ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले में विधायक केसी वीरेंद्र गिरफ्तार, 12 करोड़ की नकदी और 6 करोड़ के गहने-गाड़ी जब्त
बेंगलुरु ।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अवैध ऑनलाइन और ऑफलाइन सट्टेबाजी के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए चित्रदुर्ग के विधायक केसी वीरेंद्र को गिरफ्तार कर लिया है। पिछले 24 घंटे में ईडी ने देशभर में लगभग 31 ठिकानों पर छापे मारे। इस दौरान, करीब 12 करोड़ रुपए की नकदी, 6 करोड़ रुपए के गहने और गाड़ियां जब्त की गईं।
ईडी ने शुक्रवार को ऑनलाइन और ऑफलाइन जुआ के मामले में चित्रदुर्ग के विधायक केसी वीरेंद्र और अन्य के खिलाफ छापेमार कार्रवाई शुरू की थी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), बेंगलुरु जोनल कार्यालय ने प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि 22 अगस्त और 23 अगस्त को गंगटोक, चित्रदुर्ग जिला, बेंगलुरु शहर, हुबली, जोधपुर, मुंबई और गोवा समेत देशभर में 31 स्थानों पर एक तलाशी अभियान चलाया गया।
जांच में सामने आया है कि आरोपी किंग-567 और राजा567 जैसी कई ऑनलाइन जुआ वेबसाइट चला रहे थे। इसके अलावा, आरोपी का भाई केसी थिप्पेस्वामी दुबई से 3 व्यावसायिक संस्थाओं का संचालन कर रहा है, जिनका नाम डायमंड सॉफ्टेक, टीआरएस टेक्नोलॉजीज और प्राइम9 टेक्नोलॉजीज है, जो केसी वीरेंद्र की कॉल सेंटर सेवाओं और गेमिंग व्यवसाय से संबंधित हैं।
ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले में विधायक केसी वीरेंद्र गिरफ्तार, 12 करोड़ की नकदी और 6 करोड़ के गहने-गाड़ी जब्त
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ईडी ने पीएमएलए-2002 के तहत छापेमारी के दौरान लगभग 12 करोड़ रुपए की नकदी बरामद की, जिसमें लगभग 1 करोड़ की विदेशी मुद्रा शामिल है। ईडी ने लगभग 6 करोड़ रुपए के सोने के आभूषण, लगभग 10 किलो चांदी के सामान और चार वाहन भी जब्त किए। इसके अलावा, 17 बैंक खाते और 2 बैंक लॉकर फ्रीज कर दिए गए।
ईडी को केसी वीरेंद्र के भाई केसी नागराज और उनके बेटे पृथ्वी एन राज के परिसर से कई संपत्ति से संबंधित दस्तावेज भी मिले, जिन्हें कब्जे में ले लिया।
जांच में पता चला है कि विधायक केसी वीरेंद्र के सहयोगी दुबई से ऑनलाइन गेमिंग वेबसाइट चलाते हैं। यह भी सामने आया है कि विधायक केसी वीरेंद्र अपने सहयोगियों के साथ गंगटोक के लिए एक व्यापारिक यात्रा पर भी गए थे, जहां वे एक कैसीनो लीज पर लेने की योजना बना रहे थे। ईडी ने कहा, “छापेमारी के दौरान जब्त सामग्री से यह संकेत मिलता है कि नकद और अन्य फंड्स की जटिल व्यवस्था की गई थी।” शनिवार को ईडी ने गंगटोक से ही विधायक केसी वीरेंद्र को गिरफ्तार किया। फिलहाल, मामले में आगे की जांच जारी है।
मुख्तार अंसारी का बेटा उमर अंसारी गाजीपुर से कासगंज जेल शिफ्ट, अब्बास के साथ रहेगा बंद
परिचय:
उत्तर प्रदेश:- की राजनीति और अपराध की दुनिया में अंसारी परिवार एक चर्चित नाम रहा है। मुख्तार अंसारी, जो पूर्व विधायक और कुख्यात माफिया के रूप में जाना जाता है, के दोनों बेटों – अब्बास अंसारी और उमर अंसारी – कानून के शिकंजे में हैं। हाल ही में उमर अंसारी की जेल बदली गई है। उसे गाजीपुर जेल से स्थानांतरित कर कासगंज जेल में भेजा गया है, जहाँ पहले से उसका बड़ा भाई अब्बास अंसारी बंद है। यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अब्बास अंसारी को एक पुराने मामले में राहत देते हुए दोषसिद्धि को रद्द कर दिया है। इस रिपोर्ट में हम उमर और अब्बास अंसारी से जुड़े पूरे घटनाक्रम, उनके खिलाफ चल रहे मामलों, कोर्ट की कार्रवाई, और इसके सामाजिक-राजनीतिक असर पर विस्तार से प्रकाश डालते हैं।
उमर अंसारी की जेल तबादला: घटनाक्रम और कारण
उमर अंसारी, जो कि मुख्तार अंसारी का छोटा बेटा है, को 4 अगस्त 2025 को उत्तर प्रदेश पुलिस ने गिरफ्तार किया था। आरोप था कि उसने अदालत में फर्जी दस्तावेज दाखिल किए थे। गिरफ्तारी के बाद उसे गाजीपुर जेल में रखा गया था। लेकिन अब उसे वहां से कासगंज जेल शिफ्ट कर दिया गया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, शनिवार सुबह 5 बजे एक पुलिस टीम उमर को लेकर कासगंज के लिए रवाना हुई।
कासगंज जेल में पहले से ही उमर का बड़ा भाई अब्बास अंसारी बंद है। ऐसे में अब दोनों भाई एक ही जेल में रहेंगे। सुरक्षा, निगरानी, और लॉ एंड ऑर्डर की दृष्टि से उमर को कासगंज स्थानांतरित करना प्रशासन की रणनीतिक योजना का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि आधिकारिक तौर पर इस शिफ्टिंग के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं की गई है।
अब्बास अंसारी को मिली हाईकोर्ट से राहत
इस घटनाक्रम की दिलचस्प बात यह है कि उमर अंसारी की जेल तबादला ठीक उसी सप्ताह हुआ, जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसके बड़े भाई अब्बास अंसारी के खिलाफ चल रहे एक गंभीर मामले में दोषसिद्धि को निरस्त कर दिया।
यह मामला 3 मार्च 2022 का है, जब मऊ सदर से विधानसभा चुनाव लड़ते समय अब्बास अंसारी ने एक जनसभा में सरकारी अधिकारियों को लेकर कथित तौर पर भड़काऊ भाषण दिया था। उनके इस भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसके बाद तत्कालीन इंस्पेक्टर गंगाराम बिंद की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था।
मऊ की एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट ने इस मामले में 31 मई 2025 को अब्बास को दो साल की सजा सुनाई थी और ₹2000 का जुर्माना भी लगाया था। उनके चुनाव एजेंट मंसूर को छह महीने की कैद और ₹2000 का जुर्माना लगाया गया, जबकि उनके छोटे भाई उमर को इस मामले में बरी कर दिया गया था।
हालांकि, 20 अगस्त को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मऊ कोर्ट के फैसले को पलटते हुए अब्बास को दोषमुक्त करार दिया। इससे उनकी विधानसभा सदस्यता बहाल होने का रास्ता साफ हो गया है, जो सजा के चलते खतरे में आ गई थी।
मुख्तार अंसारी का बेटा उमर अंसारी गाजीपुर से कासगंज जेल शिफ्ट, अब्बास के साथ रहेगा बंद
राजनीतिक निहितार्थ और अंसारी परिवार की पृष्ठभूमि
मुख्तार अंसारी एक समय में पूर्वी उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक ताकतवर चेहरा रहे हैं। मऊ, गाजीपुर और आसपास के जिलों में उनका प्रभाव अभी भी बना हुआ है। उन्होंने पांच बार विधायक के रूप में प्रतिनिधित्व किया और मऊ सदर सीट से वे लगातार चुनाव जीतते रहे हैं। हालांकि, उन पर संगठित अपराध, जबरन वसूली, हत्या, अपहरण जैसे कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। वर्तमान में वे आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं।
मुख्तार अंसारी के दोनों बेटे – अब्बास और उमर – भी राजनीति में कदम रख चुके हैं। अब्बास ने वर्ष 2022 में मऊ सदर सीट से सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के टिकट पर चुनाव लड़ा और विजयी हुआ। उमर ने अब तक सक्रिय राजनीति में अपनी उपस्थिति बहुत प्रमुखता से दर्ज नहीं कराई, लेकिन हाल की घटनाएं उसे लगातार सुर्खियों में ला रही हैं।
अब्बास पर कई गंभीर आरोप हैं, जिनमें आचार संहिता उल्लंघन, भड़काऊ भाषण, और अपराधियों से संबंध जैसे मामले शामिल हैं। वहीं उमर पर अदालत में झूठे दस्तावेज जमा करने जैसे आरोप हैं, जो न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप के तहत गंभीर माने जाते हैं।
अदालती प्रक्रिया में तेजी और सख्त प्रशासनिक कदम
उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन ने अंसारी परिवार के खिलाफ हाल के वर्षों में लगातार सख्त कार्रवाई की है। मुख्तार अंसारी की जेल शिफ्टिंग से लेकर उनकी संपत्तियों पर बुलडोजर चलाने तक, सरकार ने ‘माफिया मुक्त प्रदेश’ की नीति के तहत कार्रवाई की है।
अब्बास और उमर अंसारी के खिलाफ दर्ज मामलों में त्वरित सुनवाई और दोषसिद्धि (हालांकि अब्बास की बाद में रद्द हो गई) प्रशासन के गंभीर रुख को दर्शाती है। उमर का जेल तबादला भी इसी नीति की एक कड़ी माना जा रहा है, जिससे उसकी गतिविधियों पर बेहतर निगरानी रखी जा सके और बाहरी संपर्क सीमित किया जा सके।
सामाजिक और विधिक पहलू
अंसारी परिवार पर दर्ज मामलों को सिर्फ राजनीतिक या आपराधिक नज़रिए से नहीं, बल्कि सामाजिक और विधिक दृष्टिकोण से भी देखना आवश्यक है। उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था और राजनीतिक अखाड़े में कई ऐसे उदाहरण हैं, जहां नेता आपराधिक पृष्ठभूमि से आते हैं। ऐसे में जब अदालतें सख्ती दिखाती हैं और सजा सुनाती हैं, तो यह न्याय प्रणाली में आम जनता के विश्वास को मजबूत करता है।
हालांकि, जब हाईकोर्ट जैसे उच्च न्यायालय दोषसिद्धि को निरस्त करता है, तो यह भी स्पष्ट करता है कि न्याय प्रणाली निष्पक्ष है और यदि किसी व्यक्ति के साथ अन्याय हुआ है, तो उसे सुधारने की व्यवस्था मौजूद है। अब्बास अंसारी को मिली राहत इस बात का संकेत है कि अंतिम फैसला साक्ष्यों और कानून की प्रक्रिया के आधार पर ही होता है।
जनता और मीडिया की भूमिका
इस पूरे घटनाक्रम में मीडिया और जनता की भूमिका भी अहम रही है। भड़काऊ भाषण का वीडियो वायरल होना, जनता में इसे लेकर चर्चा, और मीडिया द्वारा निरंतर रिपोर्टिंग ने प्रशासन को कार्रवाई करने के लिए बाध्य किया। यह लोकतंत्र की शक्ति को भी दर्शाता है, जहाँ एक आम नागरिक की आवाज और एक वायरल वीडियो भी प्रभावशाली नेताओं के खिलाफ कार्रवाई का कारण बन सकता है।
निष्कर्ष:
उमर अंसारी का जेल स्थानांतरण और अब्बास अंसारी को कोर्ट से मिली राहत, दोनों घटनाएँ उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था, राजनीति, और न्याय प्रणाली के जटिल ताने-बाने को उजागर करती हैं। अंसारी परिवार, जो एक समय में पूर्वी उत्तर प्रदेश की राजनीति का मजबूत स्तंभ था, अब न्यायिक जांच और सजा प्रक्रिया से गुजर रहा है। यह स्थिति दर्शाती है कि अपराध और राजनीति का गठजोड़ अब पहले की तरह सहज और स्वीकार्य नहीं रहा।
वर्तमान सरकार द्वारा माफियाओं के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों और न्यायालयों की सक्रियता ने राज्य में एक नया संदेश देने का कार्य किया है – कि चाहे व्यक्ति कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून से ऊपर कोई नहीं। अंसारी परिवार का भविष्य अब पूरी तरह अदालतों के फैसलों और प्रशासनिक कार्रवाई पर निर्भर करता है।
यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में नोएडा की मजबूत मौजूदगी, 15 कारोबारियों को मिलेगा मंच
ग्रेटर नोएडा ।
ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में होने वाले यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इस बार ट्रेड शो में नोएडा प्राधिकरण की खास भागीदारी रहने वाली है। जानकारी के अनुसार, नोएडा की इंडस्ट्रीज के लिए 1000 वर्ग मीटर क्षेत्र आरक्षित किया गया है, जहां लगभग 15 कारोबारियों के स्टॉल लगाए जाएंगे। इन स्टॉल्स के जरिए नोएडा की औद्योगिक क्षमता, निर्यात योग्य उत्पाद और निवेश की संभावनाओं को प्रदर्शित किया जाएगा। नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ संजय खत्री ने बताया कि 15 कारोबारियों की सूची फाइनल हो चुकी है। ये सभी अपने-अपने उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करेंगे। इस दौरान खास जोर विदेशी खरीदारों से ऑर्डर हासिल करने पर रहेगा, जिससे नोएडा की इंडस्ट्रीज के निर्यात को बढ़ावा मिल सके। एसीईओ ने कहा कि नोएडा पहले से ही निर्यात के क्षेत्र में एक बड़ी पहचान बना चुका है और यहां से कई एक्सपोर्ट कंपनियां संचालित हो रही हैं। ऐसे में यह ट्रेड शो स्थानीय कारोबारियों के लिए बेहद लाभकारी साबित होगा। इस कार्यक्रम में नोएडा प्राधिकरण का भी अपना एक स्टॉल लगाया जाएगा, जहां नोएडा के विकास की गाथा और निवेशकों के लिए दी जाने वाली सहूलियतों को प्रदर्शित किया जाएगा।
यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में नोएडा की मजबूत मौजूदगी, 15 कारोबारियों को मिलेगा मंच
इसके अलावा ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण को भी ट्रेड शो में क्षेत्र आवंटित किया गया है। हाल ही में नोएडा प्राधिकरण में एक बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें शो की तैयारियों की समीक्षा की गई और अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए। कैबिनेट मंत्री राकेश सचान ने भी तैयारियों का जायजा लिया और कहा कि इस ट्रेड शो के जरिए उत्तर प्रदेश को वैश्विक मंच पर नई पहचान मिलेगी। खासतौर पर आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत बनाए जा रहे उत्पाद इस आयोजन में आकर्षण का केंद्र होंगे। आयोजकों के मुताबिक, इस बार ट्रेड शो में साढ़े चार लाख से अधिक लोगों के आने की उम्मीद है। इसमें देशी-विदेशी वेंडर और निवेशक भी शामिल होंगे। कारोबारियों का मानना है कि यह अवसर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने उत्पादों को प्रमोट करने और बड़े ऑर्डर हासिल करने का बेहतरीन मंच देगा।
प्रतापगढ़ में पुलिस पर जानलेवा हमला: 6 महिलाएँ गिरफ्तार, मौताणा विवाद में हिंसा का मामला
परिचय:
राजस्थान के प्रतापगढ़
जिले के कोटड़ी थाना क्षेत्र के दिवाला गाँव में हाल ही में हुई एक घटना ने न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती हिंसा और भीड़ मानसिकता को भी उजागर किया है। 21 अगस्त 2025 को दिवाला गांव में पुलिस जाप्ते पर लाठी, पत्थरों और कुल्हाड़ियों से हमला किया गया, जिससे पुलिसकर्मियों को गंभीर चोटें आईं और सरकारी जीप को भी नुकसान पहुँचा। इस मामले में पुलिस ने 6 महिला आरोपियों को गिरफ्तार किया है और अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। यह रिपोर्ट इस घटना की पृष्ठभूमि, घटनाक्रम, कानूनी कार्रवाई और सामाजिक प्रभाव पर विस्तार से प्रकाश डालती है।
पृष्ठभूमि और तनाव की शुरुआत:
इस घटना की जड़ें 11 अगस्त 2025 को हुई एक मृत्यु से जुड़ी हैं। कोटड़ी थाना क्षेत्र के दिवाला गांव निवासी गौतम पुत्र जीवा मीणा की मृत्यु ने स्थानीय स्तर पर तनाव पैदा कर दिया। मौत के बाद परिजनों और रिश्तेदारों ने 21 अगस्त को मौताणा (एक पारंपरिक क्षतिपूर्ति मांगने की सामाजिक प्रथा) की मांग करते हुए गाँव के ही मांगीलाल पुत्र जीवा मीणा और राहुल पुत्र पुरण मीणा के घर पर हमला कर दिया। इस दौरान तोड़फोड़, आगजनी और लूटपाट की भी कोशिश की गई।
पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया और भीड़ का उग्र रूप:
घटना की सूचना मिलते ही कोटड़ी थाने से हेड कांस्टेबल बहादुर सिंह के नेतृत्व में पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। लेकिन वहां पहले से एकत्रित भीड़, जिसमें महिलाएं और पुरुष दोनों शामिल थे, अचानक हिंसक हो गई। इन लोगों ने पुलिस जाप्ते को घेर लिया और उन पर जानलेवा हमला कर दिया। उनके पास लाठियाँ, पत्थर और कुल्हाड़ियाँ थीं। पुलिस पर हमला सुनियोजित तरीके से किया गया, जिससे साफ था कि भीड़ किसी भी तरह से अपनी बात मनवाने के लिए हिंसा का सहारा लेने को तैयार थी। इस हमले में कई पुलिसकर्मी घायल हुए और सरकारी वाहन (जीप) को गंभीर क्षति पहुँची।
गिरफ्तारी और आरोपी महिलाएं:
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस हमले में शामिल 6 महिला आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान इस प्रकार है:
पेपाबाई मीणा पत्नी अंबालाल (43 वर्ष), निवासी चाचाखेड़ी, थाना अरनोद
कुशीबाई मीणा पत्नी मेधा (40 वर्ष), निवासी कनाडा, थाना अरनोद
मोहनीबाई मीणा पत्नी लक्ष्मण (41 वर्ष), निवासी डोडियारखेड़ी, थाना प्रतापगढ़
पूजा मीणा (25 वर्ष), निवासी डोरना भालोट, नई आबादी, मंदसौर
निर्मला मीणा पत्नी गौतम (32 वर्ष), निवासी दिवाला, थाना कोटड़ी
धापुड़ीबाई पत्नी जीवा (55 वर्ष), निवासी दिवाला, थाना कोटड़ी
इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता 2023 और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम (PDPPA) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इन धाराओं के अंतर्गत सरकारी कार्य में बाधा, हिंसा, जानलेवा हमला, और सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुंचाने जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं।
संयुक्त पुलिस कार्रवाई और आगे की जांच:
इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रतापगढ़ एसपी बी. आदित्य के निर्देश पर कोटड़ी, अरनोद, सालमगढ़, प्रतापगढ़, हथुनिया और रठांजना थानों की पुलिस का संयुक्त जाप्ता गठित किया गया। इस टीम को न केवल गिरफ्तारियों में सफलता मिली, बल्कि उन्होंने गाँव में कानून व्यवस्था बहाल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जांच अभी जारी है और अन्य आरोपियों की पहचान व गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
प्रतापगढ़ में पुलिस पर जानलेवा हमला: 6 महिलाएँ गिरफ्तार, मौताणा विवाद में हिंसा का मामला
कानूनी और सामाजिक पहलू:
यह घटना कानून व्यवस्था के लिए एक चुनौती के रूप में सामने आई है। जहां एक ओर पुलिस मृतक के परिजनों की सहायता और सुरक्षा के लिए मौके पर पहुंची थी, वहीं दूसरी ओर उन्हीं पर हमला किया गया। यह दर्शाता है कि कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी क़ानून का डर नहीं है और भीड़ मानसिकता इतनी हावी हो चुकी है कि लोग न्याय प्रक्रिया की जगह हिंसा को प्राथमिकता देने लगे हैं।
मौताणा की मांग, जो कि एक सामाजिक प्रथा रही है, अब कई बार कानून के खिलाफ जाकर हिंसक रूप ले रही है। यह प्रथा अब दुरुपयोग का माध्यम बनती जा रही है, जिसमें पारिवारिक और सामाजिक दुश्मनियों के कारण निर्दोष लोगों को भी टारगेट किया जाता है।
पुलिस पर हमला – एक गंभीर अपराध:
भारतीय कानून के अंतर्गत सरकारी कर्मचारी पर ड्यूटी के दौरान हमला एक गंभीर अपराध माना जाता है। खासकर जब पुलिस पर जानलेवा हमला किया जाए, तो उसे गैर-जमानती अपराधों की श्रेणी में रखा जाता है। इस घटना में पुलिसकर्मी घायल हुए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि हमलावरों का उद्देश्य उन्हें चोट पहुंचाना और सरकारी कार्य में बाधा डालना था।
महिलाओं की भागीदारी – एक चिंताजनक संकेत:
इस घटना में एक अन्य चौंकाने वाली बात यह रही कि महिलाओं ने भी हिंसा में सक्रिय भागीदारी निभाई। लाठियों और पत्थरों के साथ पुलिस पर हमला करना, न केवल सामाजिक असंतुलन को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि अब अपराधों में महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ रही है, जो कि एक समाज के रूप में चिंता का विषय है।
प्रभाव और नीतिगत आवश्यकताएं:
यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि यह सामाजिक-सांस्कृतिक और प्रशासनिक असफलता का भी संकेत है। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी, शिक्षा और विधिक जानकारी का अभाव, और पारंपरिक रीतियों का अत्यधिक प्रभाव आज भी कानून व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं। ऐसे मामलों से निपटने के लिए प्रशासन को सिर्फ पुलिस कार्रवाई पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि सामाजिक संगठनों, पंचायतों और शिक्षा संस्थानों के साथ मिलकर दीर्घकालिक समाधान खोजने की आवश्यकता है।
निष्कर्ष:
दिवाला गाँव में हुआ यह हमला न केवल एक पुलिस कार्रवाई पर हमला था, बल्कि यह कानून, व्यवस्था और न्याय प्रणाली को सीधी चुनौती देने वाली घटना थी। पुलिस ने तत्परता से कार्रवाई कर 6 महिलाओं को गिरफ्तार किया, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। सभी दोषियों को न्याय के कटघरे में लाना, और इस प्रकार की हिंसक भीड़ संस्कृति पर नियंत्रण पाना अब समय की मांग है। साथ ही, समाज में जागरूकता फैलाकर लोगों को समझाना होगा कि न्याय हिंसा का नहीं, बल्कि कानून का विषय है।
यह घटना एक चेतावनी है कि यदि कानून का सम्मान नहीं किया गया, और अपराधियों को कड़ी सज़ा नहीं मिली, तो ऐसी घटनाएं बार-बार सामने आती रहेंगी। पुलिस, प्रशासन और समाज को मिलकर ऐसे मामलों से निपटना होगा, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति या समूह कानून को हाथ में लेने की हिम्मत न कर सके।
उदयपुर में अमेरिकी नागरिकों से ठगी का बड़ा खुलासा: फर्जी कॉल सेंटर चलाकर लोन देने का झांसा, 5 गिरफ्तार
उदयपुर,
जिसे झीलों की नगरी के रूप में जाना जाता है, हाल ही में एक बड़े साइबर फ्रॉड मामले के कारण सुर्खियों में आया है। हिरणमगरी क्षेत्र में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर का पुलिस द्वारा भंडाफोड़ किया गया है, जो अमेरिकी नागरिकों को सस्ते लोन दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी कर रहा था। इस मामले में उदयपुर पुलिस की सतर्कता, तकनीकी सहायता और सक्रियता की जितनी सराहना की जाए, कम है। पुलिस ने इस ऑपरेशन के दौरान अहमदाबाद, गुजरात से संबंधित पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है और मौके से महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जब्त किए हैं। यह मामला ना केवल साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौती को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे अंतरराष्ट्रीय नागरिकों को भी ऐसे गिरोह निशाना बना रहे हैं।
ऑपरेशन का नेतृत्व और टीम गठन:
पुलिस अधीक्षक योगेश गोयल के निर्देशानुसार इस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। इस विशेष कार्रवाई की निगरानी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमेश ओझा और डीएसपी छगन पुरोहित द्वारा की गई, जबकि थाना अधिकारी भरत योगी के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई थी। इस टीम ने तकनीकी जांच और आसूचना (इंटेलिजेंस) के सहयोग से हिरणमगरी के सेक्टर 3 स्थित कृष्णांगन अपार्टमेंट में संचालित फर्जी कॉल सेंटर की पहचान की।
छापेमारी और बरामदगी:
पुलिस टीम द्वारा की गई छापेमारी में कॉल सेंटर से कुल 6 लैपटॉप, 10 मोबाइल फोन, 5 हेडफोन और एक नेट राउटर जब्त किया गया। ये सभी उपकरण अपराध के संचालन में उपयोग किए जा रहे थे। इनसे प्राप्त डेटा की जांच जारी है, जिससे अन्य संभावित पीड़ितों और सहयोगियों की पहचान की जा सके।
गिरफ्तार आरोपी और उनकी पहचान:
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में सभी गुजरात, अहमदाबाद से ताल्लुक रखते हैं। इनमें शामिल हैं:
कुलदीप पटेल, पुत्र मनोज भाई पटेल (34 वर्ष)
सुरज सिंह तोमर, पुत्र महेन्द्र सिंह (25 वर्ष)
आसु राजपूत, पुत्र राजेन्द्र सिंह (21 वर्ष)
आनंद डेगामडिया, पुत्र वीठल भाई (33 वर्ष)
अर्चित पाण्डेय, पुत्र ईतेन्द्र बाबु (32 वर्ष)
इन सभी को हिरणमगरी पुलिस थाने में हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) की विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है।
धोखाधड़ी का तरीका (Modus Operandi):
इस गिरोह द्वारा अपनाई गई कार्यप्रणाली अत्यंत शातिराना थी। ये आरोपी अमेरिकी नागरिकों को “वेयर एप्लिकेशन” के माध्यम से निशाना बनाते थे, जो अमेरिकी नागरिकों के मोबाइल नंबरों की जानकारी इन फर्जी कॉल सेंटर संचालकों को उपलब्ध कराता था। इसके बाद आरोपी उन नागरिकों को कॉल कर खुद को लोन एजेंट या बैंक प्रतिनिधि बताकर उन्हें यह भरोसा दिलाते कि उनका कम क्रेडिट स्कोर होने के बावजूद उन्हें आसान शर्तों पर लोन मिल सकता है – वह भी बिना किसी वैध दस्तावेज के।
जब अमेरिकी नागरिक इस “ऑफर” में रुचि दिखाते, तो आरोपी उनसे प्रोसेसिंग फीस, दस्तावेज सत्यापन शुल्क, और बीमा के नाम पर डॉलर में राशि मांगते थे। चूंकि अमेरिका में लोन संबंधी प्रक्रियाएं जटिल होती हैं और कई लोग तेज़ लोन की तलाश में रहते हैं, इस कारण कई पीड़ित इनके झांसे में आ जाते थे।
उदयपुर में अमेरिकी नागरिकों से ठगी का बड़ा खुलासा: फर्जी कॉल सेंटर चलाकर लोन देने का झांसा, 5 गिरफ्तार
तकनीकी और सुरक्षा खामियों का लाभ:
यह गिरोह तकनीकी खामियों का बखूबी लाभ उठा रहा था। इंटरनेट कॉलिंग एप्लिकेशन्स (जैसे VoIP) और फर्जी ईमेल आईडी का उपयोग कर वे अपनी पहचान छिपा कर संचार करते थे। साथ ही, वे प्रॉक्सी सर्वर और VPN का भी इस्तेमाल कर रहे थे ताकि उनका लोकेशन और आईडेंटिटी ट्रेस न हो सके। इस पूरी योजना में तकनीकी विशेषज्ञता का उपयोग यह दर्शाता है कि यह कोई छोटा-मोटा फ्रॉड नहीं था, बल्कि एक संगठित अपराध था।
जांच और आगे की कार्रवाई:
फिलहाल, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान इस बात की भी जांच की जा रही है कि इनके तार किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े हुए हैं या नहीं। पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि यह गिरोह कब से सक्रिय था और अब तक कितने लोगों को धोखा दे चुका है। साथ ही, जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है ताकि इसमें मौजूद डेटा से और सुराग मिल सकें।
विशेष भूमिका:
इस कार्रवाई में हेड कांस्टेबल राजेंद्र सिंह और राजकुमार जाखड़ की भूमिका उल्लेखनीय रही। इन्होंने तकनीकी और खुफिया जानकारी एकत्र कर इस ऑपरेशन की सफलता में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।
प्रभाव और चिंताएं:
यह घटना दर्शाती है कि भारत में बैठे साइबर अपराधी अब वैश्विक नागरिकों को भी निशाना बना रहे हैं। इससे भारत की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावित हो सकती है। इसके अतिरिक्त, यह साइबर सुरक्षा के बढ़ते खतरे की ओर भी संकेत करता है, जहां न केवल आम नागरिक बल्कि विदेशी नागरिक भी ठगी का शिकार हो रहे हैं। इस प्रकार की घटनाएं भारत की डिजिटल इंडिया पहल के लिए भी एक गंभीर चुनौती प्रस्तुत करती हैं।
निष्कर्ष:
उदयपुर पुलिस द्वारा किया गया यह ऑपरेशन न केवल एक बड़ी सफलता है, बल्कि अन्य राज्यों की पुलिस के लिए एक उदाहरण भी है कि कैसे तकनीकी और इंटेलिजेंस आधारित ऑपरेशन से साइबर अपराधों को रोका जा सकता है। इस प्रकार के संगठित अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है ताकि देश और विदेश के नागरिकों का भरोसा कानून व्यवस्था पर बना रहे।
इस केस से यह स्पष्ट होता है कि साइबर अपराध अब सीमाओं से परे जा चुके हैं, और इनसे निपटने के लिए पुलिस, साइबर सेल और सुरक्षा एजेंसियों को तकनीकी रूप से अत्यधिक सक्षम होना होगा। अंततः, आम नागरिकों को भी सजग रहने की आवश्यकता है कि वे किसी भी प्रकार के ऑनलाइन लुभावने प्रस्तावों के प्रति सचेत रहें और बिना जांच किए किसी अनजान स्रोत को पैसे न भेजें।
साइबर ठगी का पर्दाफाश: ‘बंटी और बबली’ से चुराया आईडिया, दो आरोपी गिरफ्तार
नई दिल्ली ।
दक्षिण-पश्चिम जिला साइबर पुलिस ने टीवी और ओटीटी उद्योग में फर्जी निर्माता-निर्देशकों के एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। फिल्म ‘बंटी और बबली’ से प्रेरित दो कुख्यात ठगों, तरुण शेखर शर्मा (निराला नगर, लखनऊ) और आशा सिंह उर्फ भावना (नांगलोई, दिल्ली) को बेंगलुरु से गिरफ्तार किया गया। ये दोनों स्टार प्लस और हॉटस्टार पर प्रसारित एक लोकप्रिय धारावाहिक में भूमिका दिलाने का झांसा देकर भोले-भाले लोगों को ठग रहे थे। इनके पास से 7 स्मार्टफोन, 10 सिम कार्ड, 8 एटीएम कार्ड, 15 बैंक चेकबुक/पासबुक और एक सोने का टॉप बरामद हुआ।
मामला तब सामने आया जब रघु नगर, डाबरी की एक महिला ने एनसीआरपी (नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल) पर शिकायत दर्ज की। उनकी नाबालिग बेटी एकता कपूर की अकादमी से अभिनय का डिप्लोमा कर रही थी। उसने स्टार प्लस के एक धारावाहिक में काम पाने के लिए फेसबुक पर एक विज्ञापन देखा। लिंक पर क्लिक करने पर उसे व्हाट्सएप नंबर पर रीडायरेक्ट किया गया, जहां पीयूष शर्मा नामक व्यक्ति ने खुद को पूर्व एमटीवी स्प्लिट्सविला प्रतिभागी और निर्देशक बताया।
उसने पीड़िता का पोर्टफोलियो मांगा और फिर फर्जी निर्माता राजन शाही और सिंटा की कथित एचआर निदेशक अनीता से संपर्क करवाया। झांसे में आकर पीड़िता ने 24 लाख रुपए ट्रांसफर किए, लेकिन बाद में उसे ब्लॉक कर दिया गया।
साइबर ठगी का पर्दाफाश: ‘बंटी और बबली’ से चुराया आईडिया, दो आरोपी गिरफ्तार
मामले की गंभीरता को देखते हुए, इंस्पेक्टर प्रवेश कौशिक और सहायक पुलिस आयुक्त विजयपाल सिंह तोमर के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। इसमें एसआई ओपेंद्र सिंह, हेड कांस्टेबल अशोक, बाबूलाल, जय प्रकाश और कांस्टेबल जीतू राम शामिल थे।
तकनीकी निगरानी से पता चला कि आरोपी लखनऊ, गुजरात, मध्य प्रदेश, केरल और कर्नाटक के प्रीमियम होटलों से ठगी करते थे। बेंगलुरु में छापेमारी के बाद दोनों आरोपियों को एक 2 बीएचके सर्विस अपार्टमेंट से गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि तरुण और आशा ने यूट्यूब वीडियो से ठगी का हुनर सीखा था। वे व्हाट्सएप के जरिए पीड़ितों से संपर्क करते और बार-बार सिम कार्ड, बैंक खाते और ठिकाने बदलते थे। 20 से ज्यादा एनसीआरपी शिकायतें और जम्मू-कश्मीर में एक मामला इनसे जुड़ा है। पुलिस अब अन्य पीड़ितों की तलाश में है।
जयपुर: राजस्थान में अवैध हथियारों के जाल पर एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स की बड़ी कार्रवाई, दो हथियार तस्कर गिरफ्तार
राजस्थान में अपराधियों के नेटवर्क पर शिकंजा कसने के लिए राज्य पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) लगातार सक्रिय है। इसी क्रम में जयपुर मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, AGTF ने हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर पुलिस के साथ मिलकर एक बड़ी सफलता हासिल की है। इस संयुक्त ऑपरेशन में दो कुख्यात हथियार तस्करों को गिरफ्तार किया गया है, जिनके कब्जे से तीन अवैध देशी पिस्टल (.32 बोर) और पाँच मैगज़ीन बरामद की गई हैं। यह ऑपरेशन न सिर्फ हथियार तस्करी रोकने की दिशा में एक बड़ी कामयाबी है, बल्कि इससे गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के नेटवर्क की जड़ें राजस्थान में कितनी गहरी हैं, इसका भी अंदाजा लगाया जा सकता है।
इस पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व वरिष्ठ अधिकारी एडीजी दिनेश एम. एन. ने किया, जो राजस्थान पुलिस में संगठित अपराध के खिलाफ सख्त कार्यवाही के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने बताया कि कार्रवाई दो अलग-अलग जिलों में अलग-अलग समय पर की गई। पहली गिरफ्तारी श्रीगंगानगर के सादुलशहर क्षेत्र में हुई, जहां पुलिस ने गुरमीत सिंह (40) नामक एक व्यक्ति को एक अवैध देशी पिस्टल के साथ दबोच लिया। प्रारंभिक पूछताछ में गुरमीत सिंह ने खुलासा किया कि उसने यह हथियार जगतार सिंह उर्फ काला से लिया था, जो पहले से ही पुलिस के रडार पर था। इस बयान ने जांच को एक नया मोड़ दिया और गैंग के अन्य सदस्यों की तलाश तेज़ कर दी गई।
दूसरी महत्वपूर्ण गिरफ्तारी हनुमानगढ़ जिले के रावतसर कस्बे से हुई, जहां पुलिस ने 21 वर्षीय अभिषेक जाट को दो देशी पिस्टल और चार मैगज़ीन के साथ रंगे हाथों पकड़ लिया। पूछताछ में अभिषेक ने बताया कि वह ये हथियार सोनू भांभू नामक तस्कर से खरीद चुका था। गौरतलब है कि सोनू भांभू हाल ही में उत्तराखंड से गिरफ्तार किया गया एक कुख्यात हथियार तस्कर है, जिसके संबंध सीधे गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े हुए हैं। सोनू की गिरफ्तारी के बाद ही AGTF ने हथियार तस्करी के इस पूरे नेटवर्क पर निगरानी बढ़ा दी थी।
एडीजी दिनेश एम. एन. के अनुसार, सोनू भांभू की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में यह तथ्य सामने आया कि वह अब तक राजस्थान में 131 से अधिक अवैध हथियार सप्लाई कर चुका है। यह संख्या न केवल चौंकाने वाली है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि हथियार तस्करी का यह नेटवर्क कितना विस्तृत और संगठित है। सोनू ने पुलिस को बताया कि वह अलग-अलग जिलों में स्थानीय एजेंट्स के माध्यम से हथियारों की आपूर्ति करता था। इनमें से कई एजेंट कॉलेज छात्र, बेरोजगार युवा और पुराने अपराधी थे, जिन्हें पैसे का लालच देकर इस अवैध धंधे में घसीटा गया।
यह मामला एक सप्ताह पहले हनुमानगढ़ में की गई एक और कार्रवाई से भी जुड़ा है। तब AGTF ने इस गिरोह के 11 अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 6 अवैध हथियार बरामद किए थे। उस समय भी पुलिस ने यह जानकारी दी थी कि यह नेटवर्क लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा हुआ है और हथियार तस्करी के लिए राजस्थान को एक बड़े ट्रांजिट पॉइंट की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में हालिया गिरफ्तारी और हथियारों की जब्ती इस ऑपरेशन का अगला महत्वपूर्ण चरण मानी जा रही है।
इस संयुक्त ऑपरेशन में AGTF इंस्पेक्टर सुभाष सिंह तंवर की टीम के साथ हनुमानगढ़ की डीएसटी (District Special Team) ने मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन टीमों ने गुप्त सूचना के आधार पर पहले निगरानी रखी, फिर दोनों आरोपियों को अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया। इन अभियानों में गहन तकनीकी विश्लेषण, मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग और स्थानीय खुफिया तंत्र का व्यापक इस्तेमाल किया गया। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान कई अन्य संदिग्ध नामों की पहचान हुई है, जिनके खिलाफ अब आगामी चरणों में कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि राजस्थान में लॉरेंस बिश्नोई गिरोह और उसके सहयोगी तस्करों की गतिविधियों पर पिछले कुछ महीनों से पैनी नजर रखी जा रही थी। लॉरेंस बिश्नोई गैंग की सक्रियता खासकर राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और उत्तर भारत के अन्य राज्यों में लगातार बढ़ रही थी, और इसके लिए अवैध हथियारों का इस्तेमाल आम बात हो गई थी। इस गिरोह के सदस्य सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को आकर्षित करते हैं और फिर उन्हें अपराध की दुनिया में शामिल करते हैं। इसीलिए पुलिस ने न केवल धरपकड़ अभियान तेज किया है, बल्कि साइबर निगरानी और सोशल मीडिया विश्लेषण के माध्यम से भी गैंग की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
इस बीच, पुलिस अधिकारियों ने आम जनता से भी सहयोग की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि किसी को भी अपने इलाके में हथियारों की संदिग्ध गतिविधियों, संदिग्ध व्यक्तियों या हथियार तस्करों की जानकारी हो, तो वह तुरंत पुलिस को सूचित करे। पुलिस की गुप्त सूचना तंत्र पूरी तरह सुरक्षित है और जानकारी देने वाले की पहचान को गोपनीय रखा जाता है।
राजस्थान पुलिस की यह कार्रवाई राज्य में संगठित अपराध के खिलाफ चल रहे “ऑपरेशन क्लीन” का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य न केवल अपराधियों को पकड़ना है, बल्कि उनके पूरे नेटवर्क को जड़ से समाप्त करना है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और भी कई नामों का खुलासा हो सकता है, जिनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्षतः, यह कार्रवाई राजस्थान पुलिस की प्रतिबद्धता को दर्शाती है कि वह राज्य को अपराध मुक्त बनाने की दिशा में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। हथियार तस्करी जैसे गंभीर अपराध को जड़ से खत्म करने के लिए पुलिस की तकनीकी, खुफिया और मैदानी टीमें लगातार काम कर रही हैं। दो तस्करों की गिरफ्तारी और अवैध हथियारों की बरामदगी निश्चित ही एक बड़ी कामयाबी है, लेकिन यह भी स्पष्ट संकेत है कि अपराधियों के खिलाफ यह लड़ाई अभी जारी है। आने वाले समय में पुलिस की और भी बड़ी कार्रवाइयों की उम्मीद की जा रही है, जिससे अपराधियों के मन में भय और आमजन में विश्वास कायम रह सके।
भारत को विदेश नीति के तहत मल्टीनेशन आईसीसी टूर्नामेंट में हिस्सा लेना जरूरी : राम कदम
मुंबई ।
भारत सरकार ने पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलने पर बड़ा फैसला लेते हुए साफ किया है कि दोनों देशों के बीच कोई भी द्विपक्षीय सीरीज नहीं खेली जाएगी। हालांकि, आईसीसी टूर्नामेंट जिसमें कई देश हिस्सा लेंगे, उसमें भारतीय क्रिकेट टीम खेलेगी। भाजपा विधायक राम कदम ने भारत सरकार के इस फैसले को विदेश नीति के हिसाब से जरूरी बताया। भाजपा विधायक राम कदम ने आईएएनएस से कहा, “पाकिस्तान की जो हरकतें रही हैं, हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में तीन बार उसके घर में घुसकर आतंकियों को मारा है। स्वाभाविक रूप से जनभावना है कि हम पाकिस्तान के साथ सीधे तौर पर क्रिकेट मैच नहीं खेलेंगे। इसी भावना का सम्मान भारत सरकार कर रही है। हालांकि मल्टी नेशन टूर्नामेंट में विदेश नीति के तहत भारत का हिस्सा लेना जरूरी है। यह रुख खेल मंत्रालय ने स्पष्ट किया है।” राम कदम ने आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा, “आवारा कुत्तों के बर्ताव के कारण आम जनमानस को जो तकलीफ हो रही थी, उसको ध्यान में रखकर न्यायपालिका ने आदेश दिए थे।
भारत को विदेश नीति के तहत मल्टीनेशन आईसीसी टूर्नामेंट में हिस्सा लेना जरूरी : राम कदम
लेकिन कुत्ते भी जानवर हैं, उन्हें भी जीने का अधिकार है। ऐसे में न्यायपालिका का जो नया निर्णय आया है, उसका सभी को स्वागत करना होगा। जैसे इंसानों को जीने का अधिकार है, उसी प्रकार से जानवरों को भी जीने का अधिकार है। इसका खास ख्याल रखना होगा कि आवारा कुत्ते किसी को तकलीफ नहीं दें।”आपराधिक छवि वालों को संवैधानिक पद से हटाए जाने वाले विधेयक पर विपक्ष के विरोध को लेकर राम कदम ने कहा, “देश के विपक्ष को क्या हो गया है? जो जेल में है, उसके बावजूद वह मुख्यमंत्री रहेगा? जिस व्यक्ति पर संगीन आरोप हैं, जिसके कारण न्यायपालिका ने उस व्यक्ति को जेल में डाला है, उसके बावजूद वह मंत्री पद पर रहेगा? चाहे किसी भी दल का व्यक्ति हो, कुछ दिनों के बाद ऐसा व्यक्ति संवैधानिक पद पर नहीं रह सकता। पूरा देश इस बिल का स्वागत कर रहा है। विपक्ष को शायद इस बात का डर है कि भ्रष्टाचार और गलत रवैये के कारण उनके लोग ही जेल में जाएंगे।
पूर्व सैनिक संघ की जनसुनवाई में उठा सैनिक कैंटिन का मुद्दा
बयाना में पूर्व सैनिकों की जनसुनवाई: समस्याओं का समाधान और सुविधाओं की मांगों के साथ नई पहल
राजस्थान के बयाना कस्बे में आज का दिन पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और शहीदों की विधवाओं के लिए विशेष महत्व का रहा। यहां पंचायत समिति परिसर में सैनिक संघ द्वारा एक जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य इन वीरों और उनके परिवारों की समस्याओं को सुनना और उनका समाधान करना था। इस जनसुनवाई में न केवल सैनिकों की व्यक्तिगत और पारिवारिक समस्याओं पर चर्चा हुई, बल्कि कई महत्वपूर्ण मांगों और सुझावों को भी संबंधित अधिकारियों के समक्ष रखा गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सैनिक संघ के अध्यक्ष बलराम कांवर ने की, जबकि इसमें जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल अनिल कुमार चौहान और सूबेदार ज्ञान सिंह भी विशेष रूप से मौजूद रहे। इनके अलावा कार्यक्रम में सैनिक संघ के उपाध्यक्ष प्रेम सिंह, कैप्टन मानसिंह कसाना, सूबेदार राजवीर सिंह, सूबेदार रमन सिंह और कई अन्य पूर्व सैनिकों एवं उनके परिजनों की भागीदारी रही। जनसुनवाई में आए लोगों ने बढ़-चढ़कर अपनी समस्याएं साझा कीं और अधिकारियों ने गंभीरता से उन पर विचार कर त्वरित समाधान का आश्वासन दिया।
सैनिक संघ के अध्यक्ष बलराम कांवर ने जानकारी दी कि इस जनसुनवाई में पेंशन, मेडिकल कार्ड, सेवा पहचान पत्र (आई-कार्ड) और अन्य व्यक्तिगत समस्याओं को लेकर कुल दर्जनों आवेदन आए, जिनमें से अधिकांश का मौके पर ही समाधान कर दिया गया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में राज्य सरकार ने पूर्व सैनिकों के लिए मुफ्त में मेडिकल कार्ड बनाने की सुविधा शुरू की है, जबकि पहले इसके लिए शुल्क लिया जाता था। यह सुविधा निश्चित रूप से पूर्व सैनिकों के लिए राहत का काम करेगी।
पूर्व सैनिकों ने इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण सामुदायिक मुद्दे भी उठाए, जिनमें सबसे प्रमुख था – अपने क्षेत्र में मोबाइल कैंटीन सुविधा की शुरुआत। पूर्व सैनिकों ने बताया कि उनके लिए निर्धारित सेना की कैंटीनें अक्सर दूर होती हैं, जिससे वृद्ध सैनिकों और उनके परिजनों को भारी कठिनाई होती है। इसलिए उन्होंने मांग की कि क्षेत्र में एक चलती-फिरती (मोबाइल) कैंटीन वैन की सुविधा दी जाए, जो नियत तिथियों पर गांव-गांव जाकर सामग्री उपलब्ध करा सके।
दूसरी बड़ी मांग शहीद स्मारक के निर्माण की थी। पूर्व सैनिकों और शहीदों के परिजनों ने कहा कि क्षेत्र के कई वीर जवानों ने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है, लेकिन अब तक उनके सम्मान में कोई स्मारक नहीं बनाया गया है। ऐसे में उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि एक उचित भूमि का आवंटन कर शहीद स्मारक का निर्माण कराया जाए, जिससे आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा मिल सके और शहीदों का गौरव सदा अमर रहे।
तीसरा मुद्दा हथियारों के रजिस्ट्रेशन से जुड़ा रहा। कई पूर्व सैनिकों ने बताया कि उन्हें अपने वैध हथियारों के रजिस्ट्रेशन और नवीनीकरण में प्रशासनिक जटिलताओं का सामना करना पड़ता है। प्रक्रियाएं लंबी और तकनीकी रूप से जटिल हैं, जिससे बुजुर्ग सैनिकों को परेशानी होती है। उन्होंने मांग की कि सैनिकों के लिए अलग से सरल और तेज प्रक्रिया निर्धारित की जाए, ताकि वे अपने अधिकारों का आसानी से उपयोग कर सकें।
पूर्व सैनिक संघ की जनसुनवाई में उठा सैनिक कैंटिन का मुद्दा
इसके अलावा एक और जरूरी मांग सैनिक विश्राम गृह (सैनिक रेस्ट हाउस) की स्थापना को लेकर की गई। पूर्व सैनिकों ने कहा कि जब वे अपने गांवों से बाहर कहीं आते हैं, तो उन्हें ठहरने के लिए उपयुक्त व्यवस्था नहीं मिलती। उन्होंने मांग की कि एक सैनिक विश्राम गृह का निर्माण किया जाए, जिसमें वे और उनके परिजन रियायती दरों पर ठहर सकें। यह विश्राम गृह न केवल ठहरने की सुविधा देगा, बल्कि पूर्व सैनिकों के सामाजिक मेल-जोल और बैठकों के लिए भी उपयोगी साबित होगा।
जनसुनवाई के दौरान जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल अनिल कुमार चौहान ने सभी मांगों को गंभीरता से सुनते हुए भरोसा दिलाया कि वे इन्हें संबंधित उच्चाधिकारियों और प्रशासन तक पहुंचाएंगे। उन्होंने पूर्व सैनिकों को आश्वस्त किया कि सरकार पूर्व सैनिकों और शहीदों के परिवारों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और लगातार नई योजनाएं शुरू कर रही है। उन्होंने मोबाइल कैंटीन, स्मारक निर्माण और रेस्ट हाउस जैसी मांगों को वाजिब और समयानुकूल बताया तथा कहा कि इन पर शीघ्र कार्यवाही की जाएगी।
कर्नल चौहान ने यह भी बताया कि पूर्व सैनिकों के बच्चों को शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य सुविधाओं में प्राथमिकता दी जा रही है और राज्य सरकार इसके लिए कई योजनाएं चला रही है। उन्होंने उपस्थित सभी पूर्व सैनिकों से आग्रह किया कि वे नई योजनाओं और अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और जरूरतमंद सैनिक साथियों को भी जानकारी साझा करें। उन्होंने यह भी बताया कि अब पूर्व सैनिकों की शिकायतें ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भी दर्ज की जा सकती हैं, जिससे प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी और त्वरित हो गई है।
जनसुनवाई का समापन करते हुए सैनिक संघ के अध्यक्ष बलराम कांवर ने सभी अधिकारियों और पूर्व सैनिकों का आभार व्यक्त किया और कहा कि इस तरह के आयोजन समय-समय पर होते रहने चाहिए ताकि सरकार और सैनिक समुदाय के बीच सीधा संवाद स्थापित हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि सैनिक केवल युद्ध के मैदान में ही नहीं, बल्कि समाज के हर क्षेत्र में देश सेवा करते हैं और उनके अनुभवों का लाभ समाज को मिलना चाहिए।
निष्कर्ष रूप में देखा जाए तो यह जनसुनवाई न केवल पूर्व सैनिकों की समस्याओं के समाधान का एक मंच बनी, बल्कि इससे कई ऐसी मूलभूत जरूरतें सामने आईं, जिन पर ध्यान देना जरूरी है। चाहे वह मोबाइल कैंटीन की सुविधा हो, शहीद स्मारक का निर्माण, हथियारों की आसान रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया हो या फिर विश्राम गृह की मांग – ये सभी पहल सामाजिक रूप से आवश्यक हैं और सैनिकों के प्रति सम्मान प्रकट करने का एक सशक्त माध्यम भी हैं। बयाना में हुआ यह आयोजन एक सकारात्मक और प्रेरक उदाहरण है, जिसे अन्य जिलों में भी दोहराने की आवश्यकता है, ताकि देश की रक्षा में योगदान देने वाले इन वीरों को समाज में सम्मान और सुविधा दोनों मिल सके।
स्टेट क्राइम ब्रांच को मिली बड़ी कामयाबी : MP के कुख्यात पारदी गिरोह के 6 सदस्य गिरफ्तार
• अजमेर और सवाई माधोपुर में चोरी की साजिश का पर्दाफाश, लाखों के गहने और नकदी बरामदजयपुर।
महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा के निर्देशन में पुलिस मुख्यालय द्वारा प्रदेश में सक्रिय गैंगस्टर्स, आपराधिक गिरोह, हथियार और नशा तस्करों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के अंतर्गत स्टेट क्राइम ब्रांच की टीम को एक बड़ी सफलता हासिल हुई है। टीम की सूचना पर अजमेर जिले की बांदरसिंदरी थाना पुलिस की टीम ने मध्य प्रदेश के कुख्यात पारदी गिरोह के छह जनों को चोरी की साजिश रचते रंगे हाथ चोरी में प्रयुक्त औजार और कुछ दिन पहले सवाई माधोपुर के माउंट टाउन थाना क्षेत्र में एक सूने मकान से चुराये सोने चांदी के जेवरात और नगदी बरामद की है। उप महानिरीक्षक पुलिस अपराध दीपक भार्गव के निर्देशानुसार अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सिद्धांत शर्मा और राजेश मलिक के सुपरविजन और पुलिस निरीक्षक राम सिंह नाथावत के नेतृत्व में एक टीम को चलाये जा रहे अभियान की सफलता के आसूचना संकलन कर धरपकड़ करने रवाना किया गया था। आसूचना संकलन के दौरान सीआईडी क्राइम ब्रांच टीम के सदस्य हेड कांस्टेबल महेंद्र कुमार को सूचना मिली कि मध्य प्रदेश की पारदी गिरोह अजमेर क्षेत्र में चोरी और डकैती करने के लिए सक्रिय है। सूचना की पुष्टि के बाद थाना बांदरसिंदरी अजमेर को सचेत किया गया। इस सूचना के आधार पर थाना प्रभारी अमरचंद की टीम गुरुवार देर रात गुलाबपुरा की हाणी ग्राम बांदरसिंदरी पहुंची। एक खाली प्लॉट के अंदर कमरे में छह लोग चोरी की योजना बना रहे थे, जिसमें एक व्यक्ति घर के अंदर घुसकर सामान चुराने, और बाकी लोग मोटरसाइकिल पर तैयार रहने की बात कर रहे थे। पारदी गिरोह के छह बदमाश की गिरफ्तारी
स्टेट क्राइम ब्रांच को मिली बड़ी कामयाबी : MP के कुख्यात पारदी गिरोह के 6 सदस्य गिरफ्तार
पुलिस ने तुरंत घेराबंदी कर छह बदमाशों शिवनारायण सोलकी पुत्र सत्यनारायण पारदी (23), जयनारायण सोलंकी पुत्र सत्यनारायण पारदी (21), सुरजन पारदी पुत्र चंदू (30), गिरिराज पारदी पुत्र मोहन (19), विजय पारदी पुत्र रामचरण (19) और जीतू पारदी पुत्र मदनगोमा (35) निवासी धरनावदा जिला गुना मध्यप्रदेश को गिरफ्तार किया। सवाई माधोपुर चोरी की घटना का खुलासा पुलिस ने इनसे चोरी और सेंधमारी में इस्तेमाल होने वाले औजार जैसे कि कटर, पेचकस, टॉर्च, लोहे की टॉमी, रिच पाने और चार मोटरसाइकिलें बरामद की गईं। इसके अलावा गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से कुछ के पास से चोरी के आभूषण और पुराने नोट भी मिले। उन्होंने बताया कि ये सामान तीन दिन पहले सवाई माधोपुर में एक घर से चोरी किए गए थे, जिसकी रिपोर्ट थाना मानटाउन में दर्ज है। गिरफ्तार आरोपी गिरिराज, सुरजन, विजय और जीतू के विरुद्ध मध्य प्रदेश के थाना धरनावदा और राजस्थान के बारां एवं सीकर जिले में पूर्व में भी कई अपराधिक प्रकरण दर्ज है। सुरजन थाना शिवपुरी में दर्ज डकैती के एक मामले में वांछित चल रहा है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ शर्मा और राजेश मलिक के सुपरविजन एवं इंस्पेक्टर राम सिंह नाथावत के नेतृत्व में की गई इस कार्रवाई में हेड कांस्टेबल महेंद्र कुमार की विशेष भूमिका रही, वही टीम में शामिल उप निरीक्षक प्रताप सिंह, हेड कांस्टेबल हेमंत शर्मा, कांस्टेबल मोहन लाल और कांस्टेबल ड्राइवर दिनेश चंद्र के साथ डीएसटी अजमेर प्रभारी एएसआई शंकर सिंह और एसएचओ बांदर सिंदरी अमर चन्द मय टीम का सराहनीय योगदान रहा।