जोधपुर पुलिस की बड़ी स्ट्राइक: मर्डर की साजिश नाकाम, हिस्ट्रीशीटर समेत 2 शूटर गिरफ्तार

जोधपुर पुलिस की बड़ी स्ट्राइक: मर्डर की साजिश नाकाम, हिस्ट्रीशीटर समेत 2 शूटर गिरफ्तार

जोधपुर पुलिस की बड़ी स्ट्राइक: मर्डर की साजिश नाकाम, हिस्ट्रीशीटर समेत 2 शूटर गिरफ्तार
जोधपुर पुलिस की बड़ी स्ट्राइक: मर्डर की साजिश नाकाम, हिस्ट्रीशीटर समेत 2 शूटर गिरफ्तार

जोधपुर। जोधपुर कमिश्नरेट की CST टीम ने एक बड़ी वारदात को अंजाम देने से पहले ही दो शातिर बदमाशों को दबोचकर शहर में खून-खराबा टाल दिया है। पुलिस ने कायलाना रोड पर घेराबंदी कर एक हिस्ट्रीशीटर और उसके साथी को अवैध पिस्टल और जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया है। ये बदमाश आपसी रंजिश के चलते एक व्यक्ति की हत्या करने की फिराक में थे। पुलिस आयुक्त ओमप्रकाश और डीसीपी (मुख्यालय एवं यातायात) शाहीन सी के निर्देशों पर अपराध नियंत्रण के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत यह सफलता मिली है। एडीसीपी सुनील के पवार के सुपरविजन में CST प्रभारी SI मेहराज और उनकी टीम ने सटीक सूचना पर कार्रवाई की। इस ऑपरेशन में कांस्टेबल बलवीर (नम्बर 2077) की विशेष भूमिका रही। पुलिस ने जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनका रिकॉर्ड बेहद चौंकाने वाला है: शौकत उर्फ भा सा (40) निवासी केरू। यह राजीव गांधी नगर थाने का घोषित हिस्ट्रीशीटर है और इसके खिलाफ पहले से 13 गंभीर मुकदमे दर्ज हैं औऱ वसीम (33) निवासी सिंधी बस्ती, मसूरिया है. इसके खिलाफ भी 8 मुकदमे दर्ज हैं।

जोधपुर पुलिस की बड़ी स्ट्राइक: मर्डर की साजिश नाकाम, हिस्ट्रीशीटर समेत 2 शूटर गिरफ्तार
जोधपुर पुलिस की बड़ी स्ट्राइक: मर्डर की साजिश नाकाम, हिस्ट्रीशीटर समेत 2 शूटर गिरफ्तार


पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आरोपी वसीम ने पुरानी रंजिश के चलते इमरान सौदागर को जान से मारने की धमकी दे रखी थी। वसीम पिछले कई दिनों से इमरान की रैकी कर रहा था और उसकी हर मूवमेंट पर नजर रख रहा था। पुलिस को सूचना मिली थी कि दोनों आरोपी हथियार लेकर वारदात को अंजाम देने के लिए कायलाना रोड के पास मौजूद हैं, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्हें दबोच लिया। इनके पास से एक पिस्टल और 2 जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं।
पुलिस के अनुसार, इन दोनों गुटों के बीच लंबे समय से खूनी रंजिश चल रही है। रंजिश का आलम यह है कि अब तक दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ हत्या के प्रयास और मारपीट सहित कुल 10-12 मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। समय रहते पुलिस की इस कार्रवाई ने एक और संभावित हत्या की वारदात को रोक दिया है।

नोएडा : क्रिसमस पर पुलिस अलर्ट, जारी हुई ट्रैफिक एडवाइजरी और रूट डायवर्जन प्लान

नोएडा : क्रिसमस पर पुलिस अलर्ट, जारी हुई ट्रैफिक एडवाइजरी और रूट डायवर्जन प्लान

नोएडा : क्रिसमस पर पुलिस अलर्ट, जारी हुई ट्रैफिक एडवाइजरी और रूट डायवर्जन प्लान
नोएडा : क्रिसमस पर पुलिस अलर्ट, जारी हुई ट्रैफिक एडवाइजरी और रूट डायवर्जन प्लान

नोएडा । क्रिसमस पर्व को लेकर नोएडा पुलिस और यातायात पुलिस पूरी तरह सतर्क हो गई है। 25 दिसंबर को क्रिसमस के अवसर पर शहर के प्रमुख बाजारों, मॉल और चर्चों में भारी भीड़ उमड़ने की संभावना को देखते हुए गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट ने ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है। खासतौर पर सेक्टर-18, अट्टा मार्केट और शहर के प्रमुख मॉल क्षेत्रों के आसपास यातायात दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई है। यातायात पुलिस द्वारा जारी निर्देशिका के अनुसार सेक्टर-18, अट्टा मार्केट, जीआईपी मॉल, गार्डन गलेरिया मॉल, डीएलएफ मॉल, लॉजिक्स मॉल, स्पाइस मॉल (मोदी मॉल), गौर मॉल, स्पेक्ट्रम मॉल, स्टार्लिंग मॉल और ग्रैंड वेनिस मॉल सहित विभिन्न चर्चों के आसपास भारी भीड़ जुट सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए इन इलाकों में सड़क किनारे वाहन खड़ा करने पर रोक लगाई गई है। वाहन चालकों को केवल निर्धारित पार्किंग स्थलों में ही वाहन पार्क करने के निर्देश दिए गए हैं। यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए पुलिस ने रूट डायवर्जन प्लान भी लागू किया है। जरूरत पड़ने पर वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से निकाला जाएगा ताकि जाम की स्थिति न बने।

नोएडा : क्रिसमस पर पुलिस अलर्ट, जारी हुई ट्रैफिक एडवाइजरी और रूट डायवर्जन प्लान
नोएडा : क्रिसमस पर पुलिस अलर्ट, जारी हुई ट्रैफिक एडवाइजरी और रूट डायवर्जन प्लान

पुलिस ने आमजन से अपील की है कि अनावश्यक रूप से निजी वाहनों का प्रयोग न करें और जहां तक संभव हो सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें। दिल्ली-एनसीआर में लगातार बढ़ रहे वायु प्रदूषण को देखते हुए यह अपील और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके अलावा सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है। शहर के व्यस्ततम इलाकों में सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। मॉल, बाजार और चर्चों के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके और लोगों को सुरक्षित माहौल मिल सके।
यातायात पुलिस ने कहा है कि नागरिकों के सहयोग से ही व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकता है। यदि किसी भी स्थान पर यातायात संबंधी असुविधा या समस्या उत्पन्न होती है तो लोग यातायात हेल्पलाइन नंबर 9971009001 पर संपर्क कर सकते हैं। नोएडा पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे ट्रैफिक नियमों का पालन करें, वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें और पुलिस प्रशासन का सहयोग करते हुए क्रिसमस पर्व को शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से मनाएं।

सूरत एयरपोर्ट पर कपल से 17.658 किलो हाइड्रोपोनिक वीड जब्त, कीमत 17.5 करोड़

सूरत एयरपोर्ट पर कपल से 17.658 किलो हाइड्रोपोनिक वीड जब्त, कीमत 17.5 करोड़

सूरत एयरपोर्ट पर कपल से 17.658 किलो हाइड्रोपोनिक वीड जब्त, कीमत 17.5 करोड़
सूरत एयरपोर्ट पर कपल से 17.658 किलो हाइड्रोपोनिक वीड जब्त, कीमत 17.5 करोड़

सूरत । गुजरात के सूरत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। बैंकॉक से आने वाली एक यात्री के पास से हाइड्रोपोनिक वीड (हाइब्रिड गांजा) जब्त की गई है। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ), सूरत सिटी डिटेक्शन क्राइम ब्रांच (डीसीबी), डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) और कस्टम्स की जॉइंट टीम ने बैंकॉक से आने वाली फ्लाइट में यात्रा कर रहे एक कपल को रोका। उनके चेक-इन बैगेज से बड़ी मात्रा में हाइड्रोपोनिक वीड (हाइब्रिड गांजा) जब्त की। यह कार्रवाई खुफिया सूचना के आधार पर की गई, जिसमें टीम ने कपल के सामान की गहन जांच की। जांच के दौरान 16 वैक्यूम-पैक्ड पॉलीथीन पैकेट बरामद हुए, जिनमें कुल 17.658 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक वीड था। फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) द्वारा इसकी कीमत 6.18 करोड़ रुपए आंकी गई है, जबकि काले बाजार में इसकी अनुमानित कीमत 17.5 करोड़ रुपए तक पहुंचती है।

सूरत एयरपोर्ट पर कपल से 17.658 किलो हाइड्रोपोनिक वीड जब्त, कीमत 17.5 करोड़
सूरत एयरपोर्ट पर कपल से 17.658 किलो हाइड्रोपोनिक वीड जब्त, कीमत 17.5 करोड़


हाइड्रोपोनिक वीड एक उच्च गुणवत्ता वाला हाइब्रिड कैनबिस है, जो नियंत्रित वातावरण में उगाया जाता है। इसमें टीएचसी (टेट्राहाइड्रोकैनाबिनॉल) की मात्रा सामान्य गांजे से कहीं ज्यादा होती है, जिसके कारण यह ड्रग तस्करों के बीच बहुत लोकप्रिय है। यह पदार्थ एनडीपीएस एक्ट, 1985 के तहत प्रतिबंधित है।
आरोपी कपल को आगे की पूछताछ और जांच के लिए संबंधित एजेंसी को सौंप दिया गया है। जांचकर्ता अब इस अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क की गहराई तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें बैंकॉक से आने वाले रूट और सूरत में रिसीवर शामिल हो सकते हैं।
यह ऑपरेशन सूरत एयरपोर्ट पर हाल के महीनों में हुई कई ड्रग्स जब्तियों में से एक है, जहां बैंकॉक से आने वाली फ्लाइट्स पर नजर रखी जा रही है। इसमें शामिल सभी एजेंसियों की सतर्कता, दक्षता और बेहतरीन तालमेल की सराहना की जा रही है। यह कार्रवाई ड्रग्स तस्करी के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति को मजबूत करती है।

अमेठी में धारदार हथियार से युवक की हत्या, छह लोगों के खिलाफ एफआईआर

अमेठी में धारदार हथियार से युवक की हत्या, छह लोगों के खिलाफ एफआईआर

अमेठी में धारदार हथियार से युवक की हत्या, छह लोगों के खिलाफ एफआईआर
अमेठी में धारदार हथियार से युवक की हत्या, छह लोगों के खिलाफ एफआईआर

अमेठी । उत्तर प्रदेश में अमेठी के मुसाफिरखाना कोतवाली क्षेत्र में मंगलवार देर शाम एक युवक की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई। अंतर्गत पिंडारा ठाकुर गांव में इस वारदात से हड़कंप मच गया। मंगलवार शाम रत्नेश मिश्रा (23) घर से शौच क्रिया के लिए निकला था। इसी दौरान घर से करीब 500 मीटर दूर गांव के ही छह लोगों ने धारदार हथियार से हमला कर दिया। हमले में रत्नेश गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़ा। उसकी चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे, लेकिन ग्रामीणों को आता देख आरोपी फरार हो गए। रत्नेश मिश्रा कमला नगर में चश्मे की दुकान चलाता था। घटना की सूचना मिलते ही परिजन रत्नेश को गंभीर अवस्था में नजदीकी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां से डॉक्टरों ने उसकी हालत नाजुक देखते हुए जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। जिला अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही रत्नेश ने दम तोड़ दिया।
परिजनों का आरोप है कि रत्नेश का कुछ दिनों पहले गांव के ही कुछ लोगों से विवाद हुआ था। इस संबंध में कोतवाली पुलिस को लिखित शिकायत भी दी गई थी, लेकिन उस समय कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते पुलिस ने कार्रवाई की होती तो आज यह घटना नहीं होती।

अमेठी में धारदार हथियार से युवक की हत्या, छह लोगों के खिलाफ एफआईआर
अमेठी में धारदार हथियार से युवक की हत्या, छह लोगों के खिलाफ एफआईआर

वारदात के बारे में पता चलने के बाद पुलिस अधीक्षक अपर्णा रजत कौशिक मौके पर पहुंचीं और घटनास्थल का निरीक्षण कर आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दो पुलिस टीमों का गठन किया है। मृतक के पिता की तहरीर पर गांव के छह लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार देर शाम पुलिस को सूचना मिली थी कि ग्राम पिंडारा ठाकुर निवासी 23 वर्षीय रत्नेश मिश्रा पर धारदार हथियार से हमला किया गया है, जिसमें उसकी मौत हो गई। सूचना मिलते ही पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और फील्ड यूनिट को बुलाकर घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए गए। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी है और गांव में तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

कर्नाटक के हासन में 10वीं क्लास की छात्रा ने बच्ची को दिया जन्म, बस ड्राइवर पर यौन उत्पीड़न का आरोप

कर्नाटक के हासन में 10वीं क्लास की छात्रा ने बच्ची को दिया जन्म, बस ड्राइवर पर यौन उत्पीड़न का आरोप

कर्नाटक के हासन में 10वीं क्लास की छात्रा ने बच्ची को दिया जन्म, बस ड्राइवर पर यौन उत्पीड़न का आरोप
कर्नाटक के हासन में 10वीं क्लास की छात्रा ने बच्ची को दिया जन्म, बस ड्राइवर पर यौन उत्पीड़न का आरोप

हासन । कर्नाटक में हासन जिले के चन्नरायपट्टना तालुक में 10वीं क्लास की एक छात्रा के बच्चे को जन्म देने का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। छात्रा ने बस ड्राइवर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि उसी स्कूल के एक बस ड्राइवर ने एक प्राइवेट स्कूल में 10वीं क्लास में पढ़ने वाली छात्रा का यौन उत्पीड़न किया और जब छात्रा प्रेग्नेंट हो गई तो फरार हो गया। पुलिस अधिकारियों ने कुछ दिनों तक लड़की और बच्चे की देखभाल करने के बाद उन्हें महिला एवं बाल कल्याण विभाग के आराम केंद्र को सौंपने का फैसला किया है। बस ड्राइवर के खिलाफ नुग्गेहल्ली पुलिस स्टेशन में पीओसीएसओ एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है और पुलिस जांच कर रही है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जांच में पता चला है कि बस ड्राइवर रोज बस से आने वाली छात्रा को चॉकलेट का लालच देता था। इसी लालच में 10वीं क्लास की छात्रा का उसने यौन उत्पीड़न किया। इसके चलते छात्रा अब प्रेग्नेंट हो गई और दो दिन पहले उसने एक बच्ची को जन्म दिया है।

कर्नाटक के हासन में 10वीं क्लास की छात्रा ने बच्ची को दिया जन्म, बस ड्राइवर पर यौन उत्पीड़न का आरोप
कर्नाटक के हासन में 10वीं क्लास की छात्रा ने बच्ची को दिया जन्म, बस ड्राइवर पर यौन उत्पीड़न का आरोप

बस ड्राइवर की पहचान चन्नरायपट्टना तालुक के बारगुरु गांव के रहने वाले रंजीत के रूप में हुई है, जो काफी समय से स्कूल में बस चलाया करता था।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बस ड्राइवर की गिरफ्तारी के लिए टीम का गठन और मुखबिर को लगा दिया गया है। जल्द से जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा और छात्रा की हालत ठीक है। पूरे मामले की जांच की जा रही है। स्कूल में बस चलाने वाले और ड्राइवरों से भी पूछताछ की जा रही है।
उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो छात्रा से भी पूछताछ की जाएगी, जिससे पूरे मामले का खुलासा हो सके। साथ ही बस ड्राइवर ने किस-किस छात्रा का उत्पीड़न किया था, इसकी भी जांच की जा रही है।
लोगों ने मांग की है कि इस अमानवीय काम को करने वाले दोषी को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। लोगों ने स्कूल प्रशासन के खिलाफ भी प्रदर्शन कर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अगर स्कूल प्रशासन ध्यान देता तो इस तरह की घटना सामने न आती।

मोबाइल चोरी गिरोह के दो शातिर आरोपी गिरफ्तार, 5 मोबाइल और अवैध हथियार बरामद

मोबाइल चोरी गिरोह के दो शातिर आरोपी गिरफ्तार, 5 मोबाइल और अवैध हथियार बरामद

मोबाइल चोरी गिरोह के दो शातिर आरोपी गिरफ्तार, 5 मोबाइल और अवैध हथियार बरामद
मोबाइल चोरी गिरोह के दो शातिर आरोपी गिरफ्तार, 5 मोबाइल और अवैध हथियार बरामद

नोएडा। थाना सेक्टर-20 पुलिस ने मोबाइल फोन चोरी की घटनाओं और अवैध हथियार रखने वाले गिरोह के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करते हुए एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने स्थानीय इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के माध्यम से दो शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से चोरी के मोबाइल फोन के साथ-साथ अवैध हथियार भी बरामद किए गए हैं। इस कार्रवाई से क्षेत्र में बढ़ती मोबाइल चोरी और अवैध हथियारों के कारोबार पर कड़ा झटका लगा है।

घटना का विवरण

पुलिस के अनुसार, 21 दिसंबर को थाना सेक्टर-20 की टीम को शहीद भगत सिंह पार्क, सेक्टर-31, नोएडा में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली। मौके पर पहुंचकर पुलिस ने दो आरोपियों को पकड़ लिया। आरोपियों की पहचान राजा पुत्र शान मोहम्मद और सुजीत पुत्र प्रताप के रूप में हुई।

गिरफ्तारी के दौरान अभियुक्त राजा के कब्जे से एक अवैध तमंचा (.315 बोर), एक जिंदा कारतूस और चोरी के तीन मोबाइल फोन बरामद किए गए। वहीं आरोपी सुजीत के पास से एक अवैध चाकू और चोरी के दो मोबाइल फोन बरामद किए गए।

पुलिस ने बताया कि यह कार्रवाई स्थानीय इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के माध्यम से की गई थी। आरोपियों की गतिविधियों पर लंबे समय से निगरानी रखी जा रही थी, जिससे यह ऑपरेशन सफल रहा।

आरोपियों की पृष्ठभूमि

पुलिस जांच में सामने आया कि अभियुक्त राजा मूल रूप से ग्राम कुलेसरा, थाना ईकोटेक-3, गौतमबुद्धनगर का निवासी है, जबकि उसका स्थायी पता मौहल्ला हैदरगंज, थाना और कस्बा मौदहा, जिला हमीरपुर है। उसकी उम्र लगभग 23 वर्ष है।

दूसरा आरोपी सुजीत, उम्र लगभग 25 वर्ष, निठारी, सेक्टर-31, थाना सेक्टर-20, गौतमबुद्धनगर का निवासी है। दोनों आरोपी लंबे समय से क्षेत्र में चोरी और अवैध गतिविधियों में संलिप्त थे।

आपराधिक रिकॉर्ड

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, अभियुक्त राजा का आपराधिक इतिहास सामने आया है। उसके खिलाफ वर्ष 2019 में थाना मौदहा, जिला हमीरपुर में मामला दर्ज किया गया था। इसके अलावा वर्ष 2023 में थाना बिलासपुर, जिला रामपुर में धोखाधड़ी और आईटी एक्ट से संबंधित मुकदमा दर्ज है।

वहीं, अभियुक्त सुजीत के खिलाफ वर्ष 2018 में थाना सेक्टर-24, गौतमबुद्धनगर में आबकारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। इससे स्पष्ट होता है कि दोनों आरोपी पहले से ही आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त थे और अब पुलिस की सक्रियता से उनका गिरोह तोड़ने में सफलता मिली है।

बरामदगी और कानूनन कार्रवाई

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के कब्जे से बरामद मोबाइल फोन और हथियारों को अपने कब्जे में लिया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ थाना सेक्टर-20 में आर्म्स एक्ट और संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने बताया कि चोरी के मोबाइल फोन की जांच के माध्यम से यह पता लगाया जा रहा है कि यह फोन किन-किन व्यक्तियों से चोरी हुए थे और इसके लिए अन्य पीड़ितों की पहचान की जा रही है।

पुलिस की रणनीति

थाना सेक्टर-20 पुलिस ने इस सफलता को स्थानीय इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के समन्वित प्रयासों का परिणाम बताया। टीम ने आरोपियों की हर गतिविधि पर करीब से नजर रखी और जब पर्याप्त सबूत जुट गए, तब उन्हें पकड़ने की कार्रवाई की।

पुलिस के अनुसार, इस ऑपरेशन में स्थानीय लोगों की भी मदद मिली, जिन्होंने संदिग्ध गतिविधियों की सूचना दी। इसके साथ ही पुलिस ने क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

मोबाइल चोरी के बढ़ते मामले

नोएडा में पिछले कुछ महीनों में मोबाइल चोरी की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है। चोरी के मोबाइल न केवल स्थानीय बाजार में बेचे जाते हैं, बल्कि कभी-कभी इन्हें अंतरराज्यीय नेटवर्क के माध्यम से अन्य शहरों में भी भेजा जाता है।

पुलिस ने बताया कि मोबाइल चोरी करने वाले आरोपी अक्सर समूह बनाकर काम करते हैं और चोरी के फोन के साथ हथियार भी रखते हैं, जिससे पकड़ने पर विरोध या हमला करने का डर बना रहता है। ऐसे मामलों में पुलिस की सतर्कता और समय पर कार्रवाई ही मुख्य कारक होती है।

मोबाइल चोरी गिरोह के दो शातिर आरोपी गिरफ्तार, 5 मोबाइल और अवैध हथियार बरामद
मोबाइल चोरी गिरोह के दो शातिर आरोपी गिरफ्तार, 5 मोबाइल और अवैध हथियार बरामद

क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाने के उपाय

थाना सेक्टर-20 पुलिस ने क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें शामिल हैं:

  1. स्थानीय इंटेलिजेंस नेटवर्क को सक्रिय करना।
  2. इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस कैमरों की संख्या बढ़ाना।
  3. संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देने के लिए नागरिकों के साथ सहयोग बढ़ाना।
  4. मोबाइल चोरी की घटनाओं की जानकारी साझा करने और शिकायतें दर्ज करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग।

पुलिस अधिकारियों ने यह भी कहा कि भविष्य में इस तरह की कार्रवाई और तेज की जाएगी ताकि अपराधियों के लिए क्षेत्र में कोई जगह न बच सके।

जनता की प्रतिक्रिया

स्थानीय लोग पुलिस की इस कार्रवाई से संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई उन अपराधियों के लिए चेतावनी है जो मोबाइल चोरी और अवैध हथियार रखने जैसी गतिविधियों में संलिप्त हैं।

कई स्थानीय व्यापारियों ने भी पुलिस की सराहना की, क्योंकि मोबाइल चोरी और अवैध हथियारों की समस्या उनके व्यवसाय और सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन गई थी।

निष्कर्ष

नोएडा पुलिस की थाना सेक्टर-20 टीम की यह कार्रवाई न केवल मोबाइल चोरी और हथियार रखने वाले अपराधियों के खिलाफ एक बड़ी सफलता है, बल्कि यह क्षेत्र में सुरक्षा और कानून व्यवस्था को मजबूत करने का भी उदाहरण है।

स्थानीय इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करना पुलिस की सक्रियता और पेशेवर दक्षता को दर्शाता है। बरामद मोबाइल फोन और हथियारों की जांच से अन्य अपराधियों के नेटवर्क का पता लगाने में भी मदद मिलेगी।

अभियुक्तों का आपराधिक रिकॉर्ड यह स्पष्ट करता है कि वे लंबे समय से अपराधों में संलिप्त थे। उनकी गिरफ्तारी से क्षेत्र में अपराधियों के हौसले पर रोक लगेगी और आम नागरिकों में सुरक्षा का भरोसा बढ़ेगा।

पुलिस की सतर्कता, गश्त बढ़ाना और स्थानीय लोगों की मदद से भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी। नोएडा पुलिस की यह कार्रवाई यह संदेश देती है कि अपराधियों को कानून और न्याय के हाथों जल्द ही जवाबदेह बनाया जाएगा।

इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरोपी अभियुक्तों को कड़ी सजा मिलने की संभावना है, जिससे क्षेत्र में अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं बचेगी और नोएडा में कानून और व्यवस्था मजबूत बनेगी।

शिमला IGMC में मरीज से मारपीट का मामला, वीडियो वायरल होने पर डॉक्टर निलंबित

शिमला IGMC में मरीज से मारपीट का मामला, वीडियो वायरल होने पर डॉक्टर निलंबित

शिमला IGMC में मरीज से मारपीट का मामला, वीडियो वायरल होने पर डॉक्टर निलंबित
शिमला IGMC में मरीज से मारपीट का मामला, वीडियो वायरल होने पर डॉक्टर निलंबित

शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला स्थित इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) में एक गंभीर घटना सामने आई है, जिसमें एक डॉक्टर द्वारा मरीज के साथ मारपीट किए जाने का आरोप लगाया गया है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही पूरे राज्य में हड़कंप मच गया। घटना के प्रकाश में आते ही राज्य सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी डॉक्टर को निलंबित कर दिया। साथ ही पूरे मामले की जांच के लिए एक हाई पावर कमेटी का गठन किया गया है।

घटना की पृष्ठभूमि

जानकारी के अनुसार, मरीज अर्जुन पंवार IGMC में एंडोस्कोपी कराने आए थे। प्रक्रिया के बाद उन्हें सांस लेने में परेशानी हुई, जिसके कारण उन्हें पास के वार्ड में एक बेड पर लेटना पड़ा। आरोप है कि इसी दौरान डॉक्टर ने मरीज से दुर्व्यवहार शुरू कर दिया। विवाद के दौरान डॉक्टर ने न केवल मरीज से बदसलूकी की, बल्कि उनके चेहरे पर घूंसे भी बरसाए।

यह पूरी घटना किसी ने वीडियो में कैद कर ली, जो बाद में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में दिखाया गया कि मरीज बेड पर लेटा हुआ था और डॉक्टर द्वारा की गई मारपीट स्पष्ट रूप से नजर आ रही थी।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही मरीज और उनके परिजनों में आक्रोश फैल गया। लोगों ने अस्पताल के गेट पर विरोध प्रदर्शन किया। वायरल वीडियो ने प्रशासन और राज्य सरकार के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता पैदा कर दी।

IGMC के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. राहुल राव ने बताया कि सरकार के निर्देश पर डॉक्टर को तुरंत निलंबित कर दिया गया है और उन्हें मेडिकल एजुकेशन निदेशालय में रिपोर्ट करने के आदेश दिए गए हैं। साथ ही मामले की पूरी जांच के लिए हाई पावर कमेटी का गठन किया गया है।

प्रशासन की प्रारंभिक कार्रवाई

अस्पताल प्रशासन ने घटना के तुरंत बाद प्रारंभिक जांच शुरू की। डॉ. राव ने बताया कि चार घंटे के भीतर वायरल वीडियो, मरीज और उसके तीमारदारों के बयान दर्ज किए गए और रिपोर्ट सरकार को भेज दी गई। इस रिपोर्ट के आधार पर आरोपी डॉक्टर को सस्पेंड किया गया।

अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया कि मामले की गहन जांच की जाएगी और आरोपी डॉक्टर का पक्ष सुनने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी अन्य व्यक्ति को इस मामले में कोई शिकायत है, तो वह लिखित रूप में दर्ज कर सकता है।

हाई पावर कमेटी की जांच

मामले की जांच के लिए गठित हाई पावर कमेटी सभी संबंधित पक्षों के बयान लेगी। इसमें मरीज, उनके परिजन, अस्पताल के स्टाफ और आरोपी डॉक्टर शामिल होंगे। कमेटी का उद्देश्य घटना के सभी पहलुओं को समझना और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करना है।

डॉ. राहुल राव ने कहा कि कमेटी अपनी रिपोर्ट जल्द ही राज्य सरकार को सौंपेगी। मुख्यमंत्री ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है और जांच पूरी होने के बाद तत्काल निर्णय लेने के आदेश दिए हैं।

मरीज और परिजनों की प्रतिक्रिया

अर्जुन पंवार के परिजन और तीमारदार इस घटना से गहरी आहत हैं। उन्होंने कहा कि मरीज को सांस लेने में कठिनाई थी और वह केवल चिकित्सीय मदद के लिए अस्पताल में गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉक्टर का व्यवहार न केवल गैर-जिम्मेदाराना था बल्कि मानवता के खिलाफ भी था।

परिजन और स्थानीय लोग अस्पताल के गेट पर विरोध प्रदर्शन करते हुए उचित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाओं से मरीजों और उनके परिवारों में भय और असुरक्षा की भावना पैदा होती है।

शिमला IGMC में मरीज से मारपीट का मामला, वीडियो वायरल होने पर डॉक्टर निलंबित
शिमला IGMC में मरीज से मारपीट का मामला, वीडियो वायरल होने पर डॉक्टर निलंबित

डॉक्टर का पक्ष

हालांकि, फिलहाल आरोपी डॉक्टर का पक्ष अभी तक दर्ज नहीं किया गया है। अस्पताल प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि डॉक्टर को भी सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाएगा। हाई पावर कमेटी सभी पक्षों के बयान लेने के बाद ही अपनी रिपोर्ट सौंपेगी और उसके आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग की प्रतिक्रिया

राज्य सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए निलंबन की कार्रवाई तुरंत की। स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल एजुकेशन निदेशालय को आदेश दिए गए कि वे मामले की गहन जांच सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री ने भी जनता के सामने स्पष्ट किया कि ऐसी किसी भी अनुचित या हिंसात्मक कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी

IGMC प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि घटना की जांच त्वरित और निष्पक्ष हो। इसके अलावा, अस्पताल ने मरीजों और तीमारदारों के लिए सुविधा और सुरक्षा बढ़ाने के उपाय किए। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए अस्पताल में निगरानी और स्टाफ प्रशिक्षण बढ़ाया जाएगा।

विशेषज्ञों की राय

स्वास्थ्य और अस्पताल प्रबंधन विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं से न केवल मरीजों की मानसिक स्थिति प्रभावित होती है बल्कि अस्पताल की प्रतिष्ठा पर भी प्रश्न उठते हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टर और अस्पताल स्टाफ को पेशेवर आचार संहिता के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए और मरीजों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

विशेषज्ञों के अनुसार, अस्पतालों में इस प्रकार की घटनाओं की रोकथाम के लिए वीडियो निगरानी, स्टाफ निगरानी और शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करना आवश्यक है।

सामाजिक और कानूनी पहलू

इस घटना ने सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया। लोग अस्पतालों में मरीजों के अधिकारों और डॉक्टरों के आचरण पर सवाल उठा रहे हैं। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि मरीज के साथ मारपीट एक गंभीर अपराध है और इसके लिए चिकित्सीय और आपराधिक दोनों प्रकार की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

यदि हाई पावर कमेटी की रिपोर्ट में आरोपी डॉक्टर दोषी पाया जाता है, तो उन्हें केवल निलंबित नहीं बल्कि सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है।

निष्कर्ष

शिमला के IGMC में डॉक्टर द्वारा मरीज के साथ मारपीट का मामला अस्पताल प्रशासन, राज्य सरकार और आम जनता के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यह घटना यह दर्शाती है कि स्वास्थ्य संस्थानों में पेशेवर व्यवहार और मानवता के प्रति संवेदनशीलता अत्यंत महत्वपूर्ण है।

राज्य सरकार और अस्पताल प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करके आरोपी डॉक्टर को सस्पेंड किया और जांच के लिए हाई पावर कमेटी का गठन किया। मरीज, उनके परिजन और समाज के अन्य लोग इस मामले में उचित न्याय की उम्मीद कर रहे हैं।

यह मामला यह भी स्पष्ट करता है कि अस्पतालों में निगरानी, स्टाफ प्रशिक्षण और शिकायत निवारण प्रणाली को और मजबूत करने की आवश्यकता है। भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं से बचाव के लिए यह कदम अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

IGMC प्रशासन और राज्य सरकार की त्वरित कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि मरीजों के अधिकार और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी और किसी भी तरह के हिंसात्मक या अनुचित व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इस घटना ने अस्पतालों, चिकित्सा शिक्षा संस्थानों और स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए एक सबक के रूप में काम किया है कि मरीजों के साथ सम्मानजनक और संवेदनशील व्यवहार हमेशा सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

उत्तर प्रदेश में घने कोहरे और कड़ाके की ठंड का कहर, जनजीवन प्रभावित

उत्तर प्रदेश में घने कोहरे और कड़ाके की ठंड का कहर, जनजीवन प्रभावित

उत्तर प्रदेश में घने कोहरे और कड़ाके की ठंड का कहर, जनजीवन प्रभावित
उत्तर प्रदेश में घने कोहरे और कड़ाके की ठंड का कहर, जनजीवन प्रभावित

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के अधिकतर हिस्सों में मंगलवार सुबह मौसम ने आम लोगों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दीं। कड़ाके की ठंड और घने कोहरे ने राज्य के कई शहरों में दैनिक जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। सुबह-सुबह सड़कें लगभग सुनसान हो गईं और वाहनों की गति बेहद धीमी हो गई। वाहन चालकों को घने कोहरे और कम विजिबिलिटी के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। राजधानी लखनऊ में घना कोहरा इतना फैल गया कि कई सड़कों पर विजिबिलिटी शून्य के करीब पहुंच गई।

लखनऊ में मौसम की स्थिति

लखनऊ में मंगलवार की सुबह बेहद ठंडी रही। न्यूनतम तापमान सामान्य से कई डिग्री कम दर्ज किया गया। ठंडी हवाओं के कारण सड़क पर वाहन चलाना चुनौतीपूर्ण हो गया। कई वाहन चालक हेडलाइट्स जलाकर भी सावधानी से चलते नजर आए। कुछ लोग बाइक या दोपहिया वाहन से निकलने में असमर्थ थे, जबकि कई कार और बस चालक धीमी गति से सड़क पर अपनी यात्रा कर रहे थे। स्थानीय प्रशासन ने भी कई मुख्य मार्गों पर यातायात निगरानी बढ़ाई, ताकि दुर्घटनाओं से बचा जा सके।

लखनऊ के लोगों ने बताया कि सुबह घर से निकलते समय उन्हें अत्यधिक ठंड और कम विजिबिलिटी का सामना करना पड़ा। कई लोगों ने कहा कि उन्होंने बाहर निकलने से पहले गर्म कपड़े पहनना आवश्यक समझा। कुछ लोगों ने तो अपने बच्चों और बुजुर्गों को घर के अंदर रहने के लिए ही कहा। शहर में अलाव जलाकर लोग खुद को ठंड से बचा रहे थे, जबकि सड़कों पर भी अलाव जलाए नजर आए।

संभल और वाराणसी में मौसम की मार

उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी मौसम ने अपना असर दिखाया। संभल शहर में घने कोहरे की चादर बिछी रही। ठंडी हवाओं के साथ कोहरा इतना घना था कि विजिबिलिटी बेहद कम हो गई। कई वाहन चालकों ने अपनी यात्रा में मुश्किलों का सामना किया। स्थानीय लोगों ने बताया कि सुबह के समय कोहरे के कारण बाइक चलाना अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो गया।

वाराणसी में सुबह 8 बजे के आसपास घना कोहरा छाया रहा। लोगों ने कहा कि ठंड ने प्रचंड रूप ले लिया है और घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। शीतलहर ने तापमान को और गिरा दिया, जिससे लोग अलाव और गर्म कपड़ों का सहारा ले रहे हैं। ठंडी हवाओं ने दैनिक गतिविधियों को प्रभावित किया और लोग अपने काम-काज में देरी का सामना कर रहे थे।

अयोध्या में विजिटर्स और स्थानीय लोगों की मुश्किलें

अयोध्या में भी सुबह घने कोहरे ने पूरे शहर को ढक लिया। राम मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में विजिबिलिटी बेहद कम थी। इससे न केवल श्रद्धालुओं, बल्कि स्थानीय लोगों को भी आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हालांकि, प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की थी ताकि श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के मंदिर दर्शन कर सकें।

स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने सरकार की व्यवस्थाओं की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ठंड के बीच भी उन्हें सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। हालांकि, कई लोगों ने यह भी बताया कि सुबह के समय बाहर निकलना कठिन हो रहा था और उन्हें वाहन चलाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ी।

नोएडा और अमेठी में मौसम की स्थिति

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के समीप स्थित नोएडा और आसपास के क्षेत्रों में भी कड़ाके की ठंड और शीतलहर ने जनजीवन प्रभावित किया। घने कोहरे के कारण विजिबिलिटी कम हो गई और लोगों को वाहन चलाने में भारी परेशानी हुई।

अमेठी जिले में भी घना कोहरा छाया रहा, जिससे सड़क किनारे और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की गतिविधियां प्रभावित हुईं। लोग अपने ठंड से बचने के लिए अलाव और गर्म कपड़ों का सहारा ले रहे थे। सड़क किनारे अलाव जलाते हुए लोग ठंड से राहत पाने की कोशिश कर रहे थे।

उत्तर प्रदेश में घने कोहरे और कड़ाके की ठंड का कहर, जनजीवन प्रभावित
उत्तर प्रदेश में घने कोहरे और कड़ाके की ठंड का कहर, जनजीवन प्रभावित

ठंड और कोहरे का प्रभाव

सर्दियों में घना कोहरा और ठंड का मौसम स्वास्थ्य और जीवनशैली पर गहरा असर डालता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ठंड और कोहरे के दौरान दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ जाता है, क्योंकि विजिबिलिटी कम होने के कारण वाहन चालक अचानक रुकावटों या विपरीत परिस्थितियों को नहीं देख पाते। इसके साथ ही ठंड के कारण बुजुर्ग और बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति प्रभावित हो सकती है।

स्थानीय प्रशासन ने कई शहरों में वाहनों की गति नियंत्रित करने के लिए सड़कों पर पैट्रोलिंग बढ़ाई। इसके अलावा, लोगों को अलाव और गर्म कपड़ों का उपयोग करने की सलाह दी गई। कई सार्वजनिक स्थानों पर अलाव और गर्म पेय भी उपलब्ध कराए गए।

लोगों की प्रतिक्रियाएं

स्थानीय लोगों ने बताया कि इस बार की सर्दी पिछले सालों की तुलना में अधिक कड़ाके वाली है। उन्होंने कहा कि सुबह जल्दी घर से निकलना मुश्किल हो गया है। कुछ लोगों ने बताया कि उन्होंने ठंड से बचने के लिए अतिरिक्त कंबल और गर्म कपड़े अपने साथ रखे हैं।

वाहन चालकों ने बताया कि कोहरे के कारण सड़क पर गति नियंत्रित करनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि हेडलाइट्स जलाने के बावजूद विजिबिलिटी बहुत कम रहती है और रात या सुबह के समय वाहन चलाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

प्रशासनिक उपाय

उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन ने ठंड और कोहरे के दौरान लोगों की सुरक्षा के लिए कई उपाय किए हैं। प्रमुख शहरों और सड़क मार्गों पर यातायात पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई। सार्वजनिक स्थानों पर अलाव और गर्म पेय उपलब्ध कराए गए। स्वास्थ्य विभाग ने बुजुर्गों और बच्चों के लिए विशेष चेतावनी जारी की और उन्हें ठंड से बचने के उपाय अपनाने को कहा।

निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में मंगलवार सुबह घने कोहरे और कड़ाके की ठंड ने जनजीवन को प्रभावित किया। लखनऊ, संभल, वाराणसी, अयोध्या, नोएडा और अमेठी में विजिबिलिटी कम होने और ठंडी हवाओं के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने सड़कों पर पैट्रोलिंग बढ़ाकर और अलाव तथा गर्म पेय उपलब्ध कराकर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की। आम लोग अलाव और गर्म कपड़ों का सहारा लेकर ठंड से बचने की कोशिश कर रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार की ठंड और घने कोहरे की स्थितियों में वाहन चलाना जोखिम भरा हो सकता है। लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए और सुबह और शाम के समय घर से बाहर निकलते समय गर्म कपड़े पहनना जरूरी है।

उत्तर प्रदेश में इस मौसम ने जनजीवन, यात्रा और दैनिक गतिविधियों पर गहरा असर डाला है। प्रशासन और लोगों के सहयोग से ही इस मौसम के खतरे को कम किया जा सकता है। ठंड और कोहरे से बचाव के उपाय अपनाकर लोग अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं और स्वास्थ्य को भी प्रभावित होने से बचा सकते हैं।

दिल्ली साइबर पुलिस ने क्यूआर कोड फ्रॉड के मास्टरमाइंड को राजस्थान से गिरफ्तार किया

दिल्ली साइबर पुलिस ने क्यूआर कोड फ्रॉड के मास्टरमाइंड को राजस्थान से गिरफ्तार किया

दिल्ली साइबर पुलिस ने क्यूआर कोड फ्रॉड के मास्टरमाइंड को राजस्थान से गिरफ्तार किया
दिल्ली साइबर पुलिस ने क्यूआर कोड फ्रॉड के मास्टरमाइंड को राजस्थान से गिरफ्तार किया

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की साइबर सेल, नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट ने एक अत्यंत जटिल और हाई-टेक क्यूआर कोड फ्रॉड मामले का खुलासा किया है। आरोपी ने दुकानों के मूल क्यूआर कोड में छेड़छाड़ कर ग्राहकों के पेमेंट को अपने अकाउंट में डायवर्ट कर दिया था। पुलिस ने इंटर-स्टेट ऑपरेशन कर राजस्थान के जयपुर से 19 वर्षीय मनीष वर्मा को गिरफ्तार किया है। इस मामले की जांच में साइबर तकनीक, डिजिटल फॉरेंसिक और यूपीआई ट्रांजेक्शन ट्रेल का व्यापक इस्तेमाल किया गया।

मामला कैसे सामने आया

केस की शुरुआत 13 दिसंबर 2025 को हुई, जब चांदनी चौक की मशहूर कपड़े की दुकान पर एक ग्राहक 2.50 लाख रुपए का लहंगा खरीदने गया। ग्राहक ने दुकान में दिखाए गए क्यूआर कोड को स्कैन कर दो पेमेंट किए, जिनमें 90,000 और 50,000 रुपए शामिल थे। लेकिन दुकान वाले ने दावा किया कि पैसे उनके अकाउंट में नहीं आए। ग्राहक ने स्क्रीनशॉट दिखाया, लेकिन फिर भी दुकान को पेमेंट नहीं मिला।

पीड़ित ने तुरंत ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवाई, और नॉर्थ साइबर पुलिस स्टेशन में संबंधित धाराओं के तहत ई-एफआईआर दर्ज की गई।

साइबर सेल की कार्रवाई

जांच डीसीपी नॉर्थ के निर्देशन में, एसीपी ऑपरेशंस विदुषी कौशिक के लीडरशिप और एसएचओ साइबर नॉर्थ रोहित गहलोत के सुपरविजन में हुई। टीम ने दुकान का स्पॉट इंस्पेक्शन किया, बिलिंग प्रोसेस वेरिफाई की और स्टाफ के बयान लिए।

जांच के दौरान यूपीआई ट्रांजेक्शन ट्रेल से पता चला कि पेमेंट्स एक अलग अकाउंट में गए थे, जो राजस्थान से ऑपरेट हो रहा था। तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल फुटप्रिंट्स की मदद से आरोपी की लोकेशन ट्रेस की गई और जयपुर के चाकसू इलाके में छापेमारी कर मनीष वर्मा को गिरफ्तार किया गया।

आरोपी का modus operandi

पूछताछ में आरोपी मनीष वर्मा ने कबूल किया कि उसने एआई-बेस्ड इमेज एडिटिंग ऐप का इस्तेमाल कर मूल क्यूआर कोड में बदलाव किया और मर्चेंट की बैंक डिटेल्स अपनी बदल दीं। इस फ्रॉड का आइडिया उसे साउथ इंडियन फिल्म ‘वेट्टैयान’ के एक सीन से मिला।

मनीष ने तकनीकी कौशल का इस्तेमाल करते हुए सिस्टमैटिक तरीके से कई दुकानों को टारगेट किया। उसके मोबाइल फोन जब्त किए गए, जिनमें 100 से ज्यादा एडिटेड क्यूआर कोड, चैट और फाइनेंशियल रिकॉर्ड मिले। जांच से यह भी पता चला कि ठगी की रकम उसके अकाउंट में ट्रेस की जा चुकी थी।

साइबर फ्रॉड की तकनीक

इस मामले में तकनीक का इस्तेमाल बहुत हाई-टेक था। एआई-बेस्ड इमेज एडिटिंग ऐप के माध्यम से मनीष ने QR कोड को डिज़ाइन और मॉडिफाई किया। मूल QR कोड में मामूली बदलाव करके वह पेमेंट डायवर्ट कर सकता था, जबकि ग्राहक और दुकानदार को किसी भी तरह की असामान्यता का पता नहीं चलता था।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह फ्रॉड मॉडल अत्यधिक खतरनाक है क्योंकि यह डिजिटल पेमेंट सिस्टम की विश्वसनीयता को सीधे चुनौती देता है। ऐसे फ्रॉड में पीड़ित को यह पता नहीं चलता कि पेमेंट उनके अकाउंट में नहीं गया, और स्क्रीनशॉट या ट्रांजेक्शन रसीद अक्सर धोखे का हिस्सा बन जाती है।

दिल्ली साइबर पुलिस ने क्यूआर कोड फ्रॉड के मास्टरमाइंड को राजस्थान से गिरफ्तार किया
दिल्ली साइबर पुलिस ने क्यूआर कोड फ्रॉड के मास्टरमाइंड को राजस्थान से गिरफ्तार किया

इंटर-स्टेट जांच और डिजिटल फॉरेंसिक

दिल्ली साइबर सेल ने इंटर-स्टेट जांच की प्रक्रिया अपनाई। राजस्थान में आरोपी की लोकेशन ट्रेस करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों और बैंक रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया गया। आरोपी के मोबाइल फोन और डिजिटल डेटा का फॉरेंसिक विश्लेषण किया गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि मनीष वर्मा ने कई दुकानों में इस तकनीक का इस्तेमाल किया।

साइबर सेल ने बताया कि आरोपी का नेटवर्क और उसके डिजिटल फूटप्रिंट अन्य संभावित पीड़ितों की पहचान करने में मदद करेंगे। जांच से पता चला कि मनीष ने सिस्टमैटिक तरीके से लोगों को निशाना बनाया, और इस फ्रॉड को अंजाम देने में कई हफ्तों का प्लानिंग शामिल था।

पुलिस की रणनीति और भविष्य की रोकथाम

डीसीपी नॉर्थ ने कहा कि यह केस डिजिटल फ्रॉड की बढ़ती जटिलताओं को उजागर करता है। साइबर सेल की टीम ने तकनीकी कौशल और डिजिटल फॉरेंसिक का इस्तेमाल कर मामले को हल किया। भविष्य में ऐसे फ्रॉड को रोकने के लिए पुलिस ने दुकानों और व्यापारियों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि दुकानदारों को QR कोड की वैरिफिकेशन, दो-स्तरीय ऑथेंटिकेशन और डिजिटल ट्रांजेक्शन की नियमित मॉनिटरिंग करनी चाहिए। इसके साथ ही, ग्राहकों को भी पेमेंट की पुष्टि बैंक अकाउंट और रसीद से करनी चाहिए।

अपराधियों की मानसिकता

पूछताछ में मनीष ने यह भी कबूल किया कि उसने अपराध की प्रेरणा फिल्म और ऑनलाइन कंटेंट से ली। यह दर्शाता है कि डिजिटल अपराध में मनोरंजन और मीडिया का प्रभाव भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। साइबर क्राइम विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल फ्रॉड केवल तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अपराधियों की मानसिकता, सोच और नई तकनीक का इस्तेमाल भी शामिल होता है।

निष्कर्ष

दिल्ली साइबर सेल ने क्यूआर कोड फ्रॉड केस को उजागर कर यह साबित किया कि डिजिटल अपराधों का मुकाबला करने के लिए तकनीकी कौशल, इंटर-स्टेट सहयोग और डिजिटल फॉरेंसिक की आवश्यकता है। मनीष वर्मा की गिरफ्तारी ने न केवल एक गंभीर फ्रॉड को रोका, बल्कि संभावित अन्य पीड़ितों को भी सुरक्षा दी।

इस केस से यह भी स्पष्ट होता है कि डिजिटल लेन-देन में सतर्कता, तकनीकी निगरानी और साइबर जागरूकता आवश्यक है। पुलिस का कहना है कि भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने के लिए और ज्यादा एडवांस तकनीक और इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया जाएगा।

साइबर फ्रॉड की बढ़ती घटनाओं के बीच यह केस एक चेतावनी है कि व्यवसायिक और व्यक्तिगत दोनों तरह के डिजिटल पेमेंट यूजर्स को सतर्क रहना होगा। साइबर सेल की कार्रवाई ने यह दिखाया कि उच्च तकनीक और डिजिटल फॉरेंसिक के सहारे ऐसे अपराधियों को पकड़ना संभव है।

इस कार्रवाई से यह भी संदेश जाता है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां डिजिटल अपराध के मामलों में पूरी तत्परता और कौशल के साथ काम कर रही हैं, ताकि ग्राहकों और व्यापारियों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और डिजिटल लेन-देन का भरोसा बनाए रखा जा सके।

पंजाब: अमृतसर में ड्रोन से भेजी गई 12 किलो से अधिक हेरोइन बरामद

पंजाब: अमृतसर में ड्रोन से भेजी गई 12 किलो से अधिक हेरोइन बरामद

पंजाब: अमृतसर में ड्रोन से भेजी गई 12 किलो से अधिक हेरोइन बरामद
पंजाब: अमृतसर में ड्रोन से भेजी गई 12 किलो से अधिक हेरोइन बरामद

अमृतसर। पंजाब एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (बॉर्डर रेंज) ने बीएसएफ के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए ड्रोन के जरिए भेजी गई भारी मात्रा में हेरोइन बरामद की है। पंजाब पुलिस के डीजीपी गौरव यादव ने इस सफलता की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा की और बताया कि यह कार्रवाई खुफिया जानकारी के आधार पर की गई।

ड्रोन ऑपरेशन और बरामदगी का विवरण

डीजीपी गौरव यादव के अनुसार, इलाके में ड्रोन मूवमेंट की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया। इस दौरान संदिग्ध पैकेट बरामद किए गए, जिनमें लगभग 12 किलोग्राम हेरोइन थी। प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि यह खेप सीमा पार से ड्रोन के माध्यम से भेजी गई थी। हेरोइन की यह खेप स्थानीय नेटवर्क के जरिए आगे सप्लाई की जानी थी।

पुलिस ने बताया कि मामले में संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है। इसके साथ ही ड्रोन ऑपरेशन और तस्करी के नेटवर्क से जुड़े आगे और पीछे के लिंक का पता लगाने के लिए तकनीकी सबूत, मोबाइल लोकेशन और मुखबिर की मदद से जांच शुरू कर दी गई है।

ड्रोन आधारित नशीले पदार्थों की तस्करी का खतरा

पंजाब में ड्रोन का उपयोग कर नशीले पदार्थों की तस्करी की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। ये ड्रोन सीमापार से मादक पदार्थों को भेजकर स्थानीय नेटवर्क के माध्यम से वितरण करने का काम करते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, ड्रोन आधारित तस्करी पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक तेज़ और खतरनाक होती है, क्योंकि यह निगरानी और पैट्रोलिंग से बचने के लिए प्रयोग की जाती है।

डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि पंजाब पुलिस पूरी तरह प्रतिबद्ध है कि ड्रोन आधारित नशीले पदार्थों की तस्करी को रोका जाए और बॉर्डर बेल्ट में सक्रिय ड्रग नेटवर्क को समाप्त किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में इस तरह की संयुक्त कार्रवाइयों को और तेज किया जाएगा।

पिछले मामलों की पृष्ठभूमि

20 दिसंबर को पंजाब की स्टेट स्पेशल ऑपरेशंस सेल (एसएसओसी), एसएएस नगर ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए भारतीय सेना के भगोड़े जवान राजबीर सिंह उर्फ ‘फौजी’ और उसके साथी को सीमा पार ड्रग्स और हथियारों की तस्करी के रैकेट में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया था।

गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने एक हैंड ग्रेनेड और 500 ग्राम हेरोइन बरामद की थी। डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि राजबीर सिंह इस साल की शुरुआत में अमृतसर ग्रामीण के पुलिस स्टेशन घरिंडा में दर्ज जासूसी मामले में वांछित था। जांच में यह भी सामने आया कि उसकी भूमिका हरियाणा के सिरसा में एक महिला पुलिस स्टेशन पर ग्रेनेड हमले की साजिश में भी रही थी। इसमें ग्रेनेड की डिलीवरी और हमले के लिए फंडिंग शामिल थी।

पाकिस्तान आधारित तस्करों और आतंकियों से कनेक्शन

एसएसओसी की टीम ने बताया कि राजबीर सिंह और उसके साथी पाकिस्तान आधारित तस्करों और आतंकी मॉड्यूल से जुड़े थे। ये मॉड्यूल सीमा पार से ड्रग्स और हथियार भेजकर पंजाब में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे थे। ऐसे नेटवर्क केवल नशीले पदार्थों की तस्करी ही नहीं करते, बल्कि आतंकवाद और संगठित अपराध में भी सक्रिय रहते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह नेटवर्क ड्रोन, गोपनीय मार्ग और स्थानीय एजेंटों के माध्यम से मादक पदार्थों को पंजाब के विभिन्न हिस्सों में सप्लाई करता था। यह नेटवर्क सीमा पार से नियंत्रित किया जाता था और इसका उद्देश्य स्थानीय अपराध और अशांति फैलाना था।

पंजाब: अमृतसर में ड्रोन से भेजी गई 12 किलो से अधिक हेरोइन बरामद
पंजाब: अमृतसर में ड्रोन से भेजी गई 12 किलो से अधिक हेरोइन बरामद

पंजाब पुलिस की रणनीति और संयुक्त कार्रवाई

पंजाब पुलिस और बीएसएफ ने इस तस्करी रैकेट को पकड़ने के लिए संयुक्त रणनीति अपनाई। खुफिया एजेंसियों और स्थानीय पुलिस नेटवर्क के सहयोग से इलाके में लगातार निगरानी रखी गई। ड्रोन मूवमेंट की सूचना मिलने के बाद सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया और संदिग्ध पैकेट बरामद किए गए।

डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि इस तरह की कार्रवाई केवल एक मादक पदार्थों की खेप को पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य पूरे नेटवर्क को उजागर करना और भविष्य में होने वाली तस्करी को रोकना है।

तस्करी और ड्रोन तकनीक की चुनौती

ड्रोन आधारित तस्करी आधुनिक समय में मादक पदार्थों के अपराधियों के लिए आसान और सुरक्षित माध्यम बन गई है। ड्रोन की मदद से सीमापार से मादक पदार्थों की खेप भेजी जाती है, जिसे स्थानीय नेटवर्क वितरण के लिए प्राप्त करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह पारंपरिक निगरानी तकनीकों से बचने का नया तरीका है।

इसलिए पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को लगातार तकनीकी प्रशिक्षण और आधुनिक निगरानी उपकरणों के जरिए ड्रोन मूवमेंट पर नजर रखनी पड़ती है। पंजाब पुलिस ने भी अपने ऑपरेशन में ड्रोन और इंटेलिजेंस आधारित रणनीति को अपनाया है, जिससे तस्करी रोकने में सफलता मिल रही है।

तस्करी रैकेट के खिलाफ आगे की कार्रवाई

पुलिस अब पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है। तकनीकी सबूतों, मोबाइल लोकेशन और मुखबिर की मदद से तस्करी रैकेट के सभी लिंक खोजने का काम चल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही सभी सहयोगियों और नेटवर्क को चिन्हित किया जाएगा, पूरी साजिश का पर्दाफाश किया जाएगा।

डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि पंजाब पुलिस की प्राथमिकता है कि सीमा पार ड्रग तस्करी और आतंकवादी मॉड्यूल के नेटवर्क को पूरी तरह नष्ट किया जाए। इसके लिए राज्य की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच सहयोग लगातार बढ़ाया जा रहा है।

सामाजिक और सुरक्षा दृष्टि

ड्रग्स और हथियारों की तस्करी केवल अपराध का मामला नहीं है। यह राज्य की सुरक्षा और समाज की शांति के लिए भी गंभीर खतरा है। ऐसे नेटवर्क न केवल नशीले पदार्थ सप्लाई करते हैं, बल्कि हिंसा और आतंकवाद फैलाने का काम भी करते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की संयुक्त कार्रवाइयों से युवाओं और समाज में ड्रग्स के प्रभाव को कम किया जा सकता है। पंजाब पुलिस और बीएसएफ की संयुक्त कार्रवाई यह सुनिश्चित करती है कि तस्करी के नेटवर्क को तोड़ा जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

निष्कर्ष

अमृतसर में ड्रोन से भेजी गई 12 किलोग्राम हेरोइन की बरामदगी पंजाब पुलिस और बीएसएफ की संयुक्त सफलता का प्रतीक है। यह कार्रवाई केवल मादक पदार्थों की खेप को पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे नेटवर्क को उजागर करने और भविष्य में होने वाली तस्करी को रोकने का भी संदेश देती है।

राजबीर सिंह और उसके साथी की गिरफ्तारी, पाकिस्तान आधारित तस्करों और आतंकी मॉड्यूल के साथ उनके संबंधों का खुलासा, और ड्रोन ऑपरेशन की तकनीकी सफलता यह साबित करती है कि पंजाब पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां लगातार सतर्क हैं।

डीजीपी गौरव यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि पंजाब पुलिस ड्रोन आधारित नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने और बॉर्डर बेल्ट में सक्रिय ड्रग नेटवर्क को समाप्त करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आने वाले दिनों में इस तरह की संयुक्त कार्रवाइयों को और तेज किया जाएगा।

इस कार्रवाई से यह संदेश जाता है कि ड्रग तस्करी और आतंकवादी मॉड्यूल के खिलाफ राज्य और केंद्रीय एजेंसियां पूरी तत्परता और तकनीकी दक्षता के साथ काम कर रही हैं, ताकि पंजाब में सुरक्षा और शांति सुनिश्चित की जा सके।