग की है। जांच के अगले चरणों में और भी बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड: ₹23.56 लाख की ठगी के संगठित गिरोह का एक और सदस्य गिरफ्तार, नाबालिग निरुद्ध
जयपुर। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को डराकर ठगी करने वाले संगठित साइबर गिरोह के खिलाफ कार्रवाई करते हुए साइबर थाना राजस्थान पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने 75 वर्षीय परिवादी से ₹23 लाख 56 हज़ार की ठगी के मामले में एक और सक्रिय सदस्य अनिल कुमार कुमावत को गिरफ्तार किया है, जबकि एक बाल अपचारी को भी निरूद्ध किया गया है। यह कार्रवाई उप महानिरीक्षक पुलिस विकास शर्मा के निर्देशन और पुलिस अधीक्षक साइबर क्राईम शान्तनु कुमार के सुपरवीजन में की गई। डीआईजी शर्मा ने बताया कि 27 मई को जयपुर निवासी एक 75 वर्षीय बुजुर्ग को मुलजिमों ने फर्जी पुलिस और सीबीआई अधिकारी बनकर फोन किया। उन्होंने परिवादी को डिजिटल अरेस्ट करने की धमकी दी और डर पैदा करके उनसे ₹23,56,000/- की ठगी कर ली। इस मामले में पुलिस पहले ही सुरेश कुमार, प्रहलाद कुमावत, ओमप्रकाश, भुपेश, वशुल सन्नी कुमार, रेहान मकन्दर, रितेश शर्मा और कमलेश कुमार सेरावत को गिरफ्तार कर चुकी है। कमीशन के लिए उपलब्ध कराया पत्नी का खाता
डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड: ₹23.56 लाख की ठगी के संगठित गिरोह का एक और सदस्य गिरफ्तार, नाबालिग निरुद्ध
गिरफ्तार आरोपी अनिल कुमार कुमावत (28) निवासी नया बास रेनवाल जयपुर ग्रामीण इस गिरोह के लिए लाभान्वित खाताधारक के रूप में काम कर रहा था। जांच में सामने आया कि ठगी की कुल राशि ₹23.56 लाख में से एक हिस्सा ₹63,657 अनिल कुमावत की पत्नी के बैंक अकाउंट में जमा हुआ था। अनुसंधान में यह भी पता चला कि उसकी पत्नी के अकाउंट में अन्य पीड़ितों की भी ₹12,50,000/- की ठगी की राशि आई थी। अनिल कुमावत ने स्वीकार किया कि उसने अपनी पत्नी का बैंक खाता ऑनलाइन खुलवाकर ठगों को दिया, जिसमें ठगी की राशि आती थी। वह यह राशि निकालकर साइबर ठगों को उपलब्ध कराता था और इसके बदले में कमीशन प्राप्त करता था। चार राज्यों से जुड़ा कनेक्शन पुलिस की पूछताछ में यह ज्ञात हुआ है कि अनिल कुमावत की पत्नी के बैंक खाते में चार अन्य राज्यों से भी साइबर ठगी की शिकायतें प्राप्त हुई हैं। आरोपी को गुरुवार को गिरफ्तार किया गया और गहन पूछताछ के बाद न्यायिक अभिरक्षा में भिजवाया गया है। मामले में आगे की जांच और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
अलवर में बड़ा खुलासा: आईएसआई के लिए जासूसी कर रहा था युवक, राजस्थान इंटेलिजेंस की कार्रवाई में गिरफ्तार
अलवर। राजस्थान इंटेलिजेंस ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए जासूसी करने के आरोप में अलवर जिले के गोविंदगढ़ निवासी मंगत सिंह को गिरफ्तार किया है। आरोपी को शासकीय गुप्त बात अधिनियम 1923 के तहत गिरफ्तार किया गया है। बताया जा रहा है कि मंगत सिंह पिछले दो वर्षों से पाकिस्तानी हैंडलरों के संपर्क में था और सोशल मीडिया के माध्यम से देश की गोपनीय व सामरिक सूचनाएं साझा कर रहा था। ऑपरेशन सिंदूर के बाद राजस्थान इंटेलिजेंस ने राज्य के सामरिक महत्व वाले क्षेत्रों पर विशेष निगरानी शुरू की थी। अलवर, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से सटा हुआ और सामरिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है, वहां इंटेलिजेंस की नजरें लगातार बनी हुई थीं। इसी दौरान इंटेलिजेंस अधिकारियों ने अलवर स्थित छावनी क्षेत्र में कुछ संदिग्ध गतिविधियां देखीं। जब इन गतिविधियों की गहराई से जांच की गई तो पाया गया कि गोविंदगढ़ निवासी मंगत सिंह अक्सर छावनी क्षेत्र के आसपास घूमता रहता था और अपने मोबाइल से वहां की तस्वीरें व वीडियो बना रहा था। जांच में सामने आया कि आरोपी मंगत सिंह की मुलाकात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के हैंडलरों से हुई थी। बताया जाता है कि वह “ईशा शर्मा” नाम की एक महिला हैंडलर के संपर्क में था, जिसने हनीट्रैप और धनराशि के लालच में उसे अपने जाल में फंसा लिया। इस महिला एजेंट ने मंगत सिंह को अलवर शहर के छावनी इलाकों, सैन्य इकाइयों और अन्य सामरिक स्थलों से जुड़ी जानकारी भेजने को कहा। मंगत सिंह ने न सिर्फ तस्वीरें और वीडियो साझा किए, बल्कि कुछ रणनीतिक जानकारियां भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए भेजीं।सूत्रों के अनुसार, मंगत सिंह की गतिविधियां ऑपरेशन सिंदूर से पहले और उसके बाद भी जारी रहीं। वह लगातार आईएसआई से जुड़े लोगों के संपर्क में था। राजस्थान इंटेलिजेंस और केंद्रीय एजेंसियों ने जब आरोपी के मोबाइल फोन और सोशल मीडिया खातों की तकनीकी जांच की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। उसके मोबाइल से मिले डेटा, चैट हिस्ट्री और फोटो के आधार पर पुष्टि हुई कि वह विदेशी एजेंसी के संपर्क में था और संवेदनशील जानकारी साझा कर चुका था। पूछताछ के दौरान मंगत सिंह ने स्वीकार किया कि उसने “ईशा शर्मा” नाम की महिला से प्रेरित होकर यह काम किया। उसने यह भी कबूल किया कि इसके बदले उसे धनराशि का लालच दिया गया था। जांच एजेंसियों को उसके पास से कई गोपनीय फाइलें, लोकेशन डेटा और विदेशी स्रोतों से आए कुछ एन्क्रिप्टेड संदेश भी मिले हैं।
अलवर में बड़ा खुलासा: आईएसआई के लिए जासूसी कर रहा था युवक, राजस्थान इंटेलिजेंस की कार्रवाई में गिरफ्तार
राजस्थान इंटेलिजेंस ने जब सभी तकनीकी व मानवीय साक्ष्यों की पुष्टि कर ली, तब 10 अक्टूबर 2025 को स्पेशल पुलिस स्टेशन (सीआईडी इंटेलिजेंस), जयपुर में मंगत सिंह के खिलाफ शासकीय गुप्त बात अधिनियम 1923 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर जयपुर स्थित केंद्रीय पूछताछ केंद्र में रिमांड पर लिया गया, जहां विभिन्न एजेंसियां उससे लगातार पूछताछ कर रही हैं। सूत्रों का कहना है कि जांच का दायरा अब उस नेटवर्क तक फैलाया जा रहा है, जो संभवतः राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली के सीमावर्ती क्षेत्रों तक फैला हो सकता है। एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि मंगत सिंह के अलावा और कौन इस जासूसी गतिविधि में शामिल है और कितनी सूचनाएं पहले ही पाकिस्तान तक पहुंच चुकी हैं। अलवर का सामरिक महत्व इस मामले को और भी गंभीर बना देता है, क्योंकि यह क्षेत्र राजधानी दिल्ली से बेहद नजदीक है और यहां कई सैन्य प्रतिष्ठान मौजूद हैं। ऐसे में इस क्षेत्र से जुड़ी किसी भी संवेदनशील जानकारी का बाहर जाना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा माना जाता है। राजस्थान इंटेलिजेंस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि राज्य में सामरिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर निगरानी और अधिक सख्त की जाएगी। एजेंसियां अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे नेटवर्क की पहचान कर रही हैं, जो किसी न किसी रूप में विदेशी एजेंसियों के संपर्क में हो सकते हैं। फिलहाल आरोपी मंगत सिंह से पूछताछ जारी है और उम्मीद जताई जा रही है कि पूछताछ के दौरान और भी अहम खुलासे हो सकते हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने आम जनता से अपील की है कि अगर किसी व्यक्ति की गतिविधियां संदिग्ध प्रतीत हों या वह सोशल मीडिया पर देश की सामरिक जानकारी साझा करता दिखाई दे, तो तुरंत प्रशासन को सूचित करें, ताकि इस तरह के खतरनाक नेटवर्क को समय रहते तोड़ा जा सके।
मुंबई : नौकरी के नाम पर करोड़ों की ठगी, फर्जी आईएएस अधिकारी गिरफ्तार
मुंबई । मुंबई की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया। पुलिस ने खुद को आईएएस अधिकारी बताने वाले एक ठग को गिरफ्तार किया है, जो अब तक 36 नौकरी के इच्छुक युवाओं से कुल 2.88 करोड़ रुपए की ठगी कर चुका है। आरोपी की पहचान सोलापुर जिले के बार्शी निवासी 35 वर्षीय नीलेश राठौड़ के रूप में हुई है। वह खुद को स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (एसएससी) में उप सचिव बताकर लोगों को सरकारी नौकरी का झांसा देता था। मुंबई पुलिस की जांच में सामने आया है कि उसने आयकर विभाग में इंस्पेक्टर और सहायक जैसे पदों के लिए फर्जी भर्तियों का झांसा देकर लाखों रुपए वसूले। सहार पुलिस स्टेशन में आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 318, 319, 336, 338 और 340 के तहत केस दर्ज किया गया है। यह मामला तब सामने आया जब नवी मुंबई निवासी संतोष खरपुड़े ने शिकायत दर्ज करवाई। उन्होंने बताया कि आरोपी ने उनसे और अन्य कई उम्मीदवारों से बड़ी रकम वसूली। सहायक पद के लिए 4 लाख और निरीक्षक पद के लिए 6 लाख रुपए की मांग की गई थी।
मुंबई : नौकरी के नाम पर करोड़ों की ठगी, फर्जी आईएएस अधिकारी गिरफ्तार
नीलेश राठौड़ ने मई 2023 में अंधेरी ईस्ट के एक होटल में इंटरव्यू का नाटक रचा और हर उम्मीदवार से करीब 10 लाख रुपए वसूल लिए। आरोपी ने फर्जी नियुक्ति पत्र भी दिए, सरकारी अस्पतालों में फर्जी मेडिकल जांच कराई और पुलिस वेरिफिकेशन के जाली दस्तावेज भी उपलब्ध कराए ताकि पूरी प्रक्रिया असली लगे। कुछ महीनों तक जब पीड़ितों को नियुक्ति पत्र नहीं मिला, तो उन्होंने खुद आयकर विभाग से संपर्क किया और उन्हें पता चला कि ऐसी कोई भर्ती प्रक्रिया चल ही नहीं रही है। जब पीड़ितों ने राठौड़ से जवाब मांगा, तो उसने शुरुआत में पैसे लौटाने का वादा किया, लेकिन बाद में कॉल और मैसेज का जवाब देना बंद कर दिया। इसके बाद सहार पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज हुआ और ईओडब्ल्यू ने जांच शुरू की। जांच में यह भी सामने आया है कि राठौड़ ने कई फर्जी दस्तावेज तैयार किए और यह तक दावा किया कि वह दिल्ली में अपने संपर्कों के जरिए भारतीय सेना में भी नौकरी दिलवा सकता है। मुंबई पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया है और मामले की गहराई से जांच जारी है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या आरोपी के साथ और लोग भी इस ठगी में शामिल थे।