रिश्वतखोरी पर शिकंजा : सिरसा में ASI अनिल कुमार ₹26,000 नकद रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

रिश्वतखोरी पर शिकंजा : सिरसा में ASI अनिल कुमार ₹26,000 नकद रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

रिश्वतखोरी पर शिकंजा : सिरसा में ASI अनिल कुमार ₹26,000 नकद रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार
रिश्वतखोरी पर शिकंजा : सिरसा में ASI अनिल कुमार ₹26,000 नकद रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

सिरसा (हरियाणा) में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (SVACB), हिसार की कार्रवाई ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई में सतर्कता एवं निष्कपट दृष्टिकोण कितनी महत्वपूर्ण है। 9 अक्टूबर 2025 को, रानियां थाना क्षेत्र के सहायक उप निरीक्षक (ASI) अनिल कुमार को भ्रष्टाचार के एक गंभीर आरोप में रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। आरोप यह है कि उसने शिकायतकर्ता से ₹26,000 नकद रिश्वत ली, ताकि वह संबंधित चालान को न्यायालय में प्रस्तुत कर दे। इस गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि, आरोपों की गंभीरता और इनके व्यापक निहितार्थों को यदि हम विस्तार से देखें तो यह घटना सिर्फ एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी का मामला न होकर उस प्रणाली की कमजोरियों और सुधार की जरूरतों को उजागर करती है जिसमें न्याय और प्रशासन दोनों ही शामिल हैं।

भ्रष्टाचार की शिकायतें अक्सर सामान्य नागरिकों के कानों तक पहुँचती हैं, लेकिन उनकी जांच और कार्रवाई होने में बहुत समय लगता है। इस मामले में, शिकायतकर्ता ने पहले ही यह आरोप लगाया था कि ASI अनिल कुमार ने उसके पिता से पहले ₹10,000 नकद ऐंठ लिए थे। इसके बावजूद, चालान अदालत में पेश नहीं किया गया। इस प्रकार, न केवल रिश्वत की उम्मीद की गई, बल्कि भ्रष्ट तंत्र ने प्रक्रिया को बाधित कर दिया। ऐसी स्थितियाँ न्याय की अवधारणा को भी चुनौती देती हैं। यह उम्मीद की जाती है कि पुलिस या जांच अधिकारी निष्पक्ष कार्य करें, लेकिन जब वही अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग करते हैं, तो जनता का विश्वास टूटता है।

मामला और भी संवेदनशील है क्योंकि यह सीधे जेल में बंद अभियुक्त और उसकी कानूनी प्रक्रिया से संबंधित है। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसका भाई करीब 80 दिन से सिरसा जेल में बंद है, जिनका मुकदमा (मुकदमा नंबर 364/2025) उसी ASI अनिल कुमार की देखरेख में था। यह खुद एक असंतुलन की स्थिति है—अदालत में प्रस्तुत करने का काम और अभियुक्त की रक्षा एवं जांच की जिम्मेदारी एक ही व्यक्ति के हाथों होने से पारदर्शिता खतरे में आ जाती है। 8 अक्टूबर को जब शिकायतकर्ता ने अपने भाई का चालान प्रस्तुत करवाने के लिए ASI अनिल कुमार से संपर्क किया, तो उसने ₹26,000 नकद रिश्वत की मांग की। इस तरह की सीधे‑साधे रिश्वत की मांग न केवल आपराधिक है, बल्कि न्याय प्रणाली के मूल सिद्धांतों—निष्पक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही—को भी ठेस पहुंचाती है।

रिश्वत लेने का यह तंत्र सामाजिक न्याय के लिए खतरनाक संकेत है। यदि अधिकारी अपनी जांच प्रक्रिया में ही मोहताज हो जाएँ, तो किस तरह से दोषियों को सज़ा मिलेगी? किस तरह से निर्दोष लोगों को न्याय मिलेगा? ऐसे मामलों में यह देखा जाना चाहिए कि आरोप कितने प्रमाणित होते हैं, यह कार्रवाई कितनी त्वरित और निष्पक्ष होती है, और आरोपी अधिकारी को कानूनी तौर पर किस प्रकार की सजा दी जाएगी। इस गिरफ्तारी के बाद, SVACB हिसार ने इस मामले में अभियोग संख्या 39 दिनांक 9.10.2025 पंजीकृत की है, जिसमें धारा 7 पीसी एक्ट, 1988 के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह एक गंभीर कदम है, क्योंकि धारा 7 भ्रष्टाचार विरोधी कानूनों में एक कठोर प्रावधान है, जिसका उद्देश्य इस तरह की गंभीर अक्षमताओं को रोकना है।

इस कार्रवाई का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह न केवल एक अधिकारी को दंडित करने की दिशा में है, बल्कि यह एक संदेश देता है—कि भ्रष्ट अधिकारी सुरक्षित नहीं हैं। यह उन लोगों के लिए एक उदाहरण है जो अपनी स्थिति का दुरुपयोग कर न्याय प्रक्रिया को बाधित करना चाहते हैं। यदि ऐसी कार्रवाई नियमित और निष्पक्ष रूप से की जाए, तो भ्रष्टाचार पर नियंत्रण संभव हो सकता है। लेकिन यह तभी संभव है जब जांच एजेंसियाँ स्वतंत्र हों, सामग्री को प्रभावी तरीके से जांच सकें और अभियोजन पक्ष कार्रवाई को जल्दी आगे बढ़ा सके।

रिश्वतखोरी पर शिकंजा : सिरसा में ASI अनिल कुमार ₹26,000 नकद रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार
रिश्वतखोरी पर शिकंजा : सिरसा में ASI अनिल कुमार ₹26,000 नकद रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

यह घटना सामाजिक विश्वास की बहाली के लिए आवश्यक है। जनता को यह विश्वास होना चाहिए कि यदि वह भ्रष्टाचार की शिकायत करती है, तो उस पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और दोषियों को जल्द सज़ा दी जाएगी। सिर्फ कार्रवाई के डर से भ्रष्टाचार रुक नहीं पाएगा — बल्कि यह निर्भयता, पारदर्शिता और जवाबदेही की व्यवस्था ही इसे रोक सकती है। इस घटना की रिपोर्टिंग और उसकी व्यापक चर्चा भी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आम नागरिकों को यह अनुभव कराने का अवसर देती है कि यदि वे सच्चाई के साथ आगे आयें तो कानूनी व्यवस्था उन्हें साथ दे सकती है।

आगे की चुनौतियाँ कम नहीं हैं। एक तो यह सुनिश्चित करना कि इस मामले की जांच में किसी प्रकार की राजनीति या अन्य दबाव न हो। दूसरे, यह देखना कि आरोप सिद्ध होते हैं या नहीं — यानी न्यायालय में सबूतों की गुणवत्ता, गवाहों की विश्वसनीयता और अभियोजन पक्ष की त्वरित कार्रवाई। तीसरा, यह सुनिश्चित करना कि इस मामले में एसआई अनिल कुमार को न केवल गिरफ्तार किया जाए बल्कि दोषी पाए जाने पर सख्त सजा मिले, जिससे यह संदेश व्यापक स्तर पर जाए कि पद का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इस घटना से यह भी संकेत मिलता है कि प्रशिक्षित, ईमानदार और जवाबदेह अधिकारियों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता है। साथ ही भ्रष्टाचार रोकने वाले यंत्रों — जैसे वीडियो रिकॉर्डिंग, इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग, शांतिपूर्ण शिकायत प्रणाली और निगरानी — को और मजबूत किया जाना चाहिए। पुलिस विभागों और जांच संस्थाओं को नियमित ऑडिट और समीक्षा के दायरे में लाया जाना चाहिए। यदि इन यंत्रों को लागू किया जाए, तो ऐसे मामलों की संभावना कम होगी। न्यायपालिका, पुलिस प्रशासन और नागरिक समाज को मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कानून केवल लिखित रूप से न हो, बल्कि व्यवहार में लागू हो।

समग्र रूप से देखा जाए, तो यह मामला न केवल एक भ्रष्ट अधिकारी को अंकुश लगाने की दिशा में है, बल्कि न्याय व्यवस्था, पुलिस प्रणाली और सामाजिक विश्वास के संरचनात्मक सुधार की आवश्यकता को भी उद्घाटित करता है। SVACB की यह कार्रवाई इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि इस तरह की कार्रवाइयाँ नियमित, निष्पक्ष और निर्भय रूप से जारी रहीं, तो भ्रष्टाचार की जड़ें धीरे-धीरे कम हो सकती हैं और न्याय का संकल्प अधिक सुदृढ़ हो सकेगा।

झुंझुनूं पुलिस की कार्रवाई : फरार लुटेरों की टोली पकड़ी

झुंझुनूं पुलिस की कार्रवाई : फरार लुटेरों की टोली पकड़ी

झुंझुनूं पुलिस की कार्रवाई : फरार लुटेरों की टोली पकड़ी
झुंझुनूं पुलिस की कार्रवाई : फरार लुटेरों की टोली पकड़ी

जयपुर से लेकर मुम्बई तक पीछा, 5 महीने बाद हार्डकोर नितिश ब्लैक और हिस्ट्रीशीटर संदीप डांग सहित चार को बगड पुलिस ने दबोचा, दोनों 15000 के हैं इनामी
जयपुर। झुन्झुनू पुलिस ने वांटेड अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने राहगीरों से मारपीट कर और धमकाकर जेवरात व नगदी छीनने के मामले में पिछले पाँच माह से फरार चल रहे जिला स्तरीय टॉप-टेन, ₹10,000 के ईनामी हार्डकोर अपराधी नितिश उर्फ ब्लैेक और ₹5,000 के ईनामी हिस्ट्रीशीटर संदीप उर्फ डांग सहित कुल चार शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधीक्षक बृजेश ज्‍योति उपाध्‍याय ने बताया कि महानिरीक्षक पुलिस जयपुर रेंज राहुल प्रकाश के निर्देशानुसार वांछित अपराधियों की गिरफ्तारी हेतु विशेष अभियान चलाया जा रहा है। यह मामला 22 मई को बगड थाना में दर्ज हुआ था। परिवादी अमित कुमार ने रिपोर्ट दी थी कि 21 मई को जब वह अपनी मोटरसाइकिल से झुन्झुनू से सुलताना जा रहा था, तब प्रतापपुरा अंडरपास के पास एक स्विफ्ट कार में सवार नितिश उर्फ ब्लेकिया, संदीप डांगी उर्फ डांगला, अनुज उर्फ भानजा, अजय माखर और राहुल ने उसकी गाड़ी रोक दी।
आरोपियों ने पाइपों से उससे मारपीट की और सोने की लेडीज चेन, कान के झुमके तथा ₹48,000 नकद छीनकर फरार हो गए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक देवेन्‍द्र राजावत और वृताधिकारी हरिसिंह धायल के सुपरविजन में थानाधिकारी बगड सुभाष चन्‍द सामोता के नेतृत्व में विशेष टीमें गठित की गईं। आरोपियों की तलाश में पुलिस ने सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज खंगाले। आरोपी पुलिस के भय से जयपुर और मुम्बई जैसे स्थानों पर फरारी काट रहे थे।

झुंझुनूं पुलिस की कार्रवाई : फरार लुटेरों की टोली पकड़ी
झुंझुनूं पुलिस की कार्रवाई : फरार लुटेरों की टोली पकड़ी


स्पेशल इनपुट से घर से हुई गिरफ्तारी
बुधवार 08 अक्टूबर को एजीटीएफ नवलगढ के कांस्टेबल अमित कुमार मोटसरा से मिली सटीक सूचना पर कार्रवाई की गई। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने नितिश उर्फ ब्लैेक के गांव माखर की ढाणी स्थित घर पर दबिश दी। पुलिस टीम को देखकर आरोपी नितिश उर्फ ब्लेक उर्फ नितेश उर्फ कालू जाट (26) और उसके साथी राहुल पुनिया उर्फ कालू जाट (20) निवासी बगड़ ने भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया।
इसके बाद पूछताछ और तकनीकी मदद से ईनामी संदीप कुमार जाट उर्फ डांग (30) निवासी सूरजगढ़ और उसके साथी अजय जाखड़ (26) निवासी बगड़ को भी मठ स्टैंड बगड के पास से दस्तयाब किया गया।
हार्डकोर अपराधी नितिश उर्फ ब्लैेक पूर्व में 17 आपराधिक प्रकरणों में चालानशुदा और हिस्ट्रीशीटर संदीप उर्फ डांग पूर्व में 6 आपराधिक प्रकरणों में चालानशुदा है। नीतीश 10000 और संदीप 5000 का इनामी है। गिरफ्तार सभी आरोपियों से वारदात के संबंध में विस्तृत अनुसंधान और पूछताछ जारी है। इस सफलता में कांस्टेबल अमित मोटसरा का विशेष योगदान रहा।

जाल बिछाकर भिवाड़ी पुलिस ने पकड़ा हनी ट्रैप गैंग : जैरोली पुलिस की बड़ी कार्रवाई

जाल बिछाकर भिवाड़ी पुलिस ने पकड़ा हनी ट्रैप गैंग : जैरोली पुलिस की बड़ी कार्रवाई

जाल बिछाकर भिवाड़ी पुलिस ने पकड़ा हनी ट्रैप गैंग : जैरोली पुलिस की बड़ी कार्रवाई
जाल बिछाकर भिवाड़ी पुलिस ने पकड़ा हनी ट्रैप गैंग : जैरोली पुलिस की बड़ी कार्रवाई

• ब्लैकमेलिंग करते ₹50,000 लेते महिला सहित तीन आरोपी मौके से गिरफ्तार
भिवाड़ी। अपराधियों के विरुद्ध जयपुर रेंज में चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत भिवाड़ी पुलिस ने हनी ट्रैप गिरोह के खिलाफ एक प्रभावी कार्रवाई करते हुए एक महिला सहित तीन शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह लोगों को अपने जाल में फंसाकर आपत्तिजनक वीडियो बनाकर लाखों रुपये की ब्लैकमेलिंग कर रहा था। पुलिस अधीक्षक प्रशान्त किरण के निर्देशानुसार और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अतुल साहु तथा सीओ तिजारा शिवराज सिंह के निर्देशन में थाना जैरोली पुलिस ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया। 6 अक्टूबर को परिवादी उमर मोहम्मद को अरफीना नामक महिला का कॉल आया। महिला ने मिलने के बहाने उमर मोहम्मद को बाघौर बुलाया, जहाँ उसे अरफीना और सददाम नामक एक शख्स से मिला।
योजनाबद्ध तरीके से वे उमर मोहम्मद को फिरोजपुर झिरका ले गए, जहाँ एक होटल के कमरे में अरफीना के साथ उसके सामान्य फोटो व वीडियो बनाए गए। इसके बाद गिरोह ने उमर मोहम्मद को डरा धमकाकर उसकी गाड़ी और जेब से 29,000 रुपये नकद छीन लिए और फोन-पे के माध्यम से जबरन 84,000 ट्रांसफर करवा लिए।

जाल बिछाकर भिवाड़ी पुलिस ने पकड़ा हनी ट्रैप गैंग : जैरोली पुलिस की बड़ी कार्रवाई
जाल बिछाकर भिवाड़ी पुलिस ने पकड़ा हनी ट्रैप गैंग : जैरोली पुलिस की बड़ी कार्रवाई


50 लाख से ₹2.5 लाख तक की मांग
पैसे लेने के बाद भी ब्लैकमेलिंग जारी रही। आरोपियों ने उमर मोहम्मद को बार-बार फोन कर पहले ₹50 लाख और बाद में ₹10 लाख की मांग की। ब्लैकमेलिंग करते हुए उन्हें मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई। आखिर में आरोपी ₹2.5 लाख पर समझौता करने के लिए दबाव बना रहे थे।
पुलिस ने जाल बिछाकर दबोचा
परिवादी की शिकायत पर तुरंत भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर पुलिस टीम का गठन किया गया। थानाधिकारी विक्रम सिंह के नेतृत्व में गठित टीम ने सूचनाएं संकलित की और बुधवार को मौजा बाघौर में हनीट्रैप का झांसा देकर ब्लैकमेलिंग करने आए गिरोह के सदस्यों को 50 हजार नकद लेते हुए रंगे हाथ मौके से गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार मुलजिमों में अरफीना उर्फ सिमरन मेव (26), पति जीशान मेव पुत्र यूसुफ (28) और राशिद मेव पुत्र हाकम (19) निवासी फिरोजपुर झिरका जिला नूंह मेवात हरियाणा शामिल है। आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
इस सफल कार्रवाई में थानाधिकारी विक्रम सिंह, कांस्टेबल विजयपाल, प्रशान्त, छुट्टन और महिला कांस्टेबल रेखा की टीम ने अहम भूमिका निभाई।

दिल्ली: मोती नगर में मालिक के 18.25 लाख रुपए लेकर भागा कर्मचारी गिरफ्तार

दिल्ली: मोती नगर में मालिक के 18.25 लाख रुपए लेकर भागा कर्मचारी गिरफ्तार

दिल्ली: मोती नगर में मालिक के 18.25 लाख रुपए लेकर भागा कर्मचारी गिरफ्तार
दिल्ली: मोती नगर में मालिक के 18.25 लाख रुपए लेकर भागा कर्मचारी गिरफ्तार

नई दिल्ली । दिल्ली के मोती नगर थाना क्षेत्र में मालिक के 18.25 लाख रुपए लेकर फरार हुए कर्मचारी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के कब्जे से 17.65 लाख कैश बरामद कर लिया है। घटना 6 अक्टूबर को गुरुग्राम के डीएलएफ फेज-1 निवासी अजय सतीजा ने मोती नगर थाने में शिकायत दर्ज की। उन्होंने बताया कि वे रामा रोड औद्योगिक क्षेत्र, मोती नगर में केमिकल सेंटर नामक कार्यालय चलाते हैं। उन्होंने 3 अक्टूबर को अपने कर्मचारी संदीप कुमार सिंह को 18.25 लाख रुपए देकर भाई के अशोक विहार स्थित घर भेजा था, लेकिन संदीप न तो वहां पहुंचा और न ही लौटा। साथ ही उसका मोबाइल भी बंद मिला। संदीप पिछले 15 साल से उनके साथ काम कर रहा था और कैश जमा और संभालने का काम करता था। शिकायत के आधार पर मोती नगर थाने में मामला दर्ज हुआ और एएसआई दीपक सैनी ने जांच शुरू की।
इंस्पेक्टर वरुण दलाल के नेतृत्व में और एसीपी शिवम के पर्यवेक्षण में एएसआई दीपक सैनी, एएसआई राजेंद्र, एचसी पवन और एचसी राजेंद्र की एक टीम बनाई गई।

दिल्ली: मोती नगर में मालिक के 18.25 लाख रुपए लेकर भागा कर्मचारी गिरफ्तार
दिल्ली: मोती नगर में मालिक के 18.25 लाख रुपए लेकर भागा कर्मचारी गिरफ्तार


टीम ने संदीप (38) के गृहनगर फिरोजाबाद (उत्तर प्रदेश) और फिर दिल्ली के हर्ष विहार में स्थानीय पते के बारे में खुफिया जानकारी जुटाई। सूचना मिलते ही पुलिस ने गगन सिनेमा, हर्ष विहार के पास से संदीप को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में संदीप ने बताया कि उसने चोरी की रकम को घर पर काले बैग में छिपाया था। उसके बयान के आधार पर पुलिस ने उसके घर से 17,65,500 कैश बरामद कर लिया।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जो सक्रियता दिखाई, उसकी वजह से केस जल्द सॉल्व हो गया।
पुलिस की त्वरित और पेशेवर कार्रवाई से न सिर्फ आरोपी पकड़ा गया, बल्कि चोरी की रकम का ज्यादातर हिस्सा भी वापस मिल गया। इस उपलब्धि के लिए पुलिस उपायुक्त पश्चिम जिला, दिल्ली शरद भास्कर ने टीम की तारीफ की है।

खुशखबरी! गाजा जंग खत्म, इजरायल-हमास ने मिलाया हाथ, पीस डील के फर्स्ट फेज में क्या-क्या

खुशखबरी! गाजा जंग खत्म, इजरायल-हमास ने मिलाया हाथ, पीस डील के फर्स्ट फेज में क्या-क्या

खुशखबरी! गाजा जंग खत्म, इजरायल-हमास ने मिलाया हाथ, पीस डील के फर्स्ट फेज में क्या-क्या
खुशखबरी! गाजा जंग खत्म, इजरायल-हमास ने मिलाया हाथ, पीस डील के फर्स्ट फेज में क्या-क्या
दुनिया को खुशखबरी मिल गई है.
  • इजरायल और हमास के बीच शांति समझौता हो गया है. 2 साल से चली आ रही जंग का अब अंत हो गया है. इजरायल और हमास ने डोनाल्ड ट्रंप के पीस डील को स्वीकार कर एक गाजा में नई सुबह की शुरुआत की है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता में इजरायल और हमास ने शांति समझौते के पहले चरण पर हस्ताक्षर कर दिए हैं.
  • खुद डोनाल्ड ट्रंप ने यह खुशखबरी पूरी दुनिया को दी है. सालों से चले आ रहे गाजा युद्ध के बीच यह समझौता एक अहम मोड़ है, जो दोनों पक्षों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में पहला कदम साबित हो सकता है. अब सवाल है कि इजरायल और हमास के बीच पहले चरण के समझौते में क्या-क्या होगा?
दरअसल, अमेरिका ने ही हमास और इजरायल के बीच पीस डील का खाका तैयार किया है.

इस समझौते के पहले चरण में मुख्य रूप से मानवीय पहलुओं पर फोकस किया गया है. इसमें बंधकों की रिहाई और इजरायली सेना के पीछे हटने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं. आइए जानते हैं कि इस फर्स्ट फेज में क्या-क्या होने वाला है और इसका क्या प्रभाव पड़ेगा.सबसे पहले समझौते के तहत सभी बंधकों को रिहा किया जाएगा. हमास के पास मौजूद इजरायली बंधकों को तत्काल मुक्त किया जाएगा. अनुमान है कि करीब 100 से अधिक बंधक इस प्रक्रिया में शामिल हैं, जिनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी हैं. हालांकि, समाचार एजेंसी एपी ने दावा किया है कि हमास इस वीकेंड तक सभी 20 जीवित बंधकों को रिहा कर देगा. वहीं, इजरायल गाजा के अधिकांश हिस्से से वापस लौट जाएगा. बंधकों को सुरक्षित रूप से उनके परिवारों तक पहुंचाने के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी. इसमें मेडिकल चेकअप और मनोवैज्ञानिक सहायता भी शामिल होगी.

खुशखबरी! गाजा जंग खत्म, इजरायल-हमास ने मिलाया हाथ, पीस डील के फर्स्ट फेज में क्या-क्या
खुशखबरी! गाजा जंग खत्म, इजरायल-हमास ने मिलाया हाथ, पीस डील के फर्स्ट फेज में क्या-क्या

उधर इजरायल भी अपनी जेलों से फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा करेगा. हालांकि, अभी इसकी संख्या सार्वजनिक नहीं की गई है. अब चूंकि डील हो गई है, इसलिए यह रिहाई प्रक्रिया 72 घंटे के भीतर पूरी करनी होगी, जो शांति वार्ता की सफलता की पहली परीक्षाहोगी.दूसरा अहम पहलू इजरायली सेना का निर्धारित क्षेत्रों तक पीछे हटना है. समझौते के पहले चरण के मुताबिक, इजरायली फौज गाजा पट्टी के कुछ हिस्सों से हटेगी. खासकर उन क्षेत्रों से जहां हाल के महीनों में तीव्र संघर्ष देखा गया है. सेना के पीछे हटने की सीमा पूर्व-निर्धारित बफर जोन तक होगी, जो गाजा की सीमाओं पर स्थित हैंइस प्रक्रिया में सेना की टुकड़ियां अपनी पोजीशन से पीछे हटेंगी, मगर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय शांति सेना की तैनाती की जा सकती है.इतना ही नहीं, फर्स्ट फेज में गाजा में पानी, बिजली और चिकित्सा आपूर्ति जैसी बुनियादी सुविधाओं को बहाल करने पर जोर दिया जाएगा. ट्रंप ने वादा किया है कि सेना के पीछे हटाव के बाद गाजा में निर्माण कार्यों को अनुमति दी जाएगी, जो युद्ध से तबाह हुए इलाकों के पुनर्निर्माण में सहायक होगा.इस फर्स्ट फेज का मकसद तत्काल संघर्ष विराम सुनिश्चित करना है. हमास और इजरायल ने अगले 30 दिनों के भीतर इस पहले चरण को पूरा करने का लक्ष्य रखा है

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पूरा बयान

  • मुझे यह बताते हुए बहुत गर्व है कि इजरायल और हमास दोनों ने हमारे शांति समझौते के पहले चरण पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. इसका मतलब है कि सारे बंधक बहुत जल्द रिहा किए जाएंगे और इजरायल अपनी फौजों को तय की गई सीमा तक पीछे हटा लेगा. यह एक मजबूत, स्थायी और लंबे समय तक रहने वाली शांति की दिशा में पहला कदम है. सभी पक्षों के साथ इंसाफ से बर्ताव किया जाएगा. यह अरब और मुस्लिम दुनिया, इजरायल, आस-पास के सभी देशों और अमेरिका के लिए एक ऐतिहासिक और खुशियों भरा दिन है. हम कतर, मिस्र और तुर्की के उन मध्यस्थों का शुक्रिया अदा करते हैं, जिन्होंने हमारे साथ मिलकर इस ऐतिहासिक और अनोखे समझौते को संभव बनाया. शांति दूत धन्य हैं.
मिशन शक्ति 5.0 के अंतर्गत बालिकाओं ने सुरक्षा जागरूकता हेतु थाना-चौकी भ्रमण किया

मिशन शक्ति 5.0 के अंतर्गत बालिकाओं ने सुरक्षा जागरूकता हेतु थाना-चौकी भ्रमण किया

मिशन शक्ति 5.0 के अंतर्गत बालिकाओं ने सुरक्षा जागरूकता हेतु थाना-चौकी भ्रमण किया
मिशन शक्ति 5.0 के अंतर्गत बालिकाओं ने सुरक्षा जागरूकता हेतु थाना-चौकी भ्रमण किया
मिशन शक्ति 5,0 माध्यमिक शिक्षा के अंतर्गत
  • जनपद मे माध्यमिक विद्यालयों में बालिकाओं को सुरक्षा एवं कानूनी जागरूकता हेतु थाना एवं चौकी का भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किया  सहारनपुर। उत्तर प्रदेश सरकार के मिशन शक्ति कार्यक्रम के अंतर्गत आज जनपद के विभिन्न माध्यमिक विद्यालय में थाना चौकी भ्रमण एवं सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया इस कार्यक्रम के अंतर्गत अध्यापक गण बालिकाओं को नजदीकी थाना या चौकी लेकर गए जहां पुलिस अधिकारियों द्वारा छात्राओं को FIR दर्ज करने की प्रक्रिया गिरफ्तारी के समय नियमों एवं कानून अधिकारों की जानकारी दी गई
  • साथ में बालिकाओं एवं महिला सुरक्षा के संबंध में सरकार द्वारा क्या-क्या उपक्रम किए गए हैं पुलिस चौकी और थानों में क्या व्यवस्था दी गई है इसकी विस्तृत जानकारी दी गई। उपरोक्त कार्यक्रम में 111 विद्यालयों के 237 महिला अध्यक्ष अध्यापिकाओं एवं 4755 बालिकाओं द्वारा प्रतिभा किया गया।
मिशन शक्ति 5.0 के अंतर्गत बालिकाओं ने सुरक्षा जागरूकता हेतु थाना-चौकी भ्रमण किया
मिशन शक्ति 5.0 के अंतर्गत बालिकाओं ने सुरक्षा जागरूकता हेतु थाना-चौकी भ्रमण किया
साथ ही बालिकाओं को महिला हेल्पलाइन 1090/ 181 चाइल्ड हेल्पलाइन
  • 1098 पुलिस कंट्रोल रूम 112 मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 सहित अन्य महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबरों के उपयोग के बारे में बताया गया एवं कॉल रिहर्सल भी कराई गई। इस अवसर पर साइबर अपराध एवं ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव के उपायों पर भी चर्चा की गई छात्राओं को बताया गया कि इंटरनेट का उपयोग करते समय व्यक्तिगत जानकारी साझा ना करें संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें और किसी प्रकार की धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर संपर्क करें।
  • यह कार्यक्रम बालिकाओं में सुरक्षा आत्म रक्षा एवं कानूनी जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है। मिशन शक्ति के अंतर्गत ऐसे आयोजन द्वारा ना केवल छात्राओं मे जागरूकता आ रही है बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त समाज निर्माण की प्रेरणा भी प्रदान की जा रही है।
मंडी से ट्रक निकालने के नाम पर हफ्तावसूली, नहीं देने पर चालक के साथ मारपीट, कांच फोड़े

मंडी से ट्रक निकालने के नाम पर हफ्तावसूली, नहीं देने पर चालक के साथ मारपीट, कांच फोड़े

मंडी से ट्रक निकालने के नाम पर हफ्तावसूली, नहीं देने पर चालक के साथ मारपीट, कांच फोड़े
मंडी से ट्रक निकालने के नाम पर हफ्तावसूली, नहीं देने पर चालक के साथ मारपीट, कांच फोड़े

रामगढ़ पचवारा थाना क्षेत्र के लालसोट जिले में एक गंभीर घटना सामने आई है, जिसमें एक ट्रक चालक ने अपनी मांग पूरी न होने पर विरोधी चालक पर शारीरिक हानि, वाहन क्षति एवं उत्पीड़न आरोप लगाया है। यह मामला ट्रक मंडी में जगह दिलाने की एवज़ में हफ्तावसूली का है, जिसे वे दूसरे ट्रक चालक से मांग रहे थे। जब वह चालक इस मांग को स्वीकार करने को तैयार नहीं हुआ, तो मामला हिंसक रूप ले लिया।

पुलिस रिपोर्ट और पीड़ित द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, शिकायतकर्ता संजय शर्मा ने राजीव गांधी नगर थाने में एक प्राथमिकी दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि उन्हें 12 मील केरू पुलिया के नीचे, पेपसिंह नगर निवासी बजरंग शर्मा (पुत्र जसराज शर्मा) नामक व्यक्ति मिला। बजरंग ने ट्रक को रुकवाया और कहा कि यदि वह मंडी में प्रवेश करना चाहे तो उसे ₹10,000 मासिक देना होगा—अन्यथा मंडी में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। जब संजय ने इस अवैध मांग को ठुकराया और कहा कि “मैं तुम्हें किस बात के पैसे दूँ, मैं कोई पैसे नहीं दूँगा,” तब घटना चुपचाप नहीं ठहरी।

बजरंग शर्मा ने संजय से झगड़े की शुरुआत करते हुए ट्रक के कॉलर पकड़कर चालक को वाहन से बाहर निकालने की कोशिश की। संजय ने अंदर से ट्रक को लॉक कर दिया, जिससे बजरंग बाहर नहीं निकाल सके। लेकिन इसके बाद बजरंग ने लोहे के सरिए (भारी लोहे की लंबी रॉड) की सहायता से ट्रक के बाहरी हिस्से, विशेष रूप से द्वार (फाटक) तथा अन्य भागों पर दो–तीन बार गहरी चोट पहुंचाने के लिए हमला किया। इस हमले में ट्रक के कांच (दोनों साइड) भी टूट गए।

मंडी से ट्रक निकालने के नाम पर हफ्तावसूली, नहीं देने पर चालक के साथ मारपीट, कांच फोड़े
मंडी से ट्रक निकालने के नाम पर हफ्तावसूली, नहीं देने पर चालक के साथ मारपीट, कांच फोड़े

जब संजय ने ट्रक लेकर घटनास्थल से आगे निकलने की कोशिश की, तब बजरंग ने अपने स्वयं के ट्रक से टक्कर मारकर संजय के वाहन को बाधित किया। इस टक्कर का परिणाम यह हुआ कि वाहन को और क्षति पहुँचाई गई। संजय ने इस पूरी घटना को जान-माल को खतरे से जोड़ते हुए, बजरंग पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।

इस प्रकार की घटनाएँ न केवल व्यक्तिगत स्तर पर हिंसा को बढ़ावा देती हैं बल्कि व्यापार और परिवहन व्यवस्था में अव्यवस्था उत्पन्न करती हैं। ट्रक चालक जो अपने व्यवसाय चलाते हैं, वे किन्हीं दबावों और अवैध मांगों के शिकार हो जाते हैं। यहां मुकदमे के दर्ज होने से यह स्पष्ट हुआ कि पीड़ित ने न्याय का मार्ग अपनाया और संबंधित पुलिस थाने में शिकायत की।

रिपोर्ट के बाद पुलिस को आवश्यक कार्रवाई करते हुए बजरंग शर्मा के विरुद्ध दोषमुक्त नहीं छोड़ा जाना चाहिए। जांच अधिकारी को घटना की बारीकी से छानबीन करनी होगी — जैसे सीसीटीवी फुटेज, गवाह बयान, वाहन क्षति का दस्तावेजीकरण और चोट के सबूत। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो बजरंग पर आपराधिक धाराएँ जैसे कि धारा 323 (जानलेवा हमला), 427 (संपत्ति को नुकसान), 506 (धमकी), 34 (साझा अपराध), तथा संबंधित प्रदर्शन और वाहनों की क्षति की धाराएँ लग सकती हैं।

इस मामले की सफलता इस पर निर्भर करेगी कि पुलिस कितनी तत्परता और निष्पक्षता से जांच करती है। पीड़ित को सुरक्षा एवं कानूनी सहायता मुहैया कराना अनिवार्य है। यदि आप चाहें, तो मैं इस घटना के लिए एक प्रेस विज्ञप्ति या मीडिया रिपोर्ट का ड्राफ्ट बना सकता हूँ—क्या आप चाहेंगे कि मैं वह तैयार करूँ?

रामगढ़ पचवारा पुलिस ने तीन स्थायी वारंटियों को किया गिरफ्तार

रामगढ़ पचवारा पुलिस ने तीन स्थायी वारंटियों को किया गिरफ्तार

रामगढ़ पचवारा पुलिस ने तीन स्थायी वारंटियों को किया गिरफ्तार
रामगढ़ पचवारा पुलिस ने तीन स्थायी वारंटियों को किया गिरफ्तार

पृष्ठभूमि एवं अभियान का उद्देश्य

वांछित अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए थाना रामगढ़ पचवारा ने 1 अक्टूबर से 31 अक्टूबर, 2025 तक के लिए एक विशेष अभियान की रूपरेखा तैयार की थी। इस अभियान का उद्देश्य था उन अपराधियों को गिरफ्तार करना जिनके खिलाफ अदालतों ने स्थायी वारंट जारी किए थे। उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार यह अभियान विशेष रूप से सक्रिय किया गया। थानाधिकारी मदनलाल मीणा ने बताया कि अभियोजन और न्यायपालिका द्वारा जारी स्थायी गिरफ्तारी वारंटों को आधार मानते हुए प्राथमिक रूप से उन अपराधियों को पकड़ना लक्ष्य है, जो लंबे समय से वारंटों के तहत गिरफ्तारी से बचते आ रहे हैं।

इस अभियान की कुंजी थी — सतर्कता, विस्तृत निगरानी, गुप्त सूचना एवं टीम समन्वय। थाना प्रभारी ने स्पष्ट किया कि अपराधियों की गिरफ्तारी हेतु टीम का गठन किया गया है जिसमें थानाधिकारी स्वयं, साथ ही कांस्टेबल रामकेश, कांस्टेबल रोहिताश एवं कांस्टेबल कुशल पाल शामिल हैं।


गिरफ्तारी की क्रोनोलॉजी

रविवार की कार्रवाई
टाइमिंग और संदर्भों की जानकारी देते हुए थानाधिकारी मदनलाल मीणा ने बताया कि रविवार को दो स्थायी वारंटियों को गिरफ्तार किया गया। ये दोनों अभियुक्त —

  • महेंद्र मीणा, उम्र 23 वर्ष
  • श्रवण लाल मीणा, उम्र 37 वर्ष

इन दोनों के खिलाफ अदालतों द्वारा जारी स्थायी गिरफ्तारी वारंट मौजूद थे, और टीम ने गुप्त सूचना तथा निगरानी के आधार पर उन्हें धर दबोचा। गिरफ्तारी स्थल और समय के संबंध में थानाधिकारी ने बताया कि उन स्थानों पर लगातार जांच और लोगों से पूछताछ की जाती रही, जिससे सूचना मिली कि उक्त वारंटियों की गतिविधि किसी स्थानीय क्षेत्र में हो रही है। तत्पश्चात तेजी से कार्रवाई कर उन्हें पकड़ लिया गया।

सोमवार की कार्रवाई
रविवार की गिरफ्तारी के बाद टीम ने और भी सावधानी के साथ अपनी जांच और टीम डायरेक्शन बढ़ाया। सोमवार को तीसरा स्थायी वारंटी रामकरण मीणा, उम्र 40 वर्ष को गिरफ्तार किया गया। रामकरण मीणा पर भी न्यायालय द्वारा स्थायी वारंट जारी था। जानकारी मिलने के बाद टीम ने रात या पूर्वाह्न समय में छापामारी कर उसे पकड़ लिया। इस गिरफ्तारी के बाद कुल तीन वारंटियों को इस अभियान के दौरान गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त हुई।

रामगढ़ पचवारा पुलिस ने तीन स्थायी वारंटियों को किया गिरफ्तार
रामगढ़ पचवारा पुलिस ने तीन स्थायी वारंटियों को किया गिरफ्तार

न्यायिक वैधता एवं प्रक्रिया

गिरफ्तार किए गए तीनों व्यक्तियों को न्यायालय द्वारा जारी स्थायी गिरफ्तारी वारंट के आधार पर गिरफ्तार किया गया है। इसका अर्थ है कि अदालत ने पहले ही उनकी गिरफ्तारी की अनुमति दी थी और पुलिस को आदेश दिया था कि उन्हें पकड़कर न्यायालय के समक्ष पेश किया जाए। इस प्रकार की गिरफ्तारी प्रक्रिया विधि सम्मत है और गिरफ्तार व्यक्तियों को धारा वादों व न्यायालयीन प्रक्रिया के अनुसार पेश किया जाएगा।

थानाधिकारी ने यह स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी के बाद उनकी पहचान, रिकॉर्डिंग और वकालतनामी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। गिरफ्तार व्यक्तियों को पुलिस रिमांड या न्यायालयीन रिमांड के लिए प्रस्तुत किया जाएगा, जहां उनकी परवाह की जाएगी कि उनके मानवाधिकार की रक्षा हो। गिरफ्तारियों के समय सबूतों का संकलन, पहचान, साक्ष्य संग्रहण और रिकॉर्डिंग सभी विधि केन्द्रित रूप से किया जाना सुनिश्चित किया गया है।


अभियान की निरंतरता एवं कठोर कार्रवाई की प्रतिबद्धता

थानाधिकारी मदनलाल मीणा ने यह स्पष्ट किया कि यह गिरफ्तारी केवल शुरुआत है। अभियान निरंतर जारी रहेगा। वांछित अपराधियों की धरपकड़ के लिए पुलिस लगातार निगरानी, सूचना तंत्र और गुप्त ऑपरेशन जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि अपराधी चाहे कितनी ही सावधानी बरतें, उन्हें पकड़ कर कानूनी दायरे में लाना हमारा दायित्व है।

उन्होंने जनता से भी सहयोग की अपील की कि यदि किसी संदिग्ध व्यक्ति के सम्बन्ध में जानकारी हो, तो तुरंत थाना को सूचित करें। जनता की सूचनाएं कई मामलों में निर्णायक साबित होती हैं। साथ ही, उन्होंने कहा कि इस अभियान में चोरी, मारपीट, हत्या, लूट, आपराधिक मामलों के वांछित अभियुक्तों को प्राथमिकता दी जाएगी।


सामाजिक प्रभाव एवं संदेश

इस गिरफ्तारी ने न केवल कानून प्रवर्तन एजेंसियों की तत्परता और सक्रियता को प्रदर्शित किया, बल्कि समाज में यह संदेश भी पहुँचा कि अपराध पनपने का स्थान नहीं पाएगा। स्थानीय निवासियों में यह विश्वास जगाना भी महत्वपूर्ण है कि पुलिस उनके सुरक्षा कवच के रूप में काम कर रही है। ऐसी कार्यवाहियाँ अपराधियों में भय उत्पन्न करती हैं और उन्हें सुरक्षित स्थान नहीं प्रदान करतीं।

मीडिया एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा इस कार्रवाई की रिपोर्टिंग से यह खबर जनमानस तक पहुँची, जिससे सामाजिक जागरूकता को मजबूती मिली। यह कार्रवाई यह दिखाती है कि शासन-प्रशासन, पुलिस और आमजन के बीच समन्वय उच्च स्तर पर हो तो अपराध नियंत्रण संभव है।


निष्कर्ष

रामगढ़ पचवारा थाना की इस कार्रवाई ने यह प्रमाणित किया कि कानून—न्याय व्यवस्था कार्य कर रही है। तीन स्थायी वारंटियों की गिरफ्तारी इस बात की ओर संकेत है कि उदासीनता नहीं, सतर्कता एवं समयबद्ध कार्रवाई महत्वपूर्ण है। उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार और टीम समन्वय से यह अभियान सफल रहा।

आगे की कार्रवाइयों के लिए पुलिस ने यह संकल्प लिया है कि प्रत्येक वारंटी पर नजर होगी, और यदि कोई भी अपराधी पनाह ले, उसे भी नहीं छोड़ा जाएगा। यह कदम न केवल अपराधियों के लिए चेतावनी है, बल्कि सामाजिक सुरक्षा और न्याय के प्रति जनता का भरोसा बढ़ाने का संकेत भी है।

यदि चाहें तो मैं इस घटना पर समाचार लेख, प्रेस विज्ञप्ति प्रारूप या मीडिया रिपोर्ट भी तैयार कर सकता हूँ — बताइए जो आप चाहें, मैं तैयार हूँ।

दिल्ली: दो अवैध अफ्रीकी प्रवासी गिरफ्तार, निर्वासन की प्रक्रिया शुरू

मुंबई: चेंबूर के प्रमिला बार में सेक्स रैकेट का भंडाफोड़, मैनेजर-मालिक समेत 3 गिरफ्तार

मुंबई: चेंबूर के प्रमिला बार में सेक्स रैकेट का भंडाफोड़, मैनेजर-मालिक समेत 3 गिरफ्तार
मुंबई: चेंबूर के प्रमिला बार में सेक्स रैकेट का भंडाफोड़, मैनेजर-मालिक समेत 3 गिरफ्तार

मुंबई।

मुंबई पुलिस ने चेंबूर के आरसी मार्ग स्थित प्रमिला बार एंड रेस्टोरेंट में छापेमारी कर एक बड़े सेक्स रैकेट का पर्दाफाश किया। बार और रेस्टोरेंट की आड़ में वेश्यावृत्ति का धंधा फलफूल रहा था। पुलिस ने बार मैनेजर, मालिक और एक ग्राहक को गिरफ्तार किया, जबकि 8 महिलाओं को वहां से सुरक्षित निकाला। यह कार्रवाई आरसीएफ पुलिस स्टेशन को मिली एक गुप्त सूचना पर की गई। पुलिस को जानकारी मिली थी कि प्रमिला बार में बार की आड़ में यौन सेवाएं दी जा रही हैं। दोनों थानों की संयुक्त टीम ने जाल बिछाया। एक फर्जी ग्राहक को बार भेजा गया। मैनेजर निशिकांत सदानंद साहू ने फर्जी ग्राहक को 1,000 रुपए में यौन सेवा देने का ऑफर दिया। इसके बाद फर्जी ग्राहक सहमत हो गया और उसे बार की पहली मंजिल पर ले जाया गया। वहां उसने एक ड्रिंक ऑर्डर किया। इसके बाद महिला बारटेंडर पहुंची और उसने अनुचित व्यवहार शुरू कर दिया। इस बीच पुलिस ने वहां रेड मार दी।
छापेमारी के दौरान अंबेडकर नगर, मानखुर्द की रहने वाली 41 वर्षीय महिला को फर्जी ग्राहक से पैसे लेते रंगे हाथों पकड़ा गया। बार में कुल 8 वयस्क महिलाएं काम करती मिलीं, जो वेश्यावृत्ति में लिप्त थीं।

मुंबई: चेंबूर के प्रमिला बार में सेक्स रैकेट का भंडाफोड़, मैनेजर-मालिक समेत 3 गिरफ्तार
मुंबई: चेंबूर के प्रमिला बार में सेक्स रैकेट का भंडाफोड़, मैनेजर-मालिक समेत 3 गिरफ्तार


ये महिलाएं मुंबई के चेंबूर, तिलक नगर, मानखुर्द और उल्हासनगर जैसे इलाकों की रहने वाली हैं। महिलाओं को तुरंत सुरक्षित जगह पर भेज दिया गया और उन्हें काउंसलिंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई।
पूछताछ में महिलाओं ने बताया कि उनके इलाकों में वेश्यावृत्ति करने वाले परिचितों ने उन्हें इस धंधे में धकेला। उन्होंने खुलासा किया कि मैनेजर निशिकांत साहू ने उन्हें बार मालिक वसंत चंद्रशेखर शेट्टी से मिलवाया, जो रैकेट चला रहे थे। मैनेजर और मालिक ने रैकेट चलाने की बात कबूल की। गिरफ्तार ग्राहक भी पूछताछ का सामना कर रहा है।
आरसीएफ पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 370 (मानव तस्करी) और अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह कार्रवाई अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। पुलिस इस धंधे में शामिल अन्य रैकेट का पता लगा रही है।

दिल्ली पुलिस ने अवैध रूप से रह रहे नाइजीरियाई को हिरासत में लिया, निर्वासन प्रक्रिया शुरू

दिल्ली पुलिस ने अवैध रूप से रह रहे नाइजीरियाई को हिरासत में लिया, निर्वासन प्रक्रिया शुरू

दिल्ली पुलिस ने अवैध रूप से रह रहे नाइजीरियाई को हिरासत में लिया, निर्वासन प्रक्रिया शुरू
दिल्ली पुलिस ने अवैध रूप से रह रहे नाइजीरियाई को हिरासत में लिया, निर्वासन प्रक्रिया शुरू

नई दिल्ली ।

दक्षिण-पश्चिम जिले की दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को अवैध रूप से रह रहे नाइजीरियाई अपेह नन्ना मालाची (39 वर्ष) को हिरासत में लिया है। मालाची नाइजीरिया के एनुगुएज़िके का निवासी है और 2021 में मेडिकल वीजा पर भारत आया था। उसका वीजा मई 2021 में समाप्त हो गया था, जिसके बाद वह अवैध रूप से दिल्ली में रह रहा था। विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) दिल्ली की मदद से उसकी निर्वासन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। दक्षिण-पश्चिम जिला पुलिस ने अवैध प्रवासियों पर नजर रखने और अपराध रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाया हुआ है। इसके तहत, इंस्पेक्टर राम कुमार के नेतृत्व में ऑपरेशन सेल की एक समर्पित टीम गठित की गई थी। इस टीम में एएसआई विनोद कुमार, एएसआई धर्मेंद्र, हेड कांस्टेबल मोहित, नरेंद्र और प्रशांत शामिल थे। सहायक पुलिस आयुक्त विजयपाल तोमर के पर्यवेक्षण में यह टीम संवेदनशील क्षेत्रों में अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए सक्रिय थी।

दिल्ली पुलिस ने अवैध रूप से रह रहे नाइजीरियाई को हिरासत में लिया, निर्वासन प्रक्रिया शुरू
दिल्ली पुलिस ने अवैध रूप से रह रहे नाइजीरियाई को हिरासत में लिया, निर्वासन प्रक्रिया शुरू


3 अक्टूबर को पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि एक नाइजीरियाई नागरिक नांगल राया, वसंत कुंज क्षेत्र में संदिग्ध रूप से घूम रहा है। टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए संदिग्ध से संपर्क किया और उसके दस्तावेजों की जांच की। पूछताछ में मालाची ने बताया कि वह 15 मार्च 2021 को मेडिकल वीजा पर भारत आया था, जो 24 मई 2021 को समाप्त हो गया। इसके बाद भी वह दिल्ली के बुराड़ी इलाके में लेबर चौक के पास रह रहा था। हाल ही में पुलिस की सख्ती के कारण वह महिपालपुर में किराए का मकान तलाशने आया था।
पुलिस ने मालाची को वसंत कुंज दक्षिण थाने में हिरासत में लिया। गहन सत्यापन और पूछताछ के बाद, उसके दस्तावेजों की जांच की गई, जिसमें उसकी नाइजीरियाई नागरिकता और अवैध रूप से रहने की पुष्टि हुई। सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद, एफआरआरओ, नई दिल्ली के सहयोग से मालाची के निर्वासन की प्रक्रिया शुरू की गई।
पुलिस उपायुक्त (दक्षिण-पश्चिम जिला) अमित गोयल ने कहा कि यह अभियान दिल्ली पुलिस की अवैध आव्रजन के खिलाफ सख्त नीति और कानून के शासन को लागू करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।