भोपाल : मुकेश मल्होत्रा को मिली बड़ी राहत, विजयपुर से बने रहेंगे विधायक
भोपाल । सर्वोच्च न्यायालय से मध्य प्रदेश कांग्रेस और मुकेश मल्होत्रा के लिए अच्छी खबर आई है क्योंकि उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ द्वारा दिए गए फैसले पर सर्वोच्च न्यायालय ने स्थगन दे दिया है। इसके चलते मुकेश मल्होत्रा विजयपुर से विधायक बने रहेंगे। दरअसल, श्योपुर जिले के विजयपुर विधानसभा क्षेत्र में हुए उपचुनाव में कांग्रेस के मुकेश मल्होत्रा ने भाजपा उम्मीदवार रामनिवास रावत को पराजित किया था। रावत ने मल्होत्रा पर अपराधिक प्रकरण सहित अन्य जानकारी छुपाने का आरोप लगाते हुए उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ में याचिका दायर की थी, जिस पर न्यायालय ने मल्होत्रा के चुनाव को शून्य घोषित करते हुए रावत को विधायक घोषित किया था। उच्च न्यायालय ग्वालियर खंडपीठ के फैसले के खिलाफ कांग्रेस नेता मुकेश मल्होत्रा ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील की और उस पर गुरुवार को उन्हें स्थगन मिल गया है। इस तरह उनकी विधायकी बरकरार रहेगी, वहीं सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें राज्यसभा के चुनाव में मतदान करने का अधिकार नहीं दिया है, साथ ही उन्हें वेतन तथा भत्ते भी नहीं मिलेंगे। पिछले दिनों मल्होत्रा के खिलाफ ग्वालियर खंडपीठ में रामनिवास की ओर से लगाई गई याचिका में आरोप लगाया गया था कि दो तरह के प्रकरणों की जानकारी छुपाई गई, जबकि मल्होत्रा की ओर से कहा गया था कि मामले का निपटारा हो चुका है और दो प्रकरणों में ट्रायल कोर्ट से बरी हो गए थे।
भोपाल : मुकेश मल्होत्रा को मिली बड़ी राहत, विजयपुर से बने रहेंगे विधायक
रामनिवास रावत का आरोप था कि मुकेश मल्होत्रा के खिलाफ और भी मामले हैं, उनकी जानकारी छुपाई गई है। इस मामले में न्यायालय ने प्रकरण की जानकारी छुपाने को गलत प्रैक्टिस मानते हुए अपना फैसला सुनाया था। इस फैसले के बाद मल्होत्रा की ओर से अपील के लिए 15 दिन का समय मांगा गया था और यह समय उन्हें दिया गया था। उच्च न्यायालय की खंडपीठ के फैसले के खिलाफ मुकेश मल्होत्रा सर्वोच्च न्यायालय गए थे, जहां से उन्हें स्थगन मिल गया है। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सत्य और न्याय की जीत करार दिया है। उन्होंने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने विजयपुर विधानसभा सीट पर कांग्रेस के विधायक मुकेश मल्होत्रा की विधायकी को बरकरार रखा है। मैं शीर्ष अदालत का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। इस ऐतिहासिक निर्णय से भाजपा के सियासी षड्यंत्र फिर नाकाम हुए हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि लोकतंत्र और संविधान के अपमान का आदतन अपराध करने वाली भाजपा इस कानूनी सबक को हमेशा याद रखेगी।
अमृतसर में अवैध हथियार तस्करी मॉड्यूल का भंडाफोड़, 6 आरोपी पुलिस की गिरफ्त में
अमृतसर। पंजाब में कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस लगातार सक्रिय कार्रवाई कर रही है और इसी क्रम में अमृतसर से बड़ी सफलता की खबर सामने आई है। कमिश्नरेट पुलिस ने अवैध हथियार तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए छह लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है। आरोपी के कब्जे से कुल सात अत्याधुनिक पिस्टल बरामद की गई हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि यह गिरोह पुर्तगाल में बैठे एक विदेशी हैंडलर के संपर्क में था, जो पाकिस्तान के जरिए अवैध हथियारों को भारत में सप्लाई करवा रहा था।
पुलिस का मानना है कि यह कोई साधारण गिरोह नहीं है, बल्कि एक संगठित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले नेटवर्क का हिस्सा है। तस्करी की यह श्रृंखला सीमा पार के तत्वों से जुड़ी हुई थी और हथियारों का उद्देश्य अपराधियों तक पहुँचाना था, जिससे कानून-व्यवस्था और आम जनता की सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता था। अमृतसर के थाना कैंटोनमेंट में FIR दर्ज कर दी गई है और पुलिस इस पूरे नेटवर्क की तह तक जाने में जुटी हुई है। जांच अधिकारी बता रहे हैं कि गिरोह से जुड़े हर सदस्य तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है, ताकि पूरी चेन को तोड़ा जा सके और भविष्य में इस तरह की तस्करी को रोका जा सके।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पकड़े गए हथियार अत्याधुनिक तकनीक वाले हैं और इनका उपयोग आपराधिक गतिविधियों में किया जा सकता था। नाबालिग की गिरफ्तारी इस बात की पुष्टि करती है कि गिरोह युवा और असमझे लोगों को भी इस अवैध नेटवर्क में शामिल कर रहा था। अधिकारी यह भी मानते हैं कि इस नेटवर्क के तार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले हुए हैं, इसलिए इस मामले की जांच को प्राथमिकता दी जा रही है।
इससे पहले भी पंजाब पुलिस ने बठिंडा में बड़ी सफलता हासिल की थी। काउंटर इंटेलिजेंस टीम ने समय रहते एक संभावित आतंकी खतरे को नाकाम किया। इस कार्रवाई में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और उनके कब्जे से दो हैंड ग्रेनेड बरामद किए गए। शुरुआती जांच में पता चला कि ये ग्रेनेड भी एक अवैध सप्लाई चेन का हिस्सा थे, जिनका संबंध सीमा पार के आतंकवादी तत्वों से था। इनका मकसद पंजाब में शांति भंग करना और आम जनता की सुरक्षा को खतरे में डालना था।
पंजाब पुलिस ने स्पष्ट किया है कि राज्य में अवैध हथियार तस्करी, आतंकी गतिविधियों और संगठित अपराध के खिलाफ उसकी जीरो टॉलरेंस नीति जारी रहेगी। अधिकारी कहते हैं कि राज्य में शांति और सुरक्षा बनाए रखना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है, और इसके लिए हर जरूरी कदम उठाए जाएंगे। पुलिस ने यह भी बताया कि इस तरह की कार्रवाइयों से अपराधियों और तस्करों को यह संदेश जाता है कि उनकी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है और कोई भी कानून-व्यवस्था को चुनौती नहीं दे सकता।
अमृतसर में अवैध हथियार तस्करी मॉड्यूल का भंडाफोड़, 6 आरोपी पुलिस की गिरफ्त में
विशेषज्ञों का कहना है कि अमृतसर और बठिंडा में हुई कार्रवाई पंजाब पुलिस की सक्रियता और संगठित रणनीति का परिणाम है। यह दिखाता है कि पुलिस न केवल नियमित निगरानी कर रही है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय और सीमा पार की तस्करी नेटवर्क को भी खत्म करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है। इसके साथ ही, यह संदेश जाता है कि पंजाब में अपराधियों और आतंकियों के लिए कोई स्थान नहीं है।
अमृतसर मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस का प्रयास है कि नेटवर्क के अन्य सदस्य और विदेशी हैंडलर तक पहुंच बनाई जाए। अधिकारियों ने बताया कि पकड़े गए हथियारों की जांच के माध्यम से पता लगाया जा रहा है कि इन्हें किन अपराधों में इस्तेमाल किया जा चुका है या भविष्य में किस प्रकार की गतिविधियों में इस्तेमाल किया जा सकता था।
पुलिस ने यह भी कहा कि अवैध हथियार तस्करी के पीछे अंतरराष्ट्रीय स्तर की गिरोहें शामिल हैं, जो पाकिस्तान और अन्य देशों के माध्यम से भारत में हथियार भेजती हैं। ऐसे नेटवर्क को समाप्त करना और उसकी पूरी चेन को बेनकाब करना ही भविष्य में पंजाब और पूरे देश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की कुंजी है।
पंजाब पुलिस ने आम जनता से भी अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि या हथियार तस्करी की जानकारी तुरंत पुलिस को दें। पुलिस का मानना है कि सामुदायिक सहभागिता और जागरूकता के माध्यम से ही अवैध गतिविधियों को रोकने में सफलता हासिल की जा सकती है।
इन सफल कार्रवाइयों से यह स्पष्ट होता है कि पंजाब पुलिस न केवल स्थानीय अपराधों पर नजर रख रही है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय और सीमा पार की अपराध नेटवर्क को खत्म करने के लिए भी रणनीतिक रूप से काम कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि राज्य में शांति और सुरक्षा बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और किसी भी व्यक्ति या गिरोह को कानून के दायरे से बाहर नहीं जाने दिया जाएगा।
इस प्रकार अमृतसर और बठिंडा में हुई कार्रवाईयों ने पंजाब में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित किया है। यह पुलिस की तत्परता, निगरानी और संगठन क्षमता का परिचायक है। आने वाले समय में भी पंजाब पुलिस अपने जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अवैध हथियार तस्करी, आतंकी गतिविधियों और संगठित अपराध के खिलाफ सतत कार्रवाई जारी रखेगी। इससे राज्य में सुरक्षा और शांति सुनिश्चित होगी और आम जनता में कानून और व्यवस्था के प्रति विश्वास बढ़ेगा।
पुलिस अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया कि प्रत्येक गिरफ्तारी, तलाशी और छापेमारी न केवल अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई है, बल्कि यह समाज और युवाओं को नशे और हिंसा जैसी गतिविधियों से दूर रखने के लिए भी एक संदेश है। राज्य में सुरक्षा बनाए रखना और अपराधियों को कानून के दायरे में लाना पंजाब पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी बनी रहेगी।
श्रीनगर में इंटरनेशनल साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़, 7 आरोपी गिरफ्तार
श्रीनगर । श्रीनगर में एक बड़े हाईटेक इंटरनेशनल साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। सीआईके-सीआईडी को पहले ही कई भरोसेमंद और तकनीकी इनपुट मिले थे कि कुछ गुप्त कॉल सेंटर धोखाधड़ी वाली ऑनलाइन गतिविधियों में शामिल हैं। ये कॉल सेंटर विदेशी और स्थानीय लोगों को निशाना बनाकर उन्हें धोखा देने का काम कर रहे थे। इस जानकारी के मिलने के बाद सीआईके ने तुरंत एक खास टीम बनाई, जिसमें तकनीकी विशेषज्ञ और फील्ड ऑपरेटिव्स शामिल थे। टीम ने कई जगहों पर निगरानी रखी, डिजिटल इंटेलिजेंस इकट्ठा किया और सब कुछ वेरिफाई किया। काफी मेहनत और जांच के बाद टीम को श्रीनगर के रंगरेथ इंडस्ट्रियल एरिया में एक मुख्य ऑपरेशनल हब का पता चला। इसके बाद टीम ने शहर के अलग-अलग हिस्सों में तेज और समन्वित छापेमारी की। इस छापेमारी के दौरान सात संदिग्धों को पकड़ा गया और बड़ी मात्रा में डिजिटल उपकरण जब्त किए गए। जब्त किए गए सामान में 13 मोबाइल फोन, 9 लैपटॉप, वीओआईपी सिस्टम, सिम कार्ड, नेटवर्किंग डिवाइस और डिजिटल स्टोरेज मीडिया शामिल थे। इनमें से काफी सारे डिजिटल और कम्युनिकेशन उपकरण ऐसे थे जिनसे साफ पता चलता था कि यह एक अत्यंत संगठित और तकनीकी रूप से उन्नत आपराधिक नेटवर्क था। शुरुआती जांच में पता चला कि ये आरोपी एक बड़े और अच्छी तरह से तालमेल बिठाए हुए साइबर क्राइम सिंडिकेट का हिस्सा थे, जिसका नेटवर्क जम्मू-कश्मीर से बाहर भी फैला हुआ था। इस नेटवर्क का एक हिस्सा खास तौर पर विदेशी देशों में लोगों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया था। यूएसए, यूके और कनाडा के लोगों को निशाना बनाया जाता था। इसके लिए इंटरनेशनल कम्युनिकेशन मास्किंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होता था। साथ ही, पहचान चुराने, मनोवैज्ञानिक हेरफेर और आधुनिक डिजिटल और क्रिप्टोकरेंसी चैनलों के जरिए पैसे की हेराफेरी की जाती थी।
श्रीनगर में इंटरनेशनल साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़, 7 आरोपी गिरफ्तार
आरोपियों ने वीओआईपी आधारित सिस्टम के जरिए एक गुप्त और बिना रजिस्ट्रेशन वाला कॉल सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया था। इसके जरिए वे इंटरनेशनल वर्चुअल नंबर बनाते, सर्वर रूटिंग और स्पूफिंग तकनीक का इस्तेमाल करके अपनी असली लोकेशन छुपाते थे। अनजान पीड़ितों के सामने खुद को असली सर्विस प्रोवाइडर दिखाकर उन्हें धोखा दिया जाता था। नकली याहू मेल वेबसाइट और गूगल विज्ञापनों का इस्तेमाल करके लोग इस कॉल सेंटर तक पहुंचते थे। कई देशों में ऑनलाइन फिशिंग और कॉल ऑपरेशन के जरिए लोगों से संपर्क किया जाता था। जैसे ही कोई पीड़ित विज्ञापन पर क्लिक करता, उसकी स्क्रीन पर टोल-फ़्री नंबर दिखाई देता। यह नंबर संदिग्धों द्वारा संचालित होता और भोले-भाले लोगों को उनकी बैंकिंग और निजी जानकारी देने के लिए गुमराह किया जाता। इसके बाद पैसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किए जाते, जिनमें म्यूल अकाउंट और क्रिप्टो वॉलेट शामिल थे। पैसे को छिपाने के लिए इन्हें कई बार घुमाया, बदला और ट्रांसफर किया जाता ताकि असली स्रोत का पता न चले। पीड़ितों को यह यकीन दिलाया जाता कि उनके बैंक या डिवाइस कमप्रोमाइज हो गए हैं और उन्हें तकनीकी सहायता के लिए पैसे देने होंगे। धोखाधड़ी से कमाए गए पैसे फिर डिजिटल वॉलेट, बैंकिंग चैनल और क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिए घुमाए जाते। कई बार इन्हें यूएसडीटी और अन्य क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर ट्रैकिंग मुश्किल बनाई जाती। खास बात यह है कि इस पूरे ऑपरेशन में नकद लेन-देन शामिल नहीं था, जिससे यह पूरी तरह डिजिटल और आधुनिक साइबर फ्रॉड बन गया। अब तक किए गए लेन-देन कई करोड़ रुपये के होने का अनुमान है। कानून के तहत एफआईआर दर्ज की जा रही है, जिसमें धोखाधड़ी, आपराधिक साज़िश और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराएं शामिल हैं। इसके अलावा, संदिग्धों को पकड़ने के लिए आगे भी छापेमारी की जा रही है। जब्त किए गए उपकरणों का फोरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है। पीड़ितों की पहचान और पैसों के लेन-देन का पता लगाने की कोशिशें जारी हैं। पूरे नेटवर्क की जांच राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर की जा रही है।
द्वारका में शराब की तस्करी कर रहे युवक को पुलिस ने किया गिरफ्तार
नई दिल्ली। “नशे पर लगाम, देश को सलाम” अभियान के तहत दिल्ली पुलिस लगातार नशीले पदार्थों और अवैध शराब की तस्करी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रही है। इस अभियान का उद्देश्य न केवल नशे के खिलाफ सख्त संदेश देना है, बल्कि युवाओं और समाज को रचनात्मक गतिविधियों में संलग्न कर सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करना भी है। द्वारका के डीसीपी कुशलपाल सिंह ने विशेष निर्देश दिए हैं कि पुलिस टीम नशीले पदार्थों और अवैध शराब की हरकतों पर कड़ी नजर रखे और सक्रिय रूप से कार्रवाई करे।
इसी दिशा में द्वारका एएटीएस की टीम ने अंतरराज्यीय अवैध शराब तस्करी को रोकने में बड़ी सफलता हासिल की है। विशिष्ट सूचना और तकनीकी निगरानी के आधार पर टीम ने दिल्ली के यूटीआर-2 क्षेत्र में साईं मंदिर से श्याम विहार रोड की ओर जा रही एक बोलेरो पिकअप को देखा। जब टीम ने वाहन को रोकने का इशारा किया, तो चालक ने भागने का प्रयास किया। लेकिन टीम ने तुरंत घेराबंदी कर पिकअप चालक को पकड़ लिया।
पकड़े गए चालक की पहचान मोहम्मद नौशाद (22) के रूप में हुई। वाहन की तलाशी लेने पर पुलिस ने हरियाणा में बिक्री के लिए लेबल की गई अवैध शराब के 2500 क्वार्टर से भरे 50 कार्टन बरामद किए। यह शराब दिल्ली में अवैध रूप से सप्लाई की जा रही थी। पुलिस ने न केवल अवैध शराब बरामद की, बल्कि बोलेरो पिकअप वाहन को भी जब्त कर लिया। इस मामले में पुलिस स्टेशन नजफगढ़ में मामला दर्ज किया गया है और आरोपी को कानूनी कार्रवाई के लिए हिरासत में लिया गया।
डीसीपी कुशलपाल सिंह ने बताया कि इस अभियान के माध्यम से पुलिस का उद्देश्य न केवल अवैध शराब की तस्करी रोकना है, बल्कि युवाओं को नशे से दूर रखते हुए उन्हें समाज के रचनात्मक कार्यों में संलग्न करना भी है। उन्होंने कहा कि यह अभियान द्वारका, दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में नशे के खिलाफ व्यापक प्रभाव डालने के लिए संचालित किया जा रहा है।
विशेष रूप से, इस कार्रवाई के एक दिन पहले 18 मार्च को दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा के दादरी क्षेत्र में आबकारी विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने एक अवैध शराब से भरे ट्रक को पकड़ने में सफलता हासिल की थी। यह कार्रवाई लुहारली टोल प्लाजा पर चेकिंग के दौरान की गई। जांच के दौरान ट्रक में भारी मात्रा में शराब बरामद हुई, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 50 लाख रुपए बताई जा रही है। यह साबित करता है कि न केवल दिल्ली में, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी अवैध शराब की तस्करी बड़े पैमाने पर हो रही है और पुलिस इसे रोकने में सतत कार्रवाई कर रही है।
द्वारका में शराब की तस्करी कर रहे युवक को पुलिस ने किया गिरफ्तार
एएटीएस और आबकारी विभाग की संयुक्त कार्रवाई ने यह भी स्पष्ट किया कि नशे के खिलाफ अभियान केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापक सामाजिक जागरूकता फैलाने का भी जरिया है। पुलिस टीम ने बताया कि इस तरह की कार्रवाइयां न केवल अपराधियों को कानूनी कार्रवाई के डर से रोकती हैं, बल्कि युवाओं और समाज में यह संदेश भी देती हैं कि नशा और अवैध गतिविधियों का परिणाम गंभीर होता है।
डीसीपी कुशलपाल सिंह ने कहा कि यह अभियान लगातार जारी रहेगा और नशे के खिलाफ प्रभावी रणनीति के तहत विभिन्न इलाकों में निगरानी, छापेमारी और जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि पुलिस तकनीकी निगरानी, खुफिया जानकारी और जनता की मदद से अवैध शराब और नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। इसके अलावा, अभियान के माध्यम से यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि युवाओं को नशे की आदत से बचाकर उन्हें समाज में सकारात्मक योगदान देने के लिए प्रेरित किया जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाईयों से न केवल अवैध व्यापारियों में डर पैदा होता है, बल्कि स्थानीय समाज में भी सुरक्षा और कानूनी व्यवस्था के प्रति विश्वास बढ़ता है। पुलिस की सतत निगरानी और कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश जाता है कि नशा और अवैध शराब पर किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं होगा।
इस अभियान की सफलता में एएटीएस टीम की सतर्कता और योजना का बड़ा योगदान रहा। मोहम्मद नौशाद जैसी अंतरराज्यीय तस्करी करने वाली गैंगों को पकड़ना न केवल अवैध गतिविधियों को रोकने में सहायक है, बल्कि यह समाज में कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण कदम भी साबित होता है।
इस तरह, दिल्ली पुलिस का “नशे पर लगाम, देश को सलाम” अभियान लगातार नशे और अवैध शराब की तस्करी पर अंकुश लगाने में सफल रहा है। द्वारका एएटीएस की कार्रवाई और ग्रेटर नोएडा के दादरी क्षेत्र में आबकारी विभाग की संयुक्त छापेमारी ने यह संदेश दिया है कि नशे के खिलाफ कानूनी और प्रशासनिक कदम लगातार और प्रभावी रूप से उठाए जा रहे हैं। इससे युवाओं और समाज में नशे से दूर रहने की चेतना पैदा होगी और अवैध व्यापारियों के लिए यह चेतावनी भी है कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ कार्रवाई तत्काल की जाएगी।
इस अभियान के तहत आने वाले समय में भी दिल्ली पुलिस और आबकारी विभाग संयुक्त रूप से कार्रवाई जारी रखेंगे और नशे के खतरों से समाज को सुरक्षित रखने के लिए सतत प्रयास करेंगे। इस प्रकार यह अभियान समाज में नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने और अपराधियों को कानून के दायरे में लाने में निर्णायक साबित हो रहा है।
दिल्ली : सीलमपुर पुलिस ने लूट में फरार आरोपी को किया गिरफ्तार, पहले से चार केस दर्ज
नई दिल्ली में सीलमपुर पुलिस को एक गंभीर लूट और मारपीट के मामले में बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने आरोपी शिवम (22), निवासी सीलमपुर, को गिरफ्तार किया है, जो पहले भी लूट और चोरी सहित चार आपराधिक मामलों में शामिल रह चुका था। आरोपी बार-बार अपनी जगह बदलकर गिरफ्तारी से बचता रहा, लेकिन ईआर-II, क्राइम ब्रांच की टीम ने उसे पकड़ने में सफलता हासिल की।
यह मामला 28 मई 2024 का है, जब शिकायतकर्ता सोनू अपने वाहन को सीलमपुर मेट्रो कार पार्किंग में खड़ा करके घर लौट रहा था। इसी दौरान शिवम और उसके साथी ने उस पर हमला किया और मोबाइल व कैश छीनकर फरार हो गए। शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई और दोनों आरोपियों को बाद में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया। शिवम को जमानत मिली, लेकिन उसने कोर्ट में जानबूझकर हाजिरी नहीं दी और अपने पते को छुपाया।
जांच में पता चला कि शिवम गांधी नगर इलाके में गुप्त रूप से रह रहा था। इस प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर की गिरफ्तारी के लिए इंस्पेक्टर उमेश सती के नेतृत्व में एसआई ब्रहंपाल, एएसआई संजय सिंह और एचसी भूपेंद्र की टीम गठित की गई। एसीपी/ईआर-II क्राइम ब्रांच श्री नरेंद्र सिंह के निर्देशन और वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में टीम ने पूरी रणनीति बनाकर कार्रवाई की।
दिल्ली : सीलमपुर पुलिस ने लूट में फरार आरोपी को किया गिरफ्तार, पहले से चार केस दर्ज
एएसआई संजय सिंह को सूचना मिली कि शिवम अजित नगर, गांधी नगर में रह रहा है। टीम ने इलाके में पूछताछ की और स्थानीय निवासियों से जानकारी जुटाई। ई-कोर्ट और आईसीजेएस पोर्टल की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पहले आर्म्स एक्ट केस में प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर घोषित किया गया था।
18 मार्च 2026 को टीम ने अजित नगर, गांधी नगर में तैनाती की। सूचना मिलने पर तुरंत कार्रवाई करते हुए एक जाल बिछाया गया और सतर्कता के साथ अभियुक्त को पकड़ने में सफलता मिली। शिवम को गिरफ्तार कर न्यायिक प्रक्रिया के तहत हिरासत में भेज दिया गया है।
इस गिरफ्तारी से इलाके में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ा है। पुलिस ने इस मामले में स्पष्ट किया कि अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी रहेगी और किसी को भी कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
यह सफलता सीलमपुर पुलिस और ईआर-II क्राइम ब्रांच की संगठित जांच और सतर्कता का परिणाम है, जिसने बार-बार पकड़ से बचने वाले आरोपी को पकड़कर न्यायिक प्रक्रिया के तहत पेश किया।
CTH विवाद गरमायाः कांग्रेसी नेता टीकाराम जूली बोले, इसमें करोड़ों का घोटाला, सरकार जवाब दे
खास खबर। अलवर क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (CTH) के मुद्दे को लेकर बुधवार को जिला कलेक्टर कार्यालय में हुई एक बैठक में माहौल बेहद गरमाया रहा। बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे और अपनी जमीन, आजीविका और भविष्य को लेकर गहरी चिंता जाहिर की। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने प्रशासन व सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। मीडिया से बातचीत करते हुए टीकाराम जूली ने कहाकि CTH के नाम पर सरकार और प्रशासन जनता को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में करोड़ों रुपए का घोटाला हुआ है, लेकिन इसका जवाब किसी के पास नहीं है। जूली ने सवाल उठाया कि क्या अधिकारी इस मामले में मिले हुए हैं या फिर किसी दबाव में काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अलवर जिले से दो मंत्री होने के बावजूद इस गंभीर मुद्दे पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा रहा है, जो सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
CTH विवाद गरमायाः कांग्रेसी नेता टीकाराम जूली बोले, इसमें करोड़ों का घोटाला, सरकार जवाब दे
जूली ने साफ शब्दों में कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगी और जरूरत पड़ी तो इस लड़ाई को अदालत तक लेकर जाया जाएगा। ग्रामीणों की चिंता का जिक्र करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि CTH लागू होने से किसानों की जमीन छिनने का खतरा मंडरा रहा है। अधिकारियों द्वारा माइनिंग (खनन) कार्य की बात कही जा रही है, जिससे न केवल किसानों की जमीन प्रभावित होगी, बल्कि उनके जीवन-यापन के साधन भी खत्म हो जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की जमीन हड़पने की साजिश रची जा रही है। जूली ने सरिस्का क्षेत्र के विकास पर जोर देते हुए कहा कि सरिस्का टाइगर रिजर्व अलवर की पहचान है और यहां का संतुलित विकास जरूरी है। यदि सरिस्का खत्म होता है तो हजारों लोगों का रोजगार भी समाप्त हो जाएगा, जिससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरिस्का और अलवर के समग्र विकास के पक्ष में है, लेकिन विकास के नाम पर किसानों और ग्रामीणों के हितों की अनदेखी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक के बाद यह स्पष्ट हो गया कि CTH का मुद्दा अब तूल पकड़ चुका है और आने वाले दिनों में यह बड़ा राजनीतिक व सामाजिक आंदोलन बन सकता है।
मीरवाइज उमर फारूक ने लगाया नजरबंद करने का आरोप, ईरान के अली लारिजानी की मौत पर इजरायल की कड़ी आलोचना
श्रीनगर । कश्मीर घाटी के एक प्रमुख धार्मिक और राजनीतिक नेता मीरवाइज उमर फारूक ने जम्मू-कश्मीर पुलिस पर ‘नजरबंद’ करने का आरोप लगाया है। उन्होंने हमलों में ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारिजानी की मौत के बाद इजरायल की भी कड़ी आलोचना की।
मीरवाइज उमर फारूक ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘इजराइल जैसे दुष्ट देश की ओर से सेक्रेटरी अली लारीजानी की लक्षित हत्या की हम कड़ी निंदा करते हैं। ईरान के लोगों और उनके नेतृत्व का अदम्य साहस एक सच्चे मुस्लिम राष्ट्र की भावना को दर्शाता है। उन्होंने आगे लिखा, “यह साहसी, दृढ़ और अल्लाह में अटूट विश्वास रखने वाला है। ऐसे लोग ही नेतृत्व करने के हकदार हैं। जैसा कि कुरान हमें याद दिलाती है, ‘और अंत में जीत नेक लोगों की ही होती है।’ मीरवाइज उमर फारूक ने दूसरे मुस्लिम देशों पर भी निशाना साधा।
मीरवाइज उमर फारूक ने लगाया नजरबंद करने का आरोप, ईरान के अली लारिजानी की मौत पर इजरायल की कड़ी आलोचना
उन्होंने कहा, “दूसरी ओर, मुस्लिम जगत के अन्य नेताओं ने खुद को सिर्फ कठपुतलियों के रूप में ही उजागर किया है, जिनमें न तो साहस है और न ही कोई दृढ़ विश्वास।” इसी बीच, उन्होंने पोस्ट में लिखा, “इस ‘पुलिस राज’ के डरपोक शासकों ने एक बार फिर जबरदस्ती मुझे रमजान के पवित्र महीने में अल्लाह के घर (मस्जिद) से दूर रखा है, जबकि आज मुझे करण नगर की गोल मस्जिद में एक उपदेश देना था। यह कितनी शर्म की बात है।” इससे पहले, मीरवाइज उमर फारूक को शुक्रवार को श्रीनगर स्थित जामा मस्जिद में नमाज से रोके जाने आरोप लगाए थे। मीरवाइज ने इस स्थिति की तुलना इजराइल की ओर से रमजान के दौरान मस्जिद अल-अक्सा के दरवाजे बंद करने जैसी कठोर कार्रवाई से की। उन्होंने लिखा कि जिस तरह इजराइल ने रमजान के दौरान मस्जिद अल-अक्सा के दरवाजे जबरदस्ती बंद कर दिए, वैसे ही एक हकीकत यहां भी देखने को मिल रही है।
रिटायर्ड अधिकारी से 1.05 करोड़ रुपए की ठगी, साइबर अपराधियों ने 10 दिन तक करके रखा डिजिटल अरेस्ट
मुंबई । मुंबई के दादर इलाके में एक बुजुर्ग नागरिक को 10 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट करके उससे 1.05 करोड़ रुपए की ठगी किए जाने का मामला सामने आया है। सेवानिवृत्त अधिकारी श्रेयष परलकर (71) से ठगों ने खुद को सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर सुनियोजित तरीके से मानसिक दबाव और डर का माहौल बनाकर इस ठगी को अंजाम दिया।
पीड़ित के अनुसार, 4 मार्च को उन्हें एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को ट्राई के दिल्ली मुख्यालय का अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि पीड़ित के आधार कार्ड का इस्तेमाल कर एक नया मोबाइल नंबर जारी किया गया है, जिसका इस्तेमाल अवैध मैसेज और उत्पीड़न के लिए किया जा रहा है। इसके बाद कॉल को कथित तौर पर फर्जी सीबीआई अधिकारियों के पास ट्रांसफर कर दिया गया। अलग-अलग लोगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने और गिरफ्तारी की धमकी दी। ठगों ने भरोसा जीतने के लिए फर्जी कोर्ट ऑर्डर, अरेस्ट वारंट और सरकारी लेटरहेड तक व्हाट्सऐप पर भेजे।
रिटायर्ड अधिकारी से 1.05 करोड़ रुपए की ठगी, साइबर अपराधियों ने 10 दिन तक करके रखा डिजिटल अरेस्ट
ठगों ने पीड़ित को यह कहकर डिजिटल अरेस्ट में रखा कि वह जांच के दायरे में हैं और कहीं बाहर संपर्क नहीं कर सकते। उन्हें एक मैसेजिंग ऐप डाउनलोड कराकर हर दो घंटे में ‘मैं सुरक्षित हूं’ जैसी रिपोर्ट भेजने को कहा जाता था। इस दौरान उन्हें बार-बार डराया गया और सहयोग न करने पर गिरफ्तारी की धमकी दी गई। ठगों ने पीड़ित से उनकी बैंक डिटेल, निवेश और बचत की पूरी जानकारी हासिल कर ली। इसके बाद फंड वेरिफिकेशन के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया। 6 मार्च से 12 मार्च के बीच पीड़ित ने चार अलग-अलग ट्रांजेक्शन में कुल 1.05 करोड़ रुपए ट्रांसफर कर दिए। 15 मार्च को पीड़ित के बेटे ने उनका मोबाइल चेक किया, तब पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। इसके बाद तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई गई। फिलहाल पुलिस ने अज्ञात आरोपियों और संबंधित बैंक खाताधारकों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
ग्रेटर नोएडा में आबकारी विभाग का बड़ा एक्शन, 50 लाख की अवैध शराब से भरा ट्रक पकड़ा
ग्रेटर नोएडा । ग्रेटर नोएडा के दादरी क्षेत्र में आबकारी विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध शराब से भरे एक ट्रक को पकड़ा है। यह कार्रवाई लुहारली टोल प्लाजा पर चेकिंग के दौरान की गई, जहां संदिग्ध गतिविधि के चलते ट्रक को रोका गया और तलाशी ली गई।
जांच के दौरान ट्रक के अंदर भारी मात्रा में शराब बरामद हुई, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 50 लाख रुपये बताई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, यह शराब पंजाब से किसी अन्य राज्य में अवैध रूप से ले जाई जा रही थी। तस्करों ने पुलिस और आबकारी विभाग की नजर से बचने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाया था। ट्रक में शराब की पेटियों को थर्माकोल की आड़ में छिपाकर रखा गया था, ताकि सामान्य जांच में यह सामान नजर न आए। लेकिन टीम की सतर्कता और सघन चेकिंग के चलते इस पूरे मामले का खुलासा हो गया।
ग्रेटर नोएडा में आबकारी विभाग का बड़ा एक्शन, 50 लाख की अवैध शराब से भरा ट्रक पकड़ा
बरामद शराब में अंग्रेजी ब्रांड की बोतलों के साथ-साथ बड़ी मात्रा में बियर भी शामिल है। प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि शराब की यह खेप बिना वैध दस्तावेजों के दूसरे राज्य में सप्लाई के लिए भेजी जा रही थी, जिससे सरकार को भारी राजस्व का नुकसान हो सकता था। हालांकि, कार्रवाई के दौरान ट्रक चालक मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश में पुलिस की टीमें जुट गई हैं। वाहन को कब्जे में लेकर थाना दादरी क्षेत्र में मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच की जा रही है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है, जिससे आरोपी चालक और इस तस्करी गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचा जा सके। आबकारी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अवैध शराब की तस्करी पर रोक लगाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इस तरह की कार्रवाइयों से न सिर्फ तस्करों पर नकेल कसी जा रही है, बल्कि अवैध कारोबार को भी बड़ा झटका दिया जा रहा है। अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में भी इसी तरह सख्ती जारी रहेगी और किसी भी तरह की अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
दिल्ली में फर्जी पुलिस बनकर साइबर ठगी करने वाले गैंग का भंडाफोड़, तीन गिरफ्तार
नई दिल्ली । बाहरी दिल्ली क्षेत्र की साइबर पुलिस ने एक बड़े ‘डिजिटल अरेस्ट’ इम्पर्सोनेशन साइबर फ्रॉड का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस पूरे मामले में एक व्यक्ति से करीब 14.20 लाख रुपये की ठगी की गई जबकि ठगी के लिए जिस बैंक खाते का इस्तेमाल हुआ उसमें कुल लेनदेन करीब 2.20 करोड़ रुपए है।
21 फरवरी को पश्चिम विहार निवासी सत्यपाल गुप्ता ने पुलिस में शिकायत दी कि उन्हें एक अनजान नंबर से व्हाट्सऐप कॉल आया था। कॉल करने वाले ने खुद को एक सीनियर पुलिस अधिकारी बताया और कहा कि उनके बैंक खाते मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल हैं और जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस तरह की बातों से शिकायतकर्ता बुरी तरह डर गए और घबराहट में आकर उन्होंने आरोपी द्वारा बताए गए बैंक खाते में 14 लाख 20 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए। बाद में जब उन्हें एहसास हुआ कि उनके साथ ठगी हुई है, तो उन्होंने तुरंत पुलिस से संपर्क किया। शिकायत के आधार पर साइबर थाने में मामला दर्ज किया गया और एक स्पेशल टीम बनाई गई। इस टीम में एसआई राहुल, हेड कांस्टेबल विजय, हेड कांस्टेबल अजय चिल्लर और कांस्टेबल संजय शामिल थे, जिनका नेतृत्व इंस्पेक्टर गजे सिंह कर रहे थे। पूरी कार्रवाई एसीपी वीरेंद्र दलाल की निगरानी में की गई।
दिल्ली में फर्जी पुलिस बनकर साइबर ठगी करने वाले गैंग का भंडाफोड़, तीन गिरफ्तार
जांच के दौरान पुलिस ने जिस बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर हुए थे, उसकी जानकारी निकाली। यह खाता आईसीआईसीआई बैंक में ‘रेनुदर सर्विसेज एंड सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड’ के नाम से खुला हुआ था। जब इस खाते से जुड़े मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी की जांच की गई, तो कई अहम सुराग मिले। इसके बाद 9 मार्च को पुलिस ने इस कंपनी के डायरेक्टर और खाते के धारक सशिंदर राम को कश्मीरी गेट आईएसबीटी से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पता चला कि वह जानबूझकर अपना बैंक खाता साइबर फ्रॉड के लिए इस्तेमाल करने दे रहा था और इसके बदले कमीशन लेता था। आगे की पूछताछ में उसने अपने साथियों के बारे में भी खुलासा किया, जिसके बाद पुलिस ने तकनीकी निगरानी और खुफिया जानकारी के आधार पर दो और आरोपियों मोहम्मद कैफ और मोनिश को उत्तर प्रदेश के कैराना और सहारनपुर से गिरफ्तार किया। ये दोनों आरोपी अलग-अलग बैंकों, खासकर कोटक महिंद्रा बैंक में फर्जी या संदिग्ध खाते खुलवाने का काम करते थे, जिनका इस्तेमाल ऐसे ही साइबर फ्रॉड में किया जाता था। पुलिस ने इनके पास से तीन एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनमें व्हाट्सऐप चैट्स जैसे अहम सबूत मिले हैं। इन चैट्स से साफ हो गया कि ये लोग एक संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क का हिस्सा हैं। फिलहाल पुलिस इस गिरोह के बाकी सदस्यों की तलाश में जुटी हुई है और जांच लगातार जारी है। पुलिस ने इस मामले के बाद आम लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है। अधिकारियों ने बताया कि किसी भी अनजान कॉल, लिंक या मैसेज पर भरोसा न करें, खासकर अगर कोई खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताकर डराने की कोशिश करे। कभी भी ओटीपी, बैंक डिटेल्स या पर्सनल जानकारी शेयर न करें। अगर किसी को साइबर फ्रॉड का शक हो, तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें, नजदीकी थाने में जाएं या ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें ताकि समय रहते नुकसान को रोका जा सके।