दिल्ली पुलिस ने चार घोषित अपराधियों को किया गिरफ्तार
नई दिल्ली ।
दिल्ली पुलिस की कापसहेड़ा और आर.के. पुरम थाना टीमों ने दक्षिण पश्चिम जिले में चार घोषित अपराधियों (पीओएस) को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों को पकड़ने में खुफिया सूचनाओं का अहम रोल रहा।
गिरफ्तार किए गए अपराधियों की पहचान अंकित पाठक (28 वर्ष), अनिकेत कुमार (30 वर्ष), मूलचंद (45 वर्ष) और नरेंद्र कुमार (52 वर्ष) के रूप में हुई है। घोषित अपराधियों की गिरफ्तारी न्यायालयों के क्रमश, 25.02.2025, 25.05.2023, 03.05.2025 और 30.06.2023 के आदेशों के बाद व्यापक मैनुअल और तकनीकी निगरानी के साथ-साथ रणनीतिक छापेमारी के जरिए हुई।
पुलिस ने इन अपराधियों को पकड़ने के लिए विशेष टीमें गठित की थीं, जिन्होंने गुप्त मुखबिरों और तकनीकी जानकारी के आधार पर कार्रवाई की। पहला मामला थाना कापसहेड़ा में दर्ज एफआईआर संख्या 54/2018 से संबंधित है, जिसमें हेड कांस्टेबल पवन और दलजीत की टीम ने अंकित पाठक को गिरफ्तार किया। उसके खिलाफ धारा 209 बीएनएस के तहत एक अलग मामला भी दर्ज किया गया।
दिल्ली पुलिस ने चार घोषित अपराधियों को किया गिरफ्तार
दूसरा मामला एफआईआर संख्या 517/2020 से संबंधित है, जिसमें एचसी मोहिंदर सिंह, संजीव और योगेश की टीम ने अनिकेत कुमार को पकड़ा। तीसरा मामला एफआईआर संख्या 369/2021 से है, जिसमें एचसी श्रीपाल और कांस्टेबल अजय की टीम ने मूलचंद को गिरफ्तार किया।
चौथा मामला थाना आर.के. पुरम में दर्ज एफआईआर संख्या 317/2025 से संबंधित है। अगस्त 2025 के दूसरे सप्ताह में मिली सूचना के आधार पर, इंस्पेक्टर रविंदर कुमार त्यागी के नेतृत्व में हेड कांस्टेबल इंद्रपाल और संपत राम की टीम ने नरेंद्र कुमार को नोएडा के सेक्टर-63 से गिरफ्तार किया। उसके खिलाफ धारा 174ए आईपीसी के तहत एक अलग मामला दर्ज किया गया।
पुलिस उपायुक्त (दक्षिण पश्चिम जिला) अमित गोयल ने बताया कि इन गिरफ्तारियों के लिए टीमें गुप्त सूचनाओं और तकनीकी निगरानी पर काम कर रही थीं। अन्य फरार घोषित अपराधियों को पकड़ने के लिए भी जांच और छापेमारी जारी है।
‘बाबा सिद्दीकी की तरह जान से मार देंगे’, मुंबई के व्यवसायी को मिली धमकी
मुंबई । मुंबई के एक रसायन और पेट्रोकेमिकल आयातक व्यवसायी को अंडरवर्ल्ड से जुड़ी धमकियों और करोड़ों रुपए की फिरौती मांगने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। कारोबारी ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसे पाकिस्तान से फोन कर धमकाया गया है और धमकी देने वालों ने खुद को कुख्यात गैंगस्टर छोटा शकील गिरोह से जुड़ा बताया।
पुलिस को दी गई जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता व्यवसायी का कार्यालय फोर्ट और दुबई दोनों जगह है। उसने वर्ष 2015 में ईरान से तेल आयात किया था। उस समय अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंध लगा रखे थे, जिसके चलते भुगतान कारोबारी ने दुबई के माध्यम से किया। बाद में ईरानी सप्लायर कंपनी ने आरोप लगाया कि कुछ खेपों का भुगतान नहीं हुआ और ईरान में मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू कर दी।
‘बाबा सिद्दीकी की तरह जान से मार देंगे’, मुंबई के व्यवसायी को मिली धमकी
व्यवसायी के अनुसार वह ईरान में हुई मध्यस्थता की कार्यवाही में पेश नहीं हुआ, जिसके कारण वहां की अदालत ने एकतरफा आदेश ईरानी कंपनी के पक्ष में दे दिया। इसके बाद कंपनी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में उसकी संपत्तियों को कुर्क करने की मांग की, हालांकि अदालत ने उस याचिका को खारिज कर दिया। फिलहाल यह दीवानी मामला अंतिम सुनवाई के लिए लंबित है।
शिकायत में कहा गया है कि जून से लगातार पाकिस्तान से धमकी भरे कॉल आ रहे हैं। कॉल करने वाले पहले 20 मिलियन की मांग कर रहे थे, लेकिन बाद में यह रकम बढ़ाकर 800 मिलियन तक कर दी गई। कॉलर्स ने धमकाते हुए कहा कि अगर रकम नहीं दी गई तो उसका अंजाम बाबा सिद्दीकी के जैसा होगा।
मुंबई पुलिस ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए एंटी-एक्सटॉर्शन सेल को जांच सौंप दी है। प्रारंभिक जांच में पुलिस को आशंका है कि यह मामला केवल व्यापारिक विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय संगठित अपराध गिरोह और विदेशी व्यापार विवादों से जुड़ा एक बड़ा जबरन वसूली रैकेट हो सकता है।
राज्य में भ्रष्टाचार भी ‘स्मार्ट’ : सीएम देवेंद्र फडणवीस की ‘स्मार्ट विलेज’ योजना पर शिवसेना-यूबीटी ने उठाए सवाल
मुंबई ।
महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ‘स्मार्ट विलेज’ योजना को लेकर शिवसेना-यूबीटी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में सरकार की योजना पर कई सवाल उठाए गए हैं और व्यंग्यात्मक लहजे में उसे ठेकेदारों के लिए बनाई गई स्कीम करार दिया गया है।
संपादकीय की शुरुआत में शिवसेना-यूबीटी ने तंज कसा, “मुख्यमंत्री ने नागपुर जाकर एक और बड़ा ऐलान किया है कि हर तालुका के दस गांवों को स्मार्ट बनाया जाएगा। यह घोषणा महात्मा गांधी के ‘गांव की ओर चलो’ के संदेश की याद दिलाती है।” हालांकि, इसके तुरंत बाद ही संपादकीय में तीखे सवालों की बौछार शुरू की गई।
‘सामना’ में पूछा गया है, “क्या इन 3,500 गांवों को स्मार्ट और आत्मनिर्भर बनाने का मतलब यह है कि वहां के युवाओं को रोजगार मिलेगा? वे शहरों की ओर पलायन नहीं करेंगे? किसान आत्महत्या नहीं करेंगे? क्या ये गांव भ्रष्टाचार, धार्मिक तनाव, जर्जर सड़कों, खराब स्कूलों और बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं से मुक्त होंगे?”
संपादकीय में आगे लिखा गया है कि ‘स्मार्ट सिटी मिशन’ का हाल किसी से छिपा नहीं है। आज भी उन शहरों में सड़कों पर गड्ढे हैं, पानी-बिजली की समस्या है, और ट्रैफिक से लोग परेशान हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि स्मार्ट सिटी पर खर्च हुआ पैसा आखिर गया कहां?
राज्य में भ्रष्टाचार भी ‘स्मार्ट’ : सीएम देवेंद्र फडणवीस की ‘स्मार्ट विलेज’ योजना पर शिवसेना-यूबीटी ने उठाए सवाल
शिवसेना-यूबीटी ने यह भी आरोप लगाया कि स्मार्ट सिटी योजना में जो घोटाले हुए, वे तब तक सामने नहीं आएंगे जब तक इन आठ शहरों की महानगरपालिकाओं, आयुक्तों और पालकमंत्रियों के कामकाज का ऑडिट नहीं किया जाता। मुंबई जैसे अंतरराष्ट्रीय शहर की हालत खुद बोल रही है।
शिवसेना-यूबीटी ने सवाल किया कि मुंबई जैसे अंतरराष्ट्रीय शहरों में स्थिति भयावह हो गई है। जब ‘स्मार्ट सिटी मिशन’ की इतनी दुर्गति है, तब मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्मार्ट विलेज योजना की घोषणा की, इसलिए यह प्रपंच है। साथ ही, आरोप लगाए गए हैं, “कहीं ऐसा तो नहीं कि इस स्मार्ट गांव योजना का इस्तेमाल अपने-अपने ठेकेदार लॉबी को काम दिलाने और उसमें हिस्सेदारी का इस्तेमाल उसी गांव के चुनाव में किए जाने के लिए तो यह खेल नहीं खेला जा रहा है? ‘लाडली बहन’ योजना में भी यही हुआ।”
संपादकीय में लिखा है, “फडणवीस ने हर तालुका में 10 गांवों को स्मार्ट बनाने की योजना की घोषणा की है। पिछले 10 वर्षों में इनमें से कई गांवों में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य केंद्र ले जाते हुए रास्ते में ही प्रसव हो जाता है। अक्सर शिशुओं और गर्भवती महिलाओं की जान चली जाती है। माता-पिता को अपने बच्चे के शव को अपने कंधों पर लेकर यात्रा करनी पड़ती है। फडणवीस के कार्यकाल में 800 करोड़ रुपए का एंबुलेंस घोटाला हुआ। मुख्यमंत्री ने उस घोटाले पर क्या कार्रवाई की? ये एंबुलेंस कहां गईं?”
शिवसेना-यूबीटी ने आखिर में लिखा है, “सरकार राज्य के 3500 गांवों में कौन से ‘स्मार्ट झंडे’ गाड़ने वाली है? यह ‘ठेकेदारों के जरिए पैसा इकट्ठा करने का नया मिशन’ नहीं होना चाहिए। फडणवीस स्मार्ट हैं। उनके राज्य में भ्रष्टाचार भी ‘स्मार्ट’ है।”
गणेश चतुर्थी मेले के दौरान पुलिस ने की विशेष यातायात एवं पार्किंग व्यवस्था
जयपुर।
गणेश चतुर्थी के अवसर पर मोती डूंगरी गणेश मंदिर में 26 और 27 अगस्त 2025 को भारी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इसको देखते हुए यातायात पुलिस ने विशेष व्यवस्थाएं लागू करने की घोषणा की है। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (यातायात एवं प्रशासन) योगेश दाधीच ने बताया कि श्रद्धालुओं को सुविधा देने और ट्रैफिक को सुचारू बनाए रखने के लिए पार्किंग, नो-पार्किंग और डायवर्जन की विस्तृत योजना बनाई गई है। पार्किंग व्यवस्था टोंक रोड और भवानी सिंह रोड से आने वाले श्रद्धालु अपने वाहन सुबोध कॉलेज परिसर में पार्क करेंगे। जेएलएन मार्ग, शांति पथ और जवाहर नगर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग राजस्थान विश्वविद्यालय परिसर में रहेगी। गोविंद मार्ग, रामनिवास बाग और परकोटे से आने वाले दर्शनार्थी अपने वाहन धर्मसिंह सर्किल से मोतीडूंगरी रोड, आरोग्य पथ होकर पुलिस मेमोरियल से पहले जेएलएन मार्ग की सर्विस लेन पर एक लाइन में पार्क करेंगे। नो-पार्किंग जोन आरोग्य पथ से गांधी सर्किल तक जेएलएन मार्ग। पृथ्वीराज टी. प्वाइंट से रामबाग चौराहा (टोंक रोड)। त्रिमूर्ति सर्किल से राजापार्क चौराहा (गोविंद मार्ग)। रामबाग चौराहा से जेडीए चौराहा, और जेडीए चौराहा से तुलसी सर्किल तक। डायवर्जन योजना 26 अगस्त सुबह 11 बजे से 27 अगस्त को आयोजन समाप्ति तक त्रिमूर्ति सर्किल से जेडीए चौराहा, आरबीआई तिराहा से गणेश मंदिर और धर्मसिंह सर्किल से गणेश मंदिर तक का मार्ग बंद रहेगा। वाहनों को वैकल्पिक मार्गों पर डायवर्ट किया जाएगा। नारायण सिंह तिराहा से त्रिमूर्ति सर्किल की ओर जाने वाला ट्रैफिक आवश्यकतानुसार पृथ्वीराज टी. प्वाइंट की ओर डायवर्ट किया जाएगा। गांधी सर्किल से जेडीए चौराहा जाने वाला ट्रैफिक गांधी नगर मोड़ और रॉयल्टी तिराहा (अरण्य भवन) की ओर मोड़ा जा सकेगा। रामबाग चौराहा से जेडीए चौराहा, और पोलो सर्किल से रामबाग चौराहा जाने वाले वाहनों को समानांतर मार्गों पर भेजा जाएगा। टोंक रोड पर दबाव अधिक होने पर पृथ्वीराज टी. प्वाइंट से रामबाग चौराहा जाने वाला ट्रैफिक पृथ्वीराज रोड पर डायवर्ट होगा।
गणेश चतुर्थी मेले के दौरान पुलिस ने की विशेष यातायात एवं पार्किंग व्यवस्था
बस परिचालन टोंक रोड पर दबाव अधिक होने पर गोपालपुरा से यादगार तिराहा आने वाली बसें लक्ष्मी मंदिर से सहकार मार्ग पर चलाई जाएंगी। यादगार तिराहा से गोपालपुरा की ओर जाने वाली बसें अशोका टी. प्वाइंट से अशोका मार्ग पर संचालित होंगी। दिल्ली रोड से सिंधी कैंप आने वाली रोडवेज बसें चंदवाजी से एक्सप्रेस हाईवे, सीकर रोड, चौमूं तिराहा, पानीपेच, कलक्ट्री सर्किल होते हुए सिंधी कैंप आएंगी। सिंधी कैंप से दिल्ली और आगरा रोड की ओर जाने वाली बसें वनस्थली मार्ग, गवर्नमेंट हॉस्टल चौराहा, एमआई रोड, गुरुद्वारा मोड़, टीपी नगर होकर दिल्ली रोड जाएंगी। आगरा रोड से सिंधी कैंप आने वाली बसें रोटरी सर्किल, जवाहर नगर बाईपास, झालाना रोड, ओटीएस चौराहा, बजाज नगर तिराहा, सहकार मार्ग, बाईस गोदाम, चौमूं हाउस चौराहा होते हुए सिंधी कैंप पहुंचेंगी। श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधाएं जेसीटीएसएल द्वारा रामनिवास बाग की भूमिगत पार्किंग से त्रिमूर्ति सर्किल तक और मालवीय नगर पुलिया से जेडीए चौराहा तक बस सेवा चलाई जाएगी। दिव्यांग और वृद्ध श्रद्धालुओं के लिए मंदिर प्रशासन ने पार्किंग स्थलों से मंदिर तक निशुल्क ई-रिक्शा सेवा की व्यवस्था की है। जेएलएन मार्ग पर अधिक भीड़ को देखते हुए मानसरोवर, सांगानेर और जगतपुरा क्षेत्र से परकोटे की ओर जाने वाले वाहन चालकों को टोंक रोड का अधिक प्रयोग करने की सलाह दी गई है। आमजन से अपील पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि मेले के दौरान यातायात व्यवस्था में सहयोग करें और यथासंभव वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें।
बुलंदशहर हादसे में आठ की मौत, कई घायल; मुख्यमंत्री ने किया आर्थिक मदद का ऐलान
बुलंदशहर में भीषण सड़क हादसा: श्रद्धालुओं से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली को टैंकर ने मारी टक्कर, 8 की मौत, 45 घायल
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के खुर्जा क्षेत्र में रविवार को एक दर्दनाक और दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को पीछे से आ रहे टैंकर ने ज़ोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में आठ लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 45 अन्य लोग घायल हो गए हैं, जिनमें से तीन की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है। यह दुर्घटना एनएच-34 पर अलीगढ़ बॉर्डर के पास घटित हुई, जिसने पूरे इलाके में शोक और दहशत का माहौल पैदा कर दिया।
घटना के संबंध में जानकारी देते हुए बुलंदशहर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि यह हादसा उस वक्त हुआ जब कासगंज थाना क्षेत्र के रहने वाले करीब 60-61 लोग एक ट्रैक्टर ट्रॉली में सवार होकर राजस्थान के धार्मिक स्थल की ओर यात्रा कर रहे थे। जैसे ही वाहन एनएच-34 पर अलीगढ़ बॉर्डर के निकट पहुंचा, पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार टैंकर ने ट्रैक्टर-ट्रॉली को जबरदस्त टक्कर मार दी, जिससे ट्रॉली अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पलट गई। ट्रॉली में बैठे सभी श्रद्धालु सड़कों पर इधर-उधर जा गिरे।
घटना की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि टक्कर के बाद चीख-पुकार मच गई और कई लोग ट्रॉली के नीचे दब गए। हादसे के तत्काल बाद आसपास के राहगीरों, स्थानीय ग्रामीणों और वहां से गुजर रही गाड़ियों के यात्रियों ने घायलों को बाहर निकालने की कोशिश शुरू की। कुछ ही देर में पुलिस टीम और एंबुलेंस भी मौके पर पहुंची और राहत व बचाव कार्य शुरू किया गया।
एसएसपी दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि 8 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है, जिनमें महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल हैं। घायल 45 यात्रियों को तत्काल इलाज के लिए नजदीकी जिला अस्पताल और अन्य निजी अस्पतालों में भेजा गया है। गंभीर रूप से घायल 10 लोगों को अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है, जहां उनका उपचार जारी है। जिला अस्पताल में 10 घायलों का इलाज चल रहा है, जबकि 23 अन्य मरीजों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
पुलिस द्वारा दुर्घटनास्थल से ट्रैक्टर और टैंकर को हटवा लिया गया है और टैंकर को पुलिस कस्टडी में ले लिया गया है। टैंकर चालक की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। पुलिस द्वारा मामले की जांच प्रारंभ कर दी गई है और ट्रैफिक विशेषज्ञों की मदद से हादसे के कारणों का विश्लेषण किया जा रहा है। अब तक की जांच में तेज रफ्तार और चालक की लापरवाही को हादसे का प्रमुख कारण माना गया है।
बुलंदशहर हादसे में आठ की मौत, कई घायल; मुख्यमंत्री ने किया आर्थिक मदद का ऐलान
इस दर्दनाक दुर्घटना की जानकारी मिलते ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा शोक व्यक्त किया और जिला प्रशासन को तत्काल राहत और बचाव कार्य संचालित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने इस हादसे में मारे गए श्रद्धालुओं के परिजनों को ₹2 लाख की आर्थिक सहायता और प्रत्येक घायल को ₹50 हजार की सहायता राशि देने की घोषणा की है। इसके साथ ही, सरकार ने सभी घायलों के इलाज का पूरा खर्च उठाने की भी जिम्मेदारी ली है।
मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के शोक-संतप्त परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट की है और घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए जिला प्रशासन को उनके समुचित उपचार और देखभाल के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई और सड़क सुरक्षा नियमों के सख्त पालन को सुनिश्चित करेगी।
हादसे के प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि ट्रॉली सवार सभी लोग धार्मिक कार्यक्रम के लिए राजस्थान जा रहे थे, और यात्रा के दौरान श्रद्धा और भक्ति में लीन थे। लेकिन एक क्षणिक लापरवाही ने उनकी यात्रा को मातम में बदल दिया। हादसे की भयावहता ने राहगीरों और स्थानीय लोगों को भी झकझोर दिया। कई प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दुर्घटना के बाद का दृश्य हृदय विदारक था — खून से सनी सड़क, घायल लोगों की चीखें और बिखरे हुए सामानों के बीच अपनों को ढूंढते हुए पीड़ित।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि एनएच-34 पर भारी वाहनों की आवाजाही बहुत अधिक है और स्पीड नियंत्रण के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं। इसके साथ ही, ऐसे धार्मिक यात्राओं के लिए इस्तेमाल किए जा रहे ट्रैक्टर-ट्रॉली जैसे असुरक्षित वाहन भी अक्सर हादसों का कारण बनते हैं। ट्रैक्टर ट्रॉली को कृषि उपयोग तक सीमित रखने के नियमों के बावजूद इनका प्रयोग यात्रियों की ढुलाई के लिए किया जाता है, जो कि न केवल अवैध है, बल्कि अत्यंत खतरनाक भी।
राज्य सरकार और प्रशासन के लिए यह हादसा सड़क सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा करने का एक बड़ा संकेत है। बार-बार हो रही ऐसी दुर्घटनाओं के बावजूद ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन, ओवरलोडिंग, और बिना अनुमति के सवारी ढोने जैसे मामलों में सख्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अब समय आ गया है कि सरकार ऐसे वाहनों की मॉनिटरिंग के लिए GPS आधारित निगरानी प्रणाली लागू करे, साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाए ताकि लोग गैरकानूनी ढोवाहन का प्रयोग धार्मिक या पारिवारिक यात्राओं के लिए न करें।
सड़क पर तैनात ट्रैफिक पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए, क्योंकि यदि नियमित जांच और निगरानी हो रही होती, तो ऐसे ट्रैक्टर-ट्रॉली को इस प्रकार ओवरलोड होकर राजमार्ग पर चलने की अनुमति नहीं मिलती।
फिलहाल, प्रशासन की प्राथमिकता घायलों का समुचित इलाज सुनिश्चित करना है। अस्पतालों में डॉक्टर्स की विशेष टीम को तैनात किया गया है, और जिला अधिकारी स्वयं लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। कुछ परिवारों के लिए यह हादसा अपनों के छिन जाने का दुखद संदेश लेकर आया, जबकि कई लोग अस्पतालों में जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं।
निष्कर्षतः, बुलंदशहर का यह हादसा एक और दुखद और चौंकाने वाली घटना है, जो यह बताता है कि सड़क पर हर छोटी लापरवाही कितनी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है। प्रशासन, सरकार और समाज को मिलकर यह तय करना होगा कि अब और ज़िंदगियाँ यूँ सड़कों पर न खोई जाएँ। यदि इस हादसे से कोई सबक नहीं लिया गया, तो आने वाले समय में हम और अधिक निर्दोष लोगों की जानें इस तरह की दुर्घटनाओं में खोते रहेंगे। सड़कें श्रद्धा की यात्रा का माध्यम होनी चाहिए, किसी के जीवन की आखिरी मंज़िल नहीं।
हरियाणा : कैथल में रोडवेज बस और पिकअप की टक्कर, चार की मौत
हरियाणा में सड़क हादसों का कहर: कैथल और बहादुरगढ़ में दर्दनाक दुर्घटनाएं, 8 की मौत, दर्जनों घायल
हरियाणा:- में सड़क हादसे लगातार गंभीर चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। राज्य में तेज रफ्तार, लापरवाही और भारी वाहनों की टक्कर के कारण जानमाल का बड़ा नुकसान सामने आ रहा है। ताजा घटनाओं में सोमवार को कैथल जिले में और बीते बुधवार को बहादुरगढ़ में दो भीषण सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें कुल मिलाकर 8 लोगों की मौत हो गई जबकि 40 से अधिक लोग घायल हुए हैं। ये हादसे न केवल सिस्टम की विफलता की ओर इशारा करते हैं बल्कि सड़क सुरक्षा की जमीनी हकीकत को भी उजागर करते हैं।
कैथल: धार्मिक यात्रा के दौरान हादसा, 4 की मौत
हरियाणा के कैथल जिले में सोमवार सुबह एक बेहद दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने स्थानीय लोगों को झकझोर कर रख दिया। यह हादसा नेशनल हाइवे-152 पर क्योड़क गांव के पास हुआ, जहां हरियाणा रोडवेज की बस और एक पिकअप वाहन की आमने-सामने की टक्कर हो गई। पिकअप में सवार सात लोग पिहोवा स्थित एक गुरुद्वारे में धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर इतनी भीषण थी कि पिकअप का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें बैठे लोगों के बाहर निकलने का रास्ता तक नहीं रहा।
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और एंबुलेंस मौके पर पहुंची और सभी घायलों को तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाया गया। लेकिन अफसोस की बात है कि चार लोगों की इलाज के दौरान मौत हो गई। अन्य तीन घायल गंभीर रूप से जूझ रहे हैं और उनका इलाज जारी है। इस हादसे के बाद इलाके में दहशत और शोक का माहौल है, क्योंकि मृतक आपस में रिश्तेदार थे और एक धार्मिक यात्रा पर निकले थे।
प्रारंभिक जांच में पुलिस ने तेज रफ्तार और वाहन चालकों की लापरवाही को हादसे का मुख्य कारण बताया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मार्ग अत्यधिक व्यस्त रहता है और वहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। इसके अलावा, भारी वाहन अक्सर तेज गति से चलते हैं जिससे दुर्घटनाओं की संभावना बनी रहती है। इस दर्दनाक घटना के बाद प्रशासन पर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या पर्याप्त सावधानियां बरती जा रही हैं या नहीं।
बहादुरगढ़: मजदूरों से भरी पिकअप में भीषण टक्कर, 4 प्रवासी मजदूरों की मौत
कैथल हादसे से पहले, बुधवार को बहादुरगढ़ में भी एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हुआ था। यह हादसा कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) एक्सप्रेसवे पर हुआ, जहां एक तेज रफ्तार कैंटर ने मजदूरों से भरी पिकअप गाड़ी को जबरदस्त टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भयानक थी कि पिकअप का पिछला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया और कैंटर के भी आगे के शीशे टूटकर बिखर गए।
हादसे में चार प्रवासी मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 33 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। मरने वालों में एक महिला और तीन पुरुष शामिल थे। पिकअप में कुल 37 मजदूर सवार थे, जो उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के अमन नगर और सीतापुर से हरियाणा के महेंद्रगढ़ के घोड़ाकैमला गांव फसल कटाई के लिए जा रहे थे। यह प्रवासी मजदूर खेतों में काम करने के लिए लंबी दूरी तय कर सड़क मार्ग से पहुंचे थे, लेकिन दुर्भाग्यवश उन्हें बीच रास्ते में ही मौत मिल गई।
घटना के तुरंत बाद राहत व बचाव कार्य शुरू किया गया और सभी घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। कई मजदूरों की हालत गंभीर बनी हुई है और उन्हें उच्च चिकित्सा सहायता की आवश्यकता है। हादसे के बाद प्रवासी समुदाय में भारी गुस्सा और शोक व्याप्त है। मजदूरों के परिजनों को जैसे ही यह खबर मिली, वे बदहवास होकर अस्पतालों की ओर दौड़ पड़े।
हरियाणा : कैथल में रोडवेज बस और पिकअप की टक्कर, चार की मौत
दोनों हादसों में उभरे सवाल और सिस्टम की विफलता
इन दोनों सड़क हादसों ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या देश में सड़क सुरक्षा सिर्फ दस्तावेजों तक सीमित है? कैथल और बहादुरगढ़ की घटनाओं में जो बातें सामने आईं हैं, वे संकेत देती हैं कि तेज रफ्तार, लापरवाही, ओवरलोडिंग और अधूरी सुरक्षा व्यवस्थाएं ही नहीं, बल्कि सिस्टम की उदासीनता भी इन हादसों का कारण है।
कैथल हादसे में जहां धार्मिक भावनाओं से जुड़ी यात्रा त्रासदी में बदल गई, वहीं बहादुरगढ़ हादसे ने प्रवासी श्रमिकों की असुरक्षा और जोखिमभरी यात्रा की हकीकत उजागर कर दी। सड़कें तो बन गईं लेकिन उन पर चलने वालों की सुरक्षा के लिए ठोस उपाय अब भी नदारद हैं। न तो भारी वाहनों की गति पर नियंत्रण है और न ही ओवरलोडिंग या फिजिकल फिटनेस की जांच नियमित होती है।
आए दिन होने वाली इन घटनाओं के बावजूद सरकारी स्तर पर सजगता का अभाव दिखता है। कैथल और बहादुरगढ़ पुलिस दोनों ही मामलों की जांच में जुटी है, लेकिन यह जांच तब तक अधूरी रहेगी जब तक ऐसे हादसों को रोकने के लिए स्थायी समाधान नहीं ढूंढा जाता।
मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
दोनों हादसों के बाद मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। कैथल में मारे गए लोग स्थानीय समुदाय से थे, जिनकी सामाजिक पहचान थी और उनकी धार्मिक यात्रा के लिए पूरा गांव उत्साहित था। बहादुरगढ़ हादसे में मारे गए प्रवासी मजदूर गरीब परिवारों से थे, जो रोज़ी-रोटी के लिए सैकड़ों किलोमीटर दूर हरियाणा आए थे। दोनों ही घटनाओं में समाज के कमजोर वर्ग प्रभावित हुए हैं, जिनके लिए एक जीवन ही सब कुछ था।
प्रशासन की कार्रवाई और आगे की चुनौतियां
प्रशासन ने इन घटनाओं के बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन सवाल ये है कि क्या यह कार्रवाई भविष्य में हादसों को रोक सकेगी? क्या सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता मिलेगी या ये हादसे भी अन्य हादसों की तरह सिर्फ आंकड़ों में दर्ज रह जाएंगे?
जरूरत इस बात की है कि राज्य और केंद्र सरकार मिलकर सड़क सुरक्षा नीति को न केवल लागू करें, बल्कि स्थानीय प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस को भी संसाधनों से सुसज्जित करें। इसके साथ ही, वाहन चालकों के लिए नियमित प्रशिक्षण, CCTV निगरानी, रफ्तार पर सख्त नियंत्रण, और ओवरलोडिंग के विरुद्ध अभियान चलाने की जरूरत है।
निष्कर्ष
हरियाणा के कैथल और बहादुरगढ़ में हुए सड़क हादसे केवल दो घटनाएं नहीं हैं, बल्कि एक गहरी चिंता की पुकार हैं। यह वक्त है जब सरकार, प्रशासन, ट्रांसपोर्ट विभाग और आम नागरिक मिलकर यह तय करें कि अब और जानें सड़क पर न जाएं। अगर अब भी हम नहीं जागे, तो अगला हादसा किसी और की नहीं, हमारे अपनों की भी जान ले सकता है।
सरकार को चाहिए कि मृतकों के परिवारों को मुआवजा दे, घायलों का मुफ्त इलाज कराए और साथ ही दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोहराई न जाए। सड़कें जीवन का माध्यम होनी चाहिए, मौत का कारण नहीं।
पंजाब पुलिस ने बंबीहा गैंग के चार शूटर को किया गिरफ्तार, हथियार बरामद
बरनाला में देविंदर बंबीहा गैंग के चार शातिर अपराधी गिरफ्तार, बड़ी लूट की साजिश नाकाम
बरनाला, पंजाब — संगठित अपराध के खिलाफ एक और बड़ी सफलता अर्जित करते हुए, पंजाब पुलिस ने एक बड़ी आपराधिक साजिश को नाकाम कर दिया है। बरनाला जिले की पुलिस ने देविंदर बंबीहा गैंग के चार सक्रिय और खतरनाक सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है, जो एक बड़ी डकैती की योजना बना रहे थे। यह कार्रवाई एक विशेष नाका अभियान के तहत की गई, जिसमें पुलिस की तत्परता, साहस और रणनीति ने अपराधियों की चालों को विफल कर दिया।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान सतनाम सिंह उर्फ सत्ती, गुरप्रीत सिंह उर्फ गुरी, सरम सिंह उर्फ रिंकू और दीपक सिंह के रूप में हुई है। ये सभी अपराधी पहले से ही पुलिस रिकॉर्ड में संलिप्त रहे हैं और देविंदर बंबीहा गैंग के प्रमुख और सक्रिय सदस्य बताए जा रहे हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, ये आरोपी एक बड़ी लूट की योजना को अंतिम रूप दे रहे थे, जब बरनाला पुलिस को गुप्त सूचना मिली और तत्काल एक्शन लिया गया।
पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने इस कार्रवाई की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से साझा की। उन्होंने बताया कि जब पुलिस की एक टीम ने संदिग्ध वाहन को रोकने की कोशिश की, तो उसमें सवार अपराधियों ने पुलिस पार्टी पर गोलीबारी शुरू कर दी। जवाब में, पुलिसकर्मियों ने न केवल स्थिति को नियंत्रित किया बल्कि अपराधियों को उनके वाहन समेत धर-दबोचा। इस दौरान पुलिस की ओर से कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ, जो पुलिसकर्मियों की सतर्कता और सूझबूझ को दर्शाता है।
गिरफ्तारी के दौरान आरोपियों के पास से चार हथियार बरामद किए गए हैं। इनमें एक जिगाना पिस्तौल, तीन अन्य पिस्तौल (.30 बोर और .32 बोर) और जिंदा कारतूस शामिल हैं। यह बरामदगी यह स्पष्ट करती है कि आरोपी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के इरादे से पूरी तैयारी के साथ निकले थे। बरामद हथियारों से न केवल अपराध की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है, बल्कि यह भी सिद्ध होता है कि देविंदर बंबीहा गिरोह आज भी संगठित और खतरनाक योजनाओं के साथ सक्रिय है।
डीजीपी गौरव यादव ने जानकारी दी कि सतनाम सिंह एक आदतन अपराधी है और उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, आर्म्स एक्ट और एनडीपीएस एक्ट के तहत 22 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। इससे उसके आपराधिक इतिहास और गिरोह में उसकी भूमिका का भी पता चलता है। वहीं, सरम सिंह और दीपक सिंह नशीले पदार्थों की तस्करी से भी जुड़े हुए हैं, जो इस गिरोह की बहुआयामी आपराधिक गतिविधियों का संकेत देता है। इसका अर्थ यह है कि यह गैंग न केवल हथियारों और डकैती में लिप्त है, बल्कि नशे के अवैध कारोबार में भी सक्रिय रूप से संलग्न है।
बरनाला पुलिस की यह कार्रवाई न केवल एक संभावित डकैती को रोकने में सफल रही, बल्कि इससे यह भी साफ हो गया है कि पंजाब पुलिस राज्य में अपराध और असामाजिक तत्वों के खिलाफ कितनी गंभीरता से अभियान चला रही है। संगठित अपराध और गैंगस्टर नेटवर्क के खिलाफ पुलिस की इस निर्णायक कार्रवाई से न केवल आम जनता को राहत मिली है, बल्कि कानून व्यवस्था को लेकर लोगों का विश्वास भी मजबूत हुआ है।
पंजाब पुलिस ने बंबीहा गैंग के चार शूटर को किया गिरफ्तार, हथियार बरामद
इस कार्रवाई के बाद डीजीपी गौरव यादव ने प्रेस को संबोधित करते हुए बताया कि पकड़े गए आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है। शुरुआती पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली हैं, जिनके आधार पर पुलिस अन्य संदिग्धों और सहयोगियों की तलाश में जुटी है। आशा जताई जा रही है कि आगे की पूछताछ से इस गैंग के अन्य सदस्यों, उनके नेटवर्क और अपराध की योजनाओं के बारे में और महत्वपूर्ण खुलासे होंगे। यह भी संभावना जताई जा रही है कि यह गिरोह राज्य के कई अन्य जिलों में भी सक्रिय हो सकता है।
डीजीपी ने यह भी स्पष्ट किया कि पंजाब पुलिस राज्य में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि संगठित अपराध, ड्रग्स तस्करी, अवैध हथियारों की आपूर्ति और गैंगस्टर गतिविधियों को जड़ से खत्म करने के लिए पुलिस बल पूरी ताकत से कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने इस बात का भी आश्वासन दिया कि आम जनता की सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी आपराधिक तत्व को बख्शा नहीं जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम में जिस प्रकार पुलिस ने एक सटीक और साहसिक अभियान चलाकर अपराधियों को गिरफ्तार किया, वह निश्चित रूप से एक सराहनीय उपलब्धि है। नाका बंदी के दौरान जिस तरह से आरोपियों ने गोलीबारी की और पुलिस ने संयम और रणनीति से स्थिति को संभाला, वह पुलिस की पेशेवर क्षमता को दर्शाता है। ऐसी घटनाएं यह भी साबित करती हैं कि पंजाब पुलिस अब केवल पारंपरिक तरीके से नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक, गुप्त सूचना तंत्र और तेज रिएक्शन के साथ काम कर रही है।
देविंदर बंबीहा गैंग, जो कि पंजाब के कुख्यात गैंगस्टरों में गिना जाता है, लंबे समय से पुलिस और आम जनता के लिए एक चुनौती बना हुआ था। हालांकि, इस गैंग के प्रमुख सदस्य पहले ही मुठभेड़ों या गिरफ्तारियों के जरिए कानून के शिकंजे में आ चुके हैं, फिर भी इसका नेटवर्क अभी तक पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। यह हालिया गिरफ्तारी इस बात का संकेत है कि पुलिस उस शेष नेटवर्क को भी पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए पूरी तरह तत्पर है।
इस कार्रवाई से न केवल बरनाला जिले बल्कि समूचे पंजाब में संगठित अपराध के खिलाफ एक मजबूत संदेश गया है। यह भी उम्मीद की जा रही है कि इस प्रकार की सख्त कार्रवाइयों से अन्य अपराधियों और गिरोहों के मन में डर उत्पन्न होगा और राज्य में अपराध दर में गिरावट आएगी। समाज के हर वर्ग को इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि पुलिस उनके हितों की रक्षा के लिए दिन-रात कार्य कर रही है और किसी भी आपराधिक प्रवृत्ति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पुलिस विभाग ने आम जनता से भी अपील की है कि यदि किसी को भी इस गिरोह या इससे संबंधित अन्य अपराधियों की गतिविधियों के बारे में जानकारी हो, तो वह तुरंत पुलिस को सूचित करें। जनता और पुलिस के बीच सहयोग से ही अपराधों पर पूर्ण नियंत्रण संभव है।
अंततः, बरनाला पुलिस की यह कार्रवाई न केवल एक अपराध को समय रहते रोकने की मिसाल है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि पंजाब पुलिस संगठित अपराध और गैंगस्टर संस्कृति को समाप्त करने की दिशा में सख्त, संगठित और प्रभावी कदम उठा रही है। आने वाले समय में और भी बड़ी गिरफ्तारियों और नेटवर्क के खुलासे की उम्मीद की जा रही है, जिससे राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति और मजबूत हो सकेगी।
फरार जेठ-ससुर गिरफ्तार लेकिन ऐसा वीडियो आया सामने जो सब को चौंका देगा
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा
ग्रेटर नोएडा:- के थाना कासना क्षेत्र में हुई निक्की मौत का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। अब इस मामले में पुलिस ने फरार जेठ और ससुर को गिरफ्तार कर लिया है। आज यानी सोमवार को पुलिस ने पहले जेठ को पकड़ा, इसके कुछ समय बाद ही ससुर को भी गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने विवाहिता की जलाकर मर्डर के मामले में वांछित चल रहे जेठ रोहित भाटी को सिरसा टोल चैराहा के पास से गिरफ्तार किया। आरोपी वारदात के बाद फरार हो गए थे। अब तक इस मामले में पुलिस ने आरोपी पति विपिन भाटी को गिरफ्तार किया, इसके बाद सास दया को भी गिरफ्तार कर लिया गया था। सास को आज न्यायिक हिरासत में भेजा जाएगा।वहीं, गोपनीय सूचना की मदद से फरार ससुर सत्यवीर (55) को सिरसा चैराहा के पाससेगिरफ्तार किया है। घटना के बाद से आरोपी फरार चल रहा था। इस मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वतरू संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश के डीजीपी को पत्र भेजा है। आयोगनेसभीआरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और तीन दिनों के अंदर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। साथ ही निष्पक्ष जांच और पीड़िता के परिजनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है।वहीं, रविवार को पत्नी निक्की को जिंदा जलाने का आरोपी पति विपिन भाटी पुलिस मुठभेड़ में गोली लगने से घायल हो गया।
फरार जेठ-ससुर गिरफ्तार लेकिन ऐसा वीडियो आया सामने जो सब को चौंका देगा
ग्रेटर नोएडा की कासना कोतवाली पुलिस आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद उसकी निशानदेही पर ज्वलनशील पदार्थ (थिनर) बरामद करने के लिए उसे लेकर सिरसा गांव गई थी। वहीं, घायल विपिन को देखने पहुंची उसकी मां और आरोपी दया को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। अदालत ने विपिन को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस ने बताया, मुखबिर की सूचना और इलेक्ट्रानिक सर्विलांस के जरिये आरोपी विपिन को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद पुलिस जब विपिन को मेडिकल कराने के लिए ले जा रही थी तभी उसने भागने की कोशिश की। पुलिस ने मुठभेड़ की और उसे पकड़ लिया। पुलिस रविवार दोपहर 12 बजे ज्वलनशील पदार्थ की बरामदगी कराने के लिए उसे एक खेत पर लेकर पहुंची थी। तभी सिरसा चैराहे के पास आरोपी ने जिम्स चैकी इंचार्ज दरोगा वरुण की पिस्तौल निकालकर दो गोलियां दाग दीं और भाग निकला। पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की। पैर में गोली लगने के बाद आरोपी वहीं गिर गया।वीडियो हो रहा वायरलएक वीडियो और वायरल हो रहा है जिसमे दावा किया जा रहा है कि जिस वक्त निक्की जली उस दौरान पति विपिन घर पर मौजूद नहीं था। हालांकि पुलिस फ़िलहाल इस तरह की सभी बातों से इंकार कर रही है। पुलिस का कहना है कि यदि ऐसा कुछ है तो जांच की जा रही है।
बुलंदशहर में ट्रक-डीसीएम भिड़ंत, 3 की मौत, 31 लोग घायल, मचा कोहराम
बुलंदशहर: उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में शुक्रवार तड़के सुबह लगभग 3 से 4 बजे के बीच बुलंदशहर के अनूपशहर रोड पर स्थित गांव रौंडा के पास एक तेज रफ्तार ट्रक और डीसीएम की जोरदार टक्कर हो गई। हादसा इतना भयानक था कि मौके पर ही महिला समेत तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि 31 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। जानकारी के अनुसार, डीसीएम में सवार सभी यात्री पंजाब के एक ईंट भट्ठे में मजदूरी करने के बाद अपने पैतृक गांव शाहजहांपुर लौट रहे थे।
बुलंदशहर जिले के जहांगीराबाद कस्बे में अचानक ट्रक और डीसीएम के बीच आमने-सामने की टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि डीसीएम का चालक भी मौके पर ही दम तोड़ बैठा। वहीं, एक्सिडेंट के बाद ट्रक चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया। हादसे की सूचना मिलते ही सीओ अनूपशहर और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया।
अस्पताल भेजे गए घायल
पुलिस ने दुर्घटना स्थल पर पहुंचकर सभी घायलों को तत्काल रेस्क्यू कर जिला अस्पताल भिजवाया। जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद 27 घायलों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें हायर मेडिकल सेंटर रेफर कर दिया गया, जबकि चार घायलों का इलाज जिला अस्पताल में ही जारी है।
बुलंदशहर में ट्रक-डीसीएम भिड़ंत, 3 की मौत, 31 लोग घायल, मचा कोहराम
डीएम-एसएसपी पहुंचे अस्पताल
एक्सीडेंट की जानकारी मिलते ही डीएम श्रुति और एसएसपी दिनेश कुमार सिंह ने जिला अस्पताल पहुंचकर घायलों के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। घायलों से बातचीत में हादसे की बारे में जानकारी ली। डीएम ने सीएमएस को निर्देशित किया गया कि घायलों का अच्छी प्रकार से उपचार कराया जाए। इस अवसर पर एसपी देहात तेजवीर सिंह, एसडीएम सदर नवीन कुमार सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।हादसे ने एक बार फिर जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़ा किया है। पुलिस ने इस मामले में ट्रक चालक की तलाश शुरू कर दी है। मामले की जांच जारी है। साथ ही, पुलिस ने मौके से दुर्घटना वाले वाहनों को हटाकर सड़क पर ट्रैफिक को सुचारू कराया है।
एसपी ने दी जानकारी
भीषण दुर्घटना को लेकर एसपी देहात तेजवीर सिंह ने बताया कि सुबह लगभग 3 से 4 बजे के बीच में एक हादसा हुआ। 36 लोग यात्रा कर रहे थे। इनमें से 34 लोग जिला अस्पताल घायल आए थे। घायलों में से तीन लोगों की मौत हो गई। 27 घायलों को हायर सेंटर रेफर किया गया है। चार लोगों का इलाज बुलंदशहर जिला अस्पताल में चल रहा है।
क्या था घटना का कारण?
घटना के कारणों को लेकर एक जानकारी सामने आई है। दरअसल, एक आइसर कैंटर पंजाब के मौरा से शाहजहांपुर के हरदोई जा रहा था। आज सुबह कैंटर सवार ड्राइवर को नींद में झपकी आ गई। इस कारण वह ट्रक में टकरा गया, जिससे यह हादसा हुआ है। हादसे के बाद ट्रक चालक मौके से फरार हो गया।
क्षेत्र के श्यामपुर खुर्द और सुरतपुरा गांव इन दिनों लगातार हो रही बारिश के कारण बदहाल सड़कों की समस्या से जूझ रहे हैं। बरसात के चलते सड़कों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि ग्रामीणों का जनजीवन पूरी तरह से प्रभावित हो गया है। जगह-जगह पानी से भरे बड़े-बड़े गड्ढों ने सड़कों को नाले में तब्दील कर दिया है। न केवल वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो रही है, बल्कि पैदल चलना भी दूभर हो गया है। यह स्थिति ग्रामीणों के लिए भारी परेशानी और जोखिम का कारण बन गई है।
सबसे अधिक परेशानी स्कूल जाने वाले बच्चों को हो रही है। कीचड़ भरी सड़कों से गुजरते समय बच्चों के जूते चिपक जाते हैं, और कई बार वे फिसलकर गिर भी जाते हैं। बच्चों के बैग और किताबें तक पानी में गिरकर खराब हो जाती हैं। कुछ अभिभावकों ने तो बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें स्कूल भेजना बंद कर दिया है। इससे बच्चों की पढ़ाई पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। यह स्थिति इस बात को दर्शाती है कि कैसे बुनियादी ढांचे की कमी बच्चों के भविष्य के रास्ते में बाधा बन रही है।
किसानों की मुश्किलें और बढ़ीं
इस गंभीर स्थिति का दूसरा बड़ा असर क्षेत्र के किसानों पर पड़ा है। बारिश के मौसम में जब खेती के लिए काम चरम पर होता है, ऐसे में खेतों तक पहुँचने के लिए सड़कों का जर्जर होना किसानों के लिए एक बड़ी समस्या बन गया है। ट्रैक्टर, बैलगाड़ी या किसी अन्य वाहन का खेत तक जाना लगभग असंभव हो गया है। कई किसान ऐसे हैं जो धान, बाजरा, तिल और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई और निराई-गुड़ाई जैसे कार्यों को समय पर पूरा नहीं कर पा रहे हैं। इससे न केवल उनकी मेहनत प्रभावित हो रही है, बल्कि संभावित फसल उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।
किसानों का कहना है कि सड़कें यदि सही होतीं, तो वे आसानी से खाद, बीज और अन्य कृषि उपकरण खेतों तक ले जा सकते थे। लेकिन वर्तमान हालत में उन्हें कंधे पर बैग उठाकर खेतों तक जाना पड़ रहा है, जिससे समय, श्रम और ऊर्जा की बहुत हानि हो रही है। बारिश का पानी खेतों तक पहुँचाने वाली नालियों में भर गया है, जिससे खेतों की जल निकासी भी बाधित हो रही है।
जनजीवन अस्त-व्यस्त
गांव के दुकानदार, मजदूर, महिलाएं और बुजुर्ग सभी इस समस्या से त्रस्त हैं। आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में भी बाधा उत्पन्न हो रही है। दूध, सब्ज़ी और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुएं अब गांव तक समय पर नहीं पहुँच पा रही हैं। महिलाएं जो घर का राशन खरीदने के लिए आसपास के कस्बों में जाती हैं, उन्हें अब सड़क की हालत देखकर घर से निकलने में डर लगता है। बुजुर्ग और बीमार व्यक्तियों के लिए तो यह स्थिति और भी संकटपूर्ण हो गई है, क्योंकि उन्हें समय पर इलाज तक नहीं मिल पा रहा।
प्रशासन की उदासीनता
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि इस सड़क की स्थिति कोई नई नहीं है। कई सालों से सड़क मरम्मत की माँग की जा रही है। गांव वालों ने ग्राम पंचायत से लेकर तहसील और जिला प्रशासन तक कई बार शिकायतें की हैं। लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला, कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों ने कहा कि जब भी चुनाव आते हैं, तब जनप्रतिनिधि बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद गांव की समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं देता।
ग्राम पंचायत से लेकर लोक निर्माण विभाग तक को दर्जनों बार ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं। कई बार सोशल मीडिया पर भी सड़कों की तस्वीरें साझा की गईं, ताकि संबंधित अधिकारी संज्ञान लें। परंतु नतीजा सिफर ही रहा।
गंभीर खतरे की आशंका
गांव वालों का यह भी कहना है कि अगर सड़कों की स्थिति जल्द नहीं सुधारी गई, तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है। कई बार बाइक सवार गड्ढों में गिरकर चोटिल हो चुके हैं। बच्चों के फिसलने की घटनाएं आम हो चुकी हैं। बारिश के साथ-साथ यदि और जलभराव हो गया, तो महामारी फैलने का खतरा भी उत्पन्न हो सकता है, क्योंकि पानी कई जगहों पर जमा होकर मच्छरों की उत्पत्ति का कारण बन रहा है। इससे डेंगू, मलेरिया और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
ग्रामीणों की मांग
श्यामपुर खुर्द और सुरतपुरा के ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल सड़कों की मरम्मत और जल निकासी की व्यवस्था करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि इस दिशा में शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि सरकारी योजनाएं केवल कागजों तक सीमित रह गई हैं। “प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना” और “राज्य सड़क विकास योजना” जैसी योजनाओं के नाम पर प्रचार तो बहुत होता है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि यदि 15 दिनों के भीतर सड़कों की मरम्मत शुरू नहीं हुई, तो वे पंचायत कार्यालय और तहसील मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करेंगे और जनप्रतिनिधियों का घेराव करेंगे।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
इस बीच प्रशासन की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है। कुछ अधिकारियों का कहना है कि सड़कों की मरम्मत के लिए बजट की स्वीकृति प्रक्रिया में है, और जल्द काम शुरू होगा। हालांकि, ग्रामीण इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं, क्योंकि उन्हें पहले भी कई बार ऐसे वादे सुनने को मिल चुके हैं, जिन पर कभी अमल नहीं हुआ।
निष्कर्ष
श्यामपुर खुर्द और सुरतपुरा जैसे गांवों की स्थिति यह दर्शाती है कि ग्रामीण भारत में बुनियादी सुविधाओं की कितनी बड़ी कमी है। सड़कों की मरम्मत जैसी आवश्यक सुविधा का अभाव केवल असुविधा ही नहीं, बल्कि कभी-कभी जानलेवा भी हो सकता है। यह राज्य और केंद्र सरकार दोनों की जिम्मेदारी है कि वे गांवों में रहने वाले लोगों को भी शहरों जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रदान करें। बच्चों की शिक्षा, किसानों की खेती और आमजन का जीवन तब तक सुरक्षित नहीं हो सकता, जब तक सड़कों जैसी बुनियादी संरचना मजबूत न हो।
सरकार और प्रशासन को चाहिए कि वह इस समस्या का तत्काल समाधान करे, और ग्रामीणों के विश्वास को फिर से बहाल करे। क्योंकि जब सड़कें मजबूत होती हैं, तभी विकास की गति तेज होती है। सड़कों की हालत यदि यही रही, तो विकास के सारे दावे खोखले ही साबित होंगे।