उदयपुर : नीमच माता मंदिर के जीर्णोद्वार के लिए 50 लाख का बजट मंजूर, जल्द शुरू होंगे विकास कार्य
उदयपुर | शहर की आस्था का प्रमुख केंद्र और ‘उदयपुर की वैष्णोदेवी’ के नाम से प्रसिद्ध नीमच माता मंदिर जल्द ही नए रूप में नजर आएगा। पर्यटन विभाग ने मंदिर के जीर्णोद्वार और विकास कार्यों के लिए 49.42 लाख रुपए का बजट स्वीकृत किया है। यह राशि विभाग ने पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग को ट्रांसफर कर दी है, जिसके बाद मंदिर परिसर में कार्य जल्द शुरू होने की संभावना है। कहां खर्च होगा बजट? पर्यटन विभाग के अतिरिक्त निदेशक (विकास) आनंद कुमार त्रिपाठी द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, स्वीकृत राशि का उपयोग निम्न कार्यों में किया जाएगा— मंदिर के जीर्णोद्धार: 5.23 लाख रुपए, मंदिर की दीवार मरम्मत: 1.29 लाख रुपए, एमएस ग्रिल निर्माण: 2.99 लाख रुपए, मुख्य प्रवेश द्वार से नए फ्लोर और पाथवे निर्माण: 21.13 लाख रुपए, सीढ़ियों का जीर्णोद्धार: 14.43 लाख रुपए, टॉयलेट निर्माण/मरम्मत: 2.05 लाख रुपए, सीमेंट कुर्सियों की मरम्मत: 1.10 लाख रुपए। इन कार्यों के पूरा होने के बाद मंदिर मार्ग और परिसर दोनों ही अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और आकर्षक रूप में दिखाई देंगे। पहाड़ी मार्ग की खराब स्थिति और हादसे बने वजह
उदयपुर : नीमच माता मंदिर के जीर्णोद्वार के लिए 50 लाख का बजट मंजूर, जल्द शुरू होंगे विकास कार्य
नीमच माता मंदिर पहुंचने का मार्ग फतहसागर झील किनारे देवाली से होकर जाता है। पिछले कुछ वर्षों से पैदल मार्ग और पहाड़ी हिस्सों की हालत जर्जर हो रही थी।पिछले वर्ष पहाड़ी पर रेलिंग के पास फोटो खींचते समय दीवार गिरने से छह पर्यटक घायल हो गए थे। इस दुर्घटना के बाद मंदिर सेवक मयंक कुमावत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत और उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी को ज्ञापन देकर मंदिर की वास्तविक स्थिति से अवगत कराया था। इसके बाद देवस्थान विभाग ने जीर्णोद्धार के लिए विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर बजट में शामिल करवाया। आस्था का केंद्र, अब नए स्वरूप की ओर नीमच माता मंदिर उदयपुरवासियों की आस्था का एक प्रमुख केंद्र रहा है। नवरात्रों से लेकर रोज़मर्रा के दिनों तक यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। परिसर और मार्ग के बेहतर होने से श्रद्धालुओं की आवाजाही और सुरक्षा दोनों में सुधार होगा।
राजस्थान में सड़क सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का सख्त रुख
यह खबर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा सड़क सुरक्षा को लेकर उठाए गए सख्त और प्रभावी कदम से जुड़ी है। मुख्यमंत्री ने साफ संकेत दिया है कि अब राज्य सरकार सड़क सुरक्षा के मामले में किसी भी तरह की लापरवाही या ढिलाई बर्दाश्त नहीं करेगी। यह निर्णय न केवल सड़क हादसों को रोकने की दिशा में एक निर्णायक कदम है, बल्कि राज्य में ट्रैफिक अनुशासन को मजबूती से लागू करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने घोषणा की है कि शराब पीकर वाहन चलाने वालों के ड्राइविंग लाइसेंस तुरंत रद्द किए जाएंगे, जिससे ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई होगी जो अपने साथ-साथ दूसरों की जान को भी खतरे में डालते हैं। यह निर्णय दर्शाता है कि सरकार अब केवल चालान काटने या जुर्माना लगाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि लाइसेंस रद्द करने जैसे कठोर कदम भी उठाएगी ताकि लोग यातायात नियमों का उल्लंघन करने से पहले सौ बार सोचें।
साथ ही, ओवरस्पीडिंग करने वालों और बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के खिलाफ भी लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ओवरस्पीडिंग सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों में से एक है। अक्सर देखा जाता है कि लोग गति सीमा की अनदेखी करते हैं और सड़क पर अपनी जान के साथ-साथ दूसरों की जान भी जोखिम में डाल देते हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई न केवल अनुशासन स्थापित करेगी, बल्कि सड़क पर जिम्मेदार ड्राइविंग की संस्कृति को भी बढ़ावा देगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार की नीति यातायात नियम तोड़ने वालों के प्रति “जीरो टॉलरेंस” की होगी। यानी अब कोई भी व्यक्ति अपनी राजनीतिक पहुंच, पद या प्रभाव के बल पर नियमों से बच नहीं पाएगा। यह नीति कानून के समान पालन और न्यायिक दृष्टि से भी एक सशक्त कदम है। “जीरो टॉलरेंस” नीति का अर्थ है कि चाहे अपराधी कोई भी हो, सजा अवश्य मिलेगी। इस प्रकार की सख्त नीति अपनाने से आम जनता में कानून के प्रति विश्वास बढ़ेगा और लोग स्वेच्छा से नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित होंगे।
राज्य में कल से 15 दिवसीय सड़क सुरक्षा अभियान की शुरुआत हो रही है। इस अभियान में पुलिस, परिवहन विभाग और लोक निर्माण विभाग (PWD) मिलकर काम करेंगे। यह संयुक्त प्रयास राज्य में सड़क सुरक्षा को एक जनांदोलन का रूप देने का प्रयास है। अभियान के दौरान सड़क पर गश्त बढ़ाई जाएगी, नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की जाएगी, साथ ही आम नागरिकों को यातायात नियमों और सुरक्षित ड्राइविंग के महत्व के बारे में जागरूक किया जाएगा।
अभियान के तहत स्कूलों, कॉलेजों, परिवहन केंद्रों और सार्वजनिक स्थलों पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों की मदद से लोगों को समझाया जाएगा कि सड़क पर छोटी-छोटी लापरवाहियां कितनी बड़ी दुर्घटनाओं में बदल सकती हैं। हेलमेट और सीट बेल्ट पहनने, निर्धारित गति सीमा का पालन करने, और शराब पीकर वाहन न चलाने जैसे नियमों पर विशेष जोर दिया जाएगा।
यह कदम इसलिए भी प्रशंसनीय है क्योंकि राजस्थान में हाल के वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या चिंताजनक रूप से बढ़ी है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 1.5 लाख लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवाते हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा राजस्थान जैसे राज्यों का होता है। इन हादसों के पीछे मुख्य कारण हैं — ओवरस्पीडिंग, शराब पीकर वाहन चलाना, मोबाइल पर बात करते हुए ड्राइव करना और ट्रैफिक सिग्नलों की अनदेखी करना।मुख्यमंत्री का यह निर्णय इस समस्या की गंभीरता को समझते हुए लिया गया है। सड़क सुरक्षा केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। जब तक लोग स्वयं जागरूक नहीं होंगे, तब तक किसी भी अभियान की सफलता अधूरी रहेगी। इसलिए इस अभियान में जागरूकता को केंद्र में रखा गया है। सरकार यह संदेश देना चाहती है कि कानून का डर और जन-जागरूकता दोनों मिलकर ही सुरक्षित सड़कों का निर्माण कर सकते हैं।
राजस्थान में सड़क सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का सख्त रुख
इसके अलावा, सड़क सुरक्षा अभियान का एक और उद्देश्य यह भी है कि राज्य की सड़कों पर बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर और संकेत व्यवस्था विकसित की जाए। अक्सर हादसे इसलिए भी होते हैं क्योंकि सड़कों पर उचित संकेतक नहीं होते या सड़कें जर्जर हालत में होती हैं। इस अभियान में पीडब्ल्यूडी की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करेगी कि जहां सड़कें खराब हैं, वहां जल्द मरम्मत हो, और जहां संकेतक या लाइटिंग की कमी है, वहां तुरंत सुधार किया जाए।
इस पूरे अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसे कितनी गंभीरता और निरंतरता से लागू किया जाता है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का यह कदम न केवल एक प्रशासनिक निर्देश है, बल्कि यह एक नैतिक अपील भी है — कि हर नागरिक अपनी और दूसरों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार बने। यह पहल जनता और सरकार के बीच साझेदारी को मजबूत करेगी।
यदि यह नीति सख्ती से लागू होती है, तो राजस्थान निश्चित रूप से उन राज्यों में शामिल हो सकता है जहां सड़क हादसे न्यूनतम स्तर पर हों। सरकार का यह रुख एक उदाहरण बन सकता है कि कैसे ठोस नीतिगत फैसलों और जनजागरूकता के संयोजन से सामाजिक सुधार लाया जा सकता है।
अंततः, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की यह पहल न केवल सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में सुधार लाने का प्रयास है, बल्कि यह एक व्यापक सामाजिक सुधार का प्रतीक भी है। यह पहल दर्शाती है कि सरकार जनता की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। यदि जनता और प्रशासन मिलकर इस दिशा में काम करें, तो राजस्थान निश्चित रूप से एक “सुरक्षित यातायात वाला राज्य” बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।
इसलिए, यह कदम केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि एक सकारात्मक, दूरदर्शी और सराहनीय प्रयास है जो आने वाले समय में हजारों लोगों की जान बचाने में मदद कर सकता है।
मुंबई में खौफनाक वारदात, खाना नहीं लाने पर टैक्सी ड्राइवर की पीट-पीटकर हत्या
मुंबई । मुंबई के साकीनाका थाना क्षेत्र में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है, जो मामूली विवाद से शुरू होकर हत्या तक पहुंच गया। खाना नहीं लाने पर चार टैक्सी ड्राइवर ने अपने ही साथी की पीट-पीटकर हत्या कर दी। पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य तीन आरोपी फरार हैं। जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के रहने वाले पांच ड्राइवर मुंबई में रहकर टैक्सी चलाने का काम करते थे। सभी साकीनाका क्षेत्र में एक ही कमरे में किराए पर रहते थे और आपस में रिश्तेदार भी थे। रोजाना बारी-बारी से इनमें से कोई एक सभी के लिए खाना लाने का काम करता था। घटना वाले दिन जावेद खान (42) की बारी थी कि वह सबके लिए खाना लाए, लेकिन किसी वजह से वह खाना नहीं ला सका। इसी बात को लेकर उसके साथियों शबाज खान और उसके पिता व दोनों चाचा से कहासुनी हो गई। मामूली कहासुनी धीरे-धीरे झगड़े में बदल गई। गुस्से में आए आरोपियों में से एक ने कमरे में रखा डंडा उठाया और जावेद के सिर पर वार कर दिया। इसके बाद बाकी तीनों ने भी उसे बुरी तरह पीटना शुरू कर दिया।
मुंबई में खौफनाक वारदात, खाना नहीं लाने पर टैक्सी ड्राइवर की पीट-पीटकर हत्या
सिर पर गंभीर चोट लगने से जावेद खान की मौके पर ही मौत हो गई। वारदात के बाद चारों आरोपी अपनी-अपनी टैक्सियां लेकर फरार हो गए। आसपास के लोगों ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद साकीनाका पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेजा। इस घटना ने इलाके में सनसनी फैला दी है। पुलिस ने तेजी से जांच शुरू की और चार आरोपियों में से एक को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली हैं, जिनकी मदद से बाकी तीनों आरोपियों की तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि चारों आरोपी आपस में रिश्तेदार हैं और सभी प्रतापगढ़ के एक ही गांव के रहने वाले हैं।
डीएसटी और जलोदा जागीर पुलिस ने ₹50 लाख का 331 किलो अवैध डोडा चूरा जब्त किया, 2 तस्कर गिरफ्तार
जयपुर। प्रतापगढ़ पुलिस ने ऑपरेशन चक्रव्यूह के तहत एक बड़ी सफलता हासिल की है। जिला पुलिस अधीक्षक बी. आदित्य के निर्देशानुसार चलाए जा रहे इस अभियान के तहत डीएसटी और थाना जलोदा जागीर की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए 331 किलो 870 ग्राम अवैध डोडा चूरा जब्त किया है। जब्त किए गए डोडा चूरा की अनुमानित कीमत अंतर्राष्ट्रीय बाजार में लगभग 50 लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस ने परिवहन में प्रयुक्त एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को जब्त कर मौके से दो अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। एसपी आदित्य ने बताया कि रविवार को डीएसटी इन्चार्ज से मिली सटीक सूचना के आधार पर थानाधिकारी जलोदा जागीर मांगी लाल के नेतृत्व में टीम ने छोटीसादड़ी से साटोला जाने वाले मुख्य मार्ग सरहद देवली पर नाकाबंदी की। नाकाबंदी के दौरान एक ट्रैक्टर-ट्रॉली के चालक ने पुलिस को देखकर घबराहट में वाहन को वापस मोड़ने का प्रयास किया, जिससे पुलिस का संदेह गहरा गया।
डीएसटी और जलोदा जागीर पुलिस ने ₹50 लाख का 331 किलो अवैध डोडा चूरा जब्त किया, 2 तस्कर गिरफ्तार
तलाशी लेने पर ट्रॉली में सोयाबीन के भूसे के अन्दर छिपाकर रखे गए 17 काले-सफेद प्लास्टिक के कटटों में अवैध डोडा चूरा बरामद हुआ। पुलिस ने आरोपी भैयालाल आंजना पुत्र भागीरथ (27) और गोपाल शर्मा पुत्र रामलाल (42) निवासी साकरिया थाना रठांजना को तुरंत गिरफ्तार कर लिया। मामले में थाना जलोदा जागीर पर एनडीपीएस एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की विस्तृत जांच और अनुसंधान शुरू कर दिया गया है। यह बड़ी सफलता अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रतापगढ और सीओ छोटीसादड़ी गजेन्द्र सिंह राव के मार्गदर्शन में हासिल हुई। इस ऑपरेशन में थानाधिकारी मांगीलाल और डीएसटी इन्चार्ज एएसआई पन्ना लाल के नेतृत्व में जलोदा जागीर पुलिस और डीएसटी के समस्त जवानों की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पश्चिम बंगाल : होटल में छापेमारी कर नाबालिग सहित दो महिलाओं को तस्करी के जाल से मुक्त कराया गया, 5 गिरफ्तार
कोलकाता । कोलकाता पुलिस की एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) ने एक बड़े तस्करी रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस मामले में दो महिलाओं को मुक्त कराया गया, जबकि पांच की गिरफ्तारी हुई है। उल्टाडांगा थाना क्षेत्र के होटल मैजेस्टिक इन में 30 अक्टूबर को की गई छापेमारी में एक लगभग 15 वर्षीय नाबालिग लड़की और एक 24 वर्षीय वयस्क महिला को यौन शोषण के जाल से बचाया गया। पुलिस ने एक महिला तस्कर सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया, जबकि होटल को ताला लगाकर सील कर दिया गया। मामला बीएनएस और पोक्सो एक्ट की धारा, साथ ही अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम (आईएमटी) की धारा और 7 के तहत दर्ज किया गया है। सूचना के आधार पर दोपहर लगभग 4:50 बजे छापेमारी की गई। 2ई, गुरुदास दत्ता गार्डन लेन, कोलकाता-67 स्थित इस होटल के कमरा नंबर 303 से नाबालिग लड़की को और कमरा नंबर 302 से वयस्क महिला को मुक्त कराया गया। दोनों ही महिलाएं बाहरी राज्यों से तस्करी कर लाई गई थीं और जबरन वेश्यावृत्ति में धकेल दी गई थीं।
पश्चिम बंगाल : होटल में छापेमारी कर नाबालिग सहित दो महिलाओं को तस्करी के जाल से मुक्त कराया गया, 5 गिरफ्तार
छापे के दौरान एक महिला तस्कर (सीसीएल लड़की) को भी पकड़ा गया, जिसकी नाबालिग और वयस्क पीड़िता की तस्करी में प्रत्यक्ष भूमिका पाई गई। जब्त सामान में 5,000 रुपए के नकली नोट, निरोधक आदि शामिल हैं, जो अपराध की साजिश को उजागर करते हैं। गिरफ्तार आरोपियों में सुभ्रज्योति बिस्वास (44 वर्ष), कुशमंडी, उत्तर दिनाजपुर (वेश्यालय संचालक), हिमांशु सिंह (28 वर्ष), बिहार के गंगपुर सिसवास (वेश्यालय प्रबंधक), अरुण पात्रा (32 वर्ष), पूर्व मेदिनीपुर (चौकीदार के रूप में संलिप्त) और लाल्टू घटन (25 वर्ष), पूर्व मेदिनीपुर (सहयोगी) शामिल हैं। ये सभी बिहार और पूर्वी बंगाल के विभिन्न जिलों से जुड़े हैं, जो अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क का संकेत देते हैं। पुलिस ने होटल की अचल संपत्तियों की सूची तैयार की है, लेकिन अभी जब्ती नहीं की गई। जांच के दौरान होटल की चाबी जब्त कर ली गई और पूरा परिसर सील कर दिया गया।
पुलिस का क्रिमिनल एक्शन: लॉरेंस बिश्नोई गैंग के मास्टरमाइंड कपिल पंडित को भिवानी जेल से दबोचा
चूरू। पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े हार्डकोर क्रिमिनल कपिल कुमार शर्मा उर्फ कपिल पंडित को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी राजगढ़ कस्बे में शराब ठेके पर हुई फायरिंग की घटना के मास्टरमाइंड के तौर पर की गई है। आरोपी कपिल पंडित को भिवानी जेल से दस्तयाब किया गया, जहाँ वह पहले से किसी अन्य आपराधिक मामले में सजा काट रहा था।पुलिस अधीक्षक जय यादव ने बताया कि 09 अक्टूबर को राजगढ़ के सांखू फाटक स्थित एक शराब ठेके पर दहशत फैलाने और ठेके में हिस्सेदारी लेने के उद्देश्य से दो अज्ञात युवकों ने सेल्समैन पर फायरिंग की थी। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक किशोरीलाल और सहायक पुलिस अधीक्षक अभिजीत पाटिल के सुपरविजन में एक विशेष टीम गठित की गई। टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पहले फायरिंग की योजना में शामिल प्रवीण उर्फ खच्चर और धनराज उर्फ बाबू सहित एक अन्य सहयोगी को गिरफ्तार किया। इन मुल्जिमों से हुई गहन पूछताछ के बाद इस पूरे षड्यंत्र का मास्टरमाइंड सामने आया। वह था राजगढ़ का हार्डकोर क्रिमिनल कपिल कुमार शर्मा उर्फ कपिल पंडित (26)।
पुलिस का क्रिमिनल एक्शन: लॉरेंस बिश्नोई गैंग के मास्टरमाइंड कपिल पंडित को भिवानी जेल से दबोचा
पुलिस के खुलासे के अनुसार, कपिल पंडित पर हत्या, लूट, फिरौती, अपहरण जैसे दर्जनों संगीन आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। वह न केवल एक दुर्दांत अपराधी है, बल्कि गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और सम्पत नेहरा गैंग का मुख्य सदस्य भी है। पूछताछ में पता चला कि कपिल पंडित ने अपनी क्रिमिनल हिस्ट्री और लॉरेंस बिश्नोई गैंग का सदस्य होने का भय दिखाकर राजगढ़ के ठेकेदारों से हिस्सेदारी हथियाने के लिए यह फायरिंग करवाई थी। उसने भिवानी जेल में बंद रहे विकास उर्फ पोपट (निवासी लोहारू) के मार्फत अपने गुर्गों से सांखू फाटक पर इस घटना को अंजाम दिलाया था। इस खुलासे के बाद, चूरू पुलिस ने माननीय न्यायालय से वारंट प्राप्त किया और हार्डकोर मुल्जिम कपिल पंडित को जिला जेल भिवानी से गिरफ्तार कर लिया। आज शुक्रवार को आरोपी को कोर्ट में पेश कर पुलिस कस्टडी रिमांड हासिल किया गया है। पुलिस द्वारा इस मामले में अन्य सहयोगियों और गैंग की भूमिका की गहनता से जाँच की जा रही है।
लूट की योजना बनाते 5 गिरफ्तार, 4 लूट और डकैती वारदातों का खुलासा, 2 अवैध हथियार और बाइक जब्त
भरतपुर। जिला पुलिस अधीक्षक भरतपुर दिगंत आनन्द के निर्देशानुसार भरतपुर पुलिस ने संगठित अपराधों को अंजाम देने वाले एक शातिर गिरोह के पाँच सदस्यों को बापर्दा गिरफ्तार करने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक व सहायक पुलिस अधीक्षक वृत्त शहर पंकज यादव के मार्गदर्शन में थानाधिकारी मथुरागेट मदनलाल मीना और प्रभारी डीएसटी मुकेश कुमार के नेतृत्व में गठित संयुक्त पुलिस टीम ने यह प्रभावी कार्रवाई की। एसपी दिगंत आनंद ने बताया कि पुलिस टीम को कॉलेज ग्राउंड में कुछ युवकों के लूट या डकैती की योजना बनाने की गुप्त सूचना मिली थी। त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने मौके पर पहुंच घेर कर आरोपी जगत सिंह जाट (19), प्रशान्त जाट (21) निवासी गिरसै थाना सदर डीग, हरेन्द्र सिह जाट (20) निवासी पैधौर नगला खान थाना कुम्हेर, नितिन जाट (20) निवासी नैवाडा थाना हलैना व रोहित जाट (22) निवासी आनन्द नगर थाना कोतवाली सेवर को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के कब्जे से दो अवैध देशी कट्टे, तीन जिंदा कारतूस, एक खाली खोखा और दो मोटरसाइकिलें जब्त की गईं। आरोपियों के खिलाफ थाना मथुरागेट पर आर्म्स एक्ट सहित संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया गया है। गहन पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपियों ने भरतपुर शहर और डीग ज़िले की 4 लूट और डकैती वारदातों को अंजाम देना स्वीकार किया है।
लूट की योजना बनाते 5 गिरफ्तार, 4 लूट और डकैती वारदातों का खुलासा, 2 अवैध हथियार और बाइक जब्त
● 1 अक्टूबर को जवाहर नगर थाना मथुरागेट क्षेत्र में एक किराना व्यापारी को घर लौटते समय गोली मारकर लूट के प्रयास की वारदात। व्यापारी गोली से बाल-बाल बच गया था। ● डीग ज़िले के कुम्हेर थाना क्षेत्र में 20 अक्टूबर को किराना व्यापारी से लूट, 20-25 दिन पहले कुम्हेर अनाज मंडी के व्यापारी से सब्जी मंडी के पास लूट और कुम्हेर अनाज मंडी से व्यापारी का पीछा कर जोधपुर मिष्ठान भंडार के पास लूट। आरोपियों से पूछताछ में सामने आया कि वे जनाना हॉस्पिटल पार्किंग में काम करते थे। वहीं अपने साथियों को एकत्रित कर घटना की योजना बनाते थे और रैकी करते थे। वे अपनी पहचान छुपाने के लिए बिना नंबर की गाड़ियों का उपयोग करते थे और वारदात के बाद वापस पार्किंग में छिप जाते थे। इस महत्वपूर्ण सफलता को थानाधिकारी मथुरागेट मदनलाल मीना और प्रभारी डीएसटी मुकेश कुमार और उनकी टीम ने अंजाम दिया। आरोपियों से और अधिक वारदातों के खुलासे की पूर्ण संभावना है, जिस पर पुलिस गहन अनुसंधान कर रही है।
बारां पुलिस का बड़ा एक्शन: ढाबे पर फायरिंग कर जानलेवा हमला करने वाले 7 वांछित गिरफ्तार
बारां। बारां जिले के छीपाबड़ौद क्षेत्र में 6 दिन पहले एक ढाबे पर हुई फायरिंग की घटना के मामले में पुलिस ने देशी कट्टे से गोली मारने के आरोपी ठेका मेजर नेमीचन्द उर्फ भूरा गुर्जर को 6 साथियों सहित गिरफ्तार कर घटना में प्रयुक्त थार जब्त करने में सफलता हासिल की है। बारां पुलिस अधीक्षक अभिषेक अंदासु ने बताया कि यह घटना 24 अक्टूबर की रात करीब 09:00 बजे की है। फरियादी सरदार सिंह बंजारा निवासी बेवड़ी ने थाना छीपाबड़ौद पर रिपोर्ट दर्ज कराई कि वह और उसका छोटा भाई गुड्डू बंजारा अमलावदा रोड पर अपने ढाबे पर थे, तभी ठेके की मेजर गाड़ी से नेमीचंद उर्फ भूरा गुर्जर निवासी दांता का आया। सिगरेट मांगने के बाद नेमीचंद ने अपनी कमर से देशी कट्टा निकालकर उनके छोटे भाई गुड्डू बंजारा की दाहिनी भुजा पर जान से मारने की नीयत से गोली मार दी। घायल गुड्डू को तुरंत सीएचसी छीपाबड़ौद लाया गया। इस रिपोर्ट पर थाना छीपाबड़ौद पर प्रकरण दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया गया।
बारां पुलिस का बड़ा एक्शन: ढाबे पर फायरिंग कर जानलेवा हमला करने वाले 7 वांछित गिरफ्तार
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश चौधरी के निर्देशन और पुलिस उप अधीक्षक छबड़ा विकास कुमार के सुपरविजन और थानाधिकारी छीपाबड़ौद अजीत सिंह के नेतृत्व में एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया। टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गुरुवार 30 अक्टूबर को घटना में वांछित मुख्य आरोपी नेमीचंद उर्फ भूरा गुर्जर सहित कुल सात मुल्जिमों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में मुख्य शूटर नेमीचन्द उर्फ भूरा गुर्जर (33), रामप्रसाद गुर्जर (40) भवानी सिंह उर्फ बन्टी मीणा (39) और बनवारीलाल मीणा (46) निवासी मोठपुर, रोशन गुर्जर (28) व दुर्गेश गुर्जर (25) निवासी पाली और राय सिंह गुर्जर (25) निवासी मोहम्मदपुर हाल छीपाबड़ौद शामिल हैं। पुलिस ने घटना में प्रयुक्त ठेके की सफेद थार गाड़ी को ड्राईवर रामप्रसाद गुर्जर से जब्त किया है। पुलिस ने गिरफ्तार सभी मुल्जिमों को कोर्ट में पेश किया। मुख्य आरोपी नेमीचंद उर्फ भूरा और रोशन गुर्जर से घटना में प्रयुक्त अवैध देशी कट्टे की बरामदगी के संबंध में पूछताछ की जा रही है, जिसके लिए उन्हें पुलिस रिमांड पर लिया गया है। शेष 05 मुल्जिमों को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है।
मुंबई पुलिस ने एमवीए की रैली को नहीं दी अनुमति, वोटर लिस्ट का मुद्दा उठाने वाले थे
मुंबई । मुंबई पुलिस ने महाविकास अघाड़ी (एमवीए) की प्रस्तावित रैली को अनुमति देने से इनकार कर दिया है। यह रैली शनिवार दोपहर में मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आयोजित की जानी थी, जिसमें शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे, एनसीपी (शरद पवार) अध्यक्ष शरद पवार और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे शामिल होने वाले थे। पुलिस के मुताबिक, रैली के लिए कोई लिखित अनुमति नहीं दी गई है। अगर बिना अनुमति के मार्च या सभा निकाली गई, तो सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि शहर में सुरक्षा व्यवस्था, यातायात और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए यह फैसला किया गया है। हम नहीं चाहते हैं कि इस रैली की वजह से किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति पैदा हो। इसी को देखते हुए यह फैसला किया गया है। महाविकास अघाड़ी ने दावा किया था कि मुंबई और ठाणे की मतदाता सूची में हजारों नाम गायब हैं या फर्जी तरीके से जोड़े गए हैं।
मुंबई पुलिस ने एमवीए की रैली को नहीं दी अनुमति, वोटर लिस्ट का मुद्दा उठाने वाले थे
इसी मुद्दे पर ध्यान खींचने के लिए दोपहर दो बजे शिवाजी पार्क से आजाद मैदान तक पैदल मार्च निकालने की योजना थी। आयोजकों ने अनुमति के लिए आवेदन दिया था, लेकिन पुलिस ने इसे खारिज कर दिया। पुलिस के मुताबिक, रैली में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की आशंका थी, जिससे मुख्य सड़कों पर जाम और सुरक्षा जोखिम बढ़ सकता था। इसके अलावा, शहर में पहले से चल रहे निर्माण कार्य और अन्य कार्यक्रमों को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना मुश्किल होता। जानकारी के मुताबिक, शहर में आज सामान्य यातायात व्यवस्था बनी रहेगी और पुलिस ने संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त जवान तैनात कर दिए हैं। मतदाता सूची विवाद पर निर्वाचन आयोग भी जांच कर रहा है, जिसकी रिपोर्ट जल्द आने की उम्मीद है।
सीलमपुर गैंगवार : हाशिम बाबा गैंग सदस्य मिस्बाह की हत्या के दो आरोपी गिरफ्तार
नई दिल्ली । पूर्वी दिल्ली के सीलमपुर इलाके में गैंगवार के एक मामले में दिल्ली पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। हाशिम बाबा गैंग के सदस्य 22 वर्षीय मिस्बाह की हत्या के इस मामले में छेनू गैंग से जुड़े अब्दुल्ला और प्रिंस गाजी को पकड़ा गया। पुलिस का मानना है कि यह पुरानी दुश्मनी का नतीजा है। एक अन्य आरोपी रिजवान अभी फरार है। घटना 30 अक्टूबर की रात करीब 10:40 बजे सीलमपुर के जामा मस्जिद के पास हुई। मिस्बाह पर बाइक सवार हमलावरों ने ताबड़तोड़ फायरिंग की। उसे 15 गोलियां लगीं, जबकि कुल 22 से 25 राउंड गोली चली। घायल मिस्बाह को जग प्रसाद चंद्रा अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मिस्बाह के खिलाफ सात से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे, जिनमें हत्या, हत्या का प्रयास, लूट और आर्म्स एक्ट शामिल हैं। वह जाफराबाद का निवासी था।
सीलमपुर गैंगवार : हाशिम बाबा गैंग सदस्य मिस्बाह की हत्या के दो आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और मुखबिरों की मदद से जल्द ही आरोपी चिन्हित कर लिए। सीलमपुर थाने की टीम ने छेनू गैंग के सरगना छेनू के भतीजे अब्दुल्ला को गिरफ्तार किया। वहीं, स्पेशल सेल की टीम ने दूसरे आरोपी प्रिंस गाजी को पकड़ा। पूछताछ में दोनों ने कबूल किया कि यह हाशिम बाबा और छेनू गैंग के बीच लंबे समय से चली आ रही दुश्मनी का हिस्सा था। हाशिम बाबा गैंग लॉरेंस बिश्नोई के साथ जुड़ा हुआ है, जबकि छेनू गैंग का पुराना रंजिश कई सालों से चल रहा है। 2016 में कड़कड़डूमा कोर्ट में छेनू पर हमले का भी जिक्र आया है। फिलहाल, छेनू गैंग का एक और सदस्य रिजवान फरार है। वह छेनू का भाई है। पुलिस ने उसके ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी है। डीसीपी (उत्तर-पूर्व) के मुताबिक, हमलावरों के पास से हथियार बरामद हो सकते हैं। जांच में गैंगवार को रोकने के लिए सतर्कता बरती जा रही है। इलाके में अतिरिक्त फोर्स तैनात है। हाशिम बाबा गैंग जाफराबाद, सीलमपुर और आसपास के इलाकों में वसूली और संपत्ति हड़पने में सक्रिय है। छेनू गैंग भी इसी क्षेत्र में प्रभाव रखता है। पुलिस ने एमसीओसीए के तहत कार्रवाई की योजना बनाई है।