20 लाख के मोबाइल की हेराफेरी, गढ़ी डकैती की फर्जी कहानी, दिल्ली पुलिस ने 24 घंटे में खोली पोल
नई दिल्ली । दिल्ली पुलिस ने फर्जी डकैती के मामले को 24 घंटे में सुलझाते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने लगभग 20 लाख रुपए की कीमत के महंगे मोबाइल फोन की हेराफेरी करने के लिए बंदूक के बल पर फर्जी डकैती का नाटक रचा था। दिल्ली पुलिस ने 24 घंटे में पर्दाफाश करते हुए पूरा सामान बरामद किया है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, थाना शकरपुर के अंतर्गत विकास मार्ग के पास लगभग 20 लाख रुपए मूल्य के महंगे मोबाइल फोन की लूट के संबंध में एक पीसीआर कॉल मिली थी। कूरियर बॉय के रूप में काम करने वाले शिकायतकर्ता आशीष कुमार ने बताया कि जब वह अपने स्कूटर से करोल बाग में मोबाइल फोन डिलीवर कर रहा था, तो विकास मार्ग फ्लाईओवर के पास एक अन्य स्कूटर पर सवार दो अज्ञात व्यक्तियों ने उसे रोक लिया, उन्हें बंदूक से धमकाया और 25 मोबाइल फोन (14 आईफोन 17 और 10 वनप्लस भी शामिल) से भरा उनका बैकपैक छीन लिया। शिकायत के आधार पर शकरपुर थाने में एफआईआर दर्ज की गई और जांच शुरू की गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए पूर्वी जिले के स्पेशल स्टाफ को कथित लुटेरों का पता लगाने और मामले को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाने का काम सौंपा गया। इस मामले में एक टीम भी गठित की गई।
20 लाख के मोबाइल की हेराफेरी, गढ़ी डकैती की फर्जी कहानी, दिल्ली पुलिस ने 24 घंटे में खोली पोल
टीम ने तकनीकी व मैनुअल जांच की, बताए गए रास्ते में लगे कई सीसीटीवी फुटेज खंगाले और शिकायतकर्ता की ओर से बताई गई गतिविधियों के क्रम का विश्लेषण किया। हालांकि, जाँच के दौरान शिकायतकर्ता के बयान और घटनाक्रम में कई विसंगतियां और विरोधाभास मिले। तकनीकी निगरानी और स्थानीय खुफिया जानकारी ने आगे बताया कि डकैती की कहानी संदिग्ध थी। पूछताछ में शिकायतकर्ता आशीष कुमार टूट गया और उसने मोबाइल फोन की खेप हड़पने के लिए अपने साथियों के साथ मिलकर फर्जी डकैती की साजिश रचने की बात कबूल की। टीम ने साजिश में शामिल सभी आरोपियों की तुरंत पहचान की और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पता चला कि आशीष कुमार ने स्थानीय मोबाइल फोन विक्रेता शमीम और उसके साथियों अमन व तनवीर के साथ मिलकर डकैती की झूठी कहानी रची थी, मोबाइल फोन बेचकर और उससे मिलने वाले पैसे आपस में बांट लिए थे। दिल्ली पुलिस ने इस खुलासे के बाद कार्रवाई करते हुए चोरी का सारा सामान 24 घंटे के भीतर बरामद कर लिया। फिलहाल, मामले में आगे की कार्रवाई जारी है।
लखनऊ की साइबर क्राइम सेल की बड़ी कार्रवाई, ऑनलाइन ठगी के 3 आरोपी गिरफ्तार
लखनऊ। लखनऊ की साइबर क्राइम सेल और साइबर थाना की संयुक्त टीम ने बड़ा खुलासा किया है। टीम ने फर्जी कंपनियां बनाकर साइबर ठगी करने वाले गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिनमें इंडसइंड बैंक का डिप्टी ब्रांच मैनेजर भी शामिल है। पकड़े गए आरोपियों के नाम उत्तम विश्वास, उमाकांत वर्मा और राजीव विश्वास हैं। ये लोग मिलकर देश के कई राज्यों में ऑनलाइन ठगी के पैसों को फर्जी फर्मों के खातों में ट्रांसफर करवाते थे। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि दो व्यक्ति, उमाकांत एवं राजीव विश्वास, अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर साइबर ठगी कर लोगों से धोखाधड़ी कर रहे हैं। टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोनों को पकड़ लिया। पूछताछ में उमाकांत ने बताया कि वे अपनी फर्जी फर्म आकाश रियल एस्टेट एंड डेवलपर्स प्रा. लि. के नाम से खाता खुलवाने की योजना बना रहे थे। आगे पूछताछ में उमाकांत ने स्वीकार किया कि वह वास्तविक रूप से रियल एस्टेट का कार्य नहीं करता, बल्कि विभिन्न नामों से फर्जी फर्म बनाकर अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाता है, जिनके माध्यम से करोड़ों रुपए की साइबर ठगी की जाती है। उसने बताया कि इस पूरे नेटवर्क में उत्तम विश्वास, जो इंडसइंड बैंक चिनहट, लखनऊ में डिप्टी ब्रांच मैनेजर हैं, सक्रिय रूप से सहयोग करते हैं।
लखनऊ की साइबर क्राइम सेल की बड़ी कार्रवाई, ऑनलाइन ठगी के 3 आरोपी गिरफ्तार
उमाकांत ने बताया कि अब तक ठगी की रकम में से लगभग 20 करोड़ रुपए में से 10-20 प्रतिशत कमीशन के रूप में उत्तम विश्वास को दिए गए हैं, जिनमें से 1 लाख गूगल पे से तथा 7-8 लाख नकद दिए गए। उक्त सूचना पर टीम ने कुर्सी रोड स्थित किरन एन्क्लेव पहुंचकर उत्तम विश्वास को हिरासत में लिया। पूछताछ में उसने अपना नाम उत्तम कुमार विश्वास पुत्र सुभाष कुमार विश्वास (उम्र 44 वर्ष) निवासी 843, किरन एन्क्लेव, थाना गुडम्बा, लखनऊ बताया तथा अपराध में संलिप्तता स्वीकार की। अब तक की जांच में सामने आया है कि सिर्फ तीन खातों के जरिए करीब छह करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ और इस गिरोह ने दस फर्जी फर्मों के नाम पर खाते खुलवाए थे। बिहार, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, हरियाणा समेत सात राज्यों में 40 से ज्यादा साइबर ठगी के मामलों में इन खातों का इस्तेमाल हुआ है। पुलिस ने तीनों के कब्जे से 30,000 नकद, छह एटीएम कार्ड, पांच मोबाइल फोन, दो आधार कार्ड और एक पैन कार्ड बरामद किया है। फिलहाल, तीनों के खिलाफ साइबर थाना लखनऊ में मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच जारी है।
बोकारो में आईआरबी जवान हत्याकांड का खुलासा, मुख्य आरोपी सहित दो गिरफ्तार
बोकारो।झारखंड के बोकारो जिले के चास थाना क्षेत्र में 27 अक्टूबर को हुए आईआरबी जवान अजय कुमार हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। इस मामले में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने धनबाद से मुख्य आरोपी बलराम तिवारी और उसके सहयोगी सूरज कुमार को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार बलराम तिवारी के पास से एक देसी पिस्तौल, तीन जिंदा कारतूस और घटना में प्रयुक्त बाइक भी बरामद की गई है। चास के एसडीपीओ प्रवीण कुमार सिंह ने बताया कि घटना छठ महापर्व के संध्या अर्घ्य के दौरान हुई थी। चास थाना क्षेत्र की आदर्श कॉलोनी स्थित गायघाट छठ घाट पर बलराम तिवारी और अंकित मंडल के बीच एक युवती को लेकर विवाद हो गया था। विवाद बढ़ने पर दोनों के बीच हाथापाई शुरू हो गई। इस दौरान मौके पर मौजूद आईआरबी जवान अजय कुमार ने बीच-बचाव करने की कोशिश की और बलराम तिवारी को थप्पड़ मार दिया।
बोकारो में आईआरबी जवान हत्याकांड का खुलासा, मुख्य आरोपी सहित दो गिरफ्तार
इससे नाराज बलराम तिवारी घर गया और पिस्तौल लाकर अजय कुमार को गोली मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी फरार हो गया, जिसे एसआईटी ने तकनीकी जांच और गुप्त सूचना के आधार पर धनबाद से गिरफ्तार किया। पुलिस जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी बलराम तिवारी का आपराधिक इतिहास रहा है। उसके खिलाफ चास थाना और सेक्टर-12 थाना में केस दर्ज हैं। सह-आरोपी सूरज कुमार उर्फ पप्पू कुमार के खिलाफ भी चोरी और वाहन चोरी के आरोप में चास थाना कांड संख्या 337/23 दर्ज है। आईआरबी जवान की हत्या के बाद इलाके में तनाव व्याप्त हो गया था। इसके विरोध में आक्रोशित लोगों ने बोकारो-चास मुख्य मार्ग को करीब छह घंटे तक जाम रखा था। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और घटना में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है
मुंबई एयरपोर्ट पर ड्रग्स-सोने की तस्करी को बड़ा झटका; 18 करोड़ का माल जब्त, तीन गिरफ्तार
मुंबई। छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (सीएसएमआईए) पर सीमा शुल्क अधिकारियों की सतर्कता ने एक बार फिर तस्करों को करारा झटका दिया। प्रोफाइलिंग के आधार पर तीन अलग-अलग मामलों में 17.939 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक वीड (मारिजुआना) और 225 ग्राम कच्चा सोना जब्त किया गया। जब्त किए गए सोने का कुल अवैध बाजार मूल्य 18 करोड़ रुपए से अधिक का है। तीन यात्रियों को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के तहत गिरफ्तार किया गया। 5 नवंबर, 2025 तीन मामलों में कार्रवाई हुई। पहला मामला बैंकॉक से मुंबई की फ्लाइट से जुड़ा है। उड़ान संख्या एसएल 218 से बैंकॉक से मुंबई पहुंचे एक यात्री को प्रोफाइलिंग के दौरान रोका गया। सामान की गहन जांच में चेक-इन ट्रॉली बैग के अंदर छिपाए गए 5.922 किलोग्राम संदिग्ध हाइड्रोपोनिक वीड बरामद हुए। इसका अवैध बाजार मूल्य लगभग 5.92 करोड़ रुपए आंका गया है। हाइड्रोपोनिक वीड, जो पोषक द्रव्यों में उगाई जाती है, अपनी उच्च शुद्धता के कारण युवाओं में लोकप्रिय है। आरोपी ने पूछताछ में कबूल किया कि वह थाईलैंड से माल लाया था, जहां यह आसानी से उपलब्ध होता है। यात्री को तत्काल गिरफ्तार कर एनडीपीएस के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। सीमा शुल्क अधिकारियों ने बताया कि ट्रॉली बैग के डबल बॉटम में नशीला पदार्थ छिपाया गया था, जो एक्स-रे से पकड़ा गया।
मुंबई एयरपोर्ट पर ड्रग्स-सोने की तस्करी को बड़ा झटका; 18 करोड़ का माल जब्त, तीन गिरफ्तार
दूसरे मामले में चॉकलेट चिप्स में छुपाकर ड्रग्स की तस्करी की जा रही थी। उड़ान संख्या एआई 2338 से बैंकॉक से आने वाले दो यात्रियों के साथ हुई। जांच में उनके चेक-इन बैग से चॉकलेट और चिप्स के पैकेटों के अंदर 12.017 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक वीड बरामद किया गया। इसका मूल्य 12.02 करोड़ रुपए है। तस्करों ने मिठाई और स्नैक्स के पैकेटों को खोखला कर नशीला माल भरा था, जो सामान्य जांच से बचने का प्रयास था। दोनों यात्रियों को एनडीपीएस के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया। तीसरा मामला दुबई से सोने की चूड़ियों की तस्करी से जुड़ा है। उड़ान संख्या एआई2202 पर सवार एक यात्री के खिलाफ हुई। तलाशी में उसके शरीर पर छिपी 24 कैरेट कच्ची सोने की आठ चूड़ियां (कुल 225 ग्राम) बरामद हुईं। इनकी कीमत 25.64 लाख रुपए है। तस्कर ने चूड़ियों को कमर पट्टी में बांध रखा था, जो स्कैनर से संदिग्ध लगी। आरोपी को सीमा शुल्क अधिनियम के तहत हिरासत में लिया गया।
जयपुर–आगरा हाईवे पर भीषण हादसा : कार की टक्कर से बाइक सवार की मौत, एक गंभीर
राजस्थान के दौसा ज़िले में गुरुवार तड़के एक दर्दनाक सड़क हादसे ने एक परिवार की खुशियाँ छीन लीं। जयपुर–आगरा नेशनल हाईवे-21 पर खेड़ली मोड़ के पास तेज़ रफ़्तार कार ने सामने से आ रही बाइक को इतनी ज़ोरदार टक्कर मारी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए। हादसे में बाइक सवार दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए, जिनमें से एक की इलाज के दौरान मौत हो गई। यह दुर्घटना न केवल मानवीय त्रासदी का प्रतीक है, बल्कि हमारे समाज में बढ़ती सड़क लापरवाही और रफ़्तार की होड़ का भयावह उदाहरण भी प्रस्तुत करती है।
हादसे की पूरी घटना
जानकारी के अनुसार, यह हादसा गुरुवार तड़के लगभग चार बजे हुआ। उस समय सड़क पर ट्रैफिक अपेक्षाकृत कम था, लेकिन हाईवे पर अक्सर की तरह कुछ वाहन तेज़ रफ़्तार में दौड़ रहे थे। कठूमर, ज़िला अलवर निवासी मोहन महावर (आयु लगभग 35 वर्ष) और उनके रिश्तेदार रामेश्वर महावर (आयु लगभग 32 वर्ष) किसी निजी काम से दौसा की ओर जा रहे थे। जैसे ही वे खेड़ली मोड़ के पास पहुँचे, सामने से आ रही एक कार ने अचानक संतुलन खो दिया और बाइक को सीधा टक्कर मार दी।
टक्कर इतनी ज़ोरदार थी कि बाइक के पुर्ज़े सड़क पर बिखर गए और दोनों सवार कई फीट दूर जा गिरे। राहगीरों ने जब यह दृश्य देखा तो उन्होंने तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। कुछ स्थानीय लोगों ने घायल मोहन और रामेश्वर को उठाने का प्रयास किया और उन्हें प्राथमिक उपचार देने की कोशिश की, लेकिन हालत गंभीर देख तुरंत जिला अस्पताल दौसा भेजा गया।
पुलिस और राहत कार्य
सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस घटनास्थल पर पहुँची। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहन और बाइक को सड़क किनारे हटवाया ताकि यातायात सुचारू रूप से चलता रहे। मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ कर हादसे का ब्यौरा जुटाया गया। पुलिस ने बताया कि कार चालक घटनास्थल से फरार हो गया था, लेकिन वाहन के अवशेषों और नंबर प्लेट के आधार पर उसकी पहचान की जा रही है।
जिला अस्पताल पहुँचने पर डॉक्टरों ने मोहन महावर को मृत घोषित कर दिया, जबकि रामेश्वर महावर को गंभीर हालत में भर्ती किया गया है। डॉक्टरों के अनुसार, रामेश्वर के सिर और पैरों में गंभीर चोटें आई हैं और उसकी स्थिति अभी भी नाज़ुक बनी हुई है। पुलिस ने मृतक के परिजनों को सूचित कर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवाया।
परिजनों में मातम
मोहन महावर की मौत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गाँव कठूमर पहुँची, पूरे गाँव में मातम छा गया। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। स्थानीय लोगों के अनुसार, मोहन मेहनती और सौम्य स्वभाव के व्यक्ति थे, जो अपने परिवार की जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाते थे। उनकी अचानक मौत ने परिवार पर दुखों का पहाड़ तोड़ दिया है।
रामेश्वर महावर, जो इस हादसे में गंभीर रूप से घायल हैं, उनके भी परिवारजन अस्पताल पहुँचे और उनके उपचार के लिए प्रशासन से सहायता की मांग की है।
सड़क सुरक्षा पर उठे सवाल
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और रफ़्तार पर नियंत्रण की आवश्यकता पर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। जयपुर–आगरा नेशनल हाईवे (NH-21) देश के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक है। इस मार्ग पर भारी वाहन, निजी कारें और दोपहिया वाहन निरंतर चलते रहते हैं। इसके बावजूद कई जगहों पर उचित स्पीड लिमिट का पालन नहीं किया जाता, और कुछ स्थानों पर रात्रि के समय रोशनी की व्यवस्था भी अपर्याप्त है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि खेड़ली मोड़ क्षेत्र में पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। मोड़ के पास संकेतक बोर्ड और रिफ्लेक्टर लगे हैं, लेकिन अधिकांश वाहन चालक तेज़ रफ़्तार में चलते हुए उन पर ध्यान नहीं देते। ट्रैफिक विभाग द्वारा समय-समय पर चालान और जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं, मगर परिणाम अपेक्षित नहीं दिखाई दे रहे हैं।
जयपुर–आगरा हाईवे पर भीषण हादसा : कार की टक्कर से बाइक सवार की मौत, एक गंभीर
विशेषज्ञों की राय
ट्रैफिक विशेषज्ञों के अनुसार, सड़क हादसों के मुख्य कारणों में लापरवाही, तेज़ रफ़्तार, नशे की हालत में ड्राइविंग, और सड़क डिज़ाइन की खामियाँ शामिल हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के अनुसार, भारत में हर साल लाखों सड़क दुर्घटनाएँ होती हैं, जिनमें से बड़ी संख्या मानव त्रुटियों के कारण होती है। यदि वाहन चालक नियमों का पालन करें और प्रशासन सख्ती से मॉनिटरिंग करे, तो इस तरह की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
प्रशासन की कार्रवाई
सदर थाना पुलिस ने मृतक मोहन महावर के परिजनों की रिपोर्ट के आधार पर कार चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि हादसे की जांच जारी है। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि पता चल सके कि कार किस दिशा से आ रही थी और टक्कर कैसे हुई। वाहन के अवशेषों के आधार पर कार का रजिस्ट्रेशन नंबर पता लगाया गया है, और चालक की तलाश की जा रही है।
जनभावना और संदेश
इस हादसे ने न केवल एक परिवार की जिंदगी बदल दी, बल्कि समाज को फिर एक बार चेतावनी दी है कि सड़क पर रफ़्तार कभी जीत नहीं सकती। कुछ पल की लापरवाही ज़िंदगीभर का पछतावा बन सकती है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि NH-21 पर स्पीड मॉनिटरिंग कैमरे लगाए जाएँ, रात्रिकालीन पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए और दुर्घटनाग्रस्त स्थलों पर चेतावनी बोर्डों की संख्या बढ़ाई जाए।
मोहन महावर की असमय मौत ने सबको झकझोर दिया है। उनके अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में कहा कि अगर सड़क सुरक्षा के नियमों का कड़ाई से पालन होता, तो शायद आज मोहन ज़िंदा होते।
निष्कर्ष
दौसा का यह हादसा केवल एक समाचार नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा पर गंभीर चिंतन का विषय है। हर चालक, चाहे वह कार चलाए या बाइक, को यह समझना होगा कि सड़क पर जिम्मेदारी से वाहन चलाना ही जीवन की सुरक्षा का सबसे बड़ा उपाय है। प्रशासन, पुलिस और जनता — तीनों को मिलकर ही ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि भविष्य में किसी और मोहन महावर की जान रफ़्तार की भेंट न चढ़े।
मुंबई में छत्रपति संभाजी महाराज पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाला युवक गिरफ्तार
मुंबई । छत्रपति संभाजी महाराज को लेकर सोशल मीडिया पर की गई एक आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में मुंबई की वाकोला पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी रिक्शा चालक की पहचान मोहम्मद सिद्दीकी उद्दीन के रूप में हुई है। यह पूरी घटना एक इंस्टाग्राम पोस्ट से शुरू हुई। शिकायतकर्ता ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर छत्रपति संभाजी महाराज से जुड़ी कंटेंट पोस्ट किया था। शिकायतकर्ता के मुताबिक, आरोपी ने संभाजी महाराज के संदर्भ में औरंगजेब से जुड़ा एक बेहद विवादित और अपमानजनक कमेंट किया। शिकायत मिलने के बाद वाकोला पुलिस ने तुरंत मामले को संज्ञान में लिया और पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की। उसके बाद पुलिस टीम ने आरोपी की तलाश शुरू की और उसे गिरफ्तार कर लिया। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी से उसके कमेंट के पीछे की वजह पूछी गई है। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि समाज में तनाव और विवाद पैदा करने की कोशिश जैसा है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
मुंबई में छत्रपति संभाजी महाराज पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाला युवक गिरफ्तार
वाकोला पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि मामले की आगे की जांच जारी है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या आरोपी ने इससे पहले भी इस तरह के कोई विवादित पोस्ट किए थे या किसी समूह से प्रभावित होकर ऐसी टिप्पणी की गई। मुंबई पुलिस लगातार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नफरत फैलाने, आपत्तिजनक कंटेंट पोस्ट करने और सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने वाली गतिविधियों पर निगरानी रख रही है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से उपयोग करें और किसी भी प्रकार की उकसाने वाली या विवादित सामग्री से दूर रहें। इस घटना के बाद इलाके में लोग सोशल मीडिया पर पुलिस कार्रवाई का समर्थन करते दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि छत्रपति संभाजी महाराज जैसे वीर और ऐतिहासिक व्यक्तित्व का अपमान किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। वहीं, पुलिस प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि ऐसे मामलों में कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी ताकि सोशल मीडिया का दुरुपयोग रोका जा सके और समाज में शांति और सौहार्द बनाए रखा जा सके।
दिल्ली : चार साइबर आपराधिक गिरोहों का भंडाफोड़, छह आरोपी गिरफ्तार
नई दिल्ली । दिल्ली पुलिस की साइबर पश्चिम इकाई ने सप्ताह भर चले विशेष अभियान में चार अंतरराज्यीय साइबर आपराधिक गिरोहों का सफलतापूर्वक भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनसे कुल 34 लाख रुपए से अधिक की ठगी की राशि बरामद करने के सुराग मिले। अभियान के दौरान 7 मोबाइल फोन, 3 एटीएम कार्ड, 2 चेक बुक, 1 पासबुक और 2 सिम कार्ड बरामद हुए। यह कार्रवाई इंस्पेक्टर विकास कुमार (थाना प्रभारी, साइबर वेस्ट) और एसीपी ऑप्स विजय सिंह के नेतृत्व में डीसीपी पश्चिम शरद भास्कर दाराडे (आईपीएस) के पर्यवेक्षण में संपन्न हुई। शिवा (19 वर्ष, बेरोजगार, 8वीं पास) और पुनीत कुमार उर्फ साहिल (22 वर्ष, बेरोजगार, 12वीं पास) को गिरफ्तार किया गया। 8 जुलाई 2024 को एक शिकायत में पीड़ित ने बताया कि फर्जी व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर खुद को पुलिस अधिकारी बताकर ‘मनी लॉन्ड्रिंग जांच’ के बहाने 11,75,228 रुपए की ठगी की गई।
दिल्ली : चार साइबर आपराधिक गिरोहों का भंडाफोड़, छह आरोपी गिरफ्तार
एसआई अरविंद सिंह, हेड कांस्टेबल नरेश और कांस्टेबल कपिल की टीम ने तकनीकी विश्लेषण से हरिजन बस्ती, बल्लभगढ़ से दोनों को पकड़ा। जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी खच्चर बैंक खातों का संचालन कर ठगी की राशि ट्रांसफर करते थे। अंकित सोनकरिया (19 वर्ष, फूल विक्रेता, 8वीं पास) को उदयपुरिया गांव से गिरफ्तार किया। पीड़ित से गूगल मैप्स रिव्यू के नाम पर 2,74,520 रुपए ठगे गए। एसआई तरुण राणा, हेड कांस्टेबल अमर और कांस्टेबल दीपेंद्र की टीम ने छापेमारी की। आरोपी कमीशन आधारित बैंक खाते चलाता था। लवलेश कुमार (22 वर्ष, फार्मेसी डिप्लोमा, दवा पैकिंग फैक्ट्री कर्मी) और हरभजन (24 वर्ष, बीएससी स्नातक, निजी अस्पताल सहायक) को पकड़ा गया। शिकायतकर्ता गुरजीत सिंह से मीटर सत्यापन की फर्जी एपीके इंस्टॉल कर 16,52,000 रुपए ठगे, जिसमें 6 लाख रुपए नकली खातों से ट्रांसफर हुए। एसआई अंकुर ओहलान, हेड कांस्टेबल दीपक और कांस्टेबल भूपेंद्र की टीम ने गुड़गांव, नोएडा व अलीगढ़ में छापे मारे। आरोपी कई बैंकों में कमीशन आधारित खाते संचालित करते थे।
‘से हेल्प’ ऐप की मदद से दिल्ली पुलिस ने तोड़ा मानव तस्करी का रैकेट, 6 महिलाओं को बचाया
नई दिल्ली । दिल्ली पुलिस के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट ने आधुनिक तकनीक का कमाल दिखाते हुए पहाड़गंज इलाके में एक बड़े अनैतिक तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ कर दिया। ‘से हेल्प’ नामक वॉयस-एक्टिवेटेड इमरजेंसी ऐप के जरिए मिली सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने गैलेक्सी स्पा को सील कर दिया। इस ऑपरेशन में छह महिलाओं को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराया गया, जबकि एक महिला रिसेप्शनिस्ट को गिरफ्तार किया गया। बरामदगी में 2,000 रुपए की चिह्नित मुद्रा और तीन निरोधक पैकेट शामिल हैं। 30-31 अक्टूबर 2025 की मध्य रात्रि करीब 11:30 बजे ‘से हेल्प’ ऐप पर एक 32 वर्षीय व्यक्ति ने अलर्ट भेजा। उसने दावा किया कि एक महिला को जबरन एक स्पा जैसी जगह पर ले जाया जा रहा है। ऐप ने तुरंत वीडियो, ऑडियो, जीपीएस लोकेशन और लाइव ट्रैकिंग के जरिए पुलिस को रीयल-टाइम जानकारी भेज दी। सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के विशेष स्टाफ, मध्य जिला पुलिस और ऐप की समर्पित टीम ने सूचना की पुष्टि की। खुफिया जानकारी से पता चला कि डीबीजी रोड, नबी करीम स्थित टुडे होटल के पास गैलेक्सी स्पा (द्वितीय तल, 4/1) में अनैतिक तस्करी का धंधा फल-फूल रहा था।
‘से हेल्प’ ऐप की मदद से दिल्ली पुलिस ने तोड़ा मानव तस्करी का रैकेट, 6 महिलाओं को बचाया
पुलिस ने रणनीतिक छापेमारी की। एक अधिकारी को फर्जी ग्राहक बनाकर 2,000 रुपए के चिह्नित नोट दिए गए। उसे व्हाट्सएप पर मिस्ड कॉल देकर संकेत देने को कहा गया। शाम 7:25 बजे फर्जी ग्राहक ने अवैध गतिविधियों की पुष्टि की। तुरंत छापेमारी दल ने स्पा पर धावा बोल दिया। अंदर छह महिलाएं और एक रिसेप्शनिस्ट अनैतिक कामों में लिप्त पाई गईं। चिह्नित नोट और ‘निरोधक’ पैकेट जब्त कर लिए गए। पूछताछ में रिसेप्शनिस्ट ‘के’ (36 वर्ष, पहाड़गंज निवासी) ने कबूल किया कि वह अपने पति के साथ मिलकर यह अवैध धंधा चला रही थी। महिलाओं को नौकरी का लालच देकर लाया जाता था, फिर जबरन वेश्यावृत्ति में धकेल दिया जाता। बचाई गई महिलाओं में ज्यादातर दूसरे राज्यों से थीं, जो आर्थिक तंगी का शिकार हो गईं। इन महिलाओं को मेडिकल जांच के बाद काउंसलिंग और पुनर्वास के लिए एनजीओ को सौंप दिया गया। 31 अक्टूबर को थाना नबी करीम में अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम, 1956 की धारा 3/4/5 के तहत प्राथमिकी संख्या 0450/2025 दर्ज की गई। बता दें कि ‘से हेल्प’ ऐप एंड्रॉइड और आईओएस पर उपलब्ध वैश्विक इमरजेंसी टूल है। यह वॉयस कमांड या पुश बटन से अलर्ट भेजता है, जो एसएमएस/व्हाट्सएप के जरिए संपर्कों और पुलिस तक पहुंचता है। ऐप में लाइव वीडियो स्ट्रीमिंग, मैप ट्रैकिंग और हेल्थ चेक-अप फीचर्स हैं।
20 लाख के मोबाइल की हेराफेरी, गढ़ी डकैती की फर्जी कहानी, दिल्ली पुलिस ने 24 घंटे में खोली पोल
नई दिल्ली । दिल्ली पुलिस ने फर्जी डकैती के मामले को 24 घंटे में सुलझाते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने लगभग 20 लाख रुपए की कीमत के महंगे मोबाइल फोन की हेराफेरी करने के लिए बंदूक के बल पर फर्जी डकैती का नाटक रचा था। दिल्ली पुलिस ने 24 घंटे में पर्दाफाश करते हुए पूरा सामान बरामद किया है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, थाना शकरपुर के अंतर्गत विकास मार्ग के पास लगभग 20 लाख रुपए मूल्य के महंगे मोबाइल फोन की लूट के संबंध में एक पीसीआर कॉल मिली थी। कूरियर बॉय के रूप में काम करने वाले शिकायतकर्ता आशीष कुमार ने बताया कि जब वह अपने स्कूटर से करोल बाग में मोबाइल फोन डिलीवर कर रहा था, तो विकास मार्ग फ्लाईओवर के पास एक अन्य स्कूटर पर सवार दो अज्ञात व्यक्तियों ने उसे रोक लिया, उन्हें बंदूक से धमकाया और 25 मोबाइल फोन (14 आईफोन 17 और 10 वनप्लस भी शामिल) से भरा उनका बैकपैक छीन लिया। शिकायत के आधार पर शकरपुर थाने में एफआईआर दर्ज की गई और जांच शुरू की गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए पूर्वी जिले के स्पेशल स्टाफ को कथित लुटेरों का पता लगाने और मामले को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाने का काम सौंपा गया। इस मामले में एक टीम भी गठित की गई।”’
20 लाख के मोबाइल की हेराफेरी, गढ़ी डकैती की फर्जी कहानी, दिल्ली पुलिस ने 24 घंटे में खोली पोल
टीम ने तकनीकी व मैनुअल जांच की, बताए गए रास्ते में लगे कई सीसीटीवी फुटेज खंगाले और शिकायतकर्ता की ओर से बताई गई गतिविधियों के क्रम का विश्लेषण किया। हालांकि, जाँच के दौरान शिकायतकर्ता के बयान और घटनाक्रम में कई विसंगतियां और विरोधाभास मिले। तकनीकी निगरानी और स्थानीय खुफिया जानकारी ने आगे बताया कि डकैती की कहानी संदिग्ध थी। पूछताछ में शिकायतकर्ता आशीष कुमार टूट गया और उसने मोबाइल फोन की खेप हड़पने के लिए अपने साथियों के साथ मिलकर फर्जी डकैती की साजिश रचने की बात कबूल की। टीम ने साजिश में शामिल सभी आरोपियों की तुरंत पहचान की और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पता चला कि आशीष कुमार ने स्थानीय मोबाइल फोन विक्रेता शमीम और उसके साथियों अमन व तनवीर के साथ मिलकर डकैती की झूठी कहानी रची थी, मोबाइल फोन बेचकर और उससे मिलने वाले पैसे आपस में बांट लिए थे। दिल्ली पुलिस ने इस खुलासे के बाद कार्रवाई करते हुए चोरी का सारा सामान 24 घंटे के भीतर बरामद कर लिया। फिलहाल, मामले में आगे की कार्रवाई जारी है।
बरेली में पत्नी ने प्रेमी संग मिलकर की पति को मारने की कोशिश, जांच में जुटी पुलिस
बरेली । उत्तर प्रदेश के बरेली के थाना सुभाष नगर क्षेत्र में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। बताया जा रहा है कि रिटायर्ड डॉ. विशाल सक्सेना पर उनकी पत्नी शिखा सक्सेना और उसके प्रेमी सौरभ सक्सेना ने जानलेवा हमला करने की कोशिश की। एसपी मानुष पारीक ने बताया कि पीड़ित पति विशाल सक्सेना द्वारा थाना सुभाष नगर में रिपोर्ट दी गई है, जिसमें उन्होंने बताया कि 28 अक्टूबर की रात में उनकी पत्नी ने उन्हें दूध पिलाया, जिसमें नींद की गोलियां मिली थीं। अगले दिन सुबह जब उन्हें होश आया तो उनके हाथ, पैर और गले में रस्सी से फंदा और मुंह बंधा हुआ था। शिखा और सौरभ उन्हें घर के सबसे पीछे वाले कमरे में ले गए, ताकि बाहर की किसी को आवाज न सुनाई दे। दोनों ने सीसीटीवी भी पहले ही बंद कर दिया था।
बरेली में पत्नी ने प्रेमी संग मिलकर की पति को मारने की कोशिश, जांच में जुटी पुलिस
विशाल ने बताया कि दोनों ने हथौड़े और मुक्कों से उन पर हमला भी किया। इस बीच उनकी चेक बुक और पासबुक भी ले ली। इसके बाद सौरभ शराब पीने लगा। नशे में धुत सौरभ ने धमकी दी कि वह मुझे जान से मार देगा और मेरी प्रॉपर्टी को दोनों आपस में बांट लेंगे। इसी दौरान नशे में सौरभ खुद बेहोश होकर गिर पड़ा, जिसके बाद किसी तरह घर से बाहर भागकर मैंने पड़ोसियों से मदद मांगी। थाना सुभाष नगर के एसपी मानुष पारीक ने बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर दोनों आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में पाया गया कि लगभग एक साल पहले भी सौरभ ने शिखा को ब्लैकमेल करने की कोशिश की थी। पुलिस का कहना है कि मोबाइल लोकेशन और चैट की जांच से और सबूत मिलेंगे। विशाल सक्सेना ने बताया कि वे सरकारी सेवा से निवृत्त सीनियर सिटीजन हैं और उनकी जान को गंभीर खतरा है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और आरोपी पत्नी और प्रेमी की तलाश में लगी हुई है।