
मुंबई, 25 अगस्त
मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कस्टम विभाग ने एक बार फिर सतर्कता और कड़ी निगरानी से तस्करी की एक बड़ी कोशिश को नाकाम करते हुए 24 कैरेट शुद्ध सोने की डस्ट की तस्करी का पर्दाफाश किया है। यह घटना 25 अगस्त को हुई जब ड्यूटी पर तैनात कस्टम अधिकारियों ने एक संदिग्ध यात्री को रोका और गहन जांच में उसके शरीर के अंदर छिपाकर लाए गए 1075 ग्राम सोने की डस्ट को जब्त किया। इस सोने की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग ₹1.02 करोड़ आंकी गई है।
यह मामला इसलिए और भी चौंकाने वाला है क्योंकि आरोपी ने अत्यंत जोखिम भरे तरीके से तस्करी को अंजाम देने की कोशिश की। उसने सोने की डस्ट को वैक्स (मोम) में भरकर चार छोटे टुकड़ों में छिपाया और उन टुकड़ों को अपने शरीर के अंगों में इस तरह छिपा लिया कि सामान्य जांच में उसका पकड़ना बेहद मुश्किल था। हालांकि, मुंबई कस्टम्स की सतर्क नजर और अनुभव ने उसे पकड़ने में सफलता पाई और एक बड़ा अपराध समय रहते सामने लाया जा सका।
पकड़े गए व्यक्ति की पहचान गुप्त रखी गई है क्योंकि मामला अभी जांच के अधीन है। यह यात्री सऊदी अरब के जेद्दाह से मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आया था। कस्टम अधिकारियों को उसकी गतिविधियों पर संदेह हुआ, जिसके बाद उसे पूछताछ और जांच के लिए अलग ले जाया गया। प्रारंभिक पूछताछ में वह सामान्य नजर आया, लेकिन जब मेडिकल एक्स-रे जांच की गई, तो अधिकारियों के सामने सच्चाई उजागर हो गई। उसके शरीर के अंदर चार वैक्स के पैकेट पाए गए, जिनमें शुद्ध सोने की डस्ट भरकर छिपाई गई थी।
यह तरीका जितना चतुराई भरा प्रतीत होता है, उतना ही खतरनाक भी है। शरीर के अंदर किसी भी प्रकार का रसायन, धातु या कठोर वस्तु छिपाना स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी गतिविधियां न केवल कानूनी रूप से गलत हैं, बल्कि जीवन के लिए भी घातक साबित हो सकती हैं। इस मामले में आरोपी ने तस्करी के लोभ में अपने जीवन को भी खतरे में डाला।
मुंबई कस्टम्स के अधिकारियों ने जब्त किए गए सोने की जांच की तो पाया कि वह 24 कैरेट की शुद्धता वाला था, जो कि सोने की सबसे उच्च गुणवत्ता मानी जाती है। इसका कुल वजन 1075 ग्राम निकला, जो कि किसी एक व्यक्ति द्वारा शरीर में छिपाकर लाना अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है। इससे यह संकेत मिलता है कि आरोपी इस तस्करी को अंजाम देने के लिए प्रशिक्षित हो सकता है या उसके पीछे कोई संगठित गिरोह काम कर रहा है।

मुंबई कस्टम्स विभाग ने आरोपी को सीमा शुल्क अधिनियम के तहत गिरफ्तार कर लिया है और उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ दी हैं, जिनके आधार पर यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि यह तस्करी किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय तस्करी रैकेट का हिस्सा हो सकती है। इस दिशा में कस्टम विभाग की एक विशेष जांच टीम काम कर रही है, जो आरोपी से पूछताछ कर इस तस्करी नेटवर्क की गहराई तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
सोने की तस्करी भारत में कोई नई बात नहीं है। भारत दुनिया के सबसे बड़े सोने के उपभोक्ता देशों में से एक है, और इसी वजह से यहां अवैध तरीके से सोना लाने की कोशिशें अक्सर होती रहती हैं। मुंबई एयरपोर्ट, जो देश के सबसे व्यस्त अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों में से एक है, पर आए दिन तस्करी के मामले सामने आते रहते हैं। लेकिन कस्टम विभाग की मुस्तैदी और आधुनिक तकनीक के सहारे इन पर कड़ी नजर रखी जाती है।
इस ताजा मामले में भी कस्टम विभाग की त्वरित कार्रवाई सराहनीय रही। उन्होंने न केवल तस्कर को समय रहते पकड़ लिया, बल्कि इस पूरे मामले को विधिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाते हुए एक सशक्त संदेश दिया है कि कानून से बचना आसान नहीं है। यह कार्रवाई भविष्य के तस्करों को एक चेतावनी के रूप में भी देखी जा रही है।
मुंबई कस्टम्स विभाग ने इस घटना के बाद एक सार्वजनिक अपील जारी की है, जिसमें नागरिकों से आग्रह किया गया है कि वे किसी भी तरह की अवैध गतिविधियों से दूर रहें और अगर कहीं कोई संदिग्ध गतिविधि नजर आए तो तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें। विभाग ने यह भी कहा है कि सीमा शुल्क अधिकारियों की सतर्कता और कड़ी निगरानी के चलते ही इस प्रकार के अपराध पकड़े जाते हैं, लेकिन इसमें आम जनता का सहयोग भी आवश्यक होता है।
कस्टम विभाग ने हवाई अड्डों पर सुरक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने का संकेत दिया है। इसके तहत यात्रियों की गहन जांच, एक्स-रे और मेडिकल जांच जैसे उपायों को और सख्त किया जा सकता है, ताकि शरीर के अंदर छिपाकर लाए जा रहे सामान की पहचान की जा सके। विभाग ने यह भी कहा है कि तस्करी के नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं और इन्हें रोकने के लिए हर संभव तकनीकी और मानव संसाधन का इस्तेमाल किया जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सोने की तस्करी को बढ़ावा देने वाले कारणों में से एक बड़ा कारण सोने पर लगाया गया आयात शुल्क है। इसकी वजह से कुछ लोग तस्करी को एक आसान विकल्प मानते हैं। लेकिन यह समझना जरूरी है कि तस्करी न केवल गैरकानूनी है, बल्कि इससे देश की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
इस तरह के मामलों में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह होता है कि पकड़े गए व्यक्ति के पीछे की कड़ियों को खोजा जाए। अकेले व्यक्ति से सोना छिपाकर लाना संभव नहीं होता, इसके लिए पूरा नेटवर्क काम करता है, जिसमें विदेशों में बैठे सप्लायर, भारत में रिसीवर और लोकल वितरक शामिल हो सकते हैं। इसीलिए कस्टम विभाग की जांच का दायरा केवल आरोपी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन सभी लोगों और संपर्कों को भी खंगाला जाएगा जो इस तस्करी के नेटवर्क में शामिल हो सकते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने फिर से यह साबित कर दिया है कि भले ही तस्करी के तरीके बदलते रहें, लेकिन अगर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क और सजग रहें तो ऐसे प्रयासों को रोका जा सकता है। कस्टम अधिकारियों की सतर्कता और संवेदनशीलता के कारण ही यह सोने की तस्करी नाकाम हुई और देश को एक बड़ा आर्थिक नुकसान होने से बचा लिया गया।
अंत में, यह कहना गलत नहीं होगा कि यह मामला देश की सीमा सुरक्षा और आर्थिक नीति से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे मामलों से यह संदेश भी जाना चाहिए कि किसी भी तस्करी या अवैध व्यापार की गतिविधियों में शामिल व्यक्ति को कानून के शिकंजे से नहीं बचाया जा सकता। मुंबई कस्टम्स की यह कार्रवाई समाज में एक नजीर बनकर सामने आई है और निश्चित ही इससे आने वाले समय में अवैध गतिविधियों पर कुछ हद तक लगाम लगेगी।
मुंबई कस्टम्स की इस कार्यवाही ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि चाहे तस्कर कितनी भी चालाकी से तस्करी का प्रयास करें, कानून और सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और तकनीकी दक्षता से बच पाना आसान नहीं है। यह कार्रवाई कानून, व्यवस्था और सुरक्षा की दिशा में एक मजबूत कदम है, जो देश के आर्थिक और सामाजिक हितों की रक्षा करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।



















