फर्जी पत्नी ने युवक को मृत बताकर कर दिया कांड, शक होने पर बीमा कंपनी पहुंची गांव; एक फोन से खुल गया पूरा राज ?
फिरोजपुर।
बैंक से एक लाख का लोन दिलाने का झांसा देकर युवक के दस्तावेज हथियाने के बाद एक गिरोह के सदस्यों ने युवक की एक करोड़ रुपये की बीमा पालिसियां करवा दीं।
एक महिला को युवक की पत्नी बता तथा युवक को मृत घोषित कर बीमा क्लेम के लिए आवेदन भी कर दिया। मामला उस समय उजागर हुआ जब बीमा क्लेम के लिए कंपनी ने संबंधित गांव के सरपंच से संपर्क किया।
सरपंच ने युवक के मामा से जब उसकी मौत के बारे में पूछा तो पता चला कि वह तो जीवित है। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर पांच लोगों की तलाश शुरू कर दी है। आरोपितों में एक दंपती भी है। पीड़ित 20 वर्षीय विशाल ने बताया कि पांच साल पहले वह मोगा जिले के गांव कोट करोड़ कलां में परिवार के साथ रहता था। छह माह से वह फिरोजपुर के फरीदकोट रोड़ स्थित गांव नवां पूर्वा में रह रहा है।
उसकी पड़ोसी एक महिला ने उसे व उसकी मां को एक लाख रुपये का नान रिफंडेबल लोन करवाने का झांसा दिया। उसकी बातों में आकर उसने उसे अपने दस्तावेज दे दिए। उक्त महिला ने उसे फिरोजपुर स्थित एक निजी बैंक में लोन के लिए केवाइसी संबंधी बुलाया। वहां उसके फिंगर प्रिंट व आई स्कैन किया गया, लेकिन काफी दिन बाद भी उन्हें लोन का पैसा नहीं मिला।
विशाल ने बताया कि
आठ सितंबर को उसके मामा को गांव कोट करोड़ कलां के सरपंच ने फोन किया और उनसे उसकी मौत कैसे हुई के बारे में पूछा। उसके मामा ने जब बताया कि वह तो जीवित है। सरपंच ने बताया कि उनके पास तो एक बीमा कंपनी के लोग आए थे और विशाल की मौत के कारण जानने आए थे।
फर्जी पत्नी ने युवक को मृत बताकर कर दिया कांड, शक होने पर बीमा कंपनी पहुंची गांव; एक फोन से खुल गया पूरा राज ?
यह सुनकर उसके मामा ने बाद में उसे पूरी बात बताई।विशाल ने बताया कि उसने अपने स्तर पर जांच शुरू की तो उसने डरोली भाई के पीएचसी की ओर से तैयार उसका डेथ सर्टिफिकेट, अस्थि प्रवाह स्लिप व संजना नामक महिला की ओर से स्वास्थ्य विभाग को दिया गया स्व घोषणापत्र भी प्राप्त किया, जिसमें संजना ने खुद को विशाल की पत्नी बताया था।
यही नहीं उसके आधार कार्ड पर फोटो भी किसी अन्य का लगा हुआ था। स्व घोषणा पत्र में मौत का कारण सीने में दर्द बताया विशाल ने बताया कि संजना ने सेहत विभाग को जो स्वघोषणा पत्र दिया था उसमें बताया था कि 28 जुलाई 2025 को उसके पति विशाल के सीने में दर्द हुआ, जिसके चलते वह उसे मोगा के एक प्राइवेट अस्पताल में लेकर जा रही थी कि रास्ते में दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई। ऐसे में उसके पति की मौत का सर्टिफिकेट जारी किया जाए।
जांच के दिए गए हैं आदेश
सिविल सर्जन जिला मोगा के सिविल सर्जन डा. प्रदीप कुमार ने डरौली भाई स्वास्थ्य केंद्र में तैनात कार्यकारी एसएमओ की ओर से उक्त मामला उनके संज्ञान में लाया गया है। एक युवक का फर्जी डेथ सर्टिफिकेट जारी करवाया गया है जिस पर कार्रवाई संबंधी उनकी ओर से संबंधित पुलिस थाने में शिकायत दी गई है। जांच के बाद में जो भी तथ्य सामने आएंगे, जो भी आरोपित पाए जाएंगे उन पर बनती कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आरोपितों की तलाश के लिए टीमें की गठित
एसएसपी फिरोजपुर के एसएसपी भूपिंद्र सिंह सिद्धू ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपितों की धरपकड़ के लिए टीमें बनाई गई हैं, जोकि छापेमारी कर रही हैं। आरोपितों को जल्द काबू कर लिया जाएगा।
चांदी के गहनें और 20 लाख नकद जब्त: लखनपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई
आगरा के दो युवक पुलिस हिरासत में; क्रेटा कार से 40 किलो चांदी और कैश बरामद भरतपुर। जिला पुलिस अधीक्षक भरतपुर दिगंत आनंद के निर्देशानुसार चलाए गए विशेष अभियान के तहत लखनपुर पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। नाकाबंदी के दौरान यूपी नम्बर की एक क्रेटा कार से भारी मात्रा में संदिग्ध चांदी के जेवरात और नकद राशि जब्त की गई है। मुखबिर की सूचना पर पुलिस चौकी इंचार्ज एएसआई एदल सिंह के नेतृत्व में लगाए गए जाप्ते ने क्रेटा कार को रुकवाकर तलाशी ली। कार के भीतर से लगभग 40.296 किलोग्राम चांदी के जेवरात (बिछिया और चैन) तथा 20 लाख रुपये नकद से भरा एक कपड़े का बैग मिला।
चांदी के गहनें और 20 लाख नकद जब्त: लखनपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई
कार में सवार आगरा उत्तर प्रदेश निवासी दो व्यक्तियों रचित जैन (26) और नितिन शर्मा (18) से जब पुलिस ने इतनी बड़ी मात्रा में चांदी और नकद राशि के संबंध में वैध बिल या दस्तावेज मांगे तो वे कोई भी प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाए। संदिग्ध पाए जाने पर पुलिस ने तत्काल जेवरात और नकदी को जब्त कर लिया। दोनों युवकों को पुलिस हिरासत में लेकर गहनता से पूछताछ की जा रही है कि यह संदिग्ध खेप कहाँ से लाई जा रही थी और किसे देने जा रहे थे। थानाधिकारी महावीर प्रसाद के नेतृत्व में पुलिस टीम इस मामले की तह तक जाने का
झारखंड: फर्जी ट्रेडिंग ऐप से करोड़ों के ऑनलाइन फ्रॉड का खुलासा, देवघर से पकड़ा गया आरोपी
रांची । झारखंड के अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) की साइबर क्राइम सेल ने एक सनसनीखेज ऑनलाइन फ्रॉड का खुलासा किया है। आरोपी की पहचान यशवर्धन कुमार के रूप में हुई है, जो मूल रूप से बिहार के गयाजी का रहने वाला है और इन दिनों देवघर में रह रहा था। उसके खिलाफ देश के कई राज्यों में एफआईआर दर्ज है। पुलिस ने उसके पास से एक मोबाइल फोन, दो सिम कार्ड, ठगी से जुड़ी चैट और बैंक खाता विवरण बरामद किया है। मामले का खुलासा तब हुआ जब एक पीड़ित की शिकायत पर 23 अगस्त 2025 को एफआईआर दर्ज करने के बाद सीआईडी ने तकनीकी पहलुओं की जांच शुरू की। आरोपी ने पीड़ित को व्हाट्सऐप चैट पर कैंटीलोन नामक ट्रेडिंग ऐप में निवेश करने का लालच दिया गया। ऐप पर नकली प्रॉफिट दिखाकर पीड़ित को यकीन दिलाया गया कि उसे मोटा रिटर्न मिलेगा।
झारखंड: फर्जी ट्रेडिंग ऐप से करोड़ों के ऑनलाइन फ्रॉड का खुलासा, देवघर से पकड़ा गया आरोपी
इस झांसे में आकर उसने करीब 44 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। गृह मंत्रालय के नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज जानकारी के मुताबिक, आरोपी के बैंक खाते में झांसा देकर ऑनलाइन रकम ट्रांसफर कराने की 46 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। इनमें तेलंगाना (04), उत्तराखंड (01), झारखंड (01), छत्तीसगढ़ (02), पश्चिम बंगाल (01), तमिलनाडु (04), राजस्थान (01), मध्य प्रदेश (01), महाराष्ट्र (04), कर्नाटक (08), केरल (01), हिमाचल प्रदेश (01), गुजरात (06), दिल्ली (02), बिहार (02), आंध्र प्रदेश (02) और उत्तर प्रदेश (05) की शिकायतें शामिल हैं। सीआईडी का कहना है कि गिरफ्तार युवक महज इस नेटवर्क की एक कड़ी है। पुलिस उससे लगातार पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इसके पीछे कौन-सा गैंग सक्रिय है।
दिल्ली के मंगोलपुरी में छात्र की पीट-पीटकर हत्या, 7 नाबालिग आरोपी हिरासत में लिए गए
नई दिल्ली । दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके में अन्य नाबालिगों के साथ हुई झड़प में एक नाबालिग की मौत के बाद दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में 7 छात्रों को हिरासत में भी लिया गया है। इस मामले में पुलिस अधिकारियों ने कहा कि छात्र का शुक्रवार सुबह आरोपी से झगड़ा हुआ था। बाद में आरोपी ने कुछ लड़कों के साथ मिलकर उसकी पिटाई की थी। बाहरी दिल्ली के डीसीपी ने पुष्टि की है कि मामले में 7 नाबालिगों को हिरासत में लिया गया है। इस बीच, एक अन्य मामले में दिल्ली पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उन्होंने कथित तौर पर ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी के साथ मारपीट की थी।
दिल्ली के मंगोलपुरी में छात्र की पीट-पीटकर हत्या, 7 नाबालिग आरोपी हिरासत में लिए गए
दिल्ली पुलिस के अनुसार, तिमारपुर थाना क्षेत्र में आरोपी स्कूटी पर जा रहे थे। उन्होंने यातायात नियमों का उल्लंघन किया। इस पर ट्रैफिक पुलिस के एसआई सूरज पाल रुकने का इशारा किया, लेकिन वे आरोपी सिग्नेचर ब्रिज की ओर भाग निकले। इसके बाद, पीछा करके एक पुलिसकर्मी ने उन्हें रोक लिया। आरोप है कि अपराधियों ने मिलकर अकेले पुलिसकर्मी के साथ मारपीट की। मामले में तुरंत एक्शन लेते हुए सीसीटीवी की मदद से पुलिस ने 4 आरोपियों की पहचान की। बाद में इन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। फिलहाल, पुलिस आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है।
दिल्ली में वाहनों का घटा घनत्व,बढ़ा मेट्रो पर भरोसा,सड़क हादसों में भी आई कमी
नई दिल्ली।राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वाहनों की संख्या का दबाव घटा है।प्रति हजार आबादी पर वाहनों की संख्या 2015-16 में 530 थी,जो 2023-24 में घटकर 373 रह गई। इस अवधि में सड़क हादसों में भी कमी आई है। 2015 में 8,085 सड़क हादसे हुए थे। वहीं 2022 में इनकी संख्या घटकर 5,560 रह गई।यह जानकारी हाल ही में निदेशालय आर्थिक एवं सांख्यिकी की ओर से जारी दिल्ली स्टेट फ्रेमवर्क इंडिकेटर रिपोर्ट में सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) और क्लस्टर बसों की संख्या 2015-16 के 5,842 से बढ़कर 2023-24 में 7,485 हो गई है। हालांकि इन बसों में रोजाना सफर करने वाले यात्रियों की औसत संख्या 46 लाख से घटकर 42 लाख रह गई।रिपोर्ट बताती है
दिल्ली में वाहनों का घटा घनत्व,बढ़ा मेट्रो पर भरोसा,सड़क हादसों में भी आई कमी
कि मेट्रो में यात्रियों का भरोसा लगातार बढ़ा है।2015-16 में जहां औसतन 26 लाख यात्री रोजाना मेट्रो से सफर करते थे। वहीं 2023-24 में यह संख्या बढ़कर 58 लाख तक पहुंच गई। दिल्ली की आबादी में सार्वजनिक परिवहन तक पहुंच भी उतार-चढ़ाव भरी रही।सड़क सुरक्षा के लिहाज से भी तस्वीर पहले से बेहतर हुई है।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक 2015 में सड़क हादसों में मरने या घायल होने वालों की संख्या 9,880 थी,जो 2021 में घटकर 5,228 रह गई। हालांकि 2022 में इसमें हल्की बढ़ोतरी हुई और यह संख्या 6,174 तक पहुंच गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2030 तक सरकार का लक्ष्य है कि हर व्यक्ति को सुरक्षित, किफायती, सुलभ और टिकाऊ परिवहन प्रणाली उपलब्ध कराई जाए।
मासूम बेटे को मारने के लिए मुंह में ठूंस दिए पत्थर, ऊपर से डाल दिया फेविक्विक, देखकर सन्न रह गए लोग
भीलवाड़ा.
जिले के बिजोलिया क्षेत्र के सीताकुंड जंगल में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. यहां एक कलयुगी मां ने 15-20 दिन के मासूम शिशु को मौत के घाट उतारने की कोशिश की. जानकारी के अनुसार, महिला मासूम को जंगल में लेकर आई और उसके मुंह में पत्थर ठूंसकर उसके मुंह को फेविक्विक से चिपकाकर मारने की कोशिश की. इसके बाद वह शिशु को सेंड स्टोन के पत्थरों के बीच फेंक कर फरार हो गई. घटना का खुलासा उस समय हुआ जब बकरियां चराने गए कुछ ग्वालों ने पत्थरों के ढेर के पास से मासूम की कराहने की आवाज सुनी.
ग्रामीणों ने तुरंत पत्थरों को हटाया और देखा कि
शिशु का मुंह पत्थर और फेविक्विक से भरा हुआ था. गर्म पत्थरों के कारण उसका शरीर झुलस चुका था, यह दृश्य देख ग्रामीण स्तब्ध रह गए. चरवाहों ने तुरंत बच्चे को बाहर निकाला और पुलिस व प्रशासन को सूचना दी. बिजोलिया पुलिस मौके पर पहुंची और मासूम को तुरंत बिजोलिया अस्पताल ले जाया गया, चिकित्सकों के अनुसार मासूम का मुंह व शरीर बुरी तरह झुलसा हुआ है और उसका इलाज जारी है.
मासूम बेटे को मारने के लिए मुंह में ठूंस दिए पत्थर, ऊपर से डाल दिया फेविक्विक, देखकर सन्न रह गए लोग
ग्रामीणों ने बताया कि यह घटना समाज को झकझोर देने वाली है, उन्होंने पुलिस से दोषी महिला को जल्द गिरफ्तार करने और कड़ी सजा दिलाने की मांग की. वहीं पुलिस ने भी घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि मासूम की जान बचाने में ग्वालों ने किसी देवदूत की तरह काम किया. अगर समय पर आवाज सुनकर बच्चे को बाहर न निकाला जाता, तो उसकी जान जाना तय था.
फिलहाल बच्चा अस्पताल में भर्ती हैऔर पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है. यह घटना न केवल एक मासूम के जीवन से खिलवाड़ है बल्कि समाज के लिए भी चेतावनी है कि मानवीय संवेदनाएं किस कदर खत्म हो रही हैं. प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि ऐसे मामलों में तुरंत पुलिस को सूचित करें ताकि मासूमों की जान बचाई जा सके.
गोमती नदी में मिला युवक का शव, गुरुवार को दर्ज हुई थी गुमशुदगी
जौनपुर में गोमती नदी में कूदने वाले 22 वर्षीय नमन सोनकर का शव कई घंटों की तलाश के बाद केराकत क्षेत्र से बरामद किया गया है। नगर कोतवाली थाना क्षेत्र के सुक्खीपुर निवासी नमन ने नदी में छलांग लगाई थी, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई थी।
सूत्रों के अनुसार, नमन बीते कई दिनों से अपने घरवालों से नाराज़ चल रहा था। घटना की रात उसने परिजनों को फोन कर मौके पर बुलाया था, लेकिन उनके पहुंचने से पहले ही उसने नदी में छलांग लगा दी।
परिजनों के शोर मचाने के बाद तत्काल पुलिस और गोताखोरों की टीम ने नदी में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। लगातार कई घंटों की तलाशी के बाद शुक्रवार सुबह युवक का शव केराकत इलाके में मिला।घटना की जानकारी मिलते ही परिवार में मातम छा गया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आगे की आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
जौनपुर। केराकत तहसील क्षेत्र के सिहौली गांव निवासी 20 वर्षीय युवक अतुल कुमार पुत्र रामसूरत कुमार का शव शुक्रवार को गोमती नदी में बरामद हुआ। शव मिलने की खबर फैलते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई, वहीं परिजनों में कोहराम मच गया।जानकारी के अनुसार, अतुल कुमार गुरुवार की सुबह घर से निकला था लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटा। काफी खोजबीन के बावजूद जब कोई सुराग नहीं लगा, तो पिता रामसूरत कुमार ने केराकत कोतवाली में गुमशुदगी की तहरीर दी। पुलिस ने मामला दर्ज कर युवक की तलाश शुरू कर दी थी।
गोमती नदी में मिला युवक का शव, गुरुवार को दर्ज हुई थी गुमशुदगी
शुक्रवार दोपहर उदयचंदपुर गांव के समीप एक नाविक ने गोमती नदी में तैरता हुआ शव देखा, जिसके बाद उसने तत्काल इसकी सूचना पुलिस और ग्रामीणों को दी। सूचना पाकर पहुंची पुलिस टीम ने शव को बाहर निकलवाया। मौके पर पहुंचे परिजनों ने शव की पहचान अतुल कुमार के रूप में की।
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरते हुए पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। प्रथम दृष्टया मौत के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की वजह स्पष्ट हो सकेगी।
सीओ केराकत अजीत रजक ने बताया कि मामला संज्ञान में है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है। मृतक अतुल कुमार अपने दो भाइयों और एक बहन में सबसे छोटा था। उसकी असामयिक मृत्यु से गांव में शोक की लहर फैल गई है। परिजन सदमे में हैं और रो-रोकर बेहाल हैं।
पिलखुवा (हापुड़) दुष्कर्म मामला ग्राम प्रधान सहित तीन आरोपियों की गिरफ्तारी, परिजनों का पुलिस पर आरोप
हापुड़ जनपद के पिलखुवा कोतवाली क्षेत्र से एक गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है,
जिसमें एक युवती ने गांव के ही ग्राम प्रधान और दो अन्य ग्रामीणों पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया है। यह घटना उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा को लेकर पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर से सवाल खड़ा करती है। पीड़िता का आरोप है कि बीते माह उक्त तीनों व्यक्तियों ने उसका अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म किया। युवती और उसके परिवार ने इस घटना को लेकर पुलिस से न्याय की गुहार लगाई है, लेकिन प्रारंभिक तौर पर पुलिस की निष्क्रियता और कथित मिलीभगत के आरोप भी सामने आए हैं। शनिवार को पीड़िता अपने परिजनों के साथ कोतवाली पहुंची और वहां जमकर हंगामा किया। उन्होंने पुलिस पर आरोप लगाया कि वह आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रही है। प्रदर्शन के दौरान पीड़िता ने चेतावनी दी कि यदि उसे न्याय नहीं मिला तो वह आत्महत्या जैसा कदम उठाने को मजबूर होगी।
इस प्रदर्शन और बढ़ते दबाव के चलते आखिरकार शाम तक पुलिस ने ग्राम प्रधान अतुल शिशोदिया, सुमित और ललित नामक आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। तीनों के विरुद्ध पहले से ही मामला दर्ज किया जा चुका था, लेकिन गिरफ्तारी में देरी को लेकर पीड़िता और उसके परिजन नाराज थे। इस गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की और प्रदर्शनकारियों को समझा-बुझाकर शांत कराया। कोतवाली परिसर में हुई नारेबाजी और आक्रोश प्रदर्शन से यह स्पष्ट हो गया कि ग्रामीण जनमानस इस मामले में पुलिस की भूमिका से संतुष्ट नहीं है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्राधिकारी (सीओ) अनीता चौहान ने खुद इस प्रकरण में संज्ञान लिया और मीडिया से बातचीत में कहा कि आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले की जांच तेजी से की जा रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती जाएगी। सीओ ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच पूरी निष्पक्षता के साथ की जा रही है और पीड़िता को हरसंभव सुरक्षा और न्याय दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
इस घटना ने स्थानीय स्तर पर प्रशासन के प्रति अविश्वास की भावना को भी उजागर किया है।
जब किसी ग्राम प्रधान जैसे प्रभावशाली व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगते हैं, तो यह समाज के कमजोर वर्गों, खासकर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाता है। वहीं, पीड़िता द्वारा आत्महत्या की धमकी देना इस बात का संकेत है कि न्याय न मिलने की स्थिति में वह खुद को कितना असहाय महसूस कर रही थी। यह पूरी व्यवस्था के लिए एक चेतावनी है कि पीड़ितों की सुनवाई में देर या अनदेखी उन्हें मानसिक रूप से तोड़ सकती है।
एक ओर जहां समाज में महिला सशक्तिकरण की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर इस प्रकार की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि अभी भी जमीनी स्तर पर हालात बहुत खराब हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां सत्ता का केंद्रीकरण कुछ लोगों तक सीमित होता है, वहां पीड़ितों के लिए आवाज उठाना और भी कठिन हो जाता है। यदि पुलिस त्वरित कार्रवाई न करे और पीड़िता को न्याय दिलाने में लापरवाही बरते, तो यह न केवल उस व्यक्ति के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।
पिलखुवा (हापुड़) दुष्कर्म मामला ग्राम प्रधान सहित तीन आरोपियों की गिरफ्तारी, परिजनों का पुलिस पर आरोप
इस मामले में स्थानीय लोगों ने पुलिस के प्रति अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। ग्रामीणों का आरोप था कि यदि आरोपी आम व्यक्ति होते तो अब तक उन्हें सलाखों के पीछे डाला जा चुका होता, लेकिन प्रभावशाली ग्राम प्रधान होने के कारण उन्हें संरक्षण देने की कोशिश की गई। हालांकि पुलिस ने बाद में स्थिति को संभाल लिया और आरोपियों की गिरफ्तारी कर ली, लेकिन सवाल यह भी है कि गिरफ्तारी में देरी क्यों हुई? क्या पुलिस प्रशासन पर राजनीतिक या बाहरी दबाव था? या फिर इसे केवल लापरवाही माना जाए?
यह मामला सिर्फ एक युवती के साथ हुए अत्याचार का नहीं, बल्कि पूरे तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाला है। प्रशासन और पुलिस की जिम्मेदारी है कि वह पीड़ित को न्याय दिलाने में पारदर्शिता और तत्परता दिखाएं। इस केस में यदि पुलिस पहले ही गिरफ्तारी कर लेती और जांच तेज करती, तो शायद पीड़िता को आत्महत्या की धमकी देने जैसी बात न करनी पड़ती।
सीओ अनीता चौहान द्वारा दिए गए बयान से यह उम्मीद बंधती है कि आने वाले समय में मामले में निष्पक्ष जांच की जाएगी और आरोपियों को कानून के तहत सजा दिलाई जाएगी। यह भी आवश्यक है कि पीड़िता और उसके परिजनों को उचित सुरक्षा मुहैया कराई जाए, ताकि वह किसी भी प्रकार के दबाव में न आएं। इसके साथ ही महिला आयोग, मानवाधिकार आयोग और अन्य संबंधित संस्थाओं को भी इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए ताकि पीड़िता को त्वरित न्याय मिल सके।
समाज के लिए यह एक चेतावनी है कि जब तक महिलाएं खुद को सुरक्षित नहीं महसूस करेंगी, तब तक विकास और सशक्तिकरण के सभी दावे खोखले साबित होंगे। यह घटना कानून व्यवस्था और सामाजिक मूल्यों दोनों पर पुनर्विचार की आवश्यकता को रेखांकित करती है। सरकार और प्रशासन को चाहिए कि ऐसे मामलों में कठोर और त्वरित कार्रवाई करें ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस प्रकार की घटना का शिकार न हो।
निष्कर्ष
पिलखुवा की यह घटना उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा, पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली और सामाजिक चेतना—तीनों पर गहरे सवाल खड़े करती है। ग्राम प्रधान जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा इस प्रकार का कृत्य केवल कानून के उल्लंघन का नहीं, बल्कि सामाजिक नैतिकता का भी गंभीर अपमान है। हालांकि पुलिस द्वारा तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी कर ली गई है और जांच जारी है, लेकिन यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आगे की कार्रवाई कितनी प्रभावी और निष्पक्ष होती है। पीड़िता को न्याय मिले, यही पूरे समाज की प्राथमिकता होनी चाहिए।
पहले वीजा फिर फार्मा टैरिफ बने ट्रंप के हथियार, शेयर बाजार ने 5 दिन में गंवाए 16 लाख करोड़
जब ये हफ्ता शुरू हुआ था,
तब देश और शेयर बाजार निवेशकों के सामने दो बड़ी खबरें थी. पहली जीएसटी रेट कट का लागू होगा. दूसरा ट्रंप की ओर से एच1बी वीजा शुल्क में बढ़ोतरी. लेकिन निवेशकों का सेंटीमेंट बुरी खबर की ओर झुक गया. जिसकी वजह से शेयर बाजार में एक बार फिर से गिरावट का दौर शुरू हो गया. लगातार गिरावट आने की वजह से उम्मीद थी कि शुक्रवार को एक्सपायरी के बाद सेंसेक्स और निफ्टी हरे निशान पर दिखाई देगा.
लेकिन उससे पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक और बम फोड़ दिया. ट्रंप ने फार्मा इंपोर्ट पर 100 फीसदी का टैरिफ लगाया. जिसकी वजह से देश के सभी फार्मा स्टॉक्स क्रैश कर गए. आपको जानकर हैरानी होगी कि इस हफ्ते में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही 2.75 फीसदी तक गिर चुके हैं. जिसकी वजह से शेयर बाजार निवेशकों को 16 लाख करोड़ रुपए तक का नुकसान हो चुका है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर शेयर बाजार के आंकड़े किस तरह की कहानी बयां कर रहे हैं.
शेयर बाजार में गिरावट की कहानी सोमवार से शुरू हुई थी.
किसी को भी अंदेशा नहीं था कि जीएसटी रिफार्म लागू होने वाले दिन में सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान पर आ जाएंगे. लेकिन ऐसा हुआ. वीजा हाइक की वजह से निवेशकों में पैनिक फैला और मुनाफावसूली शुरू हो गई. लगातार इस हफ्ते चार दिनों की मुनाफावूसली के बाद अनुमान से था
कि शुक्रवार को शेयर बाजार में निवेशक एक बार फिर से पॉजिटिव तरीके शुरूआत करेंगे. लेकिन ट्रंप ने अपना दूसरा हथियार चल दिया और फार्मा इंपोर्ट पर 100 फीसदी का टैरिफ लगा दिया. जिसकी वजह से शेयर बाजार में बाकी दिनों के मुकाबले और भी गिरावट देखने को मिली.
पहले वीजा फिर फार्मा टैरिफ बने ट्रंप के हथियार, शेयर बाजार ने 5 दिन में गंवाए 16 लाख करोड़
आंकड़ों के अनुसार बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 19 सितंबर को 82,626.23 अंकों पर बंद हुआ था. जबकि शुक्रवार को सेंसेकस 80,332.41 अंकों के साथ दिन के लोअर लेवल पर आ गया. इसका मतलब है कि इस हफ्ते में सेंसेक्स में 2,293.82 अंकों तक की गिरावट देखने को मिल चुकी है. सेंसेक्स से निवेशकों को अब तक 2.78 फीसदी का नुकसान हो चुका है. अगर बात शुक्रवार की बात करें तो सेंसेक्स में 827.27 अंकों की गिरावट देखने को मिल चुकी है. दोपहर 3 बजकर 10 मिनट पर सेंसेक्स 759.51 अंकों की गिरावट के साथ 80,399.80 अंकों पर कारोबार कर रहा है.
वहीं दूसरी ओर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में भी बड़ी गिरावट देखने को मिल चुकी है.
एनएसई के प्रमुख सूचकांक निफ्टी 19 सितंबर को 25,327.05 अंकों के साथ बंद हुआ था. उसके बाद शुक्रवार को 24,629.45 अंकों के साथ दिन के लोअर लेवल पर आ गया. इसका मतलब है कि निफ्टी में इस हफ्ते अब तक 697.55 अंक यानी 2.75 फीसदी की गिरावट आ चुकी है. दोपहर 3 बजकर 3 बजकर 10 मिनट पर निफ्टी 243 अंकों की गिरावट के साथ 24,650.65 अंकों पर कारोबार कर रहा है.
निवेशकों को मोटा नुकसान
अगर बात निवेशकों की करें तो इस हफ्ते में मोटा नुकसान हो चुका है. निवेशकों का नुकसान और फायदा बीएसई के मार्केट कैप पर डिपेंड करता है. बीएसई के आंकड़ों के अनुसार 19 सितंबर को बीएसई का मार्केट कैप 4,66,32,723.37 करोड़ रुपए था. वहीं मौजूदा कारोबारी सत्र के दौरान बीएसई का मार्केट कैप 4,50,14,095.99 करोड़ रुपए पर आ गया. इसका मतलब है कि इस हफ्ते निवेशकों को 16.18 लाख करोड़ रुपए तक का नुकसान हो चुका है. अगर बात शुक्रवार की करें तो बीएसई के मार्केट कैप में 7.22 लाख करोड़ रुपए तक की गिरावट देखने को मिल चुकी है.
महापंचायत के बाद जाति पूछकर भेजा था जेल! मेरठ में गुर्जर नेताओं का बिरादरी ने फूल- मालाओं से किया स्वागत
मेरठ: मेरठ की जेल में 21 सितंबर को महापंचायत में पुलिस पर पथराव हुआ।
इसके बाद गुर्जर समाज के 22 नेताओं को जेल भेज दिया गया। शुक्रवार देर रात 11 नेताओं को जमानत मिल गई। दादरी में बिना अनुमति आयोजित पंचायत को लेकर गिरफ्तार हुए इन नेताओं की रिहाई के बाद गुर्जर समाज के लोग बड़ी संख्या में जमा हुए और फूल मालाओं से उनका स्वागत किया। जेल से बाहर आते ही युवको नें पुलिस पर आरोप लगाया कि उन्होंने जाति पूछकर जेल भेजा था। युवकों के इस बयान के बाद अब राजनीति भी गर्माने लगी है।
शाम छह बजे से ही मेरठ जिला जेल परिसर के आसपास भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई थी। आरएएफ, ट्रैफिक पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। जेल जाने वाले रास्तों को करीब एक किलोमीटर दूर से सील कर दिया गया। देर रात्रि सबसे पहले तीन लोगों को रिहा किया गया और बीस मिनट बाद बाकी आठ लोग बाहर आए। सभी को भाजपा जिला पंचायत सदस्य विपिन भडाना की गाड़ियों में बैठाकर ले जाया गया। जेल के बाहर मौजूद गुर्जर समाज के लोगों ने नारेबाजी करते हुए नेताओं का स्वागत किया।
22 में से 11 को ही क्यों मिली रिहाई?
विपिन भडाना ने बताया कि जमानत के लिए पहले एक ही जमानती की शर्त थी लेकिन बाद में नियम बदलकर एक अभियुक्त के लिए दो जमानती अनिवार्य कर दिए गए। इसी वजह से आधे लोगों की जमानत प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई। उन्होंने कहा कि बाकी अभियुक्तों की रिहाई भी जल्द होगी।
‘हम तो सामान लेने बाजार जा रहे थे, पुलिस ने पकड़ लिया’
जेल से बाहर आए अभियुक्त अतुल गुर्जर ने आरोप लगाया की पुलिस ने उन्हें जाति पूछकर गिरफ्तार किया। उन्होंने कहा कि उस दिन हम तो सामान लेने सकौती बाजार जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने नाम के साथ जाति पूछकर पकड़ लिया। रात भर थाने में रखा, फिर मेडिकल कराकर अगली सुबह कोर्ट में पेश कर दिया और जेल भेज दिया। मुंह पर कपड़ा बांधकर पथराव किसने किया हमें नहीं पता, लेकिन हमें जाति के नाम पर फंसाया गया।
जमानत के कानूनी आधार
अभियुक्तों की पैरवी करने वाले वकील ओमपाल सिंह ने कहा कि किसी भी अभियुक्त पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज नहीं था। सभी सम्मानित परिवार से हैं और पहली बार इस तरह के मामले में फंसे। एफआईआर देर से दर्ज की गई और उसमें स्पष्ट साक्ष्य नहीं हैं। न तो कोई चश्मदीद गवाह है और न ही किसी पर पत्थरबाजी से गंभीर चोट का आरोप साबित हुआ। धारा 144 के उल्लंघन का मामला जरूर बनाया गया, लेकिन यह जमानती धाराओं के तहत आता है। इसी आधार पर कोर्ट ने जमानत दी।
महापंचायत के बाद जाति पूछकर भेजा था जेल! मेरठ में गुर्जर नेताओं का बिरादरी ने फूल- मालाओं से किया स्वागत
बिरादरी के लोगों ने किया स्वागत
जैसे ही गुर्जर समाज के लोग जेल से बाहर निकले, चुंगी चौराहे पर उनका स्वागत किया गया। बड़ी संख्या में बिरादरी के लोग वहां पहले से मौजूद थे। फूल मालाओं से नेताओं का स्वागत हुआ और नारे लगाए गए गुर्जर सेना जिंदाबाद। वही भाजपा जिला पंचायत सदस्य विपिन भडाना ने इस मामले को विपक्ष की साजिश बताया। उन्होंने कहा कि पंचायत के विवाद को राजनीतिक रंग दिया गया और लोगों को जाति के नाम पर भड़काया गया।
राजनीतिक दलों में क्रेडिट लेने की मची होड़
गुर्जर नेताओं की रिहाई के बाद राजनीतिक दलों में इसे लेकर श्रेय लेने की होड़ मच गई है। सपा और आजाद समाज पार्टी सोशल मीडिया पर इन दलों के कार्यकर्ता इसे अपनी पार्टी की जीत बता रहे हैं। कई पोस्ट में प्रशासन को बैकफुट पर आने का दावा किया गया। वही रालोद बिजनौर सांसद चंदन चौहान जेल में बंद नेताओं से मिलने पहुंचे थे। इस मामले में लोनी से भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर और अन्य भाजपा नेताओं ने इसे सीएम योगी की पहल का नतीजा बताया। इससे पहले सपा विधायक अतुल प्रधान और मंत्री सोमेंद्र तोमर भी नेताओं से जेल में मुलाकात कर चुके थे। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस मसले पर मेरठ पुलिस और प्रशासन से बात की थी।
नंदकिशोर गुर्जर ने जताया सीएम योगी को आभार
लोनी सीट से भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने जमानत मिलने के बाद कहा कि यह सत्य की जीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि जेहादी तत्वों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की और निर्दोष लोगों को फंसाया। उन्होंने दावा किया कि समाज के लोगों की समस्या को उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने रखा, जिसके बाद निर्दोष रिहा हो सके।
अनुमति बगैर हुई थी महापंचायत
दौराला थाना क्षेत्र में आयोजित पंचायत प्रशासन से अनुमति लिए बिना हुई थी, क्योंकि इस क्षेत्र में धारा 144 लागू थी, जिसे तोड़ने का आरोप लगा था। वही महापंचायत में पुलिस पर पत्थरबाजी की घटना हुई, लेकिन पुलिस किसी को चिह्नित नहीं कर पाई।