1.40 करोड़ के कर्ज से बचने के लिए भाजपा नेता के बेटे ने खुद की मौत दिखाने नदी में धकेल दी कार

1.40 करोड़ के कर्ज से बचने के लिए भाजपा नेता के बेटे ने खुद की मौत दिखाने नदी में धकेल दी कार

1.40 करोड़ के कर्ज से बचने के लिए भाजपा नेता के बेटे ने खुद की मौत दिखाने नदी में धकेल दी कार
1.40 करोड़ के कर्ज से बचने के लिए भाजपा नेता के बेटे ने खुद की मौत दिखाने नदी में धकेल दी कार
राजगढ़।
  • मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के सारंगपुर में बीते 5 सितंबर की सुबह कालीसिंध नदी में कार समेत गिरे भाजपा नेता महेश सोनी के बेटे की मौत की साजिश की कहानी का पर्दाफाश सारंगपुर पुलिस ने कर दिया है। ट्रांसपोर्टर बेटे विशाल ने बैंकों का कर्ज खत्म करने के लिए खुद की मौत की कहानी रच ली। कार को नदी से निकालने के बाद पुलिस, प्रशासन, नपा अमला, एसडीआरएफ की टीम के साथ ही 50 के करीब संडावता के संवेदनशील युवा 20 किलोमीटर तक के क्षेत्र में 10 दिन तक नदी में खोजते रहे। 8वें दिन भी जब बॉडी नहीं मिली तो पुलिस ने दूसरे एंगल से पूरे मामले को समझा और सीडीआर निकलवाई तो युवक महाराष्ट्र में जिंदा मिला। खुलासा करते हुए थाना प्रभारी आकांक्षा हाड़ा ने बताया कि 5 सितंबर को सुबह-सुबह पुलिस को सूचना मिली कि एक कार नदी में तैर रही है, कोई गिर गया है। पुलिस टीम गोताखोरों के साथ घटना स्थल पहुंची और कार को निकलवाया। ऊपर लाने के लिए क्रेन बुलवाई। फिर राजगढ़ एसडीआरएफ को सूचना देकर रेसक्यू अभियान चलाया।
  • राजगढ़ : राजगढ़ के बीजेपी नेता महेश सोनी का बेटा विशाल सोनी को मध्य प्रदेश पुलिस ने महाराष्ट्र के संभाजी नगर से बरामद कर लिया है। पुलिस के अनुसार, पकड़े जाने से पहले उसने दोबारा नौटंकी की। उसने पुलिस को बरगलाने के लिए फर्डापुर थाने में अपहरण की झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई। बाद में विशाल ने कबूल किया कि 1.40 करोड़ रुपये के लोन से बचने के लिए अपनी मौत का नाटक रचा था। 5 सितंबर को उसकी कार कालीसिंध नदी में मिली थी। इसके बाद से पुलिस, प्रशासन और एसडीआरएफ की टीम 10 दिनों तक नदी में उसकी तलाश कर रही थी।
पांच सितंबर को कालीसिंध नदी में मिली थी कार
  • पांच सितंबर को पुलिस को सूचना मिली कि काली सिंध नदी में एक कार डूब गई है। यह कार बीजेपी नेता महेश सोनी के बेटे विशाल की थी। पुलिस-प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बचाव अभियान चलाया। गोताखोरों ने कार को निकाला, लेकिन वह खाली थी। गोताखोरों को विशाल का सुराग नहीं मिला। महेश सोनी ने प्रशासन पर लापरवाही के आरोप भी लगा दिए। इसके बाद प्रशासन ने एसडीआरएफ को भी अभियान में शामिल किया। बचाव दल की तीन अलग-अलग टीमों ने लगभग दो सप्ताह तक नदी में 20 किलोमीटर तक तलाश की।
1.40 करोड़ के कर्ज से बचने के लिए भाजपा नेता के बेटे ने खुद की मौत दिखाने नदी में धकेल दी कार
1.40 करोड़ के कर्ज से बचने के लिए भाजपा नेता के बेटे ने खुद की मौत दिखाने नदी में धकेल दी कार
8 दिन बाद पुलिस ने खंगाला कॉल रिकॉर्ड
  • पुलिस अधिकारी अकांक्षा हाडा ने बताया कि जब आठ दिनों के बाद भी विशाल का कोई पता नहीं चला तो शक गहरा गया। पूछताछ करने पर उसके पिता महेश सोनी और भाइयों ने माना कि विशाल मरा नहीं है। वह किसी रिश्तेदार के यहां छिपा हो सकता है। पुलिस ने विशाल के मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच की तो पता चला कि वह महाराष्ट्र में है। फिर मध्य प्रदेश पुलिस ने महाराष्ट्र पुलिस की मदद से विशाल को संभाजी नगर जिले के फर्डापुर पुलिस स्टेशन इलाके से बरामद कर लिया। विशाल ने पुलिस को बताया कि वह ट्रांसपोर्ट का बिजनेस करता है। उसके पास छह ट्रक और दो बसे हैं। बिजनेस के सिलसिले में उसने बैंकों से 1.40 करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज ले रखा है।
मौत की खबर पढ़कर गया शिरडी
  • बीजेपी नेता के बेटे ने कबूल किया कि लोन से बचने के लिए उसने खुद अपनी मौत की कहानी गढ़ी थी। उसे पता चला कि अगर बैंक में कर्ज लेने वाले डेथ सर्टिफिकेट जमा की जाती है तो लोन माफ हो जाता है। पांच सितंबर की सुबह 5 बजे विशाल ने गोपालपुरा के पास अपने ट्रक ड्राइवर से पैसे लिए। फिर वह नदी के किनारे गया, अपनी कार की हेडलाइट बंद की। फिर उसने कार को नदी में धकेल दिया और ड्राइवर की बाइक लेकर इंदौर चला गया। अखबारों में अपनी मौत की खबरें पढ़ने के बाद उसने शिरडी और शनि शिंगनापुर में जाकर पूजा की।
धूल में लोटा, कपड़े फाड़े, झूठी एफआईआर की
  • अकांक्षा हाडा के अनुसार, जब विशाल को पता चला कि पुलिस ने उसकी लोकेशन ट्रेस कर ली है, तो महाराष्ट्र के फर्डापुर पुलिस स्टेशन में अपहरण की झूठी रिपोर्ट दर्ज करा दी। खुद को पीड़ित जताने के लिए विशाल सोनी ने अपने कपड़े फाड़ लिए और धूल से खुद को गंदा कर लिया। पुलिस के अनुसार, किसी व्यक्ति को अपनी मौत का नाटक करने के लिए दंडित करने का कोई सीधा संवैधानिक प्रावधान नहीं है इसलिए विशाल को बिना केस दर्ज किए उसके परिवार को सौंप दिया गया है।
किंजल सिंह ने संभाला परिवहन आयुक्त का पदभार, अधिकारियों को निष्ठा और जवाबदेही के साथ काम करने के निर्देश

किंजल सिंह ने संभाला परिवहन आयुक्त का पदभार, अधिकारियों को निष्ठा और जवाबदेही के साथ काम करने के निर्देश

किंजल सिंह ने संभाला परिवहन आयुक्त का पदभार, अधिकारियों को निष्ठा और जवाबदेही के साथ काम करने के निर्देश
किंजल सिंह ने संभाला परिवहन आयुक्त का पदभार, अधिकारियों को निष्ठा और जवाबदेही के साथ काम करने के निर्देश

उत्तर प्रदेश की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी किंजल सिंह ने आज परिवहन आयुक्त का पदभार ग्रहण किया। पदभार ग्रहण करते ही उन्होंने विभागीय अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक कर कार्यों, योजनाओं और कार्यक्रमों की समीक्षा की तथा स्पष्ट संदेश दिया कि अब परिवहन विभाग में शिथिलता और लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

ईमानदारी और निष्ठा सर्वोपरि
  • बैठक के दौरान उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि विभाग की छवि जनता में जिम्मेदार और पारदर्शी बने, इसके लिए सभी को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी से करना होगा। उन्होंने कहा, “सरकार की मंशा है कि जनता को सरल, त्वरित और प्रभावी परिवहन सेवाएं मिलें। इसके लिए सभी को अपनी भूमिका को समझते हुए काम करना होगा। कहीं भी लापरवाही या जवाबदेही में कमी पाई गई तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाएगी।”
समय पर उपस्थिति और कार्य पूर्ण करने पर जोर
  • किंजल सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी अधिकारी और कर्मचारी समय से कार्यालय में उपस्थित रहें और तय समय सीमा के भीतर कार्यों को पूरा करें। उन्होंने कहा कि नागरिकों को परिवहन विभाग से सीधी सेवाएं मिलती हैं, इसलिए उनकी सुविधा और संतोष विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।“सभी कार्य समय पर पूर्ण हों, जनता को अनावश्यक देरी या परेशानी न हो। यदि अधिकारी और कर्मचारी समयबद्धता तथा पारदर्शिता अपनाते हैं तो प्रदेश में विभाग के प्रति लोगों की सकारात्मक धारणा बनेगी,” उन्होंने कहा।

योजनाओं और कार्यक्रमों की समीक्षा

  • बैठक में किंजल सिंह ने विभाग की विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने निर्देशित किया कि लंबित कार्यों को तत्काल प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए और विभाग की उपलब्धियों को आम जनता तक पारदर्शी तरीके से पहुँचाया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ जनता तक पहुंचना चाहिए।

जवाबदेही तय होगी

  • उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब विभाग में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी। यदि कहीं से शिकायत मिलती है कि कार्य में देरी हो रही है या अधिकारी-कर्मचारी अपने दायित्वों से भाग रहे हैं, तो इसकी जवाबदेही तय की जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने कहा कि विभाग के कामकाज में जवाबदेही और पारदर्शिता ही आम जनता के विश्वास को बढ़ाएगी।

जनता के साथ सकारात्मक संवाद

  • किंजल सिंह ने कहा कि परिवहन विभाग सीधे जनता से जुड़ा हुआ है। वाहन पंजीकरण, लाइसेंस, सड़क सुरक्षा, फिटनेस और कराधान जैसे कार्य सीधे आम नागरिकों से संबंधित हैं। इसलिए विभाग का चेहरा ऐसा होना चाहिए जिससे जनता को भरोसा और संतोष मिले। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नागरिकों से संवाद कायम रखें, उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनें और समयबद्ध समाधान दें।
किंजल सिंह ने संभाला परिवहन आयुक्त का पदभार, अधिकारियों को निष्ठा और जवाबदेही के साथ काम करने के निर्देश
किंजल सिंह ने संभाला परिवहन आयुक्त का पदभार, अधिकारियों को निष्ठा और जवाबदेही के साथ काम करने के निर्देश

सड़क सुरक्षा पर विशेष जोर

  • नव नियुक्त परिवहन आयुक्त ने सड़क सुरक्षा को विभाग की सबसे अहम जिम्मेदारियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में सड़क दुर्घटनाओं को रोकना एक बड़ी चुनौती है, लेकिन इसके लिए आधुनिक तकनीक, जन जागरूकता और सख्त प्रवर्तन की आवश्यकता है। उन्होंने निर्देश दिया कि हेलमेट और सीट बेल्ट को लेकर जनता में जागरूकता अभियान चलाया जाए, शराब पीकर वाहन चलाने वालों और नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, परिवहन विभाग और पुलिस विभाग के बीच समन्वय को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

डिजिटल सेवाओं को और प्रभावी बनाने की जरूरत

  • बैठक में डिजिटल सेवाओं की समीक्षा करते हुए किंजल सिंह ने कहा कि विभाग की कई सेवाएं अब ऑनलाइन उपलब्ध हैं, लेकिन अभी भी आम जनता को तकनीकी दिक्कतें और अनावश्यक विलंब का सामना करना पड़ता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऑनलाइन पोर्टल और सेवाओं को और अधिक सरल व सुगम बनाया जाए ताकि लोग घर बैठे ही अपनी आवश्यक सेवाओं का लाभ उठा सकें।

भ्रष्टाचार पर सख्त रुख

  • किंजल सिंह ने कहा कि परिवहन विभाग में लंबे समय से भ्रष्टाचार की शिकायतें मिलती रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अब किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या दलाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी जनता से अनुचित लाभ लेने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई होगी।

कर्मचारियों को प्रोत्साहन और सहयोग

  • सख्ती के साथ-साथ उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि ईमानदारी से काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को पूरा सम्मान और सहयोग मिलेगा। उन्होंने कहा कि अच्छा काम करने वालों को प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि पूरी टीम उत्साह और जिम्मेदारी के साथ काम कर सके।
पारदर्शिता से बनेगी सकारात्मक छवि
  • उन्होंने कहा कि परिवहन विभाग की छवि जनता में अक्सर मिश्रित रही है। अब समय है कि पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य कर विभाग को एक सकारात्मक छवि दिलाई जाए। उन्होंने कहा कि यदि अधिकारी और कर्मचारी मिलकर जिम्मेदारी निभाएंगे तो निश्चित रूप से परिवहन विभाग राज्य सरकार की उपलब्धियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा।

नवरात्रि के शुभ अवसर पर नई शुरुआत

  • किंजल सिंह ने यह भी कहा कि आज नवरात्रि का पावन पर्व प्रारंभ हुआ है। उन्होंने इसे एक शुभ संयोग बताते हुए कहा कि शक्ति की उपासना के इस अवसर पर उन्हें नई जिम्मेदारी मिली है। उन्होंने प्रदेशवासियों को नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में परिवहन विभाग नई ऊंचाइयों को छुएगा।
दर्दनाक हादसा तेज रफ्तार कार ने सड़क किनारे खड़े 4 लोगों को कुचला, 3 की मौके पर हुई मौत, 1 घायल

दर्दनाक हादसा तेज रफ्तार कार ने सड़क किनारे खड़े 4 लोगों को कुचला, 3 की मौके पर हुई मौत, 1 घायल

दर्दनाक हादसा तेज रफ्तार कार ने सड़क किनारे खड़े 4 लोगों को कुचला, 3 की मौके पर हुई मौत, 1 घायल
दर्दनाक हादसा तेज रफ्तार कार ने सड़क किनारे खड़े 4 लोगों को कुचला, 3 की मौके पर हुई मौत, 1 घायल

नेशनल डेस्क: उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हुआ है। मानिकपुर थाना क्षेत्र में प्रयागराज-लखनऊ राजमार्ग पर एक तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे एक दुकान में घुस गई, जिससे चार लोग इसकी चपेट में आ गए। इस दुर्घटना में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक गंभीर रूप से घायल है। इस हादसे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।

कैसे हुआ हादसा?
यह हादसा तब हुआ जब कार चालक का तेज गति के कारण वाहन से नियंत्रण खो गया। अनियंत्रित कार सीधे सड़क किनारे स्थित एक दुकान से जा टकराई। हादसे के वक्त दुकान पर कई लोग मौजूद थे। दुर्घटना में मधु सोनकर की मौके पर ही मौत हो गई,

दर्दनाक हादसा तेज रफ्तार कार ने सड़क किनारे खड़े 4 लोगों को कुचला, 3 की मौके पर हुई मौत, 1 घायल
दर्दनाक हादसा तेज रफ्तार कार ने सड़क किनारे खड़े 4 लोगों को कुचला, 3 की मौके पर हुई मौत, 1 घायल

जबकि अरविंद और शिल्पा समेत तीन अन्य लोगों को गंभीर हालत में रायबरेली के एम्स अस्पताल ले जाया गया। दुखद है कि इलाज के दौरान इनमें से दो और लोगों ने दम तोड़ दिया।

पुलिस ने हिरासत में लिया आरोपी को
हादसे के बाद, पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कार चालक को हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस राजमार्ग पर अक्सर वाहन तेज रफ्तार से चलाए जाते हैं, जिससे इस तरह के हादसे होते रहते हैं।

ट्रम्प ने बगराम एयरबेस वापसी की मांग की, वरना बुरे अंजाम की चेतावनी दी

ट्रम्प ने बगराम एयरबेस वापसी की मांग की, वरना बुरे अंजाम की चेतावनी दी

ट्रम्प ने बगराम एयरबेस वापसी की मांग की, वरना बुरे अंजाम की चेतावनी दी
ट्रम्प ने बगराम एयरबेस वापसी की मांग की, वरना बुरे अंजाम की चेतावनी दी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अफगानिस्तान को बुरे अंजाम भुगतने की धमकी दी है। ट्रम्प ने शनिवार को ट्रुथ सोशल पोस्ट में लिखा, “अगर अफगानिस्तान बगराम एयरबेस को अमेरिका को वापस नहीं करता है, तो बहुत बुरा होगा।”

इससे पहले ट्रम्प ने गुरुवार को ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था, “हम बगराम को वापस लेने की कोशिश कर रहे हैं। क्योंकि, उस जगह से एक घंटे की दूरी पर चीन अपने परमाणु हथियार बनाता है।”

तालिबानी सरकार ने ट्रम्प की इस मांग को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि, सरकार कभी भी अपने इलाके में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी बर्दाश्त नहीं करेगा। वहीं, चीन ने ट्रम्प की धमकी का विरोध किया है।

2021 में अमेरिकी सेना की वापसी के कारण अमेरिकी ठिकानों पर तालिबानी सरकार ने कब्जा कर लिया था और काबुल में अमेरिका समर्थित सरकार को गिरा दिया। बगराम एयरबेस को 1950 के दशक में सोवियत संघ और अमेरिका की मदद से बनाया गया था।

ट्रम्प बोले- अगर वे बेस नहीं देंगे, तो आप देखेंगे मैं क्या करता हूं

शनिवार को जब ट्रम्प से पूछा गया कि क्या वह अड्डे पर कब्जा करने के लिए क्या अमेरिकी सेना भेजेंगे, तो उन्होंने सीधा जवाब देने से इनकार कर दिया और कहा, “हम इस बारे में बात नहीं करेंगे। हम चाहते हैं कि बेस जल्दी वापस मिले। अगर वे नहीं देंगे, तो आप देखेंगे कि मैं क्या करता हूं।”

बगराम एयरबेस अफगानिस्तान की राजधानी काबुल से 40 किलोमीटर उत्तर में है। यह अमेरिकी सेना का सबसे बड़ा ठिकाना था। 2001 के 9/11 हमलों के बाद अमेरिका ने इसका इस्तेमाल शुरू किया।

इस एयरबेस पर बर्गर किंग, पिज्जा हट जैसे रेस्तरां थे। वहां इलेक्ट्रॉनिक्स और अफगानी कालीन बेचने वाली दुकानें भी थीं। एक बड़ा जेल परिसर भी था।

चीन की निगरानी करने के लिए बेस पर कब्जा चाहते हैं ट्रम्प

2021 में अमेरिकी सेनाओं ने अफगानिस्तान से वापसी की थी। यह वापसी जो बाइडेन प्रशासन के समय हुई थी। इसके बाद तालिबान ने बगराम एयरबेस और काबुल की सरकार पर कब्जा कर लिया।

ट्रम्प ने बाइडेन के इस फैसले की कई बार आलोचना की है। उन्होंने कहा कि वह कभी बगराम नहीं छोड़ते। ट्रम्प ने मार्च, 2025 में कहा था कि वह बगराम को रखना चाहते थे। इसका कारण चीन की निगरानी करना और अफगानिस्तान के खनिज संसाधनों तक पहुंचना है।

ट्रम्प पहले भी कई जगहों पर अमेरिकी कब्जे की बात कर चुके हैं। उन्होंने पनामा नहर और ग्रीनलैंड जैसे क्षेत्रों का जिक्र किया था। बगराम पर उनकी नजर कई सालों से है।

ट्रम्प ने बगराम एयरबेस वापसी की मांग की, वरना बुरे अंजाम की चेतावनी दी
ट्रम्प ने बगराम एयरबेस वापसी की मांग की, वरना बुरे अंजाम की चेतावनी दी
अफगान अधिकारी बोले- अमेरिकी सेना की मौजूदगी स्वीकार नहीं

तालिबान के विदेश मंत्रालय के अधिकारी जाकिर जलाल ने कहा कि अमेरिकी सेना की मौजूदगी को अफगानिस्तान सरकार पूरी तरह से खारिज करती है।

उन्होंने X पर एक पोस्ट में कहा कि अफगानिस्तान और अमेरिका को एक-दूसरे के साथ जुड़ने की जरूरत है और वे आपसी सम्मान के आधार पर आर्थिक और राजनीतिक संबंध बना सकते हैं, वह भी अफगानिस्तान के किसी भी हिस्से में अमेरिका की सैन्य उपस्थिति के बिना।

जलाल ने कहा, “अफगानिस्तान ने इतिहास में कभी भी सैन्य उपस्थिति को स्वीकार नहीं किया है। दोहा बातचीत और समझौते के दौरान इस संभावना को पूरी तरह से खारिज कर दिया गया था, लेकिन व्यापार और दूसरी गतिविधियों के लिए दरवाजे खोल दिए गए हैं।”चीनी प्रवक्ता बोले- टकराव बर्दाश्त नहीं

चीन ने भी ट्रम्प की टिप्पणी पर अपना विरोध जताया, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने बीजिंग में एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि “क्षेत्र में तनाव और टकराव को बढ़ावा देने का समर्थन नहीं किया जाएगा”।

उन्होंने कहा, “चीन अफगानिस्तान की स्वतंत्रता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करता है। अफगानिस्तान का भविष्य अफगान लोगों के हाथों में होना चाहिए।”

चीन ने काबुल पर तालिबान के कब्जे के तुरंत बाद सरकार के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। चीन ने अफगानिस्तान में तांबे की खदान और तेल भंडारों को दोबारा शुरू करने के लिए भारी निवेश किया है।

अमेरिका के लिए क्यों खास है बगराम एयरबेस

बगराम एयरबेस अफगानिस्तान का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाना रहा है। यह अफगानिस्तान के सेंटर में है, जहां से पूरे देश में आसानी से ऑपरेशन चलाए जा सकते हैं।

साल 2001 में तालिबान शासन गिरने के बाद अमेरिका और नाटो सेनाओं ने बगराम को अपना सबसे बड़ा बेस बना लिया। यहीं से अफगानिस्तान में आतंकवाद विरोधी और सैन्य अभियान चलते थे।

यहां लंबा रनवे, एयर ट्रैफिक कंट्रोल और मरम्मत सुविधाएं थीं। अमेरिका के लड़ाकू विमान, ड्रोन और हेलिकॉप्टर यहीं से उड़ते थे। बगराम में एक बड़ा डिटेंशन सेंटर भी था, जहां आतंकी और संदिग्ध कैद किए जाते थे।

इसे ‘बगराम जेल’ कहा जाता था। यह ठिकाना अमेरिका की अफगानिस्तान में मौजूदगी का प्रतीक था। 2021 में जब अमेरिकी सेना ने अचानक इसे खाली किया, तो यह तालिबान की बड़ी जीत मानी गई।

बेस पर कब्जा अफगानिस्तान पर फिर आक्रमण जैसा होगा

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प की चेतावनी के बाद अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि बगराम को दोबारा लेना आसान नहीं होगा। इसके लिए 10 हजार से ज्यादा सैनिकों की जरूरत होगी।

उन्नत हवाई रक्षा प्रणालियां भी लगानी होंगी। यह एक तरह से अफगानिस्तान पर फिर से आक्रमण जैसा होगा। एयरबेस की सुरक्षा भी चुनौती होगी। इसे इस्लामिक स्टेट और अल कायदा जैसे आतंकी समूहों से बचाना होगा।

ईरान से मिसाइल हमले का खतरा भी है। जून 2025 में ईरान ने कतर में अमेरिकी एयरबेस पर हमला किया था। विशेषज्ञों का कहना है कि तालिबान अगर सहमति दे भी दे, तो भी बगराम को चलाने और बचाने के लिए भारी संसाधन चाहिए। यह एक महंगा और जटिल काम होगा

देहरादून। उत्तराखंड पुलिस की एसटीएफ ने साइबर अपराध के एक बड़े मामले का पर्दाफाश करते हुए 98 लाख रुपये की ठगी करने वाले मास्टरमाइंड मृदुल सूर निवासी महेशपुर, थाना इगरा, बंगाल को कोलकाता से गिरफ्तार किया है। साइबर ठग ने फेसबुक और वॉट्सऐप पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर और अंतरराष्ट्रीय मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कर दून के व्यक्ति को झांसे में लिया। ठग ने स्वयं को एक कंपनी का प्रतिनिधि और वित्तीय सलाहकार बताकर ऊंचे मुनाफे का लालच दिया। शुरुआत में छोटे-छोटे रिटर्न देकर पीड़ित को निवेश के लिए प्रेरित किया गया। 28 जुलाई 2020 से 9 अगस्त 2024 के बीच पीड़ित से अलग-अलग खातों में लगभग 98 लाख रुपये जमा कराए गए। बाद में रकम लौटाने के बजाय आरोपीो ने धमकी और ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया।

देहरादून में एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई, 98 लाख की साइबर ठगी का मास्टरमाइंड कोलकाता से गिरफ्तार

देहरादून। उत्तराखंड पुलिस की एसटीएफ ने साइबर अपराध के एक बड़े मामले का पर्दाफाश करते हुए 98 लाख रुपये की ठगी करने वाले मास्टरमाइंड मृदुल सूर निवासी महेशपुर, थाना इगरा, बंगाल को कोलकाता से गिरफ्तार किया है।
साइबर ठग ने फेसबुक और वॉट्सऐप पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर और अंतरराष्ट्रीय मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कर दून के व्यक्ति को झांसे में लिया। ठग ने स्वयं को एक कंपनी का प्रतिनिधि और वित्तीय सलाहकार बताकर ऊंचे मुनाफे का लालच दिया।

शुरुआत में छोटे-छोटे रिटर्न देकर पीड़ित को निवेश के लिए प्रेरित किया गया। 28 जुलाई 2020 से 9 अगस्त 2024 के बीच पीड़ित से अलग-अलग खातों में लगभग 98 लाख रुपये जमा कराए गए। बाद में रकम लौटाने के बजाय आरोपीो ने धमकी और ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया।

देहरादून। उत्तराखंड पुलिस की एसटीएफ ने साइबर अपराध के एक बड़े मामले का पर्दाफाश करते हुए 98 लाख रुपये की ठगी करने वाले मास्टरमाइंड मृदुल सूर निवासी महेशपुर, थाना इगरा, बंगाल को कोलकाता से गिरफ्तार किया है।

साइबर ठग ने फेसबुक और वॉट्सऐप पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर और अंतरराष्ट्रीय मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कर दून के व्यक्ति को झांसे में लिया। ठग ने स्वयं को एक कंपनी का प्रतिनिधि और वित्तीय सलाहकार बताकर ऊंचे मुनाफे का लालच दिया।

देहरादून। उत्तराखंड पुलिस की एसटीएफ ने साइबर अपराध के एक बड़े मामले का पर्दाफाश करते हुए 98 लाख रुपये की ठगी करने वाले मास्टरमाइंड मृदुल सूर निवासी महेशपुर, थाना इगरा, बंगाल को कोलकाता से गिरफ्तार किया है। साइबर ठग ने फेसबुक और वॉट्सऐप पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर और अंतरराष्ट्रीय मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कर दून के व्यक्ति को झांसे में लिया। ठग ने स्वयं को एक कंपनी का प्रतिनिधि और वित्तीय सलाहकार बताकर ऊंचे मुनाफे का लालच दिया। शुरुआत में छोटे-छोटे रिटर्न देकर पीड़ित को निवेश के लिए प्रेरित किया गया। 28 जुलाई 2020 से 9 अगस्त 2024 के बीच पीड़ित से अलग-अलग खातों में लगभग 98 लाख रुपये जमा कराए गए। बाद में रकम लौटाने के बजाय आरोपीो ने धमकी और ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया।
देहरादून। उत्तराखंड पुलिस की एसटीएफ ने साइबर अपराध के एक बड़े मामले का पर्दाफाश करते हुए 98 लाख रुपये की ठगी करने वाले मास्टरमाइंड मृदुल सूर निवासी महेशपुर, थाना इगरा, बंगाल को कोलकाता से गिरफ्तार किया है। साइबर ठग ने फेसबुक और वॉट्सऐप पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर और अंतरराष्ट्रीय मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कर दून के व्यक्ति को झांसे में लिया। ठग ने स्वयं को एक कंपनी का प्रतिनिधि और वित्तीय सलाहकार बताकर ऊंचे मुनाफे का लालच दिया। शुरुआत में छोटे-छोटे रिटर्न देकर पीड़ित को निवेश के लिए प्रेरित किया गया। 28 जुलाई 2020 से 9 अगस्त 2024 के बीच पीड़ित से अलग-अलग खातों में लगभग 98 लाख रुपये जमा कराए गए। बाद में रकम लौटाने के बजाय आरोपीो ने धमकी और ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया।

शुरुआत में छोटे-छोटे रिटर्न देकर पीड़ित को निवेश के लिए प्रेरित किया गया। 28 जुलाई 2020 से 9 अगस्त 2024 के बीच पीड़ित से अलग-अलग खातों में लगभग 98 लाख रुपये जमा कराए गए। बाद में रकम लौटाने के बजाय आरोपीो ने धमकी और ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया।जांच के दौरान यह सामने आया कि मृदुल सूर ने अपनी पत्नी के नाम पर बैंक खाते खुलवाए और ठगी की राशि का इस्तेमाल व्यक्तिगत खर्चों और अन्य खातों में ट्रांसफर के लिए किया। आरोपी लंबे समय तक पुलिस से बचता रहा, जिस कारण न्यायालय से गैर-जमानती वारंट जारी कर उसकी गिरफ्तारी की गई।

गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के पास से एक मोबाइल फोन, चार चेकबुक, तीन पासबुक और दो एटीएम कार्ड बरामद किए। आरोपी के खिलाफ विभिन्न राज्यों में साइबर अपराध से संबंधित शिकायतें दर्ज हैं।

आज से लागू, कार, बाइक, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक और खाद्य वस्तुएं होंगी सस्ती

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आज से लागू, कार, बाइक, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक और खाद्य वस्तुएं होंगी सस्ती
आज से लागू, कार, बाइक, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक और खाद्य वस्तुएं होंगी सस्ती

नई दिल्ली: आज से GST 2.0 लागू कार, बाइक कपड़े से लेकर इलेक्ट्रॉनिक और खाने का सामान भी होगा सस्ता, देखिए सस्ते सामानों की पूरी लिस्ट सितंबर 22, सोमवार 2025-26 नई दिल्ली: आज से GST 2.0 का आगाज हो गया है और इसके तहत किए गए बदलावों से रोजमर्रा के ज्यादातर सामान सस्ते हो रहे हैं, क्योंकि इस कैटेगरी में आने वालीं करीब 99% चीजों पर अब सिर्फ 5% जीएसटी लगेगा या इन्हें टैक्स फ्री किया गया है।
देश में नवरात्रि के पहले दिन 22 सितंबर 2025 से जीएसटी रिफॉर्म्स (GST 2.0) लागू हो गए हैं और इसके साथ ही रोजमर्रा में इस्तेमाल किए जाने वाले किराना सामान, डेयरी प्रोडक्ट्स से लेकर टीवी-एसी और कार-बाइक्स तक तमाम चीजों के रेट में भी बदलाव होने जा रहा है और ये सस्ते हो गए हैं।

वहीं कुछ विलासिता से जुड़ी और हानिकारक वस्तुओं पर टैक्स की मार बढ़ने वाली है यानी ये महंगी हो गई हैं. आइए जानते हैं आपके काम की कौन सी चीज अब किस टैक्स स्लैब में आएगी और कीमत में कितनी कमी देखने को मिलेगी? सरकार ने GST में बदलाव करते हुए इसके नए टैक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को जरूरी वस्तुओं और व्यापक बाजार के उत्पादों को अधिक किफायती बनाने के लिए तैयार किया है. देश के आम आदमी के परिवार के लिए इसका मतलब है कि उन्हें अब किराने के बिल, डेयरी और उपकरणों की कीमतों पर राहत मिलेगी. राहत की शुरुआत घर की रसोई से होती है और इसे ध्यान में रखते हुए डेयरी प्रोडक्ट्स के साथ ही खाद्य तेल, पैकेज्ड आटा और साबुन जैसी रोजमर्रा की जरूरत की चीजें भी संशोधित दरों के तहत सस्ती हो गईं हैं. इसके अलावा बच्चों की पढ़ाई से जुड़े सामानों से लेकर दवाओं, कार-बाइक्स, एसी और टीवी तक के दाम घट गए हैं।

इन सामानों पर GST से छूट:

सरकार ने जीएसटी रिफॉर्म के तहत कई सामानों के जीएसटी स्लैब में बदलाव किया है, तो कई आइटम्स को जीएसटी फ्री भी कर दिया है. जिन पर अब जीरो जीएसटी लगेगा, उनमें प्रमुख तौर पर फूड प्रोडक्ट शामिल हैं. 5% से 18% तक के स्लैब में आने वाले कई प्रोडक्ट को जीएसटी फ्री कर दिया है. इनमें यूएचटी दूध, छेना-पनीर, पिज्जा, सभी तरह की ब्रेड, रेडी टू ईट रोटी, रेडी टू ईट पराठा हैं. इसके अलावा बच्चों की शिक्षा से जुड़े सामानों में पेंसिल, कटर, रबर, नोटबुक, नक्शे-चार्ट, ग्लोब, वॉटर सर्वे चार्ट, एटलस, प्रैक्टिस बुक, ग्राफ बुक, लैबोरेटरी नोटबुक पर भी 12% की जगह अब शून्य जीएसटी कर दिया गया है. दवाएं और हेल्थ-लाइफ पॉलिसी पर जीएसटी खत्म करते हुए सरकार ने राहत दी है. जहां 33 जीवन रक्षक दवाओं पर अब तक लागू 12 फीसदी जीएसटी को खत्म करते हुए इसे जीरो किया गया है, इनमें तीन कैंसर की दवाइयां भी शामिल हैं. इसके अलावा इंडिविजुअल हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी को भी पूरी तरह से जीएसटी मुक्त किया गया है।ये जरूरी सामान भी हो जाएंगे सस्ते:

आज से लागू, कार, बाइक, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक और खाद्य वस्तुएं होंगी सस्ती
आज से लागू, कार, बाइक, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक और खाद्य वस्तुएं होंगी सस्ती

सरकार की ओर से जहां ऊपर बताए गए सामानों और सर्विस को जीएसटी फ्री किया गया है. तो तमाम जरूरत की चीजों को 5% स्लैब में शामिल किया गया है।

फूड आइटम्‍स:

वनस्पति वसा/तेल 12% से 5%

मोम, वनस्पति मोम 18% से 5%

मांस, मछली, फूड प्रोडक्‍ट्स 12% से 5%

मक्खन-घी 12% से 5%

चीनी, उबली हुई मिठाइयां 12%-18% से 5%

चॉकलेट और कोको पाउडर 18% से 5%

पास्ता, कॉर्न फ्लेक्स, नूडल्स, बिस्कुट, माल्ट एक्सट्रेक्ट (गैर-कोको) 12%-18% से 5%

जैम, जेली, मुरब्बा, मेवे/फलों का पेस्ट, सूखे मेवे, मेवे 12% से 5%

फलों का रस, नारियल पानी 12% से 5%

कंज्‍यूमर और डोमेस्टिक आइटम्स:

हेयर ऑयल, शैम्पू, टूथपेस्ट, शेविंग उत्पाद, टैल्कम पाउडर 18% से 5%

टॉयलेट साबुन (बार/केक) 18% से 5%

टूथब्रश, डेंटल फ्लॉस 18% से 5%

शेविंग क्रीम/लोशन, आफ्टरशेव 18% से 5%

सामान्य टेबलवेयर/किचनवेयर (लकड़ी, लोहा, तांबा, एल्युमीनियम, प्लास्टिक) 12% से 5%

बच्चों की दूध की बोतल-निप्पल, प्लास्टिक के मोती 12% से 5%

मोमबत्तियां 12% से 5%

छाते और संबंध‍ित वस्‍तु 12% से 5%

सिलाई सुइयां 12% से 5%

सिलाई मशीनें और पुर्जे 12% से 5%

कपास/जूट से बने हैंड बैग 12% से 5%

शिशुओं के लिए नैपकिन/डायपर 12% से 5%

पूरी तरह से बांस, बेंत, रतन से बने फर्नीचर 12% से 5%

दूध के डिब्बे (लोहा/स्टील/एल्यूमीनियम) 12% से 5%

इलेक्ट्रॉनिक सामान:

एयर कंडीशनर (AC) 28% से 18%

बर्तन धोने की मशीनें 28% से 18%

टीवी (एलईडी, एलसीडी), मॉनिटर, प्रोजेक्टर 28% से 18%

एग्रीकल्‍चर और फर्टिलाइजर:

ट्रैक्टर (1800cc से अधिक क्षमता वाले सड़क ट्रैक्टरों को छोड़कर) 12% से 5%

पिछले ट्रैक्टर टायर/ट्यूब 18% से 5%

मिट्टी/कटाई/थ्रेसिंग के लिए कृषि मशीनरी 12% से 5%

कम्पोस्टिंग मशीनें 12% से 5%

स्प्रिंकलर/ड्रिप सिंचाई/लॉन/स्पोर्ट्स रोलर्स 12% से 5%

जैव-कीटनाशक, सूक्ष्म पोषक तत्व 12% से 5%

ईंधन के लिए पंप 28% से 18%

ट्रैक्टरों के लिए हाइड्रोलिक पंप 18% से 5%

हेल्‍थ प्रोडक्ट्स पर जीएसटी:

थर्मामीटर, डायग्नोस्टिक किट 12% 18% से 5%

ब्लड ग्लूकोज मॉनिटर (ग्लूकोमीटर) 12% से 5%

मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन और हाइड्रोजन पेरोक्साइड 12% से 5%

चश्मा 12% से 5%

मेडिकल/सर्जिकल रबर के दस्ताने 12% से 5%

कई दवाएं और खास दवाएं 12% से 5% या शून्‍य

कार-बाइक पर टैक्‍स

टायर 28% से 18%

मोटर वाहन (छोटी कारें, तिपहिया वाहन, एम्बुलेंस, 350cc से छोटी मोटरसाइकिल, कमर्शियल व्‍हीकल) 28% से 18%

रोइंग बोट/डोंगी 28% से 18%

साइकिलें और गैर-मोटर तिपहिया वाहन 12% से 5%

टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स:

सिंथेटिक धागे, बिना बुने कपड़े, सिलाई धागा, स्टेपल फाइबर 12% और 18% से 5%

परिधान, रेडि‍मेड, ₹2,500 से अधिक नहीं 12% से 5%

परिधान, रेडि‍मेड, ₹2,500 से अधिक 12% से 18%

इन सामानों पर भी घटेगा टैक्स:

इसके अलावा नक्काशीदार कला उत्पाद (लकड़ी, पत्थर, आधार धातु, कॉर्क) 12% से 5% स्लैह में आएंगे, जबकि हाथ से बने कागज और पेपरबोर्ड, हस्तशिल्प लैंप, पेंटिंग, मूर्तियां, पेस्टल, प्राचीन संग्रहणीय वस्तुएं भी इसी स्लैब में शामिल होंगे. तैयार चमड़ा, चमड़े के सामान, दस्ताने भी 5% के दायरे में होंगे, तो वहीं कंस्ट्रक्शन वर्क में शामिल टाइलें, ईंटें, पत्थर जड़ाई कार्य 12% से 5% ट्रांसफर किए जा रहे हैं. हालांकि, पोर्टलैंड, स्लैग, हाइड्रोलिक सीमेंट पर 28% की जगह 18% जीएसटी लागू होगा।

5% के टैक्स स्लैब में ये सामान भी आएंगे:

सौर कुकर/वॉटर हीटर, बायोगैस/पवन/अपशिष्ट से ऊर्जा/सौर पैनल भी अब 12% के बजाय 5% टैक्स स्लैब में आ जएंगे. इसके साथ ही सर्विस सेक्टर में बदलावों की बात करें, तो ₹7,500 दिन से कम होटल 12% से 5%, सिनेमा (टिकट ₹100 से कम) 12% से 5% और सौंदर्य सर्विस 18% से 5% (कोई आईटीसी नहीं) में आएंगी।

ये चीजें और सर्विसें महंगी होंगी:

जहां ज्यादातर सामान और सर्विेसें 22 सितंबर से सस्ती होने वाली हैं, तो कई जगह सरकार ने झटका भी दिया है. हालांकि, ये विलासिता के सामान या हानिकारक वस्तुएं हैं. जिन सामानों पर जीएसटी बढ़ाया गया है, उनमें ऑटो सेक्टर से 350cc मोटरसाइकिलें, बड़ी एसयूवी, लक्जरी/प्रीमियम कारें, सीमा से ऊपर की हाइब्रिड कारें, रेसिंग कारें शामिल हैं, जिनपर 28% की जगह 40% का टैक्स लगाया गया है. इसके अलावा कैसीनो/रेस क्लब प्रवेश, सट्टेबाजी/जुआ पर भी जीएसटी 28% से बढ़ाकर 40% किया गया है. सिगार, सिगरेट, तंबाकू प्रोडक्ट भी इसी हाई स्लैब में आएंगे, तो वहीं कार्बोनेटेड/वातित पेय, स्वादयुक्त पेय, कैफीनयुक्त पेय पर भी 40% टैक्स लागू होगा।

महवा में बैंक के सामने से पिकअप चोरी, 14 हजार कैश और जरूरी कागजात भी गायब

महवा में बैंक के सामने से पिकअप चोरी, 14 हजार कैश और जरूरी कागजात भी गायब

महवा में बैंक के सामने से पिकअप चोरी, 14 हजार कैश और जरूरी कागजात भी गायब
महवा में बैंक के सामने से पिकअप चोरी, 14 हजार कैश और जरूरी कागजात भी गायब

महवा, राजस्थान — कस्बे में आपराधिक गतिविधियों का ग्राफ दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है और शनिवार की रात घटी एक ताजा घटना ने एक बार फिर से पुलिस की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जयपुर रोड स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के सामने से एक बोलेरो पिकअप को अज्ञात चोर चुराकर ले गए। यह घटना तब और गंभीर हो जाती है जब यह समझा जाए कि यह सब एक व्यस्त मार्ग पर, एक प्रतिष्ठित बैंक के सामने, और CCTV कैमरों की निगरानी में हुआ। चोरी की यह वारदात न केवल पुलिस प्रशासन के लिए चुनौती बन गई है, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता भी बढ़ा रही है।

घटना शनिवार देर रात की बताई जा रही है, जब पिकअप मालिक रफीक खान ने अपनी बोलेरो पिकअप बैंक के ठीक सामने खड़ी की थी। अगली सुबह जब रफीक की नींद खुली और वे वाहन लेने पहुंचे, तो देखा कि उनकी पिकअप गायब थी। शुरुआत में उन्होंने सोचा कि शायद किसी परिचित ने गाड़ी ली होगी, लेकिन जब आसपास पूछताछ की और पिकअप का कोई सुराग नहीं मिला, तो उनके होश उड़ गए। घबराए रफीक ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। इसके बाद पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की।

CCTV फुटेज से पता चला कि चोरी की यह घटना तड़के करीब सवा चार बजे की है। फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि चोर बेहद शांत तरीके से आए, गाड़ी का लॉक तोड़ा और फिर आराम से उसे स्टार्ट कर वहां से फरार हो गए। जिस तरह से चोरों ने पूरी वारदात को अंजाम दिया, उससे यह स्पष्ट हो गया कि वे शातिर और अनुभवशाली अपराधी हैं, जिन्हें वाहन चोरी की पूरी योजना और तकनीक की समझ है। उनकी हरकतों से यह प्रतीत होता है कि उन्होंने पहले से रेकी की हुई थी और सही समय का इंतजार कर रहे थे। गाड़ी चोरी होने के साथ-साथ पिकअप में रखे 14,000 रुपये नकद और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी चोरी हो गए, जिनमें वाहन के कागजात, लाइसेंस और अन्य निजी कागजात शामिल थे। रफीक खान ने इस घटना से आहत होकर कहा कि उन्हें इस चोरी से भारी नुकसान हुआ है क्योंकि न केवल उनका वाहन गया, बल्कि नकदी और कागजात की चोरी से उनकी रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित हुई है।

इस चोरी की घटना के बाद महवा में आमजन में भय और आक्रोश का माहौल बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में पुलिस गश्त नाम मात्र की रह गई है और चोर बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। जयपुर रोड जैसे व्यस्त इलाके में, जहाँ बैंक, दुकानों और रिहायशी इमारतों की भरमार है, वहाँ इस तरह की चोरी घटना पुलिस की लापरवाही को दर्शाती है। नागरिकों का यह भी कहना है कि अगर बैंक के सामने खड़ी गाड़ी सुरक्षित नहीं है, तो फिर बाकी इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था का अंदाज़ा आसानी से लगाया जा सकता है।

महवा में बैंक के सामने से पिकअप चोरी, 14 हजार कैश और जरूरी कागजात भी गायब
महवा में बैंक के सामने से पिकअप चोरी, 14 हजार कैश और जरूरी कागजात भी गायब

पुलिस ने रफीक खान की शिकायत के आधार पर अज्ञात चोरों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और अब सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फुटेज से कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं और तकनीकी सहायता के जरिए चोरों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। साथ ही, अन्य शहरों में हुई इसी तरह की घटनाओं से भी इस केस को जोड़कर देखा जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या यह कोई वाहन चोरी करने वाला गिरोह है, जो सुनियोजित तरीके से एक के बाद एक घटनाओं को अंजाम दे रहा है।

इस बीच, स्थानीय प्रशासन से लोगों की अपेक्षा है कि सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए और ऐसे संवेदनशील स्थानों पर नियमित गश्त की जाए। व्यापारियों और वाहन मालिकों की भी यह मांग है कि रात के समय पुलिस की सक्रियता बढ़ाई जाए और सीसीटीवी नेटवर्क को और अधिक व्यापक बनाया जाए। नागरिक यह भी चाहते हैं कि ऐसी घटनाओं के आरोपियों को जल्द से जल्द पकड़ा जाए और सख्त सजा दी जाए ताकि अपराधियों के मन में कानून का भय पैदा हो।

महवा जैसी जगह, जहाँ जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है और नगरीकरण की प्रक्रिया तेज है, वहाँ यदि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति कमजोर होती है, तो इससे न केवल जनता का विश्वास पुलिस से उठता है, बल्कि अपराधियों को भी खुली छूट मिलती है। इस घटना से पुलिस को सबक लेते हुए अपनी कार्यशैली में परिवर्तन लाना चाहिए और गश्त, निगरानी, और संदिग्ध गतिविधियों पर नियंत्रण बढ़ाना चाहिए।

अंततः, यह घटना महज एक पिकअप चोरी की नहीं है, बल्कि यह महवा में बढ़ती असुरक्षा और कमजोर होती पुलिस व्यवस्था की एक चेतावनी है। अगर समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो ऐसे अपराध और भी बढ़ सकते हैं। पुलिस को चाहिए कि वह रफीक खान को न्याय दिलाने के साथ-साथ पूरे शहर की सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करे और यह सुनिश्चित करे कि नागरिकों का जीवन और संपत्ति सुरक्षित रहे।

सोलर प्लांट से केबल चोरी करने वाले 3 शातिर चोर गिरफ्तार

सोलर प्लांट से केबल चोरी करने वाले 3 शातिर चोर गिरफ्तार

सोलर प्लांट से केबल चोरी करने वाले 3 शातिर चोर गिरफ्तार
सोलर प्लांट से केबल चोरी करने वाले 3 शातिर चोर गिरफ्तार

बांदीकुई: सोलर प्लांट से केबल चोरी के तीन शातिर चोर गिरफ्तार, चोरी का तांबा भी बरामद

बांदीकुई, राजस्थान — बांदीकुई पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त कार्रवाई में सोलर प्लांट से तांबे की केबल चोरी करने वाले तीन शातिर चोरों को गिरफ्तार किया गया है। इस कार्रवाई से क्षेत्र में बढ़ती चोरी की वारदातों पर अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। थानाधिकारी ज़हीर अब्बास ने बताया कि यह मामला अगस्त माह में सामने आया था, जब ग्राम उदेरवाडा में स्थित सोलर प्लांट से भारी मात्रा में तांबे की केबल चोरी कर ली गई थी। चोरों ने योजनाबद्ध तरीके से सोलर प्लांट में घुसकर केबल को काटा और उसे चोरी कर ले गए। यह केबल उच्च गुणवत्ता का तांबा युक्त था, जिसकी बाजार में बड़ी मांग है।

पुलिस ने इस मामले में त्वरित जांच करते हुए तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में हरकेश बावरिया उर्फ रामसिंह पुत्र रामप्रसाद, निवासी बहतेड़, थाना मलारना डूंगर, जिला सवाई माधोपुर; राकेश बावरिया पुत्र सुमान बावरिया, निवासी नाथूसर, थाना थानागाजी, जिला अलवर; और रामकेश बावरिया उर्फ तितरा पुत्र रामप्रसाद बावरिया, निवासी मोरपा काजी कुण्डली, थाना बाटोदा, जिला सवाई माधोपुर शामिल हैं। पुलिस की पूछताछ में इन आरोपियों ने न केवल उदेरवाडा सोलर प्लांट से केबल चोरी की वारदात को स्वीकार किया, बल्कि सैंथल और बैजूपाड़ा थाना क्षेत्रों में स्थित अन्य सोलर प्लांट्स से हुई चोरी की घटनाओं का भी खुलासा किया।

पुलिस ने चोरी के इस नेटवर्क के केवल चोरों तक ही सीमित न रहकर, चोरी का माल खरीदने वालों तक भी अपनी जांच को विस्तार दिया। जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई कि चोरी की गई केबल को जलाकर तांबा निकाला जाता था और फिर उसे आगे बेचा जाता था। पुलिस ने इस मामले में दो खरीददारों की भी पहचान की और उन्हें गिरफ्तार किया। इन दोनों आरोपियों की पहचान शानू पुत्र कमल तेली मुसलमान, निवासी चुली गेट, मदीना मस्जिद, गंगापुर सिटी; और रशीद खान पुत्र चिरंजी खान तेली मुसलमान, निवासी उष्मान कॉलोनी, गंगापुर सिटी के रूप में हुई है।

गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने चोरी की गई केबल को जलाकर निकाले गए तांबे के तार भी बरामद कर लिए हैं। इन तारों को शहर के विभिन्न कबाड़ बाजारों में खपाया जा रहा था। पूछताछ में यह भी सामने आया है कि ये चोर सुनसान इलाकों में स्थित सोलर प्लांट्स को निशाना बनाते थे, जहां पर सुरक्षाकर्मी सीमित होते थे या निगरानी की व्यवस्था कमजोर होती थी। रात के समय यह गिरोह प्लांट की चारदीवारी को पार कर भीतर प्रवेश करता था और केबल काटकर उसे बैग या बोरे में भरकर ले जाते थे। उसके बाद सुरक्षित स्थान पर ले जाकर केबल को आग में जलाकर उससे तांबा निकालते थे और उसे विभिन्न कबाड़ व्यापारियों को बेच देते थे।

सोलर प्लांट से केबल चोरी करने वाले 3 शातिर चोर गिरफ्तार
सोलर प्लांट से केबल चोरी करने वाले 3 शातिर चोर गिरफ्तार

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह एक संगठित गिरोह है जो विभिन्न जिलों में फैला हुआ है और जिनका मुख्य उद्देश्य सोलर प्लांट्स, मोबाइल टावरों और अन्य इलेक्ट्रिक इंस्टॉलेशनों से तांबे की केबल चोरी करना है। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों की भी तलाश में जुट गई है और जल्द ही और गिरफ्तारियां संभव हैं। गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल, बैंक ट्रांजेक्शन और कॉल डिटेल्स की भी जांच की जा रही है ताकि इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों और खरीददारों का भी पता लगाया जा सके।

थाना अधिकारी ज़हीर अब्बास ने बताया कि साइबर सेल की मदद से आरोपियों की लोकेशन ट्रैक की गई थी। आरोपी अक्सर लोकेशन बदलते रहते थे ताकि पकड़े न जा सकें, लेकिन पुलिस की सतर्कता और तकनीकी जांच के चलते उन्हें दबोच लिया गया। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या ये आरोपी पहले भी किसी अन्य बड़े अपराध में शामिल रहे हैं। चोरी के इस मामले ने यह भी दिखाया है कि कैसे तकनीकी यंत्रों की सहायता से पुलिस अपराधियों तक पहुंच रही है और सटीक कार्रवाई कर रही है।

इस कार्रवाई की स्थानीय लोगों द्वारा सराहना की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से क्षेत्र में लगातार हो रही चोरी की घटनाओं से वे परेशान थे और पुलिस की इस कार्रवाई से अब उन्हें राहत महसूस हो रही है। साथ ही, सोलर कंपनियों को भी सलाह दी गई है कि वे अपने प्लांट्स में सुरक्षा के अतिरिक्त उपाय करें, जैसे कि सीसीटीवी कैमरे, नाइट विजन डिवाइसेस और सुरक्षा गार्ड्स की तैनाती, ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

बांदीकुई पुलिस द्वारा की गई यह कार्रवाई न केवल तात्कालिक अपराध की गुत्थी को सुलझाने में सफल रही, बल्कि इसने एक बड़े अंतर-जिला चोर गिरोह के नेटवर्क को भी उजागर किया है। पुलिस की सतर्कता, आधुनिक तकनीक का उपयोग और टीमवर्क ने यह साबित कर दिया है कि कोई भी अपराधी कानून से बच नहीं सकता। अब देखना यह है कि आगे की जांच में और कितने नाम सामने आते हैं और इस गिरोह का पूरा नेटवर्क कब तक पुलिस की गिरफ्त में आता है।

जातिगत भेदभाव खत्म करने को यूपी सरकार का बड़ा फैसला,पुलिस रिकॉर्ड्स से हटेगा जाति का उल्लेख

जातिगत भेदभाव खत्म करने को यूपी सरकार का बड़ा फैसला,पुलिस रिकॉर्ड्स से हटेगा जाति का उल्लेख

जातिगत भेदभाव खत्म करने को यूपी सरकार का बड़ा फैसला,पुलिस रिकॉर्ड्स से हटेगा जाति का उल्लेख
जातिगत भेदभाव खत्म करने को यूपी सरकार का बड़ा फैसला,पुलिस रिकॉर्ड्स से हटेगा जाति का उल्लेख

की दिशा में अहम कदम उठाया है। कार्यवाहक मुख्य सचिव दीपक कुमार ने रविवार को आदेश जारी कर दिया।

अब एफआईआर,गिरफ्तारी मेमो और अन्य पुलिस दस्तावेजों से जाति का उल्लेख हटा दिया जाएगा। इसके स्थान पर माता-पिता के नाम जोड़े जाएंगे। साथ ही थानों के नोटिस बोर्ड, वाहनों और साइनबोर्ड्स से जातीय संकेत और नारे भी हटाने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार ने जाति आधारित रैलियों और प्रदर्शनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ सोशल मीडिया पर जातिगत प्रचार-प्रसार पर कड़ी निगरानी रखने का भी निर्णय लिया है। हालांकि, SC/ST एक्ट से जुड़े मामलों में जाति का उल्लेख यथावत रहेगा।

इस आदेश के पालन हेतु नई SOP बनाई जाएगी और पुलिस नियमावली में संशोधन किया जाएगा। सरकार का दावा है कि यह कदम सामाजिक समरसता स्थापित करने और भेदभाव मिटाने में ऐतिहासिक साबित होगा।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने एक अहम निर्णय लेते हुए जाति आधारित रैलियों पर रोक लगा दी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के हालिया आदेश के अनुसार राज्य के मुख्य सचिव ने सार्वजनिक जगहों, कानूनी दस्तावेजों और पुलिस रिकॉर्ड्स में जाति का उल्लेख किए जाने पर रोक लगाने का निर्देश जारी किया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने जाति आधारित राजनीति और भेदभाव पर अंकुश लगाने के लिए अहम कदम उठाया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में कार्यवाहक मुख्य सचिव दीपक कुमार ने इस संबंध में नए निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके तहत अब प्रदेश में जाति आधारित रैलियों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

पुलिस की ओर से दर्ज की जाने वाली एफआईआर, गिरफ्तारी मेमो और अन्य दस्तावेजों में आरोपियों की जाति का उल्लेख नहीं किया जाएगा। इसके स्थान पर माता-पिता के नाम लिखे जाएंगे। थानों के नोटिस बोर्ड, वाहनों और साइनबोर्ड पर लगे जातीय संकेत और नारे भी हटाए जाएंगे। आदेश के पालन के लिए पुलिस नियमावली और एसओपी में संशोधन भी किया जाएगा। सोशल मीडिया पर भी जाति आधारित कंटेंट पर सख्त निगरानी रखी जाएगी। हालांकि एससी-एसटी एक्ट जैसे विशेष मामलों में जाति का उल्लेख जारी रहेगा।

जातिगत भेदभाव खत्म करने को यूपी सरकार का बड़ा फैसला,पुलिस रिकॉर्ड्स से हटेगा जाति का उल्लेख
जातिगत भेदभाव खत्म करने को यूपी सरकार का बड़ा फैसला,पुलिस रिकॉर्ड्स से हटेगा जाति का उल्लेख

हाईकोर्ट का आदेश
बताते चले कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में अपने 28 पन्नों के आदेश में साफ कहा था कि पुलिस दस्तावेजों और एफआईआर में जाति का उल्लेख संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है। कोर्ट ने इसे समाज को विभाजित करने वाला कदम बताते हुए इसे तुरंत रोकने के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट ने सुझाव दिया था कि पुलिस के सभी फॉर्म में पिता या पति के नाम के साथ मां का नाम भी शामिल किया जाए। ताकि लैंगिक समानता को बढ़ावा मिले।कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि इंटरनेट मीडिया पर जाति के उल्लेख को रोकने के लिए आईटी नियमों को और मजबूत किया जाए। नागरिकों को शिकायत दर्ज कराने की सरल व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।

कैसे शुरू हुआ मामला?
यह पूरा मामला 29 अप्रैल 2023 की एक पुलिस कार्रवाई से जुड़ा हुआ है। उस दिन पुलिस ने एक स्कार्पियो गाड़ी से शराब की बड़ी खेप बरामद की थी। इस मामले में पुलिस ने आरोपी प्रवीण छेत्री समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। FIR में पुलिस ने आरोपियों की जाति का जिक्र कर दिया था। इसको लेकर प्रवीण छेत्री ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की मांग की थी।उधर मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आदेश दिया कि भविष्य में पुलिस रिकॉर्ड, थानों के बोर्ड और सार्वजनिक स्थलों पर कहीं भी जाति का उल्लेख नहीं होना चाहिए।राजनीति पर असर
वहीं हाई कोर्ट की सख्ती के बाद यूपी सरकार के इस फैसले का सीधा असर प्रदेश की जातीय राजनीति पर पड़ेगा। कोई भी राजनीतिक दल या संगठन अब जाति आधारित रैली आयोजित नहीं कर सकेगा। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में जाति का उन्मूलन एक केंद्रीय एजेंडा होना चाहिए। इसलिए राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर सरकारों को संवैधानिक नैतिकता के अनुसार ठोस कदम उठाने होंगे।

अब FIR और पुलिस दस्तावेजों में नाम के साथ नहीं लिख सकेंगे जाति, यूपी सरकार ने बदल दिए नियम

अब FIR और पुलिस दस्तावेजों में नाम के साथ नहीं लिख सकेंगे जाति, यूपी सरकार ने बदल दिए नियम

अब FIR और पुलिस दस्तावेजों में नाम के साथ नहीं लिख सकेंगे जाति, यूपी सरकार ने बदल दिए नियम
अब FIR और पुलिस दस्तावेजों में नाम के साथ नहीं लिख सकेंगे जाति, यूपी सरकार ने बदल दिए नियम

यूपी में वाहनों पर जाति संबोधित नारे-या सम्मलेन अवैध हो जाएंगे. जी हां इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रदेश सरकार ने जातिगत भेदभाव को खत्म करने के लिए बड़ा कदम उठाया है. हाईकोर्ट के आदेश का पालन करते हुए मुख्य सचिव दीपक कुमार ने सभी सरकारी दस्तावेजों, पुलिस रिकॉर्ड्स और सार्वजनिक स्थानों से जाति के उल्लेख को हटाने का आदेश जारी किया है.

इस फैसले से पुलिस रिकॉर्ड्स, FIR, गिरफ्तारी मेमो, थानों के नोटिस बोर्ड, वाहनों और साइनबोर्ड्स से जातीय संकेत और नारे पूरी तरह हटा दिए जाएंगे. इसके साथ ही जाति आधारित रैलियों पर पूर्ण प्रतिबंध और सोशल मीडिया पर सख्त निगरानी होगी.

भेदभाव खत्म करने के लिए था आदेश

दरअसल हाईकोर्ट ने सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने और भेदभाव को खत्म करने के लिए यह आदेश दिया था. नए नियमों के तहत अब FIR, गिरफ्तारी मेमो और अन्य पुलिस रिकॉर्ड्स में जाति का उल्लेख नहीं होगा. इसके बजाय पहचान के लिए माता-पिता के नाम जोड़े जाएंगे. हालांकि, SC/ST एक्ट जैसे विशिष्ट मामलों में जाति के उल्लेख को छूट दी जाएगी, ताकि कानूनी प्रक्रिया प्रभावित न हो. मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि आदेश का पालन सुनिश्चित करने के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) और पुलिस नियमावली में जल्द संशोधन किया जाएगा.

अब FIR और पुलिस दस्तावेजों में नाम के साथ नहीं लिख सकेंगे जाति, यूपी सरकार ने बदल दिए नियम
अब FIR और पुलिस दस्तावेजों में नाम के साथ नहीं लिख सकेंगे जाति, यूपी सरकार ने बदल दिए नियम

जाति आधारित संकेत और नारे पूरी तरह बैन

इस आदेश के तहत थानों के नोटिस बोर्ड, पुलिस वाहनों और सार्वजनिक साइनबोर्ड्स से जाति आधारित संकेत, जैसे ‘यादव’, ‘जाट’, ‘गुर्जर’ या अन्य समुदायों के नारे, तत्काल हटाए जाएंगे. इसके अलावा, जाति आधारित रैलियों और प्रदर्शनों पर पूरी तरह रोक लगाई गई है. सोशल मीडिया पर भी ऐसी सामग्री पर नजर रखी जाएगी, और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी. यह कदम उत्तर प्रदेश में सामाजिक एकता को बढ़ाने और जातिगत तनाव को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.सख्ती से कराया जाएगा पालन

मुख्य सचिव दीपक कुमार ने बताया कि हाईकोर्ट के निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाएगा. सभी पुलिस थानों और सरकारी विभागों को आदेश भेजे जा चुके हैं. हमारा लक्ष्य समाज में समानता और एकता को बढ़ावा देना है. उन्होंने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि नए नियमों का उल्लंघन न हो, और उल्लंघन की स्थिति में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी.

यह फैसला उत्तर प्रदेश में जातिगत भेदभाव को खत्म करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम सामाजिक समावेशिता को बढ़ाएगा, लेकिन इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जागरूकता और प्रशिक्षण जरूरी है.खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां जातिगत पहचान गहरी जड़ें जमाए हुए है, वहां पुलिस और प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी.

SC/STएक्ट मामलों में रहेगी छूट

SC/ST एक्ट के तहत दर्ज मामलों में जाति का उल्लेख जरूरी होने पर सावधानी बरती जाएगी, ताकि पीड़ितों को न्याय मिलने में कोई बाधा न आए. सरकार ने सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को आदेश के पालन की निगरानी के लिए समितियां गठित करने का निर्देश दिया है.