जम्मू-कश्मीर: रामबन में बादल फटने से तबाही, 4 की मौत एक लापता, राहत कार्य तेज

जम्मू-कश्मीर: रामबन में बादल फटने से तबाही, 4 की मौत एक लापता, राहत कार्य तेज

जम्मू-कश्मीर: रामबन में बादल फटने से तबाही, 4 की मौत एक लापता, राहत कार्य तेज
जम्मू-कश्मीर: रामबन में बादल फटने से तबाही, 4 की मौत एक लापता, राहत कार्य तेज

जम्मू । जम्मू संभाग में बादल फटने से भारी तबाही मची है। इस घटना में अब तक चार लोगों की मौत हो गई है, जबकि एक लापता बताया जा रहा है। प्रशासन और रेस्क्यू टीम ने इलाके में राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिया है।

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस घटना में हुई मौत पर दुख प्रकट किया है। केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट पर बचाव अभियान की जानकारी दी। लिखा, “अभी-अभी रामबन के डीसी मोहम्मद अलयास खान से बात की। राजगढ़ क्षेत्र में बादल फटने से चार लोगों की दुखद मौत हो गई। पांचवां व्यक्ति लापता है और उसकी तलाश जारी है। इस बीच, कोई घायल नहीं हुआ है। बचाव अभियान जारी है। हर संभव सहायता प्रदान की जा रही है। मैं लगातार संपर्क में हूं।”

जम्मू संभाग को एक बार फिर प्राकृतिक आपदा का सामना करना पड़ा है। शनिवार को रामबन जिले की राजगढ़ तहसील इलाके में बादल फटने से शुरुआत में तीन लोगों की मौत हुई थी, हालांकि बाद में यह संख्या बढ़कर पांच हो गई, जबकि एक लापता है। प्रशासन और रेस्क्यू टीमें मौके पर मौजूद हैं और राहत-बचाव कार्य तेज कर दिया गया है।

जम्मू-कश्मीर: रामबन में बादल फटने से तबाही, 4 की मौत एक लापता, राहत कार्य तेज
जम्मू-कश्मीर: रामबन में बादल फटने से तबाही, 4 की मौत एक लापता, राहत कार्य तेज

मिली जानकारी के अनुसार शनिवार तड़के राजगढ़ इलाके में बादल फटा, जिससे कुछ गांव चपेट में आ गए। इस घटना ने क्षेत्र में भारी तबाही मचाई। तेज बहाव के कारण कई घर क्षतिग्रस्त हो गए, कुछ पूरी तरह बह गए। बचाव दल तुरंत घटनास्थल पर भेजे गए और लापता लोगों की तलाश के लिए अभियान जारी है।

इसके अलावा, पीड़ितों के परिवारों को तत्काल राहत प्रदान करने के प्रयास किए जा रहे हैं। विस्थापित परिवारों को आश्रय देने और भोजन, पानी और बुनियादी चिकित्सा देखभाल सुनिश्चित करने के लिए अस्थायी राहत शिविर भी स्थापित किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त टीमें तैनात की जाएंगी। रियासी जिले में भी बादल फटने के बाद मची तबाही में एक ही परिवार के सात सदस्यों की मौत हो गई।

दुनिया में भारतीय तकनीक की धूम : सीएम मोहन यादव

दुनिया में भारतीय तकनीक की धूम : सीएम मोहन यादव

दुनिया में भारतीय तकनीक की धूम : सीएम मोहन यादव
दुनिया में भारतीय तकनीक की धूम : सीएम मोहन यादव

भोपाल ।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि भारतीय संस्कृति स्वदेशी की भावना पर आधारित है। आज तकनीक का दौर है, मगर भारतीय तकनीक की दुनिया में धूम है। राजधानी भोपाल के कुशाभाउ ठाकरे सभागार में आयोजित स्वदेशी से स्वावलंबन संगोष्ठी में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि वैश्विक स्तर पर आज हर देश यह समझ रहा है कि इस दौर में स्वदेशी की भावना ही सबसे आवश्यक है। सारे उलझे-सुलझे प्रश्नों का उत्तर केवल एक है, स्वदेशी की भावना। उन्होने भारतीय संस्कृति की चर्चा करते हुए कहा, “परमात्मा की दया है कि हमारा कल्चर शुरू से ही स्वदेशी की भावना पर आधारित रहा है। जिसे जो आवश्यकता होती थी, वह सब गांव में ही मिल जाता था। आज टेक्नोलॉजी बदली है, लेकिन तब भी भारतीय टेक्नोलॉजी धूम मचा रही है।”
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मौके पर संकल्प दिलाया कि देश को समृद्ध एवं विकसित राष्ट्र बनाने के लिए अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करेंगे। स्वदेशी से स्वावलंबी संकल्प शक्ति हेतु स्वदेशी उत्पादों की खरीदेंगे। उनका उपयोग करने के लिए जागरूकता लाएंगे। स्वदेशी उत्पादों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए जनसंचार के माध्यमों का उपयोग करेंगे।”
भारत की आर्थिक समृद्धि को लेकर मुख्यमंत्री यादव ने कहा, “आज जब हम दुनिया की तीसरी आर्थिक ताकत बनने की ओर बढ़ रहे हैं, तो इसमें देश के अंदर सबसे बड़ा योगदान जीवनशैली का है। आजादी के पहले से ही स्वदेशी की भावना के बल पर हमने अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी।

दुनिया में भारतीय तकनीक की धूम : सीएम मोहन यादव
दुनिया में भारतीय तकनीक की धूम : सीएम मोहन यादव

स्वदेशी की भावना में समय-समय पर अवरोध आते रहते हैं, लेकिन समय उन्हें अपने आप ठीक कर देता है। आजादी की लड़ाई में जब तक गणपति जी नहीं आए थे तब तक आनंद नहीं आया था। गणपति जी के आगमन के बाद बाल गंगाधर तिलक ने जो लड़ाई लड़ी, वही स्वदेशी की भावना थी।”
राज्य सरकार द्वारा स्वदेशी के आंदोलन को मजबूत करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारी सरकार ने भी वह सब करने का प्रयास किया है जो स्वदेशी के लिए आवश्यक है। हमारे राज्यों की सीमाएं चाहे सीमित हों, लेकिन हमारी सांस्कृतिक धारा हमें स्वदेशी के भाव के आधार पर उस दौर में ले जाती है और देश की आंतरिक ताकत को मजबूत करती है। विदेशी आक्रमणों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “1235 में जब हम कमजोर थे, तो महाकाल का मंदिर तोड़ दिया गया था। हमारे शासक मजबूत हुए तो ढाई सौ साल बाद मंदिर पुनः बन गया। पिछले साल का आंकड़ा है कि 7 करोड़ लोग अकेले उज्जैन में आए। राज्य में पर्यटन को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि एक ओर हमने धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने का प्रयास किया और दूसरी ओर अपने जंगलों को जानवरों से आबाद कर रहे हैं।

दिल्ली एनसीआर में झमाझम बारिश: यमुना का जलस्तर फिर बढ़ा, खेतों और घरों में घुसा पानी

दिल्ली एनसीआर में झमाझम बारिश: यमुना का जलस्तर फिर बढ़ा, खेतों और घरों में घुसा पानी

दिल्ली एनसीआर में झमाझम बारिश: यमुना का जलस्तर फिर बढ़ा, खेतों और घरों में घुसा पानी
दिल्ली एनसीआर में झमाझम बारिश: यमुना का जलस्तर फिर बढ़ा, खेतों और घरों में घुसा पानी

नोएडा ।

दिल्ली-एनसीआर में झमाझम बारिश ने एक ओर जहां उमस से राहत दी है वहीं जल भराव जैसी स्थिति से लोगों को गुजरना पड़ रहा है। यमुना नदी का जलस्तर एक बार फिर से तेजी से बढ़ने लगा है। लगातार हो रही बारिश और हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से छोड़े गए पानी की वजह से नदी का पानी तटवर्ती क्षेत्रों में फैलने लगा है। हालात ऐसे हैं कि खेतों और फार्म हाउसों में पानी भर गया है और लोगों को मजबूरी में अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करना पड़ रहा है।

कई परिवार अब सड़कों पर टेंट और अस्थाई झुग्गियां बनाकर रहने को मजबूर हैं। यह दूसरी बार है जब इस महीने यमुना का जलस्तर बढ़ा है। इससे पहले भी भारी बारिश और बैराज से छोड़े गए पानी के चलते नदी का पानी खतरे के निशान से ऊपर चला गया था।

स्थानीय प्रशासन की ओर से अलर्ट जारी किया गया है और तटवर्ती गांवों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले एक हफ्ते तक रुक-रुक कर बारिश होती रहेगी। मौसम विभाग की वेबसाइट पर जारी बुलेटिन में 29 अगस्त से 3 सितंबर तक लगातार बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारों का अनुमान जताया गया है।

दिल्ली एनसीआर में झमाझम बारिश: यमुना का जलस्तर फिर बढ़ा, खेतों और घरों में घुसा पानी
दिल्ली एनसीआर में झमाझम बारिश: यमुना का जलस्तर फिर बढ़ा, खेतों और घरों में घुसा पानी

29 और 30 अगस्त को गरज-चमक के साथ बारिश का अनुमान था, वहीं 31 अगस्त और 1 सितंबर को मध्यम बारिश के आसार हैं। इसके बाद 2 और 3 सितंबर तक गरज-चमक के साथ बारिश की आशंका जताई गई है। लगातार बारिश और पानी छोड़े जाने के कारण निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति गंभीर होती जा रही है। किसानों की फसलें डूबने लगी हैं और पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ रहा है।

सबसे ज्यादा परेशानी उन परिवारों को हो रही है जिनके घर नदी किनारे बने हैं। रात-दिन हो रही बारिश और बढ़ते जलस्तर से लोगों में डर का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की ओर से राहत शिविर लगाए गए हैं, लेकिन बढ़ते पानी और लगातार बारिश की वजह से दिक्कतें खत्म होने के बजाय और बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो हालात और भी बिगड़ सकते हैं।

दिल्ली पुलिस ने पकड़ी 16.24 किलो अफीम की खेप, बेरोजगारों को ड्रग सिंडिकेट में शामिल करता था गैंग

दिल्ली पुलिस ने पकड़ी 16.24 किलो अफीम की खेप, बेरोजगारों को ड्रग सिंडिकेट में शामिल करता था गैंग

दिल्ली पुलिस ने पकड़ी 16.24 किलो अफीम की खेप, बेरोजगारों को ड्रग सिंडिकेट में शामिल करता था गैंग
दिल्ली पुलिस ने पकड़ी 16.24 किलो अफीम की खेप, बेरोजगारों को ड्रग सिंडिकेट में शामिल करता था गैंग

नई दिल्ली ।

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (सेंट्रल रेंज) ने मादक पदार्थों की तस्करी में 4 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया है कि आरोपियों के पास से 16.24 किलो अफीम बरामद की गई। पकड़े गए आरोपी उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से ताल्लुक रखते हैं और एक संगठित नेटवर्क से जुड़े थे।

यह कार्रवाई 25 जुलाई को उस वक्त हुई, जब क्राइम ब्रांच को सूचना मिली कि हरी शंकर और विकास नाम के दो सप्लायर बरेली से अफीम की एक बड़ी खेप लेकर दिल्ली आ रहे हैं।

तस्करों की धरपकड़ के लिए इंस्पेक्टर वीर सिंह के नेतृत्व में एसआई अबोध शर्मा, एएसआई दीप चंद, हेड कांस्टेबल संदीप, सुकरम, मनीष, संजय, विनोद, मनोज और कॉन्स्टेबल सुमित की टीम बनाई गई। टीम की पूरी कार्रवाई एसीपी राजबीर मलिक की देखरेख और डीसीपी विक्रम सिंह के निर्देशन में की गई।

25 जुलाई की सुबह लगभग 10:20 बजे भैरव रोड अंडरपास, रिंग रोड पर पुलिस ने एक मारुति ऑल्टो कार (यूपी 24 पी 2276) को रोका। तलाशी के दौरान तीन प्लास्टिक बैगों से 16.24 किलो अफीम बरामद की गई। मौके पर तीन आरोपियों – हरी शंकर (22 वर्ष), विपिन शर्मा (35 वर्ष) और विकास (20 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया गया। इस संबंध में एनडीपीएस एक्ट की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई।

दिल्ली पुलिस ने पकड़ी 16.24 किलो अफीम की खेप, बेरोजगारों को ड्रग सिंडिकेट में शामिल करता था गैंग
दिल्ली पुलिस ने पकड़ी 16.24 किलो अफीम की खेप, बेरोजगारों को ड्रग सिंडिकेट में शामिल करता था गैंग

मामले की जांच के बाद 23 अगस्त को पुलिस ने एक और आरोपी अजय वर्मा (22 वर्ष) को बदायूं (उत्तर प्रदेश) के गांव दमरी, थाना फैजगंज से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी अजय वर्मा भी बरेली का रहने वाला है और इस नेटवर्क में सप्लाई का अहम काम करता था।

पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे बरेली निवासी राहुल नाम के ड्रग हैंडलर के लिए काम करते थे। राहुल और उसका परिवार लंबे समय से दिल्ली-एनसीआर में मादक पदार्थों की तस्करी कर रहा है। साथ ही आरोपियों ने एक नाइजीरियाई नागरिक ‘जीन’ से संपर्क की बात भी स्वीकार की, जो पहले तिलक नगर, दिल्ली से काम करता था और अब विदेश से सक्रिय है।

पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि यह गैंग बेरोजगार युवाओं और नाबालिगों को ड्रग नेटवर्क में शामिल करता था। वे अफीम की खेप प्राइवेट वाहनों से राज्य की सीमाओं से बाहर ले जाते थे और दिल्ली-एनसीआर में सप्लाई के लिए लेयर्ड डिलीवरी सिस्टम का इस्तेमाल करते थे ताकि पुलिस से बचा जा सके।

क्राइम ब्रांच के अधिकारियों का कहना है कि यह नेटवर्क एक संगठित और अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट का हिस्सा है। मुख्य सप्लायर राहुल समेत अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है।

मुंबई: मराठा आरक्षण की मांग के साथ आजाद मैदान में बैठेंगे जरांगे

मुंबई: मराठा आरक्षण की मांग के साथ आजाद मैदान में बैठेंगे जरांगे

मुंबई: मराठा आरक्षण की मांग के साथ आजाद मैदान में बैठेंगे जरांगे
मुंबई: मराठा आरक्षण की मांग के साथ आजाद मैदान में बैठेंगे जरांगे

मराठा आरक्षण आंदोलन: मुंबई के आजाद मैदान में मनोज जरांगे पाटिल की निर्णायक लड़ाई

29 अगस्त 2025 को मुंबई के आजाद मैदान में एक ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला जब मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मराठा नेता मनोज जरांगे पाटिल अपने हजारों समर्थकों के साथ मैदान में पहुंचे। यह आंदोलन केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि मराठा समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांगों की गूंज थी, जिसमें समुदाय को ओबीसी कोटे में आरक्षण दिलाने की दृढ़ मांग की गई।


मराठा आंदोलन की पृष्ठभूमि

मराठा समुदाय की ओर से आरक्षण की मांग कोई नई नहीं है। यह मुद्दा वर्षों से महाराष्ट्र की राजनीति और समाज में गरमाया हुआ है। मराठा समाज का यह तर्क रहा है कि वे सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हैं और उन्हें आरक्षण की आवश्यकता है ताकि वे शिक्षा, नौकरियों और अन्य अवसरों में समान भागीदारी कर सकें।

मनोज जरांगे पाटिल, जो बीते कुछ वर्षों में मराठा आंदोलन के सबसे प्रमुख चेहरा बनकर उभरे हैं, पहले भी कई बार भूख हड़ताल और रैलियों के माध्यम से सरकार पर दबाव बना चुके हैं। लेकिन इस बार का आंदोलन पहले से कहीं ज़्यादा संगठित और निर्णायक बताया जा रहा है।


आंदोलन की ताजा स्थिति

29 अगस्त की सुबह से ही मुंबई के आजाद मैदान में मराठा कार्यकर्ताओं का जमावड़ा शुरू हो गया था। महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों से आए हजारों कार्यकर्ताओं ने कारवां बनाकर मैदान की ओर कूच किया।

हालांकि, मुंबई पुलिस ने आंदोलन की अनुमति दी थी, लेकिन कुछ शर्तों के साथ। पुलिस की ओर से स्पष्ट किया गया कि आजाद मैदान में अधिकतम 5,000 लोगों को ही प्रवेश मिलेगा, जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो। इसके बावजूद, मैदान के बाहर और आसपास बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए, जिससे भीड़ नियंत्रण एक बड़ी चुनौती बन गई


पुलिस की तैयारियाँ और चुनौतियाँ

मुंबई पुलिस को इस आंदोलन के मद्देनजर करीब 1,000 पुलिसकर्मियों को तैनात करना पड़ा। इसके अतिरिक्त, खुफिया एजेंसियों और बम स्क्वॉड को भी अलर्ट पर रखा गया है।

इस पूरे घटनाक्रम को और भी संवेदनशील बना दिया है गणेशोत्सव। गणपति उत्सव के चलते मुंबई में पहले से ही लाखों श्रद्धालु शहर में मौजूद हैं, जिससे ट्रैफिक और भीड़ पहले ही चरम पर है। ऐसे में मराठा आंदोलनकारियों की उपस्थिति ने पुलिस की जिम्मेदारी और तनाव दोनों को बढ़ा दिया है

इसके साथ ही, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 29 और 30 अगस्त को मुंबई दौरे पर हैं। उनकी सुरक्षा और यात्रा मार्गों की निगरानी के चलते मुंबई पुलिस को दोहरी सतर्कता बरतनी पड़ रही है। किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए शहर भर में सीसीटीवी निगरानी, ड्रोन से निगरानी, और स्पेशल फोर्स की तैनाती की गई है।

मुंबई: मराठा आरक्षण की मांग के साथ आजाद मैदान में बैठेंगे जरांगे
मुंबई: मराठा आरक्षण की मांग के साथ आजाद मैदान में बैठेंगे जरांगे

जरांगे का रुख और उनकी अपील

मनोज जरांगे पाटिल ने साफ तौर पर कहा है कि जब तक मराठा समुदाय को ओबीसी कोटे में आरक्षण नहीं दिया जाता, वे मुंबई नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने यह भी घोषणा की कि यह आंदोलन उनकी आखिरी लड़ाई होगी, और इस बार सरकार को झुकना ही होगा।

हालांकि उन्होंने अपने समर्थकों से अपील की है कि आंदोलन शांतिपूर्ण बना रहे और किसी भी तरह की हिंसा या अव्यवस्था से परहेज किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यह आंदोलन केवल मराठा समाज का नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समान अधिकारों की लड़ाई है।


सरकार की स्थिति

महाराष्ट्र सरकार की ओर से गणेशोत्सव को देखते हुए आंदोलन टालने की अपील की गई थी, लेकिन जरांगे इसके लिए तैयार नहीं हुए। सरकार का कहना है कि मराठा आरक्षण को लेकर कानूनी प्रक्रिया चल रही है और इस पर जल्द ही उचित निर्णय लिया जाएगा।

राज्य सरकार पहले ही सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत मराठा आरक्षण को लेकर सावधानीपूर्वक कदम उठा रही है, ताकि संविधान की मर्यादा बनी रहे और किसी समुदाय के साथ अन्याय न हो। हालांकि, कई मराठा संगठन सरकार की इस धीमी प्रक्रिया से असंतुष्ट हैं और उनका मानना है कि सरकार केवल टालमटोल कर रही है।


संवेदनशीलता और राजनीतिक असर

यह आंदोलन केवल सामाजिक नहीं, बल्कि गंभीर राजनीतिक प्रभाव भी रखता है। महाराष्ट्र में आगामी चुनावों से पहले मराठा समुदाय की नाराजगी सरकार के लिए राजनीतिक संकट बन सकती है।

यदि सरकार आंदोलनकारियों की मांगों को नहीं मानती, तो यह मुद्दा और भी गहराता जाएगा, जिससे पूरे राज्य में आंदोलन की लहर फैल सकती है। वहीं, यदि सरकार आरक्षण की मांग को स्वीकार करती है, तो ओबीसी समुदाय में नाराजगी बढ़ सकती है, जो पहले से ही मराठाओं को आरक्षण दिए जाने का विरोध करता रहा है।


निष्कर्ष

मनोज जरांगे पाटिल का यह आंदोलन मराठा आरक्षण की मांग को लेकर एक निर्णायक मोड़ है। मुंबई जैसे व्यस्त महानगर में इस आंदोलन का प्रभाव केवल स्थानीय नहीं, बल्कि राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर महसूस किया जा रहा है।

सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संतुलन और संवाद की सख्त जरूरत है। एक ओर सरकार को कानून और संविधान के दायरे में रहकर निर्णय लेना होगा, वहीं आंदोलनकारियों को भी शांति बनाए रखते हुए अपने हक की लड़ाई को लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ाना होगा।

इस आंदोलन की सफलता या असफलता न केवल मराठा समाज के भविष्य को प्रभावित करेगी, बल्कि यह भी तय करेगी कि भारत में सामाजिक न्याय की परिभाषा और आरक्षण की नीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।

उदयपुर में युवक से लूट और मारपीट मामले में एक और आरोपी गिरफ्तार

उदयपुर में युवक से लूट और मारपीट मामले में एक और आरोपी गिरफ्तार

उदयपुर में युवक से लूट और मारपीट मामले में एक और आरोपी गिरफ्तार
उदयपुर में युवक से लूट और मारपीट मामले में एक और आरोपी गिरफ्तार

उदयपुर। 

उदयपुर की झाड़ोल थाना पुलिस ने अपहरण, लूट और मारपीट कर वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने के मामले में एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने नितेश पुत्र नारू निवासी ढीकड़ी, झाड़ोल को पकड़ा है। इस मामले में पहले भी दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।थानाधिकारी फैलीराम ने बताया कि 10 जनवरी 2025 को पीड़ित के पिता रामलाल ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि उनका बेटा गोविंद अपने दोस्तों संतोष और सुनील के साथ बाइक से झाड़ोल गया था। वापस आते समय, सांडोलमाता मंदिर के पास 20 से 25 बदमाशों ने उन्हें घेर लिया, जो महंगी बाइक पर थे और हथियार लहरा रहे थे।
बदमाशों ने गोविंद और उसके दोस्त संतोष के साथ बेरहमी से मारपीट की और उन्हें अगवा कर बंधक बना लिया। इस बीच, सुनील किसी तरह वहाँ से भागने में कामयाब रहा। आरोपियों, जिनमें ललित और नितेश भी शामिल थे, ने गोविंद को नंगा करके डंडों से पीटा और उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। उन्होंने गोविंद की जेब से 1,000 रुपये और संतोष से 500 रुपये भी लूट लिए।
पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया था और अब इस घटना में शामिल तीसरे आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया है।उदयपुर के हिरणमगरी थाना क्षेत्र में सेवाश्रम पुलिया के नीचे बाइक सवार से मारपीट कर लूट करने के मामले में 18 दिनों बाद पुलिस ने दो युवको को ​गिरफ्तार किया है। लूट का मास्टरमाइंड कोई और नही, बल्कि पीड़ित के साथ बाइक पर मौजूद उसका ममेरा भाई ही निकला। पुलिस ने पीड़ित के मामा के बेटे अभिषेक कलाल और उसके दोस्त विकास मेनारिया को ​गिरफ्तार किया है।

उदयपुर में युवक से लूट और मारपीट मामले में एक और आरोपी गिरफ्तार
उदयपुर में युवक से लूट और मारपीट मामले में एक और आरोपी गिरफ्तार

थानाधिकारी रामसुमेर मीणा ने बताया कि 13 अगस्त को खेरवाड़ा निवासी चन्द्रेश कुमार ने मामला दर्ज करवाया कि उदयपुर जयपुर जाने के लिए उसका ममेरा भाई उसे प्रतापनगर बस स्टेंड छोड़ने जा रहा था। तभी सेवाश्रम पुलिया के नीचे बाइक सवार दो युवकों ने रोककर माचिस मांगी। अचानक बदमाश धक्का-मुक्की करते हुए बैग सहित 75 हजार की नकदी ​छीनकर ले गए। पुलिस ने मामले में लगातार अलग-अलग लोगो से बातचीत की और सीसीटीवी फुटेज निकाले तो हिरणमगरी क्षेत्र का एक युवक सामने आया।

पुलिस ने अपनी जांच आगे बढ़ाते हुए विकास को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसने ​अभिषेक कलाल के कहने पर अरदीन के साथ मिलकर वारदात को अंजाम देना स्वीकार किया। पुलिस ने पानेरियों की मादड़ी निवासी विकास मेनारिया और अभिषेक को गिरफ्तार किया है। मीणा ने बताया अभिषेक ने हीं अपने बुआ के लड़के चन्द्रेश के पास 75 हजार रूपए नकद होने और प्रतापनगर बस स्टैंड जाने की बात फोन कर बताई। इसके बाद प्लानिंग के तहत अरदीन और विकास मारपीट की नकदी और बैग को छीनकर फरार हो गए। इस मामलें में अर​दीन खान अभी पुलिस पकड़ से दूर है। पुलिस की माने तो फरार आरोपी अरदीन पर पहले से चोरी और मारपीट के मुकदमें दर्ज है।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने किए बाबा रामदेव जी की समाधि के दर्शन

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने किए बाबा रामदेव जी की समाधि के दर्शन

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने किए बाबा रामदेव जी की समाधि के दर्शन
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने किए बाबा रामदेव जी की समाधि के दर्शन

जयपुर/रामदेवरा, 29 अगस्त 2025

राजस्थान के लोकदेवता बाबा रामदेव जी के 641वें वार्षिक मेले के अवसर पर रामदेवरा धाम आस्था और श्रद्धा से सराबोर नजर आया। हजारों की संख्या में श्रद्धालु दूर-दूर से बाबा के दर्शन करने पहुंचे। इस अवसर पर राजस्थान सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने गुरुवार को रामदेवरा पहुंचकर बाबा रामदेव जी की समाधि पर विधिवत पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों के कल्याण की कामना की।

मंत्री गहलोत के साथ पोकरण विधायक महंत प्रतापपुरी भी उपस्थित रहे। पूजा के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधियों के साथ बाबा की समाधि पर पुष्प और प्रसाद अर्पित किया गया। मंत्री ने समाधि स्थल की अखंड जोत के दर्शन कर आत्मिक शांति की अनुभूति प्राप्त की।


बाबा रामदेव मेला: समरसता और आस्था का प्रतीक

इस अवसर पर मंत्री अविनाश गहलोत ने कहा कि बाबा रामदेव जी का मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समरसता, भाईचारे और लोक आस्था का जीवंत प्रतीक है। यह मेला राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के श्रद्धालुओं को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करता है। उन्होंने कहा कि बाबा रामदेव जी का जीवन सद्भाव, सेवा और समानता का आदर्श रहा है, और यही कारण है कि इस धाम पर हर धर्म, जाति और समुदाय के लोग एक साथ सिर झुकाते हैं।

गहलोत ने कहा कि बाबा का संदेश आज भी प्रासंगिक है और समाज को जोड़ने की प्रेरणा देता है। रामदेवरा आने से व्यक्ति को केवल धार्मिक संतोष ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा और आत्मिक शांति भी मिलती है।


मेला व्यवस्थाओं की सराहना, स्वास्थ्य चौकी का निरीक्षण

अपने दौरे के दौरान सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने मेला क्षेत्र में विभिन्न व्यवस्थाओं का निरीक्षण भी किया। उन्होंने विशेष रूप से मंदिर परिसर में स्थित स्वास्थ्य चौकी का दौरा किया, जहां तैनात चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों से संवाद किया। गहलोत ने स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का जायजा लिया और श्रद्धालुओं को प्राथमिक उपचार देने में लगे स्वास्थ्य कर्मचारियों के कार्यों की सराहना की।

उन्होंने कहा कि ऐसे बड़े आयोजनों में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं और प्रशासन ने इस दिशा में बेहतर कार्य किया है। उन्होंने स्वच्छता, पानी, सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन जैसे अन्य पहलुओं की भी समीक्षा की और अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो।


प्रशासन और मंदिर समिति का भव्य स्वागत

रामदेवरा दौरे के दौरान मंदिर समिति द्वारा मंत्री गहलोत का परंपरागत राजस्थानी अंदाज़ में स्वागत किया गया। मंदिर समिति कार्यालय में बाबा रामदेव जी के वंशज गादीपति भोमसिंह तंवर और सांकड़ा पंचायत समिति के प्रधान भगवत सिंह तंवर ने मंत्री को साफा, माला और दुपट्टा पहनाकर सम्मानित किया। इस दौरान वहां उपस्थित सभी जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और मंदिर समिति के सदस्यों ने भी अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई।

इस मौके पर उपखंड अधिकारी लाखा राम चौधरी, सहायक निदेशक प्रवीण प्रकाश चौहान, समाजसेवी नवल चौहान, मंदिर समिति के अन्य पदाधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और अनेक सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने मिलकर बाबा रामदेव के वार्षिक मेले को सफल और सुव्यवस्थित बनाने में सहयोग किया।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने किए बाबा रामदेव जी की समाधि के दर्शन
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने किए बाबा रामदेव जी की समाधि के दर्शन

बाबा रामदेव पैनोरमा का किया अवलोकन

रामदेवरा यात्रा के दौरान मंत्री अविनाश गहलोत ने बाबा रामदेव पैनोरमा का भी अवलोकन किया। इस पैनोरमा में बाबा रामदेव जी के जीवनवृत्त को अत्यंत सुंदर ढंग से चित्रों और मूर्तियों के माध्यम से दर्शाया गया है। पैनोरमा में बाबा के बाल्यकाल, सामाजिक सुधार कार्य, धर्म की सेवा, चमत्कारी कार्यों और समाधि यात्रा की विस्तृत जानकारी दी गई है।

मंत्री गहलोत ने पैनोरमा की सराहना करते हुए कहा कि यह स्थल न केवल श्रद्धा का केंद्र है, बल्कि भावी पीढ़ी को बाबा के आदर्शों से परिचित कराने का एक जीवंत माध्यम है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार इस प्रकार के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए प्रतिबद्ध है।


श्रद्धालुओं की सेवा में प्रशासन तत्पर

रामदेवरा में चल रहे वार्षिक मेले के दौरान जिला और स्थानीय प्रशासन पूरी मुस्तैदी से जुटा हुआ है। सुरक्षा व्यवस्था, चिकित्सा सेवाएं, पेयजल, स्वच्छता, लाउडस्पीकर नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन, ठहराव और यातायात व्यवस्था के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है, जिससे मेला शांतिपूर्ण और सुरक्षित रूप से संपन्न हो रहा है।

मंत्री ने प्रशासनिक अधिकारियों की तैयारियों और व्यवस्थाओं की खुलकर सराहना की और कहा कि इस स्तर की सजगता ही एक धार्मिक आयोजन को यादगार बनाती है।


बाबा रामदेव मेला: इतिहास और महत्व

बाबा रामदेव जी को हिन्दू और मुस्लिम दोनों समुदायों में अत्यंत श्रद्धा के साथ पूजा जाता है। रामदेवरा स्थित समाधि स्थल पर प्रतिवर्ष भाद्रपद शुक्ल पक्ष में भव्य मेला आयोजित किया जाता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु देशभर से पहुंचते हैं। इस आयोजन का उद्देश्य न केवल धार्मिक आस्था का प्रदर्शन है, बल्कि यह धर्मनिरपेक्ष मूल्यों, सामाजिक समरसता और जनकल्याण की भावना को भी जीवंत करता है।

बाबा रामदेव जी ने समाज में समानता और न्याय का संदेश दिया। वे जीवन भर दलित, गरीब, शोषित और वंचित वर्गों के लिए समर्पित रहे। उनका जीवनचक्र आज भी प्रेरणादायी है और उनका मेले का आयोजन जनमानस को उनकी शिक्षाओं से जोड़ने का माध्यम है।


निष्कर्ष

बाबा रामदेव जी के 641वें वार्षिक मेले में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत की उपस्थिति ने आयोजन को एक नई गरिमा प्रदान की। मंत्री द्वारा समाधि स्थल पर की गई पूजा-अर्चना, मेला क्षेत्र की व्यवस्थाओं का निरीक्षण और पैनोरमा का अवलोकन न केवल श्रद्धा का परिचायक था, बल्कि यह प्रशासन की प्रतिबद्धता का भी प्रमाण था।

इस पूरे आयोजन ने सिद्ध कर दिया कि जब प्रशासन, समाज और श्रद्धालु मिलकर काम करें, तो कोई भी धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव न केवल सफल होता है, बल्कि वह एक उदाहरण भी बनता है। बाबा रामदेव जी का यह मेला निश्चित रूप से भाईचारे, एकता और आध्यात्मिक ऊर्जा का उत्सव बनकर उभरा है।

ट्रेन की चपेट में आने से अज्ञात किशोरी की मौत

ट्रेन की चपेट में आने से अज्ञात किशोरी की मौत

ट्रेन की चपेट में आने से अज्ञात किशोरी की मौत
ट्रेन की चपेट में आने से अज्ञात किशोरी की मौत

रफीगंज (बिहार), 29 अगस्त 2025:

पंडित दीनदयाल उपाध्याय-गया रेलखंड पर स्थित रफीगंज रेलवे स्टेशन के पास एक दुखद और हृदयविदारक घटना सामने आई है। पोल संख्या 506/7 और 506/9 के बीच एक 16 वर्षीय किशोरी की ट्रेन की चपेट में आने से मौके पर ही मौत हो गई। यह हादसा उस समय हुआ जब वह रेलवे ट्रैक पार कर रही थी। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर अफरातफरी मच गई। रफीगंज रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और स्थानीय पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए डेहरी ऑन सोन भेज दिया गया।

मृतका की नहीं हो सकी पहचान, पहनावे के आधार पर तलाश जारी

पुलिस के अनुसार मृत किशोरी की उम्र लगभग 16 वर्ष आंकी जा रही है। हालांकि, उसकी पहचान अभी तक नहीं हो सकी है। किशोरी ने सफेद और नीले रंग का टॉप और काले रंग की लेगिंग्स पहन रखी थी। RPF के एएसआई अविनाश कुमार और आरक्षी अनिल यादव ने घटनास्थल पर पहुंच कर शव की जांच की और प्रारंभिक कानूनी प्रक्रिया पूरी की। पहचान न हो पाने के कारण पुलिस आस-पास के गांवों और रफीगंज क्षेत्र के थानों में गुमशुदगी की शिकायतों से जानकारी जुटा रही है। साथ ही, लोगों से अपील की गई है कि यदि कोई भी व्यक्ति इस किशोरी को पहचानता हो तो वह तुरंत पुलिस से संपर्क करे।

रेलवे ओवरब्रिज बना मौत का कारण, पैदल यात्रियों के लिए कोई इंतजाम नहीं

स्थानीय ग्रामीणों ने इस हादसे के पीछे रेलवे ओवरब्रिज की खामियों को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि जब से रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण हुआ है, तब से पैदल यात्रियों के लिए कोई सीढ़ी या फुटपाथ की व्यवस्था नहीं की गई है। इसके चलते स्थानीय लोग रेलवे ट्रैक पार करने को मजबूर हैं, जो आए दिन दुर्घटनाओं को न्योता दे रहा है। रफीगंज रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की अच्छी-खासी आवाजाही होती है, लेकिन बुनियादी संरचना की कमी ने आम लोगों की जान को जोखिम में डाल दिया है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि रेलवे ने फुट ओवर ब्रिज पर पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित और सुलभ रास्ता बनाया होता, तो ऐसी घटनाएं रोकी जा सकती थीं। रेलवे ट्रैक के दोनों ओर के गांवों और बस्तियों के लोग रोजाना ट्रैक पार करते हैं, क्योंकि वैकल्पिक मार्ग नहीं होने के कारण ट्रैक ही उनके लिए एकमात्र रास्ता बन गया है।

ट्रेन की चपेट में आने से अज्ञात किशोरी की मौत
ट्रेन की चपेट में आने से अज्ञात किशोरी की मौत

स्थानीय प्रशासन और रेलवे की लापरवाही पर उठे सवाल

यह हादसा रफीगंज क्षेत्र में रेलवे प्रशासन की लापरवाही को उजागर करता है। स्थानीय लोग बार-बार इस मुद्दे को उठाते आ रहे हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। रेलवे ने केवल ओवरब्रिज बनाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली, लेकिन पैदल यात्रियों के लिए सीढ़ी, रैंप या अंडरपास की कोई व्यवस्था नहीं की। इसके चलते लोगों को जान जोखिम में डालकर रेल पटरी पार करनी पड़ती है।

स्थानीय समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों ने इस घटना को लेकर गहरा शोक व्यक्त किया है और रेलवे प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द पैदल यात्रियों के लिए वैकल्पिक रास्ते बनाए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

रेलवे ट्रैक पर सुरक्षा के नाम पर केवल खानापूर्ति

रेलवे ट्रैक पर लोगों की सुरक्षा के लिए रेलवे द्वारा बनाए गए नियम केवल कागजों तक ही सीमित हैं। रफीगंज जैसे छोटे स्टेशनों पर जहां बड़ी संख्या में पैदल यात्री ट्रैक पार करते हैं, वहां सुरक्षा उपाय न के बराबर हैं। न कोई गार्ड, न ही चेतावनी बोर्ड और न ही ट्रैक पर निगरानी। ट्रेनों की तेज गति और यात्री की लाचारी मिलकर हर कुछ हफ्तों में किसी न किसी की जान ले लेते हैं। लेकिन इसके बावजूद रेलवे और स्थानीय प्रशासन की आंखें नहीं खुलतीं।

इस प्रकार की घटनाओं के बाद भी जब तक उच्च अधिकारियों पर दबाव नहीं बनाया जाता या मीडिया में जोरदार कवरेज नहीं होती, तब तक कोई भी ठोस पहल सामने नहीं आती। यह स्थिति देश के रेलवे नेटवर्क की चिंताजनक सच्चाई को दर्शाती है।

किशोरी की मौत से ग्रामीणों में शोक की लहर

घटना के बाद रफीगंज और आसपास के इलाकों में शोक की लहर फैल गई है। विशेष रूप से महिलाएं और किशोरियां इस घटना से काफी आहत हैं। लोगों ने इस बात पर भी चिंता जताई कि यदि पीड़िता की पहचान नहीं हो पाई तो उसका अंतिम संस्कार कौन करेगा? क्या वह परिवार से बिछड़ी हुई थी? क्या वह कहीं से भागकर आई थी? इस तरह के अनगिनत सवाल लोगों के मन में उठ रहे हैं।

स्थानीय प्रशासन और पुलिस की जिम्मेदारी बनती है कि वे इस मामले की हर संभव तरीके से जांच करें और यदि किसी परिवार की बेटी लापता है तो उन्हें इस खबर की जानकारी दी जाए।

मीडिया और सामाजिक संगठनों की जिम्मेदारी

इस तरह की घटनाओं को केवल एक छोटी खबर समझ कर छोड़ देना समस्या को और बढ़ाता है। मीडिया और सामाजिक संगठनों को चाहिए कि वे इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएं और रेलवे व प्रशासन को कठघरे में खड़ा करें। एक किशोरी की जान गई है, और इसके पीछे लापरवाह व्यवस्थाएं जिम्मेदार हैं। यदि इस बार भी जिम्मेदारों को नहीं झकझोरा गया, तो अगली मौत किसी और की बेटी की हो सकती है।


निष्कर्ष

रफीगंज रेलवे स्टेशन पर हुई इस दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना ने एक बार फिर रेलवे संरचनाओं की असफलता और प्रशासनिक लापरवाही को उजागर कर दिया है। किशोरी की मौत एक चेतावनी है कि अब और देरी नहीं की जा सकती। रेलवे को चाहिए कि वह जनसंख्या की वास्तविक जरूरतों को समझे और ट्रैक पार करने वाले पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित विकल्प प्रदान करे। वहीं, प्रशासन को भी स्थानीय लोगों की मांगों पर ध्यान देना चाहिए और जरूरत पड़ने पर राज्य सरकार से मदद लेकर उचित कदम उठाना चाहिए।

जब तक रेलवे ट्रैक पर मानवीय दृष्टिकोण से सोचकर व्यवस्थाएं नहीं की जाएंगी, तब तक ऐसे हादसे रुकने की उम्मीद नहीं की जा सकती। अब समय आ गया है कि इस दिशा में ठोस और समयबद्ध कार्रवाई की जाए, ताकि रफीगंज जैसी त्रासदी दोबारा न हो।

डॉक्टर की लापरवाही से खतरे में मरीज की जान, सर्जरी के बाद छाती में रह गई गाइड वायर

डॉक्टर की लापरवाही से खतरे में मरीज की जान, सर्जरी के बाद छाती में रह गई गाइड वायर

डॉक्टर की लापरवाही से खतरे में मरीज की जान, सर्जरी के बाद छाती में रह गई गाइड वायर
डॉक्टर की लापरवाही से खतरे में मरीज की जान, सर्जरी के बाद छाती में रह गई गाइड वायर

तिरुवनंतपुरम ।

तिरुवनंतपुरम के जनरल हॉस्पिटल से एक बड़ा चौंकाने वाला और डॉक्टरों की लापरवाही का मामला सामने आया है। इसके ‘तार’ केरल की सुमैया से जुड़े हैं, जिसकी जिंदगी उस वक्त बदल गई जब सर्जरी के बाद उसकी छाती में एक गाइड वायर यानी एक पतली सी धातु की तार छोड़ दी गई। ये वायर दवाई देने के लिए सेंट्रल लाइन के साथ शरीर में डाली गई थी, लेकिन बाद में उसे हटाया नहीं गया। ये मामला तब सामने आया जब सोशल मीडिया पर एक ऑडियो क्लिप वायरल हुई, जिसमें डॉक्टर खुद इस गलती को स्वीकार करते सुनाई दिए। डॉक्टर ने सुमैया के रिश्तेदार से बातचीत में कहा, “जो हुआ, वो सच में एक गलती थी।”
डॉक्टर ने बताया कि यह गड़बड़ी एक्स-रे के बाद ही पता चली, और उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग दवा देने के लिए ट्यूब डाल रहे थे, असली जिम्मेदार वही हैं। हालांकि, सुमैया के परिवार का आरोप है कि डॉक्टर को पहले से पता था कि गाइड वायर शरीर के अंदर रह गया है, लेकिन उन्होंने ये बात जानबूझकर छिपाई।
केरल के कट्टक्कड़ा की रहने वाली सुमैया मलयिनकीझू ने 22 मार्च 2023 को तिरुवनंतपुरम जनरल हॉस्पिटल में थायरॉइड की सर्जरी करवाई थी। सर्जरी के बाद जब नसें ढूंढना मुश्किल हो गया, तब डॉक्टरों ने दवाई और खून चढ़ाने के लिए एक सेंट्रल लाइन डाली। इस प्रक्रिया में गाइड वायर का इस्तेमाल किया गया, लेकिन वह अंदर ही छूट गया।

डॉक्टर की लापरवाही से खतरे में मरीज की जान, सर्जरी के बाद छाती में रह गई गाइड वायर
डॉक्टर की लापरवाही से खतरे में मरीज की जान, सर्जरी के बाद छाती में रह गई गाइड वायर

बाद में जब सुमैया की तबीयत बिगड़ने लगी तो उसे श्री चित्रा इंस्टीट्यूट ले जाया गया। वहां की जांच में साफ हुआ कि उसकी छाती में जो चीज फंसी है, वह वही गाइड वायर है। अब वह वायर खून की नसों से चिपक चुकी है और डॉक्टरों ने कह दिया है कि अब उसे ऑपरेशन के जरिए निकालना संभव नहीं है, जिसके चलते अब सुमैया को इस गलती के परिणामों के साथ जीना पड़ रहा है।
सुमैया की तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही है, और उसने इस लापरवाही के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग से गुहार लगाई है और अपनी शिकायत लेकर विपक्ष के नेता से भी मिली है। उसका कहना है कि उसे इस घटना से काफी शारीरिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है, इसलिए उसे न्याय और बेहतर इलाज मिलना चाहिए।
जैसे-जैसे मामला मीडिया में सामने आया, जिला चिकित्सा अधिकारी (डीएमओ) ने अस्पताल प्रशासन से इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मामले की जांच की जा रही है।
साल 2017 में भी कुछ ऐसा ही मामला सामने आया था, जब कोझिकोड मेडिकल कॉलेज में हर्षीना नाम की एक महिला के पेट में ऑपरेशन के बाद कैंची छूट गई थी। हर्षीना को कई साल तक पेट दर्द होता रहा, लेकिन कोई वजह नहीं समझ आ रही थी। जब जांच हुई, तब पता चला कि पेट में कैंची रह गई है, जिसे बाद में ऑपरेशन करके निकाला गया।

न्यू अशोक नगर में एनकाउंटर, हैरी बॉक्सर गैंग के दो बदमाश गिरफ्तार

न्यू अशोक नगर में एनकाउंटर, हैरी बॉक्सर गैंग के दो बदमाश गिरफ्तार

न्यू अशोक नगर में एनकाउंटर, हैरी बॉक्सर गैंग के दो बदमाश गिरफ्तार
न्यू अशोक नगर में एनकाउंटर, हैरी बॉक्सर गैंग के दो बदमाश गिरफ्तार

नई दिल्ली ।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने न्यू अशोक नगर में देर रात एक एनकाउंटर के बाद लॉरेंस बिश्नोई गैंग के दो कुख्यात बदमाशों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार बदमाशों की पहचान कार्तिक जाखड़ और कविश के रूप में हुई है, जो अमेरिका में रहने वाले गैंगस्टर हैरी बॉक्सर के लिए काम करते हैं। हैरी बॉक्सर के खिलाफ हत्या, डकैती और फिरौती जैसे आधा दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं।

पुलिस को सूचना मिली थी कि कार्तिक और कविश न्यू अशोक नगर इलाके में मौजूद हैं। इस जानकारी के आधार पर स्पेशल सेल ने इलाके में जाल बिछाया। रात के समय जब पुलिस ने दोनों बदमाशों को रोकने की कोशिश की, तो उन्होंने पुलिस पर गोलीबारी शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने आत्मरक्षा में फायरिंग की, जिसमें कार्तिक जाखड़ के पैर में गोली लगी। इसके बाद पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया। घायल बदमाश को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है। पुलिस के अनुसार, इस ऑपरेशन में कोई पुलिसकर्मी घायल नहीं हुआ।

न्यू अशोक नगर में एनकाउंटर, हैरी बॉक्सर गैंग के दो बदमाश गिरफ्तार
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सूत्रों के मुताबिक, कार्तिक और कविश लॉरेंस बिश्नोई गैंग के सक्रिय सदस्य हैं और कई आपराधिक वारदातों में शामिल रहे हैं। ये दोनों हैरी बॉक्सर के इशारे पर दिल्ली और आसपास के इलाकों में आपराधिक गतिविधियां चलाते थे। स्पेशल सेल अब इनसे पूछताछ कर रही है ताकि गैंग के अन्य सदस्यों और उनकी योजनाओं का पता लगाया जा सके। पुलिस ने मौके से हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किया है।

यह एनकाउंटर दिल्ली पुलिस की अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का हिस्सा है। हाल के महीनों में स्पेशल सेल ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग के कई सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जो दिल्ली और पड़ोसी राज्यों में आपराधिक गतिविधियों में लिप्त थे। इस कार्रवाई से क्षेत्र में अपराध पर लगाम लगने की उम्मीद है।