आज से लागू, कार, बाइक, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक और खाद्य वस्तुएं होंगी सस्ती

आज से लागू, कार, बाइक, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक और खाद्य वस्तुएं होंगी सस्ती

आज से लागू, कार, बाइक, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक और खाद्य वस्तुएं होंगी सस्ती
आज से लागू, कार, बाइक, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक और खाद्य वस्तुएं होंगी सस्ती

नई दिल्ली: आज से GST 2.0 लागू कार, बाइक कपड़े से लेकर इलेक्ट्रॉनिक और खाने का सामान भी होगा सस्ता, देखिए सस्ते सामानों की पूरी लिस्ट सितंबर 22, सोमवार 2025-26 नई दिल्ली: आज से GST 2.0 का आगाज हो गया है और इसके तहत किए गए बदलावों से रोजमर्रा के ज्यादातर सामान सस्ते हो रहे हैं, क्योंकि इस कैटेगरी में आने वालीं करीब 99% चीजों पर अब सिर्फ 5% जीएसटी लगेगा या इन्हें टैक्स फ्री किया गया है।
देश में नवरात्रि के पहले दिन 22 सितंबर 2025 से जीएसटी रिफॉर्म्स (GST 2.0) लागू हो गए हैं और इसके साथ ही रोजमर्रा में इस्तेमाल किए जाने वाले किराना सामान, डेयरी प्रोडक्ट्स से लेकर टीवी-एसी और कार-बाइक्स तक तमाम चीजों के रेट में भी बदलाव होने जा रहा है और ये सस्ते हो गए हैं।

वहीं कुछ विलासिता से जुड़ी और हानिकारक वस्तुओं पर टैक्स की मार बढ़ने वाली है यानी ये महंगी हो गई हैं. आइए जानते हैं आपके काम की कौन सी चीज अब किस टैक्स स्लैब में आएगी और कीमत में कितनी कमी देखने को मिलेगी? सरकार ने GST में बदलाव करते हुए इसके नए टैक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को जरूरी वस्तुओं और व्यापक बाजार के उत्पादों को अधिक किफायती बनाने के लिए तैयार किया है. देश के आम आदमी के परिवार के लिए इसका मतलब है कि उन्हें अब किराने के बिल, डेयरी और उपकरणों की कीमतों पर राहत मिलेगी. राहत की शुरुआत घर की रसोई से होती है और इसे ध्यान में रखते हुए डेयरी प्रोडक्ट्स के साथ ही खाद्य तेल, पैकेज्ड आटा और साबुन जैसी रोजमर्रा की जरूरत की चीजें भी संशोधित दरों के तहत सस्ती हो गईं हैं. इसके अलावा बच्चों की पढ़ाई से जुड़े सामानों से लेकर दवाओं, कार-बाइक्स, एसी और टीवी तक के दाम घट गए हैं।

इन सामानों पर GST से छूट:

सरकार ने जीएसटी रिफॉर्म के तहत कई सामानों के जीएसटी स्लैब में बदलाव किया है, तो कई आइटम्स को जीएसटी फ्री भी कर दिया है. जिन पर अब जीरो जीएसटी लगेगा, उनमें प्रमुख तौर पर फूड प्रोडक्ट शामिल हैं. 5% से 18% तक के स्लैब में आने वाले कई प्रोडक्ट को जीएसटी फ्री कर दिया है. इनमें यूएचटी दूध, छेना-पनीर, पिज्जा, सभी तरह की ब्रेड, रेडी टू ईट रोटी, रेडी टू ईट पराठा हैं. इसके अलावा बच्चों की शिक्षा से जुड़े सामानों में पेंसिल, कटर, रबर, नोटबुक, नक्शे-चार्ट, ग्लोब, वॉटर सर्वे चार्ट, एटलस, प्रैक्टिस बुक, ग्राफ बुक, लैबोरेटरी नोटबुक पर भी 12% की जगह अब शून्य जीएसटी कर दिया गया है. दवाएं और हेल्थ-लाइफ पॉलिसी पर जीएसटी खत्म करते हुए सरकार ने राहत दी है. जहां 33 जीवन रक्षक दवाओं पर अब तक लागू 12 फीसदी जीएसटी को खत्म करते हुए इसे जीरो किया गया है, इनमें तीन कैंसर की दवाइयां भी शामिल हैं. इसके अलावा इंडिविजुअल हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी को भी पूरी तरह से जीएसटी मुक्त किया गया है।ये जरूरी सामान भी हो जाएंगे सस्ते:

आज से लागू, कार, बाइक, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक और खाद्य वस्तुएं होंगी सस्ती
आज से लागू, कार, बाइक, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक और खाद्य वस्तुएं होंगी सस्ती

सरकार की ओर से जहां ऊपर बताए गए सामानों और सर्विस को जीएसटी फ्री किया गया है. तो तमाम जरूरत की चीजों को 5% स्लैब में शामिल किया गया है।

फूड आइटम्‍स:

वनस्पति वसा/तेल 12% से 5%

मोम, वनस्पति मोम 18% से 5%

मांस, मछली, फूड प्रोडक्‍ट्स 12% से 5%

मक्खन-घी 12% से 5%

चीनी, उबली हुई मिठाइयां 12%-18% से 5%

चॉकलेट और कोको पाउडर 18% से 5%

पास्ता, कॉर्न फ्लेक्स, नूडल्स, बिस्कुट, माल्ट एक्सट्रेक्ट (गैर-कोको) 12%-18% से 5%

जैम, जेली, मुरब्बा, मेवे/फलों का पेस्ट, सूखे मेवे, मेवे 12% से 5%

फलों का रस, नारियल पानी 12% से 5%

कंज्‍यूमर और डोमेस्टिक आइटम्स:

हेयर ऑयल, शैम्पू, टूथपेस्ट, शेविंग उत्पाद, टैल्कम पाउडर 18% से 5%

टॉयलेट साबुन (बार/केक) 18% से 5%

टूथब्रश, डेंटल फ्लॉस 18% से 5%

शेविंग क्रीम/लोशन, आफ्टरशेव 18% से 5%

सामान्य टेबलवेयर/किचनवेयर (लकड़ी, लोहा, तांबा, एल्युमीनियम, प्लास्टिक) 12% से 5%

बच्चों की दूध की बोतल-निप्पल, प्लास्टिक के मोती 12% से 5%

मोमबत्तियां 12% से 5%

छाते और संबंध‍ित वस्‍तु 12% से 5%

सिलाई सुइयां 12% से 5%

सिलाई मशीनें और पुर्जे 12% से 5%

कपास/जूट से बने हैंड बैग 12% से 5%

शिशुओं के लिए नैपकिन/डायपर 12% से 5%

पूरी तरह से बांस, बेंत, रतन से बने फर्नीचर 12% से 5%

दूध के डिब्बे (लोहा/स्टील/एल्यूमीनियम) 12% से 5%

इलेक्ट्रॉनिक सामान:

एयर कंडीशनर (AC) 28% से 18%

बर्तन धोने की मशीनें 28% से 18%

टीवी (एलईडी, एलसीडी), मॉनिटर, प्रोजेक्टर 28% से 18%

एग्रीकल्‍चर और फर्टिलाइजर:

ट्रैक्टर (1800cc से अधिक क्षमता वाले सड़क ट्रैक्टरों को छोड़कर) 12% से 5%

पिछले ट्रैक्टर टायर/ट्यूब 18% से 5%

मिट्टी/कटाई/थ्रेसिंग के लिए कृषि मशीनरी 12% से 5%

कम्पोस्टिंग मशीनें 12% से 5%

स्प्रिंकलर/ड्रिप सिंचाई/लॉन/स्पोर्ट्स रोलर्स 12% से 5%

जैव-कीटनाशक, सूक्ष्म पोषक तत्व 12% से 5%

ईंधन के लिए पंप 28% से 18%

ट्रैक्टरों के लिए हाइड्रोलिक पंप 18% से 5%

हेल्‍थ प्रोडक्ट्स पर जीएसटी:

थर्मामीटर, डायग्नोस्टिक किट 12% 18% से 5%

ब्लड ग्लूकोज मॉनिटर (ग्लूकोमीटर) 12% से 5%

मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन और हाइड्रोजन पेरोक्साइड 12% से 5%

चश्मा 12% से 5%

मेडिकल/सर्जिकल रबर के दस्ताने 12% से 5%

कई दवाएं और खास दवाएं 12% से 5% या शून्‍य

कार-बाइक पर टैक्‍स

टायर 28% से 18%

मोटर वाहन (छोटी कारें, तिपहिया वाहन, एम्बुलेंस, 350cc से छोटी मोटरसाइकिल, कमर्शियल व्‍हीकल) 28% से 18%

रोइंग बोट/डोंगी 28% से 18%

साइकिलें और गैर-मोटर तिपहिया वाहन 12% से 5%

टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स:

सिंथेटिक धागे, बिना बुने कपड़े, सिलाई धागा, स्टेपल फाइबर 12% और 18% से 5%

परिधान, रेडि‍मेड, ₹2,500 से अधिक नहीं 12% से 5%

परिधान, रेडि‍मेड, ₹2,500 से अधिक 12% से 18%

इन सामानों पर भी घटेगा टैक्स:

इसके अलावा नक्काशीदार कला उत्पाद (लकड़ी, पत्थर, आधार धातु, कॉर्क) 12% से 5% स्लैह में आएंगे, जबकि हाथ से बने कागज और पेपरबोर्ड, हस्तशिल्प लैंप, पेंटिंग, मूर्तियां, पेस्टल, प्राचीन संग्रहणीय वस्तुएं भी इसी स्लैब में शामिल होंगे. तैयार चमड़ा, चमड़े के सामान, दस्ताने भी 5% के दायरे में होंगे, तो वहीं कंस्ट्रक्शन वर्क में शामिल टाइलें, ईंटें, पत्थर जड़ाई कार्य 12% से 5% ट्रांसफर किए जा रहे हैं. हालांकि, पोर्टलैंड, स्लैग, हाइड्रोलिक सीमेंट पर 28% की जगह 18% जीएसटी लागू होगा।

5% के टैक्स स्लैब में ये सामान भी आएंगे:

सौर कुकर/वॉटर हीटर, बायोगैस/पवन/अपशिष्ट से ऊर्जा/सौर पैनल भी अब 12% के बजाय 5% टैक्स स्लैब में आ जएंगे. इसके साथ ही सर्विस सेक्टर में बदलावों की बात करें, तो ₹7,500 दिन से कम होटल 12% से 5%, सिनेमा (टिकट ₹100 से कम) 12% से 5% और सौंदर्य सर्विस 18% से 5% (कोई आईटीसी नहीं) में आएंगी।

ये चीजें और सर्विसें महंगी होंगी:

जहां ज्यादातर सामान और सर्विेसें 22 सितंबर से सस्ती होने वाली हैं, तो कई जगह सरकार ने झटका भी दिया है. हालांकि, ये विलासिता के सामान या हानिकारक वस्तुएं हैं. जिन सामानों पर जीएसटी बढ़ाया गया है, उनमें ऑटो सेक्टर से 350cc मोटरसाइकिलें, बड़ी एसयूवी, लक्जरी/प्रीमियम कारें, सीमा से ऊपर की हाइब्रिड कारें, रेसिंग कारें शामिल हैं, जिनपर 28% की जगह 40% का टैक्स लगाया गया है. इसके अलावा कैसीनो/रेस क्लब प्रवेश, सट्टेबाजी/जुआ पर भी जीएसटी 28% से बढ़ाकर 40% किया गया है. सिगार, सिगरेट, तंबाकू प्रोडक्ट भी इसी हाई स्लैब में आएंगे, तो वहीं कार्बोनेटेड/वातित पेय, स्वादयुक्त पेय, कैफीनयुक्त पेय पर भी 40% टैक्स लागू होगा।

महवा में बैंक के सामने से पिकअप चोरी, 14 हजार कैश और जरूरी कागजात भी गायब

महवा में बैंक के सामने से पिकअप चोरी, 14 हजार कैश और जरूरी कागजात भी गायब

महवा में बैंक के सामने से पिकअप चोरी, 14 हजार कैश और जरूरी कागजात भी गायब
महवा में बैंक के सामने से पिकअप चोरी, 14 हजार कैश और जरूरी कागजात भी गायब

महवा, राजस्थान — कस्बे में आपराधिक गतिविधियों का ग्राफ दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है और शनिवार की रात घटी एक ताजा घटना ने एक बार फिर से पुलिस की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जयपुर रोड स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के सामने से एक बोलेरो पिकअप को अज्ञात चोर चुराकर ले गए। यह घटना तब और गंभीर हो जाती है जब यह समझा जाए कि यह सब एक व्यस्त मार्ग पर, एक प्रतिष्ठित बैंक के सामने, और CCTV कैमरों की निगरानी में हुआ। चोरी की यह वारदात न केवल पुलिस प्रशासन के लिए चुनौती बन गई है, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता भी बढ़ा रही है।

घटना शनिवार देर रात की बताई जा रही है, जब पिकअप मालिक रफीक खान ने अपनी बोलेरो पिकअप बैंक के ठीक सामने खड़ी की थी। अगली सुबह जब रफीक की नींद खुली और वे वाहन लेने पहुंचे, तो देखा कि उनकी पिकअप गायब थी। शुरुआत में उन्होंने सोचा कि शायद किसी परिचित ने गाड़ी ली होगी, लेकिन जब आसपास पूछताछ की और पिकअप का कोई सुराग नहीं मिला, तो उनके होश उड़ गए। घबराए रफीक ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। इसके बाद पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की।

CCTV फुटेज से पता चला कि चोरी की यह घटना तड़के करीब सवा चार बजे की है। फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि चोर बेहद शांत तरीके से आए, गाड़ी का लॉक तोड़ा और फिर आराम से उसे स्टार्ट कर वहां से फरार हो गए। जिस तरह से चोरों ने पूरी वारदात को अंजाम दिया, उससे यह स्पष्ट हो गया कि वे शातिर और अनुभवशाली अपराधी हैं, जिन्हें वाहन चोरी की पूरी योजना और तकनीक की समझ है। उनकी हरकतों से यह प्रतीत होता है कि उन्होंने पहले से रेकी की हुई थी और सही समय का इंतजार कर रहे थे। गाड़ी चोरी होने के साथ-साथ पिकअप में रखे 14,000 रुपये नकद और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी चोरी हो गए, जिनमें वाहन के कागजात, लाइसेंस और अन्य निजी कागजात शामिल थे। रफीक खान ने इस घटना से आहत होकर कहा कि उन्हें इस चोरी से भारी नुकसान हुआ है क्योंकि न केवल उनका वाहन गया, बल्कि नकदी और कागजात की चोरी से उनकी रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित हुई है।

इस चोरी की घटना के बाद महवा में आमजन में भय और आक्रोश का माहौल बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में पुलिस गश्त नाम मात्र की रह गई है और चोर बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। जयपुर रोड जैसे व्यस्त इलाके में, जहाँ बैंक, दुकानों और रिहायशी इमारतों की भरमार है, वहाँ इस तरह की चोरी घटना पुलिस की लापरवाही को दर्शाती है। नागरिकों का यह भी कहना है कि अगर बैंक के सामने खड़ी गाड़ी सुरक्षित नहीं है, तो फिर बाकी इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था का अंदाज़ा आसानी से लगाया जा सकता है।

महवा में बैंक के सामने से पिकअप चोरी, 14 हजार कैश और जरूरी कागजात भी गायब
महवा में बैंक के सामने से पिकअप चोरी, 14 हजार कैश और जरूरी कागजात भी गायब

पुलिस ने रफीक खान की शिकायत के आधार पर अज्ञात चोरों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और अब सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फुटेज से कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं और तकनीकी सहायता के जरिए चोरों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। साथ ही, अन्य शहरों में हुई इसी तरह की घटनाओं से भी इस केस को जोड़कर देखा जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या यह कोई वाहन चोरी करने वाला गिरोह है, जो सुनियोजित तरीके से एक के बाद एक घटनाओं को अंजाम दे रहा है।

इस बीच, स्थानीय प्रशासन से लोगों की अपेक्षा है कि सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए और ऐसे संवेदनशील स्थानों पर नियमित गश्त की जाए। व्यापारियों और वाहन मालिकों की भी यह मांग है कि रात के समय पुलिस की सक्रियता बढ़ाई जाए और सीसीटीवी नेटवर्क को और अधिक व्यापक बनाया जाए। नागरिक यह भी चाहते हैं कि ऐसी घटनाओं के आरोपियों को जल्द से जल्द पकड़ा जाए और सख्त सजा दी जाए ताकि अपराधियों के मन में कानून का भय पैदा हो।

महवा जैसी जगह, जहाँ जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है और नगरीकरण की प्रक्रिया तेज है, वहाँ यदि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति कमजोर होती है, तो इससे न केवल जनता का विश्वास पुलिस से उठता है, बल्कि अपराधियों को भी खुली छूट मिलती है। इस घटना से पुलिस को सबक लेते हुए अपनी कार्यशैली में परिवर्तन लाना चाहिए और गश्त, निगरानी, और संदिग्ध गतिविधियों पर नियंत्रण बढ़ाना चाहिए।

अंततः, यह घटना महज एक पिकअप चोरी की नहीं है, बल्कि यह महवा में बढ़ती असुरक्षा और कमजोर होती पुलिस व्यवस्था की एक चेतावनी है। अगर समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो ऐसे अपराध और भी बढ़ सकते हैं। पुलिस को चाहिए कि वह रफीक खान को न्याय दिलाने के साथ-साथ पूरे शहर की सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करे और यह सुनिश्चित करे कि नागरिकों का जीवन और संपत्ति सुरक्षित रहे।

सोलर प्लांट से केबल चोरी करने वाले 3 शातिर चोर गिरफ्तार

सोलर प्लांट से केबल चोरी करने वाले 3 शातिर चोर गिरफ्तार

सोलर प्लांट से केबल चोरी करने वाले 3 शातिर चोर गिरफ्तार
सोलर प्लांट से केबल चोरी करने वाले 3 शातिर चोर गिरफ्तार

बांदीकुई: सोलर प्लांट से केबल चोरी के तीन शातिर चोर गिरफ्तार, चोरी का तांबा भी बरामद

बांदीकुई, राजस्थान — बांदीकुई पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त कार्रवाई में सोलर प्लांट से तांबे की केबल चोरी करने वाले तीन शातिर चोरों को गिरफ्तार किया गया है। इस कार्रवाई से क्षेत्र में बढ़ती चोरी की वारदातों पर अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। थानाधिकारी ज़हीर अब्बास ने बताया कि यह मामला अगस्त माह में सामने आया था, जब ग्राम उदेरवाडा में स्थित सोलर प्लांट से भारी मात्रा में तांबे की केबल चोरी कर ली गई थी। चोरों ने योजनाबद्ध तरीके से सोलर प्लांट में घुसकर केबल को काटा और उसे चोरी कर ले गए। यह केबल उच्च गुणवत्ता का तांबा युक्त था, जिसकी बाजार में बड़ी मांग है।

पुलिस ने इस मामले में त्वरित जांच करते हुए तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में हरकेश बावरिया उर्फ रामसिंह पुत्र रामप्रसाद, निवासी बहतेड़, थाना मलारना डूंगर, जिला सवाई माधोपुर; राकेश बावरिया पुत्र सुमान बावरिया, निवासी नाथूसर, थाना थानागाजी, जिला अलवर; और रामकेश बावरिया उर्फ तितरा पुत्र रामप्रसाद बावरिया, निवासी मोरपा काजी कुण्डली, थाना बाटोदा, जिला सवाई माधोपुर शामिल हैं। पुलिस की पूछताछ में इन आरोपियों ने न केवल उदेरवाडा सोलर प्लांट से केबल चोरी की वारदात को स्वीकार किया, बल्कि सैंथल और बैजूपाड़ा थाना क्षेत्रों में स्थित अन्य सोलर प्लांट्स से हुई चोरी की घटनाओं का भी खुलासा किया।

पुलिस ने चोरी के इस नेटवर्क के केवल चोरों तक ही सीमित न रहकर, चोरी का माल खरीदने वालों तक भी अपनी जांच को विस्तार दिया। जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई कि चोरी की गई केबल को जलाकर तांबा निकाला जाता था और फिर उसे आगे बेचा जाता था। पुलिस ने इस मामले में दो खरीददारों की भी पहचान की और उन्हें गिरफ्तार किया। इन दोनों आरोपियों की पहचान शानू पुत्र कमल तेली मुसलमान, निवासी चुली गेट, मदीना मस्जिद, गंगापुर सिटी; और रशीद खान पुत्र चिरंजी खान तेली मुसलमान, निवासी उष्मान कॉलोनी, गंगापुर सिटी के रूप में हुई है।

गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने चोरी की गई केबल को जलाकर निकाले गए तांबे के तार भी बरामद कर लिए हैं। इन तारों को शहर के विभिन्न कबाड़ बाजारों में खपाया जा रहा था। पूछताछ में यह भी सामने आया है कि ये चोर सुनसान इलाकों में स्थित सोलर प्लांट्स को निशाना बनाते थे, जहां पर सुरक्षाकर्मी सीमित होते थे या निगरानी की व्यवस्था कमजोर होती थी। रात के समय यह गिरोह प्लांट की चारदीवारी को पार कर भीतर प्रवेश करता था और केबल काटकर उसे बैग या बोरे में भरकर ले जाते थे। उसके बाद सुरक्षित स्थान पर ले जाकर केबल को आग में जलाकर उससे तांबा निकालते थे और उसे विभिन्न कबाड़ व्यापारियों को बेच देते थे।

सोलर प्लांट से केबल चोरी करने वाले 3 शातिर चोर गिरफ्तार
सोलर प्लांट से केबल चोरी करने वाले 3 शातिर चोर गिरफ्तार

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह एक संगठित गिरोह है जो विभिन्न जिलों में फैला हुआ है और जिनका मुख्य उद्देश्य सोलर प्लांट्स, मोबाइल टावरों और अन्य इलेक्ट्रिक इंस्टॉलेशनों से तांबे की केबल चोरी करना है। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों की भी तलाश में जुट गई है और जल्द ही और गिरफ्तारियां संभव हैं। गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल, बैंक ट्रांजेक्शन और कॉल डिटेल्स की भी जांच की जा रही है ताकि इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों और खरीददारों का भी पता लगाया जा सके।

थाना अधिकारी ज़हीर अब्बास ने बताया कि साइबर सेल की मदद से आरोपियों की लोकेशन ट्रैक की गई थी। आरोपी अक्सर लोकेशन बदलते रहते थे ताकि पकड़े न जा सकें, लेकिन पुलिस की सतर्कता और तकनीकी जांच के चलते उन्हें दबोच लिया गया। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या ये आरोपी पहले भी किसी अन्य बड़े अपराध में शामिल रहे हैं। चोरी के इस मामले ने यह भी दिखाया है कि कैसे तकनीकी यंत्रों की सहायता से पुलिस अपराधियों तक पहुंच रही है और सटीक कार्रवाई कर रही है।

इस कार्रवाई की स्थानीय लोगों द्वारा सराहना की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से क्षेत्र में लगातार हो रही चोरी की घटनाओं से वे परेशान थे और पुलिस की इस कार्रवाई से अब उन्हें राहत महसूस हो रही है। साथ ही, सोलर कंपनियों को भी सलाह दी गई है कि वे अपने प्लांट्स में सुरक्षा के अतिरिक्त उपाय करें, जैसे कि सीसीटीवी कैमरे, नाइट विजन डिवाइसेस और सुरक्षा गार्ड्स की तैनाती, ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

बांदीकुई पुलिस द्वारा की गई यह कार्रवाई न केवल तात्कालिक अपराध की गुत्थी को सुलझाने में सफल रही, बल्कि इसने एक बड़े अंतर-जिला चोर गिरोह के नेटवर्क को भी उजागर किया है। पुलिस की सतर्कता, आधुनिक तकनीक का उपयोग और टीमवर्क ने यह साबित कर दिया है कि कोई भी अपराधी कानून से बच नहीं सकता। अब देखना यह है कि आगे की जांच में और कितने नाम सामने आते हैं और इस गिरोह का पूरा नेटवर्क कब तक पुलिस की गिरफ्त में आता है।

जातिगत भेदभाव खत्म करने को यूपी सरकार का बड़ा फैसला,पुलिस रिकॉर्ड्स से हटेगा जाति का उल्लेख

जातिगत भेदभाव खत्म करने को यूपी सरकार का बड़ा फैसला,पुलिस रिकॉर्ड्स से हटेगा जाति का उल्लेख

जातिगत भेदभाव खत्म करने को यूपी सरकार का बड़ा फैसला,पुलिस रिकॉर्ड्स से हटेगा जाति का उल्लेख
जातिगत भेदभाव खत्म करने को यूपी सरकार का बड़ा फैसला,पुलिस रिकॉर्ड्स से हटेगा जाति का उल्लेख

की दिशा में अहम कदम उठाया है। कार्यवाहक मुख्य सचिव दीपक कुमार ने रविवार को आदेश जारी कर दिया।

अब एफआईआर,गिरफ्तारी मेमो और अन्य पुलिस दस्तावेजों से जाति का उल्लेख हटा दिया जाएगा। इसके स्थान पर माता-पिता के नाम जोड़े जाएंगे। साथ ही थानों के नोटिस बोर्ड, वाहनों और साइनबोर्ड्स से जातीय संकेत और नारे भी हटाने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार ने जाति आधारित रैलियों और प्रदर्शनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ सोशल मीडिया पर जातिगत प्रचार-प्रसार पर कड़ी निगरानी रखने का भी निर्णय लिया है। हालांकि, SC/ST एक्ट से जुड़े मामलों में जाति का उल्लेख यथावत रहेगा।

इस आदेश के पालन हेतु नई SOP बनाई जाएगी और पुलिस नियमावली में संशोधन किया जाएगा। सरकार का दावा है कि यह कदम सामाजिक समरसता स्थापित करने और भेदभाव मिटाने में ऐतिहासिक साबित होगा।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने एक अहम निर्णय लेते हुए जाति आधारित रैलियों पर रोक लगा दी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के हालिया आदेश के अनुसार राज्य के मुख्य सचिव ने सार्वजनिक जगहों, कानूनी दस्तावेजों और पुलिस रिकॉर्ड्स में जाति का उल्लेख किए जाने पर रोक लगाने का निर्देश जारी किया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने जाति आधारित राजनीति और भेदभाव पर अंकुश लगाने के लिए अहम कदम उठाया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में कार्यवाहक मुख्य सचिव दीपक कुमार ने इस संबंध में नए निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके तहत अब प्रदेश में जाति आधारित रैलियों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

पुलिस की ओर से दर्ज की जाने वाली एफआईआर, गिरफ्तारी मेमो और अन्य दस्तावेजों में आरोपियों की जाति का उल्लेख नहीं किया जाएगा। इसके स्थान पर माता-पिता के नाम लिखे जाएंगे। थानों के नोटिस बोर्ड, वाहनों और साइनबोर्ड पर लगे जातीय संकेत और नारे भी हटाए जाएंगे। आदेश के पालन के लिए पुलिस नियमावली और एसओपी में संशोधन भी किया जाएगा। सोशल मीडिया पर भी जाति आधारित कंटेंट पर सख्त निगरानी रखी जाएगी। हालांकि एससी-एसटी एक्ट जैसे विशेष मामलों में जाति का उल्लेख जारी रहेगा।

जातिगत भेदभाव खत्म करने को यूपी सरकार का बड़ा फैसला,पुलिस रिकॉर्ड्स से हटेगा जाति का उल्लेख
जातिगत भेदभाव खत्म करने को यूपी सरकार का बड़ा फैसला,पुलिस रिकॉर्ड्स से हटेगा जाति का उल्लेख

हाईकोर्ट का आदेश
बताते चले कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में अपने 28 पन्नों के आदेश में साफ कहा था कि पुलिस दस्तावेजों और एफआईआर में जाति का उल्लेख संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है। कोर्ट ने इसे समाज को विभाजित करने वाला कदम बताते हुए इसे तुरंत रोकने के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट ने सुझाव दिया था कि पुलिस के सभी फॉर्म में पिता या पति के नाम के साथ मां का नाम भी शामिल किया जाए। ताकि लैंगिक समानता को बढ़ावा मिले।कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि इंटरनेट मीडिया पर जाति के उल्लेख को रोकने के लिए आईटी नियमों को और मजबूत किया जाए। नागरिकों को शिकायत दर्ज कराने की सरल व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।

कैसे शुरू हुआ मामला?
यह पूरा मामला 29 अप्रैल 2023 की एक पुलिस कार्रवाई से जुड़ा हुआ है। उस दिन पुलिस ने एक स्कार्पियो गाड़ी से शराब की बड़ी खेप बरामद की थी। इस मामले में पुलिस ने आरोपी प्रवीण छेत्री समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। FIR में पुलिस ने आरोपियों की जाति का जिक्र कर दिया था। इसको लेकर प्रवीण छेत्री ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की मांग की थी।उधर मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आदेश दिया कि भविष्य में पुलिस रिकॉर्ड, थानों के बोर्ड और सार्वजनिक स्थलों पर कहीं भी जाति का उल्लेख नहीं होना चाहिए।राजनीति पर असर
वहीं हाई कोर्ट की सख्ती के बाद यूपी सरकार के इस फैसले का सीधा असर प्रदेश की जातीय राजनीति पर पड़ेगा। कोई भी राजनीतिक दल या संगठन अब जाति आधारित रैली आयोजित नहीं कर सकेगा। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में जाति का उन्मूलन एक केंद्रीय एजेंडा होना चाहिए। इसलिए राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर सरकारों को संवैधानिक नैतिकता के अनुसार ठोस कदम उठाने होंगे।

अब FIR और पुलिस दस्तावेजों में नाम के साथ नहीं लिख सकेंगे जाति, यूपी सरकार ने बदल दिए नियम

अब FIR और पुलिस दस्तावेजों में नाम के साथ नहीं लिख सकेंगे जाति, यूपी सरकार ने बदल दिए नियम

अब FIR और पुलिस दस्तावेजों में नाम के साथ नहीं लिख सकेंगे जाति, यूपी सरकार ने बदल दिए नियम
अब FIR और पुलिस दस्तावेजों में नाम के साथ नहीं लिख सकेंगे जाति, यूपी सरकार ने बदल दिए नियम

यूपी में वाहनों पर जाति संबोधित नारे-या सम्मलेन अवैध हो जाएंगे. जी हां इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रदेश सरकार ने जातिगत भेदभाव को खत्म करने के लिए बड़ा कदम उठाया है. हाईकोर्ट के आदेश का पालन करते हुए मुख्य सचिव दीपक कुमार ने सभी सरकारी दस्तावेजों, पुलिस रिकॉर्ड्स और सार्वजनिक स्थानों से जाति के उल्लेख को हटाने का आदेश जारी किया है.

इस फैसले से पुलिस रिकॉर्ड्स, FIR, गिरफ्तारी मेमो, थानों के नोटिस बोर्ड, वाहनों और साइनबोर्ड्स से जातीय संकेत और नारे पूरी तरह हटा दिए जाएंगे. इसके साथ ही जाति आधारित रैलियों पर पूर्ण प्रतिबंध और सोशल मीडिया पर सख्त निगरानी होगी.

भेदभाव खत्म करने के लिए था आदेश

दरअसल हाईकोर्ट ने सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने और भेदभाव को खत्म करने के लिए यह आदेश दिया था. नए नियमों के तहत अब FIR, गिरफ्तारी मेमो और अन्य पुलिस रिकॉर्ड्स में जाति का उल्लेख नहीं होगा. इसके बजाय पहचान के लिए माता-पिता के नाम जोड़े जाएंगे. हालांकि, SC/ST एक्ट जैसे विशिष्ट मामलों में जाति के उल्लेख को छूट दी जाएगी, ताकि कानूनी प्रक्रिया प्रभावित न हो. मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि आदेश का पालन सुनिश्चित करने के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) और पुलिस नियमावली में जल्द संशोधन किया जाएगा.

अब FIR और पुलिस दस्तावेजों में नाम के साथ नहीं लिख सकेंगे जाति, यूपी सरकार ने बदल दिए नियम
अब FIR और पुलिस दस्तावेजों में नाम के साथ नहीं लिख सकेंगे जाति, यूपी सरकार ने बदल दिए नियम

जाति आधारित संकेत और नारे पूरी तरह बैन

इस आदेश के तहत थानों के नोटिस बोर्ड, पुलिस वाहनों और सार्वजनिक साइनबोर्ड्स से जाति आधारित संकेत, जैसे ‘यादव’, ‘जाट’, ‘गुर्जर’ या अन्य समुदायों के नारे, तत्काल हटाए जाएंगे. इसके अलावा, जाति आधारित रैलियों और प्रदर्शनों पर पूरी तरह रोक लगाई गई है. सोशल मीडिया पर भी ऐसी सामग्री पर नजर रखी जाएगी, और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी. यह कदम उत्तर प्रदेश में सामाजिक एकता को बढ़ाने और जातिगत तनाव को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.सख्ती से कराया जाएगा पालन

मुख्य सचिव दीपक कुमार ने बताया कि हाईकोर्ट के निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाएगा. सभी पुलिस थानों और सरकारी विभागों को आदेश भेजे जा चुके हैं. हमारा लक्ष्य समाज में समानता और एकता को बढ़ावा देना है. उन्होंने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि नए नियमों का उल्लंघन न हो, और उल्लंघन की स्थिति में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी.

यह फैसला उत्तर प्रदेश में जातिगत भेदभाव को खत्म करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम सामाजिक समावेशिता को बढ़ाएगा, लेकिन इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जागरूकता और प्रशिक्षण जरूरी है.खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां जातिगत पहचान गहरी जड़ें जमाए हुए है, वहां पुलिस और प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी.

SC/STएक्ट मामलों में रहेगी छूट

SC/ST एक्ट के तहत दर्ज मामलों में जाति का उल्लेख जरूरी होने पर सावधानी बरती जाएगी, ताकि पीड़ितों को न्याय मिलने में कोई बाधा न आए. सरकार ने सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को आदेश के पालन की निगरानी के लिए समितियां गठित करने का निर्देश दिया है.

केवल 4 सेकंड में जमींदोज हो गया 540 फुट का एटॉमिक टॉवर वीडियो देख हैरान रह जाएंगे आप

केवल 4 सेकंड में जमींदोज हो गया 540 फुट का एटॉमिक टॉवर वीडियो देख हैरान रह जाएंगे आप

केवल 4 सेकंड में जमींदोज हो गया 540 फुट का एटॉमिक टॉवर वीडियो देख हैरान रह जाएंगे आप
केवल 4 सेकंड में जमींदोज हो गया 540 फुट का एटॉमिक टॉवर वीडियो देख हैरान रह जाएंगे आप
हार्ट्सविले,
  • टेनेसी में 18 सितंबर को सुबह एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने हर किसी को हैरान कर दिया, 540 फीट ऊंचा कूलिंग टॉवर केवल एक बटन दबाते ही सुरक्षित रूप से जमींदोज हो गया, यह दृश्य इंजीनियरिंग, तैयारी और आधुनिक तकनीक का जीवंत उदाहरण साबित हुआ, वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग दंग रह गए कि इतनी विशाल संरचना कुछ ही सेकंड में जमीन पर कैसे गिर सकती है, हर फ्रेम में स्पष्ट है कि पूरी साइट नियंत्रित और सुरक्षित थी और यह घटना भविष्य के विकास और क्षेत्र की सुरक्षा के लिए की गई पहल का प्रतीक बन गई.

एक बटन दबाते ही जमींदोज हो गया एटोमिक टॉवर

  • वीडियो की शुरुआत में साफ दिखाई देता है कि साइट पर इंजीनियर और टेक्नीशियन पूरी तैयारी के साथ मौजूद हैं, चारों ओर सुरक्षा बारियर्स लगे हैं और किसी भी संभावित खतरे से बचने के लिए कंट्रोल रूम तैयार है, एक बटन दबाते ही टावर धीरे-धीरे झुकना शुरू करता है और कुछ ही सेकंड में विशाल संरचना जमीन पर गिर जाती है.
केवल 4 सेकंड में जमींदोज हो गया 540 फुट का एटॉमिक टॉवर वीडियो देख हैरान रह जाएंगे आप
केवल 4 सेकंड में जमींदोज हो गया 540 फुट का एटॉमिक टॉवर वीडियो देख हैरान रह जाएंगे आप
  • धूल और मलबा उठता है लेकिन कोई चोट या नुकसान नहीं होता, टॉवर के नीचे कोई नहीं होता और पूरी साइट पूरी तरह नियंत्रित रहती है. वीडियो देखने के बाद आप भी हैरानी से बस इसे देखते ही रह जाएंगे.
यूजर्स रह गए हैरान, करने लगे तरह तरह की बातें
  • वीडियो वायरल होते ही लोग इसे शेयर कर रहे हैं, ट्विटर और इंस्टाग्राम पर लाखों व्यूज आ चुके हैं, लोग कमेंट कर रहे हैं कि इतनी बड़ी संरचना सिर्फ एक बटन से गिर जाना वाकई चौंकाने वाला है, कई यूजर्स इसे इंजीनियरिंग चमत्कार बता रहे हैं, कुछ मजाक में कह रहे हैं कि “इतनी शक्ति और तैयारी केवल एक बटन में बर्बाद कर दी” और हर कोई यह देखकर दंग रह गया कि यह घटना कितनी नियंत्रित और सुरक्षित तरीके से हुई. वीडियो को Tennessee Valley Authority नाम के एक्स अकाउंट से शेयर किया गया है जिसे अब तक लाखों लोगों ने देखा है तो वहीं कई लोगों ने वीडियो को लाइक भी किया है.
गाजियाबाद: 50000 का इनामी बदमाश बलराम ठाकुर पुलिस एनकाउंटर में ढेर, पश्चिमी यूपी में आतंक का अंत

गाजियाबाद: 50000 का इनामी बदमाश बलराम ठाकुर पुलिस एनकाउंटर में ढेर, पश्चिमी यूपी में आतंक का अंत

गाजियाबाद: 50000 का इनामी बदमाश बलराम ठाकुर पुलिस एनकाउंटर में ढेर, पश्चिमी यूपी में आतंक का अंत
गाजियाबाद: 50000 का इनामी बदमाश बलराम ठाकुर पुलिस एनकाउंटर में ढेर, पश्चिमी यूपी में आतंक का अंत
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में 50000 के
  • इनामी बदमाश बलराम ठाकुर के साथ पुलिस की मुठभेड़ हुई है. आमने-सामने की चली गोली में बदमाश बलराम ठाकुर पुलिस की गोली से ढेर हो गया है. वहीं उसके तीन साथी मौके से फरार हो गए हैं, जबकि इस मुठभेड़ पुलिस के तीन कांस्टेबल घायल हुए हैं और दो अधिकारियों की बुलेटप्रूफ जैकेट में बदमाशों की गोली लगी है.
बलराम ठाकुर का पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आतंक था,
  • वह व्यापारियों से रंगदारी वसूलता था. हाल फिलहाल में कुछ दिनों में उसने गाजियाबाद के दो व्यापारियों से रंगदारी मांगी थी. उसी को लेकर पुलिस उसकी तलाश कर रही थी, पुलिस को सूचना मिली की बलराम अपने साथियों के साथ ईस्टर्न पेरिफेरल के पास से गुजरेगा. गाजियाबाद के पुलिस कमिश्नर जे रविंद्र गौड़ के मुताबिक पुलिस बलराम ठाकुर को रोकने के लिए तैयार थी.
गाजियाबाद: 50000 का इनामी बदमाश बलराम ठाकुर पुलिस एनकाउंटर में ढेर, पश्चिमी यूपी में आतंक का अंत
गाजियाबाद: 50000 का इनामी बदमाश बलराम ठाकुर पुलिस एनकाउंटर में ढेर, पश्चिमी यूपी में आतंक का अंत
बदमाश के तीन साथी मौके से हुए फरार
  • इसी दौरान बलराम ठाकुर जब अपने साथियों के साथ आता दिखाई दिया तो पुलिस ने उसे रोकने का इशारा किया. मगर बलराम ठाकुर ने पुलिस पर फायरिंग कर दी, इस फायरिंग में पुलिस के तीन जवान मनोज कुमार, विशाल राठी और वरुण वीर घायल हुए हैं. जबकि एडीसीपी क्राइम पीयूष सिंह और स्वाट टीम प्रभारी अनिल राजपूत की बुलेट प्रूफ जैकेट में गोली लगी है. आमने-सामने की इस मुठभेड़ में जहां 50000 का इनामी बलराम ठाकुर मारा गया है, वहीं उसके तीन साथी मौके से फरार हो गए हैं.
लखनऊ ट्रामा सेंटर में नर्सिंग ऑफिसर पर जानलेवा हमला, मेडिकल स्टूडेंट्स के खिलाफ गंभीर आरोप

लखनऊ ट्रामा सेंटर में नर्सिंग ऑफिसर पर जानलेवा हमला, मेडिकल स्टूडेंट्स के खिलाफ गंभीर आरोप

लखनऊ ट्रामा सेंटर में नर्सिंग ऑफिसर पर जानलेवा हमला, मेडिकल स्टूडेंट्स के खिलाफ गंभीर आरोप
लखनऊ ट्रामा सेंटर में नर्सिंग ऑफिसर पर जानलेवा हमला, मेडिकल स्टूडेंट्स के खिलाफ गंभीर आरोप

लखनऊ, 21 सितंबर 2025 — उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर में शनिवार देर रात एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जहाँ मेडिकल स्टूडेंट्स द्वारा एक नर्सिंग ऑफिसर पर जानलेवा हमला किए जाने का आरोप लगा है। इस घटना ने पूरे चिकित्सा समुदाय को हिला कर रख दिया है और स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

शराब के नशे में थे मेडिकल स्टूडेंट्स

प्रत्यक्षदर्शियों और अस्पताल के स्टाफ के अनुसार, यह घटना शनिवार देर रात लगभग 11:30 बजे की है। ट्रामा सेंटर के ऑर्थो ओटी (ऑर्थोपेडिक ऑपरेशन थिएटर) में ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग ऑफिसर शुभम पर मेडिकल कॉलेज के जूनियर रेजिडेंट्स (JR-1 और JR-2) ने अचानक हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि हमले के वक्त आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर्स शराब के नशे में थे।

चश्मदीदों के मुताबिक, पहले नर्सिंग ऑफिसर शुभम के साथ गाली-गलौज की गई और जब उन्होंने इसका विरोध किया तो स्टूडेंट्स ने उन्हें पीटना शुरू कर दिया। शुभम को गंभीर चोटें आई हैं और तत्काल उन्हें मेडिकल सहायता दी गई।

पुरानी रंजिश बनी हमले की वजह

प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि शुभम और आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर्स के बीच कुछ दिन पहले किसी मुद्दे को लेकर बहस हुई थी। यह बहस इतनी तीव्र थी कि माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया था। उसी का बदला लेने के इरादे से शनिवार रात को यह हमला किया गया।

सूत्रों के अनुसार, आरोपी रेजिडेंट्स ने शुभम को अकेला पाकर ऑर्थो ओटी में घुसकर उन्हें बुरी तरह पीटा। यह पूरी घटना ट्रामा सेंटर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाती है, क्योंकि इतनी संवेदनशील जगह पर इस तरह की हिंसात्मक घटना का होना बेहद चिंताजनक है।

नर्सिंग ऑफिसर ने दी लिखित शिकायत

हमले के तुरंत बाद घायल शुभम ने ट्रामा सेंटर चौकी पर लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में शुभम ने मेडिकल स्टूडेंट्स द्वारा मारपीट, गाली-गलौज, और जान से मारने की धमकी देने की बात कही है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस का कहना है कि CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं और मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अस्पताल प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है। घटना के कई घंटे बाद भी कोई वरिष्ठ अधिकारी मीडिया के सामने नहीं आया और न ही कोई आंतरिक जांच की घोषणा की गई।

स्वास्थ्य कर्मियों और नर्सिंग स्टाफ का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब जूनियर डॉक्टर्स ने इस तरह का व्यवहार किया हो। अक्सर नर्सिंग स्टाफ को बदसलूकी और दबाव का सामना करना पड़ता है, लेकिन इस बार मामला हाथापाई और जानलेवा हमले तक पहुँच गया।

लखनऊ ट्रामा सेंटर में नर्सिंग ऑफिसर पर जानलेवा हमला, मेडिकल स्टूडेंट्स के खिलाफ गंभीर आरोप
लखनऊ ट्रामा सेंटर में नर्सिंग ऑफिसर पर जानलेवा हमला, मेडिकल स्टूडेंट्स के खिलाफ गंभीर आरोप

नर्सिंग यूनियन में आक्रोश, हड़ताल की चेतावनी

इस घटना के बाद नर्सिंग यूनियन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। यूनियन के अध्यक्ष ने बयान जारी कर कहा, “हम इस अमानवीय हमले की कड़ी निंदा करते हैं। मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा को लेकर हम लंबे समय से मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन हर बार इसे नजरअंदाज करता रहा है।”

यूनियन ने चेतावनी दी है कि अगर दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई और भविष्य में ऐसे मामलों से निपटने के लिए ठोस नीति नहीं बनाई गई, तो वे कार्य बहिष्कार पर जा सकते हैं। यूनियन ने यह भी मांग की है कि सभी अस्पतालों में कार्यरत कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और CCTV कैमरों की संख्या और निगरानी को बढ़ाया जाए।

चिकित्सा समुदाय में गुस्सा और चिंता

इस घटना ने मेडिकल कॉलेज के अन्य स्टाफ में भी गहरी नाराजगी और चिंता पैदा कर दी है। डॉक्टर, नर्स, तकनीशियन और अन्य कर्मचारियों का कहना है कि अगर अस्पताल में ही सुरक्षाकर्मी और प्रशासन हमारी रक्षा नहीं कर सकते, तो हम कैसे निर्भय होकर मरीजों की सेवा करेंगे?कई डॉक्टरों और वरिष्ठ नर्सों ने इस मुद्दे पर खुलकर कहा कि ट्रेनी डॉक्टर्स का व्यवहार पिछले कुछ सालों में काफी बदल गया है। कई बार वे खुद को ‘अधिकार संपन्न’ समझकर बाकी स्टाफ के साथ दुर्व्यवहार करते हैं। इस घटना ने चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता और अनुशासन पर भी सवाल खड़े किए हैं।

क्या कहते हैं कानून और नियम?

सरकारी अस्पतालों और मेडिकल संस्थानों में कार्यरत कर्मियों की सुरक्षा को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों के दिशा-निर्देश पहले से मौजूद हैं। ‘हॉस्पिटल प्रोटेक्शन एक्ट’ जैसे कानून कई राज्यों में लागू हैं, लेकिन इनका क्रियान्वयन कमजोर है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल संस्थानों को अपने आंतरिक अनुशासन तंत्र को मज़बूत करने की आवश्यकता है। साथ ही ऐसे मामलों में ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनानी चाहिए ताकि भविष्य में कोई ऐसी घटना दोबारा न हो।

समाज और सरकार की भूमिका

इस तरह की घटनाएँ केवल एक कर्मचारी या एक विभाग की समस्या नहीं होती, यह पूरे समाज की संवेदनशीलता, हमारी संस्थाओं की जवाबदेही और शासन की तत्परता की परीक्षा होती हैं। जब अस्पताल जैसी जगहों पर भी लोग सुरक्षित नहीं हैं, तो यह सरकार और प्रशासन के लिए गंभीर चेतावनी होनी चाहिए।

सरकार को चाहिए कि वह जल्द से जल्द एक स्वतंत्र जांच समिति गठित करे जो इस मामले की निष्पक्षता से जांच कर सके और दोषियों को सजा दिला सके।


निष्कर्ष:

लखनऊ के मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर में हुए इस हमले ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा को लेकर हमारे संस्थान और प्रशासन कितने लापरवाह हैं। जब नर्सिंग ऑफिसर जैसी अहम कड़ी पर ही हमला हो सकता है, तो सामान्य मरीजों और उनके तीमारदारों की सुरक्षा की कल्पना करना भी कठिन है।

अब आवश्यकता है कि प्रशासन, सरकार, और समाज तीनों इस मुद्दे को गंभीरता से लें और स्वास्थ्य संस्थानों को एक सुरक्षित, अनुशासित और सम्मानजनक कार्यस्थल बनाने के लिए मिलकर काम करें।

मुख्तार के छोटे बेटे उमर अंसारी की बढ़ी मुश्किलें, पुलिस ने खोली हिस्ट्रीशीट दो दिन पहले ही मिली थी जमानत

मुख्तार के छोटे बेटे उमर अंसारी की बढ़ी मुश्किलें, पुलिस ने खोली हिस्ट्रीशीट दो दिन पहले ही मिली थी जमानत

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मुख्तार के छोटे बेटे उमर अंसारी की बढ़ी मुश्किलें, पुलिस ने खोली हिस्ट्रीशीट दो दिन पहले ही मिली थी जमानत

गाजीपुर जिले में अपराध और माफिया नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई करते हुए थाना मुहम्मदाबाद पुलिस ने मरहूम माफिया मुख्तार अंसारी के छोटे बेटे उमर अंसारी की हिस्ट्रीशीट खोल दी है। हाल ही में उमर अंसारी को लखनऊ आवास से फर्जी हस्ताक्षर मामले में गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में फरार चल रही मुख्तार अंसारी की पत्नी आफ्सा अंसारी के नाम से फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए थे। दो दिन पूर्व ही इलाहाबाद हाईकोर्ट से उसे जमानत मिली थी, लेकिन जेल से बाहर आने से पहले ही पुलिस ने उसकी हिस्ट्रीशीट खोलकर नया पेंच फंसा दिया है। यह कार्रवाई सीधे तौर पर गाजीपुर पुलिस की अपराधियों और माफिया नेटवर्क पर शिकंजा कसने की रणनीति से जुड़ी मानी जा रही है।

IS-191 गैंग का सक्रिय सदस्य
  • पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक, उमर अंसारी IS-191 गैंग का सक्रिय सदस्य है। आरोप है कि वह कूट रचित दस्तावेजों के जरिए धोखाधड़ी से सार्वजनिक जमीनों पर कब्जा करता है। इसके साथ ही चुनाव के दौरान भड़काऊ भाषण देने और दिलवाने में भी शामिल रहता है। गाजीपुर, मऊ और लखनऊ में उस पर कई गंभीर मुकदमे दर्ज हैं। इनमें धोखाधड़ी, जालसाजी, सरकारी संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम, चुनावी अपराध और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम जैसी धाराएं शामिल हैं। उसके खिलाफ गाजीपुर के मुहम्मदाबाद थाने से लेकर मऊ और लखनऊ की अदालतों में कई मुकदमे विचाराधीन हैं।
मुख्तार के छोटे बेटे उमर अंसारी की बढ़ी मुश्किलें, पुलिस ने खोली हिस्ट्रीशीट दो दिन पहले ही मिली थी जमानत
मुख्तार के छोटे बेटे उमर अंसारी की बढ़ी मुश्किलें, पुलिस ने खोली हिस्ट्रीशीट दो दिन पहले ही मिली थी जमानत
खुफिया एजेंसियां भी अलर्ट
  • पुलिस सूत्रों के अनुसार, उमर अंसारी पर सख्ती से निगरानी रखना बेहद जरूरी था। हिस्ट्रीशीट खुलने के बाद अब उसकी हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जाएगी। खुफिया एजेंसियां भी उसकी गतिविधियों को लेकर अलर्ट हो चुकी हैं। जानकारों का मानना है कि हाई प्रोफाइल मुख्तार परिवार की निगरानी और उस पर लगातार कानूनी दबाव बढ़ाना पुलिस-प्रशासन की रणनीति का हिस्सा है। फिलहाल उमर अंसारी के लिए यह स्थिति बेहद मुश्किल बन चुकी है क्योंकि जमानत मिलते ही हिस्ट्रीशीट खुलने से उसकी राह और भी कठिन हो गई है।
‘उमर अंसारी के ऊपर सात मुकदमे दर्ज’
  • इस कार्रवाई को लेकर गाज़ीपुर पुलिस अधीक्षक डॉ ईरज राजा ने कहा कि उमर अंसारी के ऊपर सात मुकदमे दर्ज हैं, जो गाजीपुर समेत कई जनपदों में दर्ज हैं।
वाराणसी में वकील-पुलिस विवाद पर बैठक खत्‍म, मामले की होगी मजि‍स्‍ट्रि‍यल जांच, इन ब‍िंदुओं पर बनी सहमत‍ि

वाराणसी में वकील-पुलिस विवाद पर बैठक खत्‍म, मामले की होगी मजि‍स्‍ट्रि‍यल जांच, इन ब‍िंदुओं पर बनी सहमत‍ि

वाराणसी में वकील-पुलिस विवाद पर बैठक खत्‍म, मामले की होगी मजि‍स्‍ट्रि‍यल जांच, इन ब‍िंदुओं पर बनी सहमत‍ि
वाराणसी में वकील-पुलिस विवाद पर बैठक खत्‍म, मामले की होगी मजि‍स्‍ट्रि‍यल जांच, इन ब‍िंदुओं पर बनी सहमत‍ि

वाराणसी। वकीलों और पुल‍िस के बीच व‍िवाद और दोनों पक्षों की ओर से मुकदमा कायम कराने को लेकर ज‍िच को देखते हुए सामंजस्‍य बनाने के ल‍िए प्रशासन ने पहल की। इस बाबत पत्र जारी कर दोनों पक्षों के शीर्ष अध‍िकार‍ियों व पदाध‍िकार‍ियों को शाम चार बजे बैठक में बुलाया गया।

इस बाबत पत्र में दोनों पक्षों को व‍िषय से भी अवगत कराते हुए पत्र में पूर्व में सीएम और संबंध‍ित जनों को अवगत कराने की भी सूचना दी गई थी। वहीं वकील-पुलिस विवाद पर सेंट्रल व बनारस बार एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक बाद पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने भी पूरे बैठक के फैसले से अवगत कराया। के पत्र का अवलोकन करें।

पत्र में उल्लेख किया गया था कि विगत दिनों अधिवक्ता और पुलिस के बीच उत्पन्न विवाद के संबंध में विचार-विमर्श किया जाएगा। इस संदर्भ में आज, 21 सितंबर 2025 को अपराह्न 4:00 बजे सर्किट हाउस सभागार वाराणसी में एक सामंजस्य बैठक का आयोजन किया गया है। इस बैठक में अधिवक्ता और पुलिस प्रशासन के बीच संवाद स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।अधिवक्तागण के सभी संबंधित सदस्यों से अनुरोध किया गया है कि वे इस बैठक में उपस्थित होकर अपनी राय प्रस्तुत करें। इस संदर्भ में राज्य विधिज्ञ परिषद उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को भी बैठक में प्रतिभाग करने के लिए आमंत्रित किया गया है। इसके अलावा, पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट वाराणसी को भी पत्र भेजकर बैठक में शामिल होने का अनुरोध किया गया था।

वाराणसी में वकील-पुलिस विवाद पर बैठक खत्‍म, मामले की होगी मजि‍स्‍ट्रि‍यल जांच, इन ब‍िंदुओं पर बनी सहमत‍ि
वाराणसी में वकील-पुलिस विवाद पर बैठक खत्‍म, मामले की होगी मजि‍स्‍ट्रि‍यल जांच, इन ब‍िंदुओं पर बनी सहमत‍ि

जिला मजिस्ट्रेट वाराणसी से भी अपेक्षा की गई थी कि वे इस महत्वपूर्ण बैठक में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं। यह बैठक अधिवक्ता और पुलिस के बीच उत्पन्न तनाव को कम करने और आपसी समझ को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इस प्रकार की बैठकें न केवल विवादों को सुलझाने में सहायक होती हैं, बल्कि यह भी सुनिश्चित करती हैं कि कानून और व्यवस्था बनाए रखने में सभी पक्षों की भागीदारी हो। वाराणसी में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए सभी संबंधित पक्षों का सहयोग आवश्यक है।

इस पत्र के माध्यम से जिला प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि वे अधिवक्ताओं और पुलिस के बीच सामंजस्य स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह बैठक इस दिशा में एक सकारात्मक पहल है, जिससे वाराणसी में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा सकेगा। इस प्रकार, सभी अधिवक्ताओं और पुलिस अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे इस बैठक में सक्रिय रूप से भाग लें और अपने विचार साझा करें, ताकि एक बेहतर और सुरक्षित वातावरण का निर्माण किया जा सके।